लेकिन उसके बारे में बताने से पहले मैं तुम्हें कुछ और बताता हूँ , कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें प्यार नहीं मिला तो टेंशन और मिल गया तो भी टेंशन। एक मित्र हैं मैंने उनसे कहा तुम्हें किस बात की चिंता है। कहने लगे क्या करें यार जीवन खाली-खाली लगता है, कोई जिंदगी में होना चाहिए। दूसरे मित्र ने तपाक से जवादिया, अच्छा है जो अकेले हो वर्ना समझ में आ जाती कि जिंदगी में तूफान भी होते हैं।पता नहीं यह किसने कहा था कि प्यार टेंशन पैदा करता है और सेक्स उसे दूर करता है। और यह भी कि शादी विवेक पर मूर्खता की विजय है। एक चुटकुला भी है कि घड़ी और शादी में समानता यह की दोनों में ही बारह बजते हैं। धत्त तेरे की...कंडोम बनाने वाली प्रमुख कंपनी कामसूत्र ने भारत में एक सर्वेक्षण कराया था जिसमें लग बड़े शहरों में रहने वाले हजारों लोगों ने भाग लिया। सर्वेक्षण से आश्चर्यजनक तथ्य उभर कर आया कि 40 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने विवाह से पहले शारीरिक संबंध कायम किया था।सोचें 40 प्रतिशत लोग! क्या यह अच्छी बात है? भारत गाँवों में बसता है बाबूजी और गाँवों के लोग आज भी सच्चे और अच्छे हैं।.यह धारणा भी कितनी गलत है कि जोड़े स्वर्ग में तय होते हैं। 'रहस्य' और 'मनोविज्ञान' को जो जानते हैं वे तो शायद ऐसा नहीं कहेंगे। शादी के बारे में आमतौर पर कहा जाता हो कि यह एक ऐसा लड्डू है जिसे खाने वाला भी पछताता है और न खाने वाला भी। समझदार व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी कहावत पर शायद ही विश्वास करें।रॉबर्ट एप्सटेन ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति में किसी भी व्यक्ति के प्रति छह माह में प्यार जगाया जा सकता है। इसका यह मतलब हुआ कि प्यार होता नहीं किया जाता है।कुछ डॉ. अपने शोध के आधार पर कहते हैं कि प्यार एक बीमारी है और इस बीमारी का इलाज है सिर्फ सेक्स। यदि प्रेम के इजहार का मौका नहीं मिलता तो बीमारी और बढ़ जाती है, हो सकता है कि वे गुस्सा, अवसाद या किसी अन्य मानसिक रोग से ग्रस्त हो जाएँ। इसे 'लव सिकनेस' कहते
खैर यह तो बात प्यार के इजहार से जुड़ी है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इजहार कर ही दिया तो फिर नया खेल शुरू होता है जो कुछ दिन तक तो अच्छे अहसास के साथ चलता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसमें टेंशन पैदा होने लगता है।बेवफाई का डर भीतर ही भीतर सालता रहता है। यदि प्यार में बेवफाई का सामना करना पड़े तो फिर दिल के दौरे की संभावना बढ़ सकती है बशर्ते कि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से कितने जुड़े हैं यह इस पर तय होता है।तमाम शोध और तमाम बेवकूफी भरे वाक्य प्यार की ताकत को झुठला नहीं सकते और ना ही उसे सेक्स से जोड़ सकते हैं। सेक्स आपके जीवन का अहम हिस्सा हो सकता है, लेकिन प्यार का स्थान उससे कहीं ऊँचा है। मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं॥
छमिया- ये सब सुनकर बड़ा मजा आ रहा है ॥
मुंशीजी-असली मजा तो अभी दूर है
Saturday, January 23, 2010
भाग-१२
छमिया- मुझे कुछ प्रेम के टिप्स चाहिए, आप तो खेले खाए खिलाड़ी हो, बहुत दुनिया देखी है. मैं सब कुछ जांउगी, उसके बाद तुम्हें इस अमृत रस का स्वाद चखने को मिलेगा.
मुंशीजी-इतना तडपना भी ठीक नहीं है, क्यों मुझे परेशान कर रही हो, मैं तरस रहा हूँ तुम्हारे यौवन का मजा लेने के लिए. साथ में तुम्हें भी इतनी खुशी दूंगा कि फूली नहीं समाओगी.
छमिया- मेरे लिए तो अभी जिंदगी पडी है , मुंशीजी. तुम अपनी बात कहो. तुम्हारी जीभ ही लार दाल रही है तो पहले मुझे उन रास्तों से वाकिफ कराओ जिन पर चलकर मुझे मंजिल तक पहुचना है.
मुंशीजी- जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, मैं जो कहता हूँ वही करता हूँ या यूं समझिए कि बस उतना ही कहता हूँ जितना कि मैं कर सकता हूँ. मैं तुम्हें प्यार करने के तरीके जरूर सिखाऊँगा , कुछ प्रेम कहानियाँ भी सुनाउंगा और अपने नौभावों से भी अवगत कराऊंगा . ठीक है ? बोलो सबसे पहले क्या जानना चाहोगी ?
छमिया- तुम्हारा सबसे पहला प्रेम कौन था ? क्या वह अब भी मुलाक़ात करती है , क्या तुमने उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये थे ?
मुंशीजी- उससे प्यार था या नहीं लेकिन इतना बताता हूँ कि मैंने एक अधेड औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाये थे, या ये समझो कि उसने मुझे इसके लिए तैयार कर लिए था. मैं तो कुछ भी जानता ही नहीं था, इस सबसे अनजान था , लेकिन उसने मेरी जिस्मानी भूख को बढाने और फिर उसे शांत करने का काम किया. उसके बड़े- बड़े तीन बच्चे थे, वह ओर रंग कि खूबसूरत और थोड़ी सी मोटी महिला थी, जब वह हँसती तो उसके गालों में गड्ढे पड़ जाया करते थे, जिसने भी उसको हँसते हुए देख लिया वह उसका दीवाना हुए बिना नहीं रहता था, मुझे लगता है कि ज्यादातर कम उम्र की लड़कियों के साथ उम्रदराज पुरुष पहले जिस्मानी सम्बन्ध बना डालते हैं और कम उम्र की हसीं लडकियां हम जैसों के चक्कर में आ जाती हैं और अपना कुंवारापन समर्पित कर देटी हैं, यह इस तरह का चक्रव्यूह है .
छमिया- तो उस महिला के साथ तुमने शारीरिक सम्बन्ध कब बनाए ?
मुंशीजी- यह बहुत जल्दी हो गया था, वह महिला अचानक मुझे जजूस की दूकान पर मिल गयी, हलकी सी जान पहचान हुयी और जैसा कि मैंने बताया उसकी मनमोहक मुस्कान मेरा दिल ले गयी, बातों ही बातों में उसने मुझे घर चलने का ऑफर दे दिया. वे दो थीं, मैंने भी हाँ कहदी. गर्मियों का समय था , वह मुझे अपने किराए के छोटे से घर में ले गयी. वहाँ पर कोई भी मौजूद नहीं था, उसने मुझे बताया कि उसके बच्चे छुट्टियों में कहीं बाहर गए हुए हैं, उसका पति भी कहीं बाहर गया था,उन्होंने अपना खुद का घर बनाने के लिए एक प्लाट खरीदी थी, वह उसी के सिलसिले में बेचनी वाले से मिलने गया था. उस महिला ने मुझे ठंडा शरबत पिलाया और झुककर जब गिलास उठाने लगी तो उसका पल्लू सरक गया. मुझे उसके यौवन के उभार नजर आने लगे थे, मेरा दिल डोलने लगा , मैंने उसकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ की तो वह मेरे पास बैठ गयी और उसने अपने खुले बालों को जब एक झटका दिया तो वे काली नागिन कि तरह बल खाने लगे. उसकी आँखें कंजी थीं, बिलकुल बिल्ली की तरह . जब उसने मुझे सर से पाँव तक घूरकर देखा तो मैं सहम गया. मैंने घर जाने की इजाजत माँगी तो उसने आराम करने का सुझाव दिया,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया. आखिरकार मैं लेट गया तो वह मेरे सर में तेल डालकर मालिस करने लगी , कुछ ही देर में मेरी सोने की इच्छा जागृत होने लगी लेकिन मैं आखी ऐसा कैसे कर सकता था. मैंने कांपते हाथों से उसके यौवन कि गोलाइयों को दबाना शुरू कर दिया.
छमिया- मुझे कुछ प्रेम के टिप्स चाहिए, आप तो खेले खाए खिलाड़ी हो, बहुत दुनिया देखी है. मैं सब कुछ जांउगी, उसके बाद तुम्हें इस अमृत रस का स्वाद चखने को मिलेगा.
मुंशीजी-इतना तडपना भी ठीक नहीं है, क्यों मुझे परेशान कर रही हो, मैं तरस रहा हूँ तुम्हारे यौवन का मजा लेने के लिए. साथ में तुम्हें भी इतनी खुशी दूंगा कि फूली नहीं समाओगी.
छमिया- मेरे लिए तो अभी जिंदगी पडी है , मुंशीजी. तुम अपनी बात कहो. तुम्हारी जीभ ही लार दाल रही है तो पहले मुझे उन रास्तों से वाकिफ कराओ जिन पर चलकर मुझे मंजिल तक पहुचना है.
मुंशीजी- जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, मैं जो कहता हूँ वही करता हूँ या यूं समझिए कि बस उतना ही कहता हूँ जितना कि मैं कर सकता हूँ. मैं तुम्हें प्यार करने के तरीके जरूर सिखाऊँगा , कुछ प्रेम कहानियाँ भी सुनाउंगा और अपने नौभावों से भी अवगत कराऊंगा . ठीक है ? बोलो सबसे पहले क्या जानना चाहोगी ?
छमिया- तुम्हारा सबसे पहला प्रेम कौन था ? क्या वह अब भी मुलाक़ात करती है , क्या तुमने उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये थे ?
मुंशीजी- उससे प्यार था या नहीं लेकिन इतना बताता हूँ कि मैंने एक अधेड औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाये थे, या ये समझो कि उसने मुझे इसके लिए तैयार कर लिए था. मैं तो कुछ भी जानता ही नहीं था, इस सबसे अनजान था , लेकिन उसने मेरी जिस्मानी भूख को बढाने और फिर उसे शांत करने का काम किया. उसके बड़े- बड़े तीन बच्चे थे, वह ओर रंग कि खूबसूरत और थोड़ी सी मोटी महिला थी, जब वह हँसती तो उसके गालों में गड्ढे पड़ जाया करते थे, जिसने भी उसको हँसते हुए देख लिया वह उसका दीवाना हुए बिना नहीं रहता था, मुझे लगता है कि ज्यादातर कम उम्र की लड़कियों के साथ उम्रदराज पुरुष पहले जिस्मानी सम्बन्ध बना डालते हैं और कम उम्र की हसीं लडकियां हम जैसों के चक्कर में आ जाती हैं और अपना कुंवारापन समर्पित कर देटी हैं, यह इस तरह का चक्रव्यूह है .
छमिया- तो उस महिला के साथ तुमने शारीरिक सम्बन्ध कब बनाए ?
मुंशीजी- यह बहुत जल्दी हो गया था, वह महिला अचानक मुझे जजूस की दूकान पर मिल गयी, हलकी सी जान पहचान हुयी और जैसा कि मैंने बताया उसकी मनमोहक मुस्कान मेरा दिल ले गयी, बातों ही बातों में उसने मुझे घर चलने का ऑफर दे दिया. वे दो थीं, मैंने भी हाँ कहदी. गर्मियों का समय था , वह मुझे अपने किराए के छोटे से घर में ले गयी. वहाँ पर कोई भी मौजूद नहीं था, उसने मुझे बताया कि उसके बच्चे छुट्टियों में कहीं बाहर गए हुए हैं, उसका पति भी कहीं बाहर गया था,उन्होंने अपना खुद का घर बनाने के लिए एक प्लाट खरीदी थी, वह उसी के सिलसिले में बेचनी वाले से मिलने गया था. उस महिला ने मुझे ठंडा शरबत पिलाया और झुककर जब गिलास उठाने लगी तो उसका पल्लू सरक गया. मुझे उसके यौवन के उभार नजर आने लगे थे, मेरा दिल डोलने लगा , मैंने उसकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ की तो वह मेरे पास बैठ गयी और उसने अपने खुले बालों को जब एक झटका दिया तो वे काली नागिन कि तरह बल खाने लगे. उसकी आँखें कंजी थीं, बिलकुल बिल्ली की तरह . जब उसने मुझे सर से पाँव तक घूरकर देखा तो मैं सहम गया. मैंने घर जाने की इजाजत माँगी तो उसने आराम करने का सुझाव दिया,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया. आखिरकार मैं लेट गया तो वह मेरे सर में तेल डालकर मालिस करने लगी , कुछ ही देर में मेरी सोने की इच्छा जागृत होने लगी लेकिन मैं आखी ऐसा कैसे कर सकता था. मैंने कांपते हाथों से उसके यौवन कि गोलाइयों को दबाना शुरू कर दिया.
Thursday, January 21, 2010
भाग-11
मैंने उससे विस्तार से कहा- कई बार हमें लगता है जीवन में हर चीज सही जगह ठिकाने पर है। हमारे रिश्ते, हमारा काम, सभी कुछ वैसा ही चल रहा है, जैसा हमने सोचा है। हमें महसूस होता है कि जीवन के हर पहलू को हम अपनी मर्जी से स्वरूप दे रहे हैं। इन सारे अहसासात के साथ हम तब तक बेहद सुकून से जीते रहते हैं जब तक कोई अप्रत्याशित घटना हमें आकर झकझोर न दे। उस समय हमें समझ में आता है कि हमारी पकड़ तलवार पर इसलिए मजबूत थी क्योंकि पानी का रुख भी उधर का ही था। अब जब बहाव अलग दिशा में है तो हमारी नैया डगमगाने लगी है। जिस सोच को हम जितना व्यवस्थित और सुनियोजित मानकर चल रहे थे, दरअसल, उसकी सारी बुनियाद ही गलत नजर आने लगती है। फिर बार-बार यही अफसोस और पछतावा होता है काश यह बात हमें बहुत पहले समझ में आ जाती। उनकी मुश्किल यह है कि वह अपनी यह मनोदशा अपनी दोस्त के सामने बयान नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें लगता है यदि दोस्त ने नाराज होकर दोस्ती तोड़ ली तो वह और भी मानसिक उलझन में पड़ जायेंगे इतने वर्षों तक जब वह केवल आपकी दोस्त थी और आपके मन में कभी प्रेम प्रस्ताव की भावना नहीं आई तो अब क्यों आप इतने विचलित हो रहे हैं। आपने शायद इसीलिए ऐसा किया होगा कि आप उन्हें मात्र मित्र के रूप में ही देखते होंगे। जब किसी अन्य व्यक्ति ने उसके सामने प्रेम का प्रस्ताव रखा तो उसे ठीक लगने पर उसने स्वीकार कर लिया। एक बात बताएँ कोई लड़की जिसे आप पसंद करते और वह आपके सामने प्रेम प्रस्ताव रखती तो आप क्या करते? क्या आप यह सोचते हैं कि जीवन भर आप वो दोस्त बने रहते और आप लोगों के जीवन में किसी को भी नहीं आना चाहिए। पूरी जिंदगी मित्रता के नाम। ऐसा भी संभव है, पर ऐसा कोई समझौता भी नहीं था आपके बीच। फिर यह हाय तौबा क्यों?दरअसल, हर क्षेत्र में हम एकाधिकार रखने के लिए तड़पते रहते हैं। संयोगवश जब तक कोई उसमें घुसपैठ नहीं करता है, वह हमारी आदत बन जाती है और किसी भी आदत को छोड़ना कभी भी आसान नहीं होता। सारे तर्क धरे रह जाते हैं। दोस्ती से बहुत ज्यादा निजीपन और नजदीकी लिए होता है प्रेम का रिश्ता। उन दोनों के एक हो जाने से हम खौफजदा हो गए हैं।हमको लगता है आप दोयम स्थान पर खड़े हैं। आप पछताते रहते हैं कि आपने पहले अपनी भावना को क्यों नहीं समझा। आपको अफसोस हो रहा है कि आज जो प्रेम आप अपनी दोस्त के लिए महसूस कर रहे हैं, क्यों नहीं इसका इजहार आपने पहले किया। कई बार ऐसा होता है कि हम बाजार से बहुत ही खूबसूरत रंग का एक लिबास खरीद कर लाते हैं। उसे बार-बार देखते हैं और अपनी पसंद पर फख्र करते हैं। यदि किसी ने उसकी तारीफ कर दी तो हम बड़ी शान से बोलते हैं कि बहुत सारे रंगों के बीच से चुना है हमने यह रंग। देखो हमारी पसंद लाजवाब है पर फिर एक दिन हम उसी रंग से मिलता-जुलता एक शेड देखते हैं और वह हमें इतना ज्यादा अच्छा लगता है कि हमारा चुना हुआ रंग बेहद भद्दा लगने लगता है। अफसोस होता है क्यों जल्दबाजी की, थोड़ा और समय लगा लेते तो क्या बिगड़ जाता। ऐसी बातें आए दिन होती रहती हैं और हम भूल जाते हैं क्योंकि इसमें थोड़ा पैसा और समय लगा होता है पर रिश्तों में हमारी ढेर सारी भावनाएँ लगी होती हैं और जब वहाँ विकल्प के कारण कोई हाथ से जा रहा होता है तो हम कराह उठते हैं कि काश वह विकल्प हम ही होते। रिश्ते में यदि दिमाग साफ रखा जाए तो तकलीफ कम होती है और व्यवहार करना आसान हो जाता है। नए रिश्ते से आहत व विचलित होने के बजाय आप तीनों अच्छे दोस्त बन जाएँ और अपने लिए एक साथी की तलाश करें।सामजिक रीति रिवाज से आपकी शादी हो चुकी है, अब उसे ही अपनाएं.
छमिया- मुझे सीधे तरीके से समझाओ , इस तरह के उदाहरण थोड़ी देर से मेरी समझ में आते हैं.
मुंशीजी- मेरे कहने का अर्थ ये है कि अगर तुम मुझे दिल से स्वीकार करोगी तो मेरे साथ एक ही बिस्तर पर सोने में तुम्हें कोई तकलीफ नहीं आएगी. तुम बड़ी आसानी से प्रणय क्रीडा कर सकोगी , यहाँ तक कि उसमे खूब आनंद भी उठा सकोगी
छमिया- मुझे सीधे तरीके से समझाओ , इस तरह के उदाहरण थोड़ी देर से मेरी समझ में आते हैं.
मुंशीजी- मेरे कहने का अर्थ ये है कि अगर तुम मुझे दिल से स्वीकार करोगी तो मेरे साथ एक ही बिस्तर पर सोने में तुम्हें कोई तकलीफ नहीं आएगी. तुम बड़ी आसानी से प्रणय क्रीडा कर सकोगी , यहाँ तक कि उसमे खूब आनंद भी उठा सकोगी
Wednesday, January 20, 2010
भाग -10
भाग-१०
उसकी बातों से मुंशीजी को बड़ी तसल्ली हुई थी, दिल में आशाओं के फूल खिलने लगे, दरअसल छमिया ने अपनी बात इस अंदाज में कही थी कि उसको न मानने का सवाल ही नहीं उठता था. जब किसीको भरोसा हो जाता है तो फिर मन में शान्ति हो जाती है. ५० साल के ऊपर के मुंशीजी के जीवन में अब कुछ खास अभिलाषा नहीं थी, सिवाय इसके कि वे अब अपना आगे का समय चैन –सुकून के साथ गुजारें , और उन्होने जो दौलत कमाई थी उसमे से आधी तो अपने भाई को दे दें और आधी छमिया को. और वैसे भी उन्होंने अपने नाम तो बहुत कुछ जमा कर रखा था. उन्हें याद आने लगे वे दिन जब गाँव वालों को लूट –लूटकर धन संग्रह किया करते थे, उन्हें याद आने लगे वे क्षण जब उन्होंने लोगों के खेत , घर और प्लाट को बहुत कम रुपये में गिरवी रख लिया था. इस तरह लोगों का धन लूट-लूटकर उन्होंने करोड़ों की संपत्ति बना ली थी, उन्होंने छमिया से कहा-
-तुम्हारी बातों से मन खुश हो गया है, मैं अपनी खुशी का बखान नहीं कर सकता. मुझे तुम्हारी बातों पर यकीन है, तुम कोई भी सवाल करो , मैं तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूंगा. मैन तुम्हारी बिना मर्जी के तुमसे कभी प्रेम नहीं करूँगा. एक बार मुझसे एक लड़के ने पूछा था-
लग गई है , जिसके कारण मेरा स्टडी में मन नहीं लगता है। पिछले कुछ दिनों से मुझे ब्लू फिल्म देखने की आदत सी लग गई है। जब तक दिन में एक या दो ब्लू फिल्म मैं देख न लूं , तब तक मुझे चैन नहीं आता है। मैं रोज़ इंटरनेट के जरिए एक या दो ब्लू फिल्म देखता हूं।
जब मैं स्टडी करने बैठता हूं , तो इस कारण मेरा मन उसमें बिल्कुल नहीं लगता है और मुझे नींद आने लगती है। मन आलस से भर जाता है और ब्लू फिल्म के दृश्य जहन में दौड़ने लगते हैं। इसके चलते मैं आजकल बहुत परेशान रहने लगा हूं। इस बुरी लत के कारण मेरा जीवन बर्बाद हो रहा है। मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। इस बुरी लत से कैसे पीछा छुटेगा और फिर मेरा मन पढ़ाई में लगने लगेगा ? मैं इस पर सुझाव चाहता हूं।
छमिया- फिर क्या कहा तुमने ? क्या तुम भी उसके समर्थन में थे ?
मुंशीजी- मैंने उसे बहुत समझाया , मगर माने तब न . आखिरकार कुछ दिनों बाद वह खुद ही सब कुछ समझ गया, आखिर जब जीवन बर्बाद होने लगा तो खुद ही अक्ल आ गयी.एक बार मैंने एक और युवक कि समस्या हल कर दी थी, उसने बताया था कि -
मेरी शादी दो साल पहले हुई थी। हम एक - दूसरे से बहुत प्यार करते थे। शुरू में हमारा वक्त बहुत अच्छा बीता। लेकिन बाद में कुछ लोगों ने मेरी बीवी को भड़का दिया। फिर हम दोनों में लड़ाई होने लगी।
किसी तरह मैंने उसे समझाया। हमारे बीच सुलह हो गई। उसके बाद मैं कुवैत आ गया। लेकिन मेरे आने के बाद उसका रवैया फिर बदल गया। बात - बात पर शिकायत। मैं उसे समझाता था , पर वह कुछ सुनने को तैयार नहीं होती थी। वह मुझसे तलाक चाहती थी। मेरे मना करने पर वह मुझे धमकी देने लगी।
दबाव में आकर मैंने फोन पर एक बार वह शब्द बोल दिया और वह मुझसे अलग हो गई। उसके बाद मैं बहुत परेशान रहने लगा। मेरी परेशानी को देखते हुए मेरे घर वालों ने मेरी दूसरी शादी करवा दी। लेकिन , मैं उसको नहीं भूल पाया। आज भी मैं उसको चाहता हूं। मैं उसे दोबारा लाना चहाता हूं। उसके बिना मैं मर जाऊंगा। क्या करूं , कुछ समझ में नहीं आ रहा।जानती हो मैंने उसे क्या बताया ?
उसकी बातों से मुंशीजी को बड़ी तसल्ली हुई थी, दिल में आशाओं के फूल खिलने लगे, दरअसल छमिया ने अपनी बात इस अंदाज में कही थी कि उसको न मानने का सवाल ही नहीं उठता था. जब किसीको भरोसा हो जाता है तो फिर मन में शान्ति हो जाती है. ५० साल के ऊपर के मुंशीजी के जीवन में अब कुछ खास अभिलाषा नहीं थी, सिवाय इसके कि वे अब अपना आगे का समय चैन –सुकून के साथ गुजारें , और उन्होने जो दौलत कमाई थी उसमे से आधी तो अपने भाई को दे दें और आधी छमिया को. और वैसे भी उन्होंने अपने नाम तो बहुत कुछ जमा कर रखा था. उन्हें याद आने लगे वे दिन जब गाँव वालों को लूट –लूटकर धन संग्रह किया करते थे, उन्हें याद आने लगे वे क्षण जब उन्होंने लोगों के खेत , घर और प्लाट को बहुत कम रुपये में गिरवी रख लिया था. इस तरह लोगों का धन लूट-लूटकर उन्होंने करोड़ों की संपत्ति बना ली थी, उन्होंने छमिया से कहा-
-तुम्हारी बातों से मन खुश हो गया है, मैं अपनी खुशी का बखान नहीं कर सकता. मुझे तुम्हारी बातों पर यकीन है, तुम कोई भी सवाल करो , मैं तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूंगा. मैन तुम्हारी बिना मर्जी के तुमसे कभी प्रेम नहीं करूँगा. एक बार मुझसे एक लड़के ने पूछा था-
लग गई है , जिसके कारण मेरा स्टडी में मन नहीं लगता है। पिछले कुछ दिनों से मुझे ब्लू फिल्म देखने की आदत सी लग गई है। जब तक दिन में एक या दो ब्लू फिल्म मैं देख न लूं , तब तक मुझे चैन नहीं आता है। मैं रोज़ इंटरनेट के जरिए एक या दो ब्लू फिल्म देखता हूं।
जब मैं स्टडी करने बैठता हूं , तो इस कारण मेरा मन उसमें बिल्कुल नहीं लगता है और मुझे नींद आने लगती है। मन आलस से भर जाता है और ब्लू फिल्म के दृश्य जहन में दौड़ने लगते हैं। इसके चलते मैं आजकल बहुत परेशान रहने लगा हूं। इस बुरी लत के कारण मेरा जीवन बर्बाद हो रहा है। मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। इस बुरी लत से कैसे पीछा छुटेगा और फिर मेरा मन पढ़ाई में लगने लगेगा ? मैं इस पर सुझाव चाहता हूं।
छमिया- फिर क्या कहा तुमने ? क्या तुम भी उसके समर्थन में थे ?
मुंशीजी- मैंने उसे बहुत समझाया , मगर माने तब न . आखिरकार कुछ दिनों बाद वह खुद ही सब कुछ समझ गया, आखिर जब जीवन बर्बाद होने लगा तो खुद ही अक्ल आ गयी.एक बार मैंने एक और युवक कि समस्या हल कर दी थी, उसने बताया था कि -
मेरी शादी दो साल पहले हुई थी। हम एक - दूसरे से बहुत प्यार करते थे। शुरू में हमारा वक्त बहुत अच्छा बीता। लेकिन बाद में कुछ लोगों ने मेरी बीवी को भड़का दिया। फिर हम दोनों में लड़ाई होने लगी।
किसी तरह मैंने उसे समझाया। हमारे बीच सुलह हो गई। उसके बाद मैं कुवैत आ गया। लेकिन मेरे आने के बाद उसका रवैया फिर बदल गया। बात - बात पर शिकायत। मैं उसे समझाता था , पर वह कुछ सुनने को तैयार नहीं होती थी। वह मुझसे तलाक चाहती थी। मेरे मना करने पर वह मुझे धमकी देने लगी।
दबाव में आकर मैंने फोन पर एक बार वह शब्द बोल दिया और वह मुझसे अलग हो गई। उसके बाद मैं बहुत परेशान रहने लगा। मेरी परेशानी को देखते हुए मेरे घर वालों ने मेरी दूसरी शादी करवा दी। लेकिन , मैं उसको नहीं भूल पाया। आज भी मैं उसको चाहता हूं। मैं उसे दोबारा लाना चहाता हूं। उसके बिना मैं मर जाऊंगा। क्या करूं , कुछ समझ में नहीं आ रहा।जानती हो मैंने उसे क्या बताया ?
Tuesday, January 19, 2010
गुरूवार अंक में प्रकाशित होने के लिए एडवांस , भाग-9
भाग- ९
छमिया- तो फिर पहले एक लाख रुपये मेरे एकाउंट में जमा करा सकते हो ? आज की तारीख में ?
मुंशीजी- इसका मतलब तुम मान गयी. आज मैं बहुत खुश हूँ. मेरे कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं. मैं तो पहले ही समझ गया था कि तुम्हारा और मेरा किसी पुराने जन्म का मेल है, बिछुड गए होंगे इसलिए इस जन्म में मिल रहे हैं. मैं अभी एक लाख रुपये तुम्हारे एकाउंट में जमा करने कि व्यवस्था करता हूँ, लेकिन फिर आज की रात सुहागरात होगी
छमिया- अगर तुम अपने वादे पर खरे उतारते हो तो मेरी तरफ से तुम्हें निराशा हाथ नहीं लगेगी. तुम्हें मालूम ही है, मैं भले ही मुंह से भौंकती रहती हूँ लेकिन हूँ तो दिल की साफ़. जो डील करूंगी सच्ची करूंगी, और हाँ,तुम भी अपने वादे से मत मुकरना , मेरे भाई –बहनों का भविष्य तुम्हारे हाथ है, उन्हें किसी अच्छे स्कूल में पढाने कि जिम्मेदारी तुम्हारी है.
मुंशीजी- ठीक है, इसकी व्यवस्था भी कल कर दी जायेगी.बढ़िया बोर्डिंग स्कूल में उनका दाखिला करा देता हूँ, उसने खर्चे और फीस आदि का इंतजाम भी करवा देता हूँ, लेकिन मुझे सिर्फ तुम्हारा तन ही नहीं मन भी चाहिए. सिर्फ मांस के लोथड़े के साथ खिलवाड करना मुझे पसंद नहीं, मेरी इच्छा है कि तुम मेरी दुल्हन की तरह रहो. मैं तुम्हारा ख़याल रखूँ और तुम मेरा ख़याल रखो.
छमिया-क्या तुम्हें लगता है कि यह सब इतना आसान है ? कोई किसीको बदन तो सौंप सकता है मगर मन और आत्मा के समर्पण के लिए तो कुछ समय चाहिए, बिना वक्त दिए यह संभव नहीं, अगर कोई दावा करे तो झूठा होगा. पहले मुझे समझाइये कि सेक्स क्या है ? प्यार क्या है ? इसे कैसे किया जाता है ? कैसे असुरक्षित सेक्स से तकलीफें होती हैं , कैसे नहीं होतीं ? जब तक मुझे विस्तार से नहीं बताओगे तब तक किसी दिल लेने कि बात वृथा है .
मुंशीजी समझ गए कि पहले उसको समझाना होगा, उसके मन में सेक्स को लेकर जो डर और भ्रान्तियां हैं उनको निकालना होगा , वरना वह तो यही समझेगी कि चुम्बन लेने से गर्भवती हो जाते हैं, जैसा कि वह इससे पहले सोच रहीए थी. उसने छमिया के सुर्ख लाल गालों पर एक चुम्बन जड़ते हुए मीठे शब्दों में कहा-
-तुम्हें डरने या घबराने कि कोई जरूरत नहीं है, मैं तुम्हारा प्यार चाहता हूँ, मैं मोहब्बत करने में विश्वाश रखता हूँ, बलात्कार करने में नहीं, जब तुम्हें ऐसा लगने लगे कि मैं तुम्हें चाहता हूँ और तुम्हारे तन –मन पर मेरा हक है, तभी तुम जिस्म समर्पित करना, उसी पहले नहीं, मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि कभी तुम्हारे साथ जोर जबर्दस्तई नहीं के जायेगी, मैं तुम्हें इसके बारे में विस्तार से समझाउंगा, लेकिन हर रात तुम्हें मेरे साथ बितानी होगी. मैं इतना ही कह सकता हूँ कि जब तुम कहोगी तभी तुम्हारे साथ प्रणय क्रीडा करूँगा, बोलो मंजूर है ?
छमिया- ठीक है, मुझे मंजूर है , मगर हर रात तुम मेरे एक सवाल का जवाब दोगे ?
मुंशीजी- ठीक है, जितना मैंने सीखा है, और जितनी मेरी क्षमता है, मैं जरूर उतना बताने कि कोशिश करूँगा , म्साथ ही यह भी ध्यान रहे कि मेरे साथ धोखा बाजी नहीं चलेगी, जब मैं लाखों रुपये किसी कि जिंदगी बनाने में खर्च कर सकता हूँ तो उसे बर्बाद करने के लिए किसी भी हद से गुजर सकता हूँ.
छमिया- आज कह दिया सो कह दिया, आइन्दा मत कहना, मैं ऐ जो भी कह दिया सो कह दिया. छमिया अपनी जुबान कटवा सकती है लेकिन जुबान गिरा नहीं सकती, मैं अपना कुंवारा जिस्म अगर इस दुनिया में क्सीको समर्पित करुँगी तो वो तुम हो, तुम्हारे अलावा मेरे इस बदन से कोई स्पर्श बी ही नहीं कर सकता, चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए.
.
छमिया- तो फिर पहले एक लाख रुपये मेरे एकाउंट में जमा करा सकते हो ? आज की तारीख में ?
मुंशीजी- इसका मतलब तुम मान गयी. आज मैं बहुत खुश हूँ. मेरे कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं. मैं तो पहले ही समझ गया था कि तुम्हारा और मेरा किसी पुराने जन्म का मेल है, बिछुड गए होंगे इसलिए इस जन्म में मिल रहे हैं. मैं अभी एक लाख रुपये तुम्हारे एकाउंट में जमा करने कि व्यवस्था करता हूँ, लेकिन फिर आज की रात सुहागरात होगी
छमिया- अगर तुम अपने वादे पर खरे उतारते हो तो मेरी तरफ से तुम्हें निराशा हाथ नहीं लगेगी. तुम्हें मालूम ही है, मैं भले ही मुंह से भौंकती रहती हूँ लेकिन हूँ तो दिल की साफ़. जो डील करूंगी सच्ची करूंगी, और हाँ,तुम भी अपने वादे से मत मुकरना , मेरे भाई –बहनों का भविष्य तुम्हारे हाथ है, उन्हें किसी अच्छे स्कूल में पढाने कि जिम्मेदारी तुम्हारी है.
मुंशीजी- ठीक है, इसकी व्यवस्था भी कल कर दी जायेगी.बढ़िया बोर्डिंग स्कूल में उनका दाखिला करा देता हूँ, उसने खर्चे और फीस आदि का इंतजाम भी करवा देता हूँ, लेकिन मुझे सिर्फ तुम्हारा तन ही नहीं मन भी चाहिए. सिर्फ मांस के लोथड़े के साथ खिलवाड करना मुझे पसंद नहीं, मेरी इच्छा है कि तुम मेरी दुल्हन की तरह रहो. मैं तुम्हारा ख़याल रखूँ और तुम मेरा ख़याल रखो.
छमिया-क्या तुम्हें लगता है कि यह सब इतना आसान है ? कोई किसीको बदन तो सौंप सकता है मगर मन और आत्मा के समर्पण के लिए तो कुछ समय चाहिए, बिना वक्त दिए यह संभव नहीं, अगर कोई दावा करे तो झूठा होगा. पहले मुझे समझाइये कि सेक्स क्या है ? प्यार क्या है ? इसे कैसे किया जाता है ? कैसे असुरक्षित सेक्स से तकलीफें होती हैं , कैसे नहीं होतीं ? जब तक मुझे विस्तार से नहीं बताओगे तब तक किसी दिल लेने कि बात वृथा है .
मुंशीजी समझ गए कि पहले उसको समझाना होगा, उसके मन में सेक्स को लेकर जो डर और भ्रान्तियां हैं उनको निकालना होगा , वरना वह तो यही समझेगी कि चुम्बन लेने से गर्भवती हो जाते हैं, जैसा कि वह इससे पहले सोच रहीए थी. उसने छमिया के सुर्ख लाल गालों पर एक चुम्बन जड़ते हुए मीठे शब्दों में कहा-
-तुम्हें डरने या घबराने कि कोई जरूरत नहीं है, मैं तुम्हारा प्यार चाहता हूँ, मैं मोहब्बत करने में विश्वाश रखता हूँ, बलात्कार करने में नहीं, जब तुम्हें ऐसा लगने लगे कि मैं तुम्हें चाहता हूँ और तुम्हारे तन –मन पर मेरा हक है, तभी तुम जिस्म समर्पित करना, उसी पहले नहीं, मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि कभी तुम्हारे साथ जोर जबर्दस्तई नहीं के जायेगी, मैं तुम्हें इसके बारे में विस्तार से समझाउंगा, लेकिन हर रात तुम्हें मेरे साथ बितानी होगी. मैं इतना ही कह सकता हूँ कि जब तुम कहोगी तभी तुम्हारे साथ प्रणय क्रीडा करूँगा, बोलो मंजूर है ?
छमिया- ठीक है, मुझे मंजूर है , मगर हर रात तुम मेरे एक सवाल का जवाब दोगे ?
मुंशीजी- ठीक है, जितना मैंने सीखा है, और जितनी मेरी क्षमता है, मैं जरूर उतना बताने कि कोशिश करूँगा , म्साथ ही यह भी ध्यान रहे कि मेरे साथ धोखा बाजी नहीं चलेगी, जब मैं लाखों रुपये किसी कि जिंदगी बनाने में खर्च कर सकता हूँ तो उसे बर्बाद करने के लिए किसी भी हद से गुजर सकता हूँ.
छमिया- आज कह दिया सो कह दिया, आइन्दा मत कहना, मैं ऐ जो भी कह दिया सो कह दिया. छमिया अपनी जुबान कटवा सकती है लेकिन जुबान गिरा नहीं सकती, मैं अपना कुंवारा जिस्म अगर इस दुनिया में क्सीको समर्पित करुँगी तो वो तुम हो, तुम्हारे अलावा मेरे इस बदन से कोई स्पर्श बी ही नहीं कर सकता, चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए.
.
भाग-८मैं अकेला ही तो यह सुख नहीं लूटूँगा तुम भी बराबर कि साझीदार रहोगी, तुम्हें भी उतना ही आनंद आएगा जितना कि मुझे , हो सकता है कि थोडा सा कम आएगा मगर आएगा जरूर. जब मैं तुम्हारे होठों का रसपान करूँगा तो क्या अकेले मुझे ही मजा आएगा ? जब मैं तुम्हारे इन यौवन उभारों को दबाउंगा तो क्या मैं अकेला ही रोमांचित होउंगा , क्या तुम्हें वह सुख नहीं मिलेगा ? जब मेरा और तुम्हारा जिस्म एकाकार होगा तो उस चरम सुख का लाभ क्या तुम नहीं उठाओगी ? फ्री इतना बबाल क्यों उठा रही हो. सर पर आसमान क्यों उठा रही हो. आखिओर मैं कुछ खास तो नहीं चाहता सिवाय इसके कि तुम्हारे बदन से लिपटकर कुछ पल बिताऊँ.
इस बार मुंशीजी ने मानो अचूक ब्रह्मास्त्र से वार किया था. छमिया खामोश होकर उसकी बातों को सुन रही थी. उसको लगा जैसे कि उसके भाइयों और बहनों का भाविष्य सुरक्षित होने जा रहा है.उसे ख्यालों में लगने लगा कि उसका भाई शहर में पढकर बड़ा हो रहा है, बड़ा होकर वह अफसर बन जाता है और सबके सामने उसकी तारीफ़ करता है, उसकी मेहनत के गुण गाता है, उसकी बहन बड़ी कलाकार बन गयी है है, और जब उसको पुरस्कार मिलता है तो वह उसका नाम पुकारती है, कार्यक्रम के जज उसको ट्राफी प्रदान करते हैं. उसको त्याग करने का ख़याल आता है. फिर अगले ही पल उसे महसूस होता है जैसे कि मुंशीजी उसके कोरे बदन पर कीड़े कि तरह रेंग रहे हैं. लगता है जैसे कि उसकी इज्जत नीलाम हो गयी है और वह मंदी की सब्जी कि तरह बिक गयी है , उसे बेचने वाला कोई और नहीं बलिक वह खुद है. सौदागर उसका मांस नोंच रहे हैं. उसका दिल भर आया. दिल का दर्द आँखों से बहने लगा. आंसूं टप-टप बहने लगे. आँखों से जन सावन बरसने लगा तो मुंशीजी धीरे –धीरे उसके पास आये , अपने हाथों से उसके आंसू पौंछे और फिर उसको सीने से लगा लिया. छमिया का दिल चाहा कि खूब जोर-जोर से रोये मगर ऐसा भी नहीं कर सकी. आंसूं भी रूंठ गए, हालात की तरह वे भी बेवफा हो चुके थे . मुंशीजी कह रहे थे-
-जो तुम्हारी किस्मत में नहीं लिखा उसे बेवजह आमंत्रण दे रही हो. इन आंसुओं को मंजिल की सीढियां बनाओ , कमजोरी नहीं. तुम कोई भी चीज फ्री में हासिल नहीं कर रही हो. बल्कि उसके बदले कुछ देने भी जा रही , अपना समर्पण, अपना विश्वाश ... तो तुम्हें ज़रा भी हीन भावना का शिकार नहीं होना चाहिए, इसके अलावा तुम्हें तो खुशी होनी चाहिये कि तुम अपने दम पर अपने परिवार को सदा –सदा के लिए मुफ्लिसी के भंवर से निकाल सकती हो. ऐसी कुव्वत भी हर किसी में नहीं होती. जहां तक बाजार की बात है तो वहाँ पर जिस्म का भाव इतना भी नहीं है कि तकदीर संवारी जा सके, जिस्म के बाजार में पचास –सौ रुपये में रोजाना शरीर बिकते हैं. और एक बार जो इस उलझन में फंसी फिर वह हमेशा के लिए उसमे फंस जाती है, दलाल उसे फिर कभी दल –दल से निकलने ही नहीं देते. मगर मैं तुमको संरक्षण प्रदान कर रहा हूँ, जब लोग जान जायेंगे कि तुम मुझसे जुडी हुई हो तो कोई भी तुम पर नजर नहीं गदायेगा, जब तक तुम फ्री दिखाई दोगी तभी ताल सब लार तप्कायेंगे इसके बाद सब किनारा कर लेंगे , हमारे बीच एक ईमानदार समझौता रहेगा, हजब तक तुम मुझे सुख दोगी तब तक मैं तुम्हारे परिवार को आर्थिक सहायता दूंगा, जो भी खर्च होगा वो सब वाहन करूँगा, इस बीच तुम्हें मेरी पत्नी की तरह रहना होगा , ये अलग बात है कि इस बात को अगर तुम छिपाकर भी रखना चाहो तो मुझे कोई एतराज नहीं, उलटा हम दोनों के लिए ही यह उचित रहेगा.
छमिया- इस बात की क्या गारंटी है कि मुझे पाने के बाद तुम अपना वादा पूरा करोगे ?
मुंशीजी- मैं तुम्हें हर तरह संतुष्ट करने के लिए तैयार हूँ., जैसे कहो मैं मानूंगा. तुम जिस तरह की गारंटी चाहो मैं देने के लिए तैयार हूँ. मैं ये कर सकता हूँ क्योंकि मैंने उतना ही वादा किया है. जो लोग सूरज, चाँद सितारे तोड़कर लाने की बात करते हैं, वे भावुकता में वादे तो कर देते हैं लेकिन उसे कभी पूरा नहीं पाते , क्योंकि वे सिर्फ करने के लिए वादे करते हैं और मैं निभाने के लिए . समझी.?
इस बार मुंशीजी ने मानो अचूक ब्रह्मास्त्र से वार किया था. छमिया खामोश होकर उसकी बातों को सुन रही थी. उसको लगा जैसे कि उसके भाइयों और बहनों का भाविष्य सुरक्षित होने जा रहा है.उसे ख्यालों में लगने लगा कि उसका भाई शहर में पढकर बड़ा हो रहा है, बड़ा होकर वह अफसर बन जाता है और सबके सामने उसकी तारीफ़ करता है, उसकी मेहनत के गुण गाता है, उसकी बहन बड़ी कलाकार बन गयी है है, और जब उसको पुरस्कार मिलता है तो वह उसका नाम पुकारती है, कार्यक्रम के जज उसको ट्राफी प्रदान करते हैं. उसको त्याग करने का ख़याल आता है. फिर अगले ही पल उसे महसूस होता है जैसे कि मुंशीजी उसके कोरे बदन पर कीड़े कि तरह रेंग रहे हैं. लगता है जैसे कि उसकी इज्जत नीलाम हो गयी है और वह मंदी की सब्जी कि तरह बिक गयी है , उसे बेचने वाला कोई और नहीं बलिक वह खुद है. सौदागर उसका मांस नोंच रहे हैं. उसका दिल भर आया. दिल का दर्द आँखों से बहने लगा. आंसूं टप-टप बहने लगे. आँखों से जन सावन बरसने लगा तो मुंशीजी धीरे –धीरे उसके पास आये , अपने हाथों से उसके आंसू पौंछे और फिर उसको सीने से लगा लिया. छमिया का दिल चाहा कि खूब जोर-जोर से रोये मगर ऐसा भी नहीं कर सकी. आंसूं भी रूंठ गए, हालात की तरह वे भी बेवफा हो चुके थे . मुंशीजी कह रहे थे-
-जो तुम्हारी किस्मत में नहीं लिखा उसे बेवजह आमंत्रण दे रही हो. इन आंसुओं को मंजिल की सीढियां बनाओ , कमजोरी नहीं. तुम कोई भी चीज फ्री में हासिल नहीं कर रही हो. बल्कि उसके बदले कुछ देने भी जा रही , अपना समर्पण, अपना विश्वाश ... तो तुम्हें ज़रा भी हीन भावना का शिकार नहीं होना चाहिए, इसके अलावा तुम्हें तो खुशी होनी चाहिये कि तुम अपने दम पर अपने परिवार को सदा –सदा के लिए मुफ्लिसी के भंवर से निकाल सकती हो. ऐसी कुव्वत भी हर किसी में नहीं होती. जहां तक बाजार की बात है तो वहाँ पर जिस्म का भाव इतना भी नहीं है कि तकदीर संवारी जा सके, जिस्म के बाजार में पचास –सौ रुपये में रोजाना शरीर बिकते हैं. और एक बार जो इस उलझन में फंसी फिर वह हमेशा के लिए उसमे फंस जाती है, दलाल उसे फिर कभी दल –दल से निकलने ही नहीं देते. मगर मैं तुमको संरक्षण प्रदान कर रहा हूँ, जब लोग जान जायेंगे कि तुम मुझसे जुडी हुई हो तो कोई भी तुम पर नजर नहीं गदायेगा, जब तक तुम फ्री दिखाई दोगी तभी ताल सब लार तप्कायेंगे इसके बाद सब किनारा कर लेंगे , हमारे बीच एक ईमानदार समझौता रहेगा, हजब तक तुम मुझे सुख दोगी तब तक मैं तुम्हारे परिवार को आर्थिक सहायता दूंगा, जो भी खर्च होगा वो सब वाहन करूँगा, इस बीच तुम्हें मेरी पत्नी की तरह रहना होगा , ये अलग बात है कि इस बात को अगर तुम छिपाकर भी रखना चाहो तो मुझे कोई एतराज नहीं, उलटा हम दोनों के लिए ही यह उचित रहेगा.
छमिया- इस बात की क्या गारंटी है कि मुझे पाने के बाद तुम अपना वादा पूरा करोगे ?
मुंशीजी- मैं तुम्हें हर तरह संतुष्ट करने के लिए तैयार हूँ., जैसे कहो मैं मानूंगा. तुम जिस तरह की गारंटी चाहो मैं देने के लिए तैयार हूँ. मैं ये कर सकता हूँ क्योंकि मैंने उतना ही वादा किया है. जो लोग सूरज, चाँद सितारे तोड़कर लाने की बात करते हैं, वे भावुकता में वादे तो कर देते हैं लेकिन उसे कभी पूरा नहीं पाते , क्योंकि वे सिर्फ करने के लिए वादे करते हैं और मैं निभाने के लिए . समझी.?
Sunday, January 17, 2010
भाग- ७
मुंशीजी अपनी ही शाली में कहते चले जा रहे थे, उन्हें यह भी भी ध्यान नहीं था कि इसी छमिया उर्फ छबीली के मन पर क्या बीत रही है , हांलाकि चेहरे पर मन के भाव साफ़ नजर आते हैं मगर उनको कोई देखने और समझने वाला भी तो चाहिए. छामिया ने उससे कहां-
-मुझे एक कहावत याद आ रही है – “कुत्ते की पूंछ को अगर १२ साल भी सीधी करने के लिए रखा जाए तो भी वह टेढी की टेढी ही रहटी है , तुम्हारा भी वही हाल है, कभी सुधर ही महिम सकते. चाहे मैं कुछ भी कह लूं, कुछ भी सुन लूं,. मुझे लगता है शायद तुम्हारा नाश्ता भी मेरी जली कटी सुनने के बाद ही होता होगा, इससे पहले तुम्हारा पेट ही नहीं भरता. मेरे ख़याल से तुम पच्चड़ हो चुके हैं, ऐसे लोगों को पच्चड़ ही कहा जाता है.
मुंशीजी- मैंने पहले ही कहा कि मुझको कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं इस बात के लिए मन में कोई फर्क नहीं रखता, तुम भले ही मुझे पसंद नहीं करतीं लेकिन मैं तुम्हें चाहता हूँ.
छमिया- अच्छा जी, क्या इसीको चाहत कहते हैं ? क्या यही प्यार है ? मुझे रखैल बनाने का प्रस्ताव रखते हो और कहते हो कि मोहब्बत है, यह सौदेबाजी है मुंशीजी, तुम ठहरे दुकानदार . हर जगह पर नफ़ा नुक्सान ही देखते हो, तुम्हें प्यार में व्यापार नजर आता है.और इतना तो अब मैं भी समझ गयी हूँ कि सौदागरी करने वाला कभी प्यार नहीं कर सकता.
मुंशीजी- जिन बातों पर तुन जोए दे रही हो ये गलत नहीं हैं, अच्छी हैं, सच्ची भी , लेकिन यह भी जानलो कि किताबों और किस्से कहानियों में ही ये सब भला लगता है, सच्चाई से इसका दूर-दूर तक भी कोई लेना-देना नहीं होता. जब इस तरह के भाव हकीकत के धरातल से टकराते हैं तो टूटकर चूर-चूर हो जाते हैं, ये जमाना गिव एंड टेक का है. यानी कि कुछ देना तो उसके बदले कुछ लेना. जब आप दूकान पर जाते हैं तो पहले कुछ देने का ऑफर देते हैं फिर दुकानदार सामान देता है.
छमिया- मैं भी वही कह रही हूँ, तुम जैसा सौदागर कभी भी प्यार को नहीं समझ सकता, यह फकीरों का काम है, दीवानो का काम है, और तुम जैसे लोग सिर्फ जिस्म से मतलब लगते हैं, जिस्म का सौदा आप जैसे महानुभाव करते हैं.
मुंशीजी- तो फिर क्या करून, तुम्हें पाने के लिए बाबा जी बन जाऊं, सड़क पर आ जाऊं, दर –दर की ठोकरें खाता फिरूं, क्या यही प्यार है ? क्या इसी तरह तुम मानोगी मेरे प्यार को. तुम तो उस वाला हिसाब कर रही हो-‘रांड के पाँव सुहागन लागी, हो जा बहना मुझ जैसी. यानी कि जब एक सुहागिन ने विधवा के पाँव छुए तो उसने अपने जैसी होने का आशीर्वाद दिया. वही आशीर्वाद तुम मुझे दे रही हो , तुम जिस तरह परेशान हो, जैसे तुम्हारा परिवार एक-एक रुपये के लिए मोहताज है, तुम चाहती हो कि मैं भी प्यार के चक्कर में वैसा ही हो जाऊं, जबकि मैं इसके ठीक उलटा सोचता हूँ, मैं चाहता हूँ कि तुम्हारा पिता भी मेरी ही तरह कोई कारोबार करे, हर शुरुआत छोटी ही होती है जो बढते-बढते बड़ी हो जाती है, मेरी इच्छा है कि तुम अच्छे –मंहगे कपडे पहनो, गहने पहनो. मेरी इच्छा है कि तुम अपने भाइयों और बहनों को अच्छे स्कूल में पढाओ , उन्हें काबिल बनाओ, वे मजदूरी के भंवर से निकल जाएँ , बड़े अफसर बनें, खूब नाम और दाम कमाएँ. और यह सब संभव है , तुम्हें क्या करना है, कुछ नहीं . बस सुख लेना है, मैं तुम्हें आनंद ही एंड देना चाहता हूँ, मुझे तुमसे लगाव है तो तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा करने कि जिम्मेदारी भी मेरी है, मैं ये अच्छी तरह से समझता हूँ, बस अपने इन होठों का रस चखने दो, अपनी जवानी के सागर में गोते लगाने दो. क्या बिगड जाएगा तुम्हारा ?
मुंशीजी अपनी ही शाली में कहते चले जा रहे थे, उन्हें यह भी भी ध्यान नहीं था कि इसी छमिया उर्फ छबीली के मन पर क्या बीत रही है , हांलाकि चेहरे पर मन के भाव साफ़ नजर आते हैं मगर उनको कोई देखने और समझने वाला भी तो चाहिए. छामिया ने उससे कहां-
-मुझे एक कहावत याद आ रही है – “कुत्ते की पूंछ को अगर १२ साल भी सीधी करने के लिए रखा जाए तो भी वह टेढी की टेढी ही रहटी है , तुम्हारा भी वही हाल है, कभी सुधर ही महिम सकते. चाहे मैं कुछ भी कह लूं, कुछ भी सुन लूं,. मुझे लगता है शायद तुम्हारा नाश्ता भी मेरी जली कटी सुनने के बाद ही होता होगा, इससे पहले तुम्हारा पेट ही नहीं भरता. मेरे ख़याल से तुम पच्चड़ हो चुके हैं, ऐसे लोगों को पच्चड़ ही कहा जाता है.
मुंशीजी- मैंने पहले ही कहा कि मुझको कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं इस बात के लिए मन में कोई फर्क नहीं रखता, तुम भले ही मुझे पसंद नहीं करतीं लेकिन मैं तुम्हें चाहता हूँ.
छमिया- अच्छा जी, क्या इसीको चाहत कहते हैं ? क्या यही प्यार है ? मुझे रखैल बनाने का प्रस्ताव रखते हो और कहते हो कि मोहब्बत है, यह सौदेबाजी है मुंशीजी, तुम ठहरे दुकानदार . हर जगह पर नफ़ा नुक्सान ही देखते हो, तुम्हें प्यार में व्यापार नजर आता है.और इतना तो अब मैं भी समझ गयी हूँ कि सौदागरी करने वाला कभी प्यार नहीं कर सकता.
मुंशीजी- जिन बातों पर तुन जोए दे रही हो ये गलत नहीं हैं, अच्छी हैं, सच्ची भी , लेकिन यह भी जानलो कि किताबों और किस्से कहानियों में ही ये सब भला लगता है, सच्चाई से इसका दूर-दूर तक भी कोई लेना-देना नहीं होता. जब इस तरह के भाव हकीकत के धरातल से टकराते हैं तो टूटकर चूर-चूर हो जाते हैं, ये जमाना गिव एंड टेक का है. यानी कि कुछ देना तो उसके बदले कुछ लेना. जब आप दूकान पर जाते हैं तो पहले कुछ देने का ऑफर देते हैं फिर दुकानदार सामान देता है.
छमिया- मैं भी वही कह रही हूँ, तुम जैसा सौदागर कभी भी प्यार को नहीं समझ सकता, यह फकीरों का काम है, दीवानो का काम है, और तुम जैसे लोग सिर्फ जिस्म से मतलब लगते हैं, जिस्म का सौदा आप जैसे महानुभाव करते हैं.
मुंशीजी- तो फिर क्या करून, तुम्हें पाने के लिए बाबा जी बन जाऊं, सड़क पर आ जाऊं, दर –दर की ठोकरें खाता फिरूं, क्या यही प्यार है ? क्या इसी तरह तुम मानोगी मेरे प्यार को. तुम तो उस वाला हिसाब कर रही हो-‘रांड के पाँव सुहागन लागी, हो जा बहना मुझ जैसी. यानी कि जब एक सुहागिन ने विधवा के पाँव छुए तो उसने अपने जैसी होने का आशीर्वाद दिया. वही आशीर्वाद तुम मुझे दे रही हो , तुम जिस तरह परेशान हो, जैसे तुम्हारा परिवार एक-एक रुपये के लिए मोहताज है, तुम चाहती हो कि मैं भी प्यार के चक्कर में वैसा ही हो जाऊं, जबकि मैं इसके ठीक उलटा सोचता हूँ, मैं चाहता हूँ कि तुम्हारा पिता भी मेरी ही तरह कोई कारोबार करे, हर शुरुआत छोटी ही होती है जो बढते-बढते बड़ी हो जाती है, मेरी इच्छा है कि तुम अच्छे –मंहगे कपडे पहनो, गहने पहनो. मेरी इच्छा है कि तुम अपने भाइयों और बहनों को अच्छे स्कूल में पढाओ , उन्हें काबिल बनाओ, वे मजदूरी के भंवर से निकल जाएँ , बड़े अफसर बनें, खूब नाम और दाम कमाएँ. और यह सब संभव है , तुम्हें क्या करना है, कुछ नहीं . बस सुख लेना है, मैं तुम्हें आनंद ही एंड देना चाहता हूँ, मुझे तुमसे लगाव है तो तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा करने कि जिम्मेदारी भी मेरी है, मैं ये अच्छी तरह से समझता हूँ, बस अपने इन होठों का रस चखने दो, अपनी जवानी के सागर में गोते लगाने दो. क्या बिगड जाएगा तुम्हारा ?
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