Friday, March 4, 2011

उड़ीसा में एक निजी स्टील प्लांट के अधिकारी को कुछ लोगों ने जिंदा जला दिया है. यह घटना बोलांगिर शहर में तितलागढ़ में एक फैक्ट्री के बाहर हुई. हमलावरों ने अधिकारी के वाहन को आग लगाई जिसकी लपटों में जलने से अधिकारी की मौत.

ग्रेफाइट इंडिया लिमिटेड पोमैक्स स्टील डिवीजन में डिप्टी जनरल मैनेजर आरएस रॉय प्लांट से बाहर अपनी जीप में निकल रहे थे. उनके साथ दो अन्य लोग दोपहर का खाना खाने निकले. पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सदांगी ने बताया कि कुछ निलंबित कर्मचारी जो प्लांट के बाहर पिछले कई महीनों से धरना दे रहे हैं उन्होंने रॉय की जीप को रोक लिया.

इसके बाद उन्होंने ड्राइवर और अन्य अधिकारियों को जीप से उतर जाने के लिए कहा. जैसे ही ये लोग जीप से उतरे कुछ लोगों ने अचानक गाड़ी को आग लगा दी जबकि उस समय आरएस रॉय जीप में ही बैठे थे. लपटों में बुरी तरह झुलसने की वजह से डीजीएम रॉय को नाजुक हालत में तितलागढ़ के अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों के मुताबिक वह 90 फीसदी तक जल चुके थे.

इसके बाद उन्हें बोलांगिर के अस्पताल भी भेजा गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को सूचना मिली थी कि प्लांट अधिकारी उन्हें नौकरी से निकालने की योजना बना रहे हैं जिससे वे भड़के हुए थे. पुलिस के मुताबिक जीप को तो आंदोलनरत मजदूरों ने ही रोका लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उसमें आग किसने लगाई.

मीडिया में रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें देर रात गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया और अब उनके अन्य साथियों को पकड़ने के लिए पुलिस कोशिशों में जुटी है. इस घटना के बाद से ही रोष का माहौल है और स्टील अधिकारियों ने सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की


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भुवनेश्वर : उड़ीसा में एक प्राइवेट स्टील कंपनी के डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) को उन वर्करों ने गुरुवार को जिंदा जला दिया, जिन्हें डीजीएम ने एक दिन पहले बर्खास्तगी का नोटिस दिया था।
यह घटना बोलंगीर जिले के तीतलागढ़ में हुई। यह जगह राजधानी भुवनेश्वर से 400 किलोमीटर दूर है। डीएसपी ए.के. सारंगी ने बताया कि जीकेडब्ल्यू लिमिटेड के पॉमेक्स स्टील डिविजन के कुछ वर्कर साइट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। तभी डीजीएम राधेश्याम रे (55 वर्ष) लंच के लिए घर जा रहे थे। करीब 30 वर्करों ने डीजीएम की गाड़ी रोकी और उसमें से ड्राइवर और कंपनी के एक अन्य कर्मचारी को बाहर निकलने के लिए कहा। जब वे बाहर आए तो वर्करों ने पेट्रोल और केरोसिन डालकर गाड़ी में आग लगा दी। डीजीएम को गाड़ी से निकलने नहीं दिया गया। वह मदद के लिए चिल्लाते रहे। वहां से अस्पताल ले जाने के क्रम में डीजीएम की मौत हो गई।
एनसीआर में हो चुका है ऐसा
3 सितंबर 2008 को ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैजियानो कंपनी के मैनेजर ललित चौधरी की हड़ताली कर्मचारियों ने उनके ही कैबिन में हत्या कर दी थी। हड़ताली कर्मचारी बाहर धरना दे रहे थे। चौधरी ने कुछ लोगों को मीटिंग के लिए बुलाया, लेकिन बाकी कर्मचारी भी अंदर घुस गए और उन्हें पीट-पीट कर मार दिया।
साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में गत 13 नवंबर को एलाइड निप्पॉन कंपनी ने कई मजदूरों को काम से निकाल दिया, जिसके विरोध में मजदूरों ने फैक्ट्री में तोड़फोड़ की थी। इस संघर्ष में एचआर हेड योगेंद्र चौधरी की मौत हो गई थी।

Thursday, March 3, 2011

कुंवारी सुहागिन , भाग-२
अमृता- मै दुनिया से नहीं डरती सर. बस मुझे कविता लेखन सिकह दीजिए और मंच पर चांस दे दीजिए.
पूजन- कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है, जैसे तुम्हें कविता पसंद है, उसी तरह हमें भी कुछ पसंद आ सकता है, उसे दे पाओगी ?
अमृता- आप बोलिए तो सही, जितनी फीस चाहेंगे मैं डैडी को बोल दूंगी .
पूजन- मुझे इन लाल होठों का चुम्बन चाहिए. यही मेरी धन दौलत है. यह मुझे दे पाओगी ?
अमृता- मै जाती हूँ सर. आप तो गंदी बात करते हैं. मैं नहीं रुकूंगी यहाँ पर. मै तो आपको शरीफ समझती थी लेकिन आप तो उस्ताद निकले. क्या इसी खातिर अब तक शादी नहीं की ? गुलछर्रे उड़ाने
के लिए ही कुंवारे बने बैठे हो ? मुझे नहीं सीखनी कविता. इस तरह तो तुम मुझे ही कविता बना डालोगे .
पूजन- अरी बावरी ... कैसी बच्चों जैसी बात करती हो ? मेरे ख़याल से अब तुम १६ साल से कम की नहीं हो. स्वीट सिक्सटीन हो. यही उम्र होती है प्यार करने की, बाद में तो उलझन ही उलझन हैं.
मेरी करीब आकर बैठ जाओ. मैं जानता हूँ की तुम्हारे मन में भी प्यार का खेल खेलने की तमन्ना है. मुझे मालूम है की बहुत दिनों से तुम मेरे घर के सामने से बन ठनकर क्यों निकलती हो ? चाहकर
भी तुम मुझे छोड़कर जा नहीं पाओगी, क्योंकि तुम खुद ही यहाँ आना चाहती थी और अब , जबकि मौक़ा मिल गया है तो तुम कैसे जा सकती हो ?
अमृता- अच्छा जी, आप क्या ज्योतिषी हैं जों सबके मन की थाह जान लेते हैं . आपको कैसे पता चला ? सच-सच बताओ तो मैं रुकती हूँ .
पूजन- मैं कई दिनों से महसूस कर रहा था की तुम यहाँ से बड़ी प्यासी नजरों से घूरती रहती थीं, मै समझ गया की अमृता अब यौवन की दहलीज पर कदम रख चुकी है , इसलिए आनंद का कोई मार्ग खोज रही
है. मुझे तुम्हारा चेहरा बहुत अच्छा लगता है. जब तुम हँसती हो तो तुम्हारे गालों में जों गड्ढे पड़ते हैं, ये मेरे मन को मोह लेते हैं. मैं बावरा सा हो जाता हूँ. कई बार तो रात को सपने में भी तुम्हारे साथ रोमांस
का स्वाद चख चुका हूँ. खूब मजे किये हैं तुम्हारे साथ, भले ही सपने में ही सही.
अमृता- यही बात मै कहने वाली थी. एक रात मैंने सपना देखा की मै तुम्हारे साथ यहाँ से बाहर किसी शहर में काव्य पाठ करने गयी हूँ, वहाँ पर होटल में हमारे लिए अलग- अलग कमरे बुक हैं मगर मैं आपके
कमरे में न जाने कैसे पहुच गयी हूँ, और फिर वहीं पर तुमने मेरे साथ गंदा काम कर दिया है.
पूजन- ये क्या बार -बार तुम गन्दा-गंदा कहते रहती रहती हो . प्यार कोई गंदी चीज नहीं है. गालों या होठों को चूमना भी कोई गंदी बात नहीं है. यह तो प्यार को इजहार करने का एक तरीका है. अब एक बात तो
साफ़ हो गयी है की जों तुम्हारे मन में है वही मेरे मन में भी है. हम दोनों एक ही पथ के राही हैं.
अमृता- अब मैं चलूँ, देर हो रही है, कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा ?
पूजन- दुनिया की फ़िक्र छोड़ दो मेरी जान. दुनिया तो न जाने क्या- क्या कहती रहती है ? अपने दिल की सुनो और वही करो जिसे तुम्हारा दिल और दिमाग चाहता है.
अमृता- देखो न मेरा दिल कितनी जोर-जोर से धड़क रहा है.
पूजन- यह धडकन डर के लिए नहीं है बल्कि मोहब्बत के लिए है. तुम मुझसे मोहब्बत करने लगी हो, शायद इसलिए दिल धड़क रहा है.
अमृता- मैं तो अभी १६ साल की हूँ और आप ४० की उम्र के हैं. मेरे पिता की उम्र के हैं आप . आपके साथ प्यार अटपटा नहीं लगता ?
पूजन- बिलकुल अटपटा नहीं लगता. आखिरकार तुम्हें बनही २४ साल बाद ४० साल का होना ही है. इसमें कौन सी नई बात है.
अमृता- लोग तो हसेंगे इस सम्बन्ध पर .
पूजन- उन्हें हँसने दो, हमें अपना काम करने दो. मेरे करीब आ जाओ, मेरी बांहों में समा जाओ. प्यार का ऐसा मजा चखाउंगा की सारा डर निकल जाएगा .
पूजन ने झपट्टा मारकर अमृता को अपने बाहुपाश में कास लिया. अमृता का दिल सचमुच धड़क रहा था. उसके सीने के उभार जब ऊपर-नीचे होते तो पूजन की आँखों में वासना की चमक बढ़ जाती थी. उसने
अमृता के उन उभारों पर अपने दोनों हाथ रख दिए और उन्हें आहिस्ता-आहिस्ता दबाने लगा . अमृता की साँसें मानो थम गयीं. उसने अपनी आँखें बंद करलीं और अपने आपको ढीला छोड़ दिया/. उसकी चुप्पी देखकर
पूजन का हौसला और भी बढ़ गया. उसने अमृता के सुख होठों पर अपने होठ रख दिए और उसके मुख में अपनी जीभ घुमाने लगा . अमृता कुंवारी थी, उसने हाल में यौवन कीसीढ़ी पर कदम रखे थे, पूजन के हाथो
का दवाब अपने सीने पर पाकर वह बेहद उत्तेजित होने लगी.

Wednesday, March 2, 2011

कुंवारी सुहागिन
अमृता की आँखें सेक्सी थीं, होठ ऐसे जैसे शराब से भरा हुआ जाम हो. उसके गालों से चमक मारती थी और जब हँसती तो अभिनेत्री प्रीती जिंटा की तरह गालों में गड्ढे पद जाते थे. हँसती तो जैसे फूल झरते
थे, उसे देखने के लिए मनचलों की कटार लगी रहती थी, उसके साथ मेल जोल बढाने वालों की कमी नहीं थी मगर अमृता किसी को भाव ही नहीं देती थी. वह तो अपनी पढाई में ही मगन थी. उसकी खूबसूरती
उसके लिए कितन बड़ा बवाल बन जायेगी , यह उसने कभी सोचा भी नहीं होगा. वह जितनी ज्यादा हसीन थी , उससे कहीं ज्यादा जहीन भी थी. जब वह पूजन टीचर के घर के सामने से होकर गुजरती तो
पूजन उसे एकटक निहारता रह जाता . पूजन सरकारी टीचर तो था ही साथ में नामचीन साहित्यकार भी था. उसकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी थीं और कवी सम्मेलनों में भी पूजन की तूती बोलती थी.
नाम तो उसका अच्छा खासा बड़ा था मगर प्यार से लोग उसे पूजन बुलाने लगे थे. धार्मिक प्रवृति का होने के कारण भी यह नाम उन पर सटीक ही बैठता था. उम्र तो ढलान पर थी, ४० पार कर चुके थे मगर
अपनी तुलना सलमान खां से करके खुश हो लिया करते थे. किसी कारणवश शादी नहीं कर पाए थे, मगर इसका फ़ायदा भी उठाने से नहीं चूकते थे. अपने साथियों से कहते की साहित्य की साधना में विघ्न न
होने पाए इसलिए उन्होंने अब तक कुंवारा रहने का व्रत लिया है. हांलाकि चालाक इतने थे की कभी भी स्पष्ट यह नहीं कहते थे की वे जीवन भर शादी नहीं करेंगे . अमृता ने जी भरके श्रृंगार किया था. आज वह
न जाने किस मूड में थी की थोड़ी सी लिपस्टिक भी लगाली, वैसे आमतौर पर वह इसका इस्तेमाल नहीं करती थी. उसके होठ पहले से ही सुर्ख लाल थे , शायद इसीलिए उसे लिपस्टिक की जरूरत नहीं पडी थी.
पूजन के घर के सामने आकर अमृता ठिठक गयी, उसने देखा की पूजन उसे एकटक घूर रहा था, उसके होठों पर मुस्कान थी, न जाने क्यों अमृता अपने आपको रोक नहीं पाई और मुस्कान के जवाब में वह भी मुस्करादी .
पूजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा . १६ साल की अमृता के दिल में हलचल सी मचने लगी . पूजन उसे बुला रहा था. -
- सुनिए, हाँ, आपसे ही कह रहा हूँ. इधर आइये न .
अमृता- मैं ? मुझे तो कहीं जाना था, अर्जेंट काम है.
पूजन- तो क्या हुआ , चली जाना, पहले बात तो सुनती जाओ.
अमृता इस बार कोई विरोध नहीं कर सकी, वह पूजन के पास चली गयी. पूजन के कहने पर उसने बाहर का दरवाजा भी बंद कर दिया. पूजन बोला-
- बहुत खूबसूरत हो तुम. और तुम्हारी कविता भी सुन्दर है. मैंने किसी मैग्जीन में पढ़ी थी. अगर थोड़ी सी गंभीरता लाओ तो तुम भी प्रसिद्धि पा सकती हो .
अमृता - थेंक यू सर. यह मेरा पहला प्रयास था. वो तो संपादक जी की महरबानी की उसे पब्लिश कर दिया.
पूजन- संपादक जी की नहीं,, मेरे महरबानी थी. जी हाँ, गजेन्द्र मेरा शिष्य है, जिस दिन डाक से तुम्हारी कविता उसके पास पहुँची , मै वहीं पर बैठा हुआ था. मैंने तुरंत उसे पब्लिश करने का आदेश दिया.
अमृता- अच्छा ... ये बात है. तभी तो मै सोच रही थी की संपादक अचानक कैसे दयालु हो गया. कई जगह से तो कवितायें लौट आयी थी, आप मुझे सिखाइये न सर . मै भी आपकी तरह मंचों पर काव्य पाठ
करना चाहती हूँ, जब आपके पत्र-पत्रिकाओं में देखती हूँ तो सोचती हूँ की काश , मैं भी ऐसी बन पाती.
पूजन- कोई बात नहीं अमृता. मै कोशिश करूँगा , लेकिन ध्यान रखिये की काव्य सृजन ऐसी विधा नहीं है जिसे सीखा जा सके, यह तो गोड गिफ्टेड होती है.
अमृता- लेकिन बिना गुरु तो ज्ञान नहीं मिल सकता न .
पूजन- उसके लिए बहुत मेहनत करनी होगी . जिस तरह से सोना तपता है, उसी तारह तुम्हें भी तपना होगा.
अमृता- मेहनत में कोई कसर नहीं छोडूंगी सर . जी जान लगा दूंगी , बस अपनी शिष्या बना लीजिए.
पूजन- तुम्हारे घरवाले इसके लिए राजी हो जायेंगे ?
अमृता - हाँ क्यों नहीं ? उन्हें भला क्या ऐतराज हो सकता है ? वे तो मेरी इच्छाओं का सम्मान करते हैं, काहहते हैं की मैं आगे बढ़ सकूं .
पूजन- रात-रात को अकेले यहाँ रहना पड सकता है, मै अकेला रहता हूँ , अगर कोई इस बारे में बात बनाएगा तो ?
अमृता- मै दुनिया से नहीं डरती सर. बस मुझे कविता लेखन सिकह दीजिए और मंच पर चांस दे दीजिए.
पूजन- कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है, जैसे तुम्हें कविता पसंद है, उसी तरह हमें भी कुछ पसंद आ सकता है, उसे दे पाओगी ?
अमृता- आप बोलिए तो सही, जितनी फीस चाहेंगे मैं डैडी को बोल दूंगी .
पूजन- मुझे इन लाल होठों का चुम्बन चाहिए. यही मेरी धन दौलत है. यह मुझे दे पाओगी ?
अमृता- मै जाती हूँ सर. आप तो गंदी बात करते हैं.

देश की सबसे महंगी शादी में बराती तो बराती भगवान को भी दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ाया गया। हरियाणा के पूर्व विधायक सुखबीर सिंह जौनपुरिया की बेटी योगिता और दिल्ली के कांग्रेसी नेता कंवर सिंह तंवर के बेटे ललित तंवर की शादी जिसने भी देखी उसके मुंह से सिर्फ वाह निकला। इस शादी में राजस्थान के सालासर बालाजी मंदिर के नाम 71 लाख रुपये का चेक दिया गया। आसपास के मंदिरों को भी लाखों रुपये की भेंट दी गईं। करीब 250 करोड़ की इस शादी दूल्हे का टीका ढाई करोड़ का किया गया और परिवार के 18 सदस्यों का टीका 1-1 करोड़ से किया गया। में शरीक हुए करीब 2 हजार बारातियों को 30-30 ग्राम के चांदी के बिस्कुट व एक-एक सफारी सूट दिए गए।

शादी के पंडाल से करीब 4 किलोमीटर पहले से ही जगमगाती लाइटिंग की गई थी। बरातियों के रास्ते फूलों से महक रहे थे। जो भी यहां से गुजरता था उसके मुंह से यह ही निकलता था कि ऐसी शादी न कभी देखी और न सुनी। बरातियों के स्वागत व पंडाल सजाने के लिए फूलों का इंतजाम कोलकाता से लेकर बैंकॉक तक से किया गया था। डेढ़ सौ से ज्यादा व्यंजन थे। इन व्यंजनों में चांदनी चौक की चाट से लेकर हैदराबादी बिरयानी तक थी। 7 घोड़ों वाले रथ पर बैठकर दूल्हा जैसे ही विवाह मंडप में पहुंचा तो रंगबिरंगी आतिश बाजी से पूरा आसमान भी सतरंगी हो गया।

इस शादी में कई हजार लोग शरीक हुए। आसपास के सभी गांवों को इस शादी में निमंत्रण दिया गया था। बरातियों को 11 हजार रुपये से लेकर 21 हजार रुपये तक भेंट में दिए गए। सगाई पर दूल्हे को 45 करोड़ रुपये का हेलिकॉप्टर दिया गया था। अब कंवर सिंह तंवर की ओर से रिसेप्शन 6 मार्च को अशोका होटल में किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह रिसेप्शन और भी भव्य होग
जबलपुर।। जबलपुर के सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में परीक्षा पास कराने की एवज में छात्राओं के साथ कथित तौर पर इज्जत का सौदा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के दो सीनियर अफसरों सहित अब तक 3 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में परीक्षा में पास कराने के एवज में छात्राओं पर अनैतिक कार्य के लिए दबाव डाला जाता था। यह आरोप एमबीबीएस की एक छात्रा ने लगाया है। उसका आरोप है कि परीक्षा में पास कराने के लिए उससे पैसों की मांग की गई थी और कलर्क राजू खान के पास जाने को कहा गया था।

इस मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने राजू को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ के बाद पुलिस ने रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के दो अधिकारियों, उप सचिव परीक्षा रवीन्द्र काकोडिया और परीक्षा नियंत्रक एस. एस. राणा को भी गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं रिकॉर्ड जब्त किए जाने की कार्रवाई भी की गई है और कई कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

एएसपी सत्येंद्र शुक्ला ने बुधवार को बताया कि छात्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उससे 30 हजार रुपए मांगे गए थे और राजू से मिलने को कहा गया था। पुलिस मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाली एक छात्रा की तलाश कर रही है।

सूत्रों का दावा है कि राजू के कई प्रभावशाली लोगों से सम्बंध हैं और वह उन्हीं लोगों के इशारे पर यह कार्य करता था। उधर, पुलिस इसे सिर्फ पैसे लेकर पास कराने का मामला बता रही है, जबकि छात्राओं ने तीन सदस्यीय महिला समिति के सामने आप बीती सुनाई ह

ओंकारेश्वर/मोरटक्का (खंडवा). शाजापुर से ओंकारेश्वर दर्शन के लिए जा रहे संतों की कार मंगलवार सुबह करीब आठ बजे मोरटक्का पुल पर ओवरटेक करते समय नर्मदा में जा गिरी, जिसमें शाजापुर जिले के चार संतों की मौत हो गई, वही कारचालक बच गया।

ये सभी महाशिवरात्रि पर नर्मदा में डुबकी लगाने जा रहे थे। पुलिस के अनुसार अल्टो एमपी-42 सी-0574 में सवार नरसिंहदास महाराज (68) किलोदा, सिया वल्लभदास महाराज (60) ग्राम गावड़ी, रामचंद्र महाराज (60) किल्लौद एवं अंबारामदास महाराज (60) नाहरखेड़ा की घटना स्थल पर ही मौत हो गई।

कार चालक श्यामलाल उर्फ बंटी पिता मांगीलाल ग्राम किल्लौद मौत के मुंह से लौट आया। मोरटक्का चौकी प्रभारी पीसी कालोया ने बताया टोल टैक्स बेरियर से क्रेन बुलाकर कार नर्मदा से निकाल ली गई है।

इस दौरान मोरटक्का पुल से यातायात रोककर नए एक्वाडक पुल से चार पहिया वाहनों को रवाना किया।

बस-जीप भिड़े,6 महिलाएं मृत

खंडवा हरसूद रोड पर मंगलवार शाम करीब 5 बजे जीप-बस भिड़ंत में 6 महिलाओं और एक पुरुष की की मौत हो गई, बकि 4 लोगों को गंभीर हालत में इंदौर एमवायएच में भर्ती किया गया है।

जीप में 22 लोग सवार थे,जो इंदौर निवासी रामपाल गिौड़ की सगाई कार्यक्रम में भाग लेकर नया हरसूद से खंडवा की ओर आ रहे थे। मरने वालों में नीतू जयपाल, अनीता सिंह, रमाबाई बरखेड़ी, रेश्माबाई, लक्ष्मीबाई और मानकुंवरबाई सिंह शामिल हैं।

ये हैं गंभीर घायल

राजेश जायसवाल,रामपाल मानसिंह,रेखाबाई कैलाश,5 वर्षीय यश कैलाश,कैलाश व एक अन्य।

ट्राला ने टक्कर मारी,छह मरे


मंगलवार दोपहर देवास-गांधीनगर नेशनल हाईवे स्थित माही नदी पुल से दो वाहन ट्राले की टक्कर से 50 फीट नीचे गिर गए। हादसे में छह लोगों की दबने से मौत हो गई और छह गंभीर घायल हो गए। तिलगारा रामायण मंडली के 12 सदस्य आयशर से रायपुरिया जा रहे थे।

पेटलावद की ओर से एक ट्राला आ रहा था। तभी दूसरा ट्राला उससे टकरा गया और एक ट्राला आयशर से टकराया। इस आयशर पुल के नीचे जा गिरी।

कुछ पल बाद सीमेंट से लदा ट्राला आयशर पर उलटा जा गिरा। इससे आयशर में बैठे भजन मंडली के 11 सदस्य दब गए। ट्राले का चालक भी फंस गय

Tuesday, March 1, 2011

अंतिम भाग

बेवफा -६७
किरण- नहीं सूरज- यह सच्चाई है ?जानते हो न सच्चाई कड़वी होती है और यह कड़वा सच है की.... खैर जाने दो....
सूरज- कहते-कहते रुक क्यों रहे हो ? बताओ न ... क्या कोई दिक्कत है ?
किरण- बताने में भी मुश्किल है और छिपाने में भी...
सूरज- प्यार में न कुछ बताने के लिए होता है , और न कुछ छिपाने के लिए ... ऐसी क्या बात है जिसे अपने महबूब से छिपाना चाहती हो ?
किरण- मैं ज़िंदा नहीं हूँ सूरज , मैं मर चुकी हूँ. मुझे मरे हुए भी काफी समय हो चुका है, कहिये की एक जमाना बीत चुका है. यह सुनकर आप चौंक सकते हैं. मगर............
सूरज- मगर क्या किराण ? जों कुछ बाकी है उसे भी बोल दो, कहदो की तुम मर चुकी हो, भूत बन चुकी हो . और इस समय तुम सिर्फ एक आत्मा हो... यही न की कुछ और ? मै कई बार सुन चूका हूँ ,
वैसे भी अभी अप्रैल महीन में समय बाकी है. तब तुम अप्रैल फूल बना चुकी हो.
किरण- इस बार जोक नहीं है, सच है. मैंने पहले तुम्हें यह बात बताई तो थी लेकिन मजाक में उडादी , यह सोचकर की तुम बड़े दुखी हो रहे थे .. और तुम्हारा दुःख मुझसे देखा नहीं जा रहा था .
सूरज- तब और अब में कितना अंतर आ गया ? क्या अब मै यह सुनकर खुश हो जाउंगा ? क्या अब हंसी के ठहाके लगाउंगा ? पहले मेरे बारे में इतना ख़याल था अब अचानक विचार कैसे बदल गए ?
किरण- सोच रही हूँ की बाद में जब तुमको यह सब कुछ पता चलेगा तो शायद सहन नहीं कर पाओगे ? हा हा हा .......
सूरज - तुम्हारे साथ समय बिताकर अब मैं भी मजबूत बन गया हूँ. मैं भी अब सच्चाई और मजाक में अंतर महसूस कर चूका हूँ. गिन भी रही हो की हम लोग कितनी बार सुहागरात मना चुके हैं.
किरण - अच्छी तरह से. अब यह हमारा सातवाँ नंबर है और मै संतुष्टि के कगार पर हूँ मैंने पहली बार इतना प्यार पाया है. इतना सुख मिला है की कभी भूल नहीं पाउंगी. मैं जहां भी रहूंगी , तुम्हारी यादों को अपने
सीने से चिपकाकर रहूंगी, एक बार फिर कहूंगी की तुम आम इंसानों से अलग हो, सबसे हटकर हो और सबसे श्रेष्ठ हो.
सूरज- तुम तो मेरे साथ बचा हुआ जीवन बिताना चाह रही थीं, मुझे अपने यहाँ नौकरी देने वाली थीं, उन इरादों का क्या हुआ ? उन वादों का क्या हुआ जों तुमने किये थे .
किरण- तुम नौकर के लायक नहीं , मालिक के लायक हो. मेरे जैसी सैकड़ों नौकरानी तुम्हारी साथ काम करने के लिए तैयार हो जायेंगी . मैं यह सब कुछ छोड़कर जा रही हूँ. पदम सिंह नाम का मेरा एक मैएंजर है ,
तुमेहन उससे मिलना होगा, वह आगे की सारी बातें तुम्हें समझा देगा. मेरा यह होटल, जायदाद सब तुम्हारा है. इसे अच्छी तरह से चलाना. गरीबों की मदद करना और कभी किसी लड़की को जिस्मफरोशी के जाल में
मत धकेलना . अगर कहीं यह देखो की कोई मजबूर महिला है तो उसकी यथा संभव मदद करना.
सूरज- तुम तो गंभीर हो रही हो किरण. कहदो की तुमने अपने बारे में जों बताया है, वह सब झूठ है, मजाक है. कहदो की मुझे डराने के , मजा लेने के लिए ऐसा सब कह रही हो.
किरण- नहीं सूरज, अब मैं और झूठ नहीं बोल सकती , मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ था. मैं जिस तरह अभिप्रिय और ब्रिज के जाल में फंसी मैंने भी कई लड़कियों को फिर उसी जाल में फंसा लिया था . मै वैश्या
तो बन गयी , मगर उस दल दल से निकल नहीं पायी. आखिरकार मैंने भी अपना धंधा शुरू कर दिया और बहुत दौलत कमाई, लेकिन मजबूर लड़कियों की आहों ने मेरा सत्यानाश कर दिया . एक गरीब फ़कीर की
शिष्या के साथ भी मैंने यही किया. वह मेरे पास चन्दा लेने आयी थी , मैंने उसे वैश्या बना डला. उस फ़कीर ने मुझे श्राप दिया. कहा की मैं तड़प-तडपकर मरुंगी , लेकिन फिर नही संतुष्टि नहीं मिल पायेगी .
मै भटकती ही रहूंगी. मुझे कहीं भी जगह नहीं मिलेगी. न तो म्रतुलोक में और न ही स्वर्ग लोक में. तब से मै भटक रही थी. मुझे बताया गया की अगर कोई मर्द मुझे एक रात में सात बार जिस्मानी सुख दे पायेगा
तभी मुझे मुक्ति मिलगी . और देखो . बरसों के इन्तजार के बाद तुम मुझे मिल ही गए. अब मै इस झंझट से मुक्त हो जाउंगी , सदा सदा के लिए मुझे छुटकारा मिल जाएगा .
सूरज- इसका मतलब , तुमने मुझसे प्यार नहीं किया, बल्कि मेरा इस्तेमाल किया. तुमने अपने फायदे के लिए मेरे साथ सम्बन्ध बनाए /
किरण- मुझे माफ करना सूरज.
सूरज- इसका मतलब तुमने जों प्यार के वादे किये थे, वे सब के सब झूठे थे ? तुम तो आखिर में बेवफा निकलीं किरण ? क्यों किया तुमने ऐसा ?
किरण- मैं मजबूर थी सूरज. मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं बचा था. ध्यान रहे , अगर तुम सात बार पूरा नहीं कर पाते तो तुम्हारी मौत हो जाती. मेरे कारण इस होटल में हर रात कोई न कोई मौत होती
ही रहती है, तुम इतने प्यारे हो की मै नहीं चाहती थी की तुम भी बेमौत मारे जाओ, इसलिए मै प्यार से तुम्हें सहयोग दे रही थी, तुम्हारी भावनाओं को उत्तेजित कर रही थी. गुड बाय सूरज...
सूरज की आँखों के सामने अन्धेरा छा गया, आँखें खुलीं तो अपने आपको अस्पताल में पाया. घर के लोग आ चुके थे, उसे लोगों ने बतया की मोटर साइकिल से वह गिर गया था, बड़ी मुश्किल से जान बची है.
लोग बता रहे थे की उस खंडहर के पास रोजाना कोई न कोई कॉल के गाल में समाजाता है. सूरज को यकीन नहीं हो रहा था की खंडहर वाली बेवफा की कहानी सच थी या झूठी ?
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