भाग -57
किरण- क्योंकि तुम्हें चरम सुख तक पहुँचने के लिए समय चाहिए, और इतने समय तक तो कोई मर ही मिटेगी. कोई भी औरत इतना वक्त नहीं दे पायेगी.
सूरज- मुझे क्या तुमने वहशी समझा है ?
किरण- क्या अपनी बेड पार्टनर को समस्त सुख देने वाले को वहशी कहा जाता है ?
सूरज- जिस तरह की व्याख्या कर रही हो, उससे तो ऐसा ही लगता है.
किरण- जी नहीं, उसे कामदेव कहते हैं, तुम सचमुच कामदेव कहलाने लायक हो.
सूरज- जिस प्रिंस के बारे में बात कर रही हो, क्या वह प्रिंस भी कामशक्ति के मामले में मेरे जैसा नहीं था ? वह तो बड़ा आदमी था, अरब था,सुना है वे लोग कामशक्ति बढाने के नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। यहाँ तक कि हमेशा कम उम्र की लड़कियों के साथ ही सेक्स सम्बन्ध बनाते हैं, इस बात में कितनी सच्चाई है ?
किरण- तुने सही सुना है, वे कामशक्ति के मामले में बड़े जागरूक होते हैं, खाते -पीते भी अच्छा हैं और कीमती भस्मों का प्रयोग भी करते हैं। यही वजह है कि वे लोग सेक्सी भी बहुत ज्यादा ही होते हैं। लेकिन इसके बावजूद तुम्हारे जैसा मैंने कोई शेख नहीं देखा, सच कहती हूँ। ये कोई मक्खन लगाने वाली बात नहीं है।
सूरज- इतनी ज्यादा तारीफ़ करोगी तो नुक्सान ये होगा कि मैं घमंडी भी हो सकता हूँ। अगर चाहती हो कि मई हमेशा नम्र ही बना रहूँ तो इसके लिए ये जरूरी है कि तुम मुझे मेरी खासियतों के बारे में नहीं बल्कि कमजोरियों के बारे में बताओ। समझ रही हो ने ?
किरण- तुम बहुत प्यारे हो और प्यार करने का तुम्हें पूरा हक़ है। सच पूछो तो तुम इसी लायक हो। तूम्हारी जो सेक्स करने की शक्ति है, ये असीमित है।, मुझे जितना मजा तुम्हारे साथ आ रहा है उतना किसीके साथ नहीं आया। अरब के जो लोग यहाँ पर सेक्स करने के इरादे से आते हैं, वे हवाश तो खूब करते हैं मगर औरत को पूरी तरह से सुख संतुष्टि नहीं दे पाते। राज की एक बात बताती हूँ। देखो, अगर खुद सुखी रहना है तो यह काम कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है। स्वार्थी लोग ये काम बखूबी कर सकते हैं मगर अपने साथ वालों को खुश रखने के बाद खुश रहना बहुत बड़ी बात है। तुम जो करते हो वह कोई नहीं कर सकता। तुम ऐसा प्यार करते हो जिससे कि खुद तो खुश रहते ही हो साथ ही मुझे भी सम्पूर्ण संतुष्टि भी देते हो। बस , यही बात है जो तुमको सबसे जुदा करतीहै।
सूरज- मैं ठहरा गरीब आदमी। मैं भला बड़े लोगों का मुकाबला कैसे कर सकता हूँ।, हाँ, अगर उम साथ देती हो तो आगे से मैं ऐसे काम करने की कोशिश करूंगा जिनसे सभी लोगों को फायदा हो सके । यानी कि मेरे साथ -साथ तुम भी खुश अह सको। क्या इस समय तुम असली सुख यानी परामई सुख को भोगने के लिए तैयार हो ?
किरण- बिलकुल, क्यों नहीं ? मैं तो बेताब हूँ, तुम क्या जानो ,मैं यह जानकार कितनी खुश हूँ कि तुम भी अब बोलने लगे हो। मोहब्बत के इस खेल में असली मजा तभी मिल पाटा है जब दोनों साथी बराबर सक्रीय रहते हैं। इससे पहले तो ऐसा लगता था जैसे कि मई तुम्हारे साथ बलात्कार कर रही हूँ।
सूरज- तुम्हारी जवानी का रस भी चखता रहूंगा और कहोगी तो अभिप्रिय और चांदनी वाला किस्सा भी सुनता रहंगा । तुम जिस्म बेचने वाले गिरोह के चंगुल में कितने दिनों तक रहीं और वहां से किस तरह से निकल पाई ? मैं यह जान्ने के लिए बड़ा बेताब हूँ।
किरण- मैंने प्रिंस नामक शेख को अपनी अदाओं के जाल में उलझा लिया था, उसे खुश रखने के लिए मैंने हर संभव प्रयास भी किये। बहुत तकलीफें उठाई । यहाँ तक कि उसने मेरे साथ अप्राकृतिक कुकरम भी किया , मई बता नहीं सकती , उस समय जो पीड़ा हूई थी। मगर उस नरक से निकलने के लिए उसका साथ देना जरूरी था। चांदनी मेरे हर तरह से मदद कर रही थी। जब वह मेरे साथ सम्बन्ध बनाता था तो चांदनी वहीं पर उपस्थित रहती थी और उस शेख की भावनाओं को भड़का दिया करती थीम जिसमें कारण वह जल्दी ही चरम सुख तक पहुँच जाता था और मुझे कम तकलीफ होती थी। एक बार उसने मुझे पूछा -
- मेरे बाद तुम किसीगैर मर्द के साथ सम्बन्ध मत बनाना , जो चाहोगी इनाम दूंगा ।
किरण- लेकिन आप तो मुझे अपने साथ ले जाने की बात कर रहे हो ।
प्रिंस- अगर वहां नहीं पहुँच पाओ तब भी नहीं। उसका एक कारण है।
किरण- बोलो न, ऐसा भला क्या कारण हो सकता है ? जब आप मुझे अपने साथ नहीं ले जा सकते तो आपको क्या मतलब होना चाहिए, मैं कुछ भी करूं , कहीं भी जाऊं।
प्रिंस- नहीं यार, बात ऐसी है कि तुम पर हमारा दिल आ गया है। पहली बात तो हर तरह से कोशिश की जायेगी कि तुम्हें अपने साथ ले चलूँ , और अगर नहीं भी ले जा पाया तो मेरा दिल भी तुम्हारे साथ रात गुजारने की इच्छा व्यक्त करेगा , इसलिए कहता हूँ मेरे लिए रिजर्व रहना। मुंह माँगी फीस दूंगा।
Saturday, February 19, 2011
Friday, February 18, 2011
बेवफा - 56
सूरज- ये हुनर कहाँ से सीख लिया ?
किरण- बस , तुम जैसे दीवानों ने सिखा दिया . तुम जैसे मस्ताने भी कम शौक़ीन नहीं होते हैं ?
सूरज- खैर, हमारी बातें छोडिये, हम तो रात भर करते रहेंगे. बाद में भी कर लेंगे. उस प्रिंस और अभिप्रिय की दास्ताँ सुनाओ. बाद में क्या हुआ ?
किरण- प्रिंस के साथ मै बातचीत भी कर रही थी और उसके खास अंग को सहलाती भी जा रही थी. इससे वह कामोत्तेजित हो गया.तुम मेरे अपने हो , इसलिए तुम कुछ छिपाऊंगी नहीं , जिस तरह से मेरे साथ हादसे पेश
आये हैं, मै उसी तरह से बयां करूंगी. मै ऐसी नहीं हूँ कि अपनी छवि सुधारने के लिए झूठ का सहारा नहीं लूंगी .
सूरज- यही खासियत तो आपको अन्य लोगों से अलग करती हैं. यही अदाएं तो तुमको औरों से अलग और खास बनाती हैं. जितनी मदमस्त तुम्हारी जवानी हैं, उतनी ही प्यारी बातें हैं और उतनी ही अच्छी आदतें हैं.
किरण- शुक्रिया. मैंने प्रिंस के खास अंग को सहला-सहलाकर गर्म कर दिया था. उसका अंग सख्त होकर बड़ा हो गया, अब इतना बड़ा भी नहीं जितना कि तुम्हारा यह महा अंग है. इसके जैसा मदमस्त अंग तो किसी
दूसरे का हो ही नहीं सकता. यह दावा तो मै आँख बंद करके भी कर सकती हूँ.
सूरज- तुमने तो अब तक सकड़ों लोगों के साथ सुहागरात मनाई है, अच्छी तरह से लोगों के गुप्त अंगों को देखा है. ये कैसे हो सकता है , उनमे से मेरी टक्कर का किसी और का हो ही नहीं ?
किरण- इसे चूमने , सहलाने और प्यार करने को जी चाहता है. इसे हमेशा के लिए अपनी आँखों में बसाने को जी चाहता है. इसे देखते ही मै बेहद रोमांटिक हो जाती हूँ, मेरा रोम-रोम कांपने लगता है. कामोत्तेजना की तीव्रता
मुझे मदहोश बना देती है , और मेरे मन का मोर बावला होकर नाचने लगता है.
सूरह- आह, ये शब्द नहीं अंगारे हैं और इन्होने मेरे जिस्म को झुलसा दिया है. मै बेचानियों की हद को पार करने लगा हूँ.
किरण- अपने वादों को मत भूल जाना, ध्यान रखना कि तुमने एक रात में साथ बार सेक्स का आनंद देने का वादा किया है. मुझे तो तुम पर पक्का भरोसा है मगर शराब जितनी मस्ती देने वाली होती है उतनी ही खराब भी होती
है. इसे पीकर ऐसा न हो जाए कि अपना इरादा ही भूल जाओ.
सूरज- जिस शराब को हम पी रहे हैं, यह तुम्हारे हुस्न के नशा के सामने कुछ भी नहीं है,. तुम्हारी शराबी निगाहों के जाम पीपीकर मै धन्य हो रहा हूँ, जिसे पी रहे हैं यह तो नकली शराब है. असली तो मेरे सामने है.
और जब असली शराब ही मुझे दिग्भ्रमित नहीं कर सकती तो असली क्या मायने रखती है ?
किरण- बड़ा सटीक जवाब दिया है. दिल खुश हो गया. आनंद के सागर में हिंडोले मारने लगा. अब देर न करो, मेरे ऊपर छा जाओ. तुम्हारे कलेजे में जों अंगारे दहक रहे हैं, उस आग को भू बुझा दो और मेरे तन -मन की प्यास को बुझाकर
मुझे भी हमेशा के लिए तृप्त करदो, यह वादा तो मै कर ही चुकी हूँ कि तुम्हारे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद मै अब इस तन को किसी पराये मर्द को स्पर्श भी नहीं करने दूंगी.
सूरज- मेरा भी तुमसे वादा रहा, मैं भी तुम्हारे सिवाय किसी दूसरी लड़की के साथ कभी सेक्स नहीं करूँगा, भले ही इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े, अगर कोई लड़की मेरे सामने नग्न भी होकर आती है तब भी
मैं उसे बुरी निगाह से नहीं देखूंगा. जब भी मेरा दिल चाहेगा, जब भी मेरी कामवासना भड़केगी, तभी मै तुम्हारे पास आ जाया करूँगा.
किरण- सूरज, सच बात तो ये भी है कि हर कोई औरत तुम्हारी प्यास को बुझा भी नहीं पायेगी. क्योंकि तुम बलवान ही इतने हो. जों महिला तुम्हारे साथ बिस्तर पर जंग लड़ेगी वह भी उतनी ही कामुक और शक्तिवान
होनी चाहिए. जों कि बहुत कम मिलती हैं. मेरे कहने का मतलब है कि मुझसे मजा लेने के बाद तुम्हें कोई दूसरी लड़की इतना मजा दे ही नहीं सकती . भले ही ट्राई करके देख लेना.
सूरज- इतने बड़े दावे का कारण ?
किरण- क्योंकि तुम्हें चरम सुख तक पहुँचने के लिए समय चाहिए, और इतने समय तक तो कोई मर ही मिटेगी. कोई भी औरत इतना वक्त नहीं दे पायेगी.
सूरज- मुझे क्या तुमने वहशी समझा है ?
किरण- क्या अपनी बेड पार्टनर को समस्त सुख देने वाले को वहशी कहा जाता है ?
सूरज- जिस तरह की व्याख्या कर रही हो, उससे तो ऐसा ही लगता है.
किरण- जी नहीं, उसे कामदेव कहते हैं, तुम सचमुच कामदेव कहलाने लायक हो.
सूरज- जिस प्रिंस के बारे में बात कर रही हो, क्या वह प्रिंस भी कामशक्ति के मामले में मेरे जैसा नहीं था ?
सूरज- ये हुनर कहाँ से सीख लिया ?
किरण- बस , तुम जैसे दीवानों ने सिखा दिया . तुम जैसे मस्ताने भी कम शौक़ीन नहीं होते हैं ?
सूरज- खैर, हमारी बातें छोडिये, हम तो रात भर करते रहेंगे. बाद में भी कर लेंगे. उस प्रिंस और अभिप्रिय की दास्ताँ सुनाओ. बाद में क्या हुआ ?
किरण- प्रिंस के साथ मै बातचीत भी कर रही थी और उसके खास अंग को सहलाती भी जा रही थी. इससे वह कामोत्तेजित हो गया.तुम मेरे अपने हो , इसलिए तुम कुछ छिपाऊंगी नहीं , जिस तरह से मेरे साथ हादसे पेश
आये हैं, मै उसी तरह से बयां करूंगी. मै ऐसी नहीं हूँ कि अपनी छवि सुधारने के लिए झूठ का सहारा नहीं लूंगी .
सूरज- यही खासियत तो आपको अन्य लोगों से अलग करती हैं. यही अदाएं तो तुमको औरों से अलग और खास बनाती हैं. जितनी मदमस्त तुम्हारी जवानी हैं, उतनी ही प्यारी बातें हैं और उतनी ही अच्छी आदतें हैं.
किरण- शुक्रिया. मैंने प्रिंस के खास अंग को सहला-सहलाकर गर्म कर दिया था. उसका अंग सख्त होकर बड़ा हो गया, अब इतना बड़ा भी नहीं जितना कि तुम्हारा यह महा अंग है. इसके जैसा मदमस्त अंग तो किसी
दूसरे का हो ही नहीं सकता. यह दावा तो मै आँख बंद करके भी कर सकती हूँ.
सूरज- तुमने तो अब तक सकड़ों लोगों के साथ सुहागरात मनाई है, अच्छी तरह से लोगों के गुप्त अंगों को देखा है. ये कैसे हो सकता है , उनमे से मेरी टक्कर का किसी और का हो ही नहीं ?
किरण- इसे चूमने , सहलाने और प्यार करने को जी चाहता है. इसे हमेशा के लिए अपनी आँखों में बसाने को जी चाहता है. इसे देखते ही मै बेहद रोमांटिक हो जाती हूँ, मेरा रोम-रोम कांपने लगता है. कामोत्तेजना की तीव्रता
मुझे मदहोश बना देती है , और मेरे मन का मोर बावला होकर नाचने लगता है.
सूरह- आह, ये शब्द नहीं अंगारे हैं और इन्होने मेरे जिस्म को झुलसा दिया है. मै बेचानियों की हद को पार करने लगा हूँ.
किरण- अपने वादों को मत भूल जाना, ध्यान रखना कि तुमने एक रात में साथ बार सेक्स का आनंद देने का वादा किया है. मुझे तो तुम पर पक्का भरोसा है मगर शराब जितनी मस्ती देने वाली होती है उतनी ही खराब भी होती
है. इसे पीकर ऐसा न हो जाए कि अपना इरादा ही भूल जाओ.
सूरज- जिस शराब को हम पी रहे हैं, यह तुम्हारे हुस्न के नशा के सामने कुछ भी नहीं है,. तुम्हारी शराबी निगाहों के जाम पीपीकर मै धन्य हो रहा हूँ, जिसे पी रहे हैं यह तो नकली शराब है. असली तो मेरे सामने है.
और जब असली शराब ही मुझे दिग्भ्रमित नहीं कर सकती तो असली क्या मायने रखती है ?
किरण- बड़ा सटीक जवाब दिया है. दिल खुश हो गया. आनंद के सागर में हिंडोले मारने लगा. अब देर न करो, मेरे ऊपर छा जाओ. तुम्हारे कलेजे में जों अंगारे दहक रहे हैं, उस आग को भू बुझा दो और मेरे तन -मन की प्यास को बुझाकर
मुझे भी हमेशा के लिए तृप्त करदो, यह वादा तो मै कर ही चुकी हूँ कि तुम्हारे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद मै अब इस तन को किसी पराये मर्द को स्पर्श भी नहीं करने दूंगी.
सूरज- मेरा भी तुमसे वादा रहा, मैं भी तुम्हारे सिवाय किसी दूसरी लड़की के साथ कभी सेक्स नहीं करूँगा, भले ही इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े, अगर कोई लड़की मेरे सामने नग्न भी होकर आती है तब भी
मैं उसे बुरी निगाह से नहीं देखूंगा. जब भी मेरा दिल चाहेगा, जब भी मेरी कामवासना भड़केगी, तभी मै तुम्हारे पास आ जाया करूँगा.
किरण- सूरज, सच बात तो ये भी है कि हर कोई औरत तुम्हारी प्यास को बुझा भी नहीं पायेगी. क्योंकि तुम बलवान ही इतने हो. जों महिला तुम्हारे साथ बिस्तर पर जंग लड़ेगी वह भी उतनी ही कामुक और शक्तिवान
होनी चाहिए. जों कि बहुत कम मिलती हैं. मेरे कहने का मतलब है कि मुझसे मजा लेने के बाद तुम्हें कोई दूसरी लड़की इतना मजा दे ही नहीं सकती . भले ही ट्राई करके देख लेना.
सूरज- इतने बड़े दावे का कारण ?
किरण- क्योंकि तुम्हें चरम सुख तक पहुँचने के लिए समय चाहिए, और इतने समय तक तो कोई मर ही मिटेगी. कोई भी औरत इतना वक्त नहीं दे पायेगी.
सूरज- मुझे क्या तुमने वहशी समझा है ?
किरण- क्या अपनी बेड पार्टनर को समस्त सुख देने वाले को वहशी कहा जाता है ?
सूरज- जिस तरह की व्याख्या कर रही हो, उससे तो ऐसा ही लगता है.
किरण- जी नहीं, उसे कामदेव कहते हैं, तुम सचमुच कामदेव कहलाने लायक हो.
सूरज- जिस प्रिंस के बारे में बात कर रही हो, क्या वह प्रिंस भी कामशक्ति के मामले में मेरे जैसा नहीं था ?
Thursday, February 17, 2011
बेवफा - 55
उसका पासपोर्ट तक जब्त कर लिया गया था. बड़ी मुश्किल से वह यहाँ आ पाई.
प्रिंस- सब जगह सब लोग एक तरह के नहीं होते, मै भरोसा दिलाता हूँ, तुम्हारे साथ किसी तरह की गद्दारी नहीं की जायेगी.
किरण- वहां पहुंचकर मेरे साथ ऐश करने वालों की संख्या तो नहीं बढ़ेगी ?
प्रिंस -हरगिज नहीं. भले ही रत को मौज मस्ती करने की संख्या बढ़ आजाये मगर मेरे सिवाय और कोई तुम्हें हाथ नहीं लगायेगा. तुम्हें दूसरा कोई घरेलू काम भी नहीं करना होगा. मै तुमको रानी बनाकर
रखूंगा, और ऐसे -वैसे नहीं बल्कि बाकायदा निकाह करके ले जाउंगा. ताकि तुम्हारे मन में भी किसी तरह की कोई हीन भावना न रहे और मैं भी इत्मीनान के साथ तुमसे जी भरके मोहब्बत कर सकूं.
किरण- इससे पहले भी तो आपकी रानियाँ होंगी, फिर उनका क्या होगा ? क्या आप उन्हें तलाक दे देंगे ?
प्रिंस- तलाक देने की क्या जरूरत है, हमारे क़ानून के मुताबिक़ हम ७ निकाह तो कानूनी रूप से भी कर सकते हैं. किसीको कोई दिक्कत नहीं होगी.
किरण- जहां तक क़ानून का सवाल है तो उसकी भूमिका अदालत से शुरू होती है, उससे कई गुना ज्यादा मामले ऐसे होते हैं जों कोर्ट तक पहुँचते ही नहीं और पहुँच भी गए तो अंत में भी इंसान की
इच्छा को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया जाता है. भले किसी क़ानून में ७ निकाह वाजिब हो सकते हैं , मगर किसी भी इंसान की पत्नी यह हरगिज नहीं चाहेगी कि कोई उसके प्यार को आपस में बांटे.
प्रिंस- ये सब पुरानी बातें हैं, आजकल मॉडर्न जमाना है. इतना कोई ध्यान नहीं देता . सब लोग अपने लिए कोई न कोई राह निकाल लेते हैं. महिला को क्या दिक्कत है, भले ही हम १० निकाह करें ,
उन्हें अपने खर्चे पानी से ताल्लुक रखना चाहिए .
किरण- खर्चे पानी के सिवाय क्या हमारी लाइफ में और कुछ नहीं होता है ? क्या महिलाओं की कुछ भावनाएं, कुछ जज्बात नहीं होते ? क्या उनका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता ?
प्रिंस- इसमें उन्हें कोई असुविधा नहीं होती. तुम इसलिए चिंता करती हो क्योंकि तुम्हें इसका ज्ञान नहीं है, वैसे प्रत्यक्ष में इसका अपना कोई महत्त्व नहीं है.
किरण- अगर मै दुबई में कोई काम नहीं करूंगी तो मेरा टाइम पास कैसे होगा ? जीने के लिए कुछ तो चाहिए. सिर्फ मौज मस्ती से ही तो कुछ नहीं हो जाता.
प्रिंस- मेरे शो रूम हैं, एक दो नहीं बहुत सारे हैं. अगर चाहो तो वहां पर बैठ सकती हो. मैंने अपनी खुद की एअर लाइन की मंजूरी के लिए भी आवेदन किया है अगर हो गया तो तुम मेरी उस कंपनी को भी
संभाल सकती हो, तुम एअर होस्टेस हो, तुम्हें इस मामले की पूरी नोलेज भी है.
प्किरण- क्या अभिप्रिय को यह पसंद आएगा ? क्या वह इसका विरोध नहीं करेगा ?
प्रिंस- क्यों ? उसे क्या पडी है ? उसकी जों अपेक्षा है, उतना मै उसको एकमुश्त भुगतान कर दूंगा. लेकिन इसके बाद फिर मै तुम्हें किसी दूसरे मर्द एक साथ सम्बन्ध नहीं बनाने दूंगा .
किरण- मुझे डर लग रहा है. कहीं कुछ गडबड न हो जाए . ऐसा न हो कि आपस में ही मनमुटाव हो जाए . अभीप्रिय को बुरा नहीं लगना चाहिए . शायद वह मुझे प्यार करता है .
सूरज- अच्छा, तुमने यह बात उस अरब शेख प्रिंस को भी बत्लादी . फिर क्या हुआ ?
किरण- वह जोर-जोर से ऐसे हंसा जैसे कोई पागल हंस रहा हो. उसकी हंसी थम ही नहीं रही थी. मुझे तो चांदनी पहले ही बता चुकी थी कि संबहलकर रहना है. इसलिए मै जों भी बात करती थी , ऐसी करती
थी जों अभिप्रिय तक पहुँच भी जाएँ तो उसे अच्छी लगें. मै अभिप्रिय पर इमोशनल वार करना चाहती थी.
सूरज= अच्छा, तुम तो उसके साथ शराब पी रही थीं, क्या तब भी तुम अच्छी तारह से सब कुछ सोच सकती थीं ?
किरण- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? क्या मै अब ठीक तरह से नहीं सोच रही हूँ, जबकि तुम्हारे साथ जमकर शराब का आनंद भी उठा रही हूँ. मुझे पीने की आदत तो नहीं थी लेकिन हाँ, कभी कभार यार दोषों के साथ
पैग मार लिया करती थी, दोस्तों की हठ पर धुना भी उड़ा लिया करती थी. वैसे कितना भी पिऊ.लेकिन होश बराबर रहता है.
सूरज- ये हुनर कहाँ से सीख लिया ?
किरण- बस , तुम जैसे दीवानों ने सिखा दिया . तुम जैसे मस्ताने भी कम शौक़ीन नहीं होते हैं ?
सूरज- खैर, हमारी बातें छोडिये, हम तो रात भर करते रहेंगे. बाद में भी कर लेंगे. उस प्रिंस और अभिप्रिय की दास्ताँ सुनाओ. बाद में क्या हुआ ?
किरण- प्रिंस के साथ मै बातचीत भी कर रही थी और उसके कहास अंग को सहलाती भी जा रही थी. इससे वह कामोत्तेजित हो गया.
उसका पासपोर्ट तक जब्त कर लिया गया था. बड़ी मुश्किल से वह यहाँ आ पाई.
प्रिंस- सब जगह सब लोग एक तरह के नहीं होते, मै भरोसा दिलाता हूँ, तुम्हारे साथ किसी तरह की गद्दारी नहीं की जायेगी.
किरण- वहां पहुंचकर मेरे साथ ऐश करने वालों की संख्या तो नहीं बढ़ेगी ?
प्रिंस -हरगिज नहीं. भले ही रत को मौज मस्ती करने की संख्या बढ़ आजाये मगर मेरे सिवाय और कोई तुम्हें हाथ नहीं लगायेगा. तुम्हें दूसरा कोई घरेलू काम भी नहीं करना होगा. मै तुमको रानी बनाकर
रखूंगा, और ऐसे -वैसे नहीं बल्कि बाकायदा निकाह करके ले जाउंगा. ताकि तुम्हारे मन में भी किसी तरह की कोई हीन भावना न रहे और मैं भी इत्मीनान के साथ तुमसे जी भरके मोहब्बत कर सकूं.
किरण- इससे पहले भी तो आपकी रानियाँ होंगी, फिर उनका क्या होगा ? क्या आप उन्हें तलाक दे देंगे ?
प्रिंस- तलाक देने की क्या जरूरत है, हमारे क़ानून के मुताबिक़ हम ७ निकाह तो कानूनी रूप से भी कर सकते हैं. किसीको कोई दिक्कत नहीं होगी.
किरण- जहां तक क़ानून का सवाल है तो उसकी भूमिका अदालत से शुरू होती है, उससे कई गुना ज्यादा मामले ऐसे होते हैं जों कोर्ट तक पहुँचते ही नहीं और पहुँच भी गए तो अंत में भी इंसान की
इच्छा को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया जाता है. भले किसी क़ानून में ७ निकाह वाजिब हो सकते हैं , मगर किसी भी इंसान की पत्नी यह हरगिज नहीं चाहेगी कि कोई उसके प्यार को आपस में बांटे.
प्रिंस- ये सब पुरानी बातें हैं, आजकल मॉडर्न जमाना है. इतना कोई ध्यान नहीं देता . सब लोग अपने लिए कोई न कोई राह निकाल लेते हैं. महिला को क्या दिक्कत है, भले ही हम १० निकाह करें ,
उन्हें अपने खर्चे पानी से ताल्लुक रखना चाहिए .
किरण- खर्चे पानी के सिवाय क्या हमारी लाइफ में और कुछ नहीं होता है ? क्या महिलाओं की कुछ भावनाएं, कुछ जज्बात नहीं होते ? क्या उनका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता ?
प्रिंस- इसमें उन्हें कोई असुविधा नहीं होती. तुम इसलिए चिंता करती हो क्योंकि तुम्हें इसका ज्ञान नहीं है, वैसे प्रत्यक्ष में इसका अपना कोई महत्त्व नहीं है.
किरण- अगर मै दुबई में कोई काम नहीं करूंगी तो मेरा टाइम पास कैसे होगा ? जीने के लिए कुछ तो चाहिए. सिर्फ मौज मस्ती से ही तो कुछ नहीं हो जाता.
प्रिंस- मेरे शो रूम हैं, एक दो नहीं बहुत सारे हैं. अगर चाहो तो वहां पर बैठ सकती हो. मैंने अपनी खुद की एअर लाइन की मंजूरी के लिए भी आवेदन किया है अगर हो गया तो तुम मेरी उस कंपनी को भी
संभाल सकती हो, तुम एअर होस्टेस हो, तुम्हें इस मामले की पूरी नोलेज भी है.
प्किरण- क्या अभिप्रिय को यह पसंद आएगा ? क्या वह इसका विरोध नहीं करेगा ?
प्रिंस- क्यों ? उसे क्या पडी है ? उसकी जों अपेक्षा है, उतना मै उसको एकमुश्त भुगतान कर दूंगा. लेकिन इसके बाद फिर मै तुम्हें किसी दूसरे मर्द एक साथ सम्बन्ध नहीं बनाने दूंगा .
किरण- मुझे डर लग रहा है. कहीं कुछ गडबड न हो जाए . ऐसा न हो कि आपस में ही मनमुटाव हो जाए . अभीप्रिय को बुरा नहीं लगना चाहिए . शायद वह मुझे प्यार करता है .
सूरज- अच्छा, तुमने यह बात उस अरब शेख प्रिंस को भी बत्लादी . फिर क्या हुआ ?
किरण- वह जोर-जोर से ऐसे हंसा जैसे कोई पागल हंस रहा हो. उसकी हंसी थम ही नहीं रही थी. मुझे तो चांदनी पहले ही बता चुकी थी कि संबहलकर रहना है. इसलिए मै जों भी बात करती थी , ऐसी करती
थी जों अभिप्रिय तक पहुँच भी जाएँ तो उसे अच्छी लगें. मै अभिप्रिय पर इमोशनल वार करना चाहती थी.
सूरज= अच्छा, तुम तो उसके साथ शराब पी रही थीं, क्या तब भी तुम अच्छी तारह से सब कुछ सोच सकती थीं ?
किरण- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? क्या मै अब ठीक तरह से नहीं सोच रही हूँ, जबकि तुम्हारे साथ जमकर शराब का आनंद भी उठा रही हूँ. मुझे पीने की आदत तो नहीं थी लेकिन हाँ, कभी कभार यार दोषों के साथ
पैग मार लिया करती थी, दोस्तों की हठ पर धुना भी उड़ा लिया करती थी. वैसे कितना भी पिऊ.लेकिन होश बराबर रहता है.
सूरज- ये हुनर कहाँ से सीख लिया ?
किरण- बस , तुम जैसे दीवानों ने सिखा दिया . तुम जैसे मस्ताने भी कम शौक़ीन नहीं होते हैं ?
सूरज- खैर, हमारी बातें छोडिये, हम तो रात भर करते रहेंगे. बाद में भी कर लेंगे. उस प्रिंस और अभिप्रिय की दास्ताँ सुनाओ. बाद में क्या हुआ ?
किरण- प्रिंस के साथ मै बातचीत भी कर रही थी और उसके कहास अंग को सहलाती भी जा रही थी. इससे वह कामोत्तेजित हो गया.
तिरुवनंतपुरम के चकाई इलाके में गुरुवार को एक निजी स्कूल की वैन एक नहर में गिर जाने से उसमें सवार चार बच्चों और एक महिला सहायक की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि इस हादसे में एक अन्य बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है।
पार्वती पुथानार नहर से इस महिला और बच्चों को स्थानीय लोगों ने बाहर निकाला और एक अस्पताल ले गए, जहां पर इन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वैन के चालक के मुताबिक, वाहन में नौ बच्चे और एक परिचारिका सवार थी। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए की नहर में कोई बच्चा छूट नहीं गया है, इसकी तलाशी ली जा रही है।
यह सभी बच्चे पेट्टाह इलाके स्थित अपने विद्यालय की ओर जा रहे थे। यह सभी बच्चे एलकेजी और यूकेजी के छात्र है।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में गुरुवार को एक तेज रफ्तार स्कूली बस ने एक छात्रा को कुचल दिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। छात्रा की मौत से नाराज भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन करते हुए तोड़फोड़ और पुलिस से झ्झड़प की। घटना शहर के सासनीगेट इलाके की है, जहां आगरा रोड पर सुबह दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस-अलीगढ़) की तेज रफ्तार बस ने स्कूटी से कॉलेज जा रही छात्रा अनीता को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चालक बस छोड़कर फरार हो गया। अनीता स्थानीय राम कटोरी वार्षनेय इंटर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा थी।
घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया और खाली स्कूल बस में तोड़फोड़ की। सासनीगेट थाना प्रभारी कमला शंकर ने संवाददाताओं से कहा कि हालात काबू में करने के लिए मौके पर पहुंचे पुलिस बल से उग्र लोगों ने धक्का मुक्की करते हुए झड़प की। शंकर ने कहा कि फिलहाल हालात काबू में हैं। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। फरार बस चालक की तलाश की जा रही है।
पार्वती पुथानार नहर से इस महिला और बच्चों को स्थानीय लोगों ने बाहर निकाला और एक अस्पताल ले गए, जहां पर इन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वैन के चालक के मुताबिक, वाहन में नौ बच्चे और एक परिचारिका सवार थी। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए की नहर में कोई बच्चा छूट नहीं गया है, इसकी तलाशी ली जा रही है।
यह सभी बच्चे पेट्टाह इलाके स्थित अपने विद्यालय की ओर जा रहे थे। यह सभी बच्चे एलकेजी और यूकेजी के छात्र है।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में गुरुवार को एक तेज रफ्तार स्कूली बस ने एक छात्रा को कुचल दिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। छात्रा की मौत से नाराज भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन करते हुए तोड़फोड़ और पुलिस से झ्झड़प की। घटना शहर के सासनीगेट इलाके की है, जहां आगरा रोड पर सुबह दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस-अलीगढ़) की तेज रफ्तार बस ने स्कूटी से कॉलेज जा रही छात्रा अनीता को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चालक बस छोड़कर फरार हो गया। अनीता स्थानीय राम कटोरी वार्षनेय इंटर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा थी।
घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया और खाली स्कूल बस में तोड़फोड़ की। सासनीगेट थाना प्रभारी कमला शंकर ने संवाददाताओं से कहा कि हालात काबू में करने के लिए मौके पर पहुंचे पुलिस बल से उग्र लोगों ने धक्का मुक्की करते हुए झड़प की। शंकर ने कहा कि फिलहाल हालात काबू में हैं। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। फरार बस चालक की तलाश की जा रही है।

भुवनेश्वर। उड़ीसा के मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी का नक्सलियों द्वारा अपहरण किए जाने की गुरुवार को पुष्टि कर दी गई। नक्सलियों ने उनकी रिहाई के लिए दो शर्ते रखी हैं। वह बुधवार से लापता थे।प्रदेश में नक्सलियों ने पहली बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) स्तर के किसी अधिकारी का अपहरण किया है।
बुधवार को रात तक जिलाधिकारी आर. वेनेल कृष्णा के मुख्यालय वापस नहीं पहुंचने पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी। कृष्णा कुछ अन्य अधिकारियों के साथ बुधवार सुबह चित्रकोंडा इलाके में जनसंपर्क बैठकों में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुए थे।
प्रदेश के खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सूचना मिली है कि नक्सलियों ने कृष्णा और एक अन्य अधिकारी का अपहरण किया है।उन्होंने कहा कि अपहरण के समय कृष्णा के साथ मौजूद एक अन्य अधिकारी जिला मुख्यालय लौट आए हैं। नक्सलियों ने इस अधिकारी को एक नोट दिया है, जिसमें सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। जिलाधिकारी की रिहाई के लिए दो शर्ते रखी गई हैं।
इन शर्तो में इलाके में नक्सल विरोधी अभियान रोकने और अब तक गिरफ्तार किए गए सभी नक्सलियों को रिहा करने की मांग शामिल है।
कृष्णा आंध्रप्रदेश के हैदराबाद के उपनगर चंदानगर के निवासी है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास से स्नातक उपाधि प्राप्त करने के बाद अगस्त 2005 में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए थे। 16 महीने पहले उन्हें मलकानगिरी का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया थ
उत्तर प्रदेश के फरुखाबाद जिले में नौजवानों को किन्नर बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि प्रशांत नामक युवक ने पुलिस अधीक्षक केएजे नरसन से पिछले दिनों मुलाकात कर उसे धोखे से किन्नर बनाने की दास्तां बयां की है।
सूत्रों के मुताबिक खुद पर हुई ज्यादती के बाद अंजलि किन्नर बने प्रशांत ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि जिले में एक किन्नर गिरोह, सुन्दर दिखने वाले गरीब युवकों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर पहले विश्वास में लेता है और फिर नशे का इंजेक्शन देने के बाद उनका गुप्तांग काटकर उन्हें किन्नरों का जीवन जीने के लिये मजबूर कर देता है। इसके अलावा इनमें से कई लोग देश के बड़े शहरों में बेचे जाने को विवश भी किये जाते हैं।
प्रशांत ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि अब तक करीब 12 युवकों को किन्नर बनाकर देश के विभिन्न शहरों में बेचा जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक प्रशांत ने कहा है कि अंसार नाम के एक किन्नर ने उसकी गरीबी का फायदा उठाकर पहले तो उस पर हजारों रुपए खर्च कर ऐश-ओ-आराम भरे दिन दिखाए और फिल्मों में काम दिलाने के लिये बाल बढ़ाने और फिर महिलाओं के कपड़े पहनने को कहा था। कुछ दिन के बाद अंसार ने उसे नशीला इंजेक्शन देकर उसका गुप्तांग काट दिया। प्रशांत के मुताबिक शहर के गढ़ी कोहना क्षेत्र का निवासी अंसार किन्नर नौजवानों को किन्नर बनाने वाले संगठित गिरोह का सरगना है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि प्रशांत नामक युवक ने पुलिस अधीक्षक केएजे नरसन से पिछले दिनों मुलाकात कर उसे धोखे से किन्नर बनाने की दास्तां बयां की है।
सूत्रों के मुताबिक खुद पर हुई ज्यादती के बाद अंजलि किन्नर बने प्रशांत ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि जिले में एक किन्नर गिरोह, सुन्दर दिखने वाले गरीब युवकों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर पहले विश्वास में लेता है और फिर नशे का इंजेक्शन देने के बाद उनका गुप्तांग काटकर उन्हें किन्नरों का जीवन जीने के लिये मजबूर कर देता है। इसके अलावा इनमें से कई लोग देश के बड़े शहरों में बेचे जाने को विवश भी किये जाते हैं।
प्रशांत ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि अब तक करीब 12 युवकों को किन्नर बनाकर देश के विभिन्न शहरों में बेचा जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक प्रशांत ने कहा है कि अंसार नाम के एक किन्नर ने उसकी गरीबी का फायदा उठाकर पहले तो उस पर हजारों रुपए खर्च कर ऐश-ओ-आराम भरे दिन दिखाए और फिल्मों में काम दिलाने के लिये बाल बढ़ाने और फिर महिलाओं के कपड़े पहनने को कहा था। कुछ दिन के बाद अंसार ने उसे नशीला इंजेक्शन देकर उसका गुप्तांग काट दिया। प्रशांत के मुताबिक शहर के गढ़ी कोहना क्षेत्र का निवासी अंसार किन्नर नौजवानों को किन्नर बनाने वाले संगठित गिरोह का सरगना है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस मामले की जांच कर रही है।
Wednesday, February 16, 2011
बेवफा - ५4
सूरज- तुम मुझसे इतना प्रेंम क्यों करती हो ? जग में कोई किसीसे इतना प्यार करता भी है क्या ?
किरण- यही सवाल और कितनी बार करोगे सूरज ? कितनी बार मै इसका जवाब दूंगी. तुम्हें यकीन क्यों नहीं होता कि मै तुमसे अपनी जान से भी ज्यादा प्रेम करती हूँ.
सूरज- यकीन तो बहुत होता है, मगर अपनी किस्मत पर ज्यादा यकीन नहीं है, तुम जों कहती हो, करती हो उस सब पर खूब भरोसा है. मै जीवन में जीती बाजी भी हारता ही रहा हूँ, कभी जीत नहीं पाया.
किरण- हटो, मैं कैसे मान लूं, जब तुमने मुझे जीत लिया है तो और किसीकी बात मै क्या करूं ?
सूरज- तुम मुझे बना तो नहीं रही हो ? या फिर मै कोई खाब तो नहीं देख रहा हूँ. बताइये न . सच बताना. अगर झूठ बोला तो मुझसे बुरा कोई न होगा .
किरण- समूची दुनिया पर निगाह दौडाती हूँ तो तुमसे बेहतर कोई और दिखाई नहीं देता. अब अगर तुमसे भी कुछ छिपाऊंगी तो रह नहीं पाउंगी. मेरा भरोसा किया करो. अगर इस मामले में मुझसे ज्यादा सवाल
करोगे तो हो सकता है कि मुझे संदेह हो जाए और मै बेवजह शक करने लागूं.
सूरज- अच्छा ठीक है, अब ऐसा करिये , जल्दी से चांदनी के बारे में बता डालिए , वह आपकी मदद कर पाई कि नहीं ? और अगर सहायता की तो किस तरह से ?
किरण- अब तुम किस चांदनी की बात कर रहे हो ?
सूरज- लों. भूल गयीं, अभी तो तुमने बताया था उस महरौली वाली चांदनी के बारे में, जों जिस्मफरोशी करने वाले गिरोह की मैनेजर थी और जिसने इशारों-इशारों में ही तुम्हें समजह दिया था कि वहाँ पर हर जगह कैमरे लगे हैं.
किरण- ओफ्फोह, उस वाली चांदनी के बारे में पूछ रहे हो. लगता है अब मुझ पर भी शराब का असर होने लगा है.
सूरज- 'मुझ' से क्या मतलब है आपका ? क्या मन भी आपका ऐसा दिखाई देता हूँ, क्या आपको लगता है कि मैंने ज्यादा शराब पी ली है. अगर कहो तो अभी मै और भी ज्यादा पी सकता हूँ. बनाओ पैग, दिखा देता हूँ.
किरण- अच्छा जी, इतना दम ख़म है ? ये तो खुशी की बात है. बिंदास मौज मस्ती करो. जमकर पीओ.पैग बनाने का काम मेरा है.
सूरज- और उस चांदनी के बारे में तथा अरब के शेख प्रिंस के बारे में कौन बताएगा ?
किरण- इसका मतलब तुमने मेरी कहानी खूब अच्छी तरह से सूनी है, ध्यान लगाकर. है न. मजा आ गया . लेकिन उस दिन मैं मजे में नहीं थी, डरी-सहमी और घबराई हुई थी. चांदनी ने बहुत गहरा मेकअप किया हुआ
था, इसके बावजूद वह मेरे जैसी सुन्दर नहीं लग पा रही थी. प्रिंस मेरे रूप सौंदर्य पर फ़िदा था. वह कह रहा था-
- मैंने तुम्हारे सेठ अभिप्रिय से बात कर ली है. वह इस बात के लिए सहमत हो गया है कि मै तुम्हें अपने साथ १५ दिनों के लिए दुबई ले जाऊं
किरण- फिर प्रोब्लम क्या है ? यहाँ आज मेरा पहला दिन है. इससे पहले तक मैं एअर होस्टेस थी, अब अगर इतने दिनों के लिए बाहर जाउंगी तो मेरी नौकरी छूट जायेगी.
प्रिंस- उसकी टेंशन तुम मत लों. अभिप्रिय और मैं मिलकर तुम्हारी नुक्सान भरपाई कर देंगे. वैसे भी उस छोटी सी नौकरी में क्या रखा है ? मै उससे दस गुना मगार देने के लिए तैयार हूँ. बोलो चलोगी हमेशा के लिए .
किरण- मुझे क्या करना होगा ?
प्रिंस- कुछ खास नहीं, जों यहाँ कर रही हो. वहाँ पर भी वही करना होगा. मेरा दिल बहलाना होगा. मेरे साथ मौज मस्ती करनी होगी और क्या ?
किरण- अगर वहां जाकर तुमने अपना इरादा बदल दिया तो क्या होगा ?
प्रिंस- किस तरह के बदलाव की बात कर रही हो ? कहीं ये तो नहीं कहती ......
किरण- रुको न , मै बताती हूँ, यहाँ से महिलाओं को घरेलू काम के लिए वहां पर बुलाया जाता है और फिर वहां पर उनका यौन शोषण किया जाता है. एक नहीं बल्कि कई लोग मिलकर उसका शोषण करते हैं.
मैंने एक महिला की आप्बीते कहानी पत्रिका में पढ़ी थी. वह महिला नौकरानी के काम के लिए बुलाई गयी थी मगर उसका सेठ उसके साथ अप्राकृतिक यौन दुर्व्यवहार करता था. इनकार करने पर उसकी पिटाई की
जाती थी, उसका पासपोर्ट तक जब्त कर लिया गया था. बड़ी मुश्किल से वह यहाँ आ पाई.
प्रिंस- सब जगह सब लोग एक तरह के नहीं होते, मै भरोसा दिलाता हूँ, तुम्हारे साथ किसी तरह की गद्दारी नहीं की जायेगी.
किरण- वहां पहुंचकर मेरे साथ ऐश करने वालों की संख्या तो नहीं बढ़ेगी ?
प्रिंस -हरगिज नहीं. भले ही रत को मौज मस्ती करने की संख्या बढ़ आजाये मगर मेरे सिवाय और कोई तुम्हें हाथ नहीं लगायेगा.
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