जलेबी -१८
तुम्हारी बांहों का सहारा तो है. . है न राजेश ? तुम मुझे दोगे न सहारा ?
राजेश- हाँ , जीवन भर . जब तक सांस चलती रहेंगी तब तक.
नेहा- आई लव यू मेरी जान. आई लव यू .
राजेश- लव यू टू नेहा.....दिलो जां से चाहता हूँ तुम्हें, समय आने पर अपनी जां देने से भी पीछे नहीं हटूंगा . मैंने मोहब्बत करली तो करली, मैंने तुम्हें चुन लिया तो बस चुन लिया. मेरी अपनी कोई विशेष विचारधारा नहीं है. मैन साधारण इंसान हूँ. जो विचार मुझे तुमसे सुनने को मिलेंगे मै उसीको अपनी विचारधारा में शामिल कर लूंगा . तुमसे जो सच्ची और हक की बातें सुनने को मिलेंगी , वही मेरी नीतियों में शामिल हो जायेंगी . अब तो बस तुम्हारे ही प्यार का सहारा है. देखो, अगर कभी भविष्य में मुझे जाने -जाने कोई गलती हो जाती है , या फिर तुम्हें कोई गलतफहमी हो जाती है तो वादा करो कि तुम्हें नाराज नहीं होना है बल्कि मुझसे मिलकर तुम्हें मामला साफ़ कर लेना है. अच्छे दोस्त कभी भी अपना फैसला दुसरे लोगों से नहीं कराते बल्कि वे खुद इतने सक्षम होते हैं कि अपनी बातें आपस में ही निपटा सकें.
नेहा- तुम भी एक वादा करो राजेश , मेरे सिर पर हाथ रखकर कहो कि जीवन में कभी उलीस की मुखबिरी नहीं करोगे, कभी न तो खुद पुलिस की नौकरी करोगे और न ही अपने करीबियों को करने दोगे .
राजेश- ऐसा ही होगा . मैं हमेशा वही करता रहूँगा , जो तुम कहोगी , मेरी नजर में तुम महज एक खूबसूरत लड़की नहीं हो बल्कि इससे कहीं बढ़कर हो. क्या मेरा यकीन मानोगी कि तुम अब मेरे जीने का मकसद बन चुकी हो. एक और अपनी कमजोरी बताए देता हूँ. अगर तुमने मुझे ठुकरा दिया तो जानती हो क्या ओगा, मेरे प्राण निकल जायेंगे और इसके लिए मुझे कोई प्रयास भी नै करना होगा . अपने आप यह सब कुछ हो जाएगा . तुम्हारी आँखों में झांककर देखता हूँ तो मयखाना दिखाई देता है. तुम्हारे साथ कितनी पी चुका हूँ लेकिन मजाल है जो नशा हो जाए.नशा नाम की कोई चीज नहीं है यहाँ .
नेहा- क्या ये सच नहीं कि तुमने मेरे जिस्म को हासिल करने के लिए मुझसे दोस्ती की है ?झूठ मत बोलना .
राजेश- हाँ, मगर सिर्फ जिस्म को पाने के लिए नहीं. बल्कि एक पवित्र रिश्ता कायम कर सदा के लिए तुम्हारे साथ रहने का इरादा है. कोशिश करूँगा कि अगले साथ जन्मों तक तुम्हारी परछाई बनकर रह सकूं.लोग शादियाँ क्यों करते हैं ? इसका जवाब ये नहीं कि सिर्फ जिस्मानी जरूरतों के लिए ही करते हैं. ये अलग बात है कि शादी की पहली रात ही वे सुहागरात मनाते हैं. एक दुसरे में डूब जाते हैं. एक जिस्म दो जां बनजाते हैं.
नेहा- मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ राजेश. जो तुम सोच रहे हो, बात ऐसी नहीं है. मैं किसीके लायक भी नहीं हूँ. मेरा मिशन बिलकुल अलग है. मैं उससे दूर नहीं हट पाती . कई सालों में आज ये पहला अवसर है जब मैंने तुम्हारे साथ फुर्सत में इतना वक्त बिताया है. वरना तो हर दम बस काम ही काम . हम एक अलग ही लोक के प्राणी हैं. हम किसीको कोई सुख नहीं दे सकते . अगर तुम मुझसे बहुत ज्यादा प्रेम करने लगे हो और मेरे शरीर से लगाव रखते हो तो आज मैं अपने आपको समर्पित करने के लिए तैयार हूँ. तुम अपने जिस्म की प्यास बुझा सकते हो , मगर मुझे हासिल नहीं कर सकते. क्योंकि मैं किसी और से कुछ और ही वादा कर चुकी हूँ.
राजेश- ओह, अगर ऐसी बात है तो मुझे पहले ही बता देना चाहिए था. कौन है वो खुश नसीब ?
नेहा- नहीं रे राजेश ... ऐसी भी कोई बात नहीं है. वह कोई इंसान नहीं है. बल्कि इंसानों की भलाई के लिए बनाई गयी एक विचारधारा है. हमने अपने आपसे ही यह वादा किया हुआ है कि अपना कीमती वक्त इस तरह के नाते -रिश्तों में बर्बाद नहीं होने देंगे.
राजेश -आपकी बातें उलझी हुई सी लगती हैं, मुझे जो भी बताओ, साफ़-साफ़ बताओ.
नेहा- उसके लिए यह जगह ठीक नहीं रहेगी , तुम्हें मेरे ऑफिस चलना होगा, तब तुम्हें बतलाऊंगी .
Wednesday, October 26, 2011
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