भाग-31
किरण- दुनिया में अभी तक कोई ऐसा फांसी का फंदा नहीं बना है जों किसी रूह को मौत के घाट उतार सके. जिस्म को मौत आ सकती है मगर रूह को कभी नहीं.
सूरज- रूह , कैसी रूह ? मैन समझा नहीं. तुम्हारा रूह से क्या लेना देना ?
किरण- मेरा मतलब ये है की तुम अब मेरे जिस्म तक सीमित नहीं रहे बल्कि मेरी रूह की गहराइयों में समा चुके हो,
सूरज- जबसे तुम्हें मिला हूँ , मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है. तुम भी मेरी रूह में समा चुकी हो. मेरे दिल की गहराइयों में बस चुकी हो
किरण- आज सूरज और किरण का मेल हो रहा है. जबकि किरण तो सूरज का ही एक छोटा सा हिस्सा है. इसलिए इस मिलन को तो कोई रोक ही नहीं सकता. अगर कोई रुकावट आ भी गयी तो उसे हर हाल में दूर
कर लिया जाएगा. मैंने यह तय किया है की तुम्हें किसी भी कीमत पर अपने आप से जुदा नहीं होने दूंगी.
सूरज- हाँ, मेरा अपना भी कुछ ऐसा ही ख़याल है. मै भी चाहता हूँ की मोहब्बत का ऐसा ही तूफ़ान मेरे अंदर भी समाहित हो जाए ताकि मै भी मजनूँ, रांझा आदि की तरह दीवाना बन सकू और मशहूर हो सकूँ.
किरण- बहुत दीवानगी याद आ रही है. जानते भी हो की इश्क में क्या -क्या खोना पड़ता है ? अरे जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है. कर पाओगे इतना ?
सूरज- हाँ, निश्चित रूप से ये कर पाऊंगा. तुम्हारे लिए तो अपने चमड़े की जूतियाँ बनाकर भी पहना सकता हूँ. सचमुच .
किरण- हाँ, अब यकीन आने लगा है. क्योंकि तुम्हारे शब्दों से जों सच्चाई झलक रही है, उससे यही साफ़ होता है की तुम्हें प्रेम का रोग लग गया है. अब मौक़ा भी है, मौसम भी है और आगे क्या कहते हैं ?
सूरज- शायद दस्तूर भी है. और वो हो या ना हो मगर मैन तो हूँ ही, मै हाजिर हूँ, हर तरह से . जों कहोगी करूँगा. मगर दिल में एक सवाल आ रहा है , इजाजत हो तो सवाल करूं ?
किरण- यह मोहबात का समय है, इश्क की इन्तिहाँ का समय है. इश्क का आनंद लूटिये. अब वक्त ज्यादा नहीं है.
सूरज- हाँ, मगर रुका नहीं जाता. सोचता हूँ की कह ही दूं, मैन यह जानना चाहता था की यहाँ पर इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई ? यह होटल भुतहा जैसा क्यूँ लगता है. अगर कोई वेटर यहाँ पर आता भी है तो कुछ बोलता
क्यूँ नहीं है ? चुपचाप क्यूँ रहता है ? यह दीवारें भयानक क्यूँ लगती हैं ? माहौल ऐसा क्यूँ लगता है जैसे की जिस्म में सिहरन हो रही हो ?
किरण- करूर, मै तुम्हें ये बताउंगी. मगर इसके लिए कलेजा टाईट करना होगा . बताना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि तुम ये सवाल दूसरे बार पूछ रहे हो .
सूरज- हाँ, दिल को थाम लेता हूँ. अब बोलिए.
किरण- यहाँ जितने भी वेटर हैं, वे इंसान नहीं हैं. सब के सब भूत हैं. यानि की मर चुके हैं. मैन भी जीवित इंसान नहीं हूँ .
सूरज- यह क्या मजाक है ? आप तो बोल सकती हैं, सुन सकती हैं, समझ सकती हैं और आराम से चल -फिर भी सकती हैं. आपके पैर के पंजे भी पीछे की तरफ नहीं , आगे की तरफ हैं . मैंने सुना है की जों भूत होते हैं
उनके पैरों के पंजे आगे की तरफ नहीं बल्कि पीछे की तरफ होते हैं. आप अप्रैल फूल तो नहीं बना रही हैं ? मगर यह तो अप्रैल का महीना भी नहीं है.
किरण- मेरे बारे में तुम जों सोच रहे हो, वो सोच सकते हो क्योंकि तुम भी तो मृत हो. मौत हो चुकी है तुम्हारी.
सूरज- ये आप क्या कह रही हैं, सेक्स करने के समय इस तरह डराना क्या ठीक रहेगा ?
किरण-सच कहती हूँ मेरी जान, तुम्हारी मोटर साइकिल एक खम्भे से टकराई और तुम्हारा सिर फट गया, खून ज्यादा बहने के कारण तुम मर गए और तुम्हारी आत्मा भटककर इस तरफ आ गयी .
सूरज- मैन पागाक्ल हो जाउंगा, प्लीज इस तरह की वाहियात बातें मत करो.
किरण- जों सच है उसे स्वीकार करना होगा सूरज, सच्चाई यही है, ये जी शरीर तुम देख रहे हो, यह मायावी शरीर है, यानि की तुम सिर्फ महसूस कर रहे हो की यह है, मगर सच इसके विपरीत है. इस जिस्म का कोई अस्तित्व नहीं है.
सूरज- तो क्या हम जी रहे हैं वो मरने के बाद की लाइफ है ?
किरण- जी नहीं, यह सजा है. लाइफ तो एक बार ही मिलती है. उसके बाद जों लाइफ होती है , वह किसी को याद नहीं रहती.
सूरज का दिमाग झन्ना गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे ? भ्रमित होकर वह अपने शरीर पर हाथ फिराने लगा, इसके बाद उसने किरण के सुन्दर जिस्म को स्पर्श किया. फिर वह आईने के सामने
खडा हो गया. वह नग्न अवस्था में था. उसका चेहरा बिलकुल वैसा ही था , जैसा कथित मौत से पहले था. वह अपनी पुरानी लाइफ को याद करने लगा. तभी किरण बोली-
- तुमने मेरी बात को सच मान लिया क्या ? हा हा हा ..........मजाक कर रही थी यार
Sunday, January 23, 2011
Saturday, January 22, 2011
भाग-30
प्सूरज- आभार तो मुझे व्यक्त करना चाहिए, आपने इस अंधेरी रात में मुझे अपने होटल में रुकने का ऑफर दिया, इसके बाद सर्दी में ब्रांडी पीने और फिर अपने साथ प्रेम करने का प्रस्ताव दिया . यह मेरे लिए बहुत मायने
रखता है. सबके साथ ऐसा सुखद संयोग नहीं होता, उस स्थिति में जब आपके पास पैसे भी न हों. एक आप हैं जों दौलत को इतनी अहमियत नहीं देती, वरना देखते हैं की दुनिया इसीके पीछे पडी है.
किरण- मोहब्बत के लिए दौलत कोई मायने नहीं रखती.
सूरज- और आपने यह सिद्ध करके दिकाह दिया है.
किरण- ये पैग लीजिए, यह अमृत प्याला है, इसे पीकर मस्त हो जाओगे.
सूरज- इसे भी दीजिए, मगर हम तो आपके आँखों के मयखाने में ही मस्त होकर रह गए हैं, आपका खूबसूरत बदन ही जीती -जागती मधुशाला है. तुम्हारे ये होठ पैमाना बने हैं और तुम्हारी आँखों से मस्ती के जाम छलक
रहे हैं और सदियों से प्यासा ये दिल अमृतरस चख रहा है.
किरण- वह , वाह क्या बात है . कितना अच्छा वर्णन किया है . मजा आ गया. लगता है तुम्हारे अंदर भी किसी शायर की आत्मा समाई हुई है.
सूरज- मै भी थोडा बहुत लिख -पढ़ लेता हूँ. ज्यादा तो नहीं मगर दो चार लाइनों की तुकबंदी जरूर कर लेता हूँ. सुनिए , एक शेर उछाल रहा हूँ. ' फूलों की महक, कलियों का शबाब हो तुम , मेरे लिए तो गुलाब ही गुलाब हो तुम'
किरण- वाह, वाह . सचमुच मजा आ गया. अगर ये आपने नहीं लिखा है तब भी खूबसूरत है और अगर लिखा है तो दुनिया में इससे खूबसूरत शेर कोई हो ही नहीं सकता.
सूरज-अब आज की रात क्या तारीफ़ में ही बिता दोगे या कुछ प्यार -व्यार भी करोगे ?
किरण- आप मालिक हैं, इस जिस्म के , इस जान के, मेरे दीं और ईमान के. तुम्हें किस्से परमीशन लेने की जरूरत है ? जों चाहो करो . मैन अपना तन और मन तुमको समर्पित करती हूँ.
सूरज को गर्मी आ गयी, किरण का अंदाज इस तरह का था की सूरज की कामवासना जोरों से भडकने लगी, जब रात के काले अँधेरे में बिस्तर पर बैठी महिला पार्टनर अपने पुरुष साथी को रति क्रिया के लिए आमंत्रित करती है
तो उस समय सारा आलम मादक हो उठता है. ऐसा लगता है जैसे दुनिया का तमाम संगीत बज चूका हो. सारे तार झनझना उठे हों. सूरज ने किरण की पुकार पर उसके होठों को चूम लिया . कभी कभी वह अपनी जीभ उसकी जीभ से
रगड दिया करता था, इससे उन दोनों के बदन सुलगने लगते. सूरज का संवेदनशील अंग भी शेर की तरह दहाड़ने लगता था. वह कुछ बोल ही नहीं पाता था. किरण ने उससे कहा-
-कहाँ खो गए मेरे कामदेव, तुमने मेरे जिस्म के अंदर जों प्यार की ज्योति जलाई है उसकी आंच में मेरा समूचा अस्तित्व जल रहा है.
सूरज- इस अगन को और भी दहकने दो. मैन भी अपने अंदर के ज्वालामुखी का उफान देखना चाहता हूँ.
किरण- मैन प्यासी हूँ सूरज, इस प्यासी को अब और न तड़पाओ. मेरे करीब आ जाओ. मुझे अपनी बांहों में समेटे उस दुनिया की सैर कराओ , जहाँ पहुंचकर सब लोग अपनी सुध-बुध खो देते हैं.
सूरज- आह, ये आप क्या कर रही हैं ?
किरण- तुम्हारे इस कठोर अंग की औकात देखना चाहती हूँ, यह बहुत विशाल है. मै तो मर ही जाउंगी .
सूरज- कोई बात नहीं. चिंता मत करो , मेरे रहते कुछ नहीं होगा. कुछ भी नहीं होगा. मै प्यार करने के लिए हूँ, तकलीफ देने के लिए बिलकुल नहीं.
किरण- तो क्या इसे आधा उड़ा डालोगे ? जैसा है वैसा ही रहेगा न. अच्छा छोडो , जों होगा सो होगा . अब कर ही क्या सकते हैं ?
सूरज- तुम्हारे लिए तो मैन अपना भी सर कलम करवा सकता हूँ, इसकी तो खैर बात ही क्या है . लेकिन अगर ऐसा हो गया तो नेक्स्ट टाइम असली सुख कैसे भोग पाउंगी.]
किरण- तुम तो जान बन गए हो, मेरे अस्तित्व की असली नीव बन गए हो. अगर तुम्हें कोई स्पर्श भी करेगा तो मैन उसकी जान ले लूंगी.
सूरज- अरे ये क्या कह दिया. किसीकी जान-वां मत लेना भाई, वरना लफडा हो जाएगा . फांसी हो जायेगी तुम्हें .
किरण- दुनिया में अभी तक कोई ऐसा फांसी का फंदा नहीं बना है जों किसी रूह को मौत के घाट उतार सके. जिस्म को मौत आ सकती है मगर रूह को कभी नहीं.
सूरज- रूह , कैसी रूह ? मैन समझा नहीं. तुम्हारा रूह से क्या लेना देना ?
किरण- मेरा मतलब ये है की तुम अब मेरे जिस्म तक सीमित नहीं रहे बल्कि मेरी रूह की गहराइयों में समा चुके हो,
सूरज- जबसे तुम्हें मिला हूँ , मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है. तुम भी मेरी रूह में समा चुकी हो. मेरे दिल की गहराइयों में बस चुकी हो
किरण- आज सूरज और किरण का मेल हो रहा है. जबकि किरण तो सूरज का ही एक छोटा सा हिस्सा है. इसलिए इस मिलन को तो कोई रोक ही नहीं सकता.
प्सूरज- आभार तो मुझे व्यक्त करना चाहिए, आपने इस अंधेरी रात में मुझे अपने होटल में रुकने का ऑफर दिया, इसके बाद सर्दी में ब्रांडी पीने और फिर अपने साथ प्रेम करने का प्रस्ताव दिया . यह मेरे लिए बहुत मायने
रखता है. सबके साथ ऐसा सुखद संयोग नहीं होता, उस स्थिति में जब आपके पास पैसे भी न हों. एक आप हैं जों दौलत को इतनी अहमियत नहीं देती, वरना देखते हैं की दुनिया इसीके पीछे पडी है.
किरण- मोहब्बत के लिए दौलत कोई मायने नहीं रखती.
सूरज- और आपने यह सिद्ध करके दिकाह दिया है.
किरण- ये पैग लीजिए, यह अमृत प्याला है, इसे पीकर मस्त हो जाओगे.
सूरज- इसे भी दीजिए, मगर हम तो आपके आँखों के मयखाने में ही मस्त होकर रह गए हैं, आपका खूबसूरत बदन ही जीती -जागती मधुशाला है. तुम्हारे ये होठ पैमाना बने हैं और तुम्हारी आँखों से मस्ती के जाम छलक
रहे हैं और सदियों से प्यासा ये दिल अमृतरस चख रहा है.
किरण- वह , वाह क्या बात है . कितना अच्छा वर्णन किया है . मजा आ गया. लगता है तुम्हारे अंदर भी किसी शायर की आत्मा समाई हुई है.
सूरज- मै भी थोडा बहुत लिख -पढ़ लेता हूँ. ज्यादा तो नहीं मगर दो चार लाइनों की तुकबंदी जरूर कर लेता हूँ. सुनिए , एक शेर उछाल रहा हूँ. ' फूलों की महक, कलियों का शबाब हो तुम , मेरे लिए तो गुलाब ही गुलाब हो तुम'
किरण- वाह, वाह . सचमुच मजा आ गया. अगर ये आपने नहीं लिखा है तब भी खूबसूरत है और अगर लिखा है तो दुनिया में इससे खूबसूरत शेर कोई हो ही नहीं सकता.
सूरज-अब आज की रात क्या तारीफ़ में ही बिता दोगे या कुछ प्यार -व्यार भी करोगे ?
किरण- आप मालिक हैं, इस जिस्म के , इस जान के, मेरे दीं और ईमान के. तुम्हें किस्से परमीशन लेने की जरूरत है ? जों चाहो करो . मैन अपना तन और मन तुमको समर्पित करती हूँ.
सूरज को गर्मी आ गयी, किरण का अंदाज इस तरह का था की सूरज की कामवासना जोरों से भडकने लगी, जब रात के काले अँधेरे में बिस्तर पर बैठी महिला पार्टनर अपने पुरुष साथी को रति क्रिया के लिए आमंत्रित करती है
तो उस समय सारा आलम मादक हो उठता है. ऐसा लगता है जैसे दुनिया का तमाम संगीत बज चूका हो. सारे तार झनझना उठे हों. सूरज ने किरण की पुकार पर उसके होठों को चूम लिया . कभी कभी वह अपनी जीभ उसकी जीभ से
रगड दिया करता था, इससे उन दोनों के बदन सुलगने लगते. सूरज का संवेदनशील अंग भी शेर की तरह दहाड़ने लगता था. वह कुछ बोल ही नहीं पाता था. किरण ने उससे कहा-
-कहाँ खो गए मेरे कामदेव, तुमने मेरे जिस्म के अंदर जों प्यार की ज्योति जलाई है उसकी आंच में मेरा समूचा अस्तित्व जल रहा है.
सूरज- इस अगन को और भी दहकने दो. मैन भी अपने अंदर के ज्वालामुखी का उफान देखना चाहता हूँ.
किरण- मैन प्यासी हूँ सूरज, इस प्यासी को अब और न तड़पाओ. मेरे करीब आ जाओ. मुझे अपनी बांहों में समेटे उस दुनिया की सैर कराओ , जहाँ पहुंचकर सब लोग अपनी सुध-बुध खो देते हैं.
सूरज- आह, ये आप क्या कर रही हैं ?
किरण- तुम्हारे इस कठोर अंग की औकात देखना चाहती हूँ, यह बहुत विशाल है. मै तो मर ही जाउंगी .
सूरज- कोई बात नहीं. चिंता मत करो , मेरे रहते कुछ नहीं होगा. कुछ भी नहीं होगा. मै प्यार करने के लिए हूँ, तकलीफ देने के लिए बिलकुल नहीं.
किरण- तो क्या इसे आधा उड़ा डालोगे ? जैसा है वैसा ही रहेगा न. अच्छा छोडो , जों होगा सो होगा . अब कर ही क्या सकते हैं ?
सूरज- तुम्हारे लिए तो मैन अपना भी सर कलम करवा सकता हूँ, इसकी तो खैर बात ही क्या है . लेकिन अगर ऐसा हो गया तो नेक्स्ट टाइम असली सुख कैसे भोग पाउंगी.]
किरण- तुम तो जान बन गए हो, मेरे अस्तित्व की असली नीव बन गए हो. अगर तुम्हें कोई स्पर्श भी करेगा तो मैन उसकी जान ले लूंगी.
सूरज- अरे ये क्या कह दिया. किसीकी जान-वां मत लेना भाई, वरना लफडा हो जाएगा . फांसी हो जायेगी तुम्हें .
किरण- दुनिया में अभी तक कोई ऐसा फांसी का फंदा नहीं बना है जों किसी रूह को मौत के घाट उतार सके. जिस्म को मौत आ सकती है मगर रूह को कभी नहीं.
सूरज- रूह , कैसी रूह ? मैन समझा नहीं. तुम्हारा रूह से क्या लेना देना ?
किरण- मेरा मतलब ये है की तुम अब मेरे जिस्म तक सीमित नहीं रहे बल्कि मेरी रूह की गहराइयों में समा चुके हो,
सूरज- जबसे तुम्हें मिला हूँ , मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है. तुम भी मेरी रूह में समा चुकी हो. मेरे दिल की गहराइयों में बस चुकी हो
किरण- आज सूरज और किरण का मेल हो रहा है. जबकि किरण तो सूरज का ही एक छोटा सा हिस्सा है. इसलिए इस मिलन को तो कोई रोक ही नहीं सकता.
Friday, January 21, 2011
भाग-29
प्रिंस- अब तारीफ़ करना छोडिये और कुछ फैसला लीजिए, बोलो क्या बोलती हो ? दुबई में सैटल होने का इरादा है ?
किरण- आपका हर वाक्य मेरे लिए आदेश की तरह है ,मगर कुछ अंदेशे हैं. मैंने सुन रखा है कि दुबई में लोग पहले तो प्यार से रखते हैं बाद में महिलाओं को जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर किया जाता है .
प्रिंस- सब लोग एक जैसे नहीं होते मेरी जान . अच्छे लोग यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं और बुरे लोग भी हर जगह पर हैं.
किरण- और अगर मुझे भी वही करना पड़ा , जों यहाँ से काम की तलाश में गयी महिलाओं के साथ किया गया तो ?
प्रिंस- तो क्या फर्क पड़ जाएगा ? यहाँ क्या करने वाली हो. वैश्या तो आखिर वैश्या ही होती हैं, वह जहां भी रहेगी , यही काम करेगी , भजन -कीर्तन तो करने से रही. इसमें डरने जैसी क्या बात है ?
किरण- बात तो आपकी जायज है , मगर एक सवाल उठता है. क्या वेश्याएं इंसान नहीं होती ? क्या उनकी कुछ फीलिंग्स नहीं होतीं ? क्या उनका जिस्म , जिस्म नहीं होता ? क्या उन्हें अपना बेड पार्टनर चुनने
की आजादी नहीं होनी चाहिए ? उनके साथ जों जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाता है तो उसके विरुद्ध बलात्कार का केस नहीं चलेगा क्या ?
प्रिंस- वे सब बेकार की बहस हैं, इनसे किसीका कोई फायदा नहीं होता. कोर्ट कचहरी में इंसान तभी जाता है जब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता , और यहाँ तो मामला ऐसा है की आपका व्यवसाय ही लोगों का मनोरंजन
करना है, अपने जिस्म की खुशबु से लोगों के मन को महकाना है. अब इसमें छोटा क्या और बड़ा क्या ? नाटा क्या और लंबा क्या ?
किरण- बहुत सही बोल रहे हो, ऐसा ही होता है. हम भी बड़े पागल हैं. ज़रा सी देर में भड़क जाते हैं. हो सकता है यह इस कारण से हो की अभी इस लाइन में मैन नई -नई हूँ.
सूरज- अच्छा आपने काफी धैर्य से काम लिया . अगर कोई दूसरे होती तो गरम हो जाती.
किरण- हाँ ठीक कहते हो. मैंने बहुत सब्र से काम लिया क्योंकि एक तो हम लोग कैमरे के दायरे में थे , और दूसरे मैन प्रिंस से उलझना नहीं चाहती थी बल्कि उसकी मदद से मैन वहां से निकलना चाहती थी. यही वजह थी की
मैंने उसे बातों में उलझाए रखा, ताकि अगर कोई हमें सीसी टी वी कैमरे से देख भी रहा हो तो यह जान जाए की मै पूरी तरह से उनके रंग में रंग गयी हूँ.
सूरज- तो क्या उसने तुम्हें अपने साथ ली जाने की हामी भरी ?
किरण- वो सब बाद में बताउंगी, पहले एक जाम और तैयार करती हूँ ताकि उसे आराम से पी सकूं, सुकून से प्यार कर सकूं, तुम न जाने कैसे इतना इंटरेस्ट ले रहे हो , कोई दूसरा होता तो अपना काम करके निकल लेता .
आखिर मेरी जिंदगी में तुम इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हो ?
सूरज- शायद इसलिए क्योंकि मैन आपके प्यार का मोहताज हो गया हूँ. आपसे प्यार करने लगा हूँ.
किरण- ये प्यार है या सहानुभूति ?
सूरज- तुम ये सब क्यों सूना रही हो ? प्यार के लिए या सहानुभूति के लिए ? जों तुम्हारा जवाब है वही मेरा जवाब होगा.
किरण- तुमने तो मुझे उलझाकर रख दिया है . मैन तुम्हारे प्यार के काबिल कैसे हो सकती हूँ जबकि किसी मर्द ने मुझे अभी तक प्यार करने का दावा नहीं किया. हाँ, सब लोग मेरे जिस्म से खेलने की हसरत जरूर रखते हैं.
सूरज- मुझे सिर्फ चेहरे से नहीं आत्मा से भी प्यार है. मैन तुम्हारी अच्छाई से प्रेम करता हूँ, तुम्हारे सच बोलने की आदत से प्रेम करता हूँ और इस बात से मुझे एलर्जी नहीं की तुमने किन लोगों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बांये हैं ?
वो तुम्हारा बीता हुआ कल था जों अब बीत गया. तुमने जों कुछ किया वह मजबूरी की हालत में किया .
किरण- किन शब्दों से आपका आभार व्यक्त किया ? अब तसल्ली हुई की किसीने तो मेरी भावनाओं को समझने का प्रयास किया .
सूरज- आभार तो मुझे व्यक्त करना चाहिए, आपने इस अंधेरी रात में मुझे अपने होटल में रुकने का ऑफर दिया, इसके बाद सर्दी में ब्रांडी पीने और फिर अपने साथ प्रेम करने का प्रस्ताव दिया . यह मेरे लिए बहुत मायने
रखता है. सबके साथ ऐसा सुखद संयोग नहीं होता, उस स्थिति में जब आपके पास पैसे भी न हों. एक आप हैं जों दौलत को इतनी अहमियत नहीं देती, वरना देखते हैं की दुनिया इसीके पीछे पडी है.
किरण- मोहब्बत के लिए दौलत कोई मायने नहीं रखती.
सूरज- और आपने यह सिद्ध करके दिकाह दिया है.
किरण- ये पैग लीजिए, यह अमृत प्याला है, इसे पीकर मस्त हो जाओगे.
सूरज- इसे भी दीजिए, मगर हम तो आपके आँखों के मयखाने में ही मस्त होकर रह गए हैं, आपका खूबसूरत बदन ही जीती -जागती मधुशाला है.
प्रिंस- अब तारीफ़ करना छोडिये और कुछ फैसला लीजिए, बोलो क्या बोलती हो ? दुबई में सैटल होने का इरादा है ?
किरण- आपका हर वाक्य मेरे लिए आदेश की तरह है ,मगर कुछ अंदेशे हैं. मैंने सुन रखा है कि दुबई में लोग पहले तो प्यार से रखते हैं बाद में महिलाओं को जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर किया जाता है .
प्रिंस- सब लोग एक जैसे नहीं होते मेरी जान . अच्छे लोग यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं और बुरे लोग भी हर जगह पर हैं.
किरण- और अगर मुझे भी वही करना पड़ा , जों यहाँ से काम की तलाश में गयी महिलाओं के साथ किया गया तो ?
प्रिंस- तो क्या फर्क पड़ जाएगा ? यहाँ क्या करने वाली हो. वैश्या तो आखिर वैश्या ही होती हैं, वह जहां भी रहेगी , यही काम करेगी , भजन -कीर्तन तो करने से रही. इसमें डरने जैसी क्या बात है ?
किरण- बात तो आपकी जायज है , मगर एक सवाल उठता है. क्या वेश्याएं इंसान नहीं होती ? क्या उनकी कुछ फीलिंग्स नहीं होतीं ? क्या उनका जिस्म , जिस्म नहीं होता ? क्या उन्हें अपना बेड पार्टनर चुनने
की आजादी नहीं होनी चाहिए ? उनके साथ जों जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाता है तो उसके विरुद्ध बलात्कार का केस नहीं चलेगा क्या ?
प्रिंस- वे सब बेकार की बहस हैं, इनसे किसीका कोई फायदा नहीं होता. कोर्ट कचहरी में इंसान तभी जाता है जब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता , और यहाँ तो मामला ऐसा है की आपका व्यवसाय ही लोगों का मनोरंजन
करना है, अपने जिस्म की खुशबु से लोगों के मन को महकाना है. अब इसमें छोटा क्या और बड़ा क्या ? नाटा क्या और लंबा क्या ?
किरण- बहुत सही बोल रहे हो, ऐसा ही होता है. हम भी बड़े पागल हैं. ज़रा सी देर में भड़क जाते हैं. हो सकता है यह इस कारण से हो की अभी इस लाइन में मैन नई -नई हूँ.
सूरज- अच्छा आपने काफी धैर्य से काम लिया . अगर कोई दूसरे होती तो गरम हो जाती.
किरण- हाँ ठीक कहते हो. मैंने बहुत सब्र से काम लिया क्योंकि एक तो हम लोग कैमरे के दायरे में थे , और दूसरे मैन प्रिंस से उलझना नहीं चाहती थी बल्कि उसकी मदद से मैन वहां से निकलना चाहती थी. यही वजह थी की
मैंने उसे बातों में उलझाए रखा, ताकि अगर कोई हमें सीसी टी वी कैमरे से देख भी रहा हो तो यह जान जाए की मै पूरी तरह से उनके रंग में रंग गयी हूँ.
सूरज- तो क्या उसने तुम्हें अपने साथ ली जाने की हामी भरी ?
किरण- वो सब बाद में बताउंगी, पहले एक जाम और तैयार करती हूँ ताकि उसे आराम से पी सकूं, सुकून से प्यार कर सकूं, तुम न जाने कैसे इतना इंटरेस्ट ले रहे हो , कोई दूसरा होता तो अपना काम करके निकल लेता .
आखिर मेरी जिंदगी में तुम इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हो ?
सूरज- शायद इसलिए क्योंकि मैन आपके प्यार का मोहताज हो गया हूँ. आपसे प्यार करने लगा हूँ.
किरण- ये प्यार है या सहानुभूति ?
सूरज- तुम ये सब क्यों सूना रही हो ? प्यार के लिए या सहानुभूति के लिए ? जों तुम्हारा जवाब है वही मेरा जवाब होगा.
किरण- तुमने तो मुझे उलझाकर रख दिया है . मैन तुम्हारे प्यार के काबिल कैसे हो सकती हूँ जबकि किसी मर्द ने मुझे अभी तक प्यार करने का दावा नहीं किया. हाँ, सब लोग मेरे जिस्म से खेलने की हसरत जरूर रखते हैं.
सूरज- मुझे सिर्फ चेहरे से नहीं आत्मा से भी प्यार है. मैन तुम्हारी अच्छाई से प्रेम करता हूँ, तुम्हारे सच बोलने की आदत से प्रेम करता हूँ और इस बात से मुझे एलर्जी नहीं की तुमने किन लोगों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बांये हैं ?
वो तुम्हारा बीता हुआ कल था जों अब बीत गया. तुमने जों कुछ किया वह मजबूरी की हालत में किया .
किरण- किन शब्दों से आपका आभार व्यक्त किया ? अब तसल्ली हुई की किसीने तो मेरी भावनाओं को समझने का प्रयास किया .
सूरज- आभार तो मुझे व्यक्त करना चाहिए, आपने इस अंधेरी रात में मुझे अपने होटल में रुकने का ऑफर दिया, इसके बाद सर्दी में ब्रांडी पीने और फिर अपने साथ प्रेम करने का प्रस्ताव दिया . यह मेरे लिए बहुत मायने
रखता है. सबके साथ ऐसा सुखद संयोग नहीं होता, उस स्थिति में जब आपके पास पैसे भी न हों. एक आप हैं जों दौलत को इतनी अहमियत नहीं देती, वरना देखते हैं की दुनिया इसीके पीछे पडी है.
किरण- मोहब्बत के लिए दौलत कोई मायने नहीं रखती.
सूरज- और आपने यह सिद्ध करके दिकाह दिया है.
किरण- ये पैग लीजिए, यह अमृत प्याला है, इसे पीकर मस्त हो जाओगे.
सूरज- इसे भी दीजिए, मगर हम तो आपके आँखों के मयखाने में ही मस्त होकर रह गए हैं, आपका खूबसूरत बदन ही जीती -जागती मधुशाला है.
Thursday, January 20, 2011
भाग-28
प्रिंस- वेलकम, हमें भी नई-नई कलियाँ पसंद हैं. हमारा दुबई में मसाले का सबसे बड़ा बिजनेस है. वर्ड का शायद ऐसा कोई ही देश होगा जहाँ पर हमारा माल उपलब्ध न हो.
किरण- बहुत खुशी की बात है. आपके साथ ही चलती हूँ, यहाँ से मेरी बुकिंग करा लीजिए. आपको यहाँ पर अपना वक्त बर्बाद करने की क्या जरूरत है. जब सेवा वहाँ पर भी मिल सकती है .
प्रिंस- हाँ, ये भी बात है. मैन अभिप्रिय से बात कर लेता हूँ.
किरण- मेरी वहाँ घूमने की इच्छा है, ऐसा मत कहना. वरना वे आपसे हाई रेट मांगेंगे .
प्रिंस- वो सब तुम हम पर छोड़ दो. हम अपने तरीके से बात कर लेंगे. तुम्हारा पासपोर्ट चाहिए. वीजा वगैरह की औपचारिकताएं पूरी करवा देता हूँ. सब कुछ आसान है. अगर आपके पास दौलत है तो अच्छों-अच्छों का ईमान
बिकने के लिए उपलब्ध हो जाता है. ना बिकने वालों की संख्या बहुत है. जों नहीं बिकते उन्हें ज्यादा संख्या में बिकने वालों के ताने मिलते हैं. उन्हें असफल कहा जाता है. बताया जाता है कि उनकी कीमत लगाने वाला
कोई नहीं था , इसलिए वे नहीं बिक पाए.
किरण-बहुत ऊंची और व्यवहारिक बात कही है. आपकी बातों में बड़ा दम होता है. मैंने महसूस किया है कि आपकी बात सीधी दिल से निकलती है और दिल की गहराइयों में बसकर रह जाती है.
प्रिंस- वो देखो हमारी पुरानी डार्लिंग हमारी पसंद का पेय पदार्थ लेकर आ रही है. जब देसी दारु अंदर जाती है तो सारे खयालात बाहर आने लगते हैं. मुझे जोशो जवानी का असली आनंद इसीके साथ आता है. और अगर चांदनी
अपने हाथों से जाम बनाकर पिलाए तो बात ही क्या है ? मैने तुम्हें एक बात नहीं बतलाई, ये जों चांदनी है न , इसके साथ पहली सुहागरात मैंने ही मनाई थी. यहाँ पर जों ये पलंगपड़ा हुआ है न , इस पर मैंने अनगिनत हसीनों
के साथ सुहागरात मनाई है. यह पलंग गवाह है उन कमसिन हसीनों और मेरे साथ बिठाये रंगीन पलों का. न जाने कितनी कलियों को खिलाकर मैंने फूल बनाया है. और सुखद संयोग देखिये कि आप जैसी कली भी अब मेरे हाथों
खिलकर फूल बनने के लिए तैयार है. इन हसीन क्षणों में रोना -धोना मुझे बिलकुल पसंद नहीं है. जों लड़कियां अपने दिल से तैयार होती हैं, मुझे वही अच्छी लगती हैं.
किरण- मै आपको निराश नहीं करूंगी.
प्रिंस- मुझे आपसे यही उम्मीद थी, ज्यादा देर तक मैन आपको कामसुख तो नहीं डे पाउँगा , मगर प्यार करने में कोई कसर भी नहीं छोडूंगा.
किरण- हम भी प्यार के भूखे हैं, वासना के नहीं. आपकी स्वप्निल आँखों से जों प्यार टपकता है , हमारे लिए वह संजीवनी बूटी की तरह है.
प्रिंस-बहुत सी लड़कियों के साथ मैंने अंतरंग पल बिताए हैं, बहुतों से बातें भी की हैं ,मगर तुम उन सबसे अलग हो. तुम्हारा कोई जवाब नहीं है. तुम सबसे लाजवाब हो.
किरण- कुछ अनुमान है कि अब तक कितनी कलियों को आपने फूल बना दिया है ?
प्रिंस - कोई अंदाजा नहीं है, लेकिन हाँ, यह संख्या १०० से बहुत ज्यादा है. मगर उनमे से मुझे कोई भी उतनी नहीं जमी, जितनी कि चांदनी और तुम. चांदनी इतनी समझदार और सुलझी हुई लड़की है कि बिस्तर पर तबियत
खुश हो जाती है. जी चाहता है , इसीके आगोश में लिपटा रहूँ.
किरण- हाँ, वो तो है. ये तन से जितनी खूबसूरत हैं, मन से भी उतनी ही सुन्दर हैं.
प्रिंस- और अब तुम भी इसीकी तरह ही मिल गयी हो. अब मजा आएगा जीने का. जिंदगी में रंग -बिरंगे फूल बिखर जायेंगे.
किरण- मैन सौभाग्यशाली हूँ जों आप जैसा सच्चा इंसान मुझे मिला और आपने मुझे एक रात की दुल्हन बानाने के प्रस्ताव स्वीकार किया.
प्रिंस - कहो तो तुम्हें हमेशा के लिए दुबई में ही शिफ्ट कर दूं. तुम्हारी कंपनी से बात करना मेरी जिम्मेदारी है. जों कीमत होगी , चुका दी जायेगी, तुम जों मांगोगी वह तुम्हें मिल जाएगा .
किरण- अब भी मैन तुम्हारे दिल के ही करीब हूँ. मेरे मन में अब तक किसी भी मर्द की छवि अंकित नहीं हो पाई है. वो तुम हो जों मुझे इतने अच्छे लगे.
प्रिंस- अब तारीफ़ करना छोडिये और कुछ फैसला लीजिए, बोलो क्या बोलती हो ? दुबई में सैटल होने का इरादा है ?
किरण- आपका हर वाक्य मेरे लिए आदेश की तरह है ,मगर कुछ अंदेशे हैं. मैंने सुन रखा है कि दुबई में लोग पहले तो प्यार से रखते हैं बाद में महिलाओं को जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर किया जाता है .
प्रिंस- सब लोग एक जैसे नहीं होते मेरी जान . अच्छे लोग यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं और बुरे लोग भी हर जगह पर हैं.
किरण- और अगर मुझे भी वही करना पड़ा , जों यहाँ से काम की तलाश में गयी महिलाओं के साथ किया गया तो ?
प्रिंस- तो क्या फर्क पड़ जाएगा ? यहाँ क्या करने वाली हो. वैश्या तो आखिर वैश्या ही होती हैं, वह जहां भी रहेगी , यही कम करेगी , भजन -कीर्तन तो करने से रही.
प्रिंस- वेलकम, हमें भी नई-नई कलियाँ पसंद हैं. हमारा दुबई में मसाले का सबसे बड़ा बिजनेस है. वर्ड का शायद ऐसा कोई ही देश होगा जहाँ पर हमारा माल उपलब्ध न हो.
किरण- बहुत खुशी की बात है. आपके साथ ही चलती हूँ, यहाँ से मेरी बुकिंग करा लीजिए. आपको यहाँ पर अपना वक्त बर्बाद करने की क्या जरूरत है. जब सेवा वहाँ पर भी मिल सकती है .
प्रिंस- हाँ, ये भी बात है. मैन अभिप्रिय से बात कर लेता हूँ.
किरण- मेरी वहाँ घूमने की इच्छा है, ऐसा मत कहना. वरना वे आपसे हाई रेट मांगेंगे .
प्रिंस- वो सब तुम हम पर छोड़ दो. हम अपने तरीके से बात कर लेंगे. तुम्हारा पासपोर्ट चाहिए. वीजा वगैरह की औपचारिकताएं पूरी करवा देता हूँ. सब कुछ आसान है. अगर आपके पास दौलत है तो अच्छों-अच्छों का ईमान
बिकने के लिए उपलब्ध हो जाता है. ना बिकने वालों की संख्या बहुत है. जों नहीं बिकते उन्हें ज्यादा संख्या में बिकने वालों के ताने मिलते हैं. उन्हें असफल कहा जाता है. बताया जाता है कि उनकी कीमत लगाने वाला
कोई नहीं था , इसलिए वे नहीं बिक पाए.
किरण-बहुत ऊंची और व्यवहारिक बात कही है. आपकी बातों में बड़ा दम होता है. मैंने महसूस किया है कि आपकी बात सीधी दिल से निकलती है और दिल की गहराइयों में बसकर रह जाती है.
प्रिंस- वो देखो हमारी पुरानी डार्लिंग हमारी पसंद का पेय पदार्थ लेकर आ रही है. जब देसी दारु अंदर जाती है तो सारे खयालात बाहर आने लगते हैं. मुझे जोशो जवानी का असली आनंद इसीके साथ आता है. और अगर चांदनी
अपने हाथों से जाम बनाकर पिलाए तो बात ही क्या है ? मैने तुम्हें एक बात नहीं बतलाई, ये जों चांदनी है न , इसके साथ पहली सुहागरात मैंने ही मनाई थी. यहाँ पर जों ये पलंगपड़ा हुआ है न , इस पर मैंने अनगिनत हसीनों
के साथ सुहागरात मनाई है. यह पलंग गवाह है उन कमसिन हसीनों और मेरे साथ बिठाये रंगीन पलों का. न जाने कितनी कलियों को खिलाकर मैंने फूल बनाया है. और सुखद संयोग देखिये कि आप जैसी कली भी अब मेरे हाथों
खिलकर फूल बनने के लिए तैयार है. इन हसीन क्षणों में रोना -धोना मुझे बिलकुल पसंद नहीं है. जों लड़कियां अपने दिल से तैयार होती हैं, मुझे वही अच्छी लगती हैं.
किरण- मै आपको निराश नहीं करूंगी.
प्रिंस- मुझे आपसे यही उम्मीद थी, ज्यादा देर तक मैन आपको कामसुख तो नहीं डे पाउँगा , मगर प्यार करने में कोई कसर भी नहीं छोडूंगा.
किरण- हम भी प्यार के भूखे हैं, वासना के नहीं. आपकी स्वप्निल आँखों से जों प्यार टपकता है , हमारे लिए वह संजीवनी बूटी की तरह है.
प्रिंस-बहुत सी लड़कियों के साथ मैंने अंतरंग पल बिताए हैं, बहुतों से बातें भी की हैं ,मगर तुम उन सबसे अलग हो. तुम्हारा कोई जवाब नहीं है. तुम सबसे लाजवाब हो.
किरण- कुछ अनुमान है कि अब तक कितनी कलियों को आपने फूल बना दिया है ?
प्रिंस - कोई अंदाजा नहीं है, लेकिन हाँ, यह संख्या १०० से बहुत ज्यादा है. मगर उनमे से मुझे कोई भी उतनी नहीं जमी, जितनी कि चांदनी और तुम. चांदनी इतनी समझदार और सुलझी हुई लड़की है कि बिस्तर पर तबियत
खुश हो जाती है. जी चाहता है , इसीके आगोश में लिपटा रहूँ.
किरण- हाँ, वो तो है. ये तन से जितनी खूबसूरत हैं, मन से भी उतनी ही सुन्दर हैं.
प्रिंस- और अब तुम भी इसीकी तरह ही मिल गयी हो. अब मजा आएगा जीने का. जिंदगी में रंग -बिरंगे फूल बिखर जायेंगे.
किरण- मैन सौभाग्यशाली हूँ जों आप जैसा सच्चा इंसान मुझे मिला और आपने मुझे एक रात की दुल्हन बानाने के प्रस्ताव स्वीकार किया.
प्रिंस - कहो तो तुम्हें हमेशा के लिए दुबई में ही शिफ्ट कर दूं. तुम्हारी कंपनी से बात करना मेरी जिम्मेदारी है. जों कीमत होगी , चुका दी जायेगी, तुम जों मांगोगी वह तुम्हें मिल जाएगा .
किरण- अब भी मैन तुम्हारे दिल के ही करीब हूँ. मेरे मन में अब तक किसी भी मर्द की छवि अंकित नहीं हो पाई है. वो तुम हो जों मुझे इतने अच्छे लगे.
प्रिंस- अब तारीफ़ करना छोडिये और कुछ फैसला लीजिए, बोलो क्या बोलती हो ? दुबई में सैटल होने का इरादा है ?
किरण- आपका हर वाक्य मेरे लिए आदेश की तरह है ,मगर कुछ अंदेशे हैं. मैंने सुन रखा है कि दुबई में लोग पहले तो प्यार से रखते हैं बाद में महिलाओं को जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर किया जाता है .
प्रिंस- सब लोग एक जैसे नहीं होते मेरी जान . अच्छे लोग यहाँ भी हैं, वहाँ भी हैं और बुरे लोग भी हर जगह पर हैं.
किरण- और अगर मुझे भी वही करना पड़ा , जों यहाँ से काम की तलाश में गयी महिलाओं के साथ किया गया तो ?
प्रिंस- तो क्या फर्क पड़ जाएगा ? यहाँ क्या करने वाली हो. वैश्या तो आखिर वैश्या ही होती हैं, वह जहां भी रहेगी , यही कम करेगी , भजन -कीर्तन तो करने से रही.
Wednesday, January 19, 2011
भाग-27
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.
चांदनी यह कहानी अब किरण को ऐसे स्थान पर सुना रही थीं जहाँ पर कैमरा नहीं लगा था. वैसे तो चांदनी जिस्म्फरोसी का गिरोह चलाने वाले ब्रिज और अभिप्रिय की खास और भरोसेमंद सदस्य थी मगर इसके बावजूद भी वे उस पर नजर रखने
से बाज नहीं आते थे. लेकिन चांदनी भी होशियार थी, वह अपने लिए ऐसी खास जगह तलाश कर ही लेती थी , जहाँ तक उनके कैमरे की पहुँच न हो. चांदनी वैश्यावृति के धंधे में धोखे से लाई गयी थी, उसे यह काम पसंद
नहीं था मगर यह करने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था. जब कोई ऐसी लड़की उसकी निगरानी में लाई जाती तो वह यथासंभव उसे समझाने का प्रयास करती थी. उसके बस में ज्यादा कुछ तो नहीं था. मगर जितना करती
थी उसीसे लोगों का भला हो जाया करता था. अगर वह किरण को नहीं संभालती तो उसके साथ भी लफडा हो जाता . शायद वह जीवित ही नहीं बच पाती. किरण यह बातें सूरज को सूना रही थी. सूरज मदहोश होने लगा .
एक तो शराब का नशा और ऊपर से कातिल जिस्म का नशा. वह बोला-
- वाह, मान गए. भगवान भी बचाने वाला पहले भेज देता है. अच्छा हुआ जों तुम्हें चांदनी जैसी मददगार वहां पर मिल गयी वरना गज़ब हो जाता .
किरण- हाँ, सूरज. मगर गज़ब तो तब भी हो ही चूका था. मेरी इज्जत लुट चुकी थी और वह कमबख्त ग्राहक भी वहां आ पहुंचा था जिसे मेरे लिए बुक किया गया था.
सूरज- ओह, फिर क्या हुआ ?
किरण- वह ग्राहक आया तब तक मैं एक पैग पी चुकी थी , मेरी झिझक खत्म हो चुकी थी. उसने आते ही गर्मजोशी से मुझसे हाथ मिलाया और मेरे गाल पर हल्का सा चुम्बन लिया. मैंने मुस्कराते हुए अपना परिचय दिया . वह बोला-
-यहाँ के लोग आपकी बहुत तारीफ़ कर रहे थे , मगर मिलकर लगा जैसे वह कम कर रहे थे. तुम तो हुस्न की परी हो.
किरण- शुक्रिया- आप भी कुछ कम नहीं हैं. आपका व्यक्तित्व एक कम्प्लीट मैन जैसा है. आपका शुभ नाम जान सकती हूँ ?
-सुनिया के लिए प्रिंस हूँ. आबेदीन शेख उर्फ प्रिंस , तुम तो अब अपनी जान हो चुकी हो. जों चाहो कहो.
किरण- आइये, आपका स्वागत है. मैन आपकी खिदमत में क्या पेश करूं, व्हिस्की, वोदका या कुछ और ?
प्रिंस- हम जों पीते हैं, उसे चांदनी जानती है. उसको हम पहले ही बता चुके हैं. जरूर ला रही होगी.
किरण- जी हाँ, बताया तो मुझे भी था, मगर मैंने सोचा कि मजाक कर रही है. वह कह रही थीं कि आपको यहाँ की देसी दारु पसंद है ?
प्रिंस- यहाँ मजाक नहीं , बिलकुल सच है. हमें यहाँ की दो चीजें बहुत पसंद हैं , एक तो हसीना और दूसरे देसी दारु. ऐसी चीजें हमारी दुबई में नहीं मिलती.
किरण- वाव, इसका मतलब आप दुबई में रहते हैं ? कितनी प्यारी जगह है. मेरे सपनों का शहर . अगर लाइफ में कभी विदेश जाने का मौक़ा मिला तो दुबई ही जाना चाहूंगी.
प्रिंस- यह इच्छा तो आपकी अभी पूरी हो सकती है. कहो तो टिकट बुक करा दूं ? क्या तुम इस देश से बाहर कहीं नहीं गयी ?
किरण- गयी तो कई देशों में हूँ , लेकिन घूमने का मौक़ा कभी नहीं मिला. हम तो फ्लाईट के साथ जाते-आते हैं. मै एअर होस्टेस हूँ. और जिस दुनिया के आप पुराने खिलाड़ी हैं, मैने उस दुनिया में आज ही दस्तक दी है.
प्रिंस- वेलकम, हमें भी नई-नई कलियाँ पसंद हैं. हमारा दुबई में मसाले का सबसे बड़ा बिजनेस है. वर्ड का शायद ऐसा कोई ही देश होगा जहाँ पर हमारा माल उपलब्ध न हो.
किरण- बहुत खुशी की बात है. आपके साथ ही चलती हूँ, यहाँ से मेरी बुकिंग करा लीजिए. आपको यहाँ पर अपना वक्त बर्बाद करने की क्या जरूरत है. जब सेवा वहाँ पर भी मिल सकती है .
प्रिंस- हाँ, ये भी बात है. मैन अभिप्रिय से बात कर लेता हूँ.
किरण- मेरी वहाँ घूमने की इच्छा है, ऐसा मत कहना. वरना वे आपसे हाई रेट मांगेंगे .
प्रिंस- वो सब तुम हम पर छोड़ दो. हम अपने तरीके से बात कर लेंगे. तुम्हारा पासपोर्ट चाहिए. वीजा वगैरह की औपचारिकताएं पूरी करवा देता हूँ.
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.
चांदनी यह कहानी अब किरण को ऐसे स्थान पर सुना रही थीं जहाँ पर कैमरा नहीं लगा था. वैसे तो चांदनी जिस्म्फरोसी का गिरोह चलाने वाले ब्रिज और अभिप्रिय की खास और भरोसेमंद सदस्य थी मगर इसके बावजूद भी वे उस पर नजर रखने
से बाज नहीं आते थे. लेकिन चांदनी भी होशियार थी, वह अपने लिए ऐसी खास जगह तलाश कर ही लेती थी , जहाँ तक उनके कैमरे की पहुँच न हो. चांदनी वैश्यावृति के धंधे में धोखे से लाई गयी थी, उसे यह काम पसंद
नहीं था मगर यह करने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था. जब कोई ऐसी लड़की उसकी निगरानी में लाई जाती तो वह यथासंभव उसे समझाने का प्रयास करती थी. उसके बस में ज्यादा कुछ तो नहीं था. मगर जितना करती
थी उसीसे लोगों का भला हो जाया करता था. अगर वह किरण को नहीं संभालती तो उसके साथ भी लफडा हो जाता . शायद वह जीवित ही नहीं बच पाती. किरण यह बातें सूरज को सूना रही थी. सूरज मदहोश होने लगा .
एक तो शराब का नशा और ऊपर से कातिल जिस्म का नशा. वह बोला-
- वाह, मान गए. भगवान भी बचाने वाला पहले भेज देता है. अच्छा हुआ जों तुम्हें चांदनी जैसी मददगार वहां पर मिल गयी वरना गज़ब हो जाता .
किरण- हाँ, सूरज. मगर गज़ब तो तब भी हो ही चूका था. मेरी इज्जत लुट चुकी थी और वह कमबख्त ग्राहक भी वहां आ पहुंचा था जिसे मेरे लिए बुक किया गया था.
सूरज- ओह, फिर क्या हुआ ?
किरण- वह ग्राहक आया तब तक मैं एक पैग पी चुकी थी , मेरी झिझक खत्म हो चुकी थी. उसने आते ही गर्मजोशी से मुझसे हाथ मिलाया और मेरे गाल पर हल्का सा चुम्बन लिया. मैंने मुस्कराते हुए अपना परिचय दिया . वह बोला-
-यहाँ के लोग आपकी बहुत तारीफ़ कर रहे थे , मगर मिलकर लगा जैसे वह कम कर रहे थे. तुम तो हुस्न की परी हो.
किरण- शुक्रिया- आप भी कुछ कम नहीं हैं. आपका व्यक्तित्व एक कम्प्लीट मैन जैसा है. आपका शुभ नाम जान सकती हूँ ?
-सुनिया के लिए प्रिंस हूँ. आबेदीन शेख उर्फ प्रिंस , तुम तो अब अपनी जान हो चुकी हो. जों चाहो कहो.
किरण- आइये, आपका स्वागत है. मैन आपकी खिदमत में क्या पेश करूं, व्हिस्की, वोदका या कुछ और ?
प्रिंस- हम जों पीते हैं, उसे चांदनी जानती है. उसको हम पहले ही बता चुके हैं. जरूर ला रही होगी.
किरण- जी हाँ, बताया तो मुझे भी था, मगर मैंने सोचा कि मजाक कर रही है. वह कह रही थीं कि आपको यहाँ की देसी दारु पसंद है ?
प्रिंस- यहाँ मजाक नहीं , बिलकुल सच है. हमें यहाँ की दो चीजें बहुत पसंद हैं , एक तो हसीना और दूसरे देसी दारु. ऐसी चीजें हमारी दुबई में नहीं मिलती.
किरण- वाव, इसका मतलब आप दुबई में रहते हैं ? कितनी प्यारी जगह है. मेरे सपनों का शहर . अगर लाइफ में कभी विदेश जाने का मौक़ा मिला तो दुबई ही जाना चाहूंगी.
प्रिंस- यह इच्छा तो आपकी अभी पूरी हो सकती है. कहो तो टिकट बुक करा दूं ? क्या तुम इस देश से बाहर कहीं नहीं गयी ?
किरण- गयी तो कई देशों में हूँ , लेकिन घूमने का मौक़ा कभी नहीं मिला. हम तो फ्लाईट के साथ जाते-आते हैं. मै एअर होस्टेस हूँ. और जिस दुनिया के आप पुराने खिलाड़ी हैं, मैने उस दुनिया में आज ही दस्तक दी है.
प्रिंस- वेलकम, हमें भी नई-नई कलियाँ पसंद हैं. हमारा दुबई में मसाले का सबसे बड़ा बिजनेस है. वर्ड का शायद ऐसा कोई ही देश होगा जहाँ पर हमारा माल उपलब्ध न हो.
किरण- बहुत खुशी की बात है. आपके साथ ही चलती हूँ, यहाँ से मेरी बुकिंग करा लीजिए. आपको यहाँ पर अपना वक्त बर्बाद करने की क्या जरूरत है. जब सेवा वहाँ पर भी मिल सकती है .
प्रिंस- हाँ, ये भी बात है. मैन अभिप्रिय से बात कर लेता हूँ.
किरण- मेरी वहाँ घूमने की इच्छा है, ऐसा मत कहना. वरना वे आपसे हाई रेट मांगेंगे .
प्रिंस- वो सब तुम हम पर छोड़ दो. हम अपने तरीके से बात कर लेंगे. तुम्हारा पासपोर्ट चाहिए. वीजा वगैरह की औपचारिकताएं पूरी करवा देता हूँ.

http://cache.daylife.com/imageserve/00PA1gmeFgb4M/180x180.jpg
लंदन। ट्यूनिशिया के अपदस्थ राष्ट्रपति जिने अल आबदीन अली की पत्नी 4.5 करोड़ यूरो से अधिक मूल्य का 1.5 टन सोना लेकर दंगाग्रस्त देश से भाग गई हैं। फ्रांसीसी अखबार "ली मोंडे" ने फ्रांस के खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा है कि फिलहाल सऊदी अरब में निर्वासन में रह रहे 74 वर्षीय राष्ट्रपति की पत्नी लीला त्राबेल्सी सोने की छड़े लेने सेंट्रल बैंक ऑफ ट्यूनिशिया पहुंचीं। बैंक के गर्वनर ने उन्हें सोने की छड़े देने से मना कर दिया।
इसपर त्राबेल्सी ने पति को फोन किया। पति के हस्तक्षेप के बाद उन्हें सोना मिल गया जिसे लेकर वह भाग गई। सऊदी अरब में वह अपने पति के पास पहुंच गईं हैं। ब्रिटिश मीडिया ने अखबार को फ्रांसीसी राजनेता द्वारा दिए गए बयान का हवाले देते हुए लिखा है कि बेन अली की पत्नी 1.5 टन सोना या 4.5 यूरो मूल्य का सोना लेकर चली गईं।
हालांकि सेंट्रल बैंक के एक अधिकारी ने सोने निकालने के लिए कोई मौखिक या लिखित आदेश मिलने से इनकार किया है। अधिकारी ने कहा कि देश के सोने के भंडार में कोई तब्दीली नहीं हुई है। तेईस साल की तानाशाही के बाद बेन अली छात्रों के विरोधों के सामने झुकते हुए देश छोड़कर सऊदी अरब चले गए। इसके बाद देश में अराजक स्थिति ह
Tuesday, January 18, 2011
भाग-26
चांदनी- लेकिन आप इतने पर्सनल क्यों हो रहे हैं ? क्या आप भी पत्रकार हैं ? आप तो ऐसे दलील दे रहे हैं जैसे कि आप मेरा स्टिंग करने आये हुए हैं ?
चंद्र- जी नहीं, मैं इसलिए यहाँ नहीं आया हूँ.
चांदनी- तो किस काम के लिए आये हैं ? रात रंगीन करने के लिए ?
चंद्र- जी नहीं, इसलिए भी नहीं. बल्कि इसलिए क्योंकि आप लोगों के लिए मेरे दिल में सोफ्ट कोर्नर है. मैं आपसे मिलकर आपके कुछ दुःख कुछ सुख शेयर करना चाहता था.
चांदनी- तो करिये न , कौन इनकार करता है . मेरे गले में बहुत दुःख हो रहा है. अगर एक हीरों का हर इसमें डाल दोगे तो यह दुःख भी दूर हो जाएगा , करोगे ऐसा ?आप तो कर भी सकते हैं. मेरे गले का दुःख भला कैसे देख पाओगे ?
चन्द्र- मैं नहीं समझता कि तुम मेरे हार के लिए मोहताज हो सकती हो, मेरे जैसे न जाने कितने लोग यहाँ पर आते होंगे और इस तरह की पेशकश करते होंगे.
चांदनी- हाँ , मगर आप सबसे स्पेशल हैं. हम लोग यहाँ हैं, इसके लिए हम अकेले नहीं बल्कि आप जैसे लोग ही जिम्मेदार हैं. अगर खरीदार न हों तो बाजार का अपना कोई महत्त्व नहीं होता. बाजार का अस्तित्व ही नहीं होता . आप जैसे
कद्रदान यहाँ आते हैं, बाजार को रौनक देते हैं. अपनी अलग-अलग तरह की डिमांड रखते हैं और फिर मजबूरन दलालों को भी दायरा बढ़ाना पड़ता है. अगर ग्राहक को माल पसंद नहीं आता तो वह नए माल की चाहत रखता है. उसके पास में
दौलत होती है, वह दौलत फेंककर तमाशा देखने की कोशिश करता है . और इसी प्रक्रिया में एक कली फूल बना दी जाती है/ किसी बेबस की अस्मत लूट ली जाती है. वे लोग आप जैसे ही होते हैं. आपने अब तक कितनी मजबूर कलियों
को अपने पैरों तले कुचला है, लहूलुहान किया है. खुद आपको भी मालूम नहीं होगा, क्योंकि आप जैसे लोगों को नशा करने के बाद कुछ पता ही नहीं चल पाता है कि किसकी आबरू से खेल रहे हो. फिर चाहे वो कोई भी क्यों न हो
चंद्र- ये क्या कह रही हो चांदनी, तुम आरोप लगा रही हो मुझ पर , मेरे चरित्र पर.
चांदनी- चरित्र ? कैसा चरित्र ? जों इंसान किसी मजबूर लड़की को पैसों का लालच देकर होटल में लेकर आता है, उसकी इज्जत का सौदा करता है. हर कोई उसकी औकात समझता है. जिस तरह कोई बेवड़ा शराब की बोतल हाथ में लहराकर
लोगों को उपदेश देता फिरता है और लोग उसकी हंसी उड़ाते हैं , वही हाल हो जाता है .
चंद्र- आप हद से आगे बढ़ रही हैं.
चांदनी- और आप क्या कर रहे हैं ? आपने उस दिन क्या किया था, जब जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली थी.
चंद्र- मैं कहता हूँ, सोच -समझकर आरोप लगाओ. तुम नहीं जानती , किस्से बात कर रही हो.
चांदनी- कौन हो. बराक ओबामा तो नहीं न .
चंद्र- मैं तुम्हारे अड्डे को तहस-नहस करवा दूंगा, तुम्हारे पूरे गिरोह को जेल की चक्की पिसवा दूंगा, जानती नहीं हो मेरे को.
चांदनी- अच्छी तरह से जानती हूँ. तुम्हारा असली धंधा क्या है, वह भी पहचानती हूँ, तुम लड़कियों को फंसाकर उन्हें गलत रास्ते पर डालते हो, फिर चोरी से उसकी उल्टी-सीधी फिल्म तैयार करते हो और मनगढंत कहानी तैयार करके फिर
उसे टी वी चैनल पर दिखा देते हो. तुम्हारे सीनियर और टीवी के मालिक समझते होंगे कि बहुत बढ़िया कहानी दी है. वाह -वाह हो जाती है तुम्हारी . मगर ....
चंद्र- और क्या अगर , मगर ?
चादंनी -मगर आपकी असलियत तो हम समझते हैं न .
चंद्र- अब अगर एक शब्द भी बोला तो मैं ये भूल जाउंगा कि एक लड़की से बात कर रहा हूँ. तुम्हारा जों गिरोह चलाता है , वह भी सलाम मारता है हमें.
चांदनी- सलाम क्यों नहीं मारेगा, जब वह आपको हर महीने हफ्ता भी पहुंचाता है तो सलाम कौन सी बड़ी बात है ?
चंद्र- एक पत्रकार के साथ तुम इस तरह की वाहियात बातें करके आखिर सिद्ध क्या करना चाहती हो ? सती सावित्री बनने की आखिर कौन सी वजह है ? तुम्हें डर नहीं लगता ?
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.
चांदनी- लेकिन आप इतने पर्सनल क्यों हो रहे हैं ? क्या आप भी पत्रकार हैं ? आप तो ऐसे दलील दे रहे हैं जैसे कि आप मेरा स्टिंग करने आये हुए हैं ?
चंद्र- जी नहीं, मैं इसलिए यहाँ नहीं आया हूँ.
चांदनी- तो किस काम के लिए आये हैं ? रात रंगीन करने के लिए ?
चंद्र- जी नहीं, इसलिए भी नहीं. बल्कि इसलिए क्योंकि आप लोगों के लिए मेरे दिल में सोफ्ट कोर्नर है. मैं आपसे मिलकर आपके कुछ दुःख कुछ सुख शेयर करना चाहता था.
चांदनी- तो करिये न , कौन इनकार करता है . मेरे गले में बहुत दुःख हो रहा है. अगर एक हीरों का हर इसमें डाल दोगे तो यह दुःख भी दूर हो जाएगा , करोगे ऐसा ?आप तो कर भी सकते हैं. मेरे गले का दुःख भला कैसे देख पाओगे ?
चन्द्र- मैं नहीं समझता कि तुम मेरे हार के लिए मोहताज हो सकती हो, मेरे जैसे न जाने कितने लोग यहाँ पर आते होंगे और इस तरह की पेशकश करते होंगे.
चांदनी- हाँ , मगर आप सबसे स्पेशल हैं. हम लोग यहाँ हैं, इसके लिए हम अकेले नहीं बल्कि आप जैसे लोग ही जिम्मेदार हैं. अगर खरीदार न हों तो बाजार का अपना कोई महत्त्व नहीं होता. बाजार का अस्तित्व ही नहीं होता . आप जैसे
कद्रदान यहाँ आते हैं, बाजार को रौनक देते हैं. अपनी अलग-अलग तरह की डिमांड रखते हैं और फिर मजबूरन दलालों को भी दायरा बढ़ाना पड़ता है. अगर ग्राहक को माल पसंद नहीं आता तो वह नए माल की चाहत रखता है. उसके पास में
दौलत होती है, वह दौलत फेंककर तमाशा देखने की कोशिश करता है . और इसी प्रक्रिया में एक कली फूल बना दी जाती है/ किसी बेबस की अस्मत लूट ली जाती है. वे लोग आप जैसे ही होते हैं. आपने अब तक कितनी मजबूर कलियों
को अपने पैरों तले कुचला है, लहूलुहान किया है. खुद आपको भी मालूम नहीं होगा, क्योंकि आप जैसे लोगों को नशा करने के बाद कुछ पता ही नहीं चल पाता है कि किसकी आबरू से खेल रहे हो. फिर चाहे वो कोई भी क्यों न हो
चंद्र- ये क्या कह रही हो चांदनी, तुम आरोप लगा रही हो मुझ पर , मेरे चरित्र पर.
चांदनी- चरित्र ? कैसा चरित्र ? जों इंसान किसी मजबूर लड़की को पैसों का लालच देकर होटल में लेकर आता है, उसकी इज्जत का सौदा करता है. हर कोई उसकी औकात समझता है. जिस तरह कोई बेवड़ा शराब की बोतल हाथ में लहराकर
लोगों को उपदेश देता फिरता है और लोग उसकी हंसी उड़ाते हैं , वही हाल हो जाता है .
चंद्र- आप हद से आगे बढ़ रही हैं.
चांदनी- और आप क्या कर रहे हैं ? आपने उस दिन क्या किया था, जब जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली थी.
चंद्र- मैं कहता हूँ, सोच -समझकर आरोप लगाओ. तुम नहीं जानती , किस्से बात कर रही हो.
चांदनी- कौन हो. बराक ओबामा तो नहीं न .
चंद्र- मैं तुम्हारे अड्डे को तहस-नहस करवा दूंगा, तुम्हारे पूरे गिरोह को जेल की चक्की पिसवा दूंगा, जानती नहीं हो मेरे को.
चांदनी- अच्छी तरह से जानती हूँ. तुम्हारा असली धंधा क्या है, वह भी पहचानती हूँ, तुम लड़कियों को फंसाकर उन्हें गलत रास्ते पर डालते हो, फिर चोरी से उसकी उल्टी-सीधी फिल्म तैयार करते हो और मनगढंत कहानी तैयार करके फिर
उसे टी वी चैनल पर दिखा देते हो. तुम्हारे सीनियर और टीवी के मालिक समझते होंगे कि बहुत बढ़िया कहानी दी है. वाह -वाह हो जाती है तुम्हारी . मगर ....
चंद्र- और क्या अगर , मगर ?
चादंनी -मगर आपकी असलियत तो हम समझते हैं न .
चंद्र- अब अगर एक शब्द भी बोला तो मैं ये भूल जाउंगा कि एक लड़की से बात कर रहा हूँ. तुम्हारा जों गिरोह चलाता है , वह भी सलाम मारता है हमें.
चांदनी- सलाम क्यों नहीं मारेगा, जब वह आपको हर महीने हफ्ता भी पहुंचाता है तो सलाम कौन सी बड़ी बात है ?
चंद्र- एक पत्रकार के साथ तुम इस तरह की वाहियात बातें करके आखिर सिद्ध क्या करना चाहती हो ? सती सावित्री बनने की आखिर कौन सी वजह है ? तुम्हें डर नहीं लगता ?
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.
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