Wednesday, February 2, 2011

बेवफा खंडहर वाली , भाग-41
सूरज- तो इसका मतलब ये कहो न की राहुल अपनी बड़ी साली से कम और दौलत से ज्यादा मोहब्बत कर रहा था.
किरण- हाँ, ऐसा ही कुछ था. राहुल कहता की वह रीता को चाहता है क्योंकि वह बहुत दौलतमंद है और उसकी दौलत को भी पसंद करता है क्योंकि वह दौलत रीता की है . कुल मिलाकर वह रीता और उसकी अरबों की जायदाद
, उन दोनों से ही लगाव रखता था.
सूरज- अच्छा ... बढ़िया है. यह कौन सा दर्शन हुआ भाई ? बात कुछ समझ में नहीं आई.
किरण- आगे सुनाऊ या फिर बात को यहीं खत्म करू ?
सूरज - आगे बढ़ने के लिए ही तो मै कब से मक्खन लगा रहा हूँ. देख रही हो न , मैंने तो इसीलिए ही रफ़्तार भी कम करदी है. शायद आपको भी मजा नहीं आ रहा होगा .
किरण - मजा तो इतना आ रहा है की उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. इस मामले में तुम कमाल के आदमी हो. तुमने तो यार मेरा ही मूड चेंज कर दिया है. दिखने में ऐसा लगता नहीं है की तुम इतने बड़े शक्तिमान
हो सकते. शक्तिमान शब्द मैंने इसलिए प्रयोग किया क्योंकि शक्ति की असली परख तो बिस्तर के मैदान पर ही होती है. यहाँ पर कई तरह के मर्द पाए जाते हैं , इनमे से कुछ तो ऐसे होते हैं जों सिर्फ जुबानी मर्द होते हैं , कुछ
ऐसे होते हैं जों शारीरिक मर्द होते हैं और कुछ तुम्हारे जैसे होते हैं. आल इन वन. तुम उन लोगों में से नहीं हो जों सिर्फ किसी एक ही चीज पर निर्भर करते हों. तुम असली मर्द हो. तुमने तो मेरी प्यास को हमेशा के लिए बुझा आ
है. अब मै तृप्त हो गयी हो . थोड़ी देर तक अगर ऐसे ही बने रहते हो. तो ये जान लीजिए कि मै हमेशा तुम्हें याद रखूंगी . कामदेव को भी फेल कर दिया है तुमने.
सूरज- मुझे इतना भी सिर पर न चढाओ कि फिर गिरू तो कभी उठ ही ना पाऊं .
किरण- आह , आराम -आराम से ही करो न मेरी जान. मुझे ज्याडा सताओगे तो मजा कैसे ले पाओगे ? आखिर तुम भी तो चाहते ही होंगे न कि इन हसीन [पलों को हम हर बार और यहाँ तक कि बार-बार इंजॉय करें.
सूरज- अब तो यकीन मानिए, मैंने रफ़्तार बहुत कम कर दी है. इतनी ज्यादा कम कि आप भी महसूस कर ही रही होंगी , इसके बावजूद भी अगर तुम इस तरह की शिकायत करती हो तो इसे मै क्या समझूं ?
किरण- ज्या कुछ समझने की जरूरत नहीं है, जैसा कहती हूँ वैसा करो , ये सब तुम्हारे हित में भी है और मेरे हित में भी.
किरण क्या का रही थी , यह सूरज ठीक तरह से नहीं सुन पा रहा था, उसका दिमाग तो भूत-प्रेत , आत्मा और रूह जैसे लफ्जों में उलझा हुआ था. वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिरकार करे तो क्या करे ? कभी -कभी
उसके दिल के किसी कोने से आवाज आती कि वह इस रहस्यमय होटल से कहीं दूर भाग जाए, वह अफ़सोस करने लगा अपने उस फैसले पर जों उसने यहाँ आने के लिए लिया था, वह सोचता कि अगर उसकी गाड़ी खराब
नहीं होती तो वह इस होटल में हरगिज नहीं रुकता, अगर रुकता भी तो किरण से इस तरह की बात नहीं करता. अगर बातें भी कर लेता तो बातों को यहाँ तक नहीं बढाता, अंतरंग संबंधों के बारे में उसे यहाँ तक नहीं बढ़ना
चाहिए था. उसे अपने किये पर दुःख हो रहा था. यह सच था कि उसे पूरा इंद्रजाल कंठस्थ था, लेकिन इसके बावजूद उसने कुछ बातें झूठी भी कही थीं, उसने यह झूठ ही बोला था कि उसने सब मन्त्रों को सिद्ध कर लिया है.
असलियत तो यह थी कि उसे मन्त्रों की सच्चाई और शक्ति पर भी भरोसा नहीं था. उसने तो सिर्फ हावी होने के लिए यह बात बनादी थी. वह सोच ही रहा था कि उसे किरण की आवाज सुनाई दी-
-क्या सोच रहे हो ? कहीं दूर उलझ गए क्या ?
सूरज- आपको क्या मालून कि मैन सोच रहा हूँ ? मैन क्या सोचूंगा और क्यों सोचूंगा ?
किरण- सोचने के लिए तो बहुत कुछ है आपके पास . और कुछ नहीं तो ये भी सोच सकते हो कि इस हो कि इस होटल में हंगामा क्यों नहीं है ?
सूरज- आप मेरा मजाक उड़ा रही हैं ?
किरण- जी नहीं, बिलकुल नहीं. मैन तुमसे मजा तो ले सकती हूँ मगर तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा सकती.
सूरज- यह भी क्या अजब बात बताई है आपने . जानती भी हीब सब कुछ हैं और छिपाती भी सब कुछ हैं.
किरण- अपने मन से वहम निकाल्दो मेरी जान . इससे चिंता बढ़ती है.
सूरज- क्या आसपास कोई गैरेज नहीं है ?
किरण- इतनी रात गए गैरेज की ख्वाहिश , कोई बात तो जरूर है. किस्से मिलने की इच्छा है इतनी रात ?
सूरज- अरे बाबा, मै अभी की नहीं सुबह की बात कर रहां हूँ.

बेवफा खंडहर वाली , भाग-40
किरण- यही की जान कीमती होती है, इसे जाने के बाद कुछ नहीं बचता, उससे जुड़े हुए लोग फिर से नई जिंदगी शुरू कर देते हैं. नए साथ मिलते हैं, नए उद्देश्य बन जाते हैं और नई राह यहाँ तक की नई
मंजिलों का जन्म हो जाता है. इसलिए कभी भी किसीके लिए जान देने की बात मत करना.
सूरज- अच्छा ठीक है, तुम जैसा कहोगी मै वैसा ही करूँगा . आदेश करो. तुम्हें शायद ये बात बहुत बुरी लगी है ?
किरण- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. असल में तुम्हें एहसास नहीं है की किसीके के लिए बिना जिस्म के जीना कितना मुश्किल होता है.
सूरज- बिना जिस्म के जीना ? ये आपने क्या कह दिया ? ये कैसे शब्द इस्तेमाल कर लिए ? भला ऐसा कहीं होता है क्या ?
किरण- तुम नहीं समझ पाओगे.
सूरज- समझाने की कोशिश करोगी तो क्यों नहीं ? मेरा तो यही सोचना है की आपने मुझे फिर से डराना शुरू कर दिया है . ऐसा नहीं चलता यार . या तो ठीक से प्रणय क्रीडा की ही बात करो या फिर अच्छी तरह से
डरा ही लों. रामगोपाल वर्मा की तरह एक ही फिल्म में होरर और रोमांस का तडका मत लगाओ .
किरण- इतनी जल्दी दहशत में आ गए , अभी अभी तो कहते थे थे की जनाब के दादा बहुत बड़े सयाने थे , की जादू टोना के माहिर थे, की जनाब ने पूरा इंद्रजाल ही पढ़ लिया है और अब देखो सिर्फ रूह की बात चली
तो हवा खुश्क हो गयी, मैन तो आपको यह बताना चाह रही थी की असली मोहब्बत जिस्म से ही ज्यादा ताल्लुक रखती है , यह अलग बात है की लोग ऐसा मानने के लिए तैयार नहीं होते. अपनी बात को बड़ी करने के लिए
, अपने आपको बड़ा दिखाने के लिए वे ऐसा दिखाने की कोशिश करते हैं जैसे की वे बड़े त्यागी हैं. और बड़प्पन की आड़ में वे अनैतिक कार्यों को अंजाम देते हैं.
सूरज- थोड़ा सा डिटेल में बताओगे तब समझ पाउँगा. कुछ आपबीती सुनाइये इससे जुडी हुई.
किरण- क्या बताऊ और क्या छिपाऊ ? जीवन में रोजाना ऐसे कार्य होते रहते हैं. मेरे पास तो लोगों का आना-जाना लगा ही रहता था. तुम तो जानते ही हो की एक पेशेवर औरत की दिनचर्या क्या होती है ?
सूरज- बस इसी बात को बार- बार मत दोहराओ , ऐसा करती हो तो दिल पर चोट सी लगती है. इस शब्द से मुझे नफरत सी हो गयी है.
किरण- जों सचह है, उसे स्वीकार करना सीखो सूरज. सच्चाई जितनी कड़वी होती है उतनी ही पवित्र होती है.
सूरज- अच्छा ठीक है , यह भाषण छोडिये और कहानी के बारे में सुनाइये , जों अभी सुनाने जा रही थीं .
किरण- अच्छा , राहुल के बारे में बात कर रहे हो. उसका नाम राहुल ही तो था . राहुल अमीर बाप का अय्यास युवक था. वह जों ठान लेता, उसे पूरा करके ही रहता था. उसने यदि किसीको पाने की जिद कर ली तो
दुनिया की कोई ताकत उसे ऐसा करने से नहीं रोक सकती थी. वह मेरे पास एक बार आया था. उसने मेरी मुंहमांगी रकम दी. और फिर पूरी रात सिर्फ अपनी कहानी ही सुनाता रहा. मेरे कहने पर पर भी उसने मेरे साथ
जिस्मानी रिश्ता नहीं बनाया. अगर कोई दूसरा होता तो इस मौके को किसी भी कीमत पर नहीं छोडता .
सूरज- वाव, इसका मतलब दुनिया में इस तरह के लोग भी रहते हैं. क्या कहानी सुनाई उसने ?
किरण- उसने बताया की उसे अपनी बड़ी साली बहुत अच्छी लगती थी, उसकी पत्नी वैसे तो बहुत सुन्दर थी, गुणवान थी, लेकिन बड़ी साली पर वह बुरी तरह से फ़िदा था. वह उसे हासिल करने के लिए नई-नई तरकीब ढूँढता
रहता था. लेकिन दुर्भाग्य से उसकी हर स्कीम फेल हो जाया करती थी. इत्तेफाक से उसकी पत्नी की बड़ी बहन रीता के पति का सड़क दुर्घटना में इंतकाल हो गया. रीता का पति बहुत धनवा न था. अरबों की जमीं जायदाद थी,
अब तो राहुल के मन में यह बात घर कर गयी की अगर उसने रीता को अपने प्रेम के जाल में उलझा लिया तो वह उसके यौवन के रस को तो चखेगा ही , साथ ही वह उसकी दौलत को भी हथिया सकता है.
सूरज- तो इसका मतलब ये कहो न की राहुल अपनी बड़ी साली से कम और दौलत से ज्यादा मोहब्बत कर रहा था.
किरण- हाँ, ऐसा ही कुछ था. राहुल कहता की वह रीता को चाहता है क्योंकि वह बहुत दौलतमंद है और उसकी दौलत को भी पसंद करता है क्योंकि वह दौलत रीता की है . कुल मिलाकर वह रीता और उसकी अरबों की जायदाद
, उन दोनों से ही लगाव रखता था.
सूरज- अच्छा ... बढ़िया है. यह कौन सा दर्शन हुआ भाई ? बात कुछ समझ में नहीं आई.
किरण- आगे सुनाऊ या फिर बात को यहीं खत्म करू ?
सूरज - आगे बढ़ने के लिए ही तो मै कब से मक्खन लगा रहा हूँ.

Monday, January 31, 2011

बेवफा खँडहर - 38
सकिरण- अच्छा ठीक है, जब कभी इच्छा होगी तो तुम्हारे साथ ही जाउंगी, तब तो मुझे किसीकी दहशत नहीं होनी चाहिए , आखिर तुम जों मेरे साथ रहोगे .
सूरज का दिमाग भन्ना चुका था. उसकी कोई ज्ञान्द्रीय उसे फिर से यह आभास करा रही थी की उसके साथ या तो कुछ गलत होने वाला है या फिर हो चूका है. मगर उसने अपने सिर को एक तारफ झटक दिया
और प्यार के समुन्दर में गोते लगाना लगा, वे दोनों अब चरम अवस्था में पहुँचने वाले थे. सूरज पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा था ताकि वह उसे सम्पूर्ण सुख
डे सके, उसने सुन रखा था की औरतें ऐसे समय जोर -जोर के प्रहार पसंद करती हैं इसलिए वह जोर -जोर से प्रहार करने लगा. किरण भी खामोश होकर रतिक्रिया का सुख ले रही थी, उसके मुख से अजीब तरह की
आवाजें निकल रही थी. उससे माहौल और भी ज्यादा उत्तेजक होने लगा .इतना ज्यादा उत्तेजक की सूरज काफी देर तक उसके सीने की गोलाइयों को सहलाता रहा , किरण ने अपनी आंखें मूँद लीं . वह चाहती थी की
सूरज इसी तरह से उसे मसलता रहे, उसके होठों का रस चूसता रहे. सूरज ने उसकी ये हसरत जल्दी ही पूरी भी करदी. वह उसके पंखुड़ी जैसे होठों को ऐसे चूसता था जैसे की कोई रेगिस्तान के तपती दोपहरी में
प्यास से व्याकुल पथिक पानी मिल जाने पर उस पर टूट पड़ता हो. किरण उसकी उत्तेजना को महसूस कर रही थी, उसकी कामशक्ति को सलाम कर रही थी. उसने महसूस किया की अब तक अगर सूरज की जगह पर
कोई दूसरा मर्द रहा होता तो कबका हथियार डाल चु़का होता , लेकिन सूरज बिंदास था. उसका खास अंग भी बहादुरों की तरह मोर्चे पर मुस्तैदी के साथ डटा हुआ था. सूरज को और भी ज्यादा उकसाने के इरादे से वह तारीफ़ करते
हुए सूरज से कहने लगी-
-तुम कमाल हो, बेमिसाल हो सूरज. तुम आम इंसान जैसे नहीं हो. अगर तुम्हारे स्थान पर कोई दूसरा होता तो कब का फिनिश हो चूका होता, मगर तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं है.
सूरज- मैन तो एक जर्रा भर हूँ, मैन तारीफ़ के काबिल नहीं हूँ.
किरण- ऐसा कहकर मेरा दिल क्यों दुखाते हो. तुम साक्षात कामदेव हो. तुम मुझ जैसी औरत को भी सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि डे सकती हो. यह बहुत बड़ी बात है वरना आजकल हो ये रहा है की मर्दों का ध्यान सिर्फ जुल्फों
पर होता है, अपने शरीर की मजबूती पर वे ध्यान ही नहीं दे पाते. जानते हो इसका नतीजा क्या होता ?
सूरज- क्या होता होता है ?
किरण- नतीजा ये होता की ऐसे पुरुष बिस्तर से बाहर तो बड़े मर्द बने फिरते हैं, ऐसा दर्शाते हैं जैसे की औरत को मिलते ही घोलकर पी जायेंगे . और जब बिस्तर पर आते हैं, जंग का एलान होता है तो थोड़ी सी देर
में ही धुप में दौड़ते कुत्ते की तरह कांपने लगते हैं.
सूरज- तो सामने वाली औरत कुछ नहीं कहती होगी ?
किरण- कहती होगी ? की करती भी है. मैन तो अपने ऐसे नामर्द ग्राहक को सीधा लात मारकर बाहर भगा दिया करती थी.
सूरज- इसका मतलब आज मैन बच गया , वरना मुझे भी लात मिलने वाली थी.
किरण- नहीं यार, तुम तो जान हो अपनी , अपने जीने का मकसद हो भला तुम्हें लात कैसे मार सकती हूँ. मै तो गुलाम हो गयी हूँ तुम्हारी.
सूरज- ये क्या कह रही हो मेरी जान. तुम तो दिल हो , मेरी धडकन हो. खून बनकर रग रग में समा चुकी हो.
किरण- सच कह रहे हो सूरज ?
सूरज- हाँ, किरण , यह मेरा क्षणिक प्रेम नहीं है. इसमें वासना भी नहीं है बल्कि यह तो मेरा अमर प्यार है.
किरण- इस प्यार के बदले अगर मै हजार जन्मों तक अपनी जान भी कुर्बान करती रहूँ तो भी एहसान नहीं चूका सकती .
सूरज- एक बार प्यार से मुस्करा दो , यकीन मानो मैन खुद ही उलटा कर्जदार हो जाउंगा, इतनी तासीर है इस प्यारी सी मुस्कान में .
किरण- तुम्हारी बातें दिल से निकली हुई और सटीक लगती हैं, कहीं से भी बनावट नजर नहीं आती.
सूरज- और आप भी तो दिल की गहराइयों से कहती हो.
किरण - ये प्यार कभी कम तो नहीं होने दोगे ?
सूरज - मैंने दिल से मोहबब्त की है, चाहे जों हो जाए मगर दगा नहीं नहीं दूंगा, और हाँ, एक बात और ... मै कुछ भी बर्दाश्त कर सकता हूँ लेकिन प्यार में बेवफाई बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा, इसका ध्यान रखना .


Story Update : Monday, January 31, 2011 12:37 PM

उत्तर प्रदेश में मुजफ्फ्रनगर जिले के भोपा क्षेत्र में आज तड़के एक मकान में आग लगने से परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। हादसे में तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रवीन कुमार ने बताया कि भोपा इलाके के नंगला बुजुर्ग गांव में आग लगने से एक बालिका समेत परिवार के पांच सदस्यों की मृत्यु हो गई। गंभीर रूप से झुलसे तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।

पशु व्यापारी महबूब कुरैशी के परिवार के नौ सदस्य कमरे में आग जलाकर ताप रहे थे। इस दौरान कमरे में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने मकान को अपनी चपेट में ले लिया। कमरा बंद होने की वजह से लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला और चार लोगों की दम घुटने तथा झुलसने से मौके पर ही मृत्यु हो गई। एक ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। जख्मी सदस्यों को मेरठ तथा दिल्ली भेजा गया है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गएग ह

Sunday, January 30, 2011

बेवफा खँडहर - ३७
सूरज- ठीक है, सपेरा समझती हो ? जों बीन बजाकर साँपों को नचाते हैं ?
किरण- हाँ अच्छी तरह जानती हूँ, मैंने बहुत से साँपों का नृत्य देखा भी है. आगे बोलिए.
सूरज- एक सपेरे ने मेरे दादाजी से बहस करली थी की मन्त्र वगैरह की कोई शक्ति होती ही नहीं है. तब उन्होंने एक मन्त्र पढ़ा तो सपेरे का बीन उसके मुंह से ही अटककर रह गया. जानती हो तब उन्होंने
कौन से शब्दों का सहारा लिया था. सुनिए .अंजन बांधू , कंचन बांधू , बांधू सोरन काया, मैंने ज्ञान गुरु का पाया. मारू मन्त्र लगे ततैया , दुहाई हनुमन्त वीर की. शब्द साँचा, पिंड कांचा , फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा
किरण- ये क्या बड -बड कर रहे हो ? क्या मन्त्र ऐसे होते हैं. कुछ समझ में तो आने चाहिए .
सूरज- तुम्हारी समझ में में आये न आये मगर आत्मा तो सब समझ लेती है न, भूत -प्रेत की सब समझ में आ जाता है . आप क्या मानती हैं, इन मत्रों को हर कोई उच्च्चारण नहीं कर सकता .
किरण- क्यों ? इनमे ऐसी क्या खास बात होती है ?
सूरज- इनको सिद्ध करना पड़ता है. इन्हें पढ़ लेना या याद कर लेना तो बड़ा आसान है मगर सिद्ध करना बड़ा ही कठिन है. साथ में जों इन मत्रों का प्रयोग करता है उसकी नीयत भी साफ़ होनी चाहिए . उसमे
साफ़ लिखा है की जों बदनीयती से यानि की किसीका नुक्सान करने के उद्देश्य से मन्त्रों का सहारा लेगा तो मन्त्र उसका साथ नहीं देंगे , जबकि किसीके के सहायतार्थ यह यूज करोगे तो जरूर सफलता मिलेगी .
किरण- क्या तुमने कभी इन मन्त्रों का इस्तेमाल किया भी है या ऐसे ही धपंग मचा रहे हो ?
सूरज- जी नहीं, मैंने खुद आजमाया है , मै सुनी सुनाई बातें नहीं करता , भूत प्रेतों की बात तो नहीं मालूम मगर मैंने मन्त्रों की शक्ति से कई बच्चों की आँख से फूली जरूर खत्म करदी है. आप अगर आजमाना
चाहती हैं तो कोई ऐसा व्यक्ति बताएं जिसके आँख में फूली हो, मै एक मन्त्र पढूंगा सात बार , हफ्ते में सिर्फ दो बार पढूंगा और काम हो जाएगा
किरण- हा हा हा , अगर ऐसे मन्त्रों से आँख ठीक होने लगें तब तो सब लोग अस्पताल जाना बंद कर देंगे और तुम जैसे सयानों के पास लाइन लगाने लगेंगे .
सूरज- हंसिये मत मेमसाब. हहमारे यहाँ पर तो कम से कम ऐसा ही होता है. आसपास के गाँव में अगर किसीकी आँख में इस तारह की समस्या आई तो अस्पताल जाने की बजाय वे लोग मेरे पास आते हैं.
किरण- मुझे भी कोई मन्त्र सिखाओ न .
सूरज- सिकह तो दूंगा लेकिन उसे सिद्ध भी कर पाओगी क्या ? उसके लिए कलेजा मजबूत होना चाहिए . वैसे तो अलग -अलग मन्त्र को सिद्ध करने का अलग-अलग तरीका होता है मगर ज्यादातर मामलों
में रात के दरमियान शम्धान भूमि में मन्त्रों को सिद्ध करना होता है.
किरण- मुझे शमशान से डर नहीं लगता .
सूरज- क्या बात करती हैं , मेरा मतलब है की डर क्यों नहीं लगता ? कभी रात के दरमियान आप वहां गयी हैं?
किरण- हाँ , कई बार जाना हुआ है. मुझे भी शौक है कुछ शोध करने का , नया कुछ जानने का इसीलिए भटकती रहती हूँ. तुम चलोगे मेरे साथ ? यहीं पास में ही शमशान है. जब वहां पर कोई चिता जलती है
तब मैन जरूर जाने की सोचती हूँ, मेरी इच्छा होती है की उस चिता के पास बैठकर अलाप तापूँ .
सूरज- ये क्या कह रही हैं आप ? भला कोई आम आदमी ऐसी तमन्ना भी पालता है क्या ?
किरण- हाँ हाँ , क्यों नहीं ? तुम भी तो आम आदमी हो मगर मन्त्रों का पूरा ज्ञान रखते हो, उन्हें सिद्ध करने के लिए कभी न कभी शमशान भी जाते होंगे .
सूरज- मेरी बात अलग है. मैन तो मर्द हूँ .
किरण- अच्छा ठीक है, जब कभी इच्छा होगी तो तुम्हारे साथ ही जाउंगी, तब तो मुझे किसीकी दहशत नहीं होनी चाहिए , आखिर तुम जों मेरे साथ रहोगे .
सूरज का दिमाग भन्ना चुका था. उसकी कोई ज्ञान्द्रीय उसे फिर से यह आभास करा रही थी की उसके साथ या तो कुछ गलत होने वाला है या फिर हो चूका है. मगर उसने अपने सिर को एक तारफ झटक दिया
और प्यार के समुन्दर में गोते लगाना लगा, वे दोनों अब चरम अवस्था में पहुँचने वाले थे. सूरज पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा था ताकि वह उसे सम्पूर्ण सुख
डे सके, उसने सुन रखा था की औरतें ऐसे समय जोर -जोर के प्रहार पसंद करती हैं इसलिए वह जोर -जोर से प्रहार करने लगा. किरण भी खामोश होकर रतिक्रिया का सुख ले रही थी, उसके मुख से अजीब तरह की
आवाजें निकल रही थी. उससे माहौल और भी ज्यादा उत्तेजक होने लगा .


ऐ आर रहमान के साथ गाने की आरजू है - रेखा राव
व्यवहार में नम्रता , व्यक्तित्व में आकर्षण और कंठ में कोयल जैसी खनक , अगर इन सबका मिश्रण कर दिया जाए तो जों तस्बीर उभरती है उसका नाम है -रेखा राव . जी हाँ, हम बात कर रहे हैं राजस्थानी गीतों की सुपर सिंगर ,
मखमली आवाज से हिन्दी और भोजपुरी सहित कई भाषाओं को समृद्ध करने वाली गायिका रेखा राव की. रेखा राव अब तक हजारों गीतों को अपना स्वर डे चुकी हैं. हिन्दुस्तान की जानी मानी कंपनी टी सीरीज से ही उनके १५००
से ज्यादा गीत रिलीज हो चुके हैं. संगीतकार कार्तिक राजा की फिल्म मुखबिर का गीत -' पिया मोरा बंजारा ' जबरदस्त हिट हुआ था , यह भी रेखा राव ने ही गाया है. इसी तरह संगीतकार मोंटी शर्मा ने सन्नी देवल अभिनीत
फिल्म ' हीरोज ' में भी उनसे एक आइटम सॉंग गंवाया था.फिल्म ' ना जाने क्यू ' में संगीतकार निखिल ने ' आजा रे आजा रे अटरिया पे ' गंवाया जों काफी मशहूर हुआ. मेमसाब फिल्म में भी संगीतकार सुनील सिंह के निर्देशन
में रेखा राव की ठुमरी को संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा. इतना ही नहीं अब वे टीवी पर भी अपनी आवाज का जादू बिखेरने में लगी हैं. प्रसिद्ध सीरियल ' बालिका वधु ' का विदाई सॉंग जन जन के कानों में गूँज रहा है .
एक और सीरियल ' केसरिया बालम आवो म्हारे देस ' में भी उन्हें सूना जा सकता है. इस प्रतिभाशाली सिंगर का पहला एल्बम वीनस कंपनी ने रिलीज किया था. नखराली बंजारन, रंगीलौ राजस्थान , म्हारी तीतरी , पीली लूब्डी ,
औसिया तीरथ प्यारा है, गुर्बंद, बोलो हर हर गंगे , बन्ना -बन्नी राजस्थानी , अमृत है माँ का नाम , आई कवार की बहार , अलगोजा, गोरिया करंट मारेले , अब तो छोड़ दयो बलमाजी , मैया के गोहार , चिट्ठी श्याम प्यारे की,
गोरी नख्रावाली , गोरी नाचे घूमर घाले , आदि उनके हिट एल्बम हैं. इसी प्रकार भोजपुरी फिल्म राजा भोजपुरिया का गीत -' दैया रे दैया खटमल चोलिया में सुपर हिट हो चूका है. राम बलराम, गठबंधन प्यार का , हमरा ब्याह
तोहरा से होई, कब होई गवना हमार , जवानी अंगूर हो गईल, भोजपुरिया बिल्लो रानी चर्चित एल्बम हैं . रेखा बताती हैं की उन्होंने पहला गीत हिन्दी फिल्म जांबाज के लिए गाया था. महान संगीतकार रविन्द्र जैन ने उन्हें चांस दिया
था. रेखा राव एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित रामायण में भी अपने स्वर के जलवे बिखेर चुकी हैं. रेखा राव कहती हैं की वे राजस्थान के कोटा की रहने वाली हैं. रेखा राव ' मेरी आवाज सुनो ' में भी अपना जलवा बिखेर चुकी हैं
इस शो के जज थे मजरूह सुल्तानपुरी, कविता कृष्णा मूर्ती और पामेला चौपडा. होस्ट थे अन्नू कपूर . रेखा राव की आवाज इतनी मार्मिक है की उसे सुनकर पामेला चौपडा रों पडी थी., रेखा राव के पिता जान माने सिंगर और संगीतकार
थे, रेखा राव ने भी उनसे ही गायिकी की तालीम ली. उनके पिता तेजकरण राव सुर सिंगर संसद से सुरमणि पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं . रेखा राव बचपन से ही आशाजी, लता जी, मदन मोहन जी और रविन्द्र जैन की फैन हैं .
उन्होंने उडिया भाषा में सोनू निगम के साथ गीत गाया है लेकिन हिन्दी फिल्मों में उनके साथ गाने की तमन्ना है. वैसे तो वे सभी संगीतकारों का सम्मान करती हैं मगर ऐ आर रहमान और राहत फतेह अली खां के संगीत निर्देशन में गाने
की आरजू रखती हैं. रेखा राव संगीतकार रविन्द्र जैन को अपना आदर्श मानती हैं. आजकल हाल ही में रेखा राव ने उदय नारायण के साथ म्यूजिक एल्बम 'तड़प' की रिकोर्डिंग की है. यह एल्बम समाज को एक नई दिशा देने वाला
है, इसमें सभी ८ गीत उदय नारायण और रेखा राव ने गाये हैं.