भाग-25
चांदनी - इस सवाल से आपको भला क्या दिलचस्पी हो सकती है ? जहां तक मैं समझती हूँ , आप अपना धंधा तो शुरू करने वाले दीखते नहीं ?
चन्द्र- मैं जानना चाहता हूँ कि आप इस धंधे में कैसे आयीं ? किसी ने मजबूर किया या आर्थिक तंगी के कारण या फिर शौक से आ गयी ? मेरी जानकारी के लिए पूछ रहा था .
चांदनी - मेरे ख़याल से आप सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. जिस काम के लिए आप आये हैं, उसे शुरू करें और खत्म करके चलते बनें.
चंद्र- तुम तो बड़ी बेरुखी से पेश आ रही हो . मैं कितने प्रेम से बात कर रहा हूँ और आप हैं कि ......
चांदनी - मैं भी तो प्रेम करने की बात कह रही हूँ. प्रेम कीजिये न. आप हमारे मेहमान हैं. आपने मुझे यहाँ पर बुलवाया है. इतना खर्चा किया है. मैं भला बेरुखी से बात क्यों करने लगी ?
आप जैसा सवाल करेंगे , मैं उस तरह का जवाब दूंगा. अब अगर आपका सवाल ही रूखा रहा तो मैं क्या कर सकती हूँ ?
चन्द्र- ठीक है , चलो अब दूसरे तरह की बात करते हैं ? एक दिन में आप कितने ग्राहकों को हैंडल करती हैं ?
चांदनी -मैं आपने किसलिए बुक की हूँ ? सिर्फ बातचीत करने के लिए या फिर किसी और काम के लिए ? सवाल इसलिए उठता है क्योंकि आप मेरी पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा इंटरेस्ट ले रहे हैं .
चंद्र- ओह, शायद आप मुझे गलत समझ रही हैं. मैं तो दोस्ती करने का प्रयास कर रहा था. अगर हम लोग बातचीत नहीं करेंगे तो एक दूसरे को कैसे समझ पायेंगे ?
चांदनी- हम लोग यहाँ पर एक रात के लिए मिल रहे हैं. रात भर में अगर सिर्फ जान पहचान ही बनाते रहोगे तो पैसे वसूल कैसे करोगे ? अगर आप चाहते हैं कि मैं आपके साथ सहयोग करूं तो आपको वही काम शुरू
करना होगा जिसके लिए आप यहाँ पर आये हो. मुझे ही देखो , ,मैं तो आपको कुछ नहीं बोल रही हूँ. और आप हैं कि मुझे आपरेशान किये जा रहे हैं. मेरे कहने का मतलब ये है कि अगर सिर्फ बातचीत ही करनी है तो
कभी दिन में मिलिए, आराम से बैठकर चर्चा करेंगे . देश की गरीबी पर, मंहगाई पर और यहाँ तक की कश्मीर की समस्या पर भी. आप चाहोगे तो शोपिंग -ओपिंग भी की जायेगी .
चंद्र- बहुत तेज हो चन्द्र , बेमतलब की बातें खूब बना रही हो . मगर जों हम जानना चाहते हैं, उस पर चर्चा नहीं कर रहे.
चांदनी- आप लोगों को कम से कम हम जैसे गरीबों और असहायों पर तो रहम आना चाहिए. हमें तो बख्श देना चाहिए. लोग आते हैं,, जाते हैं. और एक तबके के नहीं बल्कि हर तबके के और हर तरह के लोग आते हैं.
उनमे डॉक्टर भी होते हैं, इंजीनीयर भी, मजदूर भी , बिजनेसमैन भी और पत्रकार भी. मगर सब के सब यहाँ प्यासे बनकर आते हैं और अपनी प्यास बुझाकर चले जाते हैं. वे लोग नदी में स्नान करने से मतलब रखते हैं ,
नदी की लम्बाई -चौड़ाई मापने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते. बस मीडिया से जुड़े लोग ही ज्यादा खुजाते हैं. कोई कहानी नहीं मिलती तो हम पर ही कहानी बना डालते हैं. हम लोग आसान शिकार जों हैं. कुछ तो ऐसे भी महापुरुष
आते हैं कि टी.वी. चैनल से खर्चा लेकर आते हैं, हमारे साथ ऐश भी करते हैं और फिर छिपे कैमरे से कुछ द्रश्य लेकर हमें बदनाम भी करते हैं.
चन्द्र- लेकिन यह सब आप कुछ आप मुझे क्यों बता रही हैं ?
चांदनी- इसलिए क्योंकि आप भी उसी तरह के सवाल-जवाब कर रहे हैं. हम लोग अपने धंधे में साफ़ रहते हैं. अगर पैसे लेते हैं तो सेवा भी देते हैं . सोचो अगर हमने भी यहाँ पहले से छिपा कैमरा लगाया हो और आपसे पहले
यदि हम लोग उस वीडियो को आपके प्रतिस्पर्धी चैनल पर प्रसारित कर दें या फिर नेट पर अपलोड करदें तब क्या होगा ? क्लोग यही कहेंगे कि अच्छा नहीं किया.
चंद्र- अगर इतनी अच्छी बात कर लेती हो तो ऐसा घृणित काम ही क्यों करती हो ?
चांदनी- हम किसीके घर नहीं जाते बुलाने, लोग अपनी मर्जी से हमें ढूंढते हुए हमारे पास तक आते हैं. हम दिल को सुकून पहुंचाते हैं. रूह को सुकून पहुंचाते हैं.
चंद्र- और मीडिया के लोग क्या करते हैं ? उनका कर्तव्य है है जों हो रहा है उसको ज्यों का त्यों दिखाना. वे अगर अपने फर्ज को नहीं निभाएं तो क्या हो . पत्रकार समाज का आइना होते हैं.
चांदनी- लेकिन उनकी कुद्रष्टि हम जैसे निरीह लोगों पर ही क्यों होती हैं ?
चंद्र- आपको अगर ऐसा महसूस होता है तो कोई क्या करे ?
चांदनी- लेकिन आप इतने पर्सनल क्यों हो रहे हैं ? क्या आप भी पत्रकार हैं ? आप तो ऐसे दलील दे रहे हैं जैसे कि आप मेरा स्टिंग करने आये हुए हैं ?
चंद्र- जी नहीं, मैं इसलिए यहाँ नहीं आया हूँ.
चांदनी- तो किस काम के लिए आये हैं ? रात रंगीन करने के लिए ?
चंद्र- जी नहीं, इसलिए भी नहीं. बल्कि इसलिए क्योंकि आप लोगों के लिए मेरे दिल में सोफ्ट कोर्नर है. मैं आपसे मिलकर आपके कुछ दुःख कुछ सुख शेयर करना चाहता था.
चांदनी- तो करिये न , कौन इनकार करता है . मेरे गले में बहुत दुःख हो रहा है. अगर एक हीरों का हर इसमें डाल दोगे तो यह दुःख भी दूर हो जाएगा , करोगे ऐसा ?
Monday, January 17, 2011
Sunday, January 16, 2011
भाग-24
हीरो बन गयी थी, मैंने भी उस पर्चे को बड़ी एहतियात के साथ पढ़ा और नष्ट कर दिया. अबी मैं इतना तो जान गयी कि मैं अकेली नहीं हूँ , मेरे साथ वह महिला भी है. उसने पूछा -
- क्या सोच रही हो ?
किरण- यही कि वह ग्राहक कब तक आएगा. मुझे भूख लगी है. खाना भी इतना स्वाद है कि बस उँगलियाँ चाटते रहने को जी चाहता है.
महिला- बात तो कोई और है ?
किरण- सोचती हूँ कि पता नहीं कैसा आदमी होगा. प्यार से पेश आएगा या नफरत से. पता नहीं उसका अंग कितना खतरनाक होगा.
महिला- उसकी चिंता मत करो. कितना भी बड़ा क्यों न हो अपने आप सब कुछ एडजस्ट हो जाता है कुदरती तौर पर. मुझे ही देखलो मैं दिखती भले ही दुबली -पतली हूँ मगर सात फुट के हट्टे-कट्टे हव्सियों को भी
पानी पिलवा देती हूँ. थक जाते हैं मगर मैं नहीं थक पाती. दरअसल ये तो समुन्दर की तरह होती है. इसमें कुछ खास फर्क नहीं पड़ता.
किरण- इसका मतलब ये हुआ कि तुम खेली खाई खिलाड़ी हो. पूरा अनुभव हो गया है.
महिला- हाँ, और तुम भी इससे अछूती नहीं रहोगी, बहुत जल्द तुम भी मुझसे भी ज्यादा बड़ी खिलाड़ी बन जाओगी. तब तुम देख लेना , मुझे भी सिखाती नजर आयोगी. अब तैयार हो जाओ , तुम्हारा ग्राहक आने वाला है. मैसेज
आ गया. एक बार इस दवा से मुंह में कुल्ला करलो , शराब की बदबू निकल जायेगी. वरना ग्राहक को अच्छा नहीं लगेगा. कोशिश यही रहे कि ग्राहक खुश होकर जाना चाहिए.
किरण- ठीक है, ऐसा ही होगा. आपका ग्राहक यहाँ से खुश होकर जाएगा, और बार-बार मेरी सेवा लेना चाहेगा.
महिला- शाबाश, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी. और हाँ, अगर वह कोई सवाल करता है तो ज्यादा जवाब मत देना. पर्सनल जवाब तो बिलकुल नहीं. ध्यान रहे, तुम हर पल सी.सी. टी.वी. कैमरे की नजर में रहोगी .
किरण- मैं भला ज्यादा बात क्यों करने लगी. काम भर के लिए तो बोलना ही पडेगा. बाकी मुझे क्या लेना -देना ?
महिला- मैं इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि आजकल टी.वी. चैनल वाले रिपोर्टर भी स्टिंग के चक्कर में आ जाते हैं. वे लोग बवाल खड़ा कर देते हैं. इससे होता तो कुछ नहीं है, लेकिन डिस्टर्ब तो होता ही है.
एक बार एक रिपोर्टर ग्राहक बनकर मेरे कमरे में ही आ गया था. लगा उलटे सीधे सवाल करने. मैं तो जान गयी कि वह कोई बहुरुपिया ही है. मैं भी एलर्ट हो गयी.
किरण- ओह, फिर क्या हुआ ? वह आपसे क्या जानना चाहता था ?
महिला- तुमने अभी तक मेरा नाम तक भी नहीं पूछा है, मैं खुद ही बता देती हूँ. मैं चांदनी हूँ. और उस लड़के ने अपना नाम चन्द्र बताया था. वह एक दलाल के जरिये यहाँ तक पहुंचा था. उसने एक फाइव स्टार होटल बुक
करके रखा था. मैं उससे पहले होटल पहुंचना चाहती थी लेकिन वह मुझे पहले से ही कमरे में मौजूद मिला. उसका हुलिया देखकर मुझे उसके रईस होने पर शक हुआ. ये तो मैं देखते ही पहचान गयी कि फाइव स्टार होटल
बुक करने की उसकी हैसियत नहीं है,
किरण- क्यों ? क्या हैसियत किसीके माथे पर लिखी होती है ?
चांदनी- जी नहीं, मैं बताती हूँ. उसकी उम्र २५ से ज्यादा नहीं होगी. अगर उम्र ज्यादा होती तो मैं समझ भी सकती थी. उसके कपडे भी सामान्य थी. उसके जुर्राब से भी बू आ रही थी. जिसका मतलब था कि वह एक या
दो दिन से धुले नहीं थे. इसके अलावा इस उम्र में भी वह झिझक नहीं रहा था. जबकि इस उम्र का सामान्य ग्राहक थोड़ा सा डरता है. यह ऐसी उम्र होती है कि ज्यादातर युवाओं को बाजारू औरतों के पास जाने की जरूरत
ही नहीं होती, वे कोई न कोई लड़की पटा ही लेते हैं. और पटाकर वे कहीं भी अपने तन की प्यास बुझा लेते हैं. इस उम्र में एक ही रात में अगर कोई युवा हजारों या लाख तक खर्च कर रहा है तो वह संदेह के घेरे में आ ही जाता
है. उसने मुझसे पहले सवाल में मेरा नाम पूछा, इसके बाद बोला-
- इस धंधे में कबसे हो ? और एक रात में कितना कमा लेती हो ?
किरण- इस सवाल से आपको भला क्या दिलचस्पी हो सकती है ? जहां तक मैं समझती हूँ , आप अपना धंधा तो शुरू करने वाले दीखते नहीं ?
चन्द्र- मैं जानना चाहता हूँ कि आप इस धंधे में कैसे आयीं ? किसी ने मजबूर किया या आर्थिक तंगी के कारण या फिर शौक से आ गयी ? मेरी जानकारी के लिए पूछ रहा था .
किरण- मेरे ख़याल से आप सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. जिस काम के लिए आप आये हैं, उसे शुरू करें और खत्म करके चलते बनें.
चंद्र- तुम तो बड़ी बेरुखी से पेश आ रही हो . मैं कितने प्रेम से बात कर रहा हूँ और आप हैं कि ......
किरण- मैं भी तो प्रेम करने की बात कह रही हूँ. प्रेम कीजिये न. आप हमारे मेहमान हैं. आपने मुझे यहाँ पर बुलवाया है. इतना खर्चा किया है. मैं भला बेरुखी से बात क्यों करने लगी ?
हीरो बन गयी थी, मैंने भी उस पर्चे को बड़ी एहतियात के साथ पढ़ा और नष्ट कर दिया. अबी मैं इतना तो जान गयी कि मैं अकेली नहीं हूँ , मेरे साथ वह महिला भी है. उसने पूछा -
- क्या सोच रही हो ?
किरण- यही कि वह ग्राहक कब तक आएगा. मुझे भूख लगी है. खाना भी इतना स्वाद है कि बस उँगलियाँ चाटते रहने को जी चाहता है.
महिला- बात तो कोई और है ?
किरण- सोचती हूँ कि पता नहीं कैसा आदमी होगा. प्यार से पेश आएगा या नफरत से. पता नहीं उसका अंग कितना खतरनाक होगा.
महिला- उसकी चिंता मत करो. कितना भी बड़ा क्यों न हो अपने आप सब कुछ एडजस्ट हो जाता है कुदरती तौर पर. मुझे ही देखलो मैं दिखती भले ही दुबली -पतली हूँ मगर सात फुट के हट्टे-कट्टे हव्सियों को भी
पानी पिलवा देती हूँ. थक जाते हैं मगर मैं नहीं थक पाती. दरअसल ये तो समुन्दर की तरह होती है. इसमें कुछ खास फर्क नहीं पड़ता.
किरण- इसका मतलब ये हुआ कि तुम खेली खाई खिलाड़ी हो. पूरा अनुभव हो गया है.
महिला- हाँ, और तुम भी इससे अछूती नहीं रहोगी, बहुत जल्द तुम भी मुझसे भी ज्यादा बड़ी खिलाड़ी बन जाओगी. तब तुम देख लेना , मुझे भी सिखाती नजर आयोगी. अब तैयार हो जाओ , तुम्हारा ग्राहक आने वाला है. मैसेज
आ गया. एक बार इस दवा से मुंह में कुल्ला करलो , शराब की बदबू निकल जायेगी. वरना ग्राहक को अच्छा नहीं लगेगा. कोशिश यही रहे कि ग्राहक खुश होकर जाना चाहिए.
किरण- ठीक है, ऐसा ही होगा. आपका ग्राहक यहाँ से खुश होकर जाएगा, और बार-बार मेरी सेवा लेना चाहेगा.
महिला- शाबाश, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी. और हाँ, अगर वह कोई सवाल करता है तो ज्यादा जवाब मत देना. पर्सनल जवाब तो बिलकुल नहीं. ध्यान रहे, तुम हर पल सी.सी. टी.वी. कैमरे की नजर में रहोगी .
किरण- मैं भला ज्यादा बात क्यों करने लगी. काम भर के लिए तो बोलना ही पडेगा. बाकी मुझे क्या लेना -देना ?
महिला- मैं इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि आजकल टी.वी. चैनल वाले रिपोर्टर भी स्टिंग के चक्कर में आ जाते हैं. वे लोग बवाल खड़ा कर देते हैं. इससे होता तो कुछ नहीं है, लेकिन डिस्टर्ब तो होता ही है.
एक बार एक रिपोर्टर ग्राहक बनकर मेरे कमरे में ही आ गया था. लगा उलटे सीधे सवाल करने. मैं तो जान गयी कि वह कोई बहुरुपिया ही है. मैं भी एलर्ट हो गयी.
किरण- ओह, फिर क्या हुआ ? वह आपसे क्या जानना चाहता था ?
महिला- तुमने अभी तक मेरा नाम तक भी नहीं पूछा है, मैं खुद ही बता देती हूँ. मैं चांदनी हूँ. और उस लड़के ने अपना नाम चन्द्र बताया था. वह एक दलाल के जरिये यहाँ तक पहुंचा था. उसने एक फाइव स्टार होटल बुक
करके रखा था. मैं उससे पहले होटल पहुंचना चाहती थी लेकिन वह मुझे पहले से ही कमरे में मौजूद मिला. उसका हुलिया देखकर मुझे उसके रईस होने पर शक हुआ. ये तो मैं देखते ही पहचान गयी कि फाइव स्टार होटल
बुक करने की उसकी हैसियत नहीं है,
किरण- क्यों ? क्या हैसियत किसीके माथे पर लिखी होती है ?
चांदनी- जी नहीं, मैं बताती हूँ. उसकी उम्र २५ से ज्यादा नहीं होगी. अगर उम्र ज्यादा होती तो मैं समझ भी सकती थी. उसके कपडे भी सामान्य थी. उसके जुर्राब से भी बू आ रही थी. जिसका मतलब था कि वह एक या
दो दिन से धुले नहीं थे. इसके अलावा इस उम्र में भी वह झिझक नहीं रहा था. जबकि इस उम्र का सामान्य ग्राहक थोड़ा सा डरता है. यह ऐसी उम्र होती है कि ज्यादातर युवाओं को बाजारू औरतों के पास जाने की जरूरत
ही नहीं होती, वे कोई न कोई लड़की पटा ही लेते हैं. और पटाकर वे कहीं भी अपने तन की प्यास बुझा लेते हैं. इस उम्र में एक ही रात में अगर कोई युवा हजारों या लाख तक खर्च कर रहा है तो वह संदेह के घेरे में आ ही जाता
है. उसने मुझसे पहले सवाल में मेरा नाम पूछा, इसके बाद बोला-
- इस धंधे में कबसे हो ? और एक रात में कितना कमा लेती हो ?
किरण- इस सवाल से आपको भला क्या दिलचस्पी हो सकती है ? जहां तक मैं समझती हूँ , आप अपना धंधा तो शुरू करने वाले दीखते नहीं ?
चन्द्र- मैं जानना चाहता हूँ कि आप इस धंधे में कैसे आयीं ? किसी ने मजबूर किया या आर्थिक तंगी के कारण या फिर शौक से आ गयी ? मेरी जानकारी के लिए पूछ रहा था .
किरण- मेरे ख़याल से आप सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. जिस काम के लिए आप आये हैं, उसे शुरू करें और खत्म करके चलते बनें.
चंद्र- तुम तो बड़ी बेरुखी से पेश आ रही हो . मैं कितने प्रेम से बात कर रहा हूँ और आप हैं कि ......
किरण- मैं भी तो प्रेम करने की बात कह रही हूँ. प्रेम कीजिये न. आप हमारे मेहमान हैं. आपने मुझे यहाँ पर बुलवाया है. इतना खर्चा किया है. मैं भला बेरुखी से बात क्यों करने लगी ?
Saturday, January 15, 2011
भाग-23
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता. जान जाने से तो यही बेहतर है कि चुप रहा जाए. अगर कोई लड़की इस सिद्धांत
को नहीं मानती तो भगवान को प्यारी हो जाती हैं, मैं तो दाद देना चाहूंगी तुम्हारी बुद्धिमानी को कि समय रहते तुमने अपने विचार बदल लिए वरना तुम्हें भी तकलीफ होती , वैसे भी देखिये न प्रकृति भी तो हमें यही सिखाती
है. कभी सर्दी, कभी गर्मी और कभी बरसात क्यों होती है, ? कभी विचार किया है ?
किरण- नहीं , मैं कभी इतनी बात नहीं सोच पाई, कभी टाइम भी नहीं मिला और इस बाबत विचार भी नहीं हो पाया.
महिला- मैं बताती हूँ, प्रकृति इन मौसमों के जरिये हमें यह सिखाती है कि समय -समय पर हमें अपनी आदतें और सोचने का जरिया भी बदलना चाहिए. अगर एक जैसे रहेंगे तो सफल नहीं हो पायेंगे , जैसे अगर दुनिया में
एक जैसा ही मौसम रहे तो कुछ होने वाला नहीं है. अगर गरमी ही गर्मी रहेगी तो लोग भूखे -प्यासे मर जायेंगे . ना तो पीने योग्य जल की पूर्ती हो पायेगी और ना ही कोई फसल ही हो पायेगी. संतुलन के लिए गर्मी, सर्दी
और वर्षा सभी की जरूरत पड़ती हैं. अब मैं अपना भाषण समाप्त करती हूँ, साथ ही तुम्हारे लिए स्पेशल सकोच का एक लार्ज पैग भी तैयार करके लाती हूँ.
किरण- हाँ, रात कजो पीई थी वह अभी तक उतर नहीं पाई है. उसके लिए उतारा चाहिए . मैं तो सखी थी कि तुम भूल ही गयी होंगी.
सूरज- अच्छा, इसका मतलब तुमने उन लोगों को बहकाने के लिए उन लोगों के सामने इस तरह का प्रदर्शन किया था ?
किरण- हाँ, उस महिला ने इशारों-इशारों में ही मुझे यह समझा दिया था कि मैं गलत जगह फंस गयी हूँ और होशियारी करने का मत्ल्बा है जान से हाह धोना. इसलिए मैं सावधान हो गयी. मुझे सोचने के लिए वक्त की जरूरत थी ,
मैंने अभिप्रिय की आँखों में अपने लिए एक विशेष चमक देखी थी, यही वजह थी कि मैं उससे एक बार मिलना चाहती थी . वही इस कंपनी का सरगना था और मैं उससे मिलकर प्यार से अपने साथ हुई घटना का इंतकाम लेना चाहती
थी, इसीलिए मैंने मन मसोसकर उस कंपनी में वैश्यावृत्ति का काम करना स्वीकार कर लिया. महिला की बातों से इतनी बात तो मैं भी समझ गयी थी कि दुश्मनी करके उन लोगों से जीतना संभव नहीं है , क्योंकि वे ताकतवर लोग
थे. उनकी पहुँच हर जगह तक थी. वे लोग मीडिया से लेकर हर जगह तक अपना वर्चस्व रखते थे.
सूरज- तब क्या हुआ ? वह महिला स्कोच का लार्ज पैग लेकर आई कि नहीं ?
किरण- हाँ, उसने अपना वादा पूरा किया . एक सावली सी सेविका के साथ वह फिर से मेरे सम्मुख हाजर हुई. सेविका जिस ट्रोली को धकेलकर लाई उसमे सब सामान मौजूद था. सेविका नजर झुकाकर चली गयी तो उसी ट्रोली
से फोल्डिंग टेबल निकालकर हमने अपने लिए चखने का सामन निकालना शुरू किया. कुछ अबदाम, कुछ नमकीन काजू , डाल सेव और चिकन के पकौड़े थे. मैंने चीअर्स बोलकर पैग होठों से लागा लिया . एक ही सांस में हम दोनों अपना- अपना
गिलास खत्म कर चुके थे. तभी उस महिला का मोबाइल घन घनाने लगा. उसने फोन रिसीव किया, थोड़ी देर बात हुई और फिर उसने एक पर्ची पर मुझे कुछ लिखकर दे दिया .
सूरज- वह पर्चा भी उसने गुप्त रूप से दिया होगा , क्या लिखा था उसमे ?
किरण- हाँ, एकदम कोने में जाकर लिखा था. वह जानती थी कि कौन सा क्षेत्र कैमरे की निगरानी से बचा हुआ है. उसमे लिखा था कि उसे आने वाला फोन बोस का था. वह खुश था . महिला को शाबाशी दे रहा था. उसकी नजर में महिला
हीरो बन गयी थी, मैंने भी उस पर्चे को बड़ी एहतियात के साथ पढ़ा और नष्ट कर दिया. अबी मैं इतना तो जान गयी कि मैं अकेली नहीं हूँ , मेरे साथ वह महिला भी है. उसने पूछा -
- क्या सोच रही हो ?
किरण- यही कि वह ग्राहक कब तक आएगा. मुझे भूख लगी है. खाना भी इतना स्वाद है कि बस उँगलियाँ चाटते रहने को जी चाहता है.
महिला- बात तो कोई और है ?
किरण- सोचती हूँ कि पता नहीं कैसा आदमी होगा. प्यार से पेश आएगा या नफरत से. पता नहीं उसका अंग कितना खतरनाक होगा.
महिला- उसकी चिंता मत करो. कितना भी बड़ा क्यों न हो अपने आप सब कुछ एडजस्ट हो जाता है कुदरती तौर पर.
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता. जान जाने से तो यही बेहतर है कि चुप रहा जाए. अगर कोई लड़की इस सिद्धांत
को नहीं मानती तो भगवान को प्यारी हो जाती हैं, मैं तो दाद देना चाहूंगी तुम्हारी बुद्धिमानी को कि समय रहते तुमने अपने विचार बदल लिए वरना तुम्हें भी तकलीफ होती , वैसे भी देखिये न प्रकृति भी तो हमें यही सिखाती
है. कभी सर्दी, कभी गर्मी और कभी बरसात क्यों होती है, ? कभी विचार किया है ?
किरण- नहीं , मैं कभी इतनी बात नहीं सोच पाई, कभी टाइम भी नहीं मिला और इस बाबत विचार भी नहीं हो पाया.
महिला- मैं बताती हूँ, प्रकृति इन मौसमों के जरिये हमें यह सिखाती है कि समय -समय पर हमें अपनी आदतें और सोचने का जरिया भी बदलना चाहिए. अगर एक जैसे रहेंगे तो सफल नहीं हो पायेंगे , जैसे अगर दुनिया में
एक जैसा ही मौसम रहे तो कुछ होने वाला नहीं है. अगर गरमी ही गर्मी रहेगी तो लोग भूखे -प्यासे मर जायेंगे . ना तो पीने योग्य जल की पूर्ती हो पायेगी और ना ही कोई फसल ही हो पायेगी. संतुलन के लिए गर्मी, सर्दी
और वर्षा सभी की जरूरत पड़ती हैं. अब मैं अपना भाषण समाप्त करती हूँ, साथ ही तुम्हारे लिए स्पेशल सकोच का एक लार्ज पैग भी तैयार करके लाती हूँ.
किरण- हाँ, रात कजो पीई थी वह अभी तक उतर नहीं पाई है. उसके लिए उतारा चाहिए . मैं तो सखी थी कि तुम भूल ही गयी होंगी.
सूरज- अच्छा, इसका मतलब तुमने उन लोगों को बहकाने के लिए उन लोगों के सामने इस तरह का प्रदर्शन किया था ?
किरण- हाँ, उस महिला ने इशारों-इशारों में ही मुझे यह समझा दिया था कि मैं गलत जगह फंस गयी हूँ और होशियारी करने का मत्ल्बा है जान से हाह धोना. इसलिए मैं सावधान हो गयी. मुझे सोचने के लिए वक्त की जरूरत थी ,
मैंने अभिप्रिय की आँखों में अपने लिए एक विशेष चमक देखी थी, यही वजह थी कि मैं उससे एक बार मिलना चाहती थी . वही इस कंपनी का सरगना था और मैं उससे मिलकर प्यार से अपने साथ हुई घटना का इंतकाम लेना चाहती
थी, इसीलिए मैंने मन मसोसकर उस कंपनी में वैश्यावृत्ति का काम करना स्वीकार कर लिया. महिला की बातों से इतनी बात तो मैं भी समझ गयी थी कि दुश्मनी करके उन लोगों से जीतना संभव नहीं है , क्योंकि वे ताकतवर लोग
थे. उनकी पहुँच हर जगह तक थी. वे लोग मीडिया से लेकर हर जगह तक अपना वर्चस्व रखते थे.
सूरज- तब क्या हुआ ? वह महिला स्कोच का लार्ज पैग लेकर आई कि नहीं ?
किरण- हाँ, उसने अपना वादा पूरा किया . एक सावली सी सेविका के साथ वह फिर से मेरे सम्मुख हाजर हुई. सेविका जिस ट्रोली को धकेलकर लाई उसमे सब सामान मौजूद था. सेविका नजर झुकाकर चली गयी तो उसी ट्रोली
से फोल्डिंग टेबल निकालकर हमने अपने लिए चखने का सामन निकालना शुरू किया. कुछ अबदाम, कुछ नमकीन काजू , डाल सेव और चिकन के पकौड़े थे. मैंने चीअर्स बोलकर पैग होठों से लागा लिया . एक ही सांस में हम दोनों अपना- अपना
गिलास खत्म कर चुके थे. तभी उस महिला का मोबाइल घन घनाने लगा. उसने फोन रिसीव किया, थोड़ी देर बात हुई और फिर उसने एक पर्ची पर मुझे कुछ लिखकर दे दिया .
सूरज- वह पर्चा भी उसने गुप्त रूप से दिया होगा , क्या लिखा था उसमे ?
किरण- हाँ, एकदम कोने में जाकर लिखा था. वह जानती थी कि कौन सा क्षेत्र कैमरे की निगरानी से बचा हुआ है. उसमे लिखा था कि उसे आने वाला फोन बोस का था. वह खुश था . महिला को शाबाशी दे रहा था. उसकी नजर में महिला
हीरो बन गयी थी, मैंने भी उस पर्चे को बड़ी एहतियात के साथ पढ़ा और नष्ट कर दिया. अबी मैं इतना तो जान गयी कि मैं अकेली नहीं हूँ , मेरे साथ वह महिला भी है. उसने पूछा -
- क्या सोच रही हो ?
किरण- यही कि वह ग्राहक कब तक आएगा. मुझे भूख लगी है. खाना भी इतना स्वाद है कि बस उँगलियाँ चाटते रहने को जी चाहता है.
महिला- बात तो कोई और है ?
किरण- सोचती हूँ कि पता नहीं कैसा आदमी होगा. प्यार से पेश आएगा या नफरत से. पता नहीं उसका अंग कितना खतरनाक होगा.
महिला- उसकी चिंता मत करो. कितना भी बड़ा क्यों न हो अपने आप सब कुछ एडजस्ट हो जाता है कुदरती तौर पर.
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ग्वालियर। एक युवक ने बाइक खरीदने की खातिर अपनी प्रेमिका को ही बेच डाला। युवती को पुलिस ने नागपुर के रेड लाइट एरिया से कुछ दिन पहले मुक्त करा लिया था लेकिन आरोपी युवक चोरी के एक मामले में पुलिस के हाथ लगा। इस मामले में स्थानीय बदनापुरा रेड लाइट एरिया के दो दलालों की पुलिस को तलाश है।
पुलिस के मुताबिक शंकरपुर निवासी 19 वर्षीय जब्बीर खान लक्ष्मण तलैया निवासी 15 वर्षीय युवती से इश्क करता था। उसे वह अक्सर इधर-उधर घुमाने ले जाता था। गत जून में जब्बीर ने इस युवती को बदनापुरा निवासी शिशुपाल और कश्मीरी नामक युवकों को 50 हजार रुपए में बेच दिया था। इस रकम से जब्बीर ने पल्सर मोटरसाइकल खरीद ली थी। पुलिस के अनुसार ये दोनों युवक रेड लाइट एरिया के दलाल हैं। इन दोनों ने बाद में इस युवती को नागपुर के रेड लाइट एरिया में बेच दिया था।
युवती के गायब होने पर उसके पिता ने बहोड़ापुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि युवती नागपुर में रेडलाइट एरिया में है। पुलिस ने 29 नवंबर को दबिश देकर युवती को वहां से मुक्त करा लिया। उसने पुलिस को बताया कि जब्बीर खान ने उसे 50 हजार रुपए में शिशुपाल और कश्मीरी को बेच दिया था। इधर पुलिस जब्बीर की तलाश कर रही थी। गुरुवार रात वह चोरी के एक मामले में पकड़ा गया।
दो दिन पुरानी चोरी भी कुबूली
पुलिस ने जब अपने तरीके से पूछताछ की तो जब्बीर ने दो दिन पूर्व अपने चार साथियों के साथ यातायात नगर से नीलकमल फर्नीचर स्टोर से चोरी की वारदात भी स्वीकार की। पुलिस ने उसके साथियों छोटू खान, अमजद खान, शरीफ खान, व सगीर अहमद को पकड़ लिया। इनके पास से एक लाख रुपए का सामान भी बरामद कर लिया। थाना प्रभारी नवाब सिंह ने बताया कि पकड़े गए नकबजनों से पूछताछ की जा रही है जिसमें यातायात नगर में हुई पुरानी चोरियों का सुराग लग सकता ह
ग्वालियर। एक युवक ने बाइक खरीदने की खातिर अपनी प्रेमिका को ही बेच डाला। युवती को पुलिस ने नागपुर के रेड लाइट एरिया से कुछ दिन पहले मुक्त करा लिया था लेकिन आरोपी युवक चोरी के एक मामले में पुलिस के हाथ लगा। इस मामले में स्थानीय बदनापुरा रेड लाइट एरिया के दो दलालों की पुलिस को तलाश है।
पुलिस के मुताबिक शंकरपुर निवासी 19 वर्षीय जब्बीर खान लक्ष्मण तलैया निवासी 15 वर्षीय युवती से इश्क करता था। उसे वह अक्सर इधर-उधर घुमाने ले जाता था। गत जून में जब्बीर ने इस युवती को बदनापुरा निवासी शिशुपाल और कश्मीरी नामक युवकों को 50 हजार रुपए में बेच दिया था। इस रकम से जब्बीर ने पल्सर मोटरसाइकल खरीद ली थी। पुलिस के अनुसार ये दोनों युवक रेड लाइट एरिया के दलाल हैं। इन दोनों ने बाद में इस युवती को नागपुर के रेड लाइट एरिया में बेच दिया था।
युवती के गायब होने पर उसके पिता ने बहोड़ापुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि युवती नागपुर में रेडलाइट एरिया में है। पुलिस ने 29 नवंबर को दबिश देकर युवती को वहां से मुक्त करा लिया। उसने पुलिस को बताया कि जब्बीर खान ने उसे 50 हजार रुपए में शिशुपाल और कश्मीरी को बेच दिया था। इधर पुलिस जब्बीर की तलाश कर रही थी। गुरुवार रात वह चोरी के एक मामले में पकड़ा गया।
दो दिन पुरानी चोरी भी कुबूली
पुलिस ने जब अपने तरीके से पूछताछ की तो जब्बीर ने दो दिन पूर्व अपने चार साथियों के साथ यातायात नगर से नीलकमल फर्नीचर स्टोर से चोरी की वारदात भी स्वीकार की। पुलिस ने उसके साथियों छोटू खान, अमजद खान, शरीफ खान, व सगीर अहमद को पकड़ लिया। इनके पास से एक लाख रुपए का सामान भी बरामद कर लिया। थाना प्रभारी नवाब सिंह ने बताया कि पकड़े गए नकबजनों से पूछताछ की जा रही है जिसमें यातायात नगर में हुई पुरानी चोरियों का सुराग लग सकता ह
Friday, January 14, 2011
भाग-22
िरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए. सेवा भी उसी तरह करूंगी . ग्राहक को किसी तरह कि निराशा नहीं
होने दूंगी. जों वह चाहेगा, वही देने की कोशिश करूंगी. जब तक ग्राहक संतुष्ट नहीं हो जाता तब तक नहीं छोडूंगी . अब सोचलो, क्या फैसला करना है. अगर मैं बर्बाद होती हूँ तो आबाद किसीको नहीं होने दूंगी , और अगर मैं
संतुष्ट रहूंगी तो असंतुष्ट किसीको नहीं रहने दूंगी . मेरा यकीन है कि यह सौदा आपके लिए घाटे का नहीं रहेगा.
महिला- हमारे यहाँ एअर होस्टेस का जों रेट है वह आपको बता दिया गया है. इससे ज्यादा अगर कुछ लेना-देना है तो हमें मैनेजमेंट से बात करनी होगी.
किरण- मुझे भूख भी लगी है. अगर चिकन पककर तैयार हुआ हो तो बात कर लीजिए. आपके साथ खाने में मुझे खुशी होगी. और हाँ रात के उतारे का कुछ इंतजाम है कि नहीं ?
महिला- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? इस चीज की तो यहाँ नदियाँ बहती हैं. अगर शराब नहीं तो जीवन जीने का मजा नहीं आता.
किरण- सच कहती हो. हम लोग भी ड्यूटी के दौरान इतने थक जाते हैं कि बिना दवा लिए दर्द ठीक ही नहीं हो पाता , हर हाल में इसका सहारा लेना ही पड़ता है.
महिला- लगता है अब तुम पूरी तरह तैयार हो चुकी हो. अगर चाहो तो दिन की भी एक बुकिंग आई है. फोरेन की पार्टी है. शाम को उसकी फ्लाईट है. जाने से पहले उसे नया माल चाहिए. अच्छा खासा माल देगा. मंजूर हो तो उसे
भेज देती हूँ, फिर आराम से तुम उसके साथ लंच और डिनर कर सकती हो. मौज की मौज और माल का माल.
किरण- उसके लिए जाना कहाँ होगा ? इसी फ़ार्म हाउस में काम हो जाएगा या ?
महिला- पार्टी तो अपने होटल की डिमांड करती ही है मगर कन्वेंस करने पर मान जाते हैं लोग. यानि कि इसे भी यहीं पर बुलाया जा सकता है. जब तक तुम नहा धोकर तैयार होती हो, मेकअप वगैरह करती हो तब तक मैं तुम्हारे
लिए दूसरे कपडे मंगवा देती हूँ और उसे भी यहीं बुला लेती हूँ. ५० साल से ऊपर का बुड्ढा है. एक मिनिट में फिनिश हो जाएगा. ज्यादा टाइम नहीं लगेगा. कभी -कभी तो ऐसे मर्द सिर्फ खाली फायरिंग करके ही रह आजाते हैं.
किरण- ठीक है , मुझे मंजूर है. फिर मैं खाने का ऑर्डर मेरे तरीके से दे दूंगी. पास वाले किसी फाइव स्टार से खाना मंगवा देना.
महिला- उसकी चिंता मत करो, वो सारी सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी, खुद मैं भी उपलब्ध रहूंगी. अपनी दुल्हन को मैं अकली थोड़े ही छोड़ सकती हूँ. जब चरम सुख का समय होगा, मैं तभी वहां से हटूंगी, थोड़ी देर के बाद मौज -मस्ती
के लिए मैं भी हाजिर हो जाउंगी. वैसे भी वह अजीब किस्म का इंसान है, उसने एक साथ दो लड़कियों की डिमांड की है. एक उसने आपका फोटो पसंद किया है और एक मेरा. तो हम दोनों उसे जल्दी ही निबटा देंगे.
बस इतना ख़याल रहे कि हमारे मेहमान का दिल नहीं टूटना चाहिए, वह जिस तरह भी और जैसे भी सुख वसूलना चाहता है, हमें उसका साथ देना होगा.
किरण- मैं शिकायत को कोई मौक़ा नहीं दूंगी, मगर ये बताओ कि मेरा फोटो उसने आखिर कहाँ देख लिया.
महिला- हमारी वेबसाईट पर भी उपलब्ध है.
किरण- इसका मतलब तुम लोगों ने हमें पक्की धंधेबाज औरत बना दिया है. जय हो.........
महिला- क्या करें , पापी पेट का सवाल हाई. मंहगाई इतनी हो गयी है कि जीने के लिए यह रास्ता भी चुनना पड़ता है. मजबूरी है. और देखा जाए तो मजा भी है. जों जिस तरीके से लेता है , ले सकता है.
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता.
िरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए. सेवा भी उसी तरह करूंगी . ग्राहक को किसी तरह कि निराशा नहीं
होने दूंगी. जों वह चाहेगा, वही देने की कोशिश करूंगी. जब तक ग्राहक संतुष्ट नहीं हो जाता तब तक नहीं छोडूंगी . अब सोचलो, क्या फैसला करना है. अगर मैं बर्बाद होती हूँ तो आबाद किसीको नहीं होने दूंगी , और अगर मैं
संतुष्ट रहूंगी तो असंतुष्ट किसीको नहीं रहने दूंगी . मेरा यकीन है कि यह सौदा आपके लिए घाटे का नहीं रहेगा.
महिला- हमारे यहाँ एअर होस्टेस का जों रेट है वह आपको बता दिया गया है. इससे ज्यादा अगर कुछ लेना-देना है तो हमें मैनेजमेंट से बात करनी होगी.
किरण- मुझे भूख भी लगी है. अगर चिकन पककर तैयार हुआ हो तो बात कर लीजिए. आपके साथ खाने में मुझे खुशी होगी. और हाँ रात के उतारे का कुछ इंतजाम है कि नहीं ?
महिला- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? इस चीज की तो यहाँ नदियाँ बहती हैं. अगर शराब नहीं तो जीवन जीने का मजा नहीं आता.
किरण- सच कहती हो. हम लोग भी ड्यूटी के दौरान इतने थक जाते हैं कि बिना दवा लिए दर्द ठीक ही नहीं हो पाता , हर हाल में इसका सहारा लेना ही पड़ता है.
महिला- लगता है अब तुम पूरी तरह तैयार हो चुकी हो. अगर चाहो तो दिन की भी एक बुकिंग आई है. फोरेन की पार्टी है. शाम को उसकी फ्लाईट है. जाने से पहले उसे नया माल चाहिए. अच्छा खासा माल देगा. मंजूर हो तो उसे
भेज देती हूँ, फिर आराम से तुम उसके साथ लंच और डिनर कर सकती हो. मौज की मौज और माल का माल.
किरण- उसके लिए जाना कहाँ होगा ? इसी फ़ार्म हाउस में काम हो जाएगा या ?
महिला- पार्टी तो अपने होटल की डिमांड करती ही है मगर कन्वेंस करने पर मान जाते हैं लोग. यानि कि इसे भी यहीं पर बुलाया जा सकता है. जब तक तुम नहा धोकर तैयार होती हो, मेकअप वगैरह करती हो तब तक मैं तुम्हारे
लिए दूसरे कपडे मंगवा देती हूँ और उसे भी यहीं बुला लेती हूँ. ५० साल से ऊपर का बुड्ढा है. एक मिनिट में फिनिश हो जाएगा. ज्यादा टाइम नहीं लगेगा. कभी -कभी तो ऐसे मर्द सिर्फ खाली फायरिंग करके ही रह आजाते हैं.
किरण- ठीक है , मुझे मंजूर है. फिर मैं खाने का ऑर्डर मेरे तरीके से दे दूंगी. पास वाले किसी फाइव स्टार से खाना मंगवा देना.
महिला- उसकी चिंता मत करो, वो सारी सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी, खुद मैं भी उपलब्ध रहूंगी. अपनी दुल्हन को मैं अकली थोड़े ही छोड़ सकती हूँ. जब चरम सुख का समय होगा, मैं तभी वहां से हटूंगी, थोड़ी देर के बाद मौज -मस्ती
के लिए मैं भी हाजिर हो जाउंगी. वैसे भी वह अजीब किस्म का इंसान है, उसने एक साथ दो लड़कियों की डिमांड की है. एक उसने आपका फोटो पसंद किया है और एक मेरा. तो हम दोनों उसे जल्दी ही निबटा देंगे.
बस इतना ख़याल रहे कि हमारे मेहमान का दिल नहीं टूटना चाहिए, वह जिस तरह भी और जैसे भी सुख वसूलना चाहता है, हमें उसका साथ देना होगा.
किरण- मैं शिकायत को कोई मौक़ा नहीं दूंगी, मगर ये बताओ कि मेरा फोटो उसने आखिर कहाँ देख लिया.
महिला- हमारी वेबसाईट पर भी उपलब्ध है.
किरण- इसका मतलब तुम लोगों ने हमें पक्की धंधेबाज औरत बना दिया है. जय हो.........
महिला- क्या करें , पापी पेट का सवाल हाई. मंहगाई इतनी हो गयी है कि जीने के लिए यह रास्ता भी चुनना पड़ता है. मजबूरी है. और देखा जाए तो मजा भी है. जों जिस तरीके से लेता है , ले सकता है.
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता.
Thursday, January 13, 2011
भाग-२१
महिला- इस बात का पूरा ख़याल रखा जाता है. जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाए हैं उसने कंडोंम का इस्तेमाल किया था. मैं इसी कमरे मैं मौजूद थी.
किरण- मैं छोडूंगी नहीं तुम लोगों को , सबके खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगी .
महिला- कहाँ करोगी शिकायत ? करके देखलो. उलटे तुम बदनाम हो जाओगी .
किरण- अभी इन्साफ ज़िंदा है, ऐसा नहीं है कि सब लोग करप्ट हो गए हों .
महिला- जिसने भी इस तरह की कोशिश की है वह कहीं की नहीं रही.
किरण- मैं तुम्हारी इस पाप की लंका को खाक में मिलाकर छोडूंगी.मैं ज़रा अलग किस्म की लड़की हूँ, अपने साथ हुए इस धोखे को इतनी आसानी से नहीं भूल पाउंगी .
महिला- अगर ऐसा करना भी चाहोगी तो नहीं कर पाओगी. मतलब, भूल नहीं पाओगी. मैं बड़े प्यार से तुम्हारा अश्लील वीडियो यू ट्यूब .कॉम पर डाल सकती हूँ. और भी इसी तरह की कई साइटें हैं जिन्हें दिन में करोड़ों
लोग देखते हैं. तब तुम तो क्या पूरी दुनिया भी नहीं भूल पायेगी. याद रखेगी तुम्हें सदा-सदा के लिए. ब्लू फिल्म के खरीदार भी कम नहीं है. हमारे पास सैकड़ों के डीलर की इन्क्वारी आती रहती है. आम के आम और
गुठलियों के दाम वाली बात हो जाती है. एक बार हमारे ग्राहक का दिल तुम पर आया , हमने उसे सेवा दी , बदले में तुम्हें कीमत भी दे रहे हैं. अब आगे तुम्हारी मर्जी है, अगर अच्छा लगे तो काम करो और नहीं अच्छा
लगे तो बिलकुल मत करो यार . इसमें गुस्सा होने जैसी क्या बात है / तुम्हें थकान हो रही है इसलिए खराब लग रहा है. थोड़ी बहुत देर में सब ठीक हो जाएगा . अगर तुम किसी और के साथ भी पहली बार सुहागरात
मानती तो पहली -पहली बार इतना दुःख तो होता ही, अब रास्ता बिलकुल आसान और साफ़ हो गया है. अब तुम्हें किसी तरह के कोई परेशानी नहीं हो पायेगी .
किरण- मैंने बताया न , मैं अलग किस्म की हूँ. अगर हर गली, हर चौराहे पर भी मेरे अश्लील फोटो लगवा देते हो तब भी मुझे फर्क नहीं पडेगा, क्योंकि मेरी आबरू ला असली मोती तो तुम लोगों ने पहले ही चूर-चूर
कर दिया है. अब मैं तुम लोगों से इंतकाम लूंगी , और असी-वैसे नहीं. ब्याज के साथ लूंगी. तुम्हारा पूरा गिरोह नेस्तनाबूद हो जाएगा .
महिला- ऐ , कोई उपन्यास पढ़ लिया है या एक्शन वाली कोई फिल्म देख ली है. बड़े धांसू डायलोग बोल लेती हो. हीरोइन बनना चाहती हो क्या है. अपना सेठ है न , उसका बड़ा प्रोडक्शन हाउस है. बात करती हूँ ,
अगर वहाँ भी कैरियर बनाना चाहे तो बुरा नहीं है . लेकिन वहाँ भी कम्प्रोमाइज तो करना ही पड़ता है. करना पड़ेगा. हर डायरेक्टर सेक्सुअल फेवर चाहता है. नहीं करोगी तो फेल . कोई भी बहाना बना सकता है.
किरण- फिल्म तो अब मैं बनाऊँगी , तुम सब लोगों की. ती.वी. चेनल के ऑफिस में जाकर बैठती हूँ और अपनी आपबीती सुनाती हूँ. सभी सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतर जाएगा .
महिला- ऐसी गलती भी करके देख लों. देखती हूँ तुम यहाँ से बाहर कैसे निकलती हो. अरे बावली अपनी जान की दुशमन क्यों बनती है. जों हुआ है उसे भूल जा. नाश्ता कर ही लिया है. खाना खाने का मूड है तो बोल चिकन
तैयार हो रहा है. देसी चिकन है. सब थकान उतर जायेगी. दो पैग के साथ खाना खाना खायेंगे तो बात ही क्या है,. बाद में तेरी इच्छा है. ये काम करना है तो कर . नहीं करना है मत कर. ऐसी भी मैं कई लड़कियों को जानती
हूँ जिन्हें यहाँ पर जबरदस्ती लाया गया. ग्राहक ने रात भर मस्ती की, सुबह उसे पेमेंट किया और वह चुपचाप लेकर चली गयी. दोबारा आयी ही नहीं. वो भी खुश, कस्टमर भी खुश और कंपनी भी खुश.
किरण- तुम औरत नहीं हो,औरत के नाम पर कलंक हो. मुझ असहाय लड़की की मदद करने के बजाय उलटा धमका रही हो .
महिला- यही तो नादानी कर रही है, समझने की कोशिश नहीं कर रही. इधर आ. साइड में. अरे पगली उस जगह पर हम कैमरे की नजर में थे. यहाँ चप्पे-चप्पे पर सी.सी.ती.वी . कैमरे लगे हुए हैं. यहाँ पर होने वाली
हर हरकत पर कंपनी की नजर है. तू बात को समझने की कोशिश क्यों नहीं करती है. ये बहुत डेंजर लोग हैं. इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता . बड़े खतरनाक हैं, ऊंचे रसूख वाले हैं. पहले तू यहाँ से चुपचाप हंसकर बाहर
निकल जा. उसके बाद तुझे जों कहना है, या जों करना है वो कर लेना. समझी. और उस सामने वाले एरिया में मुझे थेंक्स मत बोलना.
सूरज- ओह, इसका मतलब वह महिला तुम्हारी हमदर्द थी ?
किरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए.
महिला- इस बात का पूरा ख़याल रखा जाता है. जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाए हैं उसने कंडोंम का इस्तेमाल किया था. मैं इसी कमरे मैं मौजूद थी.
किरण- मैं छोडूंगी नहीं तुम लोगों को , सबके खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगी .
महिला- कहाँ करोगी शिकायत ? करके देखलो. उलटे तुम बदनाम हो जाओगी .
किरण- अभी इन्साफ ज़िंदा है, ऐसा नहीं है कि सब लोग करप्ट हो गए हों .
महिला- जिसने भी इस तरह की कोशिश की है वह कहीं की नहीं रही.
किरण- मैं तुम्हारी इस पाप की लंका को खाक में मिलाकर छोडूंगी.मैं ज़रा अलग किस्म की लड़की हूँ, अपने साथ हुए इस धोखे को इतनी आसानी से नहीं भूल पाउंगी .
महिला- अगर ऐसा करना भी चाहोगी तो नहीं कर पाओगी. मतलब, भूल नहीं पाओगी. मैं बड़े प्यार से तुम्हारा अश्लील वीडियो यू ट्यूब .कॉम पर डाल सकती हूँ. और भी इसी तरह की कई साइटें हैं जिन्हें दिन में करोड़ों
लोग देखते हैं. तब तुम तो क्या पूरी दुनिया भी नहीं भूल पायेगी. याद रखेगी तुम्हें सदा-सदा के लिए. ब्लू फिल्म के खरीदार भी कम नहीं है. हमारे पास सैकड़ों के डीलर की इन्क्वारी आती रहती है. आम के आम और
गुठलियों के दाम वाली बात हो जाती है. एक बार हमारे ग्राहक का दिल तुम पर आया , हमने उसे सेवा दी , बदले में तुम्हें कीमत भी दे रहे हैं. अब आगे तुम्हारी मर्जी है, अगर अच्छा लगे तो काम करो और नहीं अच्छा
लगे तो बिलकुल मत करो यार . इसमें गुस्सा होने जैसी क्या बात है / तुम्हें थकान हो रही है इसलिए खराब लग रहा है. थोड़ी बहुत देर में सब ठीक हो जाएगा . अगर तुम किसी और के साथ भी पहली बार सुहागरात
मानती तो पहली -पहली बार इतना दुःख तो होता ही, अब रास्ता बिलकुल आसान और साफ़ हो गया है. अब तुम्हें किसी तरह के कोई परेशानी नहीं हो पायेगी .
किरण- मैंने बताया न , मैं अलग किस्म की हूँ. अगर हर गली, हर चौराहे पर भी मेरे अश्लील फोटो लगवा देते हो तब भी मुझे फर्क नहीं पडेगा, क्योंकि मेरी आबरू ला असली मोती तो तुम लोगों ने पहले ही चूर-चूर
कर दिया है. अब मैं तुम लोगों से इंतकाम लूंगी , और असी-वैसे नहीं. ब्याज के साथ लूंगी. तुम्हारा पूरा गिरोह नेस्तनाबूद हो जाएगा .
महिला- ऐ , कोई उपन्यास पढ़ लिया है या एक्शन वाली कोई फिल्म देख ली है. बड़े धांसू डायलोग बोल लेती हो. हीरोइन बनना चाहती हो क्या है. अपना सेठ है न , उसका बड़ा प्रोडक्शन हाउस है. बात करती हूँ ,
अगर वहाँ भी कैरियर बनाना चाहे तो बुरा नहीं है . लेकिन वहाँ भी कम्प्रोमाइज तो करना ही पड़ता है. करना पड़ेगा. हर डायरेक्टर सेक्सुअल फेवर चाहता है. नहीं करोगी तो फेल . कोई भी बहाना बना सकता है.
किरण- फिल्म तो अब मैं बनाऊँगी , तुम सब लोगों की. ती.वी. चेनल के ऑफिस में जाकर बैठती हूँ और अपनी आपबीती सुनाती हूँ. सभी सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतर जाएगा .
महिला- ऐसी गलती भी करके देख लों. देखती हूँ तुम यहाँ से बाहर कैसे निकलती हो. अरे बावली अपनी जान की दुशमन क्यों बनती है. जों हुआ है उसे भूल जा. नाश्ता कर ही लिया है. खाना खाने का मूड है तो बोल चिकन
तैयार हो रहा है. देसी चिकन है. सब थकान उतर जायेगी. दो पैग के साथ खाना खाना खायेंगे तो बात ही क्या है,. बाद में तेरी इच्छा है. ये काम करना है तो कर . नहीं करना है मत कर. ऐसी भी मैं कई लड़कियों को जानती
हूँ जिन्हें यहाँ पर जबरदस्ती लाया गया. ग्राहक ने रात भर मस्ती की, सुबह उसे पेमेंट किया और वह चुपचाप लेकर चली गयी. दोबारा आयी ही नहीं. वो भी खुश, कस्टमर भी खुश और कंपनी भी खुश.
किरण- तुम औरत नहीं हो,औरत के नाम पर कलंक हो. मुझ असहाय लड़की की मदद करने के बजाय उलटा धमका रही हो .
महिला- यही तो नादानी कर रही है, समझने की कोशिश नहीं कर रही. इधर आ. साइड में. अरे पगली उस जगह पर हम कैमरे की नजर में थे. यहाँ चप्पे-चप्पे पर सी.सी.ती.वी . कैमरे लगे हुए हैं. यहाँ पर होने वाली
हर हरकत पर कंपनी की नजर है. तू बात को समझने की कोशिश क्यों नहीं करती है. ये बहुत डेंजर लोग हैं. इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता . बड़े खतरनाक हैं, ऊंचे रसूख वाले हैं. पहले तू यहाँ से चुपचाप हंसकर बाहर
निकल जा. उसके बाद तुझे जों कहना है, या जों करना है वो कर लेना. समझी. और उस सामने वाले एरिया में मुझे थेंक्स मत बोलना.
सूरज- ओह, इसका मतलब वह महिला तुम्हारी हमदर्द थी ?
किरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए.
Wednesday, January 12, 2011
भाग- 20
- ये तुम्हारा मेहनताना है. अगर नौकरी करोगी तो महीने भर में इतना कमा पाओगी , और अगर यहाँ पर सेवा देना चाहोगी तो हर रात की तुम्हें इतनी रकम मिला करेगी .
किरण- अभिप्रिय और ब्रिज कहाँ हैं ?
- वे चले गए. यह रकम उन्होंने ही दी हैं. अब तुम मुझसे संपर्क कर सकती हो. रात तुम्हारे साथ सुहागरातमनाने वाले ब्रिज ने यह कीमती हार भी तुम्हें तोहफे में दिया है. अब अगला कस्टमर ब्रिज के अलावा कोई दूसरा भी हो सकता है.
किरण- कस्टमर . क्या आपको मैं धंधेबाज लगती हूँ ? क्या कल रात मेरा सौदा किया गया था ?
-तो क्या इतनी रकम कोई ऐसे ही दे देता है ? तुम अकेली नहीं हो. हमारे साथ फिल्मों की नामचीन एक्ट्रेस, होस्टेस, कोलेज गर्ल सब जुडी हुई हैं. ग्राहकों की डिमांड के अनुसार लड़कियां दी जाती हैं. तुम पर किसी मनचले
का दिल आ गया था. वह रईस उस प्लेन में सफर कर रहा था जिसमे तुम्हारी ड्यूटी लगी हुई थी. उसने हमारी कंपनी से संपर्क कर तुम्हें पाने की हसरत जाहिर की. पुराना ग्राहक था इसलिए उसे मना नहीं किया जा सकता था.
किरण- ओह , तो अभिप्रिय नेता का बेटा नहीं है ? और बरिह उसका दोस्त नहीं है ?
महिला- है न. सब सही है. तुमने जों सूना उसमे गलत कुछ भी नहीं है. ब्रिज बहुत फेमस व्यापारी का बेटा है और अभी. एक ख्यातिप्राप्त नेता का बेटा है. ये दोनों एक एस्कोर्ट कंपनी चलाते हैं. भूले -बिसरे और परेशान प्यासे लोगों
की प्यास बुझाते हैं. जरूरत मंदों की आर्थिक मदद करते हैं. मुझ जैसी असहाय महिलाओं को ऊंची पगार पर नौकरी देते हैं. यहाँ से पहले मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी. पूरे १२ घंटे काम करने के बदले मुझे कितनी
पगार मिलती थी ? अंदाजा लगाओ . अरे सिर्फ अढाई हजार महीना. और ऊपर से कंपनी का मैनेजर रोजाना इस शरीर के साथ खिलवाड करता था , बिलकुल मुफ्त में. वहाँ काम करने वाली ज्यादातर लड़कियां स्वेच्छानुसार
उसके साथ सम्बन्ध बनाती थी, जिसे काम नहीं करना हो वह इनकार करे. और यहाँ पर मुझे महीने के पूरे बीस हजार ररुपये मिलते हैं. इन पैसों से मैं अपने घर का खर्च चला सकती हूँ, अपने भाई को अच्छी शिक्षा दिला रही
हूँ. ओवर टाइम करके ही बीस से पच्व्चीस हजार महीना निकल आते हैं. जानना चाहोगे ओवर टाइम कैसा ? अरे यही जों तुमने किया है. अगर कोई ग्राहक अर्जेंट लड़की का इंतजाम करने को कहता है और कोई उस समय
उपलब्ध नहीं होती तो मैं चली जाती हूँ, मुझे महीने में कुछ दिन ही यह करना होता है और अच्छी खासी रकम मिल जाती है.
किरण- इसका मतलब ये लोग जिस्म के दलाल है. भडवे हैं.
महिला- इस अबरे में फैसला तुमको करना है. मैं तो इतना जानती हूँ कि अढाई हजार में भी मेरी अस्मत लुटती थी और अब भी लुटती है तो मुझे मनमाफिक कीमत भी मिलती है. मेरी इच्छानुसार होता है जों होता है.
किरण- लेकिन मेरे साथ तो गद्दारी की गयी है. मुझे पहले नहीं बताया गया था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. मुझे दोस्ती और प्रेम के जाल में फंसाकर मेरे साथ धोखा किया गया है.
महिला- अगर तुम्हें यह सब बताया जाया तो क्या तुम राजी-राजी हाँ कर देती. दोस्ती में तो तुम मुफ्त में ही अपनी आबरू लुटाने के लिए तैयार थीं , अब तो उसकी कीमत भी मिल रही है. धोखेबाज तो वे होते हैं जों आपकी कीमत दिए
बिना ही आपको प्राप्त कर लेते हैं.
किरण- न जाने किस -किसने मेरे साथ मुंह काला किया होगा ? मेरी इज्जत के परखच्चे उडाये होंगे. ?
महिला- ऐसा बिलकुल नहीं है. सिर्फ एक आदमी ने ही आपके साथ सम्बन्ध बनाए हैं,. उस समय आप बेहोश भी नहीं थीं, बस सोच समझ नहीं पा रही थीं. मैं सब कुछ देख रही थी. मुझे आप दोनों के संबंधों की फिल्म जों बनानी थी.
किरण- तो क्या मुझे ब्लेकमेल करने का इरादा है ? मेरी अश्लील वीडियो फिल्म भी तैयार कर ली गयी है ?
महिला- डर मत मेरी मैना. यह सिर्फ उस समय के लिए है, जब मैना उड़ने की कोशिश करे. समझी ?
किरण- इसका मतलब मैं गर्भवती भी हो सकती हूँ और अगर किसी रोगी ने मेरे साथ सम्बन्ध बनाया होगा तो क्या होगा ?
महिला- इस बात का पूरा ख़याल रखा जाता है. जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाए हैं उसने कंडोंम का इस्तेमाल किया था. मैं इसी कमरे मैं मौजूद थी.
किरण- मैं छोडूंगी नहीं तुम लोगों को , सबके खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगी .
महिला- कहाँ करोगी शिकायत ? करके देखलो. उलटे तुम बदनाम हो जाओगी .
किरण- अभी इन्साफ ज़िंदा है, ऐसा नहीं है कि सब लोग करप्ट हो गए हों .
महिला- जिसने भी इस तरह की कोशिश की है वह कहीं की नहीं रही.
किरण- मैं तुम्हारी इस पाप्म की लंका को खाक में मिलाकर छोडूंगी.
- ये तुम्हारा मेहनताना है. अगर नौकरी करोगी तो महीने भर में इतना कमा पाओगी , और अगर यहाँ पर सेवा देना चाहोगी तो हर रात की तुम्हें इतनी रकम मिला करेगी .
किरण- अभिप्रिय और ब्रिज कहाँ हैं ?
- वे चले गए. यह रकम उन्होंने ही दी हैं. अब तुम मुझसे संपर्क कर सकती हो. रात तुम्हारे साथ सुहागरातमनाने वाले ब्रिज ने यह कीमती हार भी तुम्हें तोहफे में दिया है. अब अगला कस्टमर ब्रिज के अलावा कोई दूसरा भी हो सकता है.
किरण- कस्टमर . क्या आपको मैं धंधेबाज लगती हूँ ? क्या कल रात मेरा सौदा किया गया था ?
-तो क्या इतनी रकम कोई ऐसे ही दे देता है ? तुम अकेली नहीं हो. हमारे साथ फिल्मों की नामचीन एक्ट्रेस, होस्टेस, कोलेज गर्ल सब जुडी हुई हैं. ग्राहकों की डिमांड के अनुसार लड़कियां दी जाती हैं. तुम पर किसी मनचले
का दिल आ गया था. वह रईस उस प्लेन में सफर कर रहा था जिसमे तुम्हारी ड्यूटी लगी हुई थी. उसने हमारी कंपनी से संपर्क कर तुम्हें पाने की हसरत जाहिर की. पुराना ग्राहक था इसलिए उसे मना नहीं किया जा सकता था.
किरण- ओह , तो अभिप्रिय नेता का बेटा नहीं है ? और बरिह उसका दोस्त नहीं है ?
महिला- है न. सब सही है. तुमने जों सूना उसमे गलत कुछ भी नहीं है. ब्रिज बहुत फेमस व्यापारी का बेटा है और अभी. एक ख्यातिप्राप्त नेता का बेटा है. ये दोनों एक एस्कोर्ट कंपनी चलाते हैं. भूले -बिसरे और परेशान प्यासे लोगों
की प्यास बुझाते हैं. जरूरत मंदों की आर्थिक मदद करते हैं. मुझ जैसी असहाय महिलाओं को ऊंची पगार पर नौकरी देते हैं. यहाँ से पहले मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी. पूरे १२ घंटे काम करने के बदले मुझे कितनी
पगार मिलती थी ? अंदाजा लगाओ . अरे सिर्फ अढाई हजार महीना. और ऊपर से कंपनी का मैनेजर रोजाना इस शरीर के साथ खिलवाड करता था , बिलकुल मुफ्त में. वहाँ काम करने वाली ज्यादातर लड़कियां स्वेच्छानुसार
उसके साथ सम्बन्ध बनाती थी, जिसे काम नहीं करना हो वह इनकार करे. और यहाँ पर मुझे महीने के पूरे बीस हजार ररुपये मिलते हैं. इन पैसों से मैं अपने घर का खर्च चला सकती हूँ, अपने भाई को अच्छी शिक्षा दिला रही
हूँ. ओवर टाइम करके ही बीस से पच्व्चीस हजार महीना निकल आते हैं. जानना चाहोगे ओवर टाइम कैसा ? अरे यही जों तुमने किया है. अगर कोई ग्राहक अर्जेंट लड़की का इंतजाम करने को कहता है और कोई उस समय
उपलब्ध नहीं होती तो मैं चली जाती हूँ, मुझे महीने में कुछ दिन ही यह करना होता है और अच्छी खासी रकम मिल जाती है.
किरण- इसका मतलब ये लोग जिस्म के दलाल है. भडवे हैं.
महिला- इस अबरे में फैसला तुमको करना है. मैं तो इतना जानती हूँ कि अढाई हजार में भी मेरी अस्मत लुटती थी और अब भी लुटती है तो मुझे मनमाफिक कीमत भी मिलती है. मेरी इच्छानुसार होता है जों होता है.
किरण- लेकिन मेरे साथ तो गद्दारी की गयी है. मुझे पहले नहीं बताया गया था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. मुझे दोस्ती और प्रेम के जाल में फंसाकर मेरे साथ धोखा किया गया है.
महिला- अगर तुम्हें यह सब बताया जाया तो क्या तुम राजी-राजी हाँ कर देती. दोस्ती में तो तुम मुफ्त में ही अपनी आबरू लुटाने के लिए तैयार थीं , अब तो उसकी कीमत भी मिल रही है. धोखेबाज तो वे होते हैं जों आपकी कीमत दिए
बिना ही आपको प्राप्त कर लेते हैं.
किरण- न जाने किस -किसने मेरे साथ मुंह काला किया होगा ? मेरी इज्जत के परखच्चे उडाये होंगे. ?
महिला- ऐसा बिलकुल नहीं है. सिर्फ एक आदमी ने ही आपके साथ सम्बन्ध बनाए हैं,. उस समय आप बेहोश भी नहीं थीं, बस सोच समझ नहीं पा रही थीं. मैं सब कुछ देख रही थी. मुझे आप दोनों के संबंधों की फिल्म जों बनानी थी.
किरण- तो क्या मुझे ब्लेकमेल करने का इरादा है ? मेरी अश्लील वीडियो फिल्म भी तैयार कर ली गयी है ?
महिला- डर मत मेरी मैना. यह सिर्फ उस समय के लिए है, जब मैना उड़ने की कोशिश करे. समझी ?
किरण- इसका मतलब मैं गर्भवती भी हो सकती हूँ और अगर किसी रोगी ने मेरे साथ सम्बन्ध बनाया होगा तो क्या होगा ?
महिला- इस बात का पूरा ख़याल रखा जाता है. जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाए हैं उसने कंडोंम का इस्तेमाल किया था. मैं इसी कमरे मैं मौजूद थी.
किरण- मैं छोडूंगी नहीं तुम लोगों को , सबके खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊंगी .
महिला- कहाँ करोगी शिकायत ? करके देखलो. उलटे तुम बदनाम हो जाओगी .
किरण- अभी इन्साफ ज़िंदा है, ऐसा नहीं है कि सब लोग करप्ट हो गए हों .
महिला- जिसने भी इस तरह की कोशिश की है वह कहीं की नहीं रही.
किरण- मैं तुम्हारी इस पाप्म की लंका को खाक में मिलाकर छोडूंगी.
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