Friday, November 11, 2011

जलेबी-३५
महिला- लड़ चुका है. उनके परिवार के कई लोगों को खत्म करवा चुका है.उस पर कई केस भी चल रहे हैं. अगर रवि बाबू पर हाथ डाला तो बवाल हो जाएगा , इसीलिए वे बचे हुए हैं. मैं उनसे बात चलाती हूँ. उन्हें ये तो मालूम है की मैं नेता की रखैल हूँ, लेकिन सच्चाई भी वे अच्छी तरह से जानते हैं. उन्हें मालूम है की नेता के पास मेरा जिस्म रहता है, जान नहीं . एकाध बार उन्होंने मुझसे भी कहा था की मैं उस संगठन में शामिल हो जाऊं म, माग्र मगर मक्सली के नाम से ही मेरी रूह कांपने लगती थी , मैं कमजोर थी बेटी , मैं उतना सख्त फैसला नहीं ले पाई थी. हांलाकि मेरे मन के किसी कोने में भी चिंगारी सुलगी हुयी थी. अब जो मैं तुम्हारी सहायता करूंगी यह उसी चिनगारी की बदौलत है. हो सकता है की तुम्हारी सहायता के बदले में मुझे भी मार दिया जाएगा , मगर अब मैं उस स्थिति से काफी दूर जा चुका हूँ,. मैंने अपनी जिंदगी जी ली है. अब क्या बचा है ? कुछ भी तो नहीं . सब कुछ बहुत दूर जा चुका है. सब कुछ खत्म हो गया है. कोई नहीं बचा अपना सगा .
नेहा- ऐसा क्यों कहती हो मौसी ? जीते जी अपनी बेटी को मार रही हो. अभी मैं ज़िंदा हूँ, तब क्यों कहती हो की कोई नहीं सगा . म८इन हूँ न. जो कुछ तुम्हारा सगा कर सकता था, उससे भी ज्यादा मैं करूंगी तुम्हारे लिए. आज मैं कसम खाती हूँ, जिसने तुम पर , मुझ पर और इस गाँव या देश की हजारों, लाखों बेटियों पर जुलम किये हैं , मैं उस राक्षस को कीड़े -मकौड़े की मौत दूंगी . मेरी आँखों में जो बदले की ज्वाला दहक रही है , उससे बड़े से बड़े पाप की लंका भी जलकर ख़ाक हो जायेगी . मेरे सीने में जो लावा सुलग रहा है, उसमे बड़े से बड़ा रावण भी भस्म हो जाएगा .
महिला- मेरी बेटी, मैं तेरी जरूर मदद करूंगी . अभी थोड़ी देर में नेता आने ही वाला होगा. वह पी खा रहा है. तेरे साथ सेक्स करने की नीयत से आएगा , मगर मैं उसे इतना पिला दूंगी की उसे सेक्स करने का होश ही नहीं रहेगा . उसे मैं इतनी ज्यादा पिलाऊंगी की वह का से पहले होश में नहीं आएगा , जब तक वह बेडरूम में रहता है, उसे डिस्टर्ब करने के लिए कोई नहीं आता . चाहे कितना भी खास काम क्यों न हो. हाँ, जब वह कल भी नहीं निकलेगा तो उसका पीए छानबीन जरूर करेगा , तब तक तुम और मैं जंगल पहुँच चुके होंगे . इस लड़ाई में अब मैं भी तुम्हारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलूंगी . उससे पहले ही मैं एरिया कमांडर तक यह खबर पहुंचा दूंगी की हम दोनों उनके गिरोह मेशामिल हो रहे हैं. इसके बाद वे हामरी सहायता शुरू करदेंगे . अगर चाहें तो वे अब भी छोटा सा हमला कर सकते हैं मगर इससे बात बिगड जायेगी . अगर इस हरामी का मिकम्मल इलाज करना है तो उसके लिए जरूरी है की सब कुछ ठोस किया जाए. वरना यह जब अक जियेगा तब तक मजबूर बहन बेटियों की आबरू से खेलता रहेगा . इसके पाप का घडा भर अब भर चुका है. तेरी बहादुरी ने मेरी आँखें खोल दी हैं. जब तू इतनी कम उम्र में इतना बड़ा डिसीजन ले सकती है तो मैं टेरता साथ क्यों नहीं दे सकती . मौत तो एक न एक दिन आनी ही है, फिर मौत से कैसा डरना .
नेहा- मैं कैसे आभार व्यक्त करून आपका . समय आने पर अपने जिस्म की एक-एक बूँद आपकेलिए न्योच्छावर कर सकती हूँ.
महिला- चल पगली, क्या कोई माँ अपनी बेटी पर एहसान करती है क्या ? अब तू चुपचाप खाना खा ले,मैं आगे की रूपरेखा तैयार करती हूँ.
काफी देर से राजेश नेहा के नक्सली बनने की दास्ताँ सुन रहा था, बिना कुछ कहे . सिर्फ हाँ हूँ कह दिया करता था या फिर किसी बुरी बात पर अफ़सोस जाहिर कर दिया करता था. उसका जी तो चाहता था की दो पैग मारने के बाद वह नेहा के साथ भी थोड़ा सा प्यार के मगर मामला इतना गंभीर था की वह बीच-बीच में प्यार मोहब्बत की बात भी नहीं कर सकता था. यहाँ तक की नेहा की गोलाइयां उसके हाथों से ज्यादा दूर नहीं थी. लेकिन वह उनको मसलने में हिचकिचा रहा था . सोचता था की इससे नेहा को लगेगा की वह उसकी बातों में कम उअर उसके बदन में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है. नेहा भी कभी रोमांटिक बातों को और भी ज्यादा रोमांटिक बताकर पेश किया करती थी ताकि राजेश की भावानायेंभाक आजायें, उसका कहासंग गर्म हो आजाये तो उसे भी थोड़ी सी राहत मिल सके. तपती गर्मियों में तो धरती को भी बरसात की बूंदों का इन्तजार रहता है ताकि कुछ गर्मी से कुछ राहत मिल सके. नेहा तो फिर भी जवान लड़की थी.

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