Sunday, September 19, 2010

लवगुरु -४३

मुंशीजी अब गर्म होने लगे थे, उन्हें याद आ रही थीं वे बातें जों लवगुरु ने कही थी, कि सेक्स से पहले भरपूर फोरप्ले आपकी सुबह को काफी रोमांचक बना सकता है. इस दिन सह स्नान का आनंद लें. आप एक दूसरे की मसाज भी कर सकते हैं और आपको इसके लिए किसी स्पा में जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी. घर पर ही स्पा की सुविधा तैयार करें और फिर हल्के गर्म पानी या शावर का आनंद उठाएँ.रसोई में एक दूसरे की मदद करें. जरूरी नहीं कि पुरूषों को खाना बनाना आए ही पर वे अपने तरीके से अपनी पत्नी की मदद भी कर सकते हैं, और फिर उन रोमांटिक पलों के दौरान यदि आपसे कुछ गडबड हो भी गई तो आपकी पत्नी इसका बुरा नहीं मानेंगी.अगर पत्नी के स्थान पर खास महिला दोस्त भी है तो कोई बात नहीं .

दोपहर का समय किसी रोमांटिक फिल्म को देखते हुए गुजारें. अपने बीते पलों को याद करें. आप पुरानी तस्वीरों को भी खंगाल कर यादों को ताज़ा कर सकते हैं. दोपहर को के समय तनाव को दूर रखें. यदि आप दोनों को पढने का शौख हो तो कोई किताब साथ में पढ सकते हैं. कोई रोमांटिक उपन्यास हो तो क्या कहने.
शाम को आप शोपिंग के लिए जा सकते हैं. जरूरी नहीं की खरीददारी की ही जाए. विंडो शोपिंग का आनंद भी उठाया जा सकता है. शोपिंग महिलाओं की पसंदीदा प्रवृतियों मे से एक है, आपकी पत्नी या महिला मित्र इसे जरूर पसंद करेंगी.
अपने घर पर हल्का संगीत सुनें. साथ में मिलकर हल्का फुल्का नृत्य भी किया जा सकता है. मूल बात यह है कि आप दोनों एक दूसरे को करीब पाएँ और संकोच से दूर रहें. एक दूसरे के साथ खुलकर पेश आएँ
रात को टीवी से हो सके दूर रहें और एक दूसरे के साथ समय बिताएँ. बाल्कनी में बैठकर ठंडी हवा के झोंको के बीच बातचीत आपको अधिक आनंद प्रदान करेगी. आप अपनी पत्नी के लिए कॉफी बना सकते हैं जो उन्हें पसंद आएगा या फिर डार्क चॉकलेट खाई जा सकती है. डार्क चॉकलेट, स्ट्राबेरी आदि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिससे टेस्टोस्टेरोन प्रभावित होता है और आप रोमांटिक महसूस करते हैं. इन रोमांटिक पलों के दौरान हल्के फोरप्ले का आनंद भी उठाया जा सकता है.
कैंडल लाइट डिनर लीजिए और इसके लिए चाहें तो बाहर जाएँ चाहे तो घर पर ही इसका माहौल बनाएँ. वैसे घर पर ही कैंडल लाइट डिनर का आनंद लेना सही रहेगा क्योंकि इससे आप अपने अंतरंग पलों के लिए समय बचा पाएंगे. खाना आप बाहर से ऑर्डर कर सकते हैं.
इसके बाद साथ में स्नान का आनंद लें और कुछ रोमांटिक खेल खेलें. आप स्ट्रीपर क्लब का माहौल बना सकते हैं जहाँ के सदस्य केवल दो होंगे, आप दोनों. या फिर ब्लाइंड गेम का आनंद भी उठाया जा सकता है. आप दोनों में से किसी एक की आँखों पर पट्टी बंधी होगी और दूसरे को स्वतंत्रता होगी कि वह अपने साथी के साथ क्या कर सकता है!. वैसे यह भी सच है कि उपरोक्त बातें तयशुदा नहीं है और जरूरी भी नहीं है कि आप पढ पढ कर केवल इन बातों को ही अमल में लाएँ. मेरा आशय यह बताना है कि आप अपनी व्यस्त जिंदगी से एक दिन केवल आप दोनों के लिए जरूर निकाल सकते हैं और उस दिन को आपके विशेष "सेक्स हॉलीडे" में बदल सकते हैं. दूसरे दिन आप दोनों अपने आपको काफी तरोताजा पाएंगे, और आपके रिश्तों को भी नया आयाम मिलेगा.

सेक्स के दौरान दिमाग के कुछ हिस्से काम करना बंद कर देते हैं और निष्क्रीय हो जाते हैं. यह एक विचार था, लेकिन अब इसकी एक ब्रैन स्केनिंग शोध के अनुसार महिलाएँ सेक्स के दौरान भावनात्मक बातें नहीं सोच पाती. उनके दिमाग का वह हिस्सा बंद हो जाता है

कई महिलाएँ चरम-आनंद का अनुभव नहीं कर पाती. यह बात अब तक भ्रांति के रूप में ली जाती थी,
अनुवांशिक लक्षणों और चरम-आनंद की अनुभुति के बीच सबंध होता है. एक अभ्यास के अनुसार महिलाओं द्वारा चरमआनंद का अनुभव करना उनकी अनुवांशिक सरंचना पर भी निर्भर करता है.
इस सवाल का जवाब खोजा जाना बाकी है. कई वैज्ञानिक मानते हैं कि महिलाओं के लिए पुरूषों की तरह चरम-आनंद की अनुभूति होना आवश्यक नहीं है. महिलाओं को चरम-आनंद का अनुभव होना उत्क्रांति के दौरान हुआ एक सयोंग है. अन्यथा यह कुछ कुछ वैसा ही है जैसा पुरूषों के शरीर में स्तनाग्र होना, जबकि उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं होती.

डोली को अब मुंशीजी की चुप्पी खलने लगी थे. बोली-

-क्या आप अकेले -अकेले ही मौज लेते रहते हैं , हमें कुछ नहीं बताओगे ?

Saturday, September 18, 2010

लवगुरु -४२

मुंशीजी- ये सब कहने सुनने की बातें लगती हैं। मैंने सुना है कि औरत कुछ भी मिल बांटकर खा सकती है मगर वह किसी भी हालत में अपने पति का प्यार नहीं बाँट सकती। अगर तुम मुझसे सच्चा प्रेम रखती हो और हमेशा मुझसे प्यार करना चाहती हो तो मुझे नहीं लगता कि तुम ऐसा कर पाओगी, चाहकर भी नहीं कर सकतीं, सवाल ही नहीं उठाता , वैसे मुझे गुरु जी न समझाया था कि अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने के बहुत फायदे हैं जबकि , किसी गैर स्त्री के साथ सेक्स करने में नुक्सान ही नुक्सान हैं।
डोली- अछा जी, क्या नुक्सान और मुनाफे बतलाये थे, ज़रा हम भी तो सुनें।
मुंशीजी- कहा था कि सेक्स के नाम पर आह, उह, आउच, कमर दर्द, पीठ दर्द, गर्दन दर्द से परेशान युवतियाँ 'आज नहीं, अभी नहीं' करती है, लेकिन यदि वह बिना किसी भय के पार्टनर के साथ सेक्स में शामिल हो जाए तो उसके दर्द को उड़न-छू होने में देर नहीं लगती। सिरदर्द, माइग्रेन, दिमाग की नसों में सिकुड़न, उन्माद, हिस्टीरिया आदि का सेक्स एक सफल इलाज है।अनिद्रा की बीमारी में बिस्तर पर करवट बदलने या बालकनी में रातभर टहलने के बजाय बेड पर बगल में लेटे साथी से सेक्स की पहल करें, फिर देखें कि खर्राटे आने में ज्यादा देर नहीं लगती। नियमित रूप से संभोग क्रिया में पति को सहयोग देने वाली पत्नी माहवारी के विकारों से दूर रहती है। रात्रि के अंतिम पहर में किया गया सेक्स दिनभर के लिए तरोताजा कर देता है।सेक्स को सिर्फ यौन संबंध बनाने तक ही सीमित न रखें। इसमें अपनी दिनचर्या की छोटी-छोटी बातें, हँसी-मजाक, स्पर्श, आलिंगन, चुंबन आदि को शामिल करें, संभोग क्रिया तभी पूर्ण मानी जाएगी।सेक्स के बारे में यह बात ध्यान रखें कि अपनी पत्नी के साथ या अपने पति के साथ किया गया सेक्स स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखता है।इस प्रसंग में यह बात विशेष ध्यान देने योग्य है कि जहाँ विवाहित जीवन में पत्नी के साथ संभोग क्रिया अनेक तरह से लाभप्रद है, वहीं अवैध और असुरक्षित रूप से बनाए गए सेक्स संबंधों से अनिद्रा, हृदय रोग, मानसिक विकार, ठंडापन, सिफलिस, सूजाक, गनोरिया, एड्स जैसी अनेक प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
डोली- मुझे हंसी आ रही है, कितनी भयानक बातें हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता। सवाल ही नहीं पैदा होता। ये बातें अगर किसी डॉक्टर न कही हैं तो वह निश्चित रूप से पुरुष होगा और बेहद कामुक होगा, तभी तो काम वासना शांत करने के लिए उसने इस तरह के तर्क दिए हैं,। अगर सिर्फ सेक्स करने से बीमारियाँ दूर हो जाएँ तो लोग यही करना शुरू कर दे और इस तरह अस्पतालों पर ताले लग जाएँ।
मुंशजी- तुम हंस रही हो , हंस सकती हो मगर गौर करो , मैंने कहा है कि उन्होंने समझाया था कि सिर्फ अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने से ही ये फायदे होंगे और अगर किसी गैर के साथ कोई ताल्लुकात बनाता है तो उससे बीमारियाँ ही फैलेंगी , तुमने शायद उस पर ध्यान नहीं दिया। और फिर यह कहना मेरा भी नहीं है । यह तो मैं तुम्हें वो सब बतला रहा हूँ जो मुझे लवगुरु न सिखाया है। जाहिर सी बात है कि गलत भी हो सकता है । मैं तुम्हारी बात को काट तो नहीं रहा ।
इस बात से डोली को थोड़ी सी राहत मिली, वह जान गयी कि मुंशीजी न समझौते करने शुरू दिए हैं।, यानी कि उसनके अन्दर एक अच्छा पति बन्ने के गुण मौजूद हैं।
वह मुंशीजी को उकसाने के भरसक प्रयास कर रही थी। मुंशीजी भी अपनी तरफ से कोई कसार नहीं छोड़ रहे थे मगर उनके जिस्म के अन्दर जितनी कामोत्तेजना होनी चाहिए उतनी हो नहीं रही थी, उनका बदन सुलग रहा था मगर मुख्य हथियार साथ ही नहीं दे रहा था। वे नहीं चाहते थे कि उनकी चाहने वाली डोली के सामने वे कम ताकतवर दिखें , इसलिए हर तरीका इस्तेमाल कर रहे थे। गुरूजी न कहा था कि जब कामवासना भाद्कानी हो तो अश्लील बातें कहनी चाहिए , वह ऐसा भी कर रहा था , मगर इसका असर होता था डोली पर। वह उनकी बातों से और भी ज्यादा कामुक हो जाया करती थी। आखिरकार डोली को ही आगे आना पडा, उसने मुंशीजी के विशेष अंग की मालिश करनी शुरू करदी , इसका तुरंत असर देखा गया।

Friday, September 17, 2010

लवगुरु -४१

डोली ने महसूस किया कि काफी देर से मुंशीजी ही बोलते जा रहे थे , वह सिर्फ हाँ, या हूँ या सही बात है बोलकर रह जाती थी उसने सोचा कि कहीं मुंशीजी उसे बिलकुल नादाँ न समझ बैठें, इसलिए उसने भी बोलना शुरू किया -

-हर कहीं सेक्स प्रतिबंधित है। सेक्स का जिक्र आते ही क्षणभर में हमारी सभ्यता-संस्कृति ख़तरे में पड़ जाती है। मुंह पर हाथ रखकर सेक्स की बात पर शर्म और गंदगी व्यक्त की जाती है। सेक्स को इस कदर घृणा की दृष्टि से देखा जाता है, मानो वो दुनिया की सबसे तुच्छ चीज हो।
मुंशीजी- हाँ, बहुत सही बात है .सेक्स को हमारे यहां हमेशा से ही टैबू माना गया है। सेक्स पर बात करना। उसे जग-ज़ाहिर करना या आपस में शेयर करना। हर कहीं सेक्स प्रतिबंधित है। सेक्स का जिक्र आते ही क्षणभर में हमारी सभ्यता-संस्कृति ख़तरे में पड़ जाती है। मुंह पर हाथ रखकर सेक्स की बात पर शर्म और गंदगी व्यक्त की जाती है। सेक्स को इस कदर घृणा की दृष्टि से देखा जाता है, मानो वो दुनिया की सबसे तुच्छ चीज हो।
डोली-खुलकर सेक्स का विरोध करते हुए मैंने उन सभ्यता-संस्कृति रक्षकों को भी देखा है जिन्हें सड़क चलती हर लड़की में 'गज़ब का माल' दिखाई देता है। जिन्हें देखकर उनके हाथ और दिमाग न जाने कहां-कहां स्वतः ही विचरण करने लगते हैं। जिन्हें रात के अंधेरे में नीली-फिल्में देखने में कतई शर्म नहीं आती और नीली-फिल्मों के साथ रंगीन-माल भी हर वक्त जिनकी प्राथमिकता में बना रहता है। परंतु रात से सुबह होते-होते उनका सेक्स-मोह 'सेक्स-टैबू' में बदल जाता है।
मुंशीजी- इस सब्जेक्ट पर मैं तुम्हारे साथ हूँ, हमारे पुराणों तक में लिखा है कि यौन-सुख स्त्री के लिए वर्जित, पुरुष के लिए हर वक्त खुला है। पुरुष आजाद है हर कहीं 'मुंह मारने' के लिए। यही कारण है स्त्री को अपना सेक्स चुनने की आजादी हमारे यहां नहीं है।
यह सही है कि हम परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे हैं। हर दिन, हर पल हमारे आस-पास कुछ न कुछ बदल रहा है। हम आधुनिक हो रहे हैं। यहां तक कि टीवी पर दिखाए जाने वाले कंडोम, केयरफ्री, ब्रा-पेंटी के विज्ञापनों को भी हम खुलकर देख रहे हैं। एक-दूसरे को बता भी रहे हैं। मगर सेक्स को स्वीकारने और इस पर अधिकार जताने को अभी-भी हमने अपनी सभ्यता-संस्कृति के ताबूतों में कैद कर रखा है। हमें हर पल डर सताता रहता है कि सेक्स का प्रेत अगर कहीं बाहर आ गया तो हमारी तमाम पौराणिक मान्यताएं-स्थापनाएं पलभर में ध्वस्त हो जाएंगीं। हम पश्चिमी भोगवाद के शिकार हो जाएंगें। इसलिए जितना हो सके कोशिश करो अपनी मां-बहनों, पत्नियों को सेक्स से दूर रखने और उन्हें अपनी इच्छाओं से अपाहिज बनाने की।
गज़ब की बात यह है स्त्री-सेक्स पर प्रायः वे लोग भी अपना मुंह सींये रहते हैं जो स्त्री-विमर्श के बहाने 'स्त्री-देह' के सबसे बड़े समर्थक बने फिरते हैं। स्त्री जब अपने सुख के लिए सेक्स की मांग करने लगती है तो परंपरावादियों की तरह उनके तन-बदन में भी आग-सी लग जाती है। इन स्त्री-विमर्शवादियों को सेक्स के मामले में वही दबी-सिमटी स्त्री ही चाहिए जो मांग या प्रतिकार न कर सके।
पता नहीं लोग यह कैसे मान बैठे हैं कि हम और हमारा समाज निरंतर बदल या विकसित हो रहा है। आज भी जब मैं किसी स्त्री को दहेज या यौन शोषण के मामलों में मरते हुए देखती हूं तो मुझे लगता है हम अभी भी सदियों पुरानी दुनिया में जी रहे हैं।
डोली-मुझे एक बात का जवाब आपसे चाहिए आखिर जब पुरुष अपने बल पर अंदरूनी और बाहरी सारे सुख भोगने को स्वतंत्र है तो यह आजादी स्त्रियों को क्यों और किसलिए नहीं दी जाती?
क्या इच्छाएं सिर्फ पुरुषों की ही गुलाम होती हैं, स्त्रियों की नहीं?

मुंशीजी- मगर मैं इस मामले में तुम्हारे साथ हूँ, सत्य आखिर सत्य होता है.मैं स्त्री अधिकारों का विरोधी नहीं हूँ, और हाँ, मैं कभी भी तुम्हें बंधन में रखने वाला नहीं हूँ. अगर तुम हमेशा के लिए मेरी हो जाने का वादा करती हो तो तुम्हे सामान अवसर दिए जायेंगे . सामान आदर दिया जाएगा. भले ही वह कोई भी मामला कैसा भी हो.
डोली- रहने दीजिए . जब सेक्स का मामला आएगा तो आप भी अन्या मर्दों जैसे ही हो जायेंगे . सेक्स की बात तो दूर है , अगर कभी आपने मुझे किसी गैर लड़के के साथ देख भी लिया तो आग बबूला हो जाओगे . जबकि अगर आप किसी दूसरे लड़की को घर में लेकर आते हो और उसके हमबिस्तर भी होते हो तो मैं उसका विरोध नहीं कर पाउंगी .











Thursday, September 16, 2010

लवगुरु -४०

मुंशीजी जब भी कमजोर पड़ते तो उन्हें लवगुरु की याद आने लगती थी, उन्होंने ही तो कहा था कि अगर वह आपको पसंद करती है तो वह भी आपको बिस्तर पर प्रभावित करने के लिए उतनी ही बेचैन होगी जितने आप होते हैं। महिलाओं से संबंधित पत्रिकाएं उनके बारे में ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी देती है जो कहीं और से नहीं मिल सकती। वह महिलाओं
के दृष्टिकोण के बारे में अनेक बातें बताती हैं जिन्हें जानना पुरूषों के लिए दिलचस्प होगा। वह हमारे व्‍यवाहार से कैसे प्रभावित होती है? हमारे कामों को कैसे जानती है? वह किस चीज की उम्मीद करती है? इस प्रकार की बहुत सी बातों की जानकारियां
वह पत्रिका हमें देती है जिन्हें जानना पुरूषों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है।
डेटिंग की दीवानी महिलाओं और पुरुषों में अनेक असमानताएं हो सकती हैं। लेकिन नए पार्टनर के साथ काम क्रीडा करने में वह सहज होते हैं। अगर वह आपको पसंद करती है तो वह भी आपको बिस्तर पर प्रभावित करने के लिए उतनी ही बेचैन होगी
जितने आप होते हैं। वह आपको खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ऐसा करके वह आपको दोबारा सेक्स के लिए बुलाना चाहेगी। एक जैसी रूचियां मिलने पर वह सोचती है कि उन्हें सही साथी मिल गया है। तब भावनात्मक रूप से वह आपसे जुड़ जाती
है और बिस्तर पर अपनी कामुक अदाओं का ऐसा असर छोड़ना चाहेगी जिसे आप लंबे समय तक याद रख सके। अपने पार्टनर को काम क्रीडा के लिए दोबारा प्रेरित करने के लिए महिलाएं मुख्यत: चार तरीके अपनाती हैं।
बहुत बार मजाक में वे एक दूसरे को तंग करने लगते हैं। ऐसा करने पर पुरुष अक्‍सर उतेजित हो जाता है। अगर महिला ऐसा करके भी पुरूष को खुश न कर पाई तो संभव है कि वह काम क्रीडा में रूचि न ले। यदि उम्मीदें एक बार जाग गईं तो बिना गंभीर प्रयत्‍न के उन्हें दूर करना बहुत कठिन होता है। कुछ पुरूष आलसी स्वभाव के कारण निश्‍िचत चीजों से प्रेम करते हैं। ऐसे में यदि महिलाएं सोचें कि सेक्स के लिए उनकी अनुमति की जरूरत
नहीं है तो पुरूषों को लगेगा कि उन्हें पाना कोई चुनौती भरा काम नहीं है। जबकि ज्यादातर पुरूष चुनौती पसंद करते हैं। यदि महिला हमेशा पुरूष को संतुष्‍ट करने के लिए तैयार रहती है तो पुरुष उसे घर की खेती मानेगा। इसलिए महिला साथी जब काम क्रीडा के
लिए तैयार न हो तो मना कर देना चाहिए ताकि पुरूष को ज्यादा कोशिश करनी पड़े।
पुरूषों को अपने पुरूषत्व पर गर्व होता है। वे सोचतें हैं कि वह हमेशा ठीक काम करतें हैं। इसलिए महिलाओं को सदा यह बताने की कोशिश करनी चाहिए कि वह सही कर कर रहे हैं या गलत। उनकी पॉवर, साइज, योग्यता आदि से संबंधित कोई प्रतिकूल
टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। संतुष्‍ट न होने पर भी ऐसी कोई बात न कहें जो उनको चोट करे या उन्हें बुरी लगे। जब पुरूष लगातार यह सोचता है कि वह महिला को संतुष्‍ट कर पाएगा या नहीं तब उसमें असुरक्षा की भावना आ जाती है। ऐसी स्थिति में वह
काम क्रीडा से परहेज करने लगता है। ऐसी स्थिति में महि‍लाएं उनकी प्रशंसा करके उसे बेहतर काम क्रीडा के लिए प्रेरित कर सकती है।
बिस्तर पर पुरूष से ऐसे वादे किसी कीमत पर नहीं करने चाहिए जो कि पूरे न हों। यदि आप उसकी रात को यादगार बना देने का वादा करके असफल रहती हैं तो संभव है कि वह सेक्स में रूचि न ले। उससे कम वादे करके उसे अधिक आनंद देकर आप
उसे आश्‍चर्यचकित कर सकती हैं। ऐसा करके पुरूष की जिज्ञासा को बनाए रखा जा सकता है। वह अगली बार भी आपसे नए आश्‍चर्य की उम्मीद करेगा।
अधिकतर महिलाएं कामक्रीड़ा की सम्पूर्ण विधियों के बारे में सोचती हैं। यदि आप सेक्स की किसी एक विधि में निपुण हैं तो उसे हर तरह से करने का प्रयास करें। वह विधि साथी को बताकर उसे सेक्स के लिए उत्‍तेजित किया जा सकता है। अपने साथी से बात
करके उसकी इच्छा जानकर महिलाएं इसे खबसूरती के साथ कर सकती हैं।
आपसी तालमेल से ऐसी तकनीक अपनाकर साथी को खुश करके उसे दोबारा सम्बन्ध बनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।. डोली और मुंशीजी दोनों ही मस्त हो चुके थे .

Wednesday, September 15, 2010

lavguru, bhaag-39



मुंशीजी और डोली एक बिस्तर पर पड़े हुए रोमांटिक दुनिया में मस्त थे. वे ऐसे -ऐसे खाब और ख़याल सजा रहे थे, जिन्हें कभी पूरा होना ही नहीं था. डोली माहिर थी. उसे इन सब बातों का अच्छा खासा ज्ञान था और वह अपनी अदाओं के ऐसे ज़लवे दिखाती थी, जिसे देखकर सामने वाला मर्द पहली ही बार में चारों खाने चित्त होकर गिर जाया करता था. मुंशीजी को भी उसने इसी तरह से बोतल में उतरा था . हाँ, मुंशीजी को यह जरूर एहसास हुआ था कि उम्र के इस ढलान पर उनकी कामशक्ति कम हो गयी थी. अब उन्हें समझ में आया कि डॉक्टर उनसे शराब न पीने की सलाह क्यों देते थे. अब उन्होंने समझा कि नशे के कारण काम क्षमता भी कम हो जाती है. हांलाकि लिराज के कारण उनकी लीवर की समस्या तो आसानी से खत्म हो गयी थी, मगर वे बिस्तर पर नवयौवना डोली को उस तरह की सुख -संतुष्टि नहीं दे पा रहे थे जिसकी इच्छा नई हसीनाओं को होती है. जब वे कमजोर पड़ते तो लवगुरु के सुझावों को याद कर लिया करते थे. लवगुरु ने ही तो कहा था कि यह आवश्यक है कि आप अपने अंदर सेक्स आकर्षण पैदा करें और अपने साथी को पूर्ण आनंद प्रदान करें। हालांकि इसका कोई बना-बनाया फार्मूला नहीं है। लेकिन अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेगें तो सेक्स का पूरा लुत्फ उठा सकते हैं।
सेक्स एक शाश्‍वत सत्य है। हमारे इतिहास में भी नारियों की सुंदरता का बराबर बखान किया गया है। शायद इसी आधार पर यह कहा जाता है कि नारी ईश्‍वर की सबसे सुंदर कृति है। विपरीत लिंगो के बीच सेक्स संबंधी झुकाव प्रकृति प्रदत्त है।
अच्छा चुम्बन अपने साथी को उत्‍तेजित करने का सबसे आसान तरीका है। लेकिन आमतौर पर लोग इसमें भी सफल नहीं हो पाते हैं। क्योंकि चुंबन भी एक प्रकार की कला है जिससे लोग वाकिफ नहीं होते हैं जिसके कारण असफलता हाथ लगती है। जब भी आप अपने साथी के साथ इस हेतु कहीं जाते है तो इस बात का बराबर ख्‍याल रखें कि वह जगह जहां आप जा रहे हैं अपेक्षाकृत शांत एवं मनोरम हो। बेहतर हो कि आप दोनों के अलावा वहां कोई न हो तो ज्यादा अच्छा हो। ध्यान रखें कि इस दौरान उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश न करें। नहीं तो इसका उल्टा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वह स्थान जहां पर आप हैं संभव है कि आम लोग वहां बराबर आते रहते हों। ऐसी परिस्थिति में यह सामाजिक रूप से सही नहीं होगा।

लेकिन इस दौरान आप उसके बाहरी अंगों को सहलाते हुए उत्‍तेजित करने का प्रयास कर सकते हैं। साथ ही आप उसके अंगों का भावनात्‍मक वर्णन भी कर सकते हैं। जैसे हाय! तुम्हारे ओंठ इतने सुर्ख लाल हैं कि जी करता है इसको चूम ही लूं, तुम्हारी आंखें झील सरीखी गहरी है, आदि। तात्पर्य यह कि इस हेतु उपयुक्‍त माहौल बनाएं ताकि आपका साथी भी इस क्रिया के लिए तैयार हो सके। उसके अंदर किसी प्रकार का झिझक न रहे।

घर जाने से पहले अपने साथी को एक बार फिर से चुंबंन के लिए उत्तेजित अवश्य करें। इस क्रम में अपने साथी पर अचानक से टूट न पड़ें। वरन इसके लिए उनको पूर्ण रूप से तैयार करें। आप जब भी इस स्तर पर पहुंचे तो अपने होंठ को उसके होंठ के पास ले जाएं। याद रखें एकदम से चूम ही न लें। उसके बाद धीरे-धीरे उसको अपनी बांहों में भर लें। अब धीरे-धीरे अपने को उससे अलग कर लें। तत्पश्‍चात साथी के आंखों में आंखें डालकर हल्की सी मुस्कान दें। उसके बाद एक बार फिर से यह प्रक्रिया दुहराएं। इस बार उसको जरूर चूमें। इस स्थिति में अपने-आप पर नियंत्रण बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। नहीं तो रंग में भंग पड़ सकता है।

जब आपको यह लगे कि वह आपको अपनी बांहों में भरना चाहती है तो अचानक से उसको हंसते हुए अपने से अलग करें। उसके तुरंत बाद उसको बांहों में भरकर बेतहाशा चूमें ताकि उसको ऐसा न लगे कि आप उसपर हंस रहे हैं। साथ ही आपको यह भी दिखाना है कि आपके जैसा साथी उसको नहीं मिल सकता। इसके बाद वह खुद ही सेक्स के लिए आपको प्रेरित करेगी।

आप सिर्फ चुंबन से ही उसको सेक्स के लिए उत्‍तेजित करने में सफल तो हैं, लेकिन आपके सहयोगी को आप से और भी अपेक्षाएं होंगी। ऐसे में आपको चुंबन के अलावा भी कुछ करना होगा। इससे आगे आप मुख मैथुन करके भी खुशियां प्राप्‍त कर सकते हैं। जब कभी आप इस प्रक्रिया के लिए जा रहे हों तो कई बातें ऐसी होती हैं जिनका ख्‍याल रखना बहुत जरूरी होता है। अगर आप पहले से इसके लिए तैयार नहीं होते हैं तो आप इसमें सफल नहीं हो सकते। अत: मुख मैथुन के पहले कुछ सावधानी बरतना जरूरी होता है। इस दौरान साथी के गुप्‍तागों को सहलाने के बाद उसको अचानक से कुछ सेकेंड के लिए अकेला छोड दें। उसके बाद उसके आकर्षक को अपने मुंह मे लेकर हल्‍के-हल्‍के सहलाएं। ध्यान रहे उसके अंगों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। ऐसे में सेक्स मजा किरकिरा हो सकता है।

इस पक्रिया के बाद आप पाएंगे कि आपकी सहयोगी आपसे संबंध बनाने के लिए आप से ज्यादा रूचि लेगी। जब कभी भी आपको ऐसा लगे तो आप यह मान लें कि यह संबंध बनाने का उपयुक्‍त समय है। लेकिन संभोग करते वक्‍त भी थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। बिस्तर पर जाने के तुरंत बाद ही मंजिल पर पहुचना प्रारंभ न करें। वरन साथी को इस हेतु उकसाएं।

पुन: जब दूसरे दिन बिस्तर पर जाएं तो तब तक इंतजार करें जब तक की वह खुद ही पहल न करे। लेकिन जनाब थोड़ा संभल के ! पहली बार जब आप काम क्रीडा की स्थिति में आएं तो थोड़ी देर बाद ही उससे अपने आपको अलग करें। हालांकि यह कठिन है, फिर भी आप कर सकते हैं। लेकिन अगर आपकी सहयोगी फिर से काम क्रीडा के लिए आग्रह करे तो इस बार उनको पूर्ण संतुष्‍िट प्रदान करें। अगर आप इस तरह से संबंध स्थापित करेंगे तो आपका सेक्स जीवन पूर्णत: सफल होगा। इससे आपका दांपत्य जीवन भी सुखमय रहेगा।
अगर बेड पार्टनर पत्नी नहीं होकर अच्छी मित्र हो तब भी यह फार्मूला लागू होता है. डोली तो उसकी होने वाली जीवन संगिनी थी.

Tuesday, September 14, 2010

लवगुरु, भाग-३८


डोली - आपकी नजर में इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?
मुंशीजी- पश्चिमी सभ्यता, जो खुलेपन और स्वतंत्रता की मांग को सर्वोपरि मानती है, जब यही स्वतंत्रता और खुलापन अपनी सीमा मे ज्यादा होती है तब अराजकता फैल जाती है और उसी अराजकता में यह बीमारी फैलने लगती है.
जब से टीवी और इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है तब से पुरुषों में वासना अपनी सीमा से कहीं अधिक बढ़ गई है.
हालांकि यह भी पश्चिमी सभ्यता की देन है.
मदिरा का नशा ऐसा होता है कि कई पुरुष इसके नशे में उत्तेजित होकर अपनी बच्ची,बहन या रिश्तेदार को ही वासना शांत करने का साधन समझ बैठते हैं.
बलात्कार क्यों होता है, कैसे होता है , किन परिस्थितियों में होता है यह सब उस महिला या लड़की के लिए कुछ मायने नहीं रखते जिसके साथ यह होता है. क्योंकि ऐसी स्थिति में उस पीड़िता के लिए जीवन कष्टों की गठरी बन जाती है. पहले तो उसका शारीरिक बलात्कार होता है और फिर हर डगर पर उसका मानसिक बलात्कार अपनों द्वारा होता ही रहता है.
चाहे हम कितने भी शब्द लिखें लेकिन सच्चाई यही है कि बलात्कार पीड़िता के दर्द को दर्शाना संभव नहीं है .
डोली- जी, बलात्कार के बाद यह सबसे पहली पीड़ा होती है. क्योंकि जब कोई जानवर अपनी पूरी ताकत से किसी की इज्जत लूटता है तो उस दर्द की पीड़ा मात्र से ही पीड़िता कई दिनों तक परेशान रहती है. और यह दर्द नाबालिग और कम आयु की लड़कियों में तो और भी ज्यादा होती है जिनके कोमल अंगों को यह जानवर नोच खाते हैं.
अक्सर सामूहिक बलात्कार के बाद पीड़िता को एड्स और गर्भ जैसी समस्या होने का खतरा बना रहता है. सामूहिक बलात्कार, जो आजकल कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं उसमें पीडिता का शरीर कभी-कभी तो इतना थक जाता है कि उससे मृत्यु भी हो जाती है. हालांकि ऐसे समय में पीड़िता को जल्द ही अगर चिकित्सकीय मदद मिल जाए तो हालात काबू में किए जा सकते हैं.
बलात्कार तो शरीर का होता है फिर मन को कैसी पीड़ा? लेकिन यह वह दर्द होता है जो हर दर्द से बढ़ कर होता है.
मानसिक अवसाद और अंधेरे में पीड़िता इस कदर गुम हो जाती है कि उसे अपने अस्तित्व का ख्याल ही नहीं रहता. हर समय मन उस डरावने समय को याद करता है और दिमाग पागलपन की तरफ खिंचता चला जाता है.
जिस चीज से मन सबसे ज्यादा दुखी होता है वह है इतना सब होने के बाद समाज का रवैया. एक ऐसी लड़की जिसकी इज्जत लुट चुकी हो उसे समाज अधिकतर बुरी निगाहों से देखता है खासकर निम्न और मध्यम वर्ग में तो अगर किसी के साथ बलात्कार या रेप हुआ हो तो उसे अछूत से कम नहीं माना जाता.

सबसे ज्यादा दोष तो समाज का है जो बार-बार पीड़िता के अहम और उसके सम्मान का बलात्कार करता है. समाज इस चीज में पीड़िता की ही गलती देखता है, उसे हर जगह नीच भावना से देखता है. ऐसी स्थिति में लड़की का स्कूल, दफ्तर आदि जाना तो मानो पाप हो जाता है जहां हर दूसरी नजर उन्हें रंडी, वेश्या या कलमुंही की नजर से देखती है.

ऐसे में मानसिक पीड़ा और अवसाद होना सामान्य है. इसका परिणाम यह होता है कि एक हंसती-खेलती लड़की गुमनामी के साए में या तो गुम हो जाती है या आत्म हत्या कर लेती है.

किसी पीड़िता को सबसे अधिक दुखद स्थिति का सामना तब करना पड़ता है जब कि उसे ऐसे लोग मिल जाते हैं जो उसे अपना सबसे आसान शिकार समझते हैं. इसी कड़ी में यह भी देखा गया है कि सहानुभूति की आड़ में उनका सबसे ज्यादा शोषण हुआ है.


अक्सर देखा जाता है कि इन मामलों में शिकारी या आरोपी कोई जान-पहचान का ही होता है तो ऐसे में माता-पिता को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि कहीं कोई उनकी बच्चियों पर गलत नजर तो नहीं रखता. इसके साथ लड़कियों को भी ज्यादा खुलेपन से परहेज करना चाहिए. साथ ही बचाव के लिए आप अपने साथ लाल मिर्च की पुड़ियां भी रख सकती हैं यह सबसे बेहतरीन उपाय होता है. बंद गलियों और अंधेरी-सुनसान रास्तों के इस्तेमाल से बचें. अगर जरुरी न हो तो रात को सफर करने से परहेज करें. ऑटो के स्थान पर रात के समय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग बेहतर होता है क्योंकि ऐसे अपराधों में इनकी भूमिका हमेशा से संदेह वाली रही हैं.

समाज का यह नजरिया की बलात्कार के बाद लडकी की इज्जत नहीं रहती गलत है. बल्कि इसे एक अपराध की तरह देखना चाहिए जैसे कि आप चोरी या दुर्घटना को देखते हैं. परिवार को भी इसे इसी रूप में देखना चाहिए. बलात्कारी को समाज के सामने लाना चाहिए और इंसाफ की आवाज को बुलंद करना चाहिए. समाज को पीड़िता के प्रति उदार रवैया अपनाना चाहिए क्योंकि भावनात्मक सहानुभूति किसी की जिंदगी बना सकती है.


मुंबई, मर्दानगी बढाने वाली दवा परफेक्स ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं, अपने असर के कारण यह दवा लोगों की फेवरिट बन गयी है. आजकल बाजार में मर्दानगी , जोश और सम्पूर्ण संतुष्टि दिलाने वाली बहुत सी दवाइयां हैं. दावा करने वाले कई नीम हकीम भी हैं आप अगर उनके चक्कर में पड़कर पैसा, वक्त और जवानी गँवा चुके हैं तो यह आपके लिए है . एक बार शुद्ध आयुर्वेदिक दवा परफेक्स कैप्सूल और तेल का एक कोर्स पूरा करें और पायें जोश का तूफ़ान , मर्दानगी का सच्चा और स्थायी एहसास. ताकि आपकी पत्नी हो सकें खुश. उसे प्राप्त हो सके सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि .एक मरीज ने इस दवा के सिर्फ एक माह सेवन करके ठीक होने वाले अँधेरी निवासी रवीश ने बाते कि आज ही बदल डालिए अपनी पुरानी दवा. अपनाइए भारत भर में प्रसिद्द अच्छी और सच्ची दवा , जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता. कठिन परिश्रम और भारतीयों को ध्यान में रखकर , भारतीय जलवायु को ध्यान में रखकर बनाया गया खास फार्मूला . जों आपकी रग -रग में कामोत्तेजना का तूफ़ान उठादे . ताकि आप बिस्तर पर अपनी प्रिय पार्टनर को प्यार का विशेष तोहफा दे सकें,
ताकि उन खास क्षणों को खींच सकें और भी लंबा. बहुत लंबा...
आपकी पार्टनर को मिले जबरदस्त संतुष्टि, सम्पूर्ण संतुष्टि , यानि कि 'प्यार भी, जोश भी, जवानी भी . देखिये परफेक्स की रवानी भी .रवीश भावुक होकर कहते हैं कि
आज ही पहुंचिए नजदीकी मेडिकल स्टोर , मांगिये परफेक्स , रहिये तंदुरुस्त .
विकास हेल्थ केयर का यह प्रोडक्ट अब महाराष्ट्र के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी धूम मचाने के लिए तैयार है. अगर लोगों के दावे पर यकीन करें तो परफेक्स एक दिन विदेश वायग्रा को भी मात दे सकता है .