Sunday, April 18, 2010

bhaag-68

लोग उसकी वाक् पटुता के भी कायल थे , मगर अजय तो जैसे पत्थर हो चूका था. उस किसी बात का कोई असर ही नहीं था . वह उसकी तरफ रस भरी , आश भरी निगाहों से देखती लेकिन कोई फायदा नहीं होता. उसे अजय की आँखों से उदासी दिखाई देती, यह बेहद पीडाजनक बात थी, उसने कहा भी-
- आपको कोई गम तो नहीं है अजय बाबू, कुछ परेशान दिखाई देते हो ? मैंने सुना है की किसीसे अपना गम कह देने भर से ही दिल हल्का हो जाता है , हो सकता है की आपको भी इससे कुछ राहत मिले. मुझे कहदो . मैं हर संभव प्रयास करुँगी की आपकी समस्या का समाधान हो सके. मुझ पर यकीं किया जा सकता है. मुझे अपनी दोस्त समझो, यहाँ आपके और मेरे सिवाय कोई तीसरा मौजूद नहीं है . मैं हमराज बनी रहूंगी.बुरा ना मानो तो कहूँ की यहाँ प्यार का लफडा नजर आता है . और मरी कुछ सहेलियों या जान पहचान वालों की प्रतिक्रिया आपको सुनाती हूँ. यह सही है पर यह प्यार एक विशेष उम्र का तोहफा होता है जिसका एहसास आपको हमेशा अच्छा लगता है। इलेवन्थ-ट्वेल्थ के आसपास की वह उम्र होती है जब आपको कोई जुनून की हद तक अच्छा लगने लगता है। इस उम्र में सही-गलत का ज्यादा ज्ञान तो होता नहीं...।'

संजोगिता हँसते हुए कहती हैं-' प्यार एक एहसास है और दुनिया में कुछ अगर हमेशा रहने वाला है तो यही है। मैं दुनिया में फियर और लव को ही यूनिवर्सल ट्रूथ मानती हूँ। इसमें भी प्यार ही ऐसा है जो हमेशा हमारे साथ रहता है। यह हमारी पर्सनेलिटी से जुड़ा है।'

प्यार एक से होता है या अधिक से, पूछने पर चारू हँसते हुए कहती हैं कि एक समय में तो एक से ही होता है! प्यार तो वैसे हम जिससे भी बात करते हैं, मिलते हैं, सभी से रहता है। हाँ, कोई खास एक ही होता है जिसके लिए हमारे मन में 'एक्सट्रा इमोशन्स' रहते हैं।

क्या प्यार साल-दर-साल चल सकता है, इस प्रश्न पर शुभ्रा का कहना है कि यदि हम दूर-दूर रहें तो यह संभव हो सकता है। तो क्या पास में रहने में प्यार कम हो जाता है, इस पर जरा दार्शनिक होकर कहती हैं-'यह समझ के ऊपर है। प्यार बहुत बड़ी चीज है। जब हमें किसी से ज्यादा प्यार हो जाता है तो वाकई उसमें रब दिखता है। उसे हम देखते नहीं, उसका सजदा करते हैं।

जब वह हमारे सामने खुलता है, उसकी कमजोरियाँ हमारे सामने आती हैं, उन कमजोरियों के साथ भी उसी नजर से उसे देखते रहें यह थोड़ा मुश्किल है। हम उसे बदलने की कोशिश करते हैं। इस पर वह खीजता है। लड़ाई-झगड़े शुरू हो जाते हैं। हम किसी को उसके गुण-दोषों के साथ स्वीकार करें, तभी प्यार साथ में रहने पर बढ़ सकता है।

इस साल ट्वेल्थ की परीक्षा दे रहीं कृतिका यादव को फिलहाल तो डॉक्टरी के एंट्रेंस एक्जाम में सफलता पाने और बोर्ड एक्जाम में अच्छे मार्क्स लाने के अलावा दूर-दूर तक कोई और बात नहीं सूझती। सुबह सात से दोपहर दो तक स्कूल, फिर दोपहर तीन से पाँच बोर्ड एक्जाम की ट्यूशन, शाम 6 -7 एक और ट्यूशन, रात आठ से साढ़े दस तक पढ़ाई और फिर आधा घंटे अगले दिन स्कूल की तैयारी...। इन सबके बीच कृतिका को अपने गाल पर उग आए नए पिंपल तक को देखने की फुर्सत नहीं तो भला प्यार जैसी चीज के बारे में वे कैसे सोच सकती हैं?

हाँ... उन्हें यह जरूर मालूम है कि डॉक्टर बनने के बाद उनके सामने लड़कों की लाइन लग जाएगी! और यह भी कि उनकी जिससे शादी होगी, वही उनका सच्चा प्यार होगा। ऐसा उनकी मम्मी कहती हैं! इसलिए फिलहाल ऐसी 'फालतू' बातों में वे वक्त जाया नहीं कर सकतीं।

दूसरी ओर इलेवन्थ में पढ़ रहे अक्षत कुलकर्णी मानते हैं कि प्यार मतलब गर्लफ्रेंड और गर्लफ्रेंड का साथ थोड़ा खर्चे भरा तो है लेकिन इससे दोस्तों में 'रेप्यूटेशन' बढ़ जाती है। हालाँकि उनकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है पर शायद कॉलेज में जाकर वे बना लेंगे। वे मानते हैं कि फर्स्ट इंप्रेशन का बहुत फर्क पड़ता है। सच्चे प्यार की कहानियाँ तो बस फिल्मों में दिखाते हैं, असल जीवन में ऐसा कुछ शायद ही होता होगा। लाइफ को प्रैक्टिकल एप्रोच के साथ जीना चाहिए और प्यार में इमोशनल होना मूर्खता है।

शाश्वत प्यार का मतलब वे समझ नहीं पाए लेकिन उन्हें इतना जरूर मालूम है कि ब्रांडेड कपड़ों, सनग्लासेस, बाइक और टैटू से लड़कियाँ इंप्रेस होती हैं। ऐसा उनके दोस्त यश ने उन्हें बताया है, इसलिए जल्द ही अक्षत भी अपनी पॉकेटमनी बचाकर नए सनग्लासेस तो खरीद ही लेंगे।
ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो मैंने आपके सामने रखे हैं. तो अगर आपका भी किसी के साथ कोई चक्कर है तो कोई बात नहीं , उसे भूल जाइए , आपकी कंपनी देने के लिए मैं हूँ ना.

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