Monday, January 10, 2011

भाग- 19
- बस भी करो, मुझे बेचैनी हो रही है. बड़ी प्यास नह्सूस हो रही है, इस प्यास को बुझादों.
ब्रिज- अभी क्या है मेरी जान अभी तो शुरुआत है. एक दिन ऐसा आएगा कि तुम हम दोनों के लिए तरसा करोगी, आहें भरा करोगी.
अभी- हाँ, यह ऐसा लड्डू है जिसे खाने पर भी पछतावा होता है और नहीं खाने पर भी.
ब्रिज- हाँ , पहले तो तुम मना कर रही थीं, अब खुद ही कह रही .
किरण- बहस मत करो. मेरी इस आग को शांत करदो प्लीज, मुझसे बड़ी भूल हुई जों पहले इनकार किया. अब दोनों आओ और आकर मेरे ऊपर छा जाओ. अब अगर तुम लोग जल्दी नहीं करते हो तब पुलिस स्टेशन जाउंगी .
कहूंगी कि पहले तो मुझे इश्क का रोग लगा दिया है और अब दवा नहीं देते. मरीज का इलाज न करना भी तो एक तरह का गुनाह ही हुआ न.
सूरज और किरण बिस्तर पर आनंद भी लूट रहे थे और किरण उसे आपबीती भी सुना रही थी. वहां का माहौल देखकर कभी-कभी सूरज को डर भी होता था और कोफ़्त भी होती थी. मन में सोचता कि काश वह रिश्ते की सालियों
के साथ मौज मस्ती करने की नहीं सोचता तो यहाँ नहीं आना पड़ता. सालियाँ किसीकी शादी में गयी हुई थीं, वह न तो उनसे ही मिल पाया और उसके चक्कर में लेट और हो गया.उससे काफी मना भी किया गया था कि सांझ ढाले
इस तरह जाना ठीक नहीं, मगर वह अपनी आदत से बाज नहीं आया. उसे तो देर-सवेर चलने में ही मजा आता था,ताकि मोटर साइकिल पर लिफ्ट देकर महिलाओं का स्पर्श पा सके. वही लालच उसे इस रहस्यमयी होटल तक खींच लाया.
यहाँ उसे अजीब सा सन्नाटा प्रतीत होता था. न कोई चहल-पहल , न कोई आवाज. अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी. जैसे शमशान का सन्नाटा होता है. जहां सिर्फ उदासी छाई होती है. उसी माहौल में वह अपने आपको रखने के लिए मजबूर
था, उसकी बांहों की आगोश में गज़ब की खूबसूरत महिला था, जों दावा करती थी कि एक रात रंगीन करने के लिए पांच लाख रुपये लेती है , मगर उसके लिए मुफ्त में उपलब्ध थी. उसकी सेवा सत्कार भी कर रही थी. कभी-कभी उसे ख़याल आता
कि आखिरकार वह उस पर इतनी मेहरबानी क्यों कर रही है. जबकि पेशेवर लोग तो सिर्फ अपने पेशे से मतलब रखते हैं. उन्हें इंसान से नहीं सिर्फ दौलत से प्रेम होता है. यह सवाल उसके गले में ही अटककर रह जाता था. किरण उसे
अपनी बर्बादी की दास्ताँ सुना रही थी, ऐसे में सब्जेक्ट बदलकर बात करना उसे नागवार गुजर सकता था. बात बनाने के मूड से वह बोला-
-ओह, इसका मतलब वे लोग खुद ही यह चाहते थे कि तुम ही मजबूर होकर उनके सामने समर्पण करो, ताकि उनके पास कहने के लिए यह तो रहे कि तुमने ही उन्हें शारीरिक संबंधों के लिए आमंत्रित किया था , यहाँ तक कि जिद भी की.
किरण- हाँ, अब तुम समझे. पहले तो उन्होंने धोखे से मुझे ऐसी दवा पिलादी , जिसे पीकर मेरी कामवासना भडकने लगी. साथ ही ऐसी फिल्म दिखादी जों तन -मन को आग लगा रही थी, इसके साथ ही शराब और सिगरेट भी पिला रहे
थे, मैं तो कामुक होनी ही थी. मेरी झिझक खत्म होने लगी थी. मैं उन संबंधों को बनाने के लिए आतुर थी, जिन्हें सभ्य समाज में निषेध समझा जाता है. यह सब उन लोगों की वजह से हो रहा था. उस समय तो मुझे कुछ ध्यान नहीं आया .
दोनों ने अपने तरीके से मेरे जिस्म का दोहन किया. यहाँ तक कि उनके प्रहार न सहने के कारण मैं बेहोश भी हो गयी. इसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता. मुझे जब अगले दिन होश आया तो मैं उसी बंगलो के बिस्तर पर थी. पूरी चादर खों
से लाल हो रही थी. यह मेरा पहला सम्बन्ध था. मैंने उठने की कोशिश की मगर हिल-डुल भी नहीं पायी. मुझे भूख भी लगी थी और प्यास भी . होठ सूख रहे थे. मगर मैं कुछ बोल भी नहीं पाई. बड़ी मुश्किल से मैंने अपना हाथ पास में
रखी टेबल तक बढ़ाया, वहां पानी का भरा जग रखा था. मैंने उसमे से पानी पिया. तब जाकर चेतना लौटी. तब मैं समझ पाई कि किस तरह ड्यूटी से लौटते हुए मुझे अभिप्रिय उर्फ अभी. मिला था. कैसे वह मुझे रेस्टोरेंट ले गया. इसके बाद
डिस्को और फिर वह मुझे महरोली के इस फ़ार्म हाउस ले आया था. फ़ार्म हाउस के इसी बंगलो में उसने अपने दोस्त ब्रिज को बुलाया और मुझे उसके साथ भी सम्बन्ध बनाने के लिए मजबूर किया. मैं कुछ सोच ही रही थी कि एक अधेड महिला
हँसती हुई मेरे पास आयी. मैं नग्न अवस्था में थी. सिर्फ ऊपर चादर ढंकी हुई थी. उस महिला ने मुझे सहारा देकर बाथरूम तक पहुंचाया. मुझे नहलाने में मदद की और पहनने के लिए कपडे दिए.इसके बाद वह मुझे नाश्ते की टेबल पर ले गयी .
मैं कुछ बोलना चाहती थी, कुछ पूछना चाहती थी लेकिन उसने इशारे से मना कर दिया. वह समझाना चाहती थी कि नाश्ता करने के बाद सब कुछ बता दिया जायेगा. मुझे भूख लगी थी, इसलिए मैंने भी पहले पेट पूजा करनी ही बेहतर समझी.
जब पेट भर गया तो शरीर में थोड़ी सी ताकत आ गयी. जुबान भी हिलने लगी थी. मैं कुछ कहना ही चाहती थी कि उसने पचास हजार रुपये मेरे हाथ में थमा दिए. मैंने पूछा-
ये रुपये किसलिए ? मैं समझी नहीं ?
- ये तुम्हारा मेहनताना है. अगर नौकरी करोगी तो महीने भर में इतना कमा पाओगी , और अगर यहाँ पर सेवा देना चाहोगी तो हर रात की तुम्हें इतनी रकम मिला करेगी .
किरण- अभिप्रिय और ब्रिज कहाँ हैं ?
- वे चले गए. यह रकम उन्होंने ही दी हैं. अब तुम मुझसे संपर्क कर सकती हो. रात तुम्हारे साथ सुहागरातमनाने वाले ब्रिज ने यह कीमती हार भी तुम्हें तोहफे में दिया है. अब अगला कस्टमर ब्रिज के अलावा कोई दूसरा भी हो सकता है.
किरण- कस्टमर . क्या आपको मैं धंधेबाज लगती हूँ ? क्या कल रात मेरा सौदा किया गया था ?
-तो क्या इतनी रकम कोई ऐसे ही दे देता है ? तुम अकेली नहीं हो. हमारे साथ फिल्मों की नामचीन एक्ट्रेस, होस्टेस, कोलेज गर्ल सब जुडी हुई हैं.
भाग- 18
किरण- क्या ऐसा नहीं हो सकता कि पहले मैं सिर्फ अभी. के साथ सम्बन्ध बनाऊँ, अगर अच्छा लगा तो बात आगे बढाते हैं.
ब्रिज- मुझे कोई ऐतराज नहीं है.
अभी.- मगर मुझे है. अगर हम साथ-साथ प्यार नहीं कर सकते तो ये प्रोग्राम ही कैंसल कर देंगे.
किरण- तुम लोग तो खिलाड़ी हो, पहले भी यह खेल खेल चुके हो. मगर मैं इसकी नई खिलाड़ी हूँ.
ब्रिज- पहले सब लोग नए ही होते हैं. धीरे -धीरे वे भी पुराने हो जाते हैं.
किरण- अगर कुछ हुआ तो जिम्मेदारी तुम लोगों की होगी, मैं तो सीधे चली जाउंगी पुलिस स्टेशन.फिर दोष न देना , ये न कहना कि मैंने कहा नहीं था. मैंने अखबार में पढ़ा था कि दो विदेशी यहाँ पर घूमने आये थे
उनमे एक महिला थी और एक बड़े राजनीतिक घराने से जुड़ा मर्द था. उसने महिला के साथ उसकी मर्जी के बिना सम्बन्ध बना लिए इससे गुस्साई महिला अपने हाथ में कंडोम लेकर ही पुलिस स्टेशन पहुँच गयी,
सबूत के साथ , और फिर वही हुआ जों पुलिस करती है. गिरफ्तार भी हुए और बदनाम भी. अगर मेरे साथ ऐसी कोशिश हुई तो मैं भी पुलिस का सहारा ले सकती हूँ.
अभी.- तुम्हारे प्यार की खातिर अगर सूली भी चढना पड़े तो मंजूर है मगर यह देख लों कि हम तुम्हारे दोस्त हैं, बलात्कारी नहीं. अगर तुम्हारी भी सेक्स करने की भरपूर इच्छा हो तभी बात करना वरना हम अपने घर
और तुम अपने घर. जेल जाने का शौक किसीको नहीं होता, ये प्यार का सौदा है. अगर तुम्हें भी इस बात का रोमांच है कि तुम हम दोनों के साथ मौज मस्ती करना चाहती हो तो हाँ करो.
किरण- पहले मैं एक के साथ ही सम्बन्ध बनाना चाहती हूँ. ऐसा नहीं है कि मेरा मन नहीं है. मेरा भी बदन झुलस रहा है. मैं भी इस आग को शांत करना चाहती हूँ लेकिन इस तरह से नहीं .
ब्रिज- ठीक है , मैं चला जाता हूँ. तुम दोनों ही समबन्ध बना सकते हो, मेरी तरफ से कोई आपत्ति नहीं है. मैं तो तुम्हें सुख देने के हिसाब से ऐसा कह रहा था. वरना मेरी कोई व्यक्तिगत रूचि बिलकुल नहीं है.
अभी.- देखो डार्लिंग, तुमने आखिर मेरे सबसे प्यारे दोस्त को निराश कर दिया न, हम लोग आज यहाँ भले ही पहली बार मिल रहे हैं मगर यह सिर्फ एक दिन का मिलना तो है नहीं. अब तो हम लोग रोजाना मुआलाकात
करते रहेंगे, प्यार करते रहेंगे. जीवन में किसीके साथ ऐसा बर्ताब करना शोभा नहीं देता. जानती हो ब्रिज कौन है ? यह बहुत बड़े व्यापारी का बेटा है. इनकी खुद की एअर लाइन्स कंपनी है. कभी भी काम आ सकता है.
ब्नाहुत अच्छा बन्दा है और यहाँ पर हमारे रिक्वेस्ट पर आया है. मैं चाहता था कि आप नए तरह का आनंद भोगें , तभी तो मैंने इसे यहाँ बुलाया. मेरा अपना कोई काम थोड़े ही था. मैंने तो इसे आपके काम के लिए
बुलाया है. अब फैसला आपने कर ही लिया है तो क्या कहूँ, वैसे चाहो तो मैं इसे अब भी मना सकती हूँ. अगर तुम्हें ज़रा भी तकलीफ महसूस हो तो मना कर सकती हो. एक बात यह भी अच्छी तरह जानलो कि हम लोग
यहाँ पर दर्द देने के लिए नहीं बल्कि सुख देने के लिए इकठ्ठा हुए हैं. हम मौज मस्ती करना चाहते हैं. प्यार चाहते हैं. एक दूसरे को सुख मिलेगा तभी तो हम अगली बार मिल पायेंगे.
किरण- ठीक है. जैसा अच्छा लगे वैसा करो , अब मैं ज्यादा क्या कह सकती हूँ.
सूरज- ओह, तुमने हार मानली थी ?
किरण- और कर भी क्या सकती थी. उसने मेरे जिस्म में दवा के द्वारा इतनी मादकता पैदा करदी कि मैं इनकार ही नहीं कर पा रही थी . यहाँ कि मेरे जिस्म में बम विस्फोट जैसे हो रहे थे. दिल के अंदर तो यही इच्छा थी
कि वे दोनों मुझ पर भूखे भेडिये की तरह टूट पड़ें और जिस्म के अंदर फूट रहे ज्वालामुखी को शांत करें. वे खुद भी यही चाहते थे. तभी तो उन्होंने मुझे ऎसी ब्लू फिल्म दिखाई कि मैं काम वासना की आग में झुलस गयी .
मेरा बदन बेकाबू होने लगा था. ब्रिज खुश था . आखिरकार मैं मान जों गयी थी. कुछ देर बाद ही ब्रिज भी पूरी तरह से नग्न हो गया. ब्रिज दिखने में जितना दुबला-पतला था उसका खास अंग उतना ही जयादा मजबूत था. उसे देखकर
मेरे मन में झुरझुरी सी दौड गयी. उसका अंग हर पल सख्त होता जा रहा था. वह मेरे पास आकर लेट गया . शराब का दौर जोर पकड़ने लगा. जब चार पैग मेरे हलक में उअतर गए तो मैं भी नशे में टुल्ली हो गयी. मैंने उन दोनों
के खास अंगों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. ब्रिज की उंगली मेरे यौवन द्वार पर दस्तक दे चुकी थी. अभी. मेरे सीने की गोलाइयों को चूम रहा था. शुरुआ़त में तो मुझे गुदगुदी सी महसूस हुई मगर फिर वासना की तेज आंधी ने मुझे
अपने आगोश में जकड लिया. मैंने महसूस किया कि उन दोनों मर्दों में से कोई एक मेरे होठों को चूस रहा था. मैं बेचैन होने लगी . मैंने कहा-
- बस भी करो, मुझे बेचैनी हो रही है. बड़ी प्यास नह्सूस हो रही है, इस प्यास को बुझादों.
ब्रिज- अभी क्या है मेरी जान अभी तो शुरुआत है. एक दिन ऐसा आएगा कि तुम हम दोनों के लिए तरसा करोगी, आहें भरा करोगी.
अभी- हाँ, यह ऐसा लड्डू है जिसे खाने पर भी पछतावा होता है और नहीं खाने पर भी.
ब्रिज- हाँ , पहले तो तुम मना कर रही थीं, अब खुद ही कह रही .
किरण- बहस मत करो. मेरी इस आग को शांत करदो प्लीज, मुझसे बड़ी भूल हुई जों पहले इनकार किया. अब दोनों आओ और आकर मेरे ऊपर छा जाओ.

Sunday, January 9, 2011

भाग-१7
ब्रिज- जीवन भर गुलामी करूँगा सरकार. जों कहोगी करूँगा, अगर मेरा सिर पसंद आ गया हो तो इसे भी कलम करके पेश कर सकता हूँ.
अभी-तुम एक्स्ट्रा हो रहे हो ब्रिज. प्यार-मोहब्बत के सीजन में इस तारह की बातें अच्छी नहीं लगती हैं हैं. जब किरण ने कह दिया है तो ऐश करो. जितना चाहो प्रेंम करो,
किरण- मेरा जिस्म सुलग रहा है. ऐसा लगता है जैसे किसी ने इस पर मिट्टी का तेल छिडककर आग लागा दी हो. इस आग को किसी भी तरह सेबुझाओ.
अभी- मैं और ब्रिज इसी लिए तो यहाँ पर आये हुए हैं. हम लोग तुम्हारे शरीर की प्यास को बुझाना चाहते हैं, एक ऐसी तृप्ति का एहसास दिलाना चाहते हैं जिस पर तुम हमेशा गर्व कर सको.
ब्रिज- तुम्हारा कुंवारा बदन हमें भी दीवाना बना रहा है लेकिन हम चाहते हैं कि कोई भी काम जल्दबाजी में न किया जाए . अगर प्यार से प्यार करेंगे तभी इशक का असली सुख वसूल पायेंगे.अगर सच्चा और अच्छा प्यार
पाना है तो उसके लिए यह जरूरी है कि हम फालतू की बातें सोच विचारना बंद कर दें. एकदम फुल स्टॉप करना होगा. जबकि मैं देख रहा हूँ कि तुम टेंशन पर टेंशन लेती जा रही हो. इस हीरोइन को देखो, जों इस वक्त फिल्म में दिखाई
दे रही है. यह कितनी दुबली-पतली और नाजुक सी लड़की है लेकिन कितने मजबूत लोगों को शारीरिक सुख प्रदान कर रही है. खुद भी कितनी सुखी नजर आती है . जबकि सच ये है कि यह खुद भी आनंद के अतिरेक को महसूस कर रही
है. इसका दमकता हुआ चेहरा बता रहा है कि इसने आज बहुत ज्यादा खुशी प्राप्त कर ली है. इसके मुकाबले जों इसके पार्टनर हैं वे दो हैं और दोनों ही दबंग दिखाई देते हैं.
अभी.- हाँ, मेरी जान बिस्तर के खेल में शरीर का साइज ज्यादा मायने नहीं रखता. तुम अकेली ही हम दोनों को धुल चटा सकती हो और मनमाफिक सुख लूट सकती हो.
किरण- सच ? तुम लोग मुझे उल्लू तो नहीं बना रहे ? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम लोग मुझे कली से फूल बनाने को आतुर हो , इसके बाद भूल जाओगे मुझे ?
ब्रिज- छी, छी. कैसी बात करते हो ? हम लोग ना जाने कितनी लड़कियों को कली से फूल बना चुके हैं. उतावलापन तो उन्हें होता है जिन्हें ये चीज मिलती नहीं . हमारी तो न अजाने कितनी दोस्त हैं अपने दिल से कभी भी बिछने के लिए
तैयार रहती हैं. देखना चाहोगी ? मिलना चाहोगी ऐसी कुछ लड़कियों से ?
किरण- अगर मिलवाओगे तो मुझे क्या हर्ज हो सकती है ? मैं भी जानना चाहूंगी उस राज को जिसके चलते वे इतना बड़ा रिस्क उठाती हैं. एक साथ दो -दो लड़कों से जिस्मानी सम्बन्ध बनाने का रहस्य भी जानना चाहूंगी.
अभी.- वो तो हम भी बता सकते हैं. चाहो तो इस ब्लू फिल्म से भी सीख सकती हो. देखो लड़की के नीचे एक लड़का लेता हुआ है, लड़की उसके ऊपर है. उन दोनों के अंग आपस में सटे हुए हैं. ये देखो ऊपर से एक लड़का आता है ,
उसके हाथ में एक क्रीम है जिसे वह लड़की के प्रष्ठ भाग पर लगा रहा है. इसके बाद वह अपने खास अंग से भी क्रीम लगाता है. लड़की उतावली हो रही है. मादक संगीत चल रहा है. लड़की उसके अंग को अपने संवेदनशील अंग से स्पर्श
कर रही है. लड़के का अंग खतरनाक होता जा रहा है. वह दिखने में बेहद भयंकर लग रहा है. लड़की उसे सहलाकर खुश हो रही है. फिर उसने कुछ बोला. शायद आमंत्रण दिया है. जिसे लड़के ने आसानी से स्वीकार कर लिया है और अब दोनों
एक दूसरे के साथ जुड गए हैं. इस प्रकार टेंपों लोग शारीरिक रूप से जुड चुके हैं. जिस रफ़्तार के साथ लड़की आगे -पीछे हो रही है, ऊपर वाला लड़का भी उसका उसी अंदाज में साथ दे रहा है. तीनों के चेहरे पर मजा ही मजा छाया है.
ऐसा लगता है जैसे वे लोग अपने जीवन के सबसे शानदार पलों को शेयर कर रहे हैं.
किरण- क्या फिल्म में यह सच दिखाया जा रहा है, या कैमरे और कंप्यूटर की मदद से ऐसे द्रश्य तैयार कर दिए गए हैं.
अभी.- यह सब असली कहानी है मेरी जान. कैमरा या कंप्यूटर गधे को घोड़ा या वादा पाव को झंडू बाम नहीं दिखा या बता सकता है.
किरण- दो लडको के साथ सम्बन्ध बनाते हुए इसको तकलीफ क्यों नहीं हो रही ?
ब्रिज- एकदम आसान सी बात है कि तकलीफ होती ही नहीं है. अगर ऐसे तकलीफें होने लगीं तब क्या है, तब तो कोई भी मौज मस्ती नहीं कर सकता है.
अभी.- अब मैं नीचे लेटता हूँ. जैसा फिल्म में दिखाया जा रहा है, तुम्हें वैसा करना है. थोड़ी देर के बाद यह ब्रिज फिल्म वाले लकड़े की तरह तुम्हारे ऊपर आएगा. तुम एक ही बार में हम दोनों के साथ आनंद ले सकती हो.
किरण- क्या ऐसा नहीं हो सकता कि पहले मैं सिर्फ अभी. के साथ सम्बन्ध बनाऊँ, अगर अच्छा लगा तो बात आगे बढाते हैं.
ब्रिज- मुझे कोई ऐतराज नहीं है.
अभी.- मगर मुझे है. अगर हम साथ-साथ प्यार नहीं कर सकते तो ये प्रोग्राम ही कैंसल कर देंगे.
किरण- तुम लोग तो खिलाड़ी हो, पहले भी यह खेल खेल चुके हो. मगर मैं इसकी नई खिलाड़ी हूँ.
ब्रिज- पहले सब लोग नए ही होते हैं. धीरे -धीरे वे भी पुराने हो जाते हैं.
किरण- अगर कुछ हुआ तो जिम्मेदारी तुम लोगों की होगी, मैं तो सीधे चली जाउंगी पुलिस स्टेशन.
Story Update : Sunday, January 09, 2011 10:53 AM

उड़ीसा के रायगाड़ा जिले में आज तड़के सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में नौ नक्सली मारे गए। पुलिस के मुताबिक रायगाड़ा के कल्याणसिंहपुर के निकट जंगली इलाके में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस उप महानिरीक्षक सौमेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि हमने नक्सलियों के नौ शव बरामद कर लिए हैं। घटनास्थल से हथियारों को जखीरा बरामद किया गया है। रायगाड़ा जिले को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।

नक्सलियों ने रेलवे केबिन उड़ाया
हथियारबंद नक्सलियों ने कल रात 2 बजे राउरकेला-हटिया रूट पर बांदामुंडा रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल केबिन को उड़ा दिया। यह घटना को अंजाम देने में महिला नक्सली भी शामिल थी। घटना के कारण हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग बाधित रहा। रेलवे सूत्रों के मुताबिक महिलाओं सहित करीब 50 से 60 हथियारबंद नक्सलियों ने राउरकेला से 10 किलोमीटर दूर सिग्नल केबिन उड़ा दिया। जिसे एएसएम रूम को भी काफी नुकसान पहुंचा। घटना स्थल पर नक्सलियों की ओर से छोड़े गए पोस्टरों में विनायक सेन को छोड़ने और केंद्र सरकार के अभियान ग्रीन हंट को बंद करने और निर्दोष आदिवासियों पर अत्याचार बंद करने की मांग की गई है। नक्सलियों ने 12 रेलवे कर्मचारियों को बंधक भी बना लेकिन बाद में उनको धमकी देकर छोड़ दिय

Saturday, January 8, 2011

भाग-१6
सूरज- तब क्या कहा आपने ? चुप हो गयी होंगी ?
किरण- नहीं, मैं चुप तो नहीं बैठी, थोड़ी देर तक उनकी अबतों का जवाब देती रही थी लेकिन वे समझ गए कि मैं कमजोर पद रही हूँ , और सच भी यही था. मैं कमजोर हो चुकी थी, शायद वे लोग मुझे कन्वेंस
कर चुके थे. उन्होंने दरवाजा बंद करके बड़े से स्क्रीन पर एक फिल्म स्टार्ट करदी . बड़ी नग्न फिल्म थी. उसमे स्त्री -पुरुष के अंगों को खुलेतौर पर दिखाया गाया था. कुछ ही देर में मैंने महसूस किया जैसे किसीने
मेरे जिस्म में बारूद भरकर माचिस की तीली जला दी हो. मैं कामवासना की आग में झुलसने लगी.
सूरज- उस वक्त सूरज और अभी. क्या कर रहे थे ?
किरण- अभी मेरे कपडे उतार रहा था जबकि ब्रिज उस फिल्म कोएडजस्ट करने में लगा था.कभी उसकी आवाज को कम करता था और कभी तेज. कभी कभार वह किसी सीन को ज्यादा देर तक रोक दिया करता था और कभी उस सीन को जल्दी
से निकाल दिया करता था. बड़े भयानक द्रश्य थे, उन्हें देखते ही रूह कांपने लगती थी. मन के तार झंकृत होने लगते थे. जिस्म के अंदर भूचाल सा उठ खड़ा होता था. जी में आता कि उन दोनों को ही अपने ऊपर लिटा लूं
और फिर सांस थमने तक उन्हें अपने आप से ही लपेटे रहूँ. मगर लोक लाज के कारण मैं ऐसा बोल नहीं पाती थी. कुछ देर के बाद हम तीनों ही नग्न अवस्था में आ चुके थे. अभिप्रिय ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा था-
- तुम्हें ये जानकर हैरानी होगी कि मैं फिल्म लगाना भी नहीं जानता. अगर यहाँ पर ब्रिज नहीं आया होता तो हम इस फिल्म का आनंद नहीं उठा पाते. अब अगर कहते हो तो इसे यहाँ पर बुलाऊं. नहीं तो जाने दूं ? वैसे यह कहना
चाहूँगा कि इस तरह किसीका अपमान करना ठीक नहीं है.
किरण- मेरा इरादा किसीके अपमान करने का नहीं है. मैं चाहती हूँ कि मेरे आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचे , बस इतनी सी बात है.
ब्रिज- हम तो यारों के यार हैं. दोस्ती के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं. फिर भला ठेस पहुंचाने की बात ही कहाँ आती हैं. हम लोग आपको अपनी जान से ज्यादा आदर और प्यार देंगे.
सूरज- मतलब , उन लोगों ने तुमको बहुत बढ़िया तरीके से चंगुल में फंसा लिया था. बाद में क्या हुआ ?
किरण- हुआ वही जिसका डर था. उन दोनों ने मेरे जिस्म को रात भर नौंचा. वे हवसी थे. जिस्म के सौदागर. इस अबत को मैं समझ नहीं पायी. अभी, बहुत बड़े लीडर का बेटा था. मैंने उस पर भरोससा कर लिया . सोचा कि
कुछ नहीं होगा, अच्छा लड़का है. जिस तरह से वह मेरा पीछा कर रहा था , उसे देखकर मुझे उस पर दया आ गयी थी. मैंने विश्वाश कर लिया. उन लोगों ने मुझे ड्रिंक में मादकता बढाने वाली दवा मिला दी थी. उसका प्रभाव होते
ही मेरे तन मन में आग लगने लगी. उसीका फ़ायदा उताहते हुए अभी. ने मेरी इज्जत लूट ली. इसके साथ-साथ उन्होंने मेरी अश्लील फिल्म भी बना ली थी.
सूरज- इस बात का इल्म तुम्हें उसी वक्त हो गया था या बाद में हुआ ?
किरण- बहुत बाद में , उस रात तो मैंने सिर्फ यही महसूस किया था कि वे दोनों मुझसे प्रेम करते हैं और इसी कारण प्रेंम का इजहार करने में लगे हैं. जब उन्होंने ब्लू फिल्म स्टार्ट की तो बाद में उससे मैं बेताब होने लगी थी.
मेरा जिस्म जलने लगा था. शरीर में बम विस्फोट जैसे होने लगे. अभिप्रिय मुझसे बोला-
-तुम्हारा जिस्म ताजमहल की तरह चमक रहा है, ये गोलाईयां हिमालय की तरह ऊंची और सख्त हैं. बड़ा मजा आ रहा है. इन्हें चूमने का दिल करता है.
किरण- तो चूमो न , कौन मना करता है. ब्रिज भी अब अपना दोस्त हो गया है. य्ये भी जों करना चाहें, कर सकते हैं . मुझे कोई ऐतराज नहीं हैं. अब ये भी क्यों अपना दिल खट्टा करें ?
ब्रिज- थेंक यू डीयर. मैं तुम्हें देखते ही समझ गया था कि बड़े दिलवाली हो. समझ में आ जाता है. मैं तुम्हारी इन चिकनी जाँघों को चूमकर और तुम्हारे यौवन की घाटी में अपनी उँगलियाँ प्रवेश करके ऐसा सुख देना
चाहता हूँ जों आज तक तुमने कभी हासिल नहीं किया हो और न भविष्य में इस प्राप्त कर सको.
किरण- अच्छा जी, दावा अगर सही निकला तो इनाम मिलेगा और गलत निकला तब क्या सजा भुगतोगे ?
ब्रिज- जीवन भर गुलामी करूँगा सरकार. जों कहोगी करूँगा, अगर मेरा सिर पसंद आ गया हो तो इसे भी कलम करके पेश कर सकता हूँ.
अभी-तुम एक्स्ट्रा हो रहे हो ब्रिज. प्यार-मोहब्बत के सीजन में इस तारह की बातें अच्छी नहीं लगती हैं हैं. जब किरण ने कह दिया है तो ऐश करो. जितना चाहो प्रेंम करो,
किरण- मेरा जिस्म सुलग रहा है. ऐसा लगता है जैसे किसी ने इस पर मिट्टी का तेल छिडककर आग लागा दी हो. इस आग को किसी भी तरह सेबुझाओ.
अभी- मैं और ब्रिज इसी लिए तो यहाँ पर आये हुए हैं. हम लोग तुम्हारे शरीर की प्यास को बुझाना चाहते हैं, एक ऐसी तृप्ति का एहसास दिलाना चाहते हैं जिस पर तुम हमेशा गर्व कर सको.
ब्रिज- तुम्हारा कुंवारा बदन हमें भी दीवाना बना रहा है लेकिन हम चाहते हैं कि कोई भी काम जल्दबाजी में न किया जाए . अगर प्यार से प्यार करेंगे तभी इशक का असली सुख वसूल पायेंगे.

Friday, January 7, 2011

भाग-१५
मैं चाहता हूँ कि आप भी हमारी इस पक्की दोस्ती को एक्सेप्ट करें.
किरण- मैं समझी. आप कहना क्या चाहते हैं, स्पष्ट करें.
ब्रिज- जैसे हम साथ-प्साथ शराब का सुख उतहा रहे हैं वैसे ही अगर शारीरिक सुख भी लूटें तो कितना अच्छा रहेगा ?
अभी.- और इस कम में मेरा कोई ऐतराज नहीं है. हम मिलजुलकर प्यार बढ़ाना चाहते हैं.इसमें अलग एहे मजा आता है ?
किरण- तो उसके लिए दूसरे लड़की कहाँ हैं ? बिना पार्टनर के ये कैसा संभव है ?
सूरज- आपने बहुत सही सवाल किया, फिर ?
किरण- मेरा सवाल सुनकर दोनों ठहाका लगाकर हंस दिए बोले तुम हो न. तुम्हारे साथ दोनों ऐश करेंगे . अजी ऐश क्या करेंगे, आनंद देंगे. हम तो उलटा आपको ये सिखाएंगे कि जीवन का असली सुख क्या होता है.
ऐसे तो हर पल करोडों लोग अपने-अपने बेड पार्टनर के साथ मौज मस्ती करती हैं लेकिन उनमे से बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जों प्यार का वास्तविक सुख उठा पाते हैं. हमारी जों उम्र है इसके मुताबिक़ हमें अब मौज
मस्ती का सहारा लेना चाहिए. दिल में जों अरमान हैं, उन सभी को पूरा कर लेना चाहिए. बाद में जब बड़े हो जाते हैं तो तारह-तरह की बंदिशें हमारा रास्ता रोकती हैं. इसीलिए तो कहा गया है कि ज्यादा सयाना होना भी
ठीक नहीं होता. पहले ज़माना और था और अब क्रान्ति का युग है. इस युग में हम अगर मिल जुलकर सेक्स का आनंद उठाते हैं तो इसमें बुरा क्या हैं ?
किरण- यह क्या गज़ब कर रहे हो अभी. मैं वैश्या नहीं हूँ जों इस तरह का आचरण करूं,. हो सकता है कि कोई पेशेवर औरत भी अपने चरित्र से इतना नहीं गिरेगी जितना गिरने को तुम बोल रहे हो .
ब्रिज- ओह, ये क्या कह रही हैं आप ? ऐसी बात नहीं है जान. तुम जिस तरह से सोच रही हो वैसे सोचना बंद कर दीजिए. ऐसे हरगिज नहीं सोचा जाता. वी आर जस्ट फ्रेंड यार. फ्रेंड की तरह सलूक करोगी तो ठीक वरना
मैं यहाँ से चला जाउंगा. मेरे लिए लड़कियों की कोई कमी नहीं है. हजारों मौजूद हैं. इन्तजार करती हैं मेरा. रिक्वेस्ट करती हैं मुझसे . समझीं ? तो क्या वे सब भी बाजारू हो गयीं ?
अभिप्रिय- हाँ, डीयर. यह सच कह रहा है. हम लोग साथ में लेते हैं मजा. एक बार अगर तुम भी मजा लोगी तो बाद में बार-बार इसी तारह का सुख भोगने के लिए बोलोगी .
किरण- तो क्या फिर मैं हमेशा इसी तरह दो -दो लोगों को अपना जिस्म सौंपती रहूंगी . ?
अभी- ऐसे कौन बोलता है ? तुम अब भी आजाद हो. कोई भी काम तुम्हारी मर्जी के खिलाफ नहीं किया जा सकता. यहाँ आने के लिए भी तुम ही तैयार हुई थी, तुमने हाँ बोला तब मैंने इस फ़ार्म हाउस पर आने का फैसला
किया है. दिल पर हाथ रखकर बोलो क्या तुम्हारी भावनाएं नहीं मचल रही हैं. क्या तुम नहीं चाहती कि तुम्हारे जिस्म से जों शोले उठ रहे हैं , वे शांत किये जाएँ ?
किरण- मैं आपको जानती हूँ, आपसे प्यार करती हूँ. आपको यह जिस्म सौपकर मुझे कोई आत्मग्लानी नहीं होगी मगर ब्रिज को तो मैं नहीं पहचानती .
अभी.- ओहो, अच्छा ये बताओ कि तुम मुझे कितने सालों से जानती हो ?
किरण-आज ही तो मिले थे हम ?
अभी.- तो फिर ? धीरे-धीरे हम लोगों के बीच बातचीत हुई, एक दूसरे के विचारों का आदान -प्रदान हुआ और अब हम साथ में हैं. इसी तारह से होता है सब कुछ. कुछ देर के बाद ब्रिज को भी तुम जान ही जाओगी .
ब्रिज- हाँ, जब तुम इसकी दोस्त हो तो मेरी भी दोस्त हुई ना, अगर चाहो तो इससे पहले मैं आपको एक फिल्म दिखाता हूँ, आम भाषा में लोग इसे ब्लू फिल्म कहते हैं , मगर होती है बड़ी मजेदार , इसमें देखना
कि कैसे एक लड़की दो मजबूत मर्दों से एक साथ शारीरिक सम्बन्ध बानाने के लिए रिक्वेस्ट करती है और बाद
में वे लोग कैसे उसे चरम सुख तक पहुंचाते हैं. हम लोग दुश्मन नहीं हैं मेरी जान.
सूरज- तब क्या कहा आपने ? चुप हो गयी होंगी ?
किरण- नहीं, मैं चुप तो नहीं बैठी, थोड़ी देर तक उनकी अबतों का जवाब देती रही थी लेकिन वे समझ गए कि मैं कमजोर पद रही हूँ , और सच भी यही था. मैं कमजोर हो चुकी थी, शायद वे लोग मुझे कन्वेंस
कर चुके थे. उन्होंने दरवाजा बंद करके बड़े से स्क्रीन पर एक फिल्म स्टार्ट करदी . बड़ी नग्न फिल्म थी. उसमे स्त्री -पुरुष के अंगों को खुलेतौर पर दिखाया गाया था. कुछ ही देर में मैंने महसूस किया जैसे किसीने
मेरे जिस्म में बारूद भरकर माचिस की तीली जला दी हो. मैं कामवासना की आग में झुलसने लगी.
सूरज- उस वक्त सूरज और अभी. क्या कर रहे थे ?
किरण- अभी मेरे कपडे उतार रहा था जबकि ब्रिज उस फिल्म कोएडजस्ट करने में लगा था.

Wednesday, January 5, 2011

बेवफा खंडहर वाली , भाग-13
सूरज- तो क्या उसके कहने से आपने सिगरेट में भी दम मार लिया ?
अभिप्रिय- सिर्फ सिगरेट का नहीं बल्कि ड्रग्स का भी. उसमे ऐसा नशा मिलाया गया था, जों इंसान को अपना गुलाम बना लेता है. मैं तो एक सुट्टा मारते ही खुद को हवा में नाचता हुआ महसूस करने लगी , तभी उसने पूछा-
-स्वर्ग में उड़ रही हो ना ? यही है इसका मजा. दुनिया की कोई तकलीफ अब तुम याद ही नहीं रख पाओगी . सारे गम भूल जाओगी.
किरण- हाँ, सच कहते हो. मैंने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इसमें इतना मजा आता है.
अभिप्रिय- यह तो कुछ भी नहीं है असली मजा तो अभी बाकी है. जानती हो वो मजा क्या है ?
किरण- बताओ न.
अभिप्रिय- जिस्मानी सुख. एक बार अगर जवानी का यह रस चख लोगी तो बाकी के सारे रस तुम्हें फीके लगने लगेंगे. जिस किसी ने भी यह सुख उठाया है, वह धन्य हो गया है. मैं आपको अपने बंगलो पर ले चलूँगा . वहाँ पर फिर
आराम से हम दोनों पूरी रात जश्न मनाएंगे. वहाँ किसीको कुछ पता नहीं चलेगा . आप तो एअर होस्टेस हैं, और ऐसी सोसाइटी में सेक्स को एक आम बात समझा जाता है . मुझे लगता है कि आपने भी शायद पहले इसका आनंद उठाया होगा ?
किरण- जी नहीं, आज अगर मैं आपके साथ अकेले में डिस्को में डांस कर रही हूँ तो यह बहुत बड़ी बात है वर्ना मैंने कभी भी किसी के साथ ऐसा नहीं किया /
अभिप्रिय- क्या तुम्हारी सहेलियां भी इसका लुत्फ़ नहीं उठातीं ? वे तो कम से कम जरूर ही मजा लेती होंगी ?
किरण- लेती होंगी , मैंने कभी पूछा नहीं और उन्होंने बताया नहीं. कोई ऐसी बात किसीको बता भी सकती है क्या ?
अभिप्रिय- खैर जाने दो. ये बताओ किसी लड़के से कभी दोस्ती की है कि नहीं ?
किरण- की है न, अच्छी तरह से की है. और दोस्त मेरी आँखों के सामने है, उसने मुझी बांहों के घेरे में ले रखा है.
अभी- ये अदा भी हमें बहुत पसंद आई. सच कहूँ तो दिल मोह लिया. बड़ा अच्छा लगता है या सोचकर कि जिसे हम चाहते हैं वह हमारे सिवाय किसीको नहीं चाहती .
किरण- तुम मर्द लोग भी बड़े स्वार्थी होते हैं. खुद तो किधर भी मौज मस्ती करते फिरते हैं और जब हमारी बारी आती है तो उम्मीद करते हैं कि हम उनके सिवाय किसी गैर मर्द के साथ दोस्ती भी न करें.
अभी-हाँ, इस मामले में तो मैं वाकई स्वार्थी हूँ. यह सच है कि मुझे तुम्हारा किसीसे प्यार करना कभी रास नहीं आएगा. मैं चाहूँगा कि तुम सदा मुझे ही प्रेम करती रहो और इसमें मुश्किल भी क्या है ?
किरण- भला इसमें क्या मुश्किल होगी ? अगर मुझे मौक़ा मिला और हालात रहे तो जीवन भर मैं आपसे प्रेम करती रहूंगी. शर्त ये है कि......
अभी- अब क्या शर्त ? मैंने तो सूना है कि ' कोई शर्त होती नहीं प्यार में ' और अब आप कहती हैं कि एक शर्त है. फरमाइए , मैं सही तरीके से समझने की कोशिश करूँगा. अगर चाँद को जमीं पर लाना होगा तो लाउंगा . आसमां को
धरती पर झुकाना हो तब भी झुकाऊंगा . हर वो काम करूँगा जों एक सच्चा आशिक अपनी महबूबा के लिए करता है.
किरण- ऐसी मेरी कोई डिमांड नहीं है. मैं तो इतना भर चाहती हूँ कि आप भी मेरे ही तरह मुझे चाहते रहें और सिर्फ मुझ को ही चाहें.
अभी- मंजूर है . अब तक जों भी हुआ सो हुआ. अब ऐसा कभी नहीं होगा. मैं हर हालत में वफादार बनकर रहूंगा.
किरण- मुझे यहाँ पर अजीब सी मादकता का एहसास हो रहा है, कभी -कभी लगता है कि रंग -बिरंगी ये लाइटें बोलने लगेंगी ,म हसने लगेंगी, और कभी -कभी लगता है कि हम लोग हवा में उड़ रहे हैं.
अभी.- यही तो प्यार की निशानियाँ हैं. जब किसीको किसीसे इशक हो जाता है तो इस तरह के हालात बनने लगते हैं. इसीको कहते हैं इश्क का जादू . और यह जादू अब चल चुका है. चलो अब बंगलो की तरफ चलते हैं .
महरोली में मेरा एक फ़ार्म हाउस भी है. वहाँ पर नौकर के अलावा कोई नहीं रहता. कोई आता -जाता भी नहीं है. कहो तो वहाँ चलें, जहां चाहें .
किरण- मैं क्या जानूं कहाँ ठीक रहेगा. आप बेहतर जानते हैं, जहां इच्छा हो चलो.
अभी- पहले तुम्हारे इन गुलाबी होठों के रस तो पीने दो. वरना रास्ते में बड़ी अजीब स्थिति हो जायेगी. अब सब्र नहीं होता. तुम जैसी हसीना सामने हो तो साधू भी फिसल सकते हैं .
किरण- तुम बहुत बातूनी हो , बातों में तुमसे कोई नहीं जीत पायेगा.
अभी- और सेक्स में भी. बिस्तर मैं जितना सुख तुम्हें दे सकता हूँ, उतना साक्षात कामदेव भी नहीं दे सकते.
किरण- अच्छा तो अब बेशर्म भी होते जा रहे हो. हटो यहाँ से , मेरे होठ अब दुखने लगे हैं.