ग्रेफाइट इंडिया लिमिटेड पोमैक्स स्टील डिवीजन में डिप्टी जनरल मैनेजर आरएस रॉय प्लांट से बाहर अपनी जीप में निकल रहे थे. उनके साथ दो अन्य लोग दोपहर का खाना खाने निकले. पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सदांगी ने बताया कि कुछ निलंबित कर्मचारी जो प्लांट के बाहर पिछले कई महीनों से धरना दे रहे हैं उन्होंने रॉय की जीप को रोक लिया.
इसके बाद उन्होंने ड्राइवर और अन्य अधिकारियों को जीप से उतर जाने के लिए कहा. जैसे ही ये लोग जीप से उतरे कुछ लोगों ने अचानक गाड़ी को आग लगा दी जबकि उस समय आरएस रॉय जीप में ही बैठे थे. लपटों में बुरी तरह झुलसने की वजह से डीजीएम रॉय को नाजुक हालत में तितलागढ़ के अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों के मुताबिक वह 90 फीसदी तक जल चुके थे.
इसके बाद उन्हें बोलांगिर के अस्पताल भी भेजा गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को सूचना मिली थी कि प्लांट अधिकारी उन्हें नौकरी से निकालने की योजना बना रहे हैं जिससे वे भड़के हुए थे. पुलिस के मुताबिक जीप को तो आंदोलनरत मजदूरों ने ही रोका लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उसमें आग किसने लगाई.
मीडिया में रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें देर रात गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया और अब उनके अन्य साथियों को पकड़ने के लिए पुलिस कोशिशों में जुटी है. इस घटना के बाद से ही रोष का माहौल है और स्टील अधिकारियों ने सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की ह-------
भुवनेश्वर : उड़ीसा में एक प्राइवेट स्टील कंपनी के डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) को उन वर्करों ने गुरुवार को जिंदा जला दिया, जिन्हें डीजीएम ने एक दिन पहले बर्खास्तगी का नोटिस दिया था।
यह घटना बोलंगीर जिले के तीतलागढ़ में हुई। यह जगह राजधानी भुवनेश्वर से 400 किलोमीटर दूर है। डीएसपी ए.के. सारंगी ने बताया कि जीकेडब्ल्यू लिमिटेड के पॉमेक्स स्टील डिविजन के कुछ वर्कर साइट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। तभी डीजीएम राधेश्याम रे (55 वर्ष) लंच के लिए घर जा रहे थे। करीब 30 वर्करों ने डीजीएम की गाड़ी रोकी और उसमें से ड्राइवर और कंपनी के एक अन्य कर्मचारी को बाहर निकलने के लिए कहा। जब वे बाहर आए तो वर्करों ने पेट्रोल और केरोसिन डालकर गाड़ी में आग लगा दी। डीजीएम को गाड़ी से निकलने नहीं दिया गया। वह मदद के लिए चिल्लाते रहे। वहां से अस्पताल ले जाने के क्रम में डीजीएम की मौत हो गई।
एनसीआर में हो चुका है ऐसा
3 सितंबर 2008 को ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैजियानो कंपनी के मैनेजर ललित चौधरी की हड़ताली कर्मचारियों ने उनके ही कैबिन में हत्या कर दी थी। हड़ताली कर्मचारी बाहर धरना दे रहे थे। चौधरी ने कुछ लोगों को मीटिंग के लिए बुलाया, लेकिन बाकी कर्मचारी भी अंदर घुस गए और उन्हें पीट-पीट कर मार दिया।
साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में गत 13 नवंबर को एलाइड निप्पॉन कंपनी ने कई मजदूरों को काम से निकाल दिया, जिसके विरोध में मजदूरों ने फैक्ट्री में तोड़फोड़ की थी। इस संघर्ष में एचआर हेड योगेंद्र चौधरी की मौत हो गई थी।
