Tuesday, November 15, 2011

भाग-४०

जलेबी -४०
जो हम कहलवाना चाहेंगे , क्या आप सिर्फ वही कहेंगी . यह तो जुल्म है हम पर . महा जुल्म है.
नेहा- अच्छा , इधर आइये, इस प्यार को नकद प्यार में बदल देती हूँ, तुम्हारे होठों पर एक गरम सा, मीठा सा चुम्बन ले लेती हूँ. बस , अब तो खुश हुए . वैसे मजा मुझे भी आया है. अब तक मैंने किसी अदद लड़की के होठों का चुम्बन भी नहीं लिया था . आज यह नेक काम भी हो गया तो आनंद की सीमा नहीं है. इतना बेहतर लग रहा है की जी चाहता है अब कभी इन होठों से और कुछ स्पर्श ही न होने दूं. तुम्हारे अधरों का स्पर्श मुझे सदैव याद रहेगा मेरे दिल में तुम्हारा चेहरा बस गया है.
नेहा- अब ज्यादा रोमांटिक होने की जरूरत नहीं है. मेरी टीम के सभी लोग जानते हैं की मैं तम्हारे साथ यहाँ अकेले में मीटिंग कर रही हूँ. इस मीटिंग के फ़ाइनल होने का कई लोग बेसब्री से इन्तजार कर रहे होंगे. देख रहे होंगे की मैं कब उनके पास खश खबरी लेकर पहुंचता हूँ.
राजेश- तुम्हारे लिए खुश खबरी के मायने क्या होते हैं ? मैं भी तो जानूं .
नेहा - सब लोग सोच रहे होंगे की मैं कोई बड़ा सौदा करके पहुँच रही होउंगी . बड़े सौदे का मतलब ये होता है की हम अपने बंधक पुलिसवालों से अपने कुछ साथियों को छुडाने को कहते हैं . तुम्हें भी हमने बंधक बनाया हुआ है. तुम पुलिस वाले बड़े चालाक होते हैं , हम भी कुछ कम नहीं हैं. तुम डाल डाल , तो हम पात -पात . जिस तरह से तुम मेरे ऊपर नजर रखे हुए थे, खुद हमने भी तुम पर पूरा फंदा कसा हुआ था . हमें पता चल गाया था की तुम कुछ न कुछ होंगे जरूर .हाँ, आईपीस अधिकारी होंगे इल्म तो इसका भी नहीं था. ज्यादा से ज्यादा इतना ही अनुमान लगा पाए थे की तुम इंटेलीजेंस के कर्मचारी हो सकते हो. हमको पता नहीं था की हमारे जाल में तुम जैसी बड़ी मछली फंस गयी है. अगर तुम बंधक ही बने रहते तो हमारे लिए इतने अफय्देमंद नहीं हो सकते थे जितने की अब हो रहे हैं. या भविष्य में हो सकते हैं. वो फायदा भी तुम अपनी मर्जी से पहुंचा रहे हो. हमने तो नहीं कहा था की हमारा पुनर्वसन कर दीजिए .अब मुद्दे की बात पर आना जरूरी है. हमारे दो हाजर से ज्यादा सहयोगी जेल में बंद हैं इनमे आधे से ज्यादा तो ऐसे लोग हैं जिनका हमसे सीधा कोई ताल्लुक नहीं हैं, कुछ ऐसे भी हैं जिनको शक के आधार पर गिरफतार किया गाया है. ज्यादातर लोग बेक़सूर हैं. उनको जेल से छुडाना बहुत जरूरी हैं. मानवता के आधार पर उनकी रिहाई की जानी चाहिए .
राजेश- कोई बात नहीं. तुम्हारी सभी मांगों पर बहुत ही शिद्दत के साथ विचार किया जाएगा . तुम्हें इस बारे में चिंता करने की जरूरत ही नहीं है. हम समझते हैं . हमने पहले भी इस तारह के सम्मानजनक समझौते कराये हैं.
नेहा- अब , जब आप हैं तो हमें कुछ सोचने की जरूरत ही क्या हैं. बंधक तो आप अब भी हैं, लेकिन नक्सलियों के नहीं , बल्कि अपने चाहने वाली के दिल में कैद हो गए हो. और इसकी सजा भी सिर्फ उम्र कैद तक सीमित नहीं है बल्कि जब तक हम दोनों जन्म लेते रहेंगे तब तक की बुकिंग करा ली गयी है.
राजेश- ठीक है , मैं भी तो यही चाहता हूँ, खुद मेरी भी यही इच्छा है की हम सदा -सदा साथ-साथ रहें. आंधी आये या तूफ़ान . बस हम -तुम साथ रहने चाहिए . मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया है. और तुम्हारी सहमति ने मेरे प्यार के ऊपर मोहर भी लगा दी है, अब कोई ये भी तोहमत नहीं लगा सकता की मैं किसी से इकतरफा प्यार करता था . अब तो यह साबित हो गया की इश्क की यह आग दोनों तरफ लगी हुई है.
नेहा- जी हाँ, यह भी जान लीजिए की इस तरफ यह आग कुछ ज्यादा ही है. अब तक तो बस हम नफरत और बदले की बात ही करते आये थे . आज प्यार की बात कहने का मौक़ा आया है. तो दिल खोलकर तुम्हारे सामने रख देती हूँ. हाँ, ये भी सच है की जब तुम पहली बार स्टॉप पर तुम्हें खडा देखा तो तुम्हारी आँखों में प्यार का सागर उमडता पाया , तुम्हारी आँखों में अपनापन देखा था. मगर मैं मजबूर थी . तुमसे कैसे कहती ? मैं तो नक्सली संगठन से जुडी हुई थी. उस वक्त संगठन में मेरा पद भी बड़ा नहीं था .आज मैं उस मुकाम पर हूँ की जो चाहूँ वो कह सकती हूँ. कर सकती हूँ.

Saturday, November 12, 2011

जलेबी -भाग-३९ , यह शुक्रवार अंक के लिए एडवांस है

जलेबी -३९
मेरी सूनी सी दुनिया में चारों तरफ फूल ही फूल खिला दिए हैं, मैं कितने गहरे अन्धकार में जी रही थी. तुम उजाले की किरण नहीं बल्कि उजाले का सूरज बनकर मेरी जिंदगी में आये हो.
राजेश- यह हमारा इस जन्म का नहीं,बल्कि जन्मो -जन्म का रिश्ता है.जब तक हम जन्म लेंगे किसी न किसी रूप में मिलते रहेंगे .यह महज फ़िल्मी डायलोग नहीं , बल्कि ऐसी सच्चाई है , जिसे मैं दिल की गहराइयों से बयाँ कर रहा हूँ. दिल कभी झूठ नहीं बोल सकता . इस तरह के मामले में दिल हमेशा आगे रहता है, इसीलिए तो मैं कहता हूँ कि बिजनेस हमेशा दिमाग से करना चाहिए और मोहब्बत दिल से , मैंने तो दिलो दिमाग से , होशो हवास में तुमसे मोहब्बत की है. और इस प्यार को हम एक मिसाल के तौर पर पेश करेंगे ताकि आने वाली पीढियां भी हमारे सच्चे इश्क का उदाहरण पेश कर सकें.
नेहा- बहुत रोमांटिक हो रहे हो राजेश. देख रही हूँ तुम्हारी हरकतें बढ़ती जा रही हैं. उँगलियाँ भी चाकर घिन्नी खा रही हैं. मैं समझ गयी तुम्हारा मन बहक रहा है. अब मुझे छोड़ दीजिए वरना यहीं पर सुहागरात हो जायेगी . शादी से पहले ही सुहागरात हो जायेगी . अगर ऐसा करोगे तो शादी के लिए क्या बचाकर रखोगे ? फिर कोई रोमांच नहीं रहेगा न .
राजेश- ये सिन्दूर का टीका, ये भांवर , ये सब तो ढकोसले हैं, असली शादी तोदिलों से दिलों का मिलन होता है. हमारा तुम्हारा दिल तो अब मिल ही चुका है. ऍम दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ -साथ रहने , जीने -मरने की कसम खा रहे हैं. तब हमको रोकने-टोकने वाला कौन है ?
नेहा- कोई और न सही , मगर हम तो हैं न . हमको यह निर्णय लेना है कि लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी है. तुम्हें बस इतनी ही इजाजत है. इससे ज्यादा अगर कुछ करना है तो शादी करनी होगी मेरे साथ . और शादी करने से पहले मुझे समर्पण करना होगा . उसके आबाद अदालत का भी चककर रहेगा . पता नहीं कबतक फ्री हो पाउंगी .
राजेश- तम उसकी फ़िक्र बिलकुल मत करो,मैं सब कुछ बहुत सही तरीके से कर लूंगा . कोई परेशानी नहीं आने दूंगा . सब कुछ ठोस तरीके से किया आजायेगा . जो समझौता पत्र तैयार करेंगे उसके लिएबहुत अनुभवी अधिकारियों की सहायता ली जा रही है. ऐसे अधि़करी जो पहले भी फ्फोलन देवी द्सहित सैकड़ों लोगो के समर्पण का मसौदा तैयार कर चुके हैं.
नेहा- तुम जो भी करोगे , ठीक ही करोगे .इतना भरोसा हो गया है तुम पर .शरीर का समर्पण बाद में पहले तो दिल को समर्पित कर चुकी हूँ.
राजेश- झूठी हो तुम. सिर्फ कहती हो, करती कुछ भी नहीं हो. देखो बना मेरी साँसें कितनी गर्म हैं. मेरी आहों को देखो. मेरी आँखों की पुतलियाँ देखो. मेरी आँखों में अपने लिए लहराता प्यार का समुन्दर तो देखो.
नेहा - मुझे बहकाने से कुछ फायदा होने वाला नहीं है. अप्पने आप पर काबू करेंगे तब न फायदा होगा. भावनाओं को पूरी तरह से कब्जे में कर लीजिए . सुलगते अरमानों को हवा न दीजिए ,. अभी इश्क की इस एजी को बुझा ही रहने दो तो बेहतर होगा राजेश- मंदिर में अगर कोई डिस्को गीत सुअनाये तो अच्काहा नहीं लगता . और रात के समय बार में अगर कोई ओम जय जगदीश हरे सुनाता है तो अटपटा सा लगता है . अब भी अही ओ हो रहा है. मैं तुम्हारे मुख से कुछ प्यार भरी बातें सुनना चाहता हूँ, और तुम हो कि उपदेश दे रही हो. ऐसा कैसा चलेगा ?चलो , मैं ही शुरू करता हूँ. आई लव यू माई डीयर,,,,,
नेहा- आई लव यू टू माय डीअर , मेरी जान. मेरे जाने जिगर. अब तो खुश हो गए न . और कुछ बुलवाना हो तो वह भी बात दीजिए. मैं बोल दूंगी .
राजेश- ये तो ऐसा लगता है जैसे कि हम उधार का प्यार ले रहे हैं. जो हम कहलवाना चाहेंगे , क्या आप सिर्फ वही कहेंगी . यह तो जुल्म है हम पर . महा जुल्म है.
नेहा- अच्छा , इधर आइये, इस प्यार को नकद प्यार में बदल देती हूँ, तुम्हारे होठों पर एक गरम सा, मीठा सा चुम्बन ले लेती हूँ.

भाग-३८ , यह गुरूवार अंक के लिए एडवांस है

भाग-३८
और उसने किसी भी हालत में मुझे वहाँ से निकालने की प्रार्थना की थी. रवि बाबू की पहल पर उस घर तक गाड़ी भेज दी गयी जहाँ मुझे बंधक बनाया गया था और जहाँ पर मेरी इज्जत लुट चुकी थी. साथ में और भी लूटने की तैयारी चल रही थी.
राजेश- बड़ा दर्द है तुम्हारी कहानी में .अगर कोई दूसरा वक्त होता तो शायद मैं अब तक मेरी पलकें भीग चुकी होतीं. मैं बहुत भावुक इंसान हूँ. इतना ज्यादा कि अगर किसी चींटी को भी गलती से मसल गूं तो आँख भारी हो जाती हैं. लोग कहते हैं कि मेरी कविताओं में भी इतना ही दर्द होता है. जब मैं कविता लिखकर किसी भी अखबार में भेजता हूँ ओ संपादक उसे अवश्या छापते हैं. पहचान छिपाने के लिए मैं एक अन्या उपनाम से लिखता हूँ,. ऐसा इसलिए करता हूँ ताकि कोई ये न सोचे कि मैंने सरकारी दबदबे के कारण अपनी कवितायें प्रकाशित कराई हैं.
नेहा- तभी तो मेरे दिल तुम्हारे दिल से मिल गया है. अगर हम दोनों के दिल और विचार एक जैसे नहीं होते तो निश्चित रूप से हम आज यहाँ पर इस तरह गलबहियाँ नहीं कर होते. मेरी बाहें तुम्हारे गले में नहीं होती ,
राजेश- हाँ , हाँ जानता हूँ बाबा . गले पर नहीं तब तो गर्दन पर होतीं, यही न . जानता हूँ तुम यही कहने वाली थी न , मगर कहते-कहते रुक गयी . वैसे ये गर्दंभी तुम्हारी ही है, अब तो ओ कुछ मेरा है, तुम्हारा भी वही सब है. हम लोग अब एक हो चुके हैं. लेकिन प्यार या शादी के पहले मैं तुमको यह्बता देना चाहती हूँ कि बचपन में मेरे साथ बलात्कार किया जा चुका है. मैं कोई पवित्र नहीं हूँ. अगर यह खबर तुम्हें बादमे पता चलेगी तो निश्चित रूप से तुमको बुरा लगता . अब तुम्हें डिसीजन लेने में भी आसानी होगी. अगर तुम अपने कैरियर के कारण मजबूरी में मुझसे शादी का निर्णय ले रहे हो तो मैं तुम्हें इस तरह की बंदिश से आज़ाद करती हूँ. तुम्हारेकहने पर मै ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ समर्पण कर दूंगी .मेरे साथ चाहे जितना धोखा हो जाए गम नहीं, लेकिन मेरे किसी साथी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए पहले सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों से पक्की बात करलो . उसके आबाद ही हमसे वादा करना . अगर अच्छी पुनर्वसन स्कीम बनाई तो मैं अन्य सभी लोगों को भी कन्वेंस करके कहूंगी कि कहूँ -खराबा और जंगल की जिंदगी छोड़कर आम जीवन जिया जाए .मैं खुद सबसे हथियार डालने को कहूंगी . रवि बाबू को अगर आप और हम समझाने में कामयाब हो गए तो वे अकेले ही हजारों को समझा लेंगे . हर नक्सली उनकी बहुत इज्जत करता है. वे निष्पक्ष भाव से बिना कोई पद लिए बरसों से काम कर रहे हैं.
राजेश- मैं अवश्य ही उनसे मिलना चाहूँगा , मगर अधिकारी बनकर नहीं , बल्कि नेहा का प्रेमी बनकर , नेहा का होने वाला पति बनकर मैं उनसे मिलूंगा . और पगली ये क्या कहती हो कि सोच -समझ लो, मैं क्या समझ लूं, अगर बचपन में तुम्हारे साथ किसीने जोर -जबरदस्ती की है तो इसमें तुम्हारा कसूर क्या है ? तुम्हारा बालक होना,तुम्हारा गरीब होना , तुम्हारा कमजोर होना कोई अपराध नहीं था. और तुमने जिन व्भी अपराधियों की हत्या की हैं, उसमे से किसी एक में भी तुम्हारा सीधा इन्वोल्व्मेंट होने का प्रमाण नहीं है. शिकायत भी नहीं. मैं दिल से मानता हूँ कि तुमने जो भी किया वह हालात के मद्देनजर किया . सरकार भी कुछ खतरनाक अपराधियों के ज़िंदा या मुर्दा पकड़ने पर इनाम की घोषणा करती है. और तुम्हारे जितने भी शिकार थे , सब के सब इसी तरह के ईनामी बदमाश थे. इस हिसाब से भी देखा जाए तो तुमने सरकार की मदद ही की है. और मददगार को पुरस्कार दिया जाता है, तिरस्कार नहीं . तुम गंगा से भी पावन थी, हो और हमेशा रहोगी .
नेहा- मेरा मन में तुम्हारी इज्जत अबुर भी बढ़ गयी है अरजेश, तुम इंसान नहीं, इंसान की शक्ल में देवता हो, मैंने जीवन में बहुत लोग देखे हैं . अच्छे भी , अच्छे से अच्छे भी लेकिन तुम तो सबसे अच्छे हो. तुम सच में तुम हो. तुमने आकर मेरी सूनी सी दुनिया में चारों तरफ फूल ही फूल खिला दिए हैं, मैं कितने गहरे अन्धकार में जी रही थी. तुम उजाले की किरण नहीं बल्कि उजाले का सूरज बनकर मेरी जिंदगी में आये हो.
राजेश- यह हमारा इस जन्म का नहीं,बल्कि जन्मो -जन्म का रिश्ता है.
भाग-३७
तब वे सहारा तलाशते हैं. और उन्हें हमारे रूप में कोई न कोई विकल्प मिल ही जाता है. मैं ये नहीं कहती कि हमारे सभी सदस्य सच्चे होते हैं. हम्मे से भी कुछ लोग बुरे निकल आते हैं मगर हम लोग उनकी गलती को भी माफ नहीं करते . उनको भी सजा दी जाती है. हमारे संगठन में कोई सिफारिश नहीं चलती . हमारी पंचायत चलती है. बाकायदा फैसला सुनाया जाता है,. उस फैसले को अमल में भी लाया जाता है. ऐसा नहीं है कि उसे छोड़ दिया जाएगा , या फिर अमल में छूट दे दी जाए .
राजेश- हाँ , बिलकुल कुछ बात है तभी तो लोग तुमसे आकर्षित होते हैं. अगर तुम्हारी कमियां होतीं तो निश्चित रूप से जनता नहीं जुड पाती तुम जैसे लोगों से , मैंने किसी अखबार में एक रिपोर्ट पढ़ी थी , रिपोर्ट केमुताबिक एक महिला नक्सली ने खुलासा किया था कि संगठनके लोग उसका शारीरिक शोषण किया करते थे.उसने अपनी आपबीती बहुत ही मार्मिक अंदाज में सुनाई थी , मुझे याद है उसने अप्नेजिस्म के कुछ घाव भी दिखाए थे , ऐसा कुछ तुम्हारी जानकारी में भी आया था क्या कभी ?
नेहा- बिलकुल नहीं. कभी ऐसा हादसा नही हुआ. हो सकता है इसका एक कारण ये भी है कि मेरे संगठन में ज्यादातर लड़कियां ही हैं. लड़के तो बसऑपरेशंस में शामिल होते हैं. जहां उनकी बहुत ज्यादा जरूरत होती हैं, वही उनका इस्तेमाल किया जाता है.
राजेश- अच्छा ये बताओ, अक्सर सुनने में आता है कि नक्सलियों ने फलां जगह पर पुलिस कैम्प पर हमला कर दिया या पुलिस थाणे को उड़ा दिया या फिर आरपीएफ के जवानों को उड़ा दिया . ऐसा क्यों करते हो तुम लोग ? तुम्हारी पुलिस या फ़ोर्स से क्या दुश्मनी है ?
नेहा- इसके कई कारण होते हैं. कुछ पुलिसवाले गरीबों पर जुल्म करते हैं. उनका जीना हराम किये रहते हैं,. पहले हम उनको चेतावनी देते हैं. जब वे नहीं सुधारते तो मजबूरन हमें कार्रवाई को अंजाम देना पड़ता है. कहूँ-खराबा हमें भी अच्छा नहीं लगता , मगर जब हमें मजबूर कर दिया जाए तो मर तो नहीं सकते हम.हमला होने पर तो अपने बचाव के लिए छोटी सी चीटी भी इतने बड़े इंसान को काट लेती है.
राजेश- हाँ, वो तो है. आत्मरक्षा का अधिकार तो हमको कानूनी रूप से मिला हुआ है. इसका हमें फायदा उठाना चाहिए . अच्छा उस दिन क्या हुआ , वह बताइये न , सके बाद हम इस पर चर्चा करेंगे कि आप लोगों के संगठन आखिर किस तारह से काम करते हैं.
नेहा- बेशक, जरूर बतलाया जायेगा. उस दिन मौसी ने मुझे अपनी बेटी मान लिया था और मुझे उस नर्क से निअकलने का द्रध्निश्चय कर लिया था. इसके साथ-साथ वे इस अबत के लिए भी राजी हो गयी कि मेरे साथ-साथ वे भी नक्सली संगठन से जुड़ेंगी और हर पल मी साथ-साह रहेंगी . वे पिछले दरवाजे से चुपके से निकल गयीं थीं. आधा घंटे के अंदर ही वे रवि बाबू से मिलकर चली आयीं थीं, रवि बाबू वही जको नक्सली संगठनों के मुफ्त में केस लड़ते रहे हैं. पेशे से वकील इस निहायत शरीफ इंसान को कई बार शक की बुनियाद पर जेल भी भेजा गया है.
राजेश- अच्छा , ये महाशय फिलहाल कहाँ रहते हैं ?
नेहा- यहीं मेरे साथ. मेरे आग्रह पर ये भी पूरी तरह से इस संगठन से जुड गए, मैं पहले बता ही चुकी हूँ कि सभी हमारे बड़े नेता नकी बहुत इज्जत करते थे. उसी दुष्ट नेता ने इनके पूरे परिवार का खात्मा कर दिया तह. उन पर बहुत ज़ुल्न्म किये गए , लेकिन उन्होंने कभी सरेंडर नहीं किया. वे अपनी गर्दन ऊंची करके हमेशा हक की आवाज बुलंद करते रहे. परिवार के खात्मे के बाद नक्सलियों ने ही इनका हौसला बढ़ाया था. मुझे भी संगठन से जुड़ने में इन्होने सहायता की .
राजेश- रवि बाबू ने आपको किससे मिलवाया था ?
नेहा- मौसी ने रवि बाबू को सारी दास्ताँ कह सुनाई थी. और उसने किसी भी हालत में मुझे वहाँ से निकालने की प्रार्थना की थी. रवि बाबू की पहल पर उस घर तक गाड़ी भेज दी गयी जहाँ मुझे बंधक बनाया गया था और जहाँ पर मेरी इज्जत लुट चुकी थी.
राजेश- बड़ा दर्द है तुम्हारी कहानी में .

भाग-३६

जलेबी -३६
है. नेहा भी कभी रोमांटिक बातों को और भी ज्यादा रोमांटिक बताकर पेश किया करती थी ताकि राजेश की भावानायेंभाक आजायें, उसका कहासंग गर्म हो आजाये तो उसे भी थोड़ी सी राहत मिल सके. तपती गर्मियों में तो धरती को भी बरसात की बूंदों का इन्तजार रहता है ताकि कुछ गर्मी से कुछ राहत मिल सके. नेहा तो फिर भी जवान लड़की थी. उसकी अपनी भी हसरतें थीं, आरज़ू थी, उसके अपने भी अरमान थे . वह भी अन्य लड़कियों की तरह किसी दोस्त की इच्छा रखती थी .चाहती थी कि उसे भी कोई चाहे, उससे अकेले में मिले, प्यार की बातें करे औए फिर उसे अपनी बांहों में लेकर सहलाये , उसके रसीले होठों को चूमे . हार्ड वर्क और दैनिक अभ्यास के कारण उसकी उम्र हर किसीकी समझ में नहीं आती थी. लगती थी मानो १६ या १८ साल की कोई हूर परी है. जबकि वह जीवन के २६ बसंत देख चुकी थी. जो उम्र उसके हँसने -खेलने की थी वह उसने गहन अध्ययन और नक्सली संगठन को मजबूत करने में ही निकाल दी . राजेश ने इस वक्त उसे अपनी बांहों में भर रखा था और वह अपनी माशूका नेहा से पूछ रहा था -
- फिर आगे क्या हुआ ? क्या तुम्हारी उस मौसी ने तुम्हारी हेल्प की ? औ की तो किस तरह ?
नेहा- ओह , हाँ... बिलकुल उसी मौसी की मदद से मैं उस जेल से निकल पाई . वरना जिस किसीको नेता अपनी हवस की शिकार बनाता था, उसकी आसानी से अपनी कैद से बाहर नहीं निकलने देता था. वह बेहद क्रूर और हवसी था. वह सिर्फ नाम मात्र का इंसान था . उसने हजारों लड़कियों को अपनी हवस का शिअकर बना डाला था. इतना खतरनाक इंसान मैंने आज तक नहीं देखा . वह्रावन से भी खतरनाक था .
राजेश- था ? मतलब ? क्या अब वह इस दुनिया में नन्ही है ?
नेहा- जी नहीं, मैंने उसको मौत के घात उतार दिया . बेरहमी से ह्त्या कर दी उसकी . तुम्हें तो पता ही होगा जब एक पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों के किसीने कैसे टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे. उसीके पैत्रक गाँव में ....
राजेश- ओह्ह्ह , हाँ . समझ गया. मुझे याद आ रहा है. उस नेता के तो कई टुकड़े किये थे. उसके हत्यारे तो पकडे भी गए थे . ऐसा कहा गया कि उसी नेता के पीए ने उसकी ह्त्या की थी . उसका पीए गिरफतार किया गाया था.
नेहा- हाँ, मैंने उसे इसी तारह से निबटाया था. उसकी ह्त्या में उसके नालायक पीए कि फंसाकर मैंने एक तीर से दो निशाने लगाए थे . अब समझे तुम. मेरे साथ उसने बहुत जुल्म किया था और मैंने उसका इस तारह बदला ले लिया. तभी मेरे सीने पर ठंडक पडी थी , मगर मेरा मिशन यहीं पूरा नहीं हुआ. मैंने ऐसे लोगों को ठिकाने लगाना जारी रखा जो लोग बहन बेटियों की इज्जत से खेलते हैं और दौलत ,शौहरत या शिफारिश के बल पर जेल से आसानी से छूट जाए हैं. जलेबीबाई की अदालत से ऐसे पापी कभी नहीं छूट सकते . अगर तुम आज यहाँ नहीं होते . तो एक -दो बलात्कारियों का अब तक काम तमाम कर चुकी होती .. मैं ये सन्देश देना चाहती हूँ कि कोई भी दबंग किसी मजबूर लड़की का शोषण कर ने की हिम्मत नहीं करे. उसके मन में यह दहशत होनी चाहिए कि अगर कोई ऐसा करेगा तो उसे सज़ा जरूर मिलेगी . अगर कोई अदालत से बच भी जाता है तो जलेबीबाई की अदालत उसे कभी माफ नहीं करेगी . अगर कोई थानेदार उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करता तो जलेबीबाई के कमांडर उसकी शिकायत जरूर दर्ज करेंगे . मेरे गिरोह में जितने भी लोग हैं, वेसब के सब सटाए हुए हैं. जिन लोगों पर जुल्म धाए गए हैं वे क्या करेंगे ? जब उनको इन्साफ नहीं मिलेगा ओ क्या करेंगे . जब उनका भरोसा न्याय व्यस्वस्था से उठ जाएगा तो क्या करेंगे ? तब वे सहारा तलाशते हैं. और उन्हें हमारे रूप में कोई न कोई विकल्प मिल ही जाता है. मैं ये नहीं कहती कि हामारे सभी सदस्य सच्चे होते हैं. हम्मे से भी कुछ लोग गाल्ट निकल आते हैं मगर हम लोग उनकी गलती को भी
माफ नहीं करते . उनको भी सजा दी जाती है.

Friday, November 11, 2011

जलेबी-३५
महिला- लड़ चुका है. उनके परिवार के कई लोगों को खत्म करवा चुका है.उस पर कई केस भी चल रहे हैं. अगर रवि बाबू पर हाथ डाला तो बवाल हो जाएगा , इसीलिए वे बचे हुए हैं. मैं उनसे बात चलाती हूँ. उन्हें ये तो मालूम है की मैं नेता की रखैल हूँ, लेकिन सच्चाई भी वे अच्छी तरह से जानते हैं. उन्हें मालूम है की नेता के पास मेरा जिस्म रहता है, जान नहीं . एकाध बार उन्होंने मुझसे भी कहा था की मैं उस संगठन में शामिल हो जाऊं म, माग्र मगर मक्सली के नाम से ही मेरी रूह कांपने लगती थी , मैं कमजोर थी बेटी , मैं उतना सख्त फैसला नहीं ले पाई थी. हांलाकि मेरे मन के किसी कोने में भी चिंगारी सुलगी हुयी थी. अब जो मैं तुम्हारी सहायता करूंगी यह उसी चिनगारी की बदौलत है. हो सकता है की तुम्हारी सहायता के बदले में मुझे भी मार दिया जाएगा , मगर अब मैं उस स्थिति से काफी दूर जा चुका हूँ,. मैंने अपनी जिंदगी जी ली है. अब क्या बचा है ? कुछ भी तो नहीं . सब कुछ बहुत दूर जा चुका है. सब कुछ खत्म हो गया है. कोई नहीं बचा अपना सगा .
नेहा- ऐसा क्यों कहती हो मौसी ? जीते जी अपनी बेटी को मार रही हो. अभी मैं ज़िंदा हूँ, तब क्यों कहती हो की कोई नहीं सगा . म८इन हूँ न. जो कुछ तुम्हारा सगा कर सकता था, उससे भी ज्यादा मैं करूंगी तुम्हारे लिए. आज मैं कसम खाती हूँ, जिसने तुम पर , मुझ पर और इस गाँव या देश की हजारों, लाखों बेटियों पर जुलम किये हैं , मैं उस राक्षस को कीड़े -मकौड़े की मौत दूंगी . मेरी आँखों में जो बदले की ज्वाला दहक रही है , उससे बड़े से बड़े पाप की लंका भी जलकर ख़ाक हो जायेगी . मेरे सीने में जो लावा सुलग रहा है, उसमे बड़े से बड़ा रावण भी भस्म हो जाएगा .
महिला- मेरी बेटी, मैं तेरी जरूर मदद करूंगी . अभी थोड़ी देर में नेता आने ही वाला होगा. वह पी खा रहा है. तेरे साथ सेक्स करने की नीयत से आएगा , मगर मैं उसे इतना पिला दूंगी की उसे सेक्स करने का होश ही नहीं रहेगा . उसे मैं इतनी ज्यादा पिलाऊंगी की वह का से पहले होश में नहीं आएगा , जब तक वह बेडरूम में रहता है, उसे डिस्टर्ब करने के लिए कोई नहीं आता . चाहे कितना भी खास काम क्यों न हो. हाँ, जब वह कल भी नहीं निकलेगा तो उसका पीए छानबीन जरूर करेगा , तब तक तुम और मैं जंगल पहुँच चुके होंगे . इस लड़ाई में अब मैं भी तुम्हारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलूंगी . उससे पहले ही मैं एरिया कमांडर तक यह खबर पहुंचा दूंगी की हम दोनों उनके गिरोह मेशामिल हो रहे हैं. इसके बाद वे हामरी सहायता शुरू करदेंगे . अगर चाहें तो वे अब भी छोटा सा हमला कर सकते हैं मगर इससे बात बिगड जायेगी . अगर इस हरामी का मिकम्मल इलाज करना है तो उसके लिए जरूरी है की सब कुछ ठोस किया जाए. वरना यह जब अक जियेगा तब तक मजबूर बहन बेटियों की आबरू से खेलता रहेगा . इसके पाप का घडा भर अब भर चुका है. तेरी बहादुरी ने मेरी आँखें खोल दी हैं. जब तू इतनी कम उम्र में इतना बड़ा डिसीजन ले सकती है तो मैं टेरता साथ क्यों नहीं दे सकती . मौत तो एक न एक दिन आनी ही है, फिर मौत से कैसा डरना .
नेहा- मैं कैसे आभार व्यक्त करून आपका . समय आने पर अपने जिस्म की एक-एक बूँद आपकेलिए न्योच्छावर कर सकती हूँ.
महिला- चल पगली, क्या कोई माँ अपनी बेटी पर एहसान करती है क्या ? अब तू चुपचाप खाना खा ले,मैं आगे की रूपरेखा तैयार करती हूँ.
काफी देर से राजेश नेहा के नक्सली बनने की दास्ताँ सुन रहा था, बिना कुछ कहे . सिर्फ हाँ हूँ कह दिया करता था या फिर किसी बुरी बात पर अफ़सोस जाहिर कर दिया करता था. उसका जी तो चाहता था की दो पैग मारने के बाद वह नेहा के साथ भी थोड़ा सा प्यार के मगर मामला इतना गंभीर था की वह बीच-बीच में प्यार मोहब्बत की बात भी नहीं कर सकता था. यहाँ तक की नेहा की गोलाइयां उसके हाथों से ज्यादा दूर नहीं थी. लेकिन वह उनको मसलने में हिचकिचा रहा था . सोचता था की इससे नेहा को लगेगा की वह उसकी बातों में कम उअर उसके बदन में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है. नेहा भी कभी रोमांटिक बातों को और भी ज्यादा रोमांटिक बताकर पेश किया करती थी ताकि राजेश की भावानायेंभाक आजायें, उसका कहासंग गर्म हो आजाये तो उसे भी थोड़ी सी राहत मिल सके. तपती गर्मियों में तो धरती को भी बरसात की बूंदों का इन्तजार रहता है ताकि कुछ गर्मी से कुछ राहत मिल सके. नेहा तो फिर भी जवान लड़की थी.

Wednesday, October 26, 2011

जलेबी -१८
तुम्हारी बांहों का सहारा तो है. . है न राजेश ? तुम मुझे दोगे न सहारा ?
राजेश- हाँ , जीवन भर . जब तक सांस चलती रहेंगी तब तक.
नेहा- आई लव यू मेरी जान. आई लव यू .
राजेश- लव यू टू नेहा.....दिलो जां से चाहता हूँ तुम्हें, समय आने पर अपनी जां देने से भी पीछे नहीं हटूंगा . मैंने मोहब्बत करली तो करली, मैंने तुम्हें चुन लिया तो बस चुन लिया. मेरी अपनी कोई विशेष विचारधारा नहीं है. मैन साधारण इंसान हूँ. जो विचार मुझे तुमसे सुनने को मिलेंगे मै उसीको अपनी विचारधारा में शामिल कर लूंगा . तुमसे जो सच्ची और हक की बातें सुनने को मिलेंगी , वही मेरी नीतियों में शामिल हो जायेंगी . अब तो बस तुम्हारे ही प्यार का सहारा है. देखो, अगर कभी भविष्य में मुझे जाने -जाने कोई गलती हो जाती है , या फिर तुम्हें कोई गलतफहमी हो जाती है तो वादा करो कि तुम्हें नाराज नहीं होना है बल्कि मुझसे मिलकर तुम्हें मामला साफ़ कर लेना है. अच्छे दोस्त कभी भी अपना फैसला दुसरे लोगों से नहीं कराते बल्कि वे खुद इतने सक्षम होते हैं कि अपनी बातें आपस में ही निपटा सकें.
नेहा- तुम भी एक वादा करो राजेश , मेरे सिर पर हाथ रखकर कहो कि जीवन में कभी उलीस की मुखबिरी नहीं करोगे, कभी न तो खुद पुलिस की नौकरी करोगे और न ही अपने करीबियों को करने दोगे .
राजेश- ऐसा ही होगा . मैं हमेशा वही करता रहूँगा , जो तुम कहोगी , मेरी नजर में तुम महज एक खूबसूरत लड़की नहीं हो बल्कि इससे कहीं बढ़कर हो. क्या मेरा यकीन मानोगी कि तुम अब मेरे जीने का मकसद बन चुकी हो. एक और अपनी कमजोरी बताए देता हूँ. अगर तुमने मुझे ठुकरा दिया तो जानती हो क्या ओगा, मेरे प्राण निकल जायेंगे और इसके लिए मुझे कोई प्रयास भी नै करना होगा . अपने आप यह सब कुछ हो जाएगा . तुम्हारी आँखों में झांककर देखता हूँ तो मयखाना दिखाई देता है. तुम्हारे साथ कितनी पी चुका हूँ लेकिन मजाल है जो नशा हो जाए.नशा नाम की कोई चीज नहीं है यहाँ .
नेहा- क्या ये सच नहीं कि तुमने मेरे जिस्म को हासिल करने के लिए मुझसे दोस्ती की है ?झूठ मत बोलना .
राजेश- हाँ, मगर सिर्फ जिस्म को पाने के लिए नहीं. बल्कि एक पवित्र रिश्ता कायम कर सदा के लिए तुम्हारे साथ रहने का इरादा है. कोशिश करूँगा कि अगले साथ जन्मों तक तुम्हारी परछाई बनकर रह सकूं.लोग शादियाँ क्यों करते हैं ? इसका जवाब ये नहीं कि सिर्फ जिस्मानी जरूरतों के लिए ही करते हैं. ये अलग बात है कि शादी की पहली रात ही वे सुहागरात मनाते हैं. एक दुसरे में डूब जाते हैं. एक जिस्म दो जां बनजाते हैं.
नेहा- मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ राजेश. जो तुम सोच रहे हो, बात ऐसी नहीं है. मैं किसीके लायक भी नहीं हूँ. मेरा मिशन बिलकुल अलग है. मैं उससे दूर नहीं हट पाती . कई सालों में आज ये पहला अवसर है जब मैंने तुम्हारे साथ फुर्सत में इतना वक्त बिताया है. वरना तो हर दम बस काम ही काम . हम एक अलग ही लोक के प्राणी हैं. हम किसीको कोई सुख नहीं दे सकते . अगर तुम मुझसे बहुत ज्यादा प्रेम करने लगे हो और मेरे शरीर से लगाव रखते हो तो आज मैं अपने आपको समर्पित करने के लिए तैयार हूँ. तुम अपने जिस्म की प्यास बुझा सकते हो , मगर मुझे हासिल नहीं कर सकते. क्योंकि मैं किसी और से कुछ और ही वादा कर चुकी हूँ.
राजेश- ओह, अगर ऐसी बात है तो मुझे पहले ही बता देना चाहिए था. कौन है वो खुश नसीब ?
नेहा- नहीं रे राजेश ... ऐसी भी कोई बात नहीं है. वह कोई इंसान नहीं है. बल्कि इंसानों की भलाई के लिए बनाई गयी एक विचारधारा है. हमने अपने आपसे ही यह वादा किया हुआ है कि अपना कीमती वक्त इस तरह के नाते -रिश्तों में बर्बाद नहीं होने देंगे.
राजेश -आपकी बातें उलझी हुई सी लगती हैं, मुझे जो भी बताओ, साफ़-साफ़ बताओ.
नेहा- उसके लिए यह जगह ठीक नहीं रहेगी , तुम्हें मेरे ऑफिस चलना होगा, तब तुम्हें बतलाऊंगी .