- किस सोच में फंस गयी ? मुझे लगता है किसी गहरे सोच में पड़ी हुई हों ?
मालती- मैं सोच रही थी की अब हमको काफी देर हो चुकी है... ज्यादा शराब से तुम्हें परेशानी होती रहती है...
- मुझे ही क्या ज्यादा शराब से तो सबको परेशानी हो सकती... शराब की छोडो, अगर कुछ भी हद से ज्यादा खाया -पीया जाए तो नुक्सान पहुचाता ही है... लेकिन सवाल ये है की ज्यादा पी कौन रहा है... अभी तो दिल भी नहीं भरा और तुम टोका -टोका -टाकीकरने लगीं... ऐसे नहीं चलेगा... आज तो जी भरके पिलानी पड़ेगी...
मालती- ठीक है बाबा... एक छोटा सा पैग और तैयार कर देती हूँ... वैसे भी बहुत छोटे -छोटे पैग ही बना रही हूँ, वरना अब तक तो कब का मामला गड़बड़ हो गया होता...
-तुम सबकी आदतें पता हैं मुझे... तुम लोग करते तो मेरे फायदे के लिए हो लेकिन ये हुई तो चीटिंग ही ना ?
मालती- अब आप कुछ भी कहें,कुछ भी होता हो और आप कुछ भी कहें , मगर हमें अपना काम तो सही तरीके से करना ही पड़ेगा... लीजिये आपका जाम बनकर तैयार है...
आशा शराब के प्रभाव में आ चुकी थी... उसकी आँखें सुर्ख लाल हो गयी... चंदा का चेहरा उसकी आंखों के सामने घूमने लगा ... अब वह बेहद संजीदा नज़र आ रही थी... वह पलंग से उठकर बाथरूम तक गयी ... मुंह पर छीटे मारे तथा किसी से फोन पर कुछ बातचीत की... जब कोई खास बात होती थी तभी आशा ख़ुद बात करती थी वरना तो वह नौकरों से ही नम्बर डायल करवाया करती थी... मालती के करीब बैठकर उसने कहा-
- तुमने बताया नहीं ,किस गहरी सोच में डूबीं हुई हो ? मुझसे झूठ नहीं बोला जा सकता...
मालती- आपकी नाराजगी की वज़ह से मैं नहीं बोल पा रही थी...
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