Saturday, July 23, 2011

गया के समाजसेवक मुंबई में

मुंबई, रानी आयुर्वेद कंपनी के मालिक और सुप्रसिद्ध समाजसेवक श्री सूर्यप्रकाश आजकल मुंबई के दौरे पर हैं. समाजसेवा के कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले सूर्यप्रकाश जी कई वर्षों से आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, उनके मुंबई आगमन पर मल्टी प्लस इण्डिया के राजीव चौधरी , राष्ट्रीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष और मुंबई संध्या के कार्यकारी संपादक मुकेश कुमार मासूम , साहित्यकार शिवपूजन पाण्डेय, डॉक्टर डी जे सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने सूर्या प्रकाश जी का स्वागत किया. आयुर्वेद जगत से जुडी हस्तियों से मुलाक़ात के बाद सूर्या प्रकाश जी गया के लिए रवाना होंगे

बाबा का चेला निकला चीटर


वाराणसी। योग गुरु बाबा रामदेव के निकट सहयोगी आचार्य बालकृष्ण फर्जी पासपोर्ट मामले में और फंसते जा रहे हैं। उन्होंने पासपोर्ट के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के जिन प्रमाण पत्रों का सहारा लिया वे फर्जी हैं।

गायब दस्तावेजों के बारे में पड़ताल
सीबीआई द्वारा कराए गए सत्यापन में स्पष्ट हो गया कि जिन अनुक्रमांकों से पूर्व मध्यमा और शास्त्री के प्रमाण पत्र जारी कराए गए हैं वे बुलंदशहर के एक संस्कृत महाविद्यालय के दो छात्रों के नाम के हैं। उधर, आचार्य बालकृष्ण के पासपोर्ट संबंधी मामले की जांच कर रही हरिद्वार पुलिस ने निगम पहुंचकर कार्यालय से गायब दस्तावेजों के बारे में पड़ताल शुरू की। जिन कर्मियों के पास जन्म और मृत्यु कार्यालय का दायित्व रहा है उनसे भी पूछताछ की गई।

फर्जी करार दी गई शास्त्री की डिग्री
बालकृष्ण के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के सिलसिले में दिल्ली से सीबीआई इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह शुक्रवार की सुबह विवि पहुंचे। उन्होंने कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र से मुलाकात की। कुलपति ने कुल सचिव डा. रजनीश कुमार शुक्ल और जांच समिति के सदस्य डा. सूर्यकांत यादव को प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए निर्देशित किया। करीब डेढ़ घंटे तक विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद बालकृष्ण के नाम से वर्ष 1991 में पूर्व मध्यमा और वर्ष 1996 में जारी शास्त्री की डिग्री फर्जी करार दी गई।

पासपोर्ट बनवाने में किया उपयोग
जिन अनुक्रमांकों से बालकृष्ण की पूर्व मध्यमा और शास्त्री की डिग्रियां हैं वे बुलंदशहर के राधाकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से बनवाई गई हैं। इन अनुक्रमांकों के आगे दो अलग-अलग छात्रों के नाम विश्वविद्यालय के अभिलेख में दर्ज हैं। सीबीआई इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन के लिए उपलब्ध कराई गई डिग्रियों पर बरेली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की मुहर भी लगी है। इससे साफ है कि इन प्रमाण पत्रों का उपयोग पासपोर्ट बनवाने में किया गया। कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया कि दोनों ही डिग्रियां विश्वविद्यालय द्वारा निर्गत नहीं हैं

मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ और अभिनेता ऋतिक रौशन को अपनी फिल्म "जिंदगी ना मिलेगी दोबारा" के प्रमोशन के लिए मुंबई की सड़कों पर खुलेआम बाइकिंग का आनंद लेना महंगा पड़ सकता है। फिल्मसिटी में शुक्रवार को बॉलीवुड की बॉर्बी डॉल कैटरीना ने फिल्म के प्रमोशन के लिए बाइक पर ऋतिक को बिठाकर घुमाया था। इस घटना को लेकर कैट और ऋतिक पर ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया जा रहा है।

कैट ने रॉयल इनफिल्ड मोटरसाइकिल पर ऋतिक को मुंबई की सड़कों के चक्कर लगवाए थे। सूत्रों की मानें तो कैट के पास बाइक चलाने का लाइसेंस नहीं है। इतना ही नहीं, बाइक राइडिंग के दौरान न तो कैटरीना ने और न ही ऋतिक ने ही हैलमेट पहन रखा था, जबकि ट्रैफिक नियमों केेेे अनुसार मुंबई में बाइक चलाने वालेेे और उसके साथ बैठे यात्री दोनों के लिए ही हैलमेट जरूरी है। हालांकि, कैट के एक करीबी दोस्त का कहना है कि कैटरीना के पास बाइक चलाने का इंटरनेशनल और नेशनल दोनों लाइसेंस मौजूद है। इसलिए कैट ने फिल्म में भी बाइक चलाई थी।

एक ट्रैफिक अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर कहा है कि - सेलिब्रिटीज आम इंसान के रोल मॉडल होते हैं। यदि वो ही इस तरह कानून तोड़ेंगे, तो आम लोगों को कानून न तोड़ने के लिए कौन प्रेरित करेगा। इसलिया ऎसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुल पनाग ने दिल्ली में बिना हैलमेट पहने बाइक चलाई थी। हालांकि, कानून तोड़ने पर उन्हें जुर्माना भरना पड़ा था।

ओस्लो. यूरोपीय देश नॉर्वे में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में 91 जानें चली गई हैं। शुक्रवार की रात हुई दो वारदात ने नॉर्वे को दहला दिया।

शुक्रवार की रात (भारतीय समयानुसार) सबसे पहले धमाका ओस्लो के सिटी सेंटर में मौजूद एक 17 मंजिली इमारत के पास हुआ। इस इमारत में नॉर्वे के प्रधानमंत्री का दफ्तर है। धमाके में 7 लोग मारे गए। धमाका इतना जबर्दस्त था कि इमारत की सब खि़ड़कियां टूट गईं। सेना ने सिटी सेंटर को अपने कब्जे में ले लिया।

इस धमाके के करीब दो घंटे बाद ओस्‍लो से करीब 40 किलोमीटर दूर उटोया द्वीप में चल रहे युवा राजनीतिक कॉन्फ्रेंस को निशाना बनाया गया। एक बंदूकधारी पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचा और उसने अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमलावर के हाथ में पिस्तौल और टेलीस्कोप लगी राइफल देखी गई। गोलीबारी में 84 लोगों की मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक हमलों के सिलसिले में नॉर्वे के ही एक 32 साल के शख्स को गोलीबारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसकी पहचान एंडर्स बेहरिंग ब्रीवीक के तौर पर की गई है। पुलिस का कहना है कि धमाके की जगह और जहां गोलीबारी हुई, दोनों जगहों पर इस शख्स को देखा गया। हालांकि, पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि ब्रीवीक का किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन से संबंध हो सकता है।

नॉर्वे में ये हमले किसने किए, इसे लेकर अभी तक कुछ ठोस पता नहीं चला है। हमले को विदेश में नॉर्वे की सेना की सक्रियता के बदले की कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है। नॉर्वे की वायुसेना के 6 एफ16 लड़ाकू विमान पिछले महीने तक भी लीबियामें सरकार विरोधी कार्रवाई में लगे थे। हालांकि इसकी संभावना कम ही है कि कर्नल गद्दाफी या उनके समर्थक नॉर्वे में इतना बड़ा हमला करवा सकते हैं।

नॉर्वे ने अफगानिस्‍तान में 500 सैनिक लगा रखे हैं। नॉर्वे के तीन अखबारों ने 2005-06 में मुहम्‍मद साहब का काटूर्न छाप कर मुस्लिम कट्टरपंथियों को खासा नाराज किया था। हमलों के कारण को इन बातों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।

हमले में अल कायदा का भी हाथ देखा जा रहा है, क्‍योंकि इस आतंकी संगठन ने पहले नॉर्वे में हमलों को लेकर सक्रियता दिखाई है। 2010 में नॉर्वे के तीन नागरिकों को आतंकी हमलों की साजिश रचने के सिलसिले में पकड़ा गया था। इनमें से एक को अल कायदा से विस्‍फोट करने की ट्रेनिंग मिली हुई थी। इन तीन में से एक शख्‍स ने तो वैसे ही बम तैयार करने की कोशिश की थी, जैसे बम का इस्‍तेमाल 2009 में न्‍यूयार्क सबवे को दहलाने की कोशिश और लंदन के 7/7 धमाकों के लिए इस्‍तेमाल किए गए थे।

हमले का पाकिस्‍तान से अभी तक कोई सीधा संबंध तो नहीं जुड़ा है, लेकिन एक पाकिस्‍तानपरस्‍त वेबसाइट ने हमले के तत्‍काल बाद यह मुद्दा उठा दिया। इसमें वेबसाइट ने कहा कि पाकिस्‍तान नॉर्वे में हुए जनसंहार को उससे जोड़ने की किसी भी अमेरिकी मुहिम का विरोध करेगा। पाकिस्‍तानकाखुदाहाफिज.कॉम नाम के वेबसाइट पर कहा गया है कि ओस्‍लो में आतंकी हमला अफगान युद्ध जारी रखने के समर्थक अमेरिकियों के लिए वरदान के रूप में है। जुलाई, 2010 में सीआईए पर ओस्‍लो में चीनी ठिकाने उड़ाने की साजिश रचने का शक है। वेबसाइट पर लेख के मुताबिक जर्मनी में सीआईए दफ्तर की ओर से इस हमले की योजना बनाई गई थी और चीनी मुसलमानों की भर्ती कर इसे अंजाम दिया जाना था, लेकिन नॉर्वे के कड़े आतंकविरोधी उपायों के चलते यह नाकाम हो गया।

पाकिस्‍तान को दुनिया में मौजूद खतरों से आगाह कराने वाले, नीति निर्धारक समाचार वेबसाइट होने का दावा करने वाले पाकिस्‍तानकाखुदाहाफिज.कॉम ने तो यहां तक कहा है कि अमेरिका, भारत के साथ मिल कर पाकिस्‍तान के हितों पर चोट करने की योजना बनाता रहा है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका में कुछ लीक हुए दस्‍तावेज या सूत्र के हवाले से नॉर्वे में हुए आतंकी हमले को पाकिस्‍तान के अल कायदा आतंकियों से जोड़ेगा, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित होगा।

क्यों हुए हमले
यूरोपीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक नॉर्वे में हुए दो हमलों के पीछे तीन संभावित वजहें हो सकती हैं। अफगानिस्तान में अमेरिका की अगुवाई में नाटो सेनाएं तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में जंग लड़ रही हैं। नाटो सेना में नॉर्वे के सैनिक भी शामिल हैं जो अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रहे हैं। नॉर्वे नाटो के संस्थापक देशों में से एक है। तालिबान और अल कायदा का गठजोड़ जगजाहिर है। यही वजह है कि जानकार मानते हैं कि मई में ओसामा की हत्या के बाद बदला लेने की ताक में अल कायदा नॉर्वे पर हुए हमले के पीछे हो सकता है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों को यह शक भी है कि पिछले साल नॉर्वे के एक अखबार ने कुछ कार्टून छापे थे, जिन्हें इस्लाम के खिलाफ माना गया था। इससे कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क गए थे। वहीं, कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि नॉर्वे पर हुए हमले वहां के प्रधानमंत्री जेन्स स्टॉल्टेनबर्ग की अगुवाई वाली उदार सरकार को गिराने की साजिश भी हो सकती है।

नगीना बिजनौर। नगीना क्षेत्र के ग्राम काजीवाला निवासी एक विवाहित व्यक्ति की लगभग 12 वर्ष पहले जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। परिजन उसे खो नदी के समीप दफना आये थे। पर शुक्रवार को बारह साल बाद वह अपने घर आ पहुंचा। उसके घर आने से जहां घर में खुशी है वहीं परिजन इस बात पर विश्वास भी नहीं कर पा रहे हैं।

ग्राम काजीवाला निवासी तुलाराम हरिजन के पांच पुत्रों व तीन पुत्रियों में सबसे बडे़ पुत्र डालचंद (पप्पू) को 9 जून 1999 की रात घर में ही सोते समय जहरीले सांप ने डस लिया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने उसे हजारों ग्रामीणों के साथ समीप खो नदी के निकट दफना दिया था। शुक्रवार की देर शाम डालचंद उर्फ पप्पू अपने गुरु के साथ घर पहुंचा तो परिजन भौचक्के रह गये। सभी ने डालचंद को पहचानते हुए गले से लगा लिया। खबर आसपास के क्षेत्रों में फैली तो हजारों की तादात में लोग उसके घर जा पहुंचे।

डालचंद उर्फ पप्पू के साथ आए उसके गुरु रमेशनाथ निवासी ग्राम गढवासा जिला बुलंदशहर ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व वह खो नदी के किनारे सांप व जड़ी-बूटियों की तलाश कर रहे थे। तभी उन्होंने पानी के किनारे झाड़ियों में एक लाश फंसी देखी, जिसे देखकर उन्हें लगा कि इसकी मौत सांप के काटने से हुई है। वह उसे उठाकर अपने डेरे पर ले गये, जहां मंत्रों व जड़ी-बूटियों से उपचार के बाद वह जीवित हो गया। तीन दिन पूर्व वह ग्राम गुनियाखेड़ा थाना नूरपुर में भिक्षा मांग रहे थे तभी वहां खड़ी एक महिला ने पप्पू को पहचान लिया। पप्पू ने भी उसे पहचान लिया तथा वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों को बताया कि यह मेरी ममेरी बहन है।

डालचंद पप्पू की बड़ी पुत्री मोनी की शादी भी गुनियाखेड़ी ग्राम में ही हुई थी। मोनी को जब बुलाया गया तो उसने भी पहचान लिया। तभी रानी ने ग्राम काजीवाला खबर दी। खबर सुनते ही पप्पू की माता मुन्नी, पत्नी निर्मला, भाई दीपचंद व अतर सिंह ग्राम गुनियाखेड़ी पहुंचे जहां सभी ने पप्पू को पहचान लिया।
भारत से
मुंबई विस्फोट : मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हुई




मुंबई में 13 जुलाई को हुए तीन सिलसिलेवार विस्फोटों के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। विस्फोट में घायल एक व्यक्ति ने यहां जे जे अस्पताल में दम तोड़ दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, जवेरी बाजार में हुए विस्फोट के कारण सुरेंद्र सिंह (30) का शरीर काफी जल गया था। उनकी सुबह मौत हो गई।

सूत्रों के मुताबिक, जेजे अस्पताल में विस्फोटों के बाद भर्ती जिन 22 अन्य लोगों का इलाज किया जा रहा है, उनमें से आठ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। ओपरा हाउस में हुए विस्फोट के बाद सिर में चोट लगने से गंभीर रूप से घायल हुए श्रीपाल मुझापुरा (35) की हरकिशनदास अस्पताल में शुक्रवार को मौत हो गई। इस अस्पताल में भर्ती 12 घायलों में से पांच की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इन विस्फोटों में कुल 129 लोग घायल हुए थे जबकि अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है।

Friday, July 22, 2011

हुक्का ही तो पीया , डाका तो नहीं डाला ..........गिरफ्तार युवाओं का सवाल

हुक्का ही तो पीया , डाका तो नहीं डाला ..........गिरफ्तार युवाओं का सवाल

मुंबई। मुंबई में एक बार में हुक्का पीना कुछ नौजवानों को भारी पड़ गया। हुक्का पीने की वजह से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के इशारे पर पुलिस की छापेमारी हुई और कई युवक-युवतियों को हिरासत में ले लिया गया। हुक्का पीना सेहत के लिए नुकसानदायक है इसमें कोई शक नहीं लेकिन हुक्का पीना कोई जुर्म नहीं है बशर्ते उसे सार्वजनिक जगह पर या वहां पिया जाए जहां पीने की इजाजत नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि गलत तरीके से बार चलाने वाले पर कार्रवाई हो या फिर बार में उसकी सेवा लेने वालों पर।

ये मामला मुंबई के मुलुंड इलाके का है। बार का नाम है शीतल-समुद्र। भारतीय युवा मोर्चा की शिकायत के बाद पुलिस ने इस बार में अचानक छापा मारा और यहां से 11 लड़कों और 19 लड़कियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के बाद इन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए भेज दिया गया। फुर्सत के लम्हों में बेफिक्री के कुछ पल बिताने वाले नौजवानों को हिरासत में लिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं:-

हुक्का ही तो पिया है, डाका तो नहीं डाला-चोरी तो नहीं की है!

-क्या हुक्का पीना कानून का उल्लंघन है?

-अगर नहीं तो इन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?

-अगर रेस्तरां में गैरकानूनी तरीके से हुक्का रखा गया था तो ये किसकी गलती है?

-रेस्तरां मालिक और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नौजवानों पर कार्रवाई क्यों की गई?

-क्या अब पुलिस नैतिकता के ठेकेदारों के इशारे पर काम करेगी?

बीजेपी कार्यकर्ताओं का दावा है कि गैरकानूनी तरीके से यहां हुक्का पिलाया जा रहा था। यही नहीं, हुक्का पीने वालों में नाबालिग तक थे। अपनी बात साबित करने के लिए उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन का भी दावा किया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हुक्के से सेहत को नुकसान को देखते हुए सार्वजनिक जगहों पर हुक्का पिलाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बाद से होटल और रेस्तरां में हुक्का बार पर रोक लगी है। कोर्ट के आदेश के बाद केवल हुक्का बार के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत है।

सवाल उठता है कि अगर इस रेस्तरां के पास हुक्का बार चलाने का लाइसेंस नहीं था तो ये रेस्तरां चलाने वालों की गलती है फिर इसकी सजा हुक्का पीने वालों को क्यों दी गई? गलत तरीके से हुक्का बार चलाने वालों पर पुलिस ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की? पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के हंगामे का इंतजार क्यों करती रही?

सिगरेट से ज्यादा नुकसानदायक है हुक्का

हुक्का पीने वाले तर्क देते हैं कि इसमें धुआं पानी से फिल्टर होकर आता है, इसलिए सारे नुकसानदायक तत्व पानी में घुलकर छन जाते हैं। इसलिए उन्हें ये सिगरेट की तुलना में कम खतरनाक लगता है लेकिन जानकारों के मुताबिक हुक्के में पानी होता है, इसलिए इसे ज्यादा जोर लगाकर खींचना पड़ता है और उतनी ही जोर से धुआं भी अंदर जाता है इसीलिए नुकसान भी ज्यादा होता है। इससे ज्यादा निकोटिन और कार्सिनोजेंस फेफड़े में जाती है।

सिगरेट की तुलना में हुक्का के धुएं में आर्सेनिक, लेड और निकेल जैसी जहरीली धातुओं का स्तर ज्यादा होता है। चूंकि हुक्का लंबे समय तक और ज्यादा दम लगाकर पिया जाता है, इसलिए ये खतरे बढ़ जाते हैं। हुक्का पीने से मुंह, फेफड़े और पेट का कैंसर, दिल के रोग और दांतों की बीमारियों का खतरा रहता है।

एक घंटे तक हुक्का गुड़गुड़ाने पर 100 से 200 सिगरेट के बराबर धुआं फेफड़ों तक पहुंच जाता है यानी सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाली तमाम बीमारियां हुक्के से भी होती हैं। इतना ही नहीं एक ही माउथपीस के इस्तेमाल से कई संक्रामक रोग फैल सकते हैं।