Wednesday, June 8, 2011

भाग-३६
सलमा- सब नहीं, ज्यादा झूठ मत बोलिए. इतना ज्यादा झूठ बोलना भी अच्छी बात नहीं है,. मैं जानती हूँ की सिगरेट पीने से कैंसर हो सकता है, इसके बावजूद भी मैंने सिगरेट पीनी शुरू कर दी थी. इसको कहते हैं की क्या होता है शौक . यह नशा भी ऐसी चीज है जिस पर हावी हुआ , हो ही जाता है. एक बार जिसको नशे की लत लग गयी , फिर वह जल्दी छोड़ नहीं पाता .
जुनैब- हाँ, इस बात को तो मैंने भी महसूस किया है. मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जिन्होंने एक बार नशा करना शुरू किया तो वे कभी भूल ही नहीं पाए. शराब और सिगरेट के अलावा ड्रग्स भी ऐसा ही खतरनाक नशा होता है. भले ही आज हम सहाक या मौज के लिए ये सब कर रहे हैं मगर कल ये हमारे लिए जानलेवा हो सकता है.सिगरेट और शराब से गुर्दे खराब हो सकते हैं. कैंसर हो सकता है. यहाँ तक की और भी बहुत सारी बीमारियाँ घर कर सकती हैं. यही बात मैंने एक दिन अपने खास दोस्त को बताई तो जानती हो दोस्त क्या बोलता था ? कहता था की जब कुछ खायेंगे -पियेंगे ही नहीं तो फिर जीकर क्या करेंगे ? यह बात भी महत्वपूर्ण है न .
सलमा- हाँ , बात में दम है. इसका मतलब ये है की जब तक जिंदगी है , जब तक जवानी है तब तक के लिए मौज मस्ती से मुख नहीं मोडना चाहिए. जब भी मका मिले इस जवानी का रस चख लेना चाहिए. ये चीजें लाइफ में बार- बार नहीं आती हैं. एक बार जवानी ढल भी गयी तो दुबारा नहीं आती. सिर्फ यादें रह जाती हैं .
जुनैब- उन्हीं यादों में तो रंग भरना है, उनको और भी ताजा, और हसीं बनाना है, आज की हमारी सुहागरात ऐसी होनी चाहिए , जिसे याद करके हम बुढापे में भी मस्त हो सकें, रंगीन हो सकें. देखो, अब हम थोड़ा सा ध्यान इस फिल्म पर देते हैं. कितनी उत्तेजक और ओपन फिल्म है. अगर हमारी जगह पर कोई दूसरा व्यक्ति होता तो अब तक कब का स्खलित हो चुका होता. इतने गर्म माहौल में भी मैंने अपने आपको संभाल रखा है. मैं और तुम बिलकुल नग्न हैं, आपस में हमारे जिस्म भी रगद रहे हैं, इस सबके बावजूद भी यह देखिये की हम संयमित हैं.
सलमा- हैं नहीं थे. अब तक तो भले ही हमने अपने आपको रोके हुआ था , लेकिन अब मैं बहकने लगी हूँ. मेरा अपने आपसे काबू हटने लगा है. अब मैं बेकाबू होने लगी हूँ. दिल पर सांप से लोट रहे हैं. ये सांप कहीं मेरी जान न निकाल लें. उससे पहले तुम इस बदन की सारी कड़वाहट को निकाल दो. इसमें मीठा रस घोलदो . जब तक यौवन रस नहीं छलकेगा तब तक तब तक उसका स्वाद पता नहीं लगेगा. और जब तक जवानी का भरपूर स्वाद नहीं लेलेते तब तक चैन किसे मिलेगा .
जुनैब - मैं तुम्हारी भावनाओं को समझता हूँ, महसूस करता हूँ, मैं खुद भी तो यही चाहता हूँ, मैं भी इस हुस्न के सागर में डूब जाना चाहता हूँ. इसमें जब तक डूब नहीं जाता तब तक चैन नहीं आएगा . जिस तरह इस फिल्म का हीरो अपनी दोस्त की यौवन घाटी में उतर रहा है, मैं भी उसी तरह उतरना चाहता हूँ.
सलमा - तुम्हें रोकता कौन है, टोकता कौन है ? तुम्हें रोकने -टोकने वाला कोई नहीं है. तुम बिंदास अपने मन की इच्छाओं को पूरा कर सकते हो. मैं तो गुलाम ठहरी. जैसा आदेश करोगे,उसी का हुक्म बजाउंगी.
जुनैब- तुम क्या हो, ये तुम्हें भी नहीं मालूम. मैं तुम पर अपनी जान छिडकता हूँ, तुम्हें अपनी समझता हूँ. आज तो कह दिया है, कल से इस तारह के शब्द हरगिज इस्तेमाल नहीं करना. तुम तो रानी हो मेरे दिल की.
सलमा- और तुम मेरी राजा हो. तुमने मुझे स्पर्श करके मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया है. अब मैं उस स्टेज पर आ गयी हूँ की तुम्हारे बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. यह महज भावुकता भर नहीं है. बल्कि ऐसी हकीकत है जिसे नकारा नहीं जा सकता . अगर भूल से भी कभी तुम मुझसे दूर हुए तो अपनी सलाम की लाश पाओगे .
जुनैब- छी. छी पावन मिलन की इस बेला में किस तारह की बात करती हो. आज तो प्यार की बातें होनी चाहिए . मोहब्बत की बातें होनी चाहिए . ऐसे मौकों पर भी अगर तुम इस तारह की बेकार की बातें करोगी तो कैसे चलेगा . इस फिल्म से भी तो कुछ सबक लो. देखो किस तरह हीरोइन मजे के साथ प्रेम क्रीडा का सुख भोग रही है.

Tuesday, June 7, 2011

भाग-३५
सलमा- सच में तुम बहुत चालू हो. मैं तो पहले यही जानती थी कि तुम बड़े सीधे सादे हो. मगर अब समझ में आ रहा है, पूरे राजनीतिक व्यक्ति लगते हो, अनुभवी भी हो है न यही बात . तभी तो ऐसे सवाल कर रहे हो.
जुनैब- अब सीधे -सीधे सच पर आओ, जब मैंने सहेली वाली चोरी पकड़ ली है तो इस तरह की बात करते हो .अब बोलो न कितनी सहेलियों के साथ तुमने कितने गुलछर्रे उडाये हैं ?
सलमा- सब कुछ जानकार ही दम लोगे . हाँ जी, नेता के बेटे हो तो नेतागीरी तो खून में रहेगी ही .मुझसे किउच न कुछ निकलवाकर ही दम लोगे. जब तक चैन से नहीं बैठोगे . टीवी रिपोर्टर की तरह कुछ न कुछ जानकार ही मानोगे .चलो बताती हूँ, तुम्हारे कलेजे पर भी थोड़ी सी ठंडक पड़ जायेगी . मेरे साथ में तीन लड़कियां ज्यादा खेलती थीं, ये कोई एक साल पहले की बात है. जब हम तीनों सहेली घूमने गयीं तो शाम के समय रेशमा नाम की लड़की ने अचानक सिगरेट सुल्गाली और उसमे सुट्टा मारते हुए बोली -
- आज हम तीनों इसका स्वाद लेंगी, फिल्मों में जिस तरह हीरोइन सुट्टे पर सुट्टा लगाकर मौज लेती हैं , उसी तरह हमें भी आनंद लेना है, हममें से जो कोई सुट्टा नहीं मारेगी समझ लो वही हमारी दोस्त नहीं है है. उसीसे बातचीत बंद कर दी जायेगी . इसलिए इनकार करने से पहले ये जरूर सोच लेना कि दोस्ती चाहिए तो सिगरेट पीनी होगी .
जुनैब- अरे ये क्या दादागीरी हुयी ? हो सकता है रेशमा को सिगरेट पीने की आदत होगी और वह सोचती होगी कि तुम लोगों के सामने पीयेगी तो तुम यह राज किसी न किसी पर उजागर जरूर कर दोगी . और तुम भी उसका साथ देती तो तुम किसीको बताने वाली नहीं थीं, इसीलिए उन्होंने कहा होगा और शौक -शौक में तुम लोगों ने भी मान लिया होगा .
सलमा- बिलकुल यही हुआ. तुम तो ठहरे अंतर्यामी, सब कुछ जान लेते हो. हाँ, सच तो यही है. ऐसा ही हुआ था. हम सब मान गए. हमने कहाँ सोचा था कि ऐसा कुछ हो जाएगा . हमारे दिमाग में तो यही सब था कि इससे कुछ नहीं होगा. थोड़ी देर तक तो धुंए ने परेशान किया मगर फिर सब कुछ ठीक हो गया. यानि कि मैंने सुट्टे पर सुट्टे मारने शुरू कर दिए. मुझे पहले तो सिगरेट की गंध तक भी नहीं सुहाती थी लेकिन जब एक बार यह सिलसिला शुरू हुआ तो हमें भी अच्छा लगने लगा . मगर अगला दिन अलग था. रेशमा हम सबसे बड़ी थी और उसीने एक ऐसा कार्य कर दिया जिससे कि हम सबके तो रोंगटे ही खड़े हो गए.
जुनैब- भला ऐसा भी क्या था जिसने ये सब कर दिया . ऐसा कौन सा हाल खराब कर दिया ?
सलमा- मैंने देखा कि अपने घर पर रेशमा एक लड़की के गालों को चूम रही थी. वह द्रश्य देखकर मैं उसके कमरे के पास खड़ी हो गयी, मैं उसको खिडकी से झाँक रही थी. ववाह जल्दबाजी में खिडकी को ठीक तरह से बंद करना भूल गयी थी. दूसरी लड़की सिगरेट का सुट्टा मारती थी और फिर धुएं को इस तरह से रेशमा के मुंह में धकेलती थी जैसे कि पम्प से हवा भर रही हो.
जुनैब- अच्छा , इसका मतलब तुमने भी खूब मजे लिए हैं. कम नहीं हो तुम भी. तुम भी कमाल की चीज हो. तुमने सारी चीजें ठीक तरह से देख ली हैं. सब मौज करली हैं.
सलमा- सब नहीं, ज्यादा झूठ मत बोलिए. इतना ज्यादा झूठ बोलना भी अच्छी बात नहीं है,. मैं जानती हूँ की सिगरेट पीने से कैंसर हो सकता है, इसके बावजूद भी मैंने सिगरेट पीनी शुरू कर दी थी. इसको कहते हैं की क्या होता है शौक . यह नशा भी ऐसी चीज है जिस पर हावी हुआ , हो ही जाता है. एक बार जिसको नशे की लत लग गयी , फिर वह जल्दी छोड़ नहीं पाता .
जुनैब- हाँ, इस बात को तो मैंने भी महसूस किया है. मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जिन्होंने एक बार नशा करना शुरू किया तो वे कभी भूल ही नहीं पाए. शराब और सिगरेट के अलावा ड्रग्स भी ऐसा ही खतरनाक नशा होता है. भले ही आज हम सहाक या मौज के लिए ये सब कर रहे हैं मगर कल ये हमारे लिए जानलेवा हो सकता है.

Sunday, June 5, 2011

भाग-३३
जुनैब- मैं अभी बच्चा हूँ, मैंने तो कभी भी ये सब काम नहीं किये। मैं नहीं जानता कि मैं तुम्हारी इस सम्बन्ध में क्या और कैसे मदद कर सकता हूँ। मुझे लगता है, आप लोगों न गलत आदमी को चुन लिया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं आखिर में तुम्हारे किसी काम के लायक ही न रहूँ ?
- विजय चोधरी का तो पता नहीं मगर जहां तक मेरा सवाल है , मैं जान ही गयी हूँ कि तुम ही मेरे सपनों के राजा हो,। जब से मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा है, तभी से मैंने तुम्हारे जैसे लड़के की आरजू की थी। तुम्हारे जैसे लड़के के सपने ही दिन रात देखा करती थी। तुम राजा - महाराजा लगते हो। तुम्हारी सूरत में जबरदस्त आकर्षण है। तुम मेरे हीरो हो. जबसे तुमने इस बंगले में कदम रखा है तभी से मेरे दिलो दिमाग पे छा हो. लाख कोशिश करती हूँ तो भी तुम्हारी मोहिनी सूरत मेरे जेहन से नहीं उतरती . ऐसा लगता है जैसे तुमने कोई जादू कर दिया है. अब समझ में आया कि मेरा पति विजय चोधरी तुम पर कैसे लट्टू हो गया है ?
जुनैब- तो क्या आपके पति भी मेरे साथ गलत काम करेंगे ?
- हा हा हा ... ये तुमने क्या कह दिया मेरे भोले राजा. जब वे मेरे साथ ही कोई गलत काम नहीं कर सकते तो तुम्हारे साथ क्या ख़ाक करेंगे. उनकी कमजोरी तुम जैसे लड़के हैं, तुम्हारे जैसे काकम उम्र के लड़कों के गुप्त अंग के साथ वे थोड़ी देर खेल लेते हैं, मैं अपने हाथों के सहारे से उनकी गर्मी को निकाल फेंकती हूँ. बस इतनी सी बात है. वे इतने बुरे भी नहीं हैं. बस अपनी इसी आदत से परेशान हैं. उन पर किसीके समझाने का भी कोई असर नहीं होता. हांलाकि वे अपनी इस आदत को छोड़ना चाहते हैं. मगर छोड़ नाहीं पाते. पहले तुम उनके साथ थोड़ा सा समय बितालो. मैं भी साथ में रहूंगी . वहीं पर जब तुम पूरी तरह से गर्म हो जाओ तो मेरे ऊपर हावी हो सकते हो. मेरे साथ जैसा चाहो सम्बन्ध बना सकते हो. मुझे खुशी होगी. वैसा हम दोनों की तारफ से ही तुम पर किसी तारह की पाबंदी या दवाब नहीं है. तुम अपनी मर्जी के मालिक हो. जब भी चाहो यहाँ से सम्मानपूर्वक जा सकते हो. ये अलग बात है कि तुम्हारे साथ जिस्मानी रिश्ता बनाने की मेरी पर्सनल इच्छा है. मैं चाहती हूँ कि एक बार ही सही , तुम जैसे मनपसंद मर्द के साथ सम्बन्ध कायम करू. मेरे लिए इसलिए भी अच्छा है कि मेरे पति ने तुम्हें मेरे साथ सम्बन्ध बानाने की मंजूरी दे दी है. जब सब कोई राजी अहि तो प्रोब्लम क्या है ?
जुनैब- अभी तक यह बात मेरे गले नहीं उतर रही कि कोई इंसान अपने ही सामने अपनी पत्नी को गैर मर्द के सामने कैसे परोस सकता है . कहीं ऐसा तो नहीं कि इस बार तो वह भावनाओं में बहकर ये सब कह रहा हो मगर बाद में इससे इनकार करदे . हो सकता है कि हमसे भी दुश्मनी बांधले .
- कुछ नहीं होगा. तुम यहाँ मौज मस्ती करने के लिये आए हो, मौज मस्ती करो और जहां से आए हो वहाँ पर चलते बनो.
सलमा- अरे ठीक तो बोल रही थी. तुमने उसकी बात मानी क्यों नहीं ? खाओ-खुजाओ , बत्ती बुझाओ वाला रंग -ढंग भी आना चाहिए न, बिना उसके क्या है . कुछ भी नहीं . जब एक सुन्दर हसीना तुम्हारे पास बैठकर तुमसे प्रणय निवेदन कर रही है, उसका पति अपने सामने भी जिस्मानी सम्बन्ध बनाने का परमीशन दे चुका है तो तकलीफ कहाँ आती है . मेरे ख़याल से तो तुम्हें वो मौक़ा चूकना नहीं चाहिए था. गर्म लोहे पर हथोडा मारकर थोड़ा सा मजा ले लेना चाहिए था.

जुनैब- दिल से कहती हो या वैसे ही राम लगती कह रही हो ? कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरा मन रखने के लिए ये सब बोल रही हो. अगर दिल से कहती हो तो बोलो , मैं उसे किसी रात बुला लेता हूँ. उसके सामने ही मैं तुम्हारे साथ रंगरेलियां मनाता हूँ और तुम्हारे सामने मैं उसके साथ काम क्रीडा करता हूँ. बोलो मंजूर है ? वह अभी भी उपलब्ध है. कोई दिक्कत नहीं है.
सालमा- तुम मेरा इम्तिहान लेना चाहते हो तो ये भी सही , मुझे मंजूर है. जिस तरह फिल्म में कई लोग मिलकर सेक्स सम्बन्ध बना रहे हैं, ठीक उसी तरह हम भी करेंगे . तब तुम्हारा भी दिल देखती हूँ कितना बड़ा है. अगर तुम्हारी वो, क्या नाम बताया तुमने , मिसेज चोधरी ... अगर उसका पति यानी विजय चोधरी मेरे साथ सम्बन्ध बनाना चाहे तो तुम्हें चलेगा क्या ? क्या ये सब बर्दाश्त कर पाओगे ?
जुनैब- अरे वो तो अपनी पत्नी के साथ भी सुहागरात नहीं माना पाता , तो तुम्हारे साथ क्या ख़ाक सम्बन्ध बनाएगा ?और अगर वह सक्षम भी होता, कुछ कर भी पाता . और तुम्हारी इच्छा उसके साथ सम्बन्ध बनाने की होती तो मैं इनकार नहीं कर पाता . मैं भी प्यार करता हूँ तुमसे . तुम्हारी किसी आरजू को मैं दफ़न नहीं कर सकता.












Saturday, June 4, 2011

भाग-३२
मुझसे ज्यादा वह समझ रही थी. उसने थोड़ी सी दरियादिली दिखाते हुए मुझे अपने गले से लगा लिया. उससे मिलते समय मुझे महसूस हुआ जैसे कि हम दोनों की जोड़ी बिलकुल फिट थी जबकि चोधरी के साथ उसकी जोड़ी ज़रा भी अच्छी नहीं लग रही थी. हमारा परिचय कराने के बाद विजय चोधरी थोड़ी देर के लिए अलग हुआ तो उस महिला ने अपनी बाँहें मेरी तरफ फैलादी , मैं झिझक रहा था , उस झिझक को दूर करने के लिए वह बोली-
- अरे देख क्या रहे हो , आओ न. मेरी बांहों में समा जाओ. तुम्हें लगता है कि यह बुड्ढा मेरी तरसती जवानी को भला क्या सुकून दे पायेगा ? तुम मेरी उम्र के हो. मैं और तुम जी भरके प्यार करेंगे , लेकिन उससे पहले तुम्हें चोधरी को थोडा सा सुख देना होगा . अगर चोधरी साहब खुश तो समझो कि हम भी खुश , उसके बाद तुम मेरे साथ जो भी करोगे , उसे कोई ऐतराज नहीं होगा। दरअसल , वह दयालु व्यक्ति है, सीधा है, ईएमान्दार है । कभी किसीको तकलीफ नहीं देता। यहाँ तक कि अगर कोई चींटी भी उसके क़दमों के नीचे आ जाए तो वह विचलित हो जाता है। मगर उसको एक ही आदत गलत लग गयी है। वो ये कि तुम जैसे चिकने लड़कों को देखकर वह बेकाबू हो जाता है। उन लड़कों के साथ प्यार करने के लिए विचलित हो जाता है। वह इतना ज्यादा भावुक है कि अगर उसको मन पसंद लड़का नहीं मिला तो वह रोने लगता है। जब उसने तुम्हें देखा तो उसने मुझे एक मैसेज किया था। शायद तुमने उसके सामने लड़कियों में दिलचस्पी दिखाई थी, इसलिए उसने लिखा है कि मैं तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाने के लिए राजी हो जाऊं, मुझे भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इससे पहले मेरी तो शादी कहीं भी नहीं हुई थी मगर मेरे पति यानी विजय चोधरी दो शादियाँ कर चुके हैं। विचारों में भिन्नता होने के कारण वे दोनों ही इनसे तलाक ले चुकी हैं।, मगर मैं एडजस्ट कर लिया है। मैं कभी भी इनसे तलाक लेने वाली नहीं हूँ। मैं इन्हें खूब प्यार दूंगी और खूब ऐश करूंगी ।
जुनैब- आप तो इन्हें खूब प्यार कर सकती हैं मगर उसके बदले कक्या आपको कुछ नहीं चाहिए ?
- चाहिए न , उसके लिए तुम जैसे कितने ही मौजूहै। मेरे पति न मुझसे यह बात साफ़ कर दी है कि मैं उसके सामने भी मनपसंद मर्द के साथ अन्तरंग सम्बन्ध बना सकती हूँ। हांलाकि अभी तक ऐसा कभी हुआ नहीं है। मगर अब होने वाला है। मेरी सुहागरात आअज तुम्हारे साथ होगी , वो भी मेरे ही पति के साथ। मेरे पति न ही यह रास्ता निकाला है, जबसे मेरी शादी हुयी है, तब से लेकर आज तक मैंने कभी भी असली सुख नहीं भोगा। मेरा जिस्म तड़प रहा है। अरमान सुलग रहे हैं। आज मेरी ये सब इच्छाएं पूरी होने जा रही हैं।
-मगर ऐसा हो कैसे सकता है ?कोई इंसान अपनी पत्नी को किसी दुसरे की बांहों में कैसे देख सकता है। यहाँ तक कि उसे किसी गैर मर्द के साथ रति क्रिया करते कैसे देख सकता है। यह बात मैंने न तो कभी सुनी है और न देखी है। हाँ ये अलग बात है कि फिल्मों में ऐसी बातें अक्सर आती-जाती रहती हैं। अच्छा , पॉइंट पर आइये । क्या आपका पति आपको बिस्तर पर संतुष्ट नहीं कर सकता ?
- सच तो वही है जो तुम सोच रहे हो। उसने मुझसे भी पहले ही कह दिया था कि वे मुझे शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं कर सकते। इसके बावजूद अगर मैंने इनके साथ शादी की है तो इसका कारण ये है कि मैं बहुत गरीब घर से हूँ। इतना तो मैं भी जानती हूँ कि सबको पूरा जहाँ नहीं मिलता । किसीको जमीं तो किसीको आसमान नहीं मिलता। पहले नाभि से ऊपर भूख रहती थी अब नाभि के नीचे की भूख सताती है।
जुनैब- नाभि के नीचे की भूख को शांत करने के लिए तो हजारों लाखों मिल जायेंगे मगर पेट की भूख को शांत करना ही मुश्किल है।
- ठीक कह्ते हो । हमारे परिवार न भी बड़े कठिन दिन निकाले हैं। हमारी शादी को हुए एक हफ्ता हुआ है मगर अभी तक हम दोनों के बीच पति-पत्नी जैसे सम्बन्ध नहीं बन पाए हैं। तुम आये तो आस बंधी है, क्या तुम मेरी सहायता करोगे या मैं ऐसे ही तरसती रहूंगी । एक -एक बूँद की आस में रोटी रहूंगी ।
जुनैब- मैं अभी बच्चा हूँ, मैंने तो कभी भी ये सब काम नहीं किये। मैं जानता कि मैं तुम्हारी इस सम्बन्ध में क्या और कैसे मदद कर सकता हूँ। मुझे लगता है, आप लोगों न गलत आदमी को चुन लिया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं आखिर में तुम्हारे किसी काम के लायक ही न रहूँ ?
- विजय चोधरी का तो पता नहीं मगर जहां तक मेरा सवाल है , मैं जान ही गयी हूँ कि तुम ही मेरे सपनों के राजा हो,। जब से मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा है, तभी से मैंने तुम्हारे जैसे लड़के की आरजू की थी। तुम्हारे जैसे लड़के के सपने ही दिन रात देखा करती थी। तुम राजा - महाराजा लगते हो। तुम्हारी सूरत में जबरदस्त आकर्षण है।

Friday, June 3, 2011

भाग-३१
उसकी फ़िक्र मत करो. तुम्हारी इस आग को मैं बहुत जल्द ठंडा करवा दूंगा. जितनी भी प्यास जिस्म और जिगर में लगी है, उसे शांत करवा दूंगा. तुम्हें आनंद के उस लोक की सिर करवाउंगा जहाँ से लौटकर आने का मन ही नहीं चाहेगा. तुम जब-जब मुंबई आओगे, हमें जरूर याद करोगे
सलमा- ओह, तो आपने उस आदमी की बात मानी कि नहीं मानी ?
जुनैब- नहीं मानने का कोई कारण भी तो नहीं था. वह आदमी अपना आई कार्ड दिखा चुका तह, अपन विजिटिंग कार्ड दे चुका था, उसकी आँखों से भी सच्च्चाई झलक रही थी. किसी भी द्रष्टिकोण से ऐसा नहीं लगता था कि वह झूठ बोल रहा हो, हाँ, उसकी आँखों में जरूर वासना थी, ऐसी वासना जिसे देखते ही काम का ज्वर चढ़ने लगता था. मैं उसके साथ-साथ चल दिया . जब वह अपनी गाड़ी के पास आया तो मैं चौंक गया . उसकी गाड़ी बेहद आलीशान और मंहगी थी. मैंने किसी अखबार में उस गाड़ी के बारे में पढ़ रखा था, उसकी तस्बीर भी देखी थी. अखबार में उस विदेशी गाड़ी की कीमत एक करोड से ज्यादा बताई गयी थी. गाड़ी खुद वही व्यक्ति ड्राइव कर रहा था. उसका नाम विजय चोधरी था. बस कुछ मिनिट की ड्राइविंग के बाद ही हम लोग एक मंहगे कोम्प्लेक्स में प्रवेश कर रहे थे. उसने एक मंहगे और विशाल बंगले के लोन में गाड़ी रोक दी, यह चोंकने की मेरी दूसरी बारी थी. मैं सोच नहीं पा रहा था कि कोई व्यक्ति इतना अमीर भी हो सकता है, अमीर और बड़ा अधिकारी होकर वह ऐसा कार्य भी कर सकता है. घर में अपनी खूबसूरत पत्नी के होते हुए भी अगर कोई मर्द किसी दूसरे मर्द के गुप्त अंग को सहलाना चाहता है, उसे प्यार करना चाहता है या किसी मर्द के साथ प्रेम का खेल खेलने की बात कर सकता है. यह सब उसे काल्पनिक और अजीब लग रहा था. उसकी समझ में नहीं आया कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है, सच्चाई तो ये भी है कि वही सब जानने के लिए भी वह चोधरी के साथ आया था. उसके बंगले को कीमती चीजों से सजाया गया था. वह सीधा अपने बेडरूम में आ गया. उसका बेडरूम बहुत सुन्दर था, लेकिन जब वहाँ लगी तस्बीरों पर ध्यान गया तो वह हैरत में रह गया, उसने अपनी दीवारों पर कामुक तस्बीर लगा राखी थी, एक तस्बीर में एक लड़का दूसरे लड़के के खतरनाक अंग को सहला रहा था, दूसरे चित्र में एक लड़का दूसरे लड़के के होठों को चूम रहा था . इसी प्रकार एक चित्र बेहद डेंजर था. उस चित्र में एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्त अंग को चूस रहा था. इसे देखकर एक बार के लिए तो जुनैब का जी चाहा कि वह इस जगह को छोड़कर ही भाग जाए क्योंकि उसकी भावनाएं काबू में नहीं थीं, अब वह कामुक हो गया था. इतना ज्यादा उत्तेजक कि अपने बढे हुए अंग को वह अपने हाथों से मसलने का उप्क्रंम करने लगा . तभी एक महिला ने बेडरूम में प्रवेश किया. यह २० और २५ के बीच की महिला था. यानी कि चोधरी की आधी उम्र की थी , उसके चेहरे पर खुशी के भाव थे. वह समझ गया कि विजय चोधरी अपनी जिस पत्नी का जिक्र कर रहा था, वह वही थी. उसका अनुमान भी सही निकला. विजय चोधरी ने उसका परिचय अपनी पत्नी के रूप में कराया . वह हंसमुख महिला थी.
सलमा- अच्छा, उसे देखकर तो तुम्हारी बांछें खिल गयी होंगी, तुम्हारा यह अंग और भी ज्यादा बेकाबू हो गया होगा .
जुनैब- जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ, उलटा यह अंग कमजोर पड़ गया था, क्योंकि उसने अच्घानक कमरे में प्रवेश किया था. स्वभाविक रूप से मेरा मन कहीं बहक चुका था, दिमाग शायद उसीके बारे में सोच रहा था. इसी कारण मैं ठंडा पड़ गया . मैं उससे झिझक रहा था और इस बात को मुझसे ज्यादा वह समझ रही थी. उसने थोड़ी सी दरियादिली दिखाते हुए मुझे अपने गले से लगा लिया. उससे मिलते समय मुझे महसूस हुआ जैसे कि हम दोनों की जोड़ी बिलकुल फिट थी जबकि चोधरी के साथ उसकी जोड़ी ज़रा भी अच्छी नहीं लग रही थी. हमारा परिचय कराने के बाद विजय चोधरी थोड़ी देर के लिए अलग हुआ तो उस महिला ने अपनी बाँहें मेरी तरफ फैलादी , म,अं झिझक रहा था , उस झिझक को दूर करने के लिए बोली-
- अरे देख क्या रहे हो , आओ न. मेरी बांहों में समा जाओ. तुम्हें लगता है कि यह बुड्ढा मेरी तरसती जवानी को भला क्या सुकून दे पायेगा ? तुम मेरी उम्र के हो. मैं और तुम जी भरके प्यार करेंगे , लेकिन उससे पहले तुम्हें चोधरी को थोडा सा सुख देना होगा .

Thursday, June 2, 2011

भाग-३०
जुनैब- हाँ, बाबा . मैंने उससे कहा की वह इस काम को किसी दुसरे व्यक्ति के साथ क्यों नहीं कर लेता ? उसका ड्राईवर भी तो है, उसको कुछ अतिरिक्त पेमेंट देकर वह उसके गुप्त अंग को थोड़ी देर के लिए इस्तेमाल कर सकता था .
सलमा- बड़े होशियार हो, तब वह क्या बोला ?
जुनैब- वह मेरी तरफ बड़ी आस और प्यास भरी नजरों से देख रहा था. बोला-
- मेरा दिल तुम पर आ गया है. तुम जो मांगोगे दूँगा, बस प्यार करने की इजाजत दे दो, सिर्फ एक बार ....कभी एहसान नहीं मानूंगा . हम लोग अपने निकट के लोगों को ये सब नहीं बता सकते न , वरना वे बाद में मुझे ब्लेकमेल कर सकते हैं. देखो दिल लगी की बात होती है, मुझे तुम भले लगे इसलिए कुछ भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हूँ. मैं तुम्हें बता ही चुका हूँ कि इनकम टेक्स डिपार्टमेंट का अधिकारी हूँ. समाज का सम्मानित व्यक्ति हूँ, मुझे तुमसे किसी तरह की कोई हानि नहीं हो सकती . मुझे तुम जैसे चिकने लड़के बहुत पसंद आते हैं, जिनकी दाढी -मूंछ ठीक से नहीं निकले होते. उनका वह खास स्थान पर चकाचक साफ़ होता है, जिससे प्यार करने में आसानी होती है.
जुनैब- मेरे शरीर के किसी भी हिस्से पर अभी तक बाल नहीं है. मैं बिलकुल साफ हूँ. लेकिन एक मर्द अगर किसी लड़के को प्यार करे तो ये अच्छा नहीं लगता . बड़ा अजीब सा लगता है. मैं इसलिए इनकार कर रहा हूँ.
-अगर तुम चाहो तो मेरे घर पर चलकर ये सब बात कर सकते हो. हम दोनों एक दूसरे के विचार शेयर कर सकते हैं, वैसे इतना ध्यान रखिये कि मैं तुम्हारी भावनाओं का पूरा ख़याल रखूंगा , तुम्हारे मान -सम्मान का भी ध्यान रखूंगा. और रही इसकी बात कि तुम्हें लड़की अच्छी लगती है तो उसका भी इंतजाम हो जाएगा . तुम्हें अगर मौज मस्ती करनी है तो मेरी बीवी के साथ कर सकते हो. मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा. उसको भी कोई ओब्जेक्शन नहीं . अगर तुम मेरे साथ प्यार का खेल खेलते हो तो साथ में हम अपनी बीवी को भी शामिल कर लेंगे , जब तुम्हें और मुझे उत्तेजक अवस्था में देखेगी तो वह भी कामोत्तेजक हो जायेगी और वासना के दरिया में गोते लगाने लगेगी, उसी समय पर तुम हाथ साफ़ कर लेना. समझ रहे हो न. अगर मैं उससे कहूँ कि तुम जुनिअब के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना लो तो उसे ऐतराज नहीं होगा. वह जवान है, हेंडसम है, बिलकुल तुम्हारी टक्कर की है, उसे देखकर तुम भी खुश हो जाओगे . तुम्हारी भी लार टपकने लगेगी . तुम भी उसे देखते ही मोहित हो जाओगे और उस पर हावी होना चाहोगे , उसका फिगर इतना जबरदस्त है कि तुम उसके यौवन उभारों को सहलाना चाहोगे, उन्हें चूमना चाहोगे, उन्हें बार-बार और हर बार दबाना चाहोगे, उसकी काली, घनी जुल्फों में हाथ डालकर कंघी करना चाहोगे, उसके सुर्ख रसीले होठों का रसपान करना चाहोगे.
जुनैब- मैं समझ गया, आपने उनकी इतनी तारीफ कर दी है कि अभी से मेरे रौंगटे खड़े हो चुके हैं, देखो न मेरा यह संवेदनशील अंग भी फडफडाने लगा है, मैं बेचैन होने लगा हूँ, कहीं मैं किसी मुश्किल में तो नहीं फंसने जा रहा . सूना है कि यह माया नगरी है, यहाँ के लोगों पर जल्दी भरोसा नहीं किया जा सकता .
- सब सुनी-सुनाई बातें हैं, इनसे क्या होता है. हकीकत तो ये है कि यहाँ के लोग बड़े जिंदादिल और अपने तरीके से जिंदगी जीने वाले होते हैं,. यहाँ के लोग कभी किसीके साथ दगा नहीं करते बल्कि कुछ लेने के बदले देने में विशवास करते हैं,
जुनैब- ठीक है, मैं आप पर भरोसा करता हूँ. आपके साथ चलने के लिए तैयार हूँ,. तुमने इतना कुछ कह दिया है कि मैं अगले सात दिनों तक भी इश्क की आग में जलता रहूंगा .
- उसकी फ़िक्र मत करो. तुम्हारी इस आग को मैं बहुत जल्द ठंडा करवा दूंगा. जितनी भी प्यास जिस्म और जिगर में लगी है, उसे शांत करवा दूंगा. तुम्हें आनंद के उस लोक की सिर करवाउंगा जहाँ से लौटकर आने का मन ही नहीं चाहेगा. तुम जब-जब मुंबई आओगे, हमें जरूर याद करोगे .
सलमा- ओह, तो आपने उस अआद्मी की बात मानी कि नहीं मानी ?
जुनैब- नहीं मानने का कोई कारण भी तो नहीं था. वह आदमी अपना आई कार्ड दिखा चुका तह, अपन विजिटिंग कार्ड दे चुका था, उसकी आँखों से भी सच्च्चाई झलक रही थी. किसी भी द्रष्टिकोण से ऐसा नहीं लगता था कि वह झूठ बोल रहा हो, हाँ, उसकी आँखों में जरूर वासना थी, ऐसी वासना जिसे देखते ही काम का ज्वर चढ़ने लगता था.

Wednesday, June 1, 2011

भाग-२९
सलमा- अच्छा , अगर ये बात है तो इसका मतलब ये हुआ क्या की ये जो दिखा रहे हैं ये भी ट्रिक है ? यही न ?
जुनैब- जी , बिलकुल. मेरे कहने का अर्थ वास्तब में यही है. हांलाकि ये लोग एक हद तक खास द्रश्य देते हैं. यहाँ तक की अंग प्रद्रर्शन तो सचमुच करते ही हैं. मुझे ये बात एक खास व्यक्ति ने बताई है.
सलमा- तुम भी पहुंचे हुए उस्ताद लगते हो.
जुनैब- अगर मैं तुम्हें एक और बात बताऊंगा तो तुम्हारे पैरों के नीचे से जमीन खिसक जायेगी . तुम मदहोश हो जाओगी . उस बात पर तुम यकीन ही नहीं कर पाओगी .
सलमा- भला ऐसी भी क्या बात है, जिसे सुनकर मैं बेहोश हो जाउंगी, क्या इस लोक से अलग लोक की कहानी सुनाने जा रही हो ? या कोई ऐसी बात बता रहे हो जो कभी किसीने नहीं बताई हो. जल्दी बताओ , समय बर्बाद न करो .
जुनैब- नहीं , दुनिया से अलग तो नहीं है, मगर तुम्हारा परिचय जरूर अलग दुनिया से हो जाएगा , यह अविश्वसनीय कथा है. एक बार मैं अकेला घूमने गया था. यह जब की बात है तब मेरे पिताजी सांसद नहीं थे, वे पार्टी के साधारण कार्यकर्ता थे और टिकट के लिए संघर्ष कर रहे थे, मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने गया हुआ था. हम लोग मुंबई के होटल में रुके थे. हमारे पास कम पैसे ही थे . मैं अकेला ही शहर घूमने निकल पड़ा. मैं खर्चा करना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पैदल चलने में ही भलाई समझी, चलते-चलते मुझे एक शौचालय दिखाई दिया . मैं वहाँ पहुँच गया. वहाँ पर मैंने एक धनाढ्य व्यक्ति को देखा . वह मुझे घूर रहा था, मैंने महसूस किया की वह मुझसे कुछ कहना चाहता था, जब मैं पेशाब करने गया तो वह वह भी मेरे साथ हो लिया. अब स्थिति ऐसी हो गयी की वहाँ पर केवल हम दोनों लोग ही मौजूद थे. उसने मुझे पुछा-
-कहीं बाहर के रहने वाले हो क्या ? आज यहाँ पहली बार दिखाई दिए हो .
जुनैब- जी हाँ, मैं पहली बार इस शहर में आया हूँ. मैंने इससे पहले कभी आपको कहीं देखा नहीं. क्या हजम एक दुसरे से परिचित हैं ? क्या हम मिले हैं कभी ?
- नहीं, मगर अब मिलना चाहता हूँ. अगर तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे तो मैं तुम्हें पांच सौर रुपये नकद दूंगा ,
जुनैब- पहले काम तो बताइये , अगर कुछ ऐसा हुआ तो मैं बिना पैसे लिए ही आपकी सेवा कर सकता हूँ. कहिये क्या बात है ?
- तुम्हारे गुप्त अंग को मुझे अपने हाथ में लेकर चूमने दो, सहलाने दो. सिर्फ दस मिनिट का खेल है. मैं यहीं पास में रहता हूँ और इनकम टेक्स ऑफीसर हूँ, तुम्हें मुझसे कोई तकलीफ नहीं होगी. मैं सामाजिक व्यक्ति हूँ. बस मुझे यही एक गंदी आदत लग चुकी है. इस आदत को मैं चाहते हुए भी सुधार नहीं पा रहा हूँ. क्या तुम चलोगे मेरे साथ ? मैं तुम्हारा कोई अहित नहीं करूँगा , अगर तुम चाहो तो होटल की बजाय मेरे घर पर ही रह सकते हो. बिलकुल मुफ्त. तुम घूमने आये हो तो मेरी गाड़ी से आराम से घूम सकते हो, मेरा ड्राइवर तुम्हारी मनपसंद जगह तक ले जाएगा . बोलो , अगर मंजूर हो तो चलते हैं. यकीन करो किसीको पता भी नहीं चलेगा और सब काम भी काम भी हो जाएगा .
जुनैब- मैंने ऐसा काम कभी किया नहीं है .
- हर आदमी के लिए शुरुआत में हर काम पहली बार जरूर होता है, इसमें कोई नई या खास बात नहीं है. अगर कोई मुझे इतना अच्छा मौक़ा देता तो मैं किसी भी हालत में नहीं चूकता . ये समझलो की मुझे थोड़ी देर तक तुम्हारे इस खास अंग से प्यार करना है, प्रेम जताना कौन सी बुरी बात है. उसे प्रकट करना कौन सा गुनाह है, और ये भी तो सोचिये की इससे तुम्हें किसी भी तरह की कोई तकलीफ होने वाली भी नहीं है.
जुनैब- मुझे डर लग रहा है, मैं ऐसा काम नहीं करता, अगर तुमने इससे बढ़कर कुछ किया तो मैं क्या करूँगा. मैं इस शहर में नया हूँ. मैं तुम्हारी बातों पर भरोसा कैसेकरू ?
- क्या इसके लिए मेरा यह आइडेंटी कार्ड काफी नहीं रहेगा ? पढ़लो मैं एक वरिष्ठ अधिकारी हूँ, चाहो तो मेरा विजिटिंग कार्ड भी अपनी जेब में रखलो, इसमें मेरे घर और दफ्तर का पता लिखा हुआ है. अपनी सिक्योरिटी के लिए तुम अपने साथी को होटल में फोन करके उसे मेरा नंबर दे सकते हो, मेरा नाम भी बता सकते हो, और ये भी बता सकते हो की तुम मुझसे मिलने मेरे घर जा रहे हो.
सलमा- जब वो इतना अच्छा ऑफर दे रहा था और साथ में रहना -घूमना भी तो माने क्यों नहीं ? अरे वो तुमसे कुछ छीन थोड़े ही रहा था, प्यार ही तो कर रहा था.क्या बिगड जाता तुम्हारा ?
जुनैब- हाँ, बाबा . मैंने उससे कहा की वह इस काम को किसी दुसरे व्यक्ति के साथ क्यों नहीं कर लेता ? उसका ड्राईवर भी तो है, उसको कुछ अतिरिक्त पेमेंट देकर वह उसके गुप्त अंग को थोड़ी देर के लिए इस्तेमाल कर सकता था .
सलमा- बड़े होशियार हो, तब वह क्या बोला ?
जुनैब- वह मेरी तरफ बड़ी आस और प्यास भरी नजरों से देख रहा था. बोला-
- मेरा दिल तुम पर आ गया है. तुम जोप मांगोगे दूँगा, बस प्यार करने की इजाजत दे दो, सिर्फ एक बार ....कभी एहसान नहीं मानूंगा . हम लोग अपने निकट के लोगों को ये सब नहीं बता सकते न , वरना वे बाद में मुझे ब्लेकमेल कर सकते हैं.