Sunday, January 30, 2011



ऐ आर रहमान के साथ गाने की आरजू है - रेखा राव
व्यवहार में नम्रता , व्यक्तित्व में आकर्षण और कंठ में कोयल जैसी खनक , अगर इन सबका मिश्रण कर दिया जाए तो जों तस्बीर उभरती है उसका नाम है -रेखा राव . जी हाँ, हम बात कर रहे हैं राजस्थानी गीतों की सुपर सिंगर ,
मखमली आवाज से हिन्दी और भोजपुरी सहित कई भाषाओं को समृद्ध करने वाली गायिका रेखा राव की. रेखा राव अब तक हजारों गीतों को अपना स्वर डे चुकी हैं. हिन्दुस्तान की जानी मानी कंपनी टी सीरीज से ही उनके १५००
से ज्यादा गीत रिलीज हो चुके हैं. संगीतकार कार्तिक राजा की फिल्म मुखबिर का गीत -' पिया मोरा बंजारा ' जबरदस्त हिट हुआ था , यह भी रेखा राव ने ही गाया है. इसी तरह संगीतकार मोंटी शर्मा ने सन्नी देवल अभिनीत
फिल्म ' हीरोज ' में भी उनसे एक आइटम सॉंग गंवाया था.फिल्म ' ना जाने क्यू ' में संगीतकार निखिल ने ' आजा रे आजा रे अटरिया पे ' गंवाया जों काफी मशहूर हुआ. मेमसाब फिल्म में भी संगीतकार सुनील सिंह के निर्देशन
में रेखा राव की ठुमरी को संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा. इतना ही नहीं अब वे टीवी पर भी अपनी आवाज का जादू बिखेरने में लगी हैं. प्रसिद्ध सीरियल ' बालिका वधु ' का विदाई सॉंग जन जन के कानों में गूँज रहा है .
एक और सीरियल ' केसरिया बालम आवो म्हारे देस ' में भी उन्हें सूना जा सकता है. इस प्रतिभाशाली सिंगर का पहला एल्बम वीनस कंपनी ने रिलीज किया था. नखराली बंजारन, रंगीलौ राजस्थान , म्हारी तीतरी , पीली लूब्डी ,
औसिया तीरथ प्यारा है, गुर्बंद, बोलो हर हर गंगे , बन्ना -बन्नी राजस्थानी , अमृत है माँ का नाम , आई कवार की बहार , अलगोजा, गोरिया करंट मारेले , अब तो छोड़ दयो बलमाजी , मैया के गोहार , चिट्ठी श्याम प्यारे की,
गोरी नख्रावाली , गोरी नाचे घूमर घाले , आदि उनके हिट एल्बम हैं. इसी प्रकार भोजपुरी फिल्म राजा भोजपुरिया का गीत -' दैया रे दैया खटमल चोलिया में सुपर हिट हो चूका है. राम बलराम, गठबंधन प्यार का , हमरा ब्याह
तोहरा से होई, कब होई गवना हमार , जवानी अंगूर हो गईल, भोजपुरिया बिल्लो रानी चर्चित एल्बम हैं . रेखा बताती हैं की उन्होंने पहला गीत हिन्दी फिल्म जांबाज के लिए गाया था. महान संगीतकार रविन्द्र जैन ने उन्हें चांस दिया
था. रेखा राव एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित रामायण में भी अपने स्वर के जलवे बिखेर चुकी हैं. रेखा राव कहती हैं की वे राजस्थान के कोटा की रहने वाली हैं. रेखा राव ' मेरी आवाज सुनो ' में भी अपना जलवा बिखेर चुकी हैं
इस शो के जज थे मजरूह सुल्तानपुरी, कविता कृष्णा मूर्ती और पामेला चौपडा. होस्ट थे अन्नू कपूर . रेखा राव की आवाज इतनी मार्मिक है की उसे सुनकर पामेला चौपडा रों पडी थी., रेखा राव के पिता जान माने सिंगर और संगीतकार
थे, रेखा राव ने भी उनसे ही गायिकी की तालीम ली. उनके पिता तेजकरण राव सुर सिंगर संसद से सुरमणि पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं . रेखा राव बचपन से ही आशाजी, लता जी, मदन मोहन जी और रविन्द्र जैन की फैन हैं .
उन्होंने उडिया भाषा में सोनू निगम के साथ गीत गाया है लेकिन हिन्दी फिल्मों में उनके साथ गाने की तमन्ना है. वैसे तो वे सभी संगीतकारों का सम्मान करती हैं मगर ऐ आर रहमान और राहत फतेह अली खां के संगीत निर्देशन में गाने
की आरजू रखती हैं. रेखा राव संगीतकार रविन्द्र जैन को अपना आदर्श मानती हैं. आजकल हाल ही में रेखा राव ने उदय नारायण के साथ म्यूजिक एल्बम 'तड़प' की रिकोर्डिंग की है. यह एल्बम समाज को एक नई दिशा देने वाला
है, इसमें सभी ८ गीत उदय नारायण और रेखा राव ने गाये हैं.

Saturday, January 29, 2011

बेवफा खंडहर वाली -३६
किरण- क्यों ? क्या परेशानी हुई ?
सूरज- असल में जब मै ससुराल पहुंचा तो पता चला की घर के अधिकाँश लोग किसी रिश्तेदारी में गए हुए थे. वहां पर किसीकी शादी थी, गाँव में भी शादी -ब्याह का माहोल था. मुझे लगा की वहाँ का मौसम अपने लिए
अनुकूल नहीं है. इसलिए मै देर शाम को वहाँ से चलपड़ा , वैसे मैंने इन्तजार भी खूब किया था.
किरण- अगर आना ही था तो फोन करके आना चाहिए था, दिक्कत नहीं होती.
सूरज- तब तो भेद खुल जाता की मै जानबूझकर आ रहा हूँ, मुझे यह दिखाना था की पास के गाँव में किसी काम से आया था , तो राजी खुशी लेने चला आया. अगर मै फोन करता तो लोग मेरी नीयत
पर शक करने लगते और सारा मामला गडबड हो जाता. कर गाँव में लोग इसी तरह के होते हैं.
किरण- हाँ , बात तो सही है, गाँव में लोग बात का बतंगड बना डालते हैं. रस्सी को भी सांप बना देते हैं. खैर , इसका मतलब ये हुआ की आप खाली हाथ ही लौट रहे थे और अचानक यहाँ पर आपका और मेरा मेल हो
गया. अगर आपकी बाइक खराब नहीं होती तो शायद हमारी मुलाक़ात नहीं हो पाती.
सूरज- बिलकुल सही , क्योंकि रात के समय बाइक चलाने में मुझे बेहद आनंद आता है .
किरण- क्या बात कर रहे हो ? ऐसा कैसे हो सकता है ? आप पहले इंसान हैं जों इस तरह की बात कह रहे हैं वरना अब तक तो मैंने यही सुना था की रात को सफर करने में लोगों को दहशत होती है. कुछ लोग चोर
उचक्कों से डरते हैं, कुछ गलत रास्ते से तो कुछ भूत प्रेतों से.
सूरज- जी, लेकिन मै भगवान के सिवाय और किसीसे नहीं डरता . डरने की छोडिये , मेरा तो शौक ही ये है. मै घर से हमेशा रात को ही सफर पर निकलता हूँ.
किरण- इसकी कोई खास वजह , रात को सफर करने की और किसीसे नहीं डरने की ?
सूरज- आप हँसेंगी तो नहीं ? पहले वादा करो तो बत्ताता हूँ.
किरण- अच्छा बाबा, वादा करती हूँ, मै ज़रा भी नहीं हसूंगी, अब तो बोलो. मैन भी तो जानू ऐसी आखिर क्या बात है ?
सूरज- दरअसल , मै जब रात को घर से शहर की तरफ जाता हूँ तो लौटते समय देरी से आता हूँ, उस समय जब सारे घोड़ा तांगे बंद हो जाते हैं तो बची हुई सवारियों को बड़ी मुश्किल हो जाती है. मैन ऐसे ही समय
घर की तरफ निकलता था और जब कोई महिला सवारी मुझसे लिफ्ट मांगती तो मै उसे बिठा लेता. इस बहाने मुझे उस महिला के शरीर से लिपटने का अवसर मिल जाया करता था.
किरण- हा हा हा, लिपटने से तुम्हें क्या मिलता होगा ? थोड़ी देर बाद तो वह महिला आपकी बाइक से उतरकर अपने घर पहुँच जाती होगी ?
सूरज- देखो, हंसना नहीं, तुम वादा कर चुकी हो. हंसोगी तो आगे नहीं बताउंगा .
किरण- अच्छा ठीक है बताओ , आगे क्या बोल रहे थे. तुम भी न सूरज, सचमुच बहुत भोले आदमी हो. ये बताओ तुम भूतों से क्यों नहीं डरते ?
सूरज- क्योंकि मेरे दादा बहुत बड़े तांत्रिक थे, वे भूतों को वश में करना जानते थे. सौ -सौ किलोमीटर दूर के लोग भी भूत व्याधा होने पर उनके पास उपचार के लिए आते थे. उनके पास एक प्राचीन असली इंद्रजाल
था , जिसमे सैकड़ों मंत्र लिखे हुए थे, मरने से पहले वह पुस्तक उन्होंने मुझे डे दी है. वह पुस्तक मैंने मुंह जबानी याद भी करली है.
किरण- क्या बात कर रहे हो ? क्या दुनिया में सचमुच मन्त्रों का कोई अस्तित्व है ?
सूरज- हाँ , हाँ क्यों नहीं ? जब भूतों का अस्तित्व हो सकता है तो मन्त्रों का भी है , और अगर भूत-प्रेत झूठे हैं, ये सब काल्पनिक कथा है तो मन्त्रों के बारे में भी ऐसा ही सोच सकते हैं.
किरण- वाह , आपके तर्क में तो सचमुच दम है , अच्छा कोई मन्त्र सुनाइये , मैन तो जानू ये कैसे होते हैं.
सूरज- ठीक है, सपेरा समझती हो ? जों बीन बजाकर साँपों को नचाते हैं ?
किरण- हाँ अच्छी तरह जानती हूँ, मैंने बहुत से साँपों का नृत्य देखा भी है. आगे बोलिए.
सूरज- एक सपेरे ने मेरे दादाजी से बहस करली थी की मन्त्र वगैरह की कोई शक्ति होती ही नहीं है. तब उन्होंने एक मन्त्र पढ़ा तो सपेरे का बीन उसके मुंह से ही अटककर रह गया. जानती हो तब उन्होंने
कौन से शब्दों का सहारा लिया था. सुनिए .अंजन बांधू , कंचन बांधू , बांधू सोरन काया, मैंने ज्ञान गुरु का पाया. मारू मन्त्र लगे ततैया , दुहाई हनुमन्त वीर की. शब्द साँचा, पिंड कांचा , फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा .
Last updated - Sat, Jan 29, 2011
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हरदोई में गैस रिसाव से तीन लोगों की मौत

लखनऊ/ फरीदाबाद। हरदोई के संडीला इलाके में एक निजी केमिकल फैक्ट्री में जहरीली गैस के रिसाव में तीन लोगों की मौत हो गई और दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक हरदोई की अमित केमिकल नामक फैक्ट्री में देर रात गैस का रिसाव हुआ। इससे तीन लोगों की मौत हो गई। दो लोगों की हालत गंभीर है जिनका लखनउ के मेडीकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।

प्रशासन ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। हरदोई के एसपी लव कुमार का कहना है कि फिलहाल यहां किसी तरह की गैस लीक नहीं हो रही है। सूत्रों का कहना है कि पहले भी इस फैक्ट्री में कई बार गैस रिसाव की खबरें आई है।


फरीदाबाद की केमिकल फैक्ट्री में भी रिसाव

जिले के हीरापुर गांव में एक केमिकल फैक्ट्री में क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह से एक केमिकल फैक्ट्री में रखे क्लोरीन गैस के दो सिलेण्डरों में से एक रिसाव हो रहा था।

यह फैक्ट्री गांव के बेहद नजदीक स्थित है। गांव वालों ने दम घुटने और चक्कर आने की शिकायत के बाद 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जिला उपायुक्त प्रवीण कुमार ने बताया कि 75 फीसदी स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया। खतरे की बात नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। ऎहतियात के तौर पर गांव को खाली करवा लिया गया ह

Friday, January 28, 2011

बेवफा खंडहर , भाग-३५
अब सूरज से रहा नहीं गया. उसने किरण के होठों पर अपने होठ सटा दिए , उन दोनों के शरीर में चिंगारी सी भड़क उठी. कामवासना की आंधी चलने लगी . सूरज ने किरण के यौवन उभारों को को दबाना शुरू कर
दिया, किरण के जिस्म में आग लगी थी, सूरज उस आग को अपनी जीभ से बुझाने का प्रयास कर रहा था. किरण बोली-
- यह आग ऐसी नहीं है की इसे आसानी से बुझाया जा सके. यह इश्क की आग है मेरी जान.
सूरज- हाँ, मगर कोशिश पूरी करूँगा. अपने प्यार की छाप आपके जिस्म के हर कोने पर छोडना चाहता हूँ .
किरण- और मै तुम्हें आमंत्रित करती हूँ, आओ और मेरे तमाम दुखों पर अपने प्यार का मरहम लगादो. इस बेचैनी को मिटादो जों मुझे ज़िंदा भस्म किये जा रही है. इस बेकरारी की दवा करदो . अब अगर ज़रा भी देर
करदी तो सम्भव है की मेरे प्राण ही निकल जायेंगे .
सूरज- सूरज के रहते भी अगर किरण बेचैन रहती है तो यह हमारे लिए मर मिटने की बात है. मेरी बेचैनियों की दवा आपके पास और आपकी बेचैनियों की दवा मेरे पास है. और हम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं.
किरण की साँसें जोर-जोर से चलने लगी. यह वासना का तूफ़ान था, सूरज ने अपने आपको एडजस्ट किया और किरण पर छाने की कोशिश करने लगा . किरण भी इन्वोल्व हो गयी. वह उस हसीन वक्त
को बर्बाद करने के मूड में नहीं थी. अगले ही पल वे दोनों दो जिस्म एक जन बन चुके थे. गाँव का गबरू जवान सूरज पहलवानी अंदाज में जोर अजमाइश करने लगा. उसके प्रहार सख्त होते थे, मगर किरण
को कोई ऐतराज नहीं था , बल्कि वह तो उसे और प्रोत्साहित कर रही थी, साथ ही वह यह भी दिखाने की कोशिश कर रही थी जैसे उसे इस क्रिया में बड़ा आनंद आ रहा हो. तथा दुःख महसूस भी महसूस हो रहा हो .
दुःख दर्शाने का सिर्फ एक यही कारण था की सूरज को ऐसा लगना चाहिए जैसे उसने कम लोगों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए हैं और उसे तकलीफ हो रही है. सूरज ने पूछ भी लिया-
-मै नया खिलाड़ी हूँ, मुझ कुछ करना नहीं आता. प्लीज बता देना, और हाँ, कैसा महसूस कर रही है मेरी जान. ?
किरण- जैसे धरती पर साक्षात स्वर्ग उतर आया हो . जन्नत जैसा आनंद आ रहा है .
सूरज- अगर ऐसा है तो फिर आह, ऊह क्यों कर रही हो ?
किरण- तुम नहीं समझोगे, जब औरत को चरम सुख और परम सुख की प्राप्ति होती है तब उसके मुख से इस तरह की आवाजें आती हैं.
सूरज- ओह, ये बात है क्या ? मै ठहरा अनाड़ी, मुझे कुछ ज्ञान ही नहीं है. यह तो मैन पहले ही बता चुका हूँ.
किरण- कहलो सूरज भले ही, लेकिन असली बात कुछ और ही नजर आती है. मुझे नहीं लगता की तुम बिलकुल कुंवारे हो.
सूरज- शक की वजह ?
किरण- जमाने की हवा. मैंने एक फिल्म देखी थी, फिल्म में एक सत्य कथा को दर्शाया गया था. उसमे साफ़ था की ज्यादातर लड़के १५ वर्ष के होते ही सेक्स का आनंद चखना शुरू कर देते हैं . तुम्हारी उम्र क्या है ?
सूरज- २५ के आसपास , मगर मैंने अब तक कभी किसी लड़की के साथ रतिक्रिया नहीं की है. सच तो ये है की मौक़ा ही नहीं मिला.
किरण- कभी कोशिश भी नहीं की क्या ?
सूरज- कोशिश के तहत ही तो यहाँ तक आ पहुंचा हूँ, दरअसल मेरे एक ममेरेभाई की ससुराल पास के ही इलाके में हैं. उसकी कई सालियाँ हैं. आसपास के घरों में भी जवान लड़कियां हैं. मैंने सोचा था की वहाँ जाकर
रात को रुकुंगा , किसी साली को पटाऊंगा और उसके साथ मौज मस्ती करके वापस आउंगा मगर ये हो न सका.
किरण- क्यों ? क्या परेशानी हुई ?
सूरज- असल में जब मैन ससुराल पहुंचा तो पता चला की घर के अधिकाँश लोग किसी रिश्तेदारी में गए हुए थे. वहां पर किसीकी शादी थी, गाँव में भी शादी -ब्याह का माहोल था. मुझे लगा की वहाँ का मौसम अपने लिए
अनुकूल नहीं है. इसलिए मै देर शाम को वहाँ से चलपड़ा , वैसे मैंने इन्तजार भी खूब किया था.
किरण- अगर आना ही था तो फोन करके आना चाहिए था, दिक्कत नहीं होती.
सूरज- तब तो भेद खुल जाता की मैन जानबूझकर आ रहा हूँ, मुझे यह दिखाना था की पास के गाँव में किसी काम से आया था , तो राजी खुशी लेने चला आया. अगर मै फोन करता तो लोग मेरी नीयत
पर शक करने लगते और सारा मामला गडबड हो जाता.

Thursday, January 27, 2011

भाग-34
किरण- सबका तो नहीं पता, मगर मैं अपने भगवान को जान गयी हूँ, वह इस वक्त मेरे सामने है और मेरी बांहों में हैं.
सूरज- ऐसा नहीं कहते किरण, यह गलत है. पाप है, घमंड है. भगवान सिर्फ एक है और दूसरा कोई भी उसकी जगह नहीं ले सकता .
किरण- मैंने अपनी आँखों से कभी उस भगवान को नहीं देखा, अगर सारी दुनिया उसी भगवान की बनी हुई है तो आप भी तो उसीने बनाए होंगे, भगवान की रचना को अगर मैन देख सकती हूँ, उसे सुन सकती
हूँ, उसको समझ सकती हूँ तो उसे ही भगवान कहने में क्या हर्ज है ? मेरे अकेले के कहने से हो भी क्या जाएगा ? सारी दुनिया है न , उसे भगवान कहने के लिए .
सूरज- हमें अपने शब्द वापस लेने चाहिए किरण. हम लोग इंसान हैं और अगर इसके आगे एक शब्द 'अच्छा ' भी लग जाए तो बहुत बड़ी बात हो जाती है. इंसान हमेशा इंसान ही रहता है वह भगवान का दरजा प्राप्त नहीं कर सकता .
किरण- अच्छा ठीक है, तुम्हारा भी मन रख देती हूँ, मै अपने शब्दों में करेक्शन कर लेती हूँ, तुम बहुत अच्छे इंसान हो और भगवान तो नहीं मगर भगवान जैसे लगते हो. अब तो ठीक है ?
सूरज- आपकी कोई भी बात गलत तो हो ही नहीं सकती, इतना तो मैन भी समझता हूँ, क्योंकि आप मुझसे ज्यादा सुलझी हुई हैं, समझदार और अनुभवी हैं.
किरण- अब तारीफ़ करना बंद कीजिये, और साथ में शराब पीना भी . क्योंकि शराब के जाम तभी तक हलक में उतारने चाहिए जब तक की अपने आप पर नियंत्रण रखा जा सके. अगर शराब ही इंसान को पीना शुरू करदे तो स्थिति
बड़ी विचित्र हो जाती है. फिर पीने वाला मानव नहीं रह पाता. वह अमानवीय हरकतें करनी शुरू कर देता है.
सूरज- यह मजा भी खूब देती है और सजा भी. जब शराब हलक के अंदर होती है तो सारी दुनिया हसीन लगने लगती है. ऐसा महसूस होता है जैसे की सब कुछ कंट्रोल में है, हम सारे जग को कब्जे में कर सकते हैं.
किरण- मगर असलियत और एहसास में फर्क भी तो होता है. यह फर्क महसूस करना बड़ी बात है. जों इसे समझ ले वही समझदार कहलाता है.
सूरज- मुझे शराब की लत नहीं है. कभी-कभार पी लिया करता हूँ, आज सर्दी है न इसके लिए आज तो सचमुच पीने का मूड था.
किरण- इसे इतना ही पीना चाहिए जिससे की होश में रह सको और अपना उद्देश्य ठीक तरह से याद रख सको.
सूरज- तुम्हारे इस हसीन जिस्म का जादू ही इतना खतरनाक है की पीने की इच्छा ही नहीं होती, अब मै कम पीने की कोशिश करता हूँ.पिऊँगा तो इन नशीली आँखों के मयखाने से पी लूँगा.
किरण इस वक्त पूरी तरह से नग्न अवस्था में थी, हया दर्शाने के लिए उसने एक बेहद पतली चादर अपने ऊपर ओढ़ ली थी. उस लिबास में भी वह बेहद खूबसूरत दिख रही थी, सूरज की काम भावनाएं बहुत पहले ही जाग्रत
हो चुकी थी, किरण जब उसके अंतरंग अंग को आहिस्ता सेस्पर्श करती तो जली हुई रस्सी काले नाग की तरह फुँकारने लगती थी. सूरज उसके अप्रितम सौंदर्य को निहारता ही रह गया. वह अपने एक हाथ से उसके जिस्म से
उस वस्त्र को उतर रहा था जिसने किरण के सुन्दर जिस्म को ढँक रखा था. किरण की मुस्कान इस वक्त ऐसी लग रही थी मानो कोई मस्त कली अभी-अभी खिलने की तैयारी कर रहा हो. उसके मुख से सहसा निकला-
- वाव, मेरे तो हाथ थरथरा रहे हीं. मेरे ख़याल से इस दुनिया में तो आपके जैसी मदमस्त हसीना कोई दूसरे नहीं होगी.
किरण- यह बदन सुलग रहा है, अरमान मचल रहे हैं.
सूरज- हाँ, मेरा भी यही हाल है. जज्बात अब काबू में नहीं हैं, इन पलों को अपने दिल में कैद कर लेना चाहता हूँ, सोचता हूँ की इसे इस नज़ारे को देखने के बाद अब कुछ और न देखूं. मेरी आँखें हमेशा के लिए
यहीं पर बंद हो जाएँ, ताकि मै हमेशा इस नज़ारे को याद रख सकूं.
किरण- नहीं बावले सूरज, किरण पर इतने फ़िदा भी मत हो जाना , तुम्हारी आँखें तो मेरा आइना हैं.
सूरज- ]और तुम हो मेरे जीने का मकसद . इस जिदगी में क्या अगले कुछ जन्मों में भी तुम्हें नहीं भुला पाऊंगा.
किरण- मुझे अपनी बाहों में इतना कसकर पकड़ो की फिर दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर पाए.
अब सूरज से रहा नहीं गया. उसने किरण के होठों पर अपने होठ सटा दिए , उन दोनों के शरीर में चिंगारी सी भड़क उठी. कामवासना की आंधी चलने लगी . सूरज ने किरण के यौवन उभारों को को दबाना शुरू कर
दिया, किरण के जिस्म में आग लगी थी, सूरज उस आग को अपनी जीभ से बुझाने का प्रयास कर रहा था. किरण बोली-
- यह आग ऐसी नहीं है की इसे आसानी से बुझाया जा सके. यह इश्क की आग है मेरी जान.
सूरज- हाँ, मगर कोशिश पूरी करूँगा. अपने प्यार की छाप आपके जिस्म के हर कोने पर छोडना चाहता हूँ .
किरण- और मै तुम्हें आमंत्रित करती हूँ, आओ और मेरे तमाम दुखों पर अपने प्यार का मरहम लगादो.

Tuesday, January 25, 2011

भाग-33
किरण- क्यों ? क्या हुआ ? क्या वह जिस्मानी रिश्ते बनाने से इनकार कर रही थी ?
सूरज- नहीं, ये बात नहीं है ।
किरण- तो और क्या बात हूई ? क्या वह किसी और से प्रेम करती थी ? और इस कारण तुम्हें उससे चिढ हो गयी ?
सूरज - ऐसी भी कोई बात नहीं थी, मैंने खुद भी कभी उसके साथ सेक्स करने की बात अपने मन में नहीं लाई थी। हम दोनों मिलते थे, बातचीत करते थे, कभी -कभी किसी विषय पर बहस भी करते थे ,
मगर मेरे मन में कभी कोई गलत ख़याल नहीं आया,। एक शाम हम दोनों जब टहलने निकले तो अकेलेपन में उसने मेरा हाथ पकड़ लिया था। मेरे जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गयी और कांपते होठों से मैंने उसके होठों को चूम लिया। किसी महिला को यह मेरा पहला चुम्बन था . वह मुझसे लिपट गयी .
किरण- वाह , कितना हसीन नजारा था, उस वक्त आपके दिल में हजारों घंटियाँ बज चुकी होंगी, रोशनी से सारा वातावरण सराबोर हो गया होगा . जब प्रेम का दीदार होता है तो ऐसा ही नजारा उत्पन्न होता है.
सूरज- ओह, इसका मतलब आप भी मोहब्बत का मजा चख चुकी हैं. आप भी इस तरह का खास अनुभव कर चुकी हैं ?
किरण- हाँ, बिलकुल. इस वक्त प्रत्यक्ष अनुभव कर रही हूँ. इससे पहले तो जिसने भी मुझे चाहा उसने सिर्फ मेरे जिस्म को प्राप्त किया , लेकिन तुम तो मेरे दिल को पा चुके हो. मेरी आत्मा पर अधिकार जमा चुके हो. मुझे तुमसे प्यार हो गया है
सूरज-सच ? क्या तुम सच कह रही हो ?
किरण- मैन दिल से कहती हूँ, जिसकी चाहो कसम ले सकते हो. मैन कभी भी तुम्हारे साथ बेवफाई नहीं कर सकती. मैंने तुमने प्यार किया है, इसे हमशा निभाऊंगी .
सूरज- प्यार के नाम से ये नादाँ दिल ही धड़क उठता है. सूना है की प्यार में बहुत तकलीफें उठानी पड़ती हैं.
किरण- अगर मेरे महबूब को ज़रा भी खरोंच भी आई तो ये किरण अपनी जान कुर्बान कर देगी.
सूरज- सूना है अक्सर हसीनाएं बेवफा हो जाती हैं, पहले आशिक को ठुकराकर दूसरे से दिल लगा लेती हैं.
किरण - मेरा अनुभव इससे अलग है, मैंने तो यही जाना है की अक्सर आशिक ही जिस्म की ब्भूख शांत करने के बाद अपनी प्रेमिका को ठुकरा देते हैं, वे लंबे रिश्तों में यकीन नहीं रखते , बल्कि क्षणिक सुख भोगने में
उनकी ज्यादा रूचि होती है. मतलब निकल गया तो पहचानते भी नहीं हैं.
सूरज- अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो बहुत बुरा हुआ है. मेरे साथ तो किसी लड़की ने न वफ़ा की और न बेवफाई , सिर्फ सूनी सुनाई बातें कह रहा हूँ.
किरण-बीती हुई बातें भी सुनाइये न , अभी तो बता रहे थे की आपने उस लड़की का चुमबन ले लिया , उसके बाद क्या हुआ ?
सूरज- चुम्बन के बाद वह लड़की भी सहम गयी और मैन भी सहमा सा हो गया क्योंकि चुम्बन के बाद के हालत बदल चुके थे, मेरा संवेदनशील अंग हरकत में आ गया था .
किरण- बिलकुल ऐसे ही न , जैसे अब हरकत में आ रहा है. यह बहुत स्ट्रोंग है.
सूरज- आप मुझे ऐसे ही बना रही हैं, मैन तो गाँव का एक सामान्य आदमी हूँ. आपकी तारीफों के काबिल तो बिलकुल भी नहीं हूँ.
किरण- तुम क्या हो यह मेरी नजरों से देखो तो जानो. एक बार लोगों ने मजनू से कहा था की लैला तो काली है, उससे इतना प्रेम क्यों करते हो ? जानते हो इस पर उसने क्या जवाब दिया था ?
सूरज- जी नहीं, बताइये न .
किरण- मजनू का जवाब था की लैला क्या है यह कोई उसकी निगाहों से देखे तब पता चलेगा, कोई और इसका नुमान नहीं लगा सकता. यही बात तुम पर लागू होती हो. तुम मेरे लिए कितनी अहमियत रखते हो
यह सिर्फ मैन जानती हूँ, मेरा दिल जानता है या मेरा भगवान जानता है.
सूरज- मेरे भगवान से क्या मतलब है ? क्या सबके भगवान अलग-अलग होते हैं ?
किरण- सबके तो नहीं पता, मगर मैन अपने भगवान को जान गयी हूँ, वह इस वक्त मेरे सामने है और मेरी बांहों में हैं.
सूरज- ऐसा नहीं कहते किरण, यह गलत है. पाप है, घमंड है. भगवान सिर्फ एक है और दूसरा कोई भी उसकी जगह नहीं ले सकता .
किरण- मैंने अपनी आँखों से कभी उस भगवान को नहीं देखा, अगर सारी दुनिया उसी भगवान की बनी हुई है तो आप भी तो उसीने बनाए होंगे, भगवान की रचना को अगर मैन देख सकती हूँ, उसे सुन सकती
हूँ, उसको समजह सकती हूँ तो उसे ही भगवान कहने में क्या हर्ज है ? मेरे अकेले के कहने से हो भी क्या जाएगा ? सारी दुनिया है न , उसे भगवान कहने के लिए .
सूरज- हमें अपने शब्द वापस लेने चाहिए किरण.

Monday, January 24, 2011

भाग -३२
सूरज का दिमाग झन्ना गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे ? भ्रमित होकर वह अपने शरीर पर हाथ फिराने लगा, इसके बाद उसने किरण के सुन्दर जिस्म को स्पर्श किया। फिर वह आईने के सामने खडा हो गया. वह नग्न अवस्था में था. उसका चेहरा बिलकुल वैसा ही था , जैसा कथित मौत से पहले था. वह अपनी पुरानी लाइफ को याद करने लगा. तभी किरण बोली-- तुमने मेरी बात को सच मान लिया क्या ? हा हा हा ..........मजाक कर रही थी यार ... क्या तुमने इसे सच मान लिया ? तुम भी कमाल करते हो भले आदमी.अच्छी खासी खूबसूरत हसीना के हुस्न की तारीफ करने के बजाय , उसके भूत -प्रेत होने पर शक जाहिर कर रहे हो। मुझे हैरत हो रही है। तुम लड़कियों को कैसे पटाते होंगे ? लड़कियां उसी पर मरती हैं, जो रोमांटिक बात कर सकते हैं, जो लड़कियों की आँखों में डूब सकते हैं और अपने साथ उन्हें भी सुनहरे सपनों की सैर करा सकते हैं। मेरे ख़याल से तुम इन सबमे से कुछ नहीं कर सकते।
सूरज- हाँ , शायद यही वजह है कि मुझसे कोई लड़की नहीं पट पाई जबकि ज़रा -ज़रा से लड़के कई-कई प्रेमिकाएं रखते हैं। हर दिन वे अलग-अलग लड़कियों के साथ घुमते-फिरते नजर आते हैं।
किरण- मैं मानती हूँ, लेकिन यह बात मानने में थोड़ी सी तकलीफ हो टी है कि तुम जैसे हेंडसम के साथ ऐसा कुछ हुआ होगा। गबरू जवान हो, तुम्हारे साथ रात बिताने की हसरत न जाने कितनी हसीनों को हो सकती है। इस दुनिया में यह कैसे संभव है कि २५ साल का मर्द और कुंवारा ही रह जाये। कभी न कभी और किसी न किसी लड़की के साथ कुछ न कुछ जरूर हुआ होगा। मुझे याद आता है एक कस्टमर जो इसी तरह का दावा करता था और जब पीकर टट्टू हो गया तो उसने जो राज खोला वह अविश्वसनीय था। वह दो दर्जन से ज्यादा लड़कियों के साथ सैकड़ों बार हमबिस्तर हो चूका था । उसकी कुछ तस्बीरें भी उसने दिखाईथीं, और तो और उसे रात के दौरान हर दस मिनिट के बाद सेक्स करने की आदत थी। इसके लिए वह एक ही रात में दो वेश्याओं की सेवा लिया करता था। जब वह मेरे पास आया तो पञ्च लाख में एक रात के लिए उसने मुझे बुक किया था और दस हजार की एक लड़की अलग से बुलवाई गयी थी और उस रात उसने एक दो बार नहीं बल्कि पूरे ६ टाइम सेक्स किया था ।
सूरज- क्या ऐसा संभव है ? क्या कोई इंसान इतना पावरफुल हो सकता है ?
किरण- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? पर्फेक्स जैसी आयुर्वेदिक दवाओं के चलते कुछ भी संभव है। ये दवाएं आम इंसान को भी फौलाद की तरह बना देती हैं। वह व्यक्ति अगर ज्यादा समय तक रति क्रिया का आनन्द भोगता था तो इसके पीछे यही वजह थी। तुम आज की रात मुझे कितनी बार सुख दे सकते हो ?
सूरज- मैं एकाध बार की बात नहीं करता, मैं तो जीवन भर तूम्हें सुख और संतुष्टि देने का इरादा रखता हूँ।
किरण- मैं कैसे मानु मानूं कि तुम अभी तक कुंवारे हो ?
सूरज-० मेरा मेडीकल चेकअप भी कराना चाहो तो स्वागत है ।
किरण- इतना समय कहाँ हैं ? इसके लिए तुम्हें आज की रात भी कुंवारा ही रहना पडेगा ।
सूरज- यह शायद संभव न हो पाए। क्योंकि अब तो न दिल अपने कब्जे में है और ना ही दिमाग । अब तो प्यास बढ़ती ही जा रही है, जब तक इसे बुझा नहीं लेता , चैन नहीं मिलेगा।
किरण- अच्छा , चलो सेक्स छोडो , क्या कभी किसीसे प्रेम भी नहीं किया ।
सूरज- प्रेम ? उसे प्रेम तो नहीं कह सकते , मगर हाँ , एक लड़की के साथ मित्रता जरूर थी।

मगर उसके साथ रिश्ता ज्यादा नहीं टिक पाया ।

किरण- क्यों ? क्या हुआ ? क्या वह जिस्मानी रिश्ते बनाने से इनकार कर रही थी ?

सूरज- नहीं, ये बात नहीं है ।

किरण- तो और क्या बात हूई ? क्या वह किसी और से प्रेम करती थी ? और इस कारण तुम्हें उससे चिढ हो गयी ?

सूरज - ऐसी भी कोई बात नहीं थी, मैंने खुद भी कभी उसके साथ सेक्स करने की बात अपने मन में नहीं लाई थी। हम दोनों मिलते थे, बातचीत करते थे, कभी -कभी किसी विषय पर बहस भी करते थे , मगर मेरे मन में कभी कोई गलत ख़याल नहीं आया,। एक शाम हम दोनों जब टहलने निकले तो अकेलेपन में उसने मेरा हाथ पकड़ लिया था। मेरे जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गयी और कांपते होठों से मैंने उसके होठों को चूम लिया। किसी महिला को यह मेरा पहला चुम्बन thaa। वह mujhse lipat गयी