लेकिन ऎसा भी नहीं होता कि प्रेम बिलकुल नजर ही न आएं, व्यवहार में बदलाव आपके बीच दूरियां बढ़ने का तीसरा संकेत है। क्या आपके साथी का अब आपकी बातों पर ध्यान नहीं जाता। गंभीर बातों को सुनकर भी अनसुना कर देते हैं। आपकी बातों का जवाब झुंझुलाकर देतें हैं। बेवजह गुस्सा करना, सारे लक्षण उनके व्यवहार में नजर आ रहे हैं तो आप समझ लें कि ये खतरे की घंटी है।
यदि आपका साथी आपके साथ अंतरंग पल नहीं बिताना चाहती तो समझे कि दूरियां बढ़ रही हैं। बेहद कठिनाई से बाहर जाने के बने कार्यक्रम में देखती हैं कि वहां केवल आप दोनों ही नहीं, कुछ और भी परिचित हैं जिनके बारे में आपको पता भी नहीं था। आपके साथी का उपेक्षापूर्ण व्यवहार दूसरों को यह जता रहा है कि आपके संबंधो में क़डवाहट आ रही है। यह स्थिति कष्टपूर्ण है। ऎसी स्थिति आपके रिश्ते के लिए खतरे की घंटी है।
यदि आपको ऎसा महसूस हो रहा है कि आपका साथी दिन-प्रतिदिन कुछ बदल रहा है। यदि आपका साथी अपने व्यक्तित्व को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो रही है। यदि नित नए और फैशनेबल परिधानों की ओर उनका ध्यान जा रहा है। अचानक आए इन बदलावों से जान ले कि आपके साथी के जीवन में कुछ नया और रोमांचक चल रहा है। हो सकता है कि आपकी जगह कोई और लेने की कोशिश कर रहा है।अजय सोचने लगा की उसकी प्रेमिका तो उस पर भरोसा करने के लिए तैयार है . हाँ उसकी माँ जरूर गैरों जैसा व्यवहार कर रही है .अजय के एक दोस्त ने उसे समझाया था की एक्सपेक्टेशंस का मैच न हो पाना भी इसकी एक वजह है। दोनो पार्टनर एक दूसरे से एक्सपेक्टेशंस रखते हैं। जब इनकी एक्सपेटेशंस एक दूसरे से मैच नहीं होती तो प्यार की जगह तनाव ले लेता है। मनोचिकित्सकों का भी मानना है की वैवाहिक संबंघो में दरार आने का मुख्य कारण दो लोगो के बीच की एक्सपेटेशंस का मैच न हो पाना है। हम एकदूसरे से अपेक्षा तो करते हैं पर उस की अपेक्षा पूरी करने की कोशिश नहीं करते।
4. बिगडते संबंघो का एक कारण कम्यूनिकेशन गैप भी है। अपने दिल की बात मन में ही रखते हैं, साथी से खुलकर बातचीत नहीं करते ,जिस की वजह से छोटी-छोटी बात पर गलतफैहमियां पैदा होने लगती हैं।
समझें प्यार को - यह जानना जरूरी है कि वास्तव में आप प्यार को क्या समझते हैं। प्यार में दर्द, समझौता और त्याग भी होता है। जो प्यार करते हैं उन्हे प्यार के हर पहलू से खुद को जोडना होता है। जिंदगी उतारचढाव का नाम है, जिस में खुशी और गम एकसाथ होते हैं। अत: कठिन समय में एकदूसरे का साथ देने का प्रयास करते रहना चाहिए।
जरूरी है शेयरिंग - आपसी तकरार से बचने के लिए जरूरी है कि एकदूसरे की भावनाओं को समझें,अपनी समस्याओं तथा खुशियों के बारे में एकदूसरे को बताएं। शेयरिंग से आपसी संबंघ मजबूत बनते हैं। अच्छे बुरे अनुभवों को एकदूसरे से बांटने से बीच की दूरी समाप्त हो जाती हैं।
स्वय को दूसरे की जगह रखे - पतिपत्नी दोनो एकदूसरे के समकक्ष हैं। यदि किसी कारणवश आपके साथी का मूड खराब है तो तकरार करने के बजाय चुप रहने की कोशिश करें। अकसर ऎसा होता है कि पतिपत्नी दोनों की ही बातें सही होती हैं पर वे एकदूसरे को अपनी जगह रख कर नहीं सोच पाते। अगर वे खुद को दूसरे की जगह रख के सोचे तो समस्या स्वत: ही \
सुलझ जाएगी।
और समझदारी से इस स्थिति से बचा जा सकता है। इस का एक उपाय यही है कि समझौते के लिए तैयार रहें। प्रेमी और प्रेमिका दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब आप आपस में अपनी समस्याएं और प्यार शेयर करते हैं तो झुकने में हिचकिचाहट कैसी ? जितना आप झुकेगें उतना ही हरदम जीतेगें। एक्सपेक्टेशंस का मैच न हो पाना भी इसकी एक वजह है। दोनो पार्टनर एक दूसरे से एक्सपेक्टेशंस रखते हैं। जब इनकी एक्सपेटेशंस एक दूसरे से मैच नहीं होती तो प्यार की जगह तनाव ले लेता है। मनोचिकित्सकों का भी मानना है की प्यार में दरार आने का मुख्य कारण दो लोगो के बीच की एक्सपेटेशंस का मैच न हो पाना है। हम एकदूसरे से अपेक्षा तो करते हैं पर उस की अपेक्षा पूरी करने की कोशिश नहीं करते।
अपने दिल की बात मन में ही रखते हैं, साथी से खुलकर बातचीत नहीं करते ,जिस की वजह से छोटी-छोटी बात पर गलतफैहमियां पैदा होने लगती हैं। जानना जरूरी है कि वास्तव में आप प्यार को क्या समझते हैं। प्यार में दर्द, समझौता और त्याग भी होता है। जो प्यार करते हैं उन्हे प्यार के हर पहलू से खुद को जोडना होता है। जिंदगी उतारचढाव का नाम है, जिस में खुशी और गम एकसाथ होते हैं। अत: कठिन समय में एकदूसरे का साथ देने का प्रयास करते रहना चाहिए।
आपसी तकरार से बचने के लिए जरूरी है कि एकदूसरे की भावनाओं को समझें,अपनी समस्याओं तथा खुशियों के बारे में एकदूसरे को बताएं। शेयरिंग से आपसी संबंघ मजबूत बनते हैं। अच्छे बुरे अनुभवों को एकदूसरे से बांटने से बीच की दूरी समाप्त हो जाती हैं।
प्रेमी और प्रेमिका दोनो एकदूसरे के समकक्ष हैं। यदि किसी कारणवश आपके साथी का मूड खराब है तो तकरार करने के बजाय चुप रहने की कोशिश करें। अकसर ऎसा होता है कि प्रेमी और प्रेमिका दोनों की ही बातें सही होती हैं पर वे एकदूसरे को अपनी जगह रख कर नहीं सोच पाते। अगर वे खुद को दूसरे की जगह रख के सोचे तो समस्या स्वत: ही सुलझ जाएगी। शुरूआत में आकष्ण की वजह से प्रेमी -प्रेमिका परस्पर झगडों पर घ्यान नहीं देते पर घीरे-घीरे झगडना एक रूटीन हो जाता है। घैर्य और समझदारी से इस स्थिति से बचा जा सकता है। इस का एक उपाय यही है कि समझौते के लिए तैयार रहें। प्रेमी -प्रेमिका दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हम आपस में अपनी समस्याएं और प्यार शेयर करते हैं तो झुकने में हिचकिचाहट कैसी ? हम आप झुकेगें उतना ही हरदम जीतेगें।
Friday, April 9, 2010
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