Tuesday, June 8, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३२

कम्मो- डरा दिया तमने तो उसे , बेचारी क्या सोचती होगी ? क्या कहा उसने ?
शिल्पा- अरे कुछ नहीं, वह भले ही ज्यादा पढ़ी-लिखी थी, बहुत दौलत -शौहरत वाली थी मगर थी एक नंबर की उस्ताद, ये कुछ ऐसे लोग होते हैं जो दिन में समाज के सामने अपने कुछ छवि दिखाते हैं और समाज के बाद कुछ और. किसी ने सफेद्पोश शब्द का इस्तेमाल ऐसे ही लोगों के लिए किया है.
कम्मो- हां, ये बात तो है., उसके बाद क्या-क्या हुआ ?
शिल्पा- वही , जो होना चाहिए था. शराब पीते-पीते ही हम लोगों ने खूब इंजॉय किया. उसने सुख भोगते हुए कहा-
-वह री शिल्पा. अब तक कहाँ थी मेरी बहन ? मै तो बेताब थी तुम जैसी हसीना से मिलने के लिए , तुमने मेरे विचार के साथ-साथ मेरी चोईस भी बदल डाली है. अब जो मजा आया है, उसका क्या बखान करू, तुम तो सहेली भी हो और सजाना भी. दोनों काम बखूबी कर सकती हो.
शिल्पा- मै अपना हाथ, जगन्नाथ वाले सिद्धांत पर भरोसा करती हूँ , जो खेल मै तुम्हारे साथ खेल रही हूँ, इसमें बिना किसी मर्द की सहायता के बड़े आराम से हम कामसुख की प्राप्ति कर सकती हैं. नित नए तरीके अपनाकर इस खेल को और भी ज्यादा मजेदार और प्रभावी बनाया जा सकता है.
- अच्छा , और भी ज्यादा? क्यों मेरी उत्सुकता बढ़ा रही हो यार ?
शिल्पा- सिर्फ उत्सुकता बढाने तक ही सीमित नहीं हूँ, मैंने सोच लिया है कि हर टिप्स सिखाऊँगी तुम्हें .

Monday, June 7, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३१

बड़ी तारीफ कर रही थी , उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव थे. वह कह रही थी-
- वाह शिल्पा, तुम्हारा जिस्म बेहद सुन्दर है , और गाथा हुआ भी . ऐसा लगता है जैसे तुम किसी फिल्म में काम करने वाली हीरोइन हो . सच कहो फिल्मों में काम तो नहीं करतीं शायद तुम जैसी खूबसूरत तो फ़िल्मी दुनिया में भी कोई नहीं होगी , हर अंग आँखों को लुभा रहा है, मेरी तो आँखें हटने का नाम ही नहीं ले रहीं. जी करता है बस देखती रहूँ.
शिल्पा- सिर्फ देखती ही रहोगी या कुछ करोगे भी , आगे भी बहुत कुछ बाकी है. उसे भी तो जानो .
- हाँ, -हाँ अब बिना जाने यहाँ से थोड़े ही जानू दूंगी . मैंने भी अभी तक शादी नहीं की है. मेरे पास सब कुछ होते हुए भी कुछ कमी से थी. अब तुम मिली हो तो यह कमी भी काफी हद तक पूरी होती दिखाई देती है . मै तुम्हें देखने मात्र से और स्पर्श मात्र से ही इतनी उत्तेजित हो चुकी हूँ कि बता नहीं सकती. यह कुछ अलग सा एहसास है. ऐसी मदहोशी ऐसे ही नहीं हो जाती, कुछ खास है तुम्हारे में, कुछ क्या बहुत खास है . मुझे भी इस बेहतरीन फिगर का राज बताओ यार , मै भी जाना चाहूंगी , तुम्हारे जैसी सेक्सी दिखना चाहूंगी .
शिल्पा- जानना चाहती हो ? तो सुनो , मेरी सुंदरता का राज सेक्स है, मै खूब इंजॉय करती हूँ, फर्क इतना सा है कि पुरुषों के साथ नहीं बल्कि अपनी बहनों यानि महिलाओं के साथ मुझे आनंद मिलता है. मै खुद भी सुख भोगती हूँ और अपनी सहेलियों को भी सुख -संतुष्टि के समुन्दर में गोते लगवाती हूँ. इसी कारण कोई तनाव मुझ पर हावी नहीं हो पाटा, चिंता कितनी ही बड़ी क्यों न हो , उसकी दम में ही हवा निकल जाती है. चाहे जो हो मै मस्त रहती हूँ, सुबह नियमित रूप से वर्जित करती हूँ और जो भी मर्जी होती है, वही खाती हूँ, रात को शराब का मजा भी चख लेती हूँ और सिगरेट बस तभी पीती हूँ जबकि मुझे शराब पीनी होती है.
- वैरी गुड यार , बहुत दिलचस्प बातें करती हो . चलो मै एक-एक लार्ज पैग और तैयार करती हूँ. अगर ऐसी बात है तो हम दोनों की खूब जमेगी यार . खूब पियेंगे , खायेंगे मौज करेंगे , बस मुझे शारीरिक सम्बन्ध को लेकर ही परेशानी है,सोचती हूँ कि कहीं से कोई गंभीर बीमारी ना हो जाए, यह अप्राकृतिक है . मै हमेशा अपने लेखों में इसके खिलाफ ही लिखती आयी हूँ. वैसे मैंने आज तक इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया है. और ना ही ऐसा कोई सबूत मेरे पास है जिससे ऐसा लगे कि इस तरह के रिश्ते सेहत के लिए खतरनाक हैं.
शिल्प- मै ज्यादा कुछ नहीं जानती , बस आज ये सिद्ध कर दूंगी कि ऐसे रिश्तों से आनंद कितना आता है डॉक्टर या वैज्ञानिक तो मै भी नहीं हूँ जो ये बता सकूं कि ऐसे सम्बन्ध कितने और क्यों खतरनाक होते हैं.
कम्मो - वाह.. बहुत अच्छा जवाब दिया. फिर क्या बोला उसने ?
शिल्पा- बोलने की फुर्सत किसे थी और सूनने का भी समय नहीं नहीं था. वह तो काम करने का वक्त था . 'काम 'करने का वक्त. सिर्फ और सिर्फ काम में ध्यान था. मैंने शिल्पा के शरीर पर हलकी सी मालिस करने के बाद उसे भीगी तौलिया से पौंछ दिया , बहुत बढ़िया तरीका से . इसके बाद मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया. वह नग्न होने में थोड़ी सी असुविधा महसूस कर रही थी. वह थोड़ी सी मोटी थी इसलिए शायद असहज हो रही थी , मगर जब शराब ने अपना असर दिखाना शुरू किया तो वह भी मान गयी . मैंने उसके यौवन द्वार पर न्हात से दे दी. वह कराहने लगी . उछलने लगी. मुझे भी आनंद आने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख दिया. वह इशारा समझ चुकी थी . उसकी समझ में आ गया था कि उसे क्या करना है , और फिर जल्द ही उसने कार्रवाई करनी भी शुरू करदी , यह बहुत अलग एहसास था. कुछ समय के बाद जब मैंने भी उसके यौवन उभारों का सहलाना चालु किया तो वह खुशी से लगभग चीख पडी. मैंने उसे पूछा -
-कहो अब कैसा महसूस कर रही हो , दुःख लग रहा है कि सुख ?
- जो मजा आ रहा है , बस पूछो मत. चुपचाप कार्रवाई पर अड़ी रहो, मेरे ख़याल से अब हमें जब तक बात नहीं करनी चाहिए तब तक कि हम सुख के सागर में पूरी तरह डूब ना जाएँ . क्या ऐसा संभव है ?
शिल्पा- इस नीली छतरी के नीचे सब कुछ हो सकता है.
-तुम तो ढोंगी , बंगाली बाबाओं की भाषा बोल रही हो .
शिल्पा- कभी उनके चक्कर में ना पढ़ना , वे लोग बाबागीरी के चक्कर में गर्भवती बना डालते हैं. कितनी ही अपनी इज्जत लुटा बैठी हैं, और तो और बाद में ब्लेकमेल करते हैं वो अलग. मजबूर में कोई उनकी शिकायत भी नहीं करना चाहती है.













Sunday, June 6, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३०

हांलाकि तब भी ज्यादा तर लोग यही राय रखते थे कि देश ही नहीं दुनियाभर में काफी कम लोग इसके पक्ष में होंगे, क्योंकि यह हर समाज में अस्वीकार्य है।
प्रकृति ने जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जननांगों की रचना की है, "गे" रिलेशनशिप उससे मेल नहीं खाती। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एचआईवी-एड्स एवं संक्रामक रोग विशेषज्ञ भी बयां दे चुके है कि हमारे देश में यौन विषय को लेकर वैसे ही बहुत अज्ञानता है, ऐसे में "गे" रिलेशनशिप के दौरान सुरक्षित यौन संबंधों की कल्पना करना बेमानी है। इस तरह के संबंधों से संक्रामक रोग होने की आशंकाएँ रहती हैं। अप्राकृतिक यौन प्राथमिकता मानसिक विकृति है, इसे ब़ढ़ावा देने से किसी का भला नहीं होगा। इस तरह सामाजिक ढाँचे की आधारशिला को ही नष्ट करने की बात की जा रही है।
कम्मो- इसके बावजूद तुम अपने निर्णय पर अडिग रहीं ये बड़ी बात है.
शिल्पा- मजे की बात ये है कि बहुत सी ऐसी भी महिलाएं जिदगी में आयीं , जो दिन में तो समलैंगिकता की मुखालफत करती थीं और रात को मेरे साथ मजे भी लेती थीं. ये ऐसी महिलायें होती हैं जो सच के साथ समाज का सामना नहीं कर सकतीं. एक नामचीन महिला ने एक अखबार में लिखा था कि
एक तरफ तो हम भारतीय संस्कृति के परिष्कृत होने की बात करते हैं और दूसरी तरफ पाश्चात्य संस्कृति को तेजी से अपनाते जा रहे हैं। हमारे मू्‌ल्य बदलते जा रहे हैं। हमारे नैतिक मूल्यों पर पाश्चात्य मूल्य भारी प़ड़ते नजर आ रहे हैं। स्पष्ट है कि इसके दूरगामी परिणाम भयावह हैं। इस तरह के निर्णय अनैतिक कार्यों के लिए रास्ता खोलने की तरह है।
हो सकता है भारत के कुछ युवाओं को यह निर्णय काफी खुशी देने वाला हो। फिर भी भारतीय समाज में इस तरह की बातों को कभी अपनाया नहीं जाएगा। इस तरह की विसंगति पाश्चात्य कारणों से हो रही है। पिछले कुछ सालों में समलैंगिकों की संख्या और युवाओं में इस बात के लिए रूझान में काफी इजाफा हुआ है। इस तरह की कानूनन मान्यता मानव समाज, स्वास्थ्य और मानसिकता पर भारी पड़ेगी।
भारतीय समाज में इंसान की मूलभूत जरूरतों के बाद विवाह को बेहद जरूरी माना जाता है।इस तरह का निर्णय मान्य होना भारतीय समाज के विघटन की शुरुआत को दर्शा रहा है। इससे सामाजिक प्रदूषण ब़ढ़ेगा और संस्कृति प्रदूषित हो जाएगी। समलैंगिक संबंधों को मंजूरी मिलने पर विवाह की जरूरत ही खत्म हो जाएगी। परिवार और समाज को आगे बढ़ाने के रास्ते बंद होने लगेंगे। प्रकृति के विपरीत यह काम भारतीय समाज को अंधकार में धकेल देगा, और जब मैंने उनकी वेब साईट के जरिये उनसे संपर्क साधा तो जानती हो क्या हुआ ?
कम्मो- तड़पाओ मत यार जल्दी से बताओ...
शिल्पा- कुछ देर तक वह बतलाती रही , और जब सब लोग लोग चले गए तो उसने मुझे अपने पर्सनल कमरे में बुलाया, उसने मुझे ड्रिंक ऑफर की . काफी देर तक हम पीते रहे, इसी विषय पर बात करते रहे और जब सुरूर सा होने लगा तो मैंने कहा-
-आप इस प्रेम की जिस तरह से खिलाफत करती हैं, क्या यह सच है ? मेरा कहना है कि एक बार आप सम्बन्ध बनाकर देखिये , खूब मजा आ जाएगा . विरोध करने की बजाय आनंद लूटने लगोगी ,.
कम्मो- फिर , उसने भी विरोध किया होगा ?
शिल्पा- नहीं , चुप हो गयी . बोली-
-अच्छा ठीक है मै , इस चुनौती को स्वीकार करती हूँ.
कम्मो- और फिर शुरू हो गया मोहब्बत का रंगीन खेल , है न.
शिल्पा - इतना जल्दी भी नहीं, उसने मुझसे वादा लिया कि अगर मै उसको संतुष्ट नहीं कर पाई तो वह मुझे इस काम को छोड़ने के लिए मजबूर करेगी , और मै उसे मान जाउंगी .
कम्मो- वाह, अब आएगा मजा, तुमने उस पर कोई शर्त नहीं राखी क्या ?
शिल्पा- क्यों नहीं ? मैंने भी कह दिया कि अगर मैंने उसे सुख संतुष्टि दी, एक नहीं तीन बार उसके मुंह से 'आह, मजा आ गया ' नहीं कहलवाया तो मेरा भी नाम नहीं . और जब ऐसा हो जाए तो उसे हमारी सदस्य बनना होगा , इसे उसने स्वीकार भी कर लिया. , इसके बाद मैंने उसकी मालिस करनी शुरू कर दी. धीरे -धीरे मैंने अपने कपडे उतारे, वह मेरा जिस्म देख-देखकर उत्तेजित हो रही थी.












Saturday, June 5, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२९

कम्मो- अच्छा , हाँ -हाँ, बिलकुल ठीक है. अच्छा एक बात का और जवाब दीजिए , जब तुम्हारे करीबियों और परिजनों को पता चला कि तुम सम्लेंगिक हो , तब उन्होंने विरोध तो नहीं किया , मै इसलिए जानना चाहती हूँ ताकि अपने लोगों के बारे में भी अनुमान लगा सकूं कि वे किस तरह से ट्रीट कर सकते हैं .
शिल्पा - कोर्ट को छोड़कर , सबने इसे गलत माना , लोगों ने कहा कि भारतीय समाज को अब तक अपनी परंपरा और संस्कृ‍ति के कारण सबसे ऊँचा मुकाम मिलता आया है। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में दो वयस्कों द्वारा आपसी सहमति से बनाए जाने वाले अप्राकृतिक संबंधों को अपराध नहीं माना है। कोर्ट का कहना है कि यदि दोनों की उम्र 18 वर्ष से अधिक है तो दोनों साथ रह सकते हैं।
कोर्ट द्वारा समलैंगिकता को भले ही अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया हो, लेकिन भारतीय समाज और संस्कृति में इसे कतई स्वीकार नहीं किया गया है. , लेकिन भारतीय समाज और संस्कृति में इसे कतई स्वीकार नहीं करने की बात कही जा रही है। नईदुनिया द्वारा इंदौर के समाजशास्त्री, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, व्यवसायी और विद्यार्थियों से इस बारे में बात की। हर वर्ग द्वारा समलैंगिकता का विरोध किया जा रहा है।
समलैंगिकता बरसों से एक प्रश्न रहा है। कुछ लोग जो इसमें रुचि रखते हैं यह उनके लिए सही है, जबकि भारतीय संस्कृति को मानने वाले के लिए गलत। बड़े -बड़े विद्वानों ने कहा कि भारतीय होकर भी विदेशी संस्कृति को अपनाना गलत है। भले ही हर व्यक्ति को अपने मुताबिक जीवन जीने की इच्छा हो, लेकिन हमें अपनी संस्कृति और परंपरा कभी नहीं भूलना चाहिए। कोर्ट ने भले ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर ध्यान दिया हो, लेकिन भारतीय समाज और संस्कृति में इसके लिए कतई जगह नहीं है।
निश्चित तौर पर समलैंगिकता हर देश के लिए गलत है। कानूनी मान्यता से इन अनैतिक कार्यों को और भी गति मिल जाएगी। लियो क्लब के पूर्व अध्यक्ष वैभव शाह कहते हैं समलैंगिकता भारतीय संस्कृति और परंपराओं के मान से पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है। भले ही इस तरह के कार्यों को कुछ लोग सही मानते हो, और उन्हीं की व्यक्तिगत जरूरतों के कारण समलैंगिकता को मान्यता मिली है, लेकिन इससे होने वाले सामाजिक और पारिवारिक हनन का अंदाजा लगाया जा सकता है
इस तरह के निर्णय सिद्ध करते हैं कि भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति हावी हो रही है। भविष्य में इसके हानिकारक प्रभाव देखने को मिलेंगे। भारत विकास परिषद के उपाध्यक्ष कैलाश खंडेलवाल बताते हैं कि भले ही इस तरह के रिश्तों को कानूनी मान्यता दे दी गई हो, लेकिन भारतीय समाज में इसके लिए कोई जगह नहीं है। न इसे कल स्वीकार किया जाता था और न ही अब किया जाएगा। इस तरह की कल्पना से ही भारतीय संस्कृति को ठेस पहुँचेगी।
भारतीय संस्कृति की पवित्रता की मिसाल दी जाती रही है, लेकिन समलैंगिकता को कानूनन मान्यता मिलने पर संस्कृति खतरे में प़ड़ गई है। आईआईटी स्टूडेंट अंकित जैन कहते हैं कि भारतीय संस्कृति अपने उच्च और परिष्कृत मूल्यों के कारण पहचानी जाती रही है, लेकिन ऐसे निर्णय गौरवशाली इतिहास को क्षति पहुँचाएँगे। समलैंगिकता सदा ही प्रकृति के प्रतिकूल रहेगी और भारतीयों को इसे कभी नहीं अपनाना चाहिए।
समलैंगिकता को मान्यता मिलना भारतीय समाज के हित में नहीं है। यह सामाजिक प्रदूषण है, जो विदेश में रहकर आने वाले लोग फैला रहे हैं। समाजसेविकाओ ने कहा कि इस तरह की गतिविधि की जरूरत भारतीयों को नहीं है। यह सब विदेशी संस्कृति की नकल करने के चक्कर में हो रहा है। इससे स्वास्थ्य और मानसिकता दोनों पर नकारात्मक असर होंगे।
जब भी हम प्रकृति के खिलाफ जाकर कोई काम करने की कोशिश करते हैं तो उसके दुष्परिणाम भोगने प़ड़ते हैं। प्रकृति के विपरित जाना हमेशा हानिकारक होता है। प्रसूति व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति ने कहा समलैंगिकता को भले ही कानूनन अपराध न माना गया हो, लेकिन भारतीय संस्कृति और समाज में इसे हमेशा अपराध की भाँति ही लिया जाएगा। ।
कम्मो- इसके बावजूद तुम अपने निर्णय पर अडिग रहीं , यह बड़ी बात है .
शिल्प- हाँ, वैसे कई बड़ी अभिनेत्रियां तब तक समलेंगिकता के पक्ष में बयां दे चुकी थीं.

Thursday, June 3, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२७

कम्मो- हाँ , और बहुत अच्छी तरह से समझ गयी हूँ, मुझे भरोसा है तुम पर . पूरा भरोसा. फिर भी कहे देती हूँ कि अगर कोई मुझसे भी सुन्दर लड़की मिल जाए तो उसे मत दिल दे देना. उसे मत अपनी बना लेना .
शिल्पा - ओह नो यार , कितनी आयी हैं, कितनी जायंगी . सब दुनिया चलती रहेगी मगर मै तुम्हें छोड़ने वाली नहीं हूँ. बल्कि तुम्हारा कैरियर बनाने और घर बनाने की दिशा में सोच रही हूँ. सब कुछ ठीक ठाक रहा तो तुम ६ से ७ माह में अपने खुद के फ्लेट की मालकिन बन जाओगी . किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी . जितना खर्चा होटल में रहने खाने पर आता है , उतने में तो ई एम् आई भर जाया करेगी . प्यार का मतलब यह कटाई नहीं है कि प्यार के चक्कर में हम सब कुछ भूल जाएँ, बल्कि प्यार का अर्थ मेरी नजर में यह होता है कि रात को तो हम सुकून से प्रणय क्रीडा कर सकें और फिर दिन में हम अपनी तरक्की की बात कर सकें. चौबीसों घंटे इश्क का भूत सवार रहेगा तो जीवन की गाड़ी आगे कैसे बढ़ेगी ?
कम्मो- बहुत सही नजरिया है तुम्हारा. मैंने तुम्हें दोस्त चुनकर जीवन में बहुत बुद्धिमानी का काम किया है. निश्चित रूप से हमारा यह प्यार एक दिन जरूर गुल खिलायेगा , हम लोग जरूर प्यार के रिश्ते से कुछ सार्थक तत्व निकालेंगे .
शिल्पा- हां , बिलकुल सही बात है . मेरी कोशिश यही रहती है कि प्यार में कुछ ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे मनोरोग की झलक मितली हो, यानि अप्राकृतिक होते हुए भी अपने दिल को गलत नहीं लगना चाहिए , यह सब तन औत मन की शुद्धि के लिए होना चाहिए. जैसा प्यार हम दोनों करते हैं , इतना तक तो ठीक है मगर इससे आगे बढ़ना, इससे आगे गिर जाना ठीक नहीं . तुम्हारा क्या मानना है ?
कम्मो- हाँ , इतना तक कोई दिक्कत नहीं है. हम दोनों के शरीर धुले हुए हिते हैं, अहम लोग अपने प्रत्येक अंग को सही तरीके से धुलते हैं. तब जाकर प्रेम करते हैं. तो इस तरह बींमार नहीं होते , हाँ जब महीने के कुछ खास दिन आते हैं, उस समय पर हमको यह खेल नहीं खेलना चाहिए. तब के लिए यह निषेध है .
शिल्पा- तब तो हमें वैसे भी अच्छा नहीं लगेगा. मन भी कहाँ करता है .
कम्मो- कल का क्या प्रोग्राम है ? कुछ खास करने वाली हो ?
शिल्पा- हाँ, कल कुछ ऐसी लड़कियों से मिलाने वाली हूँ जो हमारे इस संगठन की सदस्य हैं और आराम से आपस में ही प्यार करके सुख -संतुष्टि लूट रही हैं.
कम्मो - तो उनके साथ ग्रुप सेक्स की चर्चा कर रही थी न ?
शिल्पा- अरे हाँ बाबा, टेंशन क्यों लेती हो . सब हो जाएगा , मगर उससे पहले तुम्हें मेरे ऑफिस चलना होगा , वहां पर हम दोनों मिलकर अपने बोस से तुम्हारी जॉब की बात करेंगे , मगर बोस से ज़रा बचकर रहना है . दिलफेंक टाइप का इंसान है, फंसाने की बात करेगा . सिर्फ फायदा उठाना , बाकी भाव मत देना . मर्दों के बारे यह भी एक सीक्रेट है कि उन्हें जितना लिफ्ट दोगी , ये तुम पर उतना ही कम ध्यान देंगे , और इनको जितना भी नजरअंदाज करोगी ये उतना ही तुम्हारे पीछे -पीछे भागेंगे . उस स्थिति में ये लोग अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लेते हैं. सोचते हैं कि अब तो इसे खाकर ही दम लूंगा . इनको अगर मूर्ख बनाना है , इनसे अपना काम निकलवाना है तो बस इन्हें इग्नोर करो. बाद में धमाका कर दो कि तुम किसी दूसरे को चाहती हो . यह तो बिउल्कुल लास्ट की बात है . उस स्टेज पर जब कोई चारा ही न रहे , जब कोई रास्ता ही न बचे.
कम्मो- अच्छा , जी . सब कुछ जानकारी है . समझ गयी . तो तुम्हारा बोस रसिया टाइप का है ?
शिल्पा- हाँ , चाहो तो मंहगे -मंहगे होटलों में खाना खिलवा सकता है. डिस्को में लेकर जा सकता है, प्रमोशन भो कर सकता, सब कुछ कर सकता है बशर्ते कि तुम उसको खुश कर सको.
कम्मो- तो क्या तुम्हारे सामने उसने डिमांड नहीं राखी थी ?
शिल्पा- क्यों नहीं रखता ,और क्या बता रही हूँ तुम्हें , वही सब तो कह रही हूँ और यह भी बता रही हूँ कि मैंने उससे छुटकारा पाने के लिए क्या रास्ता अपनाया था.
कम्मो- ठीक है , अब मै सब कुछ जान गयी हूँ, कल सब कुछ संभाल लूंगी मेरी जान.

Wednesday, June 2, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२६

शिल्पा- हाँ कम्मो , मै तुमसे बहुत प्रेम करने लगी हूँ मेरी जान. प्रेम के सम्बन्ध में मैंने सुना है कि प्रेम किसी एक व्यक्ति से हमारे संबंधों का नाम नहीं है, यह एक दृष्टिकोण है, एक चारित्रिक रुझान है जो किसी व्यक्ति के साथ-साथ पूरी दुनिया से हमारे संबंधों को अभिव्यक्त करता है। वह केवल एक लक्ष्य और उसके साथ के संबंधों का नाम नहीं है। यदि एक व्यक्ति केवल दूसरे एक व्यक्ति से प्रेम करता है और अन्य सभी व्यक्तियों में उसकी रुचि नहीं है, तो उसका प्रेम, प्रेम न होकर उसके अहं का विस्तार मात्र है। फिर भी ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि प्रेम एक 'लक्ष्य' है न कि एक 'क्षमता'।

वे समझते हैं कि भूल भी करते हैं कि यदि वे केवल अपने 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' से ही प्रेम करते हैं, तो यह उनके प्रेम की गहराई का प्रतीक है। इसका मतलब है कि वे प्रेम को एक गतिविधि के रूप में, 'आत्मा की एक शक्ति' के रूप में नहीं देखते।

उन्हें लगता है कि एक 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' होने का अर्थ है 'प्रेम' को पा लेना। यह बिलकुल वैसी ही बात है, जैसे कोई व्यक्ति चित्रकारी करना चाहता है और समझे कि उसे केवल एक प्रेरक विषय की जरूरत है, जिसके मिल जाने पर वह स्वत: ही बढ़िया चित्रकारी कर लेगा। अगर मैं किसी एक व्यक्ति से सचमुच प्रेम करता हूँ तो मैं सभी व्यक्तियों से प्रेम करता हूँ। किसी से 'मैं तुम्हें प्यार करने का सच्चा अर्थ' यह है कि 'मैं उसके माध्यम से पूरी दुनिया और पूरी जिंदगी से प्यार करता हूँ।
कम्मो- वाह , कहने वाले ने बहुत बढ़िया बात कहदी है , मजा आ गया. यह तो एकदम अलग सी परिभाषा है .
यह धारणा भी कितनी गलत है कि जोड़े स्वर्ग में तय होते हैं। 'रहस्य' और 'मनोविज्ञान' को जो जानते हैं वे तो शायद ऐसा नहीं कहेंगे। शादी के बारे में आमतौर पर कहा जाता हो कि यह एक ऐसा लड्डू है जिसे खाने वाला भी पछताता है और न खाने वाला भी। समझदार व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी कहावत पर शायद ही विश्वास करें।

किसी भी व्यक्ति में किसी भी व्यक्ति के प्रति छह माह में प्यार जगाया जा सकता है। इसका यह मतलब हुआ कि प्यार होता नहीं किया जाता है।
कुछ डॉ. अपने शोध के आधार पर कहते हैं कि प्यार एक बीमारी है और इस बीमारी का इलाज है सिर्फ सेक्स। यदि प्रेम के इजहार का मौका नहीं मिलता तो बीमारी और बढ़ जाती है, हो सकता है कि वे गुस्सा, अवसाद या किसी अन्य मानसिक रोग से ग्रस्त हो जाएँ। इसे 'लव सिकनेस' कहते हैं।
मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता।
खैर यह तो बात प्यार के इजहार से जुड़ी है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इजहार कर ही दिया तो फिर नया खेल शुरू होता है जो कुछ दिन तक तो अच्छे अहसास के साथ चलता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसमें टेंशन पैदा होने लगता है।

बेवफाई का डर ‍भीतर ही भीतर सालता रहता है। यदि प्यार में बेवफाई का सामना करना पड़े तो फिर दिल के दौरे की संभावना बढ़ सकती है बशर्ते कि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से कितने जुड़े हैं यह इस पर तय होता है।
तमाम शोध और तमाम बेवकूफी भरे वाक्य प्यार की ताकत को झुठला नहीं सकते और ना ही उसे सेक्स से जोड़ सकते हैं। सेक्स आपके जीवन का अहम हिस्सा हो सकता है, लेकिन प्यार का स्थान उससे कहीं ऊँचा है। मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता. और इससे यह सिद्ध होता है कि हमारा प्यार कभी कम नहीं होगा क्योंकि हमने सच्चा प्यार किया है .
शिल्पा- हाँ, इसमें कोई दो राय नहीं है . बिलकुल सत्य बात है . अब तुम भी मेरे इस गणित को समझ गयी हो . पहले शायद तुम्हें कुछ हिचक होगी मगर अब जान गयी ना कि हमारी दोस्ती की नीव कितनी मजबूत है .

Tuesday, June 1, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२५

शिल्पा- तुम्हारा साथ , ये प्यार पाकर मै बहुत खुश हूँ. लगता है जैसे आसमान में उडती चली जा रही हूँ.
कम्मो - और मै भी तो बेहद खुश हूँ, तुमसे और तुम्हारे इस खास प्यार से, तुमने तो मेरा नजरिया ही बदल दिया है , जीने का रंग -ढंग भी बदल दिया है . अब मेरी सोच भी बदल चुकी है .
शिल्पा- क्या अब भी कुछ सुनना चाहोगी ? या फ्री कहीं चलें , वैसे अभी काफी समय बाकी है .
कम्मो- तो फिर गुप्त रोगों के डॉक्टर सुरेश की कोई नसीहत सुनाइये .
कम्मो- उसने पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में कहा था कि पत्नी के दर्द को महसूस करना, उसके दर्द से रिश्ता बनाना और दूर जाने का कारण जानना सुखद सेक्स के लिए बहुत ही जरूरी है। ज्यादातर पुरूष सिर्फ पत्नी के शरीर से ही मतलब रखते हैं। पत्नी को क्या तकलीफ है और वह क्यों सेक्स लाइफ में रूची नहीं ले पा रही है अगर पति यह जानने की कोशिश करता है तो पत्नी मूड होने या न होने बारे में नहीं सोचती। अपने साथी के दर्द को जानने की कोशिश करें, उसके दर्द से रिश्ता जोडने की कोशिश करें।
जब तक दर्द से रिश्ता नहीं होगा, आपस का प्यार भी गहरा नहीं होगा। जब आप पत्नी के दर्द को उसकी तकलीफ को नजरअंदाज करेंगे तो उसके मन में आपके प्रति विद्रोह की भावना प्रबल होगी। पत्नी की नजरों में आप निर्दयी और स्वार्थी बन जाएंगे। अपने साथी के दर्द और तकलीफ के प्रति संवेदना व्यक्त करें। इससे दर्द तो कम नहीं होगा लेकिन संवेदना व्यक्त करने वाले के प्रति मन में प्यार उमडता है। तब वह दर्द को भूलकर आपके प्यार को महत्तव देंगी। इसलिए अपनी पत्नी के हमदर्द बनें।
जीवन साथी को हमराही, हमदर्द, हमसफर न जाने कितने ही ऎसे नामों से पुकारा जाता है। इन नामों का अपना अर्थ और महत्तव है। लेकिन अधिकाशं पुरूष सिर्फ पति ही बनकर रह जाते हैं। हमदर्द या हमराही नहीं बन पाते। जब आप एक दूसरे के दर्द को समझेंगे तो आपका प्यार जवां होगा और आप अपने जीवन साथी के और भी करीब आ जाएंगे। दांपत्य जीवन में प्यार का होना उतना ही जरूरी है जितना वैचारिक तालमेल का होना। वैचारिक तालमेल होने पर पति-पत्नी एक दूसरे के दर्द को तुरंत समझ लेते हैं और एक दूसरे के दर्द को दूर करने कीकोशिश करते हैं। यदि आप अपने साथी के दर्द को नहीं समझते और उसे नजरअंदाज करते हैं तो वह भी आपका सगा नहीं हो पाएगा और एक दिन आपका साथी आपको छोडकर उस व्यक्ति से नाता जोड लेगा जो उसका हमदर्द साबित होगा। दर्द जीवन का एक अह्म हिस्सा है और सबके जीवन में आता है। यदि आप अपने साथी के दर्द को नहीं समझेंगे तो आपके साथी का आप पर से विश्वास उठ जाएगा। सुखों के साथी तो सभी होते हैं लेकिन आप अपने जीवन साथी के दर्द के साथी बनें। मुश्किल घडियों में अपने साथी का साथ कभी न छोडें। एक दूसरे के दर्द को गहराई से समझे उसे जानें।
कम्मो- वाह . बहुत बढ़िया , एक बार मैंने कही सुना था कि दोस्ती जैसे पावन रिश्ते में भी ईष्र्या घर करने लगी है। दूसरों से आगे निकलने की ललक और सनक इंसानी रिश्तों में कटुता का सृजन करने लगी है। ऎसी प्रवृति एक सुंदर समाज के निमार्ण में घातक सिद्ध होती हैं। शैलेश और राजेश बचपन के दोस्त थे। बडे होने पर दोनों ने एक ही कैरियर चुना और जुट गए, मेडिकल प्रवेश-परिक्षा की तैयारी में। शैलेश का तो चयन हो गया लेकिन राजेश के हाथ सफलता नहीं लग पाई। इसके बाद राजेश ने शैलेश से दूरी बढ़ा ली और शैलेश ने भी इस दूरी को पाटने का कोई प्रयास नहीं किया। फलत: दोस्ती का खुबसूरत रिश्ता इस मोड पर दम तोड गया।
पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का माना जाता है। इस रिश्ते में परस्पर विश्वास और आदर की भावना ही एक दूसरे के स्नेह व समर्पण का बीज बनती है। कई जोडे़ आपसी सामंजस्य के अभाव में रिश्तों में पड रही दरारों से दुखी हैं। ऎसे रिश्तो की नींव में कई अपेक्षाएं, अनादर, क्रोध और हताशा की भावनाएं पनपती हैं और रिश्ता बोझ प्रतीत होने लगता है। लेकिन रिश्तों में आदर हो तो, यह एक दूसरे के गुण-दोषों को आत्मसात् कर लेता है। ननद-भाभी का मोहक रिश्ता हो या देवर-भाभी का सौहाद्रपूर्ण रिश्ता, हर रिश्ते की नींव आदर के जल से सिक्त होने पर ही सुदृढ परिवार का बल बनती है। विचारों के आदान-प्रदान से मतभेद संभव है। यदि सम्मान की भावना हो तो रिश्तों में दरार नहीं पडती।