Saturday, September 20, 2008

भाग-111

चंदा के जिस्म में सनसनी फ़ैल गयी... उत्तेजना के कारण उसका बुरा हाल था... अरबी शेख के हाथ बड़े कलात्मक ढंग से हरकत कर रहे थे... अश्लील फ़िल्म बदस्तूर जारी थी... चंदा फुसफुसा रही थी-
-आह .... अब क्या होगा ? मैं तो न जाने किस उलझन में फंस गयी हूँ... न उगल सकती हूँ और न ही निगल सकती हूँ... मैं किस मुसीबत में पड़ गयी... मुझे इस परेशानी से निकाल दीजिये... मैं तो पहले ही ठीक थी... यह प्यार का रोग क्या लगा, मेरी जान ही आफत में आ गयी है... कभी इस तरह का हाल देखा नहीं , इसीलिए यह सब हो रहा है...मन उड़ सा रहा है... बेचैनी इतनी की ये बातें बताने में मेरी जुबान भी लरज रही है...
-हर काम की शुरुआत पहली बार तो करनी ही पड़ती है... आज तुम शुरू कर रही हो तो आगे कभी रिहर्सल की जरूरत नहीं पड़ेगी... अगर जीवन का असली सुख लूटना चाहती हो तो मामूली सा दर्द सहना भी सीखिए... छुई-मुई बन्ने से कोई काम नहीं चलेगा... थोडी सी सख्त बनिए...
-आह... मेरी जान लेने का इरादा है क्या? इतनी जोर से मत दबाओ .... कोई दुश्मनी है क्या ?
उसका जवाब देने के बजाय वह चुपचाप अपने काम में लगा रहा... वह चंदा के नाज़ुक बदन को अपने होठों से चूमता तो चंदा उच्चाल पड़ती थी... जब उसने चंदा को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया तो उसके उभारों ओ देखकर उसके मुह में पानी आ गया... वह गोलाइयों का बड़ा दीवाना था... कसे हुए यौवन उभारों को देखते ही उसके जिस्म में हरकत होने लगती थी... वह अपने आपको रोक नहीं पाटा था... उसने उभारों की चोटियों को चूमना शुरू कर दिया... इस क्रिया से चंदा क शरीर में बम से फटने लगे... वह कामोत्तेजना के शिखर पर पहुच गयी... उसने शेख के संवेदन शील अंग को को सहलाना शुरू कर दिया ... इसका जोरदार असर हुआ... अरबी शेख का ख़ास अंग अब सख्त होकर दहाडें मारने लगा था... उसके मन में तरह -तरह के भाव उमड़ रहे थे... वह चंदा के दिलो-दिमाग परछा जाना चाहता था... उसने पहली वाली अश्लील फ़िल्म निकाल कर चालू करदी... इस बीच शेख ने वेटर को शराब व् अन्य चीजों का आर्डर भी दे दिया था... आर्डर आते ही अरबी शेख ने दो पैग तैयार किए... एक पैग उसने चंदा को दे दिया तथा एक ख़ुद पीने लगा... चंदा ने बहुत इनकार किया ... बोली-
- मैंने आज तक इसको छुआ भी नहीं है और आप पीने की बात कर रहे है....
शेख- इसको पीते ही तुम्हारी दुनिया ही बदल जायेगी... अह शर्मो-हया हमारे प्यार में बाधक बनी हुई है... सारी झिझक रफू चक्कर हो जायेगी.... सब गम ख़त्म हो जायेंगे.... तुम्हारी हसरतें जाग उठेंगी...
-चंदा- ऐसे तो मैं बिगड़ जाउंगी... पहले शराब पिलाते हो बाद में सिगरेट पीने के लिए कहोगे....
-शेख- हाँ , वो तो है... मैं नहीं भी कहूँगा तो भी उम्हें सकी तलब महसूस होगी.... तुम्हारे जिस्म की भूख -प्यास भी जाग उठेगी...तुम्हारा नारीत्व साकार हो उठेगा ...मैं उस पल का इन्तजार कर रहा हूँ....
शेख बहुत उत्साह में था... उसने एक झटके में अपना पैग समाप्त कर दिया.... कुछ देर की जद्दो जहद के बाद चंदा ने भी शराब का पैग पीना शुरू कर दिया ... जब वह अपना हाथ पीछे हटाती तो शेख उसको नमकीन काजू खिला दिया करता था... चंदा को दूसरा पैग पीने में भी इसी तरह की तकलीफ हुई, फ़िर सब मामला पत्र्ती पर आ गया... स्व दोनों सिगरेट के धुए के छल्ले भी उडाने लगे...











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