Tuesday, August 12, 2008

भाग-७५

उफ़ , ये मर्द लोग भी बड़े बेदर्द होते हैं... मेरी जान निकली जा रही थी और वह उस समय इजाज़त की बात कर रहा था... मैंने कहा-
- कौन सी इजाज़त की बात कर रहे हो तुम ?तुम्हारा इरादा मुझे छेड़ने का तो नहीं है ? मेरी साँस अटक रही है ... दिल जोर-जोर से धड़क रहा है और तुम ऐसे समय में मुझसे ना जाने कौन से

जन्म की दुश्मनी निकाल रहे हो .... अगर यूँ ही सताने के लिए यहाँ बुलाया था तो ठीक है , मैं यहाँ से चली जाती हूँ... तुम यहाँ अकेले बैठकर पत्थरों से इजाज़त लेते रहना...

मालती- तुम्हारी धमकी का कुछ असर हुआ की नहीं ?

- हाँ , बहुत असर हुआ ... राजू तुंरत लाइन पर आ गया... उसने मेरे होठों से अपने दहकते हुए होठ गढादिए ... मैं उसकी बांहों में झूल गयी... वह काफी देर तक मेरे अधरों का रसपान करता रहा... मेरे जिस्म में सनसनी सी दौड़ गयी... मैं खुश थी... अन्दर ही अन्दर मेरे मन में लड्डू फ़ुट रहे थे... यह मेरी जिन्दगी का पहला सुखद अनुभव था... मैं राजू के शरीर में समा जाना चाहती थी... मेरे उतावलेपन को वह भी महसूस कर रहा था... तभी तो उसने मेरे अत्यन्त नाज़ुक अंगों से छेड़छाड़ करनी शुरू करदी... ऐसा लगता था मानो, दुनिया की सारी ताक़त मुझमें ही समा गयी हो... जोश के मारे मैं राजू को भी अधर कर दिया करती थी... राजू ने मदहोशी के आलम में पूछा -

- अब कैसा लग रहा है ?

- मेरे धड़कनें नहीं सुन रहे हो ?

राजू - ये तो और भी न जाने क्या-क्या कह रही हैं ?

- इनको सुनना और समझकर उस पर अमल करना आपका काम है...

राजू- मैं अपने भाग्य पर यकीन नहीं कर पा रहा हूँ... तुम्हारा चाँद जैसा बदन मेरी बांहों में है, यह सपने जैसी बात है... आह, कितनी ख़ूबसूरत हो तुम...

- मेरे लिए तो यह कल्पना से भी बाहर की बात है... अब तुमसे अलग रहकर जी नहीं सकती...

राजू- मैं भी कैसे जी पाऊंगा... मेरा हाल तो तुमसे भी बुरा है...

मालती-वाह...वाह ... कितना बेहतरीन समय था... बड़ा आनंद आया होगा...

- हाँ ... उस आनंद को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है... एक पैग और तैयार करो... बाहर शोर सा कैसा है ? कोई शराबी ग्राहक आ गया है क्या ? किसी को देखने भेजदो ...

- मालती ने आशा के लिए जल्दी से एक पैग तैयार किया और कुतूहलवश ख़ुद ही देखने चली गयी ... कुछ देर के बाद जब वह वापस आई तो देखा की आशा की आँखें अंगारों की तरह दाहक रही थीं... आशा को बताया-

- चंदा का आशिक आ गया है... लड़के लोग ने उसकी अच्छी खासी खातिरदारी करदी है, यह उसीका हंगामा है...

- ओह , उसे तो आना ही था... फ़ोन करके बतादो की अब यहाँ से आगे उसे मारें पीतें नहीं... कहना की यह हमारा आदेश है... खामखाँ मर -मरा गया तो बेवजह पाप लगेगा ...





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