तुम तो मेरी जान बन चुकी हो न , बड़ा अटपटा लगेगा . है न ?
रानी- अच्छा जी. जब तुम्हारी पत्नी को तुम्हारा भाई भी यूज करता है तब तो कुछ नहीं कहते , और यहाँ पर मिल बांटकर खाने में तुमको तकलीफ हो रही है .
खूब मजा लेते हो तुम भी . अरे मैं मना थोड़े ही करती हूँ, जितना चाहो ऐश करो .तुम्हारे गाँव में भाई के अलावा और कोई भी जवां मर्द हो तो लेकर आओ .
मैं तैयार हूँ. देखते हैं , मुकाबले में कौन जीतता है ? मैं या तुम्हारे गाँव का मर्द . यहाँ जब तक नहीं आएगा , तब तक तो खूब शेखी बघारेगा मगर यहाँ आते ही फिनिश हो जाएगा
केशव- आप मेरी यानि कि केशव की मर्दानगी को ललकार रही हैं. देखो , माफ करना मैं सेठजी जैसा नहीं हूँ. मैं अकेला ही सब कुछ कर सकता हूँ यानि कि हर मोर्चा संभाल सकता
हूँ, जब चाहो आजमा लेना, मगर तुम खुद ही पीछे क्यों हट जाती हो , जब रात भर साथ रुकने की बात आयेगी तो मना कर देती हो , बस मुझे इस्तेमाल करने तक ही साथ रखती हो ,
तब तक तो मेरे शरीर के अंग-अंग को चूमती हो और फिर बाद में क्या हो जाता है ? क्या बाद में मेरे जिस्म से बदबू आने लगती है. इस बात को बहुत दिनों से महसूस कर रहा
था , लेकिन कहने का सही मौक़ा नहीं मिला . अब जबकि बात चल ही पडी है तो मैं भी कहकर रहूंगा. मुझे भी तकलीफ होती है , मेरा भी दिल है . भले ही आपका नौकर हूँ, यहाँ
तक कि गुलाम हूँ , तब भी क्या हुआ ? गुलाम भी आखिरकार एक इंसान होता है और हर इंसान की फीलिंग्स होती हैं. म९न भी सोचता हूँ कि कभी तो , किसी रात को तो सेवा करने का ,
तुम्हारे साथ सोने का अवसर मिले . मगर तुम तो कोई न कोई बहाना बनाकर टाल दिया करती हो .
रानी- ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है मेरी जान. केशव / त्तुम तो जानते ही हो कि तुम्हारी यहाँ पर कुछ खास जिम्मेदारियां हैं, तुम्हारी जरूरतें पड़ती रहती हैं. तुम्हारे अपने काम हैं
अगर मैं तुम्हारे साथ सोऊँगी तो लोग जान जायेंगे कि तुम गायब हो , ऐसे में हम पकडे जायेंगे .
केशव- अगर दम देखन है तो एक बार तो सेवा का चांस दो, मैं हमेशा की नहीं कहता. भले ही हमेशा न करो . आज तो करने दो कम से कम.
रानी -अच्छा , इसका मतलब तुझे चर्ब्नी चढी है. देखती हूँ क्या कर पाता है . चल, आज रात हम दोनों साथ-साथ बिताते हैं. अब खुश है ? मगर मुझे बीच में थोडा सा टाइम चाहिए .
केशव -ओके , अब तुम सीढी हो अजो , मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाता हूँ. यह एक ऐसा स्वाद है , जसिके आगे सब आनंद फीके ही पड जाते हैं .
रानी -आज की रात को यादगार बनादे केशव, ऐसा हमला कर कि दुनिया के सब दुखों को हमेशा -हमेशा के लिए भूल जाऊ.
केशव- मैं जानता हूँ कि तुम्हें क्या पसंद है . आज मैं ऐसे जोरदार प्रहार करूँगा कि मस्त हो जाओगी , फिर कभी भी गाँव से किसीको बुलाने की बात नहीं करोगी यकीन मानो .
रानी- अगर तू ऐसे ही मजे देता और लेता रहा तो भला मुझे काया जरूरत आन पडी है कि मैं किसी और को बुलीन को कहूँ , वैसे वो भी मैं तेरे फायदे के लिए ही कह रही थी.
मैं चाहती थी कि तुझे भी थोड़ा सा आराम मिल जाएगा , और मजा भी मिलजुलकर लिया करेंगे . तूने फिल्मों में नहीं देखा क्या, कैसे एक हीरोइन को दो -दो , तीन-तीन हीरो एक बार में ही
जिस्मानी सुख देते हैं. उस समय जब देखने भा में ही इतना मजा आता अहि तो उसे पर अमल करने में कितना सुख मिलेगा , यह आसानी से अनुमान लगया जा सकता है .
केशव- हाँ यार, अगर ऐसि९ बात है तो ठीक है , मैं तैयार हूँ. मैं अपने भाई को ही बुलवा लेता हूँ . कम से कम घर का माल घर में ही रहेगा .
रानी- अब की है तूने समझदारी की बात . मगर उसका पहले डॉक्टरी चेकअप कराना पडेगा . अगर उसे कोई बीमारी नहीं हुई तभी मैं उसके साथ सम्बन्ध बना सकती हूँ . और
चेकअप भी अपने पहचान के डॉक्टर से करवाउंगी . ठीक अहि ?
केशव- ठीक अहि , यह तो हम सभी के हित की बात है , वैसे मैं इतना बता सकता हूँ कि उसे कोई भी बीमारी नहीं होगी , क्योंकि मेरी जानकारी में उसे कभी सिर का दर्द भी नहींहुआ.
रानी ठीक अहि तो अब आज की रासलीला समाप्त करो . अब मैं और सहन नहीं कर पाउंगी .
बिजली इन सब बातों को सुन रही थी. काम वासना की आग उसके बदन को जलाने लगी . वह बेचैन दिख रही थी. जब उससे सहन नहीं हुआ तो उसने अपनी सारे कापसे उतर फेंके .
पहली उसने टॉप उतारा , इसके बाद स्कर्ट , और फिर भी तसल्ली नहीं मिली तो उसने अपने सारे कपडे उतार दिए . अब वह पूरी तरह से नग्न थी. बेडरूम में रानी और केशव
अपने -अपने जिस्मों की प्यास बुझा रहे थे और बाहर बिजली दीवार से सीना रगडकर अपनी काम्ज्वाला को शांत करने की कोशिश रही थी,