Sunday, September 28, 2008

भाग-119

गाँव भले ही किसी देश का क्यों न हो, वहाँ के लोगों की मानसिकता यही होती है... वे लोग बात का बतंगड़ बना डालते हैं... इसलिए तुम यह बात मत बताना... वैसे भी तुम बता रही हो की जीवन भर तुम्हारे माता-पिता ने तकलीफें उठायी हैं, फ़िर क्यों उनको दुःख भरी बातें सुनाकर अब भी दुखी करना चाहती हो ..
चंदा- ठीक है... अब मैं उन्हें अपनी शादी की ख़बर सुनाकर खुश कर दूंगी ... जब लोगों को यह पता चलेगा की मुझसे विदेश का रईस शादी करने को राजी है तो सब लोगों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहेगा...

सब लोगों का सपना होता है की वे अपनी बच्चियों की शादी बड़े घर में करें...

शेख- और अगर धर्म का मुद्दा उठा तो ? तुम दूसरे धर्म की हो और मैं अलग धर्म का ...

चंदा- तो क्या हुआ ? हो तो अच्छे इंसान... इससे क्या फर्क पड़ता है... आजकल सब लोग इस तथ्य को जान गए हैं की इंसानियत सबसे बड़ी होती है...

शेख- क्या ये बात सच है या फ़िर मेरा मन रखने के लिए ऐसा कह रही हो ?

चंदा-जो आप समझ रहे हैं, ऐसी बात नहीं है... अब घर-घर में जाग्रति आ चुकी है... टीवी ने सब कुछ बदल कर रख दिया है... सब जान गए हैं की धर्म का असली अर्थ लोगों में प्यार बाटना होता है, लड़ाई-झगडा करना नहीं...

शेख उसकी बात पर कम और उसकी मदमस्त जवानी पर ज्यादा ध्यान दे रहा था... चंदा के यौवन उभार बहुत गज़ब के थे... उन्हें देखते ही शेख के मुह में पानी आ रहा था... वह इतने जोर का दवाब डालता था की चंदा कराह उठती थी... उस आनंद मिश्रित दर्द की बात ही कुछ और थी...शेख ने जब से काम शक्ति बढ़ाने वाली दवा का सेवन किया था, तबसे वह बेहद खुश था... वह चंदा से कह रहा था-

- तुमसे मिलकर मेरा मन बच्चों जैसा हो गया है... कभी सोचता हूँ की ये करून , फ़िर अगले ही पल सोचता हूँ की ऐसा न करूँ...इसी उलझन में फंसा हुआ हूँ...

चंदा- प्यार करके तुमने मेरी टी जिन्दगी ही बदलकर रखदी, अब कहते हो की प्यार उल्झन है...

शेख- बात बनाना तो कोई तुमसे सीखे... तुम्हारा वास्तव में कोई जवाब नहीं है... इतनी मीठी -मीठी बातें करती हो की सीधी दिल में उतरती चली जाती हैं... आह... ज़रा आहिस्ता-आहिस्ता करो... तुम बहुत तेज दबाते हो...

शेख ने आक्रामक काम करना शुरू कर दिया... चन्दा भले ही कराह रही थी मगर फ़िर भी शेख को रोक नहीं रही थी... जब काफी देर तक वे दोनों प्रणय क्रीडा की मस्ती में डूबे रहे तो शेख ने पूछा-

- अगर चाहो तो मैं मंजिल पर पहुचने के लिए तैयार हूँ...

चंदा- आपने कंडोम मंगवाए हैं की नहीं ?

शेख - उसकी क्या जरूरत है ?

चंदा- मैंने सुना है की इसके बिना ऐड्स हो जाता है...



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