Thursday, December 17, 2009

मोहब्बत, भाग-50

मुझे अच्छा नहीं लगता की किसी अपने का दिल दुखाऊँ, तुम्हें तो दिल अपना बना चुका है। फ़िर मैं क्यों कोई ऐसा कार्य करूँगा जिससे बेवजह आपको परेशानी हो। शराब भी मैंने जब पीली है जब तुम जिद करने लगीं।
स्वीटी- इस सफाई की वजह आख़िर क्या है ? मैं कुछ पूछ रही हूँ क्या ? वह फरीदाबाद वाली घटना तो मैंने ऐसे ही प्रसंगवश सुनाई थी। क्या मुझे ध्यान नहीं की मैंने ही तुम्हें व्हिस्की का ऑफर किया था मेरी जिद के कारण ही तुम माने वरना तुम तो इसे छोटे तक नहीं हो। मगर सच बताओ , आनंद आया की नहीं ?
राज- सिर्फ़ आनंद की बात करती हो, आनंद का बाप भी आ गया है। जो सुख मिला है मैं उसका वर्णन नहीं कर सकता। तुमसे मिलने से पहले यह सुख कहाँ था। सिर्फ़ नीरसता थी। अब अगर मर भी गए तो कम से कम हर स्वाद लेकर तो मरेंगे। कह तो सकते हैं की दुनिया में आकर दुनिया को ठीक तरह से समझ लिया है। देख लिया है। चख लिया है।
स्वीटी- हाँ वो तो है। एक आदमी मरकर भगवान् के पास गया , उसने निवेदन किया की उसे और जिन्दगी दी जाए। उसने यह भी तारक दिया की उसने जीवन भर कभी कुछ ग़लत काम नहीं किया , फ़िर भी उसे मौत क्यों दी गयी। देवदूत ने उससे प्रश्न किया-
- क्या तुमने जीवन में कभी शराब पी ?
व्यक्ति- जी नहीं, कभी हाथ तक नहीं लगाया।
देवदूत- ओके। तो फ़िर कभी अय्याशी की , मतलब किसी लड़की के साथ कोई चक्कर -वक्कर चलाया ?? किसीसे छेड़खानी वगैरह की क्या ?
व्यक्ति-छी-छी । क्या कहते हैं महाराज , मैंने कभी किसी दूसरी त्रिया को आँख उठाकर नहीं देखा ? सबको माँ बहन की तरह देखा है। और आप कहते हैं की ।
देवदूत- ठीक है, ठीक है। नाराज क्यों होते हो । सब तुम सिगरेट नहीं पीते, शराब नहीं पीते, किसी और नशा को नहीं पसंद करते , लड़की का तुम्हें कोई शौक नहीं। कोई और मौज मस्ती भी नहीं करते । फ़िर धरती पर जाकर क्या ऐसी तैसी करोगे। चुप बैठो। ज्यादा आवाज नहीं करना।
राज- वाह, वाह कमाल कर दिया यार , बहुत मजा आया। अच्छा जोक है। अब आगे क्या इरादा है, मैंने तुम्हारा हाथ जबसे चूमा है, तभी से जिस्म के अन्दर हलचल सी हो रही है। कुछ अजीब सी गतिविधियाँ हो रही है, बहुत बेचैनी है। सोचता हूँ की तुम घर चली जाओ , मैं इस हालत में घर नहीं जा सकता। मैं यहीं सो जाता हूँ।
स्वीटी- अगर तुमने ऐसा सोच लिया है तो मैं भी तुम्हारे साथ ही रहूंगी। यहाँ पर तुम्हें इस हालत में छोड़कर मैं घर कैसे जा सकती हूँ। अब तो दुःख हो या सुख , हम दोनों साथ साथ शेयर करेंगे।
राज- नहीं यार, तुम लड़की हो, तुम्हें अपने घर ही जाना होगा। मेरी बात और है। मैं तो एस एम् एस करके कोई भी बहाना बना दूंगा। क्या तुम्हारे घरवाले किसी भी तरीके बहाने पर भरोसा कर सकते हैं क्या ?
स्वीटी- अब चाहे जो हो मेरी बला से । मगर मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ सकती। चाहे आर पार हो जाए।
राज - कहाँ सो ओगी तुम ? सुना नहीं होटल का मेनेजर कह रहा था की सिर्फ़ यही कमरा बचा है ?
स्वीटी- तो क्या फर्क पड़ता है। तुम कोई गैर हो। हम दोनों दोस्त हैं। साथ नहीं रह सकते क्या ?
राज- और अगर कुछ हो गया तो ?
स्वीटी- क्या होगा हमको ? कुछ नहीं होगा । तुम हाँ तो करके देखो।
राज - एक नौजवान लड़का और खूबसूरत लड़की यानी की एक आग और एक पेट्रोल । आग नहीं लगेगी क्या ?
स्वीटी- मैंने कहा ना , चाहे जो हो जाए।
राज- जब कार और किसी पैदल आदमी का एक्सीडेंट होता है तो जानती हो दोष किसका माना जाता है । हमेशा की बात कर रहा हूँ, सिर्फ़ और सिर्फ़ कार चालाक का। सबकी सहानुभूति उसीके साथ होती है। कभी किसी आम पैदल व्यक्ति पर इस बात के लिए मुकदमा च्जलाया गया है क्या की उसने कार चालाक को टक्कर मारी। जबकि यह बहुत बार सम्भव है । इसी तरह कभी किसी लड़की पर बलात्कार का मुकदमा नहीं चला जबकि बहुत बार गलती लड़कियों की भी होती है। उस फरीदाबाद वाले एक केस को छोड़कर। उसमे भी धरा ३७६ नहीं,३०२ लगाई गयी थी, त्युम समझ रही हो ना मेरा इशारा किस तरफ़ है ?

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