Tuesday, July 27, 2010

भाग-७६ (कल यह क्रमांक गलत लिख गया था )
कभी किसी लड़की के साथ स्नान का आनंद उठाया है आपने ? उठाया तो जरूर होगा . पहुंचे हुए फ़कीर दीखते हो .
शुजात- अच्छा ,तुम भी झंकार . कमेन्ट करने से बाज नहीं आती हो , कुछ न कुछ ऐसा कहते हो कि मैं लाजवाब हो जाता हूँ. वैसे इसका भी एक अलग ही मजा है . तुमने सही अंदाजा नहीं लगया . सच तो ये है कि मैंने आज तक किसी लड़की के साथ नहाने का सुख नहीं भोगा. मगर आज यह इच्छा भी पूरी हो जायेगी . देखते हैं इससे मन कितना रोमांटिक होता है . हांलाकि अभी तक दिल में कोई छवि तो तैयार की नहीं है . पता नहीं क्या होगा , कैसे होगा /
झंकार - फ़िक्र मत करो , सही समय आने पर सब कुछ सही हो जाएगा . इन चीजों के स्कूल नहीं होते मेरी जान. बेवजह चिंता करके इस कसे हुए मजबूत जिस्म को कमजोर न करो . आओ मुझे फोलो करो .
शुजात यंत्रवत उसके पीछे -पीछे चलने लगा. झंकार तो बिलकुल नगन थी. उसने अंडरवियर और बनियान पहन रखे थे. उस फाइव स्टार होटल का बाथरूम भी उसकी क्वालिटी के अनुरूप ही खूबसूरत था. हर चीज के इंतजाम थे . ऐसी कोई आधुनिक सुविधा नहीं थी , जों वहां पर मौजूद न हो . अचानक शुजात को शरारत सूझी. उसने झंकार को अपनी बांहों में भरा और बाथ टब में छलांग लगादी. इसके बाद प्रणय क्रीडा का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला शुरू हो गया. झंकार भी उसके ऊपर पानी फेंकने लगी थी. दोनों खूब हंस रहे थे. शुजात तो पेट पकड़-पकड़कर हंस रहा था. आखिर उसने झंकार की आशा के अनुरूप कार्य को अंजाम जों दिया था. वह क्या जानती थी शुजात उसे इस तरह टब में गिरा देगा . वह तो उसे सचमुच मासूम समझ बैठी थी. जब हंसी थमी तो शुजात ने उसे पूछ लिया-
-कहो किसी रही मेरी जान . मजा आया न. कहीं लगी तो नहीं ? मुझे तो इतना आनंद आया है हंसी रुकने का नाम ही नहीं लेती. तुमने तो सोचा होगा किमैं अब तुमसे ही सीखूंगा मुझे तो कुछ ज्ञान है नहीं .अरे बाबा मैं कभी किसी लड़की के साथ भले ही नहीं नहाया मगर अकेला तो रोजाना नहाता ही हूना. मेरे लिए यह बाथ टब भी नया नहीं है.
झंकार- समझ गयी , छुपे रुस्तम हो , अब मुझे ज्यादा सताना मत . वरना मैं यहाँ से निकल जाउंगी .
यह बात झंकार ने इतनी अदा से कही थी कि शुजात का दिल फ़ौरन मचल गया. उसने झंकार के सीने से सटी हिमालय की चोटियों को सहलाना शुरू कर दिया. झंकार ने पहले तो थोडा सा विरोध किया मगर जल्द ही उससे चिपक गयी. अब दोनों के जिस्म आपस में चिपके हुए थे. वे एक दूजे से सटकर प्यार का इजहार कर रहे थे. धीरे-धीरे शुजात ने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए . पानी में ही आग की लपटें उठने लगीं. दोनों के शरीर सुलगने को बेताब थे. ऐसा लगात था जैसे कुछ देर तक अगर यही हालत रही तो वे दोनों बहुत जल्द बम की तरह फट जायेंगे . बेचैनी का आलम ये था कि खुद झंकार उसके हाथ को पकड़कर अपनी दूसरी गोलाई पर रखने लगी ताकि शुजात भी उसका अनुसरण कर सके.शुजात ठहरा उस्तादो का उस्ताद . उसे तो ऐसे अवसरों की तलाश रहती थी. मौक़ा मिलते ही वह झंकार पर भूखे भेडीये की तरह टूट पड़ा. पानी के अंदर प्यार का नजारा बेहद खूबसूरत था. झंकार और शुजात युवा के साथ -साथ बेहद सुन्दर थे. उन दोनों के बदन काम वासना के आग में झुलसने लगे. शुजात ने कहा-
तुम्हें देखकर वो गीत याद आ रहा है - समुन्दर में नहाकर और भी नमकीन हो गयी हो . एक तो पहले से ही कयाम थी अब और भी महा क़यामत हो गयी हो. नजर न लगे किसीकी.












Monday, July 26, 2010

भाग -७६

झंकार न जब शुजात के शब्द सुने तो मन बाग़-बाग़ हो गया। इरादे और भी मजबूत होने लगे। मन में जो खुराफाती विचार चल रहे थे अब वे उनमे भी दम आने लगा। आत्मविश्वाश बढ़ने लगा। अब उसका यह भरोसा और भी बढ़ने लगा था कि वह शुजात का दिल जीत चुकी है, और उससे मोहब्बत की आड़ में अपना कोई भी काम करवा सकती है। उल्लू सीधा करने के मामले में वैसे तो कोई पीछे नहीं रहता। मगर बार में काम करने वाली लड़कियों को इसमें विशेष महारत हासिल होती है , उसमे भी अगर वह लडकी खूबसूरत और जवान हो तो कहने ही क्या ? झंकार में वे सब खूबोयाँ मौजूद थीं। वह इतनी ज्यादा मादक दिखती थी कि देखने वाला उसकी अदाओं पर फ़िदा हुए बिना नहीं रहता था। शुजात की बातों से तो यह स्पष्ट भी हो गया था कि झनकार अपने मब्न्सूबों में कामयाब होने वाली थी। उसे अब फ़िक्र नहीं थी फिर भी मीठी आवाज में शुजात को जवाब देते हुए बोली-
- अब मैं इसमें क्या कह सकती हूँ, सिवाय इसके कि यह मेरा सौभाग्य ही है जो आप जैसा चाहने वाला मिला, वरना आजकल आप जैसे प्यार करने वाले मिलते ही कहाँ हैं। उनके लिए प्यार का अर्थ कुछ नहीं होता। उन्हें सिर्फ जिस्म चाहिए। खाओ, खुजाओ बत्ती बुझाओ वाला हिसाब -किताब। ऐसे ही लोगों का काम वासना का पुजारी कहा जाता है , जो औरत के जिस्म को सिर्फ एक भोग विलास की वस्तु ही समझते हैं, नारी का ह्रदय बहुत कोमल होता है । वह झुक जाए तो अपनी जान भी दे दे और अगर उठ जाए तो सामने वाले की गर्दन भी उड़ा डाले। मैं आज आप पर अप दिलो जान न्यौछावर करती हूँ। अपने आपको हमेशा-हमेशा के लिए आपको समर्पित करती हूँ। देखो ये सर आपके क़दमों में रख छोड़ा है ।
यह वाक्य ऐसा था जो शुजात को सुना जैसा लगता था। जैसा कि किसी फिल्म में सुना हो या किसी उपन्यास में पढ़ा हो, इसके बावजूद भी शुजात को यह बुरा नहीं लगा था। उसकी आत्मा भी अन्दर से हिलकर रह गयी। जज्बात भड़कने लगे। उसकी इच्छा हूई कि अगर उसके पास आज दुनिया की कितनी भी जायदाद होती तो वह सबको झंकार की झोली में दाल देता। आज शुजात अपने आपको बहुत गरीब, दीं -हीन और झंकार को दुनिया की सबसे अमीर समझ रहा था। इसके बावजूद उसको इतनी तसल्ली तो थी ही कि जो झंकार हुस्न की मलिका है , जो दुनिया की सुन्दर नव यौवना है , वह किसी और की नहीं बल्कि उसकी अपनी है। सिर्फ उसकी । इस लिहाज से तो वह संसार का सबसे खुशनसीब और सबसे मालामाल इंसान हुआ। यह सोचते-सोचते उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी। झंकार तो पहले से ही खुश थी। उसे खुश देखकर बोली-
- क्या सोच रहे हो मेरी जान ? लगता कहीं दूर खो गए हो ?
शुअजत - नहीं यार, सोच रहा था कि जितना खूबसूरत तुम्हारा चेहरा है, बदन है सोच है उससे कहीं बेहतर तुम्हारे बोलने का अंदाज है। एक -एक शब्द दिल की गहराइयों में उतरता चलाजाता है।
झंकार- मेरी तारीफ़ कर रहे हो या मुझे शर्मिन्दा करने का इरादा है ? अरे बाप रे ये क्या , दोपहर के १२ बज गए हैं , और हम लोग यहाँ लेते पड़े हैं,। नहा धोकर कम से कम फ्रेश तो हो जाएँ, नाश्ता -वाश्ता करके फिर से बातचीत का सिलसिला आगे बढाते हैं। वैसे तो अब सीधा खाना खाना ही बेहतर होगा। तभी बातें करते हैं । चलो आज मैं आपको अपने हाथों से नहलाती हूँ। जानती हूँ तुम्हारा मूड रोमांटिक हो रहा है मगर वहां पर तो और भी रोमांस के चांस मिलेंगे। खूब मजा आएगा।

Sunday, July 25, 2010

भाग-७५ , झंकार न एक कातिल अंगड़ाई ली। अपनी बांहों का घेरा शुजात के गले में डालकरबोली-
- गुड मोर्निंग जान। क्या बात है । सुबह -सुबह ही मूड आ गया क्या ? कुछ नीयत साफ़ नजर नहीं आती ।
शुजात- जब तुम हो ही इतनी खूबसूरत , तो किस कमबख्त का मन नहीं चाहेगा ? और ऊपर से तुम बिलकुल नग्न हो, तुम्हारे अंग-अंग से शोले बरस रहे हैं, क़यामत टपक रही है। इतना सुन्दर बदन इस तरह खुला रखोगी तो अच्छे अच्छे साधुओं के दिल भी मचल सकते हैं, मैं तो फिर भी एक आम इंसान हूँ। मैं तो पापी किस्म का हूँ। शौक़ीन हूँ, रंगीन मिजाज हूँ। मेरा वश चले तो तुम्हें हमेशा अपने साथ ही रख लूं।
झंकार- इनकार किसने किया है। इस बदन पर तो तुमने रात भर मुहर लगाई हैं, अब यह आपका हुआ । दिन हो या रात , इससे क्या फर्क पड़ता है । मैं आपके साथ हूँ, हर कदम पर। हर पल ।
शुजात -तो क्या आज छुट्टी मारने का इरादा है ? घर में तुम्हारे सिवाय और कौन -कौन रहते हैं ?
झंकार -बताया तो था।कई लड़कियां जोइंट रहती हैं। घरवाले सब गाँव में हैं। हम लोगों की कमाई इतनी नहीं होती कि अपने परिवार वालों को अपने साथ रखें या फिर अकेले घर लेकर रह सकें और उसका खर्चा वहां करसकें ।
मैं तो वैसे भी एक मामूली सी वेटर हूँ। जो डांसर हैं वे थोडा बहुत कमा लेती हैं। उनको एक्स्ट्रा टिप्स भी ,इल जाती है। या फिर जो लड़कियां सुन्दर हैं और बाहर जाती हैं, उन्हें भी अच्छा खासा टिप्स मिल जाता है। क्योंकि उसकी फीस तो बार मालिक ही ले लेता है । हाँ, बाहर जाकर उसे ग्राहक क्या देता है, इसकी किसीको कोई खबर नहीं होती। जैसे आब मैं तुम्हारे साथ आई हूँ , तो फीस आपने काउंटर पर जमा करदी । अब आप खुश होकर मुझे जो भी देंगे , वो मेरा अपना होगा। उसमे होटल का कोई हिस्सा नहीं होता है। मैं तो पहली और आख़िरी बार आपके साथ ही आई हूँ इसलिए बहार से किसी आमदनी का कोई सवाल ही नहीं उठाता , आपने दस-बीस हजार दिए तो ठीक नहीं दिए तो भी ठीक । बात सिर्फ पैसों की भी नहीं होती। पहली ही रात में आपने मुझे जो प्यार और सम्मान दिया मेरे लिए वही सब कुछ है । दस-बीस छोडिये , यदि आप लाख-दो लाख भी देते हैं तो कुछ होने वाला नहीं है। पैसे तो खर्च हो जायेंगे। आजकल मंहगाई इतनी है कि इतने में तो दो चार ही अच्छी साड़ियाँ आयेंगी। मगर प्यार हमेशा अमर रहेगा। मैं तो प्रेम की भूखी हूँ। सच्चा प्यार बहुत मुश्किल से मिलता है । दुनिया में हर चीज खरीदी जा सकती है , मगर सच्चा प्यार नहीं । यह कुदरत का वो तौहफा है जो हर किसी को नहीं मिल पाटा। जो नसीब में बहुत अच्छा लिखवाकर लाता है, उसीको यह मिलता है।
शुजात- बहुत सही बात कही है तुमने , प्यार से बड़ा कोई नहीं। और यह भी अच्छा किया कि बता दिया, तुम्हें सिर्फ टिप्स ही मिलता है। खरीदारी का भी ध्यान दिलवा दिया। आज कहीं घुमते फिरते हैं। शोपिंग करते हैं। चलो मैं भी छुट्टी मार देता हूँ। एक साथ रहेंगे तो एक दुसरे के विचारों से भी परिचित हो जायेंगे। मन ठीक से भर नहीं पाया है। वैउसे यह तो भरेगा भी नहीं।, मगर थोड़ी सी तसल्ली तो हो ही जाएगा। ये तो कुछ ऐसा हाल हो रहा है। मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की, मैं इस जिस्म में लगी आग को जितना बुझाने का प्रयत्न करता हूँ यह उतनी ही भड़क जाती है। ऐसा मेरे साथ ही हो रहा है या होता ही ऐसे है। लेकिन अगर ऐसा दस्तूर होता तो पहले भी मेरे साथ ऐसा अनुभव हुआ होता। कई और लड़कियों के साथ भी मैंने इस तरह की रंगीन रातें बिताई हैं। तब तो ऐसा कुछ एहसास हुआ नहीं।

Saturday, July 24, 2010

भाग-७४ , इस वक्त शुजात भी इसी पोजीशन में था , हुस्न की मलिका झंकार ने उस पर ऐसा जादू कर डाला कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गया.
झंकार को रति क्रीडा म चखा हो, अन का स्वादे माहिर थी . उसे यह अच्छी तरह से पता था कि किस तरह किसी मर्द को बिस्तर पर दीवाना बनाया जाता है और कैसे उसे अपना गुलाम
बनाया जा सकता है . शुजात पर भी उसने वही टोटके आजमाये थे. जैसे शुजात कहता गया वह ठीक उसू तरह करती गयी . यह काम एक पेशेवर औरत हे कर
सकती है , क्योंकि घरेलू औरत हमेशा एक मर्यादा में रहकर ही काम क्रीडा करती है , उसे हमेशा इस बात का ख़याल रहता है कि एक हद से आगे कभी नहीं बढ़ना
चाहिए क्योंकि अगले दिन उसे अपने पति से नजरें भी तो मिलानी होती हैं. जबकि पेशेवर महिला की आँखों की आंखों की शर्म मर चुकी होती है , तभी तो उसे किसी
बात की कोई फ़िक्र नहीं होती. मर्दों को ऐसी औरत इसीलिए पसंद आ जाती हैं क्योंकि वे खुशामद नहीं करवातीं, अपने आप अपने वस्त्रों को उतार फेकती हैं. जों चाहो
करने के लिए खुद ही उतावली हो जाती हैं. और कुछ काम तो ऐसे कर बैठती हैं, जैसा कि ब्लू फिल्मों में दिखाया जाता है. ब्लू फिल्म की हीरोइन जिस तरह से अपने हीरो
के खास अंगों को चूमती है, दीर्घ चुम्बन लेती है, पेशेवर महिला ही यह सब कर सकती है. झंकार ने शुजात के साथ यही सब किया था और उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया
था. उस अपार सुख को पाकर वह निहाल हो गया था. ऐसा नहीं है कि शुजात ने भी पहली बार महिला बदन का स्वाद चखा हो, इससे पहले भी व अक्सर आनंद लूटता रहता
था मगर झंकार के साथ काम क्रीडा का सुख लूटा तो वह इतना खुश हुआ कि झंकार के अरमानों को भी पर लगने लगे. वह तो हमेशा इसी तरह के शिकार की तलाश में
रहती थी.जुबैद को सब पता था. इसके बावजूद भी अगर उसने बार से आते समय कुछ नहीं बोला तो उसके पीछे राज यह था कि भले ही शुअजत के उस पर एहसान थे, वह
उसका मित्र भी था, लेकिन इस सबसे पहले वह व्यवसाई भी था. उसको व्यापार करना अच्च्ची तरह आता था. वह जानता था कि झंकार जों भी कमाकर लेकर आयेगी , उसमे
से वह तो सिर्फ थोड़ा सा ही हिस्सा लेगी , बाकी सब तो उसीके हिस्से में आना था . और जुबैद की नजर में पैसे बहुत अहमियत रखते थे . अगर ऐसा नहीं होता तो और भी
बहुत से काम थे, जिनेहं वह अंजाम दे सकता था. अगर उसने अप्रत्यक्ष रूप से जिस्म बेचने का काम शुरू किया था , तो उसके पीछे कम समय में ज्यादा दौलत कमाने का
ही ख़याल था. और जों आदमी दौलत का दीवाना हो जाता है , उसके लिए रिश्ते नाते बहुत ज्यादा मायने नहीं रखते . शुजात इस सबसे बेखबर होकर सो गया. झंकार ने उसके बदन
की प्यास को ठीक तरह से बुझा दिया था. तृप्त होकत वह अबोध बालक की तरह सो रहा था. झंकार आने वाले समय के बारे में सोच रही थी. वह सोचती थी कि अगर शुजात जैसे
दो ग्राहक भी उसे मिल जाएँ तो महीने भर रात काली करने की जरूरत न पड़े. बस उन कुछ को ही खुश करती रहे और उन्ही से कुछ महीनों में ही मालामाल हो जाए . उसे फिर
किसी दुसरे के होटल में काम करने की जरूरत ही न पड़े. शुअजत ने उसको कई तरह के रंगीन ख़्वाब दिखाए थे. वह उन्हीं ख्यालों में खोये हुए आगे के बारे में सोच रही थी ।
अगले दिन जब शुजात की आँख खुली तो दिन काफी चढ चुका था , उसकी गर्दन में दर्द सा महसूस हो रहा था । झंकार उसकी बगल में नग्न अवस्था में लेटी हुई थी। शुअजत ने उसके होठों पर एक दीर्घ चुम्बन ले लिया।

Friday, July 23, 2010

bhaag - aaj , friday , 23 july

अगर कोई चीज दिल को ज्यादा अच्छी लग जाए तो आदमी उछल पड़ता है . यही हाल तो शुजात और झंकार का था. हर एक द्रश्य को देखकर वे ऐसे उछल जाते थे जैसे
उन्होंने किसी काले नाग को देख लिया हो , और वह विषधर उन्हें डसने आने वाला हो . जों फिल्म इस समय उन्होंने चला रखी थी , वह पूरी तरह से तो एडल्ट नहीं थी
मगर उसकी प्रस्तुती इतने अच्छे ढंग से की गयी थी कि उसके सामने ब्लू फिल्म भी फेल थी. शुजात ने बीकह ने ही टोकते हुए कहा-
-कैसा रहा यह आइटम ? तुम्हारी तो तबियत ही फडक उठी होगी या फिर ऐसे ही है ? मुझे लगता है ऐसी सुन्दर फिल्मतुमने कभी नहीं देखी होगी . जों ब्लू फ़िल्में होती
हैं, वे देखते समय तो अच्छी लगती हैं मगर बाद में जी मचलने लगता है, उसका हीरो कई ऐसे काम कर्ता है कि बाद में उल्टी सी होने लगती हैं. हीरो ही क्यों, हीरोइन भी
तो ऐसे ही करती हैं, वे ऐसी -असी जगह पर चाटती रहती हैं कि बस पूछो मत , मगर इसमें ऐसा नहीं है . यह फिल्म टा ऐसी है कि बस देखते जाओ , देखते ही रहो . मन
प्रसन्न हो जाता है . शरीर का अंग -अंग खुश हो जाता है . मन में प्रेम की बांसुरी सी बजने लगती है . तुम कैसा महसूस करती हो ?
झंकार - आपसे सहमत हूँ. मैंने भी इंटरनेट पर कुछ फिल्मे देखी हैं , मगर वे सिर्फ क्षणिक फायदा ही देती हैं , थोड़ी देर में ही उनसे मन ऊब जाता है . एक ही तरह का लुत्फ़ होता
है . उसके बाद सब एक जैस अही लगने लगता है . बिलकुल अजीब सा. एक ही तरह के अंग . एक ही तरह के एक्शन . सिर्फ चेहरे बदल जाते हैं. उनमे वो बात नहीं जितनी
कि इस फिल्म में है. यह फिल्म हमें प्यार सिखाती है, प्यार करने के तरीके सिखाती है. शारीरिक संबंधों से कितना नुक्सान होता है और कैसे उस नुक्सान को ताला जा सकता है,
यह भी सिखाती है . रोमांस और सेक्स के बारे में सिखाती है . मैंने ऐसी शिक्षापरक फिल्म पहले कभी नहीं देखी .
शुजात- हाँ, यार . जों ऐसी सीडी बनाता है , मैं उससे परिचित हूँ. उसीने मुझे यह फिल्म गिफ्ट की थी . यह कहते हुए कि इससे बेहतर मुझे कहीं नहीं मिलेगी . देखो न यही एक फिल्म है जों
रिश्ता बनाना और फिर उन्हें कैसे निभाया जाए , यह बताती है . हीरो भी मस्त . हीरोइन भी ओरीजनल और यहाँ तक कि हम और तुम भी मस्त
झंकार - तभी तो आज मैंने ऐसा गोल्डन समय बिताया है , जिसे कभी नहीं भुला जा सकता. ना जी ते जी और न ही मरने के बाद .
शुजात- फ़िक्र न कर यार , अब तो हम इसी तरह से रोजाना हसीन वक्त बिताया करेंगे .
शुजात अपनी ही धुन मे जज्बाती वाक्य बोलता जा रहा था और झंकार मन ही मन मुस्करा रही थी, वह सोच रही थी कि बकरा अच्छा मिल गया है . वह उसका फायदा उठाकर अब अपना खुद का बार चालू करने
अब वह अपना खुद का बार चालू करने का सपना पूरा कर सकती थी. एक महीने ,में ही वह लाखों वसूल सकती थी. उसके हाथ में शुजात के रूप में
सोने के अंडे देने वालो मुर्गी जों लग चुकी थी . शुजात पैसे वाला तो था ही , साथ ही रसूख वाला भी था. वह कई सालों से जिस्म बेचने के धंधे
में अपने नाम का झंडा गाडे हुए थी. मगर उसने फिगर को ऐसे मेंटेन किया था कि कोई भी उसको १६ -१७ से ज्यादा की माने को तैयार नहीं होता
था. खुद शुजात भी सोच रहा था कि उसने झंकार के साथ सुहागरात बिताई है. शराब के नशे में और उसकी सुंदरता के नशे में वह सचमुच अपने होश
खो बैठा था. वह उसका दीवाना हो चूका था . औरत और मर्द के बीच एकांत के कुछ ऐसे क्षण भी आते हैं जब मर्द भावुक होकर किसी भी हद तक
तक गिर या उठ सकता है . यहाँ तक कि वह अपने पार्टनर के पैरों में गिर सकता , अपनी नाक तक रगद सकता है . उस पर अपने जान
न्यौछावर कर सकता है या फिर उसकी जान भी ले सकता है .

Thursday, July 22, 2010

भाग-७३

पति-पत्‍नी के बीच गहरे संबंधों में चरम सीमा की काफी अधिक भूमिका होती है। काम क्रीडा का सही अनुभव तभी हो पाता है जब दोनों प्रेम के आलिंगन में उस खास मंजिल तक पहुंचे । कई बार ऐसा नहीं होता। दोनों में से कोई एक या फिर दोनों इस की शुरुआत तक करना पसंद नहीं करते। ऐसा होने पर दोनों की रातें खराब होने लगती हैं। या फिर चाह कर भी आपको संभोग में वो मज़ा नहीं आ रहा, जो शुरुआती दिनों में आता था।

शुजात - मेरी राय भी तुमसे जुदा नहीं है . मगर अब हमको इस फिल्म के हीरो की राय भी जान लेनी चाहिए . फिल्म शुरू हो चुकी है . यह कलाकार भले ही सामान्य कद काठी का है , लेकिन यार इसका खास अंग तो काले नाग की तरह है . बहुत भयानक है . तुमको तो देखते ही रोमांच का अनुभव हो रहा होगा.
झंकार- क्यो नहीं होगा ? मैं लड़की हूँ . अगर ऐसा द्रश्य देखकर भी मेरी भावनाएं नहीं भडकेंगी तो बेकार है.
शुजात हंसकर रह गया. उसने टी.वी . की आवाज थोड़ी सी तेज करदी. फिल्म की हीरो कह रहा था -
- प्रेम का अंतिम पड़ाव है और साथ खाने से प्रेम बढ़ता है यह सभी जानते हैं। लिहाजा यदि आप सेक्‍स करने के मूड में हैं, और अपनी रातों को गर्म बनाना चाहते हैं ता शुरुआत रात के खाने से करनी होगी। यानी साथ बैठकर डिनर करें उसके बाद फल, आईसक्रीम या कोई मिठाई डाइनिंग टेबल के बजाए बेड पर खाएं। वो भी एक ही प्‍लेट में। असल में आपके प्‍यार की यहीं से शुरुआत होती है।
फोरप्‍ले भी एक कला है। इस कला के माध्‍यम से आप अपने पार्टनर को प्रणय क्रीडा के प्रति उकसाते हैं। यह एक तरह से असली मौज करने का मूड बनाने के लिए किया जाता है। अधिकांश पुरुष व महिलाएं दिन भर की थकान के बाद इस के प्रति उत्‍साह नहीं दिखाते। यहां पर आपका दायित्‍व बनता है कि अपने पार्टनर को सेक्‍स की ओर आकर्षित करें। फोरप्‍ले की शुरुआत अपने पार्टनर को बाहों में भरते हुए करें। उसे पूरी तरह प्‍यार में डूब जाने दें। जब आपको लगे कि वो तन और मन दोनों रूप से आपके पूरी तरह करीब आ चुकी चुका है तब अपने इस जादू की शुरुआत करें। अलग-अलग अंगों पर हाथों से धीरे-धीरे मसाज और चुंबन की प्रक्रिया आपके पार्टनर का मूड बदलकर रख देगी।

आम तौर पर जब पुरुष को यह लगने लगता है कि उसकी पार्टनर मौज मस्ती लिए तैयार है, वो आनंद लेना शुरू कर देता है। सही मायने में यह सही तरीका नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपने पार्टनर के साथ हाथ से शुरुआत करें। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण महिलाओं का सेक्‍स की चरमसीमा तक पहुंचने में देरी है। असल में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में आसानी से मंजिल तक नहीं पहुच पाता, लिहाजा उन्‍हें समय देने के लिए ओरल सेक्‍स एक बेहतरीन उपाए है। ओरल सेक्‍स उस चुंबन के माध्‍यम से किया जाता है, जो होठ से होठ लगाकर किया जाए। चुंबन के दौरान विभिन्‍न अंगों पर धीरे-धीरे मसाज करने से दोनों के तन -मन की आग तेजी से भड़क उठती है।


आम तौर पर इन तीन पड़ावों के बाद संभोग की प्रक्रिया शुरू होने में समय नहीं लगता, लेकिन फिर भी अगर आपको लगे कि आपका पार्टनर संभोग नहीं करना चाहता है तो उसे यह जता दें, कि आप क्‍या चाहते हैं। अपने इस सीक्रेट का खुलासा बेड पर ही करें, खास तौर से पुरुष, क्‍योंकि बिस्‍तर पर जाने से पहले ही अपनी मंशा जता देने पर महिला पार्टनर के रुष्‍ट होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए बेहतरीन आलिंगन के बाद ही अपनी मंशा जाहिर करें।
सेक्‍स का अंतिम पड़ाव संभोग होता है। एक अध्‍ययन के मुताबिक १० मिनट से ज्‍यादा देर का शारीरिक सम्बन्ध उबाऊ होता है। लिहाजा अपने इसी समय में जी भर कर प्‍यार करें। यहां पर पुरुषों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वो खास ड्राइव को रुकने नहीं दे, क्‍योंकि यदि बीच में रुक गए, तो आपकी पार्टनर को चरमसीमा तक पहुंचने में और ज्‍यादा समय लग सकता है। हो सकता है कि वो चरम सीमा तक पहुंचे ही नहीं। वहीं स्त्रियों को इस दौरान प्रेम के अलावा कुछ नहीं सोचना चाहिए। क्‍योंकि दोनों से अलग हटकर एक भी बात आपकी रात को खराब कर सकती है। ऐसी कोई बात मत करें, जिससे आप दोनों के बीच तनाव हो सकता है। पूरी तरह सकारात्‍मक रहने से ही रात बेहतरीन बनती है।

फिल्म के खत्म होने से पहले ही वे दोनों खत्म हो गए. वे चरम सुख की प्राप्ति कर चुके थे. मंजिल पर पहुँचने के बाद शुजात और झंकार के चेहरे खिल गए. यह खेल होता ही ऐसा है , अगर ठीक तरह से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित हो जाएँ और दोनों पार्टनर अगर पूरी तरह से संतुष्ट हो जाएँ तो बात ही क्या ? मजा आ जाता है . तन और मन दोनों खिल जाता है . जिस तरह से मोबाइल की बैटरी चार्ज हो जाती है , उसी तरह से इस खेल को खेलने के बाद जिस्म की बैटरी चार्ज हो जाती है. कुछ लोग ऐसे होते हैं जों हर घड़ी, हर पल जिस्मानी सुख की तलाश में लगे रहते हैं तो कुछ लोग ऐसे होते हैं जों हिसाब से ही काम क्रीडा का मजा लेते हैं. अति करने वाली की तो दुर्गति निश्चित ही है.

Wednesday, July 21, 2010

भाग-७२

शुजात बड़ा होशियार खिलाड़ी था, वह हर काम पूछकर किया करता था जिस कारण उसकी पार्टनर अनजाने में ही उस काम के लिए आग्रह करने लगती थी जैसे उसने एडल्ट फिल्म देखने का पहले झंकार के सामने जिक्र किया और फिर खुद ही झंकार के मुंह से ऐसी फिल्म लगवाने के लिए कहलवा भी लिया.शराब के पैग पर पैग चल रहे थे और झंकार खूब आनंद उठा रही थी. वह न चाहते हुए भी पे रही थी . आज वह खुश थी . शुजात ने उसे अच्छी खासी फीस दी थी, टिप भी मिलेगी ही और सबसे बड़ी अबत ये कि उसने अपनी कंपनी में नौकरी देने का भी वादा कर दिया था. घर देने का भी और उसकी हर मुश्किल दूर करने का भी. शुजात फिल्म चालू कर चूका था. फिल्म गजब की थी. ज्यादा अश्लील सीन नहीं थे मगर जिस्म गर्म हुए बिना नहीं रहता था. एक लव गुरु प्रेम की टिप्स देते हुए कह रहा था हर व्यक्ति का अपना एक दायरा होता है, जिसमें वह किसी को आने नहीं देना चाहता लेकिन जब आप किसी की चाहत में डूबे हों तो इस तरह के दायरे अपने आप सिमटने लगते हैं। दिल चाहता है वो इस दायरे को तोड़कर आपके करीब, बिलकुल करीब आ जाएँ। और उनके मन की बात जानने के लिए आपको इसी दायरे का सहारा लेना है। उनके बिलकुल करीब जाकर उन्हें अनजाने में छूने की कोशिश कीजिए और उनकी प्रतिक्रिया पर गौर करें यदि वो आपको चाहते हैं तो उन्हें आपकी ये हरकत अच्छी लगेगी अन्यथा वे आपसे दूर होने की कोशिश करेंगे।
उनके हावभाव, शारीरिक प्रतिक्रिया आदि पर ध्यान दें। यदि उनके मन में आपके लिए कुछ है तो वो आपको किसी न किसी बहाने छूने की कोशिश करेंगे, आपको देखते ही उनकी आँखों में चमक आ जाएगी, वो हमेशा आपका साथ पाने की कोशिश में लगे रहेंगे। ये ऐसी बातें हैं, जिन पर आप आसानी से उनके दिल की बात जान सकते हैं।
उनकी चाहत के बारे में पता करने का एक और तरीका यह है कि आप किसी न किसी तरह से उनका हाथ अपने हाथों में लेने की कोशिश करें। जैसे यदि उन्हें आपसे कोई चीज चाहिए तो उसे इस तरह से पकड़ें कि वो आपका हाथ पकड़े बगैर उसे ले ही न पाएँ। उनकी प्रतिक्रिया पर गौर करें। यदि वो आपका हाथ पकड़ने से कतराते हैं तो फिर उन्हें पटाने की आपकी कोशिश बेकार है।
किसी रैलिंग या टेबल या कहीं और अपना हाथ उनके हाथ के करीब रखें यदि वो आपको चाहते हैं तो जरूर आपका हाथ छूने की कोशिश करेंगे।
शुजात ने आँख दबाकर पूछा -
- कैसी लगी फिल्म ? मजा आया कि नहीं . यह इसी हफ्ते मार्केट में आयी है . जों बिलकुल अश्लील फिल्म होती हैं वे इतना आनंद नहीं देपातें, उलटा उनसे मूड खराब हो जाता है.मैंने पहले भी कहा था कि अगर उनकी आदत लग गयी तो बहुत बुरा अंजाम होता है .
झंकार- मैं सोचती हूँ कि इंसान को प्रेम करना चाहिए, रोमांस करना चाहिए . जी भर प्रणय क्रीडा का आनंद उठाना चाहिए मगर विकृति कभी नहीं लानी चाहिए . विकृति ठीक नहीं होती .