Saturday, August 14, 2010

लवगुरु , भाग -८

मुंशीजी- ठीक है , माना अगर मैंने उसको पटा भी लिया , उससे शादी भी करली तो उसे शारीरिक रूप से संतुष्ट कैसे करूँगा ?

लवगुरु- क्यों , नामर्द हो क्या ? क्यों नहीं कर सकते ? मैं बताउंगा न तरीका .

मुंशीजी- मैं इस मामले में बड़ा ही अनाडी हूँ.

लवगुरु- कोई बात नहीं अभी खिलाड़ी बना दिए देते हैं. शादी के बाद जब सुहागरात की घड़ी आये तो आप छबीली को पेट के बल लिटा दें और उसके नितंब के नीचे तकिया लगा दें. उसके यौवन द्वार की बाहरी दीवार से सटाते हुए अपनी दो उंगलियां अंदर डालें. यौवन द्वार से गर्भाशय द्वार के बीच की दूरी के एक तिहाई हिस्से पर हस्त क्रिया के दौरान उसे काफी आनंद की अनुभूति होती है. इस जगह सहलाएं और उसकी प्रतिक्रिया देखें. इस क्षेत्र के आस-पास दबाव के साथ स्ट्रोक और मसाज करते रहें और यह तब तक करते रहें जब तक कि वह बस न कह दे या उत्कर्ष की स्थिति में न आ जाए. साथ ही उससे यह पूछे की किस जगह पर उसे चरम उत्तेजना मिल रही है. गौर करेंगे कि जहां उसे चरम उत्तेजना मिल रही है वह स्थान योनि दीवार की अन्य जगहों को अपेक्षा थोड़ा कठोर होगा, यही उसका जी-स्पॉट होगा. लेकिन यह भी बता देना जरूरी है कि यह जरूरी नहीं है कि सभी महिलाओं को यह जगह आनंददायक लगे या चरम उत्तेजना प्रदान करे. इस लिये सलाह है कि हमेशा इस बात पर ध्यान दें कि वह क्या कहती है और उसकी क्या प्रतिक्रिया है.ज्यादातर भारतीय इस क्रिया को पसंद नहीं करते . फिर भी आधुनिक पीढ़ी के कुछ युवा इस क्रिया को आजमाते है. उनके लिये — इस दौरान संपूर्ण भग क्षेत्र को चूमा, चाटा और चूसा जा सकता है. भग क्षेत्र से चूमने की शुरुआत उसके भगशिश्न से करें. और जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ती जाती है क्रमशः अंदर जाते जाएं. यह पता करें कि उसके किस क्षेत्र में किस तरीके से मुख द्वारा किए गए खिलवाड़ में ज्यादा मजा और उत्तेजना आती है.

मुंशीजी - किसी किस हिस्से पर कसी किया जा सकता है ?

लवगुरु- बाहरी द्वार को चूमा और चाटा जा सकता है. यौवन द्वार को भी चूमा और चाटा जा सकता है. आगे भी चूमा और चाटा जा सकता है, लेकिन कभी काटने का प्रयास भी न करें. आप चाहें तो यौवन द्वार को चारों ओर जीभ द्वारा खिलवाड़ कर सकते हैं वह भी वास्तविकता में बगैर अंदर किये. लेकिन इस क्रिया से सबसे महत्वपू्र्ण है कि इस दौरान पूरा भग क्षेत्र अच्छे से साफ होना चाहिये. यौन क्रिया के पूर्व जननांगों को अच्छे से धो लेना चाहिये. इसके अलावा भी खास अंग की सहायता से कई आनंददायी तरीके हैं जो कुछ समय के लिये सेक्स को रोक सकते हैं.

■ शुरुआत करे, उसके यौवन द्वार को ध्यान न देते हुए अपने खास अंग का प्रयोग उसके शरीर में रगड़ने में करें ताकि उसका शांत शरीर तरसने लगे . उसे गोलाइयों पर रगड़े, उस के चारों ओर फिराएं, फिर धीरे-धीरे रगड़ते हुए नाभि की ओर बढ़े जब तक कि आप उसके गुप्तांग तक न पहुंच जाएं. ■ अब आप उसकी जांघों के बीच अपना खास अंग रगड़ें, फिर उसके विशेष क्षेत्र में रगड़े, फिर उसकेअंदर भी रगड़ें और अंत में यौवन द्वार में रगड़ें. ■ अब अपना अंग कुछ सेंटीमीटर ही अंदर डालें फिर इसे किनारे किनारे ही थोड़ा बढ़ाएं . फिर इसे धीरे – धीरे अंदर बाहर करें. और तब तक गहराई में प्रवेश न करें जब तक कि वह आपको जोर देकर अंदर डालने को न कहे.

इसके अलावा भी कई तरीके हैं. और कई तरीके आपके द्वारा मजाकिया तौर पर प्रयुक्त भी किये जा सकते हैं. हर युगल लगभग तौर पर यह जानता है कि क्या उसके लिये आनंददायी है और क्या नहीं. पर अनुभव बताता है कि कई लोग उत्तेजनाके तरीके ढूढ़ते हैं, लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप स्वयं परीक्षण करके निश्चित करें कि क्या आपके लिए बेहतर रहेगा साथ ही यह खोजें कि किसमें आपको ज्यादा आनंद मिलेगा. कई बार व्यक्ति विशेष पर यहां बताई गई बातें लागू नहीं होती, क्योंकि उत्तेजना के लिये कई कारक जिम्मेदार होते हैं जिनमें समय, स्थान , शारीरिक संरचना और पार्टनर की रुचि आदि शामिल है. आप अपने पार्टनर को कई अन्य तरीकों से उत्तेजित कर सकते हैं . जिनमें आप उसके पेट पीठ को रगड़ते हुए नीचे आएं, उसे उत्तेजित करने उसके निचले हिस्से और भग को रगड़ सकते हैं, अपना पांव उसकी जांघों के बीच रखकर उसके खास क्षेत्र को रगड़कर भी उत्तेजित कर सकते हैं. आप उसे अपनी जांघों पर बैठा कर घुड़सवारी का मजा दिलाते हुए उसके निचले क्षेत्र को अपने शरीर की सहायता से उत्तेजित कर सकते हैं. एसे ही कई कभी खत्म न होने वाले तरीके हैं बस आप स्वयं प्रयोग करके खोजने का प्रयास करें. इससे आपको ज्यादा आनंद आएगा.


Friday, August 13, 2010

लवगुरु भाग-७

जब वो उम्रदराज लड़की तुम्हारी छबीली से कहेगी कि तुम सुन्दर हो , ताकतवर हो और हर हाल में उसे सुख संतुष्टि दे सकते हो तब जाकर छबीली के मन में तुम्हारे लिए प्यार के अंकुर फूटेंगे . इधर तुम उसको प्रेम का पाठ पढाने के लिए तैयार रहना . पहले-पहले डायरेक्ट उसको नहीं, बल्कि उसके घर के किसी छोटे सदस्य को उपहार देना होगा. अगर घर का बच्चा पट गया तो समझो तुम्हारा आधा काम हो गया . उसीकी बदौलत उस घर में छाये रहोगे . इसके बाद जब भी मौक़ा पाओ, चौका जामा दो .
मुंशीजी- लेकिन डर इस बात का है कि यह होगा कैसे ?क्या जरूरी है कि छबीली किसी उम्रदराज महिला से खास सम्बन्ध रखती ही होगी ? और अगर ऐसा हुआ भी तो क्या जरूरी है कि वह महिला मेरे चंगुल में फंस ही जायेगी.?
लवगुरु- ये तुम्हारा जों नेगेटिव एटीट्यूट है न, यही तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन है. सबसे पहले इसे बदलो . पोजीटिव सोच रखो , ये सोचो कि क्यों नहीं होगा ? जब लवगुरु अपनी शिष्या का मन जीत सकते हैं. अपने से आधी उम्र की और बेंतिहाँ खूबसूरत लड़की को पटा सकते हैं तो यह काम आपके लिए क्यों असंभव है ? लीजिए गुरु का नाम और निकल पडिये . मेरा आशीर्वाद आपके सिर पर है . एक बात हमेशा ध्यान रखना, मैं तुम्हें जों टिप्स दे रहा हूँ ये सिर्फ प्रेम के लिए है. अगर इसमें आप वासना के लिए आते हैं तो इसमें आपकी कमी होगी , मेरी नहीं .मुझे ऐसा महसूस होता है कि प्रेम ही शाश्वत है. प्रेम ही सच है. मैं प्रेम का पुजारी हूँ , वासना का नहीं . जों लोग वासना के पुजारी होते हैं, मैं उनको अच्छा नहीं मानता . जानते हो क्यों ?
मुंशीजी - शायद आपने भी पहले किसी से प्रेम किया होगा, आपके मन में भी वासना की आग लगी होगी . किसी हसीना के साथ आपने उस आग को शेयर भी किया ही होगा ? क्योंकि यह कुदरत का नियम है और जों ऐसा नहीं कर पाता , उसे डॉक्टर असमान्य करार देते हैं. उसे इलाज की जरूरत होती है. वहीं से आपको बोध हुआ होगा .
लवगुरु- हाँ, कुछ हद तक यह सही भी है. कुछ हद तक नहीं भी .वो इसलिए कि मैंने लोगों को देखकर ही ज्यादा सीखा है. जों लोग कम क्रीडा करते हैं वे बाद में बहुत पछताते हैं. मैं भी पछताया , बहुत पछताया .लेकिन बताया था न कि इस बात को फिर कभी विस्तारपूर्वक समझाउंगा . अभी समय नहीं है. जब तुम सफलता की कहानी लेकर आओगे , तब मुंह मीठा कराउंगा. हो सके तो अगली बार अपने नई -नवेली सुन्दर पत्नी को भी साथ लेकर आना .
मुंशीजी- बिलकुल. मैं ऐसा ही करूँगा. काश आपकी वाणी सत्य निकले गुरूजी . आपके पास आकार मुझे बेहद संतुष्टि मिली है वरना दिल बड़ा बेकरार रहता था. हर समय छबीली की याद सताती रहती थी. जब आपने कहा है कि आपसे कुछ न छिपाऊं , हर बात खोलकर बताऊँ . तो मैं सब कुछ बयान करूँगा. दरअसल छबीली का जादू मेरे सिर पर ऐसे छाया था कि मैं दिन में उसके सपने देखता रहता था, उसके सीने की पुष्ट गोलाइयों को दबाता रहता था, ऐसा करके मुझे बहुत सुख की अनुभूति होती थी. मैं उसके होठों को चूमता रहता था , सपने में नहीं, दिन में , ख्यालों में . उसकी ऐसी दीवानगी है कि मैं रोजाना उसके साथ सफल शारीरिक सम्बन्ध बना लेती हूँ. बावजूद इसके कि उसका शरीर यहाँ नहीं है. मैं पूरा मजा भी ले लेता हूँ. इस रोग का निवारण भी चाहता हूँ. सोचता हूँ कि अगर वह मुझे नहीं मिल पाई तो शायद मेरी जान भी जा सकती है. कुछ भी हो सकता है . जैसे कि मैं पागल हो सकता हूँ . मुझे हार्ट अटैक हो सकता है.
लवगुरु- यह सब वहां है आपका. ऐसा कुछ नहीं होगा. तुम छबीली से प्रेम करोगे, शादी करोगे और उसे हासिल करके ही दम लोगे, ह्भारोसा है मुझे . पूरा भरोसा . दुनिया में हर काम होने के लिए ही होता है.













Thursday, August 12, 2010

लवगुरु , भाग-६

मुन्शीजी - क्या कह रही हो मेरी जान ? मैं चाहने वाला हूँ तुम्हारा . प्यार करता हूँ तुमसे. कहां न जान देता हूँ तुम पर. कभी ये न कहना कि मैं औरों जैसा ही हूँ. मैं सबसे अलग हूँ. मुंशीजी बुदबुदा ही रहे थे कि लवगुरु की आवाज सुनाई दी. वे कह रह थे -
-क्या बड-बड कर रहे हो ? सपनों में खो गए क्या ? कहीं ऐसा तो नहीं कि अपनी चाहने वाली के साथ रोमांस में खो गए हों. ज्यादा चाह का हाल यही तो होता है. हमने भी कभी ऐसा ही प्यार किया था प्रभु, मगर ?
मुंशीजी- फिर क्या हुआ महाशय ? क्या आपके प्रेम का भी दुखांत हुआ ?
लवगुरु- फिर कभी सही, पहले तो तुम्हारी समस्या हल करनी है. बताउंगा जरूर . ध्यान रखना. और अब का इतना ही जानलो कि अब तो बस प्रभु से ही प्रेम रह गया है . आप जैसे लोगों की मदद करने से आत्मा को सुकून मिलता है. हाँ, तो सुनो मैं कह रहा था कि रोमांस का उम्र से कोई संबंध नहीं होता। एक दिलचस्प रिसर्च में कहा गया है कि व्यक्ति में रोमैंस करने की इच्छा कभी खत्म नहीं ानी शादीशुदा जोड़े भले ही कई साल साथ रहे हों, लेकिन हनीमून कभी खत्म नहीं होता.
रिसर्च के दौरान महिलाओं और पुरुषों के दिमागों का अध्ययन किया गया। ये लोग अब भी अपने पार्टनरों से उतना ही प्यार करते थे, जितना कि 21 साल की उम्र में। रिसर्च के दौरान इन लोगों को अपनी पार्टनरों की तस्वीरें दिखाई गईं। ये मेरा कहना नहीं है . एक स्टडी में नतीजा निकला कि काफी पुराने हो चुके रिश्ते भी उतने ही करीबी और रोमैंटिक हो सकते हैं जितने कि नया-नया प्यार। यह एक सच है। ब्रेन स्कैनिंग में यही बात सामने आई है।
कई और रिसर्चों में यह बात सामने आई थी कि रोमैंटिक लव 12-15 महीनों में खत्म हो जाता है। लेकिन यह गलत साबित हो गया है। अगर आप दुनिया भर के लोगों से पूछेंगे कि क्या प्यार हमेशा जिंदा रह सकता है? वह यह कहेंगे, शायद नहीं। कई किताबें भी यह बात कहती हैं। लेकिन हम इस बात को गलत साबित कर रहे हैं। इस रिसर्च से पता चलता है कि लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों में नए प्यार के प्रति आकर्षण और उत्साह नहीं होता. कुल मिलाकर मेरा कहना ये है कि रोमांस , प्यार या सेक्स से उम्र का खास रिश्ता नहीं है. तुम अब भी अपनी चाहने वाली कि आकांक्षाओं पर खरा उतर सकते हो . उसे भरपूर प्यार दे सकते हो . उसे बिस्तर पर भी आनंद दे सकते हो. क्योंकि मैं जानता हूँ कि सारा खेल यहाँ से होता है. यहाँ से. दिमाग से . डायरेक्टर तो यही है . शरीर तो आज्ञा का पालन करने का काम करता है . अगर तुम ठीक तरीके से अपनी इच्छाशक्ति से काम लों तो यह जान लों कि आज भी अपनी प्रेमिका को वैसा ही प्यार दे सकते हो जैसा कि कोई युवा २० वर्ष की उम्र में देता है . मैं तुम्हें उसके सारे गुण सिखाउंगा लेकिन बात वहीं आ जाती . यह कोई जादू नहीं है. मेहनत करनी होगी. सब कुछ सोचना -समझना होगा. शरीर को फिट रखना होगा . और इस सबसे पहले उसे पटना होगा , त्याभी तो उसके साथ सेक्स के समुन्दर में गोते लगाने का सुख हासिल कर सकते हो.
मुंशीजी - सर्च के माध्यम से उदाहरण देकर आपने मेरा मनोबल अब और भी ऊंचा कर दिया है . शायद वह अपने मन में सोच सकती है कि मैं इस उम्र में उसको जिस्मानी सुख कैसे दे सकता हूँ, तभी वह मुझसे दूर-दूर रहती होगी. अब कोई ऐसा आइडिया बताओ कि जिससे छबीली को यह पाता चल जाए कि मैं उससे मोहब्बत करता हूँ और उसको हर तरह का सुख दे सकता हूँ. यह भी कि मैं तन और मन से पूरी तरह से स्वस्थ हूँ.
मुंशीजी- इसके लिए तुम कोई ऐसा व्यक्ति तलाश करो , जों उसके करीब हो और समझदार भी हो. कोई ऐसी महिला जिसके साथ छबीली अक्सर रहती हो और उम्र में भी ज्यादा हो . फिर तुम उसके साथ दोस्ती करो, उसके कंधे पर रखकर बन्दूक चलानी होगी.







Wednesday, August 11, 2010

लव गुरु भाग-५

कल्पना लोक भी बड़ा अजीब होता है. इंसान अचानक बादशाह हो जाता है और पूरी दुनिया उसे अपने क़दमों में नजर आने लगती है. मुंशीजी भी इस वक्त कल्पना लोक में विचरण कर रहे थे. उनका साथ दे रहीं थीं , हूर परी छबीली . वह छबीली जिस पर वे दिलो जान से न्यौछावर थे. जिसकी एक झलक पाने के लिए घंटों बिगाड़ दिया करते थे, जिसे वे तो मन ही मन प्यार करते थे मगर वह भी उन्हें घास डालती है कि नहीं , पता नहीं. उसी छबीली को अपनी बांहों में समेटे वे ख्यालों की नगरी में उससे प्रेम कर रहे थे. धीरे-धीरे उन दोनों के बदन से कपडे हटते जा रहे थे. और देखते ही देखते कुछ समय में ही वे दोनों बिलकुल निर्वस्त्र हो गए. मुंशीजी के कदम काँप रहे थे, हाथों में भी कंपन हो रहा था, ऐसा लगता था जैसे वे छबीली का जिस्म नहीं बल्कि दुनिया की सबसे अमूल्य धरोहर को स्पर्श कर रहे हों. दिल में कई तरह के प्लान थे. दिलो -दिमाग में घंटियाँ सी बज रही थीं. छबीली मदमस्त होकर उसकी निहार रही थी. उसकी आँखों में लाल-लाल डोरे तैर रहे थे, ऐसा लगता था जैसे उसकी आँखों में अंगारे दहक रहे हों. मुंशीजी ने ध्यान से देखा, सचमुच वे अंगारे ही तो थे. वासना के दहकते हुए सुर्ख लाल अंगारे. वह उनकी तरफ ऐसे देख रही थी मानो सदियों की प्यासी , तडपती मछली समुन्दर की ओर निहार रही हो. वह कामुक बातें कर रही थी.मुंशीजी के हर सवाल का जवाब दे रही थी. मुंशीजी के हाथों को बार-बार अपने सीने पर रखकर यह संकेत देने का प्रयास कर रही थी कि जिसे वो नाजुक कली समजह रहे हैं, वही नाजुक कली खुद ही मसलवाने के लिए बेताब है. वह खुद चाहती है कि इस वक्त मुंशीजी उसके बदन को अच्छी तरह से निचोड़ दें, मसल दें, दबा दें. उसके जिस्म से आग की जों लपटें निकल रही थीं, उनसे मुंशीजी भी झुक्लासने लगे. उन्होंने अपने खास अंग जब छबीली की जाँघों से टच किया तो वह उछल पडी. लगभग चीखते हुए बोली-
-उई मा, इतना बड़ा, सख्त . मर जौंगेई मैं तो . मुझे जाने दीजिए. अभी नहीं फिर किसी दिन सही.
मुंशीजी- मूड आज हो रहा है, माहोल आज है और तुम कहती हो कि फिर किसी दिन. यह सिर्फ देखने में हे खतरनाक लगता है, जब इसके साथ खेलोगी तब मानोगी कि हाँ कोई चीज है. इसे एक बार प्यार करके तो देखो, मेरा भरोसा करो, फिर तुम हमेशा के लिए इसकी दीवानी हो जाओगी. तुम्हारी आँखों में कामवासना के जों लाल-लाल डोरे दिख रहे हैं न, वे इन्हीकी चाहत रखते हैं. इसके बाद आग की भट्टी की तरह जलता हुआ तुम्हारा यह जिस्म बिलकुल शांत हो जाएगा. मेरा यकीन करो . आह ... देखो अब न तो खुद तद्पो और न मुझे तड़पाओ.
छबीली- - आप मुझे बहका तो नहीं रहे हैं. देखते ही ऐसा लगता है अजिसे कोई काला नाग फन फैलाए हुए खड़ा हो. मैं जाना चाहूंगी. भले ही मेरा बदन जलता रहे, कोई फर्क नहीं पड़ता. आँखें सुलगती रहें, कोई दिक्कत नहीं है. में आँखों वाली दवा खरीद लूंगी. उससे आराम हो जाएगा.
मुंशीजी- ऐसा नहीं होता मेरी जान. अगर दवा से इसका इलाज होता भला अब तक सबका इलाज न हो चुका होता. इसका तो अब बस एक ही इलाज है. आराम से टांगें साइड में करो, थोड़ी देर तक रुको और फिर देखो मैं कैसे आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हें मस्ती के समुन्दर में गोते लगवाता हूँ. जिसे तुम बड़ा और डेंजर बता रही हो , कुछ देर के बाद कहोगी कि यह तो बहुत प्यारा और छोटा है .
छबीले- आप मुझे बहका रहे हैं. देखो, यह मेरा पहला चांस है . मैंने आज तक कभी कसी मर्द के साथ इस तरह के करीबी सम्बन्ध नहीं बनाए. आज अगर कुछ हो गया तो मैं कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी. अगर आप मेरे करीब आये तो डॉक्टर को बुलाने की नौबत आ जायेगी.
मुंशीजी- ये क्या कह रही हो, क्या मैं बलात्कारी हूँ. चोर उचक्का हूँ, आशिक आवारा हूँ ? अरे मैं चाहता हूँ तुम्हें. बेहद प्यार कर्ता हूँ तुमसे जान छिडकता हूँ तुम पर . एक पल भी रह नहीं सकता तुम्हारे बिना. मैं चाहता हूँ कि तुम्हें दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करू. मैं तुम्हें तकलीफ देने नहीं बल्कि सुख और आनंद देने कीइच्छा रखता हूँ. तुम मेरी भावनाओं को समझने की कोशिश क्यों नहीं करतीं ?गलियों में घूमने वाले लोफर और प्यार करने वालों में जमीं आसमां का फर्क होता है . उसे महसूस किया जा चाहिए.
छबीली- चाहे आप जैसा चाहने वाला हो या फिर गलियों में लड़कियों पर फिकरे कसने वाले लोफर , सबकी चाहत तो एक ही होती है न, जिस्म को हासिल करना . आप भी वही चाहते है. फिर कहाँ हुआ फर्क ?












Tuesday, August 10, 2010

लवगुरु , भाग-३

मुंशीजी - हाँ , आज कुछ मजा आया . जब कोई ५० की उम्र को भी कम बताता है तो उसे गले से लगाने को जी चाहता है, जी में आता है कि उस पर अपना सब कुछ कुर्बान कर दूं, आखिर आप भी तो शायद इसी उम्र के होंगे . थोड़े बहुत ज्यादा या कम. कुछ ऐसे दुष्ट प्राणी होते हैं कि उन्हें तो ५० की उम्र का आदमी भूत दिखाई देता है, सोचते हैं कि वे कभी उम्र के इस पड़ाव तक नहीं पहुँच पायेंगे , इसी कारण उनका गला दबाने का दिल करता है. अगर संविधान में क़त्ल की सजा फांसी या उम्रकैद नहीं होती तो निश्चित रूप से मैं कोई अनर्थ कर बैठता . खैर, अब दिल को सुकून हुआ , आपकी ही बात मानूंगा. कभी अपने आपको गया गुजरा , बूढा या कमजोर नहीं समझूंगा. ये वादा रहा. अब मैं रोजाना सज संवरकर रहूंगा. युवाओं की तरह ही मस्ती करूँगा, अठखेलियाँ करूँगा. मोहल्ले के युवाओं का एक क्रिकेट क्लब बनाउंगा. छबीली को किसी तरीके से नहीं लगने दूंगा कि मैं उम्रदराज हूँ.
लवगुरु- गुड. यह तो पहला नुस्खा हुआ. इसके बाद तुम्हें हमेषा अपने होठों पर मुस्कान लटकानी होगी. खुशी हो या गम , बस मुस्कराने की प्रेक्टिस करते रहो. जिससे सामने वाला अगर गुस्से में भी हो तो उसे हंसी आ जाए. और ये कहावत तो तुमने सूनी ही होगी , कि जों हंसी, वो फंसी. जब तुम्हारे दिल की रानी तुम्हारी दूकान पर आये तो पहले आहिस्ता-आहिस्ता उसके साथ नजदीकियां बढाओ. जब वह तुम पर थोडा- थोडा भरोसा करने लगती है तो उसके साथ अपने दुःख-सुख शेयर करने शुरू करो . तुम उसकी पसंद पूछ सकते हो, अपनी पसंद उन्हें बता सकते हो.
मुंशीजी- लड़की पटाने के तरीके भी बड़े मुश्किल होते हैं. मैंने तो सोचा था कि ...
लवगरु- कि कोई लड्डू होगा , जिसे लेजाकर फटाक से खा लोगे और जिसे तुम चाहते हो वह जादुई तरीके से तुम्हारी बांहों में आ जायेगी. तुम उसे अपना बना लोगे और आसानी से उसकी जवानी का रस चूस लोगे ?
मुंशीजी- हाँ, करेक्ट. ऐसा ही कुछ था मन में . मगर यहाँ आकार तो सारी बातें ही पलट गईं, मगर आप हैं बड़े दिलचस्प . हर बात को मजेदार बना देते हैं. अगर मैं छबीली को साथ लाया होता तो मुझे छोड़कर अब तक वह आपसे प्रेम करने लगती. सच कहता हूँ. इतनी मिठास घुली है आपकी बातों में.
लवगुरु-अब मक्खन लगाना बंद करो, और लड़की पटाने के नुस्खे पर गौर करो, मैं बता रहा था कि उसे कोई जोक सुनाओ, उसकी पसंद की कोई खाने की चीज उसे गिफ्ट करो, इसके अलावा उसके घर की तकलीफों पर भी गौर करो. अगर घर में उसका कोई छोटा भाई या बहन है तो उसे गोद में उठाकर उससे प्यार कर लिया करो . उसकी तारीफ़ में जमीन आसमां एक कीजिये. फिर उसे अपनी चाहने वाली के साथ जोड़ दीजिए कि वह तो उससे भी बेहतर है , इससे आप आराम से साइड से उसकी प्रशंसा कर सकते हैं. उसके यौवन के उभारों की , उसके होठों की , उसके फिगर की, उसके बालों की किसी फ़िल्मी हेरोइन से तुलना करिये फिर हीरोइन का पल्ला नीचा कर डालिए . कहिये कि वह उससे भी ज्यादा हसीन है, उससे कहिये कि अगर वह फ़िल्मी दुनिया में कदम रखती है तो धमाका हो जाएगा, सब हीरो उससे जलन करने लेंगे. उसे बताइये कि सफलता की हर सीढी पर उसका अधिकार है और समय आने पर वह उसे हासिल करके रहेगी . कभी-कभी उसे अपने ऐसे किसी सपने के बारे में बता सकते हैं , जों आपने कभी देखा ही नहीं हो . मगर थोडा सा झूठ बोलकर आप उसे यह दिखाने में कामयाब हो जायेंगे कि सिर्फ असलियत में ही नहीं बल्कि रातों में भी आप उसके बारे में सोचते हैं. उसे लगेगा कि आप उसमे दिलचस्पी ले रहे हैं. इससे वह भी आपके बारे में सोचना शुरू कर देगी.
लवगुरु इतने जादुई अंदाज में यह सब बयान कर रहा था कि मुंशीजी तो सपने में खो गए. उन्हें लगा कि सचमुच छबीली उनकी बांहों में आ गई है. वे उसके नरम नाजुक और रसीले होठों का रसपान कर रहे हैं. इनका खास अंग भयंकर काले नाग की तरह फुंकार रहा है . वासना की खतरनाक बयार बह रही है। मुंशीजी अपने आपको रोक नहीं पा रहे हैं। छबीली ने अपनी आँखें मूँद ली हैं। शायद ज्यादा कामुकता की वजह से ऐसा हो रहा है । मुंशीजी उसके सीने की पर्वत चोरियों को मसल रहे हैं। वह आह -आह बोलकर अपनी दशा का इजहार कर रही है।


























Monday, August 9, 2010

लवगुरु , भाग-३ , मुंशीजी- माफ कीजिये , आपको रोक रहा हूँ महाशय . दरअसल आप जोड़ों की बात कर रहे हैं. और मैं जोड़ा बनाने के बात कर रहा हूँ. मैं यही
तो जानने के लिए आया हूँ कि जोड़ी कैसे बनाऊ ? अपने दिल का हाल कैसे कहूँ. अगर वह मुझसे दोस्ती मानने लगे टब कहने ही क्या हैं ? तब तो मामला अपने
आप लाइन पर आ जायेगा. अगर खुलकर कहूँ तो मुझे छबीली को अपने वश में करना है और उसे पटाने के तरीके सीखने के लिए आया हूँ .
लवगुरु- समझ गया मुंशीजी, रंगीन मिजाज हो . अब तक शादी की या नहीं ?उस छबीली से प्रेम करने का कोई खास कारण ? सिर्फ मौज मस्ती तक ही सीमित हैं
या फिर आगे बढ़ने का इरादा है ? एक बात बताओ , कुछ ज्यादा सुन्दर है क्या ? या कोई और विशेष बात है ?
मुंशीजी- क्या बताऊँ साहब , बस कुछ न पूछिए. जब वो सामने से गुजरती है तो दिल पर छुरियाँ सी चलने लगती हैं. कलेजा धक्-धक् धड़कने लगता है. जी चाहता
है उसके गोरे-गोरे गालों को चूम लूं, उसके यौवन के उभारों को सहलाने का मन करता है. उसके रसीले होठों का रस चूसने का जी चाहता है. आह, क्या- क्या बताऊँ,
क्या-क्या छिपाऊँ, उसकी गदराई जवानी की झलक अगर आप भी पाओगे तो गुरुपन भूलकर इश्क के दरिया में डूबने लगोगे. सच कहता हूँ साहब वह जीती-जागती
कयामत है . मुझे उससे प्यार हो गया है , मगर बताने से डरता हूँ. ऐसे तो वह मेरी दुकान पर सामान लेने के लिए अक्सर आती रहती है मगर क्या कहूँ , उसके सामने
मेरी जुबान तलवे से चिपक जाती है. कुछ कहते-कहते ही हालत खराब हो जाती है. उसकी चमकीली आँखें मुझे भी घूरती हैं, मगर उसके दिल में क्या है, इसका पता नहीं
चल पाता . आप कोई ऐसा अचूक नुस्खा बताओ जिससे कि सांप भी मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे. अगर वह मुझे बिलकुल नहीं चाहती तो कोई बात नहीं .
लवगुरु- हूँ, तो ये बात है . जनाब उसकी जवानी का आनंद चखना चाहते हैं , प्यार -व्यार का तो बस बहाना है , सही कह रहा हूँ न .
मुंशीजी- आगे की बात तो मैं नहीं जानता , मगर ऐसा लगता है कि जब तक उस कामिनी का प्रेम हासिल नहीं कर पाउँगा तब तब दिल को चैन नहीं मिल पायेगा .
चाहे कोई मेरी सारी धन दौलत लेलो, मगर उस छबीली से मेरा मिलन करवादो . मुझे उसके सिवाय अब किसीकी भी चाहत नहीं है. वो हुस्न की मलिका ही नहीं, बल्कि
मेरे जीने का मकसद भी है. अब तो यह पक्का इरादा हो चुका है कि अगर वो नहीं मिली तो जीवन को कहीं ऐसे ही झोंक दूंगा . सच कहता हूँ , इसको सिर्फ धमकी
मत मन लेना. यह हकीकत है . वह कमबख्त मेरी रग-रग में समा चुकी है. बड़ी उम्मीद लेकर आया हूँ आपके पास. प्लीज मुझे निराश मत करना .
लवगुरु- ठीक है, ज्यादा भावुक होने के जरूरत नहीं है, आज तक यहाँ से कोई मायूस नहीं लौटा . यह नियम आज भी नहीं टूट पायेगा. मैं कुछ करूँगा आपके लिए .
कितने साल की होगी वो ? और कभी ये गौर किया कि वो भी आपको चाहती है या नहीं ? अगर थोड़ी सी भी चाहत होगी तो काम जल्दी बन जाएगा , वरना फिर
समय लगेगा. हाँ, ये तो बताओ कि उम्र के फासले से तो कुछ नेगेटिव होने वाला नहीं है. सबसे पहले आपको आज से ही यंग लड़का बनना होगा , उसीकी तरह सोचना है.
उसीकी तरह चलना है और ऐसे ही लड़के की तरह व्यवहार करना है. उम्र पचास की हो या साथ की , उससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता . अगर दिलजवान है, शरीर में कोई
बीमारी नहीं है, यानि निरोगी काया है और तुम्हारे सोचने का तरीका ऊर्जावान तथा प्रगतिशील है तो उम्र कोई ज्यादा मायने नहीं रखती .

Sunday, August 8, 2010

लव गुरु , भाग-०२

मुंशीजी सोचने लगे कि किसी तरह से लवगुरु यानि मटुकनाथ चौधरी से मुलाक़ात की जाए। उसका जीवन धन्य होजाएगा , उसके मुरझाए हुए जीवन में फिर से बहार सकती है वह भी छबीली के मादक यौवन का रस चखसकता है। उसकी कातिल अदाओं ने उसका जीना हराम कर रखा था बदन ऐसे गदराया हुआ था मानो इलाहाबादीअमरुद पका हो। यौवन की चोटियाँ हिमालय पर्वत सी प्रतीत होती थीं, मुंशीजी लार टपकाकर रह जाते थे। उन्होंनेशिव पांडे नामक महापुरुष का नाम सुन रखा था। शिव पांडे पेशे से शिक्षक थे मगर उन्हें जीवन का हर पहलू काअच्छा ज्ञान था। सद्चरित्र थे मगर प्रेम संबंधी किसी भी समस्या का समाधान वे चुटकी बजाकर कर दिया करतेथे। वैसे उन्होंने बाहर की दुनिया में बहुत कम ही हाथ पाँव मारे थे मगर इसके बावजूद भी लोग उन्हें लवगुरु केखिताब से नवाजते थे। उनके बंगले में भारी भीड़ रहती थी। उनमे प्रेमी -प्रेमिकाएं की भरमार रहती थी। कोई प्रेमीअपनी रूठी हुई प्रेमिका को मनाने आता था तो कोई ऐसी भी थी जों पहले को छोडकर दुसरे को पकड़ने का नुस्खे भीसीखने आती थी। लवगुरु उर्फ शिव पांडे उन सबके सवालों को पूरे ध्यान से सुनते और उनका समाधान बताते बाद में फिर लोग उन्हें धनयवाद देने आते थे। दूर- दूर तक बात जंगल में आग की तरह फ़ैल गयी कि लव गुरु काबताया हुआ नुस्खा हर हालत में कामयाब होता है। कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसीने यह शिकायत की हो कि उनकेगुरु मन्त्र की वजह से उनका काम बिगाड़ा हो। मजे की बात ये कि इस नेक काम के लिए वे कोई फीस भी नहीं लेतेथे। धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति थे सो चंदे का एक पात्र रखना नहीं भूलते थे। अपनी श्रद्धानुसार उसमे लोग रुपये डालदिया करते थे। बिछड़े हुए लोगों को मिलाने में लवगुरु को असीम महारत हासिल थी। लड़की पटाने के भी अचूकमन्त्र रखते थे। जों कुछ था सब विज्ञान पर आधारित था, अनुभव पर आधारित था। पाखण्ड का नामोनिशान नहींथा। जब मुंशीजी ने ऐसे लवगुरु का नाम सुना तो मिलने के लिए बेताब हो
गए।उनकी हसरत जल्द ही पूरी हो गयी। आखिर लवगुरु से उम्नी मुलाक़ात हो ही गयी । उनकी बारी आने पर उन्होंने पूछा-
- क्या दिक्कत है मित्र , कुछ परेशान लगते हो ? क्या किसीसे प्रेम हो गया है ?
मुंशीजी- हाँ, महाशय ... प्रेम के रोग का शिकार हो गया हूँ। मैं लगभग पचास का हूँ, अभी वह कोरी कली ही है ।
लवगुरु- सचमुच प्रेम करते हो या फिर वासना के चक्कर में हो ? कहीं अपनी हवस की पूर्ती तो नहीं करना चाहते ?
मुंशीजी- अगर ऐसी कोई बात हो तो सुबह का सूरज न देख पाऊँ, ऐसे ही मर जाऊं। खडा -खडा ही।
लवगुरु- बैठ जाओ।
जिन्हें किसीसे प्रेम हो जाए तो अक्सर उनकी समझ नहीं आता कि वे ऐसा क्या करें जिससे उनके दिल का तार हमेशा जुड़ा रहे। प्यार फीका पड़ने के बजाय पल-पल निखरता जाए।

वे इसी उधेड़बुन में रहते हैं कि मुरझाए हुए प्रेम को तरोताजा करने के लिए वे क्या उपाय अपनाएँ। उन्हें लगता है वे कई ऐसी चीजें कर चुके हैं जिससे उन्हें बेहद खुशी मिली थी पर उसे दुहराना ठीक रहेगा या नहीं। अब उन्हें कौन समझाए कि जिस प्रकार प्यार का अहसास कभी पुराना नहीं होता उसी प्रकार उसमें ताजगी भरने की पुरानी कोशिश भी बेकार नहीं जाती। "आई लव यू" का जादू कभी पुराना नहीं होता।
सोए हुए प्यार को जगाने के लिए बारिश के मौसम का सहारा लें। यकीन मानें आसमान से बरसता अमृत आपको प्यार से सराबोर कर देगा। इस नुस्खे को आजमाएँ और आप पाएँगे कि आपके बीच का सारा मैल धुल गया है।
खासकर वे जोड़े जिनके रिश्ते को थोड़ा समय हो चुका है, उनके लिए ये बूँदें आकाश में बैठे देवताओं के आशीर्वाद के मोती हैं। जिन्हें पानी में भीगने से परहेज हो, वे किसी बालकनी से बारिश का रिमझिम गिरता पानी निहार सकते हैं। पेड़ों, फूलों, पत्तों, छतों से टपकता, तेज बहता पानी बहुत सुंदर दिखता है। उनका धुला हुआ भीगा रूप देखकर आपका मन भी भीग जाएगा। प्रकृति का यह नजारा मन को बहुत सुकून देता है.