विगोरा हाई पावर लोकप्रियता के शिखर पर
मुंबई, विश्व प्रसिद्द दवा कंपनी आर ई पी एल की दवा विगोरा हाई पावर लोकप्रियता के शिखर छू रही है. यूं तो इस समय शहर में मरदाना ताकत बढाने वाली कई तरह की दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं , मगर विगोरा हाई पावर की बात ही सबसे निराली है. मुंबई ठाणे, नवी मुंबई , उल्हासनगर , कल्याण , पुणे आदि महाराष्ट्र के नगर उप नगरों में यह होम्योपैथिक दवा जवां मर्दों की पहली पसंद बनकर उभरी है. जो लोग बचपन की गलतियों या छोटी -मोटी बीमारियों से पीड़ित होकर अपना जीवन नर्क बना बैठे थे, ऐसे लोगों के लिए विगोरा हाई पावर बनकर उभरा है. आर ई पी एल की विगोरा हाई पावर जैसी दवा का एक कोर्स करने पर नामर्द भी मर्द बन जाते हैं और जीवन का असली आनंद उठा रहे हैं. अँधेरी के रवि ने बताया की उसकी शादी को महज तीन साल हुए हैं , मगर ये तीन वर्ष उसके जीवन को नर्क जैसा बना गए . वह बिस्तर पर अपनी पत्नी को उतना शारीरिक सुख नहीं दे पाता था जितनी उसकी पत्नी चाहती थी. इस कारण उन दोनों में अक्सर तकरार रहने लगी. उसकी पत्नी ने उसको कम सम्मान देना शुरू कर दिया . इससे रवि के जज्बातों को बहुत ठेस लगी , रफ्ता -रफ्ता मामला तलाक तक जा पहुचा. तब रवि ने अपनी समस्या अपने एक डॉक्टर मित्र को बतायी, डॉक्टर ने उसे विगोरा हाई पावर का एक कोर्स पूरा करने की सलाह दी, डॉक्टर की सलाह पर रवि ने एक कोर्स पूरा कर लिया . शाम को वह सांदहा तेल से अपने विशेष अंग पर मालिश करना नहीं भूलता था. दो महीन के बाद उसे एहसास हो गया की वह पूरी तरह स्वस्थ है और बिस्तर पर बड़े से बड़े पहलवान को पटखनी दे सकता है. उसने अपनी बीवी को सारी बात बतायी मगर उसे यकीन नहीं हुआ. लेकिन जब उसने आजमाया तो हैरत में रह गयी. अब रवि के अंदर मर्दानगी का तूफ़ान भर चुका था. रवि की पत्नी को उसने बिस्तर पर कई बार हराया . अब उसका घर स्वर्ग की तरह हो गया है. आखिर नामर्द इंसान किसको पसंद आता है ? लेकिन रवि अब भी विगोरा हाई पावर और सांडहा तेल को धन्यवाद देना नहीं भूलता .
Wednesday, July 20, 2011
मुंबई।। मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। करीब 1.5 लाख फोन कॉल को खंगालने के बाद जांच एजेंसियों को 6 फोन कॉल पर शक है। एजेंसियों को उम्मीद है कि इन्हीं फोन कॉल की मदद से मुंबई सीरियल ब्लास्ट को अंजाम दिया गया होगा। ये सारे कॉल अहमदाबाद के जुहापुरा में की गईं। जुहापुरा अहमदाबाद का अल्पसंख्यक बहुल इलाका है और यह इलाका इंडियन मुजाहीदीन का गढ़ माना जाता है। वहीं मुंबई एटीएस का मानना है कि 3 ब्लास्ट 6 नए आतंकियों ने किए हैं।
इधर मुंबई एटीएस ने कुछ अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए गुजरात के डांग इलाके में छापेमारी कर रही है।
झवेरी बाजार, ओपरा हाउस और दादर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में जांच एजेंसियों को अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों ने पूरे इलाके के सभी मोबाइल टावरों के फोन कॉल्स की छानबीन की। ब्लास्ट वाले दिन शाम 6.40 से 7.15 बजे के बीच के सभी कॉल की जांच की गई। करीब 1.5 लाख कॉल की बारीकी से जांच करने के बाद 6 कॉल पर जांच एजेंसियों की नजर है। ये कॉल अहमदाबाद के जुहापुरा इलाके में की गई हैं।
इधर मुंबई एटीएस का मानना है कि 3 ब्लास्ट के 6 आतंकियों ने किया है। ये सभी नए आतंकी हैं। दो-दो के ग्रुप में इन्होंने ही विस्फोटक पदार्थ रखे थे। उनका ताल्लुक गुजरात और वेस्ट बंगाल से हो सकता है.
दूसरी तरफ, मुंबई। मुंबई में सिलसिलेवार बम ब्लास्ट को लेकर महाराष्ट्र एटीएस के सामने एक और संगठन जमायते अंसारुल मुस्लिमीन (जेएएम) का नाम सामने आया है। यह संगठन इंडियन मुजाहिदीन का शेडो संगठन है। जो आईएम की तर्ज पर ही काम करता है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि मुंबई के तीन सीरियल धमाकों को अंजाम देने के लिए कम से कम 7 आतंकी आए थे। एजेंसियों के मुताबिक ये सिर पर नीली स्पोर्ट्स कैप, टीशर्ट और जींस पैंट पहने हुए थे। इस संगठन के लोग एक आम पहनावा पहनते हैं ताकि किसी की उनपर न तो नजर पड़े और नही उनपर शक पैदा हो।
एजेंसियों की मानें तो मुंबई धमाकों के तार पुणे के जर्मन बेकरी धमाके से जुड़े हैं। जिसमें संदिग्ध का हुलिया बिल्कुल ऐसा ही था। आईपीएल मैच से पहले बैंगलोर स्टेडियम के बाहर धमाका करने वाले का हुलिया भी यही था।
मुंबई ब्लास्ट: सामने आया एक और संगठन का नाम
उनके मुताबिक एक के बाद एक धमाकों को अंजाम देने वाले शख्स एक नहीं हैं बल्कि अब उनका ये नया मॉडस ऑपरेंडी है। इस संगठन के लोग जहां भी साजिश को अंजाम देने जा रहे हैं, इस बात का खास ख्याल रख रहे हैं कि किसी भी हालत में उनका चेहरा सामने नहीं आए।
आईबीएन7 के पास मौजूद खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों की गिरफ्तारी और उनकी पहचान होने से उसे काम करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए उसने अपना शैडो संगठन खड़ा किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक इसका नाम है जमायते अंसारुल मुस्लिमीन (जेएएम)। जिसे हैदराबाद से चलाया जा रहा है।
एजेंसियों के मुताबिक अब तक जमायते अंसारुल मुस्लिमीन के लिए काम करने वाले लड़के बिहार, बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के होते थे। अब इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और केरल के बेरोजगार लड़के शामिल किए गए हैं।
पहले इंडियन मुजाहिदीन, फिर बुलेट 313 और अब जमायते अंसारुल मुस्लिमीन। एक के बाद एक नया नाम खोजने के सिवाय मुंबई धमाकों की जांच में लगी एजेंसियों के हाथ में एक हफ्ते बाद भी कुछ नहीं लगा है।
पत्नी का खून पीने वाला गिरफ्तार
दामोह। दहेज न मिलने पर पत्नी को प्रताडित कर उसका खून पीने वाले पति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दामोह जिले के शिकारपुरा गांव की रहने वाली दीपा अहिरवार ने पिछले दिनों पुलिस में शिकायत दर्ज की थी, कि उसका पति महेश अहिरवार पिछले तीन सालों से उसका खून पी रहा है। पुलिस ने महेश को दिल्ली से गिरफ्तार किया। पत्नी के साथ की जा रही दरिंदगी का खुलासा होने के बाद महेश दिल्ली भाग गया था और मजदूरी करने लगा था, लेकिन पुलिस ने उसे वहां से धर दबोचा। आरोपी के पिता और भाई को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार करने के बाद महेश को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों दामोह के इस ड्रैकुला का पता चला था। दहेज न मिलने से नाराज महेश अपनी पत्नी पर इसका गुस्सा निकाला करता था। वह उसका खून पीकर उसे प्रताडित करता था। यहां तक कि जब पत्नी मायके चली जाती थी, तो वहां पहुंचकर भी उसके साथ दरिंदगी से पेश आता था। पुलिस ने महेश के खिलाफ दहेज प्र्र्रताड़ना का केस दर्ज किया था। दीपा की ओर से पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार उसका पति लगभग हर दिन एक सीरिंज के जरिए उसके शरीर से खून निकालता था और उसे पी जाता था। महेश ने उसे धमकी दी थी कि यदि उसने यह बात किसी को बताई तो वह उसका बहुत बुरा हाल करेगा।
दीपा के मुताबिक 2007 में उसकी शादी महेश से हुई थी। महेश पेशे से खेतीहर मजदूर है। शादी के कुछ महीने बाद से ही महेश ने दीपा का खून पीना शुरू कर दिया था। पत्नी ने पुलिस को दर्दनाक आपबीती सुनाते हुए कहा था कि महेश का तर्क था कि खून पीने से वो मजबूत बन जाता है और जब दीपा प्रेगनेंट थी, उस दौरान भी महेश उस पर कहर बरपाने से बाज नहीं आता था।

छपरा। बिहार के छपरा जिले में आरजेडी सांसद उमाशंकर सिंह के घर पर गोलीबारी की खबर है। हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है हालांकि सांसद उमाशंकर सिंह सुरक्षित हैं। सिंह बिहार के महाराजगंज से सांसद हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैँ।घटना की सूचना पाकर एसपी समेत पुलिस बड़ी संख्या में कैम्प कर रही है। हमलावरों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
बताया जा रहा है कि हमला दोपहर 3.40 के आसपास हुआ है। मारे गए लोगों की पहचान कर ली गई है।
मरने वालों का नाम मणिभूषण सिंह, देवेंद्र सिंह और दिनेश राय के नाम शामिल हैं। मणिभूषण सिंह जेडीयू नेता थे। देवेंद्र सिंह बानापुर पंचायत के मुखिया थे जबकि दिनेश राय मणिभूषण सिंह का ड्राइवर था। 70 वर्षीय उमाशंकर सिंह ने पहले से प्रशासन को शिकायत की थी कि उनपर हमला हो सकता है उसके बावजूद हमले को अंजाम दिया गया।
दूसरी तरफ, बिहार इंडिस्ट्रियल डिवलेपमेंट अथॉरिटी (बियाडा) जमीन बंदरबांट मामले पर विपक्ष ने आज दूसरे दिन भी विधानसभा को चलने नहीं दिया। सदन में विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की और सीबीआई जांच की मांग की।
जमीन की इस बंदरबांट पर आरजेडी नीतीश सरकार के खिलाफ पूरे राज्य में धरना-प्रदर्शन करेगी। आरजेडी नेता रामकृपाल यादव ने कहा कि इस घोटाले में मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री और अधिकारी शामिल हैं। इस मामले की जांच मुख्यमंत्री को सीबीआई से करानी चाहिए। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने कहा है कि इस बंदरबांट के खिलाफ 27 जुलाई से वो रथयात्रा निकालेंगे।
मालूम हो कि सूबे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में मुख्य सचिव से बिहार इंडस्ट्रियल डिवलपमेंट अथॉरिटी की जमीन के बंदरबांट पर जानकारी मांगी और इस बंदरबांट की जांच का जिम्मा मुख्य सचिव बिहार को सौंप दिया।
गौरतलब है कि बिहार सरकार पर औद्योगिक विकास के लिए दी जाने वाली बियाडा की जमीन मंत्रियों के बेटी, बेटों को रेवड़ी की तरह बांटने का आरोप लगा है। आईबीएन7 द्वारा इस खबर के खुलासे के बाद विपक्ष ने नीतीश से इस्तीफा देने की मांग की।
कल यानी मंगलवार को बिहार विधानसभा सत्र के पहले दिन इसे लेकर हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष इस मामले में कार्यस्थगन प्रस्ताव लेकर लाया, जिसपर विधानसभा में हंगामा हुआ। गौरतलब है कि ये वो भूमि हैं जो बिहार के औद्योगिक विकास के लिए कारोबारियों को दी जानी थी, लेकिन बिहार सरकार के मंत्रियों के करीबियों को भी ये जमीन दे दी गई। वहीं, मंत्रियों का कहना है कि जमीन देना कोई अपराध नहीं है।
मुंबई। पहली बार छोटे पर्दे पर बिग बॉस सीजन-5 में दबंग सलमान खान और खलनायक संजय दत्त एक साथ नजर आएंगे। दोनों ही बिग बॉस सीजन-5 शो के होस्ट होंगे। ऐसा पहली बार होगा जब बिग बॉस शो को दो स्टार होस्ट करेंगे।
कलर्स चैनल के मुताबिक इसके लिए सलमान और संजय दत्त को साइन कर लिया गया है। कलर्स के मुताबिक ये पहला मौका होगा जब किसी रिएलिटी शो में सलमान खान और संजय दत्त साथ-साथ नजर आएंगे। इससे पहले सलमान के एक शो में संजू बाबा सिर्फ गेस्ट बनकर आए थे।
मालूम हो कि खान से संजू बाबा की दोस्ती काफी पुरानी है। इससे पहले शाहरुख खान ने भी संजय दत्त को 15 लाख रुपए की क्रूजर मोटर बाइक का गिफ्ट दिया है। सूत्रों के मुताबिक फिल्म रॉ वन में रोल के लिए जब संजय दत्त से पूछा गया तो वो तुरंत मान गए। लेकिन रुपए लेने से मना कर दिया। बदले में शाहरुख उनके लिए कुछ खास करना चाहते थे। इसी वजह से किंग खान ने मुन्ना भाई को ये महंगा गिफ्ट दिया है।
बिग बॉस-5 को एक साथ होस्ट करते दिखेंगे सल्लू-संजय
मोटर बाइक के साथ एक महंगी घड़ी भी गिफ्ट में दी गई है। खास बात ये है कि कुछ दिन पहले संजय दत्त ने इटली से हेलमेट और जैकेट मंगवाए थे, लेकिन कस्टम में दिक्कत होने की वजह से बाइक नहीं मंगवा पाए थे। शाहरुख खान ने उनके लिए इटली से ये बाइक सीधे इंपोर्ट कर उनका मनपसंद गिफ्ट दिया है। संजय दत्त, किंग खान के इस गिफ्ट से काफी खुश हैं
कलर्स चैनल के मुताबिक इसके लिए सलमान और संजय दत्त को साइन कर लिया गया है। कलर्स के मुताबिक ये पहला मौका होगा जब किसी रिएलिटी शो में सलमान खान और संजय दत्त साथ-साथ नजर आएंगे। इससे पहले सलमान के एक शो में संजू बाबा सिर्फ गेस्ट बनकर आए थे।
मालूम हो कि खान से संजू बाबा की दोस्ती काफी पुरानी है। इससे पहले शाहरुख खान ने भी संजय दत्त को 15 लाख रुपए की क्रूजर मोटर बाइक का गिफ्ट दिया है। सूत्रों के मुताबिक फिल्म रॉ वन में रोल के लिए जब संजय दत्त से पूछा गया तो वो तुरंत मान गए। लेकिन रुपए लेने से मना कर दिया। बदले में शाहरुख उनके लिए कुछ खास करना चाहते थे। इसी वजह से किंग खान ने मुन्ना भाई को ये महंगा गिफ्ट दिया है।
बिग बॉस-5 को एक साथ होस्ट करते दिखेंगे सल्लू-संजय
मोटर बाइक के साथ एक महंगी घड़ी भी गिफ्ट में दी गई है। खास बात ये है कि कुछ दिन पहले संजय दत्त ने इटली से हेलमेट और जैकेट मंगवाए थे, लेकिन कस्टम में दिक्कत होने की वजह से बाइक नहीं मंगवा पाए थे। शाहरुख खान ने उनके लिए इटली से ये बाइक सीधे इंपोर्ट कर उनका मनपसंद गिफ्ट दिया है। संजय दत्त, किंग खान के इस गिफ्ट से काफी खुश हैं

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट सेक्स वर्कर्स को सम्मान के साथ उन्हें अपना पेशा चलाने के लिए 'माकूल हालात' पैदा करने की तैयारी में है। शीर्ष अदालत ने इस बारे में सलाह मांगी है कि सेक्स वर्कर्स को इज्जत के साथ अपना पेशा चलाने के लिए क्या शर्तें होनी चाहिए।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार को यह भी आदेश दिया कि वो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में ऐसे सेक्स वर्कर्स की पहचान करे जो ये पेशा छोड़ना चाहते हैं। अदालत ने ऐसे सेक्स वर्कर्स को सम्मान के साथ जीवन यापन के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग दिए जाने के तरीकों के बारे में भी सलाह मांगी है। इसी बेंच ने इससे पहले सेक्स वर्कर्स के पुनर्वास की भी बात की थी।
दूसरी तरफ, देश की नामी आईटी कंपनियों में से एक इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति ने यह कहकर विवाद को हवा दे दी है कि अगर एक हद तक घूस देने को कानूनी दर्जा मिल जाए तो घूस देने वाला घूस लेने वाले शख्स को बेनकाब करने में सरकारी एजेंसियों की मदद कर सकता है .
सुप्रीम कोर्ट ने सम्मान के साथ जिंदगी जीने के अधिकार को संवैधानिक अधिकार माना है। अदालत ने सीनियर एडवोकेट प्रदीप घोष की अगुवाई में कुछ वरिष्ठ वकीलों और गैर सरकारी संगठनों का एक पैनल गठित किया है जो सेक्स वर्कर्स के सामने आने वाली समस्याओं की पड़ताल करेगा और उनके मूल अधिकारों के संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में सलाह देगा। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वो पैनल को सहयोग करें और इसकी बैठकों में शामिल हों। इस मामले पर अगली सुनवाई 2 अगस्त को होगी।
हालांकि वेश्यावृत्ति अपने आप में गैरकानूनी नहीं है लेकिन सेक्स वर्कर्स से सीधे तौर पर जुड़ा कोई कानून नहीं होने की वजह से इस पेशे में शामिल लोगों का अकसर परेशान किए जाने की खबरें आती हैं। पैनल को उन सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा किए जाने के बारे में राय देने को कहा गया है जो इस पेशे से जुड़े रहना चाहते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में 6,88,751 'रजिस्टर्ड' सेक्स वर्कर हैं जबकि नेशनल एड्स कंट्रोल अथॉरिटी के मुताबिक इनकी तादाद 12.63 लाख है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से उन लोगों को बल मिलेगा जो इस पेशे को कानूनी दर्जा दिए जाने की मांग करते रहे हैं।
वेश्यावृत्ति पर अब तक क्या हुआ?
उच्चतम न्यायालय ने करीब साल भर पहले अपनी एक टिप्पणी में कहा कि महिलाओं की तस्करी रोकने की दिशा में सेक्स व्यापार को कानूनी मान्यता देना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे यौनकर्मियों के पुनर्वास में भी मदद मिलेगी। एक गैर सरकारी संगठन 'बचपन बचाओ आंदोलन' की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि जब आप यह कहते हैं कि वेश्यावृत्ति दुनिया का सबसे पुराना पेशा है और आप इस पर लगाम लगाने में नाकाम हैं तो आप इसे कानूनी मान्यता क्यों नहीं दे देते हैं?
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ही 'ओलेगा तेलिस बनाम बंबई नगर निगम' मामले में यह फैसला सुनाया था कि कोई भी व्यक्ति जीविका के साधन के रूप में जुआ या वेश्यावृत्ति जैसे गैर कानूनी और अनैतिक पेशे का सहारा नहीं ले सकता।
कोट
सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का कहना है कि यदि वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा मिलता है तो इससे देश भर में गुपचुप तौर पर चल रहे सेक्स रैकेट को भी मान्यता मिल जाएगी। ऐसा होने से समाज का नैतिक पतन होगा और महिलाओं के उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ेंगी। सेक्स रैकेट चलाने वाले लोग बेबश लड़कियों और महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाएंगे।
भारत में वेश्वावृत्ति को कानूनी दर्जा दिए जाने को लेकर जारी बहस के बीच यह जानना जरूरी है कि विदेशों में इसे लेकर क्या स्थिति है। हालांकि भारत में भी वेश्वावृत्ति अपने आप में गैरकानूनी नहीं है लेकिन सेक्स वर्कर्स से जुड़ा कोई कानून नहीं होने की वजह से इस पेशे में शामिल लोगों का अकसर परेशान किया जाता है।
कनाडा में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी नहीं है लेकिन घर से इसे संचालित करना या यौनकर्मियों का सामाजिक संपर्क बनाना गैर कानूनी है।
ताईवान में करीब एक दशक पहले ही वेश्यावृत्ति को प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन हाल में वहां की सरकार ने एक कानून बनाया है जिसके तहत वेश्यावृत्ति का कारोबार एक खास इलाके से संचालित किया जाता है।
स्विट्जरलैंड में वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा मिला है कि लेकिन इसे 'अनैतिक' कार्य माना जाता है। यहां इस पर टैक्स लगता है। यहां मालिश वाले सैलूनों को भी अन्य दुकानों की तरह टैक्स जमा करना पड़ता है।
अमेरिका में हर राज्य को यह तय करने का अधिकार है कि वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा दिया जाना चाहिए या नहीं। नेवादा को छोड़कर अमेरिका के सभी प्रांतों में सेक्चुअल सर्विसेज की खरीद फरोख्त गैरकानूनी है और सामान्य तौर पर इसे अपराध माना गया है। नेवादा के कुछ हिस्सों में लाइसेंस प्राप्त वेश्यालय हैं। मेक्सिको में वयस्कों के लिए वेश्यावृत्ति का धंधा करना कानूनन सही है। वेश्यावृत्ति के कारोबार में 18 साल से कम आयु के बच्चों को शामिल करना गैर कानूनी है। यहां अधिकतर इलाकों में वेश्याओं की दलाली करना गैर कानूनी है जबकि सरकार पूर्व सेक्स वर्करों के लिए आशियाना मुहैया कराती है।
यूरोप के स्वीडन में वेश्यावृत्ति से जुड़े कानून के मुताबिक यहां सेक्सुअल सर्विसेज की खरीद को गैरकानूनी है लेकिन इन्हें बेचना गैरकानूनी नहीं। वेश्याओं की दलाली करना, खरीद करना और वेश्यालय चलाना भी गैरकानूनी है। नीदरलैंड में वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा प्राप्त है। यहां वेश्यालय चलाना भी कानूनन सही है। हालांकि आपराधिक गतिविधियों की शिकायत के बाद पिछले कुछ वर्षों में कई वेश्यालयों को बंद करना पड़ा है। यूरोप के जर्मनी, ऑस्ट्रिया, ग्रीस, तुर्की, हंगरी और लातिविया में भी वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा मिला है।
अफ्रीका के सेनेगल में वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा मिला है और इसका रेग्युलेशन होता है। हालांकि वेश्यावृत्ति के कारोबार के लिए कुछ शर्तें भी हैं। मसलन, सेक्स वर्करों की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए, पुलिस के पास इनका रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, यौन संक्रमण नहीं होना चाहिए।
Tuesday, July 19, 2011

शक्ति और सुख का खजाना
कभी सांडहा भूल ना जाना
बरसात के सुहाने मौसम में अब अपने साथी को दीजिए आनंद का नया उपहार , उन खास पलों को हमेशा के लिए बनाइये यादगार . कभी न भुलाया जाने वाला अनुभव. एकांत के उन सुनहरे क्षणों को बनाइये सबसे हसीन . देश भर में लाखों संतुष्ट ग्राहक . वैज्ञानिक पद्धति से तैयार जांचा -परखा और शुद्धता की कसौटी पर खरा फार्मूला . आज और अभी अपने नजदीकी मेडीकल स्टोर पर पहुंचिए और गर्व से मांगिये
आर .ई.पी एल. का
सांडहा ऑइल
कोई साइड इफेक्ट नहीं, एक बार आजमाकर देखिये , क़दमों में खुशियाँ पाइए .
बुढापे में भी जवानी का एहसास पाने का नुस्खा जानने और मुफ्त में सलाह के लिए प्रसिद्द वैध से संपर्क करें- ९९२०६०१७७५ / ९३२३६८७३८४
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