मालती ने कहा भी-
-आज कितना पवित्र दिन है... हर तरफ़ रौनक ही रौनक है... काश, इतना मुबारक दिन पहले ही आ गया होता... मगर कहते हैं न की जब कुदरत का इशारा होता होता है , तभी सब कुछ होता है... वैसे भी समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता...
आशा- जब जागो तभी सवेरा होता है... आज से तुम बागडोर संभाल लो...
मालती- मैं भी आप सब लोगो के सामने यह घोषणा करती हूँ की अब कभी भी किसी लड़की से वैश्यावृत्ति नहीं कराऊंगी ... मैं आज और अभी से सबको मुक्त करती हूँ...जोलड़कियां मेहनत करके कमाना चाहती हैं उन सबका स्वागत है... मैं ऐसी लड़कियों को पूरी सुख सुविधाएं दूंगी... तुम सबके आश्रितों को रहने की सुविधा दी जायेंगी... तुम्हारे बच्चों को पढने की सहूलियत दी जायेंगी... बोलो मंज़ूर है ?
सब लड़कियों ने एक स्वर में सहमती जताई... एक ने पूछा-
- वो सब तो ठीक है लेकिन हमको काम क्या करना पड़ेगा ?
मालती- फिलहाल इस बारे में कुछ सोचा नहीं गया है... मगर इतना याद रखो, जो कुछ भी काम हम सब करेंगे वह ईमानदारी वाला होगा और अच्छा ही होगा ... हम ख़ास लोगों से पूछताछ करके कोई व्यवसाय शुरू करेंगे... इतना यकीन करें की हम हर हालत में कामयाब होंगे... अगर तुम लोगों ने दिल से साथ दिया तो हम सारी दुनियाको यह दिखा देंगे की वैश्याये भी मुख्य धारा में शामिल हो सकती हैं...
लगभग ९० वेश्याओं और स्टाफ के ३५ लोगों ने मालती की बात का तालियों की गडगडाहट के साथ स्वागत किया... आशा का उत्साह और भी ज्यादा बढ़ गया... वह फूली नहीं समा रही थी... उसने जोश में कहा-
- आज तक लोग हमारा शोषण करते रहे, हमारे जिस्म की बदौलत अपना व्यवसाय चमकाते रहे, अब हमारी है... अब हम व्यवसाय करेंगे और जहाँ-जहाँ लड़कियों को जबरन जिस्म फरोशी के धंधे में धकेला जायेगा , वहाँ -वहाँ हम विरोध करने पहुंचेंगे...कानूनी और सामाजिक दवाब डालकर हम उस अबला की मदद करेंगे... इसके लिए हम एक सामाजिक संगठन का गठन करेंगे...
मालती- हाँ और अगर जरूरत पडी तो हम आन्दोलन करेंगे... हम एक ऐसा आश्रम बनायेंगे जहाँ पर ऐसी मुसीबत की मारी हुई लड़कियां को शरण मिल सके ... हम वहाँ पर कई काम सिखाने की व्यवस्था करेंगे ताकि वह काम सीखकर हमारी कम्पनियों या फ़िर कहीं दूसरी जगह पर भी नौकरी कर सके...
आशा- मालती की बात स्वागत योग्य है... मेरे पास इतनी संपत्ति मौजूद है, जिससे आप लोगों का यह सपना पूरा हो सकता है... मैं आप सबको आत्मनिर्भर बनते हुए देखना चाहती हूँ...
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