और इनका तो कहना ही क्या है ... कितनी मोटी-मोटी आँखें हैं , सुर्ख लाल गाल और उससे भी अच्छे होठ... आह, इतनी खूबसूरत लड़की मैंने अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखी... क्या नाम है इनका?
उस अरबी शेख ने इतनी मीठी जुबां में बातें कीं की चंदा का दिल पिघल गया... उसने बड़े अदब से उसको अपना नाम बताया और यहाँ तक की अपनी सब परेशानियां भी गिनाईं...वह बोली-
- यहाँ के लोग हमारे साथ में जानवरों जैसा व्यवहार करते हैं ... बीमार हो जाए तो दवा का नाम तो लेते नहीं उल्टे काम करने को कहते हैं... मेरी तो हालत ख़राब हो हो गयी है... आप देखिये मुझे बुखार है की नहीं ?
अरबी- तुम फ़िक्र मत करो, दो मिनिट में ये बुखार रफूचक्कर हो जायेगा, मैं यह दवा देता हूँ, लो इसको खालो, अब अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो मैं तुम्हारे पास बैठकर थोडी देर तक दुःख -सुख की बात करूँ, हम लोग अपना वतन छोड़कर यहाँ इसलिए आते हैं ताकि थोड़ा सा सुकून हासिल कर सकें... रोजाना की भाग दौड़ और आपा धापी की जिन्दगी से ऊब हो चुकी है... धन-दौलत या शौरत ही सब कुछ नहीं होते... मुझे देखो, मेरे पास सब कुछ है लेकिन मानसिक शान्ति नहीं है... यहाँ पर तुम्हें देखा तो न जाने क्यों ऐसा लगा की तुम्हारी आंखों मेंजो चमक है,उससे मेरी बीमारी का इलाज़ हो सकता है... मेरे दिल की इस बीमारी को अब तुम ही ठीक कर सकती हो... क्या तुम ऐसा करोगी ? देखो, इंकार न करना ... मैं जीवन में इतना प्रभावित पहले कभी किसी से नहीं हुआ ....
चंदा- मैं भला इसमें क्या कर सकती हूँ ?डॉक्टर तो ख़ुद आप हैं...आपकी एक गोली से ही मैं बिल्कुल ठीक हो गयी...
अरबी- क्यों नहीं कर सकती? तुम बहुत कुछ कर सकती हो... जैसे की थोडासा मुस्करा सकती हो... इससे मेरे दिल को बड़ा अच्छा लगेगा...करो न ऐसे...
चंदा सचमुच मुस्कराने लगी थी ... अरबी खुश हो गया... वह चंदा को अपनी बातों में उलझाने में कामयाब हो गया था... चंदा को उसकी बातों में मज़ा आने लगा था... वह पलंग पर उसके करीब आकर बैठ गया... चंदा के बालों में अपनी उँगलियों से कंघी करते हुए वह पूछने लगा-
- इससे पहले कहाँ थी आप? इस कोठे पर तो पहली बार ही देख रहा हूँ ...
चंदा- हाँ, अब तक मुझे कई जगहों पर बेचा जा चुका है... हर जगह मुझे मारा-पीटा जाता है, यातनाएं दी जाती हैं,धमकियाँ दी जाती है, तब भी मैं उनकी बात नहीं मानती तो ऊंचे दाम लेकर वे लोग मुझे दूसरी जगह पर बेच देते हैं... दो दिन से यहाँ पर भी मुझे इसी तरह की तकलीफें दी जा रहीं हैं... मेरी सुनने वाला कोई नहीं है... क्या आप मुझे यहाँ से निकाल सकते हैं ? मैं जीवन भर आपकी गुलामी करने को तैयार हूँ...
अरबी- अरे ये क्या कहती हो? दोस्ती में ये सब बातें नहीं कही जातीं... मैं तुमकोअपने दिल के करीब पाटा हूँ... तुम्हें दोस्त मान चुका हूँ... तुम अगर मेरी बात मानोगी तो मैं भी तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ... लो ,फिलहाल ये सोने की चैन अपने गले में दाल लो, तुम्हारे गोरे बदन को खूब अच्छी लगेगी...
चंदा- इस वक़्त मुझे सोने चांदी की नहीं बल्कि एक सच्चे साथी और सहयोगी की जरूरत है, जो मुझे इस नर्क से निकाल सके ... क्या तुम सचमुच मेरी मदद करने के बारे में सोच रहे हो ?
अरबी- तुम्हारे लिए तो जितना किया जाए कम है... ये बताओ, इससे पहले कितने मर्द तुम्हारे जिस्म को स्पर्श कर यौवन का आनंद लूट चुके हैं ?
Thursday, September 11, 2008
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