Saturday, October 31, 2009

मोहब्बत , भाग-3

स्वीटी- तुम ऐसा कर सकती हो लेकिन मैं नहीं। मैं इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकती हूँ।
रचना- कुछ भी मत बोलो स्वीटी। हर आदमी को अपनी पसंद या नापसंद जताने का हक़ है। अगर राज को इस सबमे दिलचस्पी नहीं है , तो उसे हक़ है इस सबका। हमको कोई अधिकार नहीं है उसे डिस्टर्ब करने का। जैसे वह जी रहा है जीनेदो उसे। मैं तुम्हारे साथ नहीं हूँ। इस मामले में तो हरगिज नहीं।
स्वीटी- इतना भड़कती क्यों हो ? क्या बात है आख़िर ? ये अपने लिए कोई नई है क्या ? जो लड़के अपनी बात नहीं मानते हम उनके साथ उसी तरह का व्यवहार करते हैं। उस टोली में तुम भी हमेशा हमारे साथ रही हो।
रचना- प्लीज स्वीटी, इस बार कोई जिद मत करना , मैं जानती हूँ तुम्हारी जिद को। सच कहूं तो मुझे इससे बड़ा डर लगता है। मैंने सुना था- राज हठ , त्रिया हठ और बाल हठ के बारे में। लेकिन उसके साथ- साथ स्वीटी हठ भी जोड़ देना चाहिए । एक बार के लिए राजा अपनी जिद भूल सकता है मगर स्वीटी नहीं।
स्वीटी- तो फ़िर समझाती क्यों नहीं हो उस लम्बू को। यह जिम्मेदारी तुम्हारी है, उसे समझा दीजिये की प्यार मोहब्बत की दुनिया में आए , उसका स्वागत है। नीरस जिंदगी जीने का मतलब क्या है। अपनी जवानी पर ना सही , कम से कम वह हमारी जवानी पर तो तरस खाए।
रचना- तुम ख़ुद भी तो समझा सकती हो उसे, प्रयास क्यों नहीं करतीं। उसका मोबाइल नंबर दूँ क्या ?
स्वीटी - उसकी जरूरत नहीं है। है मेरे पास। मगर तुम्हें तो पता है न, कितनी कूल बातें करता है, ऐसे लगता है जैसे किसी गैर आदमी से बात कर रहा हो। बड़ा औपचारिक आदमी है। मैं जानती हूँ वह ऐसा जानबूझकर कर रहा है, हो सकता है उसका कोई और चक्कर है। मगर क्या ? कुछ समझ में नहीं आता। जब भी मिलता है तो ठीक तरह से मिलता है मगर ऐसा जादू कर देता है की चाहकर भी कुछ कह नहीं पाती।
रचना- मेरी एक बात मानलो, इसका ध्यान दिमाग से निकाल फेंको। हम सबके लिए यही बेहतर रहेगा। स्वीटी- सब कुछ बोलो मगर यही बात मत बोलो, हर बार घुमा फिराकर तुम फ़िर वहीं आ जाती हो।
रचना- तो क्या करुँ, तुम्हीं बताओ की पत्थर से सर टकराने से तुम्हें क्या हासिल होगा। नुक्सान पत्थर का नहीं अपना ही होने वाला है, राज इंसान नहीं पत्थर है, उसकी संवेदनाएं या तो कभी जाग्रत ही नहीं हुईं थीं, या फ़िर मर चुकी हैं। समझीं तुम। तुम जैसी खूबसूरत , समझदार और प्यार करने वाली लड़की उसे भला कहाँ मिलेगी। मैं तो कहती हूँ की उसके किसी पुराने जन्म के पुण्य होंगे जो यतम जैसे लड़की उसके पीछे पड़ी है वरना सैकडों लड़के इस दुनिया में ऐसे हैं जो तुम्हारी हर अदा पर अपनी जान छिड़कते हैं लेकिन तुम उनकी तरफ़ देखती भी नहीं । जबकि उनमे से कई तो राज से भी बहुत सुंदर और जीनियस लड़के हैं।
स्वीटी- समझ गयी, चढ़ा रही हो मुझे, ध्यान बँटा रही हो मेरा । मनोविज्ञान की स्टूडेंट हो इसलिए। मानव मन की संवेदनाओं को गहराइयों से जानती हो , इसका फायदा उठा रही हो। ठीक है। कोई दिक्कत नहीं।
रचना ने स्वीटी को अपनी बांहों में भर लिया और उसे अपनापन से बिठाती हुई बोली-
- देखो, अब हमारी ऐसी उम्र नहीं रही की हंसी ठिठोली में अपना या किसी और का नुक्सान कर बैठें, बचपन की बात और होती है , तब हम इतने समझदार नहीं होते। हमें बस आनंद से मतलब होता है। लेकिन अब हम लोग मैच्योर्ड हो चुके हैं , अपने भले के साथ-साथ दूसरों का बुरा न हो इसका भी ख्याल रखते हैं। राज का यह रूखापन किसी एक के लिए होता तो उसको हम ग़लत ठहरा सकते थे, मगर वह सभी लड़कियों के साथ ऐसा ही है। तब ये समझा जा सकता है की वह है ही ऐसा। और ऐसा लड़का क्या स्वीटी के स्टैंडर्ड से मेल खाता है ?
स्वीटी- तुम ठीक कहती हो। मगर दिल माने तब न। उससे ना जाने कैसा लगाव हो गया है, रात को सोती हूँ तो महसूस होता है जैसे वह मेरे साथ सो रहा है, मुझे चूम रहा है, मुझसे प्रेम कर रहा है। मैं उसके बाहुपाश एम् जकड़ी हुई हूँ और वह मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रहा है। मैं उससे मुक्त होना चाहती हूँ लेकिन कोई अद्रश्य शक्ति मुझे उससे जोड़े हुए हैं।











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