Sunday, September 26, 2010

लवगुरु -४९

मुंशीजी- अच्छा बदमाशी शुरू. मैं पहले ही कह चुका हूँ कि तुम्हारे सिवाय और किसी लड़की ने मेरी जिंदगी में प्रवेश ही नहीं किया.
डोली- ठीक है, चालू रहिये . आगे क्या खा था लवगुरु ने ?
मुंशीजी- बोले, यह सच है कि अंतरंग क्षणों के दौरान और उससे ठीक पहले वाले पल आपको एक दूसरे के बेहद करीब ला देते हैं और आप दोनों के अंदर एक दूसरे के प्रति प्रेम की भावना काफी बढ जाती है. परंतु यह भी उतना ही सच है कि उन खास अंतरंग क्षणों के बाद का समय भी उतना ही रोमांटिक हो सकता है बल्कि पहले से अधिक भी!
अंतरंग संबंध बनाने के बाद के क्षण काफी महत्वपूर्ण होते हैं और युगल इसका भरपूर लाभ उठा सकते हैं.
सेक्स के बाद क्या? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है परंतु जवाब सरल है. अधिकतर युगलों का जवाब होता है अच्छी नींद. या फिर रोजमर्रा के काम, ऑफिस, मित्रों के घर जाना या फिर टीवी देखना. परंतु यदि इससे थोड़ा हटकर सोचा जाए तो रोमांस के पलों को आगे बढाया जा सकता है और आपसी संबंधों को भी नई ऊँचाईयाँ दी जा सकती है.
यदि आपको संगीत पसंद है तो भी अथवा नहीं है तो भी. अंतरंग पलों के बाद आप दोनों साथ-साथ कोई रोमांटिक मधुर गाना सुन सकते हैं. इस तरह से बिना बात किए भी आप एक दूसरे को अपने करीब महसूस करेंगे.
सेक्स के बाद गर्दन और पीठ की हल्की मालिश करें. सेक्स के दौरान ऑक्सिटोसिन और प्रोलेक्टिन हार्मोन उत्सर्जित होते हैं जो आपके बीच के �
यार को बढाते हैं. वही हार्मोन हल्की मालिश से भी उत्सर्जित होते हैं. इसलिए सेक्स के बाद हल्की मालिश करने से आप अपने "प्रेम के क्षणों" को बढा सकते हैं.

यकीन मानिए यह भी काफी रोमांटिक लग सकता है. सेक्सोलोजिस्ट मार्क मोनसेन के अनुसार अंतरंग पलों के बाद एक दूसरे की सहायता करना रोमांस को बढा सकता है.

उन खास पलों का आनंद लेने के बाद एक दूसरे के साथ साथ थोड़ी देर बात अवश्य करें. सम्भव हो तो बाल्कनी में जाएँ और ठंडी हवा का आनंद लें. यह निर्भर करता है कि आपके घर के आसपास का पर्यावरण कैसा है परंतु इस नैसर्गिक क्रिया के बाद प्रकृति के समीप जाने का अहसास काफी सुखद होता है
एक दूसरे के साथ स्नान करना बेहतरीन फोरप्ले माना जाता है परंतु यह सेक्स के बाद के रोमांटिक पलों को बढाने में भी मददगार साबित हो सकता है. हल्के शावर के साथ पानी की बुंदों को और उनके स्पर्श को महसूस करें.लेकिन यह सब उन्ही मर्दों के लिए है जों बिस्तर पर पूरी तरह से फिट होते हैं, यानि पत्नी को बिस्तर पर सम्पूर्ण सुख संतुष्टि प्रदान कर सकते हैं . जों लोग कामशक्ति के मामले में कमजोर होते हैं और सेक्स पावर बढाने वाली दवाओं का सेवन करते हैं , उनको कई तरह के बीमारियाँ हो सकती हैं. एक दिन टीवी में बताया गया था कि हृदय की बीमारियों से पीडि़त वह लोग सचेत हो जाएं जो सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं भी लेते हैं। एक शोध से पता चला है कि इन दवाओं से आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है। यह खुलासा हुआ है कि जो व्यक्ति दिल के दौरे के शिकार हो चुके हैं और सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं लेते हैं उनकी आंखों की तंत्रिका के नष्ट होने का खतरा दस गुना बढ़ जाता है। कहा गया है कि सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली वियाग्रा और सियालिस जैसी दवाएं लेने वाले दिल का दौरे से पीडि़त लोगों में नान आर्टिरिटिक एंटीरियर इसचैमिक आप्टिक न्यूरोपैथी होने की आशंका होती है। ज्ञात हो पचास की उम्र वालों में एनएआईओएन की आशंका अधिक होती है क्योंकि इसमें आंख की तंत्रिका के नष्ट होने का खतरा अधिक होता है, जिस कारण हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है.
ज्ञात हो कि वियाग्रा के बाजार में आने के बाद एक करोड़ लोग इस दवा का उपयोग कर रहे हैं। अब तक एनएआईओएन से संक्रमित होने के चालीस ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं ली थीं। मैकग्विन और उनके सहयोगियों ने बताया कि हृदय की बीमारी और उच्च रक्त दाब से ग्रसित मरीजों में एनएआईओएन का खतरा होता है इसलिए लोगों को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए। मैकग्विन ने बताया कि इतने बडे़ पैमाने पर लोग इस दवा का प्रयोग कर रहे हैं, अगर एनएआईओएन होने की बात की पुष्टि होती है तो आने वाले समय में इस प्रकार के मामले अपने आप सामने आएंगे.

Saturday, September 25, 2010

लवगुरु, भाग-४8


मुंशीजी- फिल्म तो अच्छी है ही, साथ ही तुम्हारा भी जवाब नहीं है. यह तुम्हारे शुद्ध विचारों का ही प्रताप है कि अब तक बची रहीं, वरना आजकल तुम जैसी सुन्दर कली को कुचलने के लिए चारों ओर भेडिये मौजूद हैं.
कई महिलाओं से संबंध रखना पुरुषों के बीच स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है। पहले जहां इस तरह के संबंधों को छिपाया जाता था, वहीं अब ये खुले आम स्वीकार किए जाने लगे हैं। यहां तक कि इनको मर्दानगी की निशानी के तौर पर भी देखा जाने लगा है। लवगुरु ने मुझसे कहा था कि अब ऐसे रंगीन मिजाज लोगों को सावधान होने की जरूरत है यह साबित हो चुका है कि कई महिलाओं से संबंध रखने वाले लोग कम उम्र में ही मौत के कगार पर पहुंच सकते हैं। कुछ लोग हमेशा महिलाओं के चक्कर में रहते हैं। महिलाओं को पटाने की कोशिश में वे अपने खाने- पीने पर खास ध्यान नहीं दे पाते। इस वजह से उनका फिजिकल डिवेलपमेंट रुक जाता है और वे कई तरह की बीमारियों के भी शिकार हो जाते हैं।� पुरुष के जितनी ज्यादा महिलाओं से संबंध होंगे, उसकी उम्र उतनी ही कम होती जाएगी। हालांकि इंडिया में कम ही पुरुषों को एक से ज्यादा महिलाओं के साथ संबंध रखने का 'सौभाग्य' मिल पाता है, इसलिए यहां पर इस तरह का खतरा कम रहेगा.
वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च की तह तक जाने के लिए मछलियों पर अध्ययन किया। रिसर्च में नर मछलियों के साथ लगातार नई- नई मादा मछलियों को रखा गया। इस दौरान उन्हें तरह- तरह का भोजन दिया गया। रिसर्च में पता चला कि नर मछलियों ने भोजन खाने से ज्यादा मादा मछलियों को निहारने में समय व्यतीत किया। इन नर मछलियों में सामान्य मछलियों की तुलना में धीमी वृद्धि देखी गई, जबकि उसके विपरीत केवल एक मादा मछली के साथ रहने वाली नर मछलियों का फिजिकल डेवलेपमेंट ज्यादा अच्छा पाया गया।
डोली- कौन करता है इस तरह के अध्ययन ? मुझे लगता है पत्रिकाएं भी मसाले के चक्कर में कुछ भी छाप देती हैं.
मुंशीजी - नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. पत्रिकाओं की भी जिमेदारी होती है. सामाजिक सरोकार होते हैं. उससे जुड़े लोग समाज के प्रतिष्टित लोग होते हैं. मैंने लवगुरु से उम्र और सेक्स के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा था कि सेक्सुअल घनिष्ठता को उम्र बढ़ने के साथ प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता क्योंकि आत्मीयता की चाहत का उम्र से कोई सम्बन्ध नहीं है। आज के दौर में जबकि ज्ञान की शक्ति और चिकित्सा विज्ञान की अभूतपूर्व प्रगति के कारण लोग अधिक लम्बाध, स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताते हैं ऐसे में सेक्सुअली सक्रिय रहना शारीरिक और मानसिक तंदुरूस्ती के लिए बेहतर साबित होता है।
व्यक्ति के सेक्सुअल पैटर्न में पूरी जिंदगी बदलाव होते हैं। जहां एक किशोर की प्रजनन क्षमता तेरह वर्ष की उम्र से शुरू हो सकती है वहीं उसकी सेक्सुअल क्षमताओं का चरम अठारह वर्ष की उम्र में हो सकता है। तीस से चालीस की उम्र के बाद पुरूष की सेक्सुअल प्रतिक्रियाओं में कुछ कमी आना शुरू हो जाती है और पचास की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते विशेष अंग में कठोरता और स्खलन की आवृत्तियों में स्पष्ट कमी आ जाती है। लेकिन ये केवल शारीरिक बदलाव हैं जो सेक्स के आनंद को कोई विशेष प्रभावित नहीं करते। कोई पुरूष यदि स्वास्थ्‍य सम्बन्धी किसी समस्या का सामना न कर रहा हो तो वह पूरे जीवन भर सेक्स लाईफ का आनंद ले सकता है।परफेक्स जैसी दवाओं से लोग साठ वर्ष तक की आयु में भी आनंद लेते हैं. सम्पूर्ण सुख भोगते हैं. और ऐसी दवाएं अब हर मेडीकल स्टोर में आसानी से मिल जाती हैं. अब विदेश जाने की भी जरूरत नहीं.
डोली- क्या यह बात लड़कियों पर भी लागू होती है ?
मुंशीजी- सच कहूँ तो यह सवाल मैंने पूछा ही नहीं था, हाँ, इतना कह सकता हूँ कि महिलायें कुछ अलग तो होती नहीं, तो जाहिर सी बात है उनका हाल भी ऐसा ही होता होगा. उम्र के साथ-साथ उनका मासिक चक्र भी बंद हो जाता है. सेक्स में अरुचि होने लगती है.
डोली - आप हर समय लवगुरु की चर्चा करते रहते हैं. अखबारों में भी उन्हीकी तस्बीरें छपती रहती हैं. टीवी में भी उनके प्रवचन रहते हैं , आखिर वे हैं क्या बला ? मैंने तो इस शहर में हर तरफ उन्हीके पोस्टर देखे हैं.
मुंशीजी- हाँ, हाँ ठीक कहती हो. बहुत पहुंचे हुए हैं, दो प्रेमियों को मिलाने की उनमे अदभुत क्षमता है. जब दो चाहने वाले बिछुड जाते हैं या फिर बेदर्द जमाना उन्हें मिलने नहीं देता तब लवगुरु का काम ह्शुरु होता है .
डोली- ओह, तो क्या आपकी भी कोई चाहने वाली बिछुड गयी है ?

Friday, September 24, 2010

लवगुरु-४७

मुंशीजी के दिमाग में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी जबकि डोली के खयालात बिलकुल जुदा थे. डोली चाहती थी कि मुंशीजी जल्दी से मंजिल पर पहुंचकर अपना काम निबटाएं और आराम से सो जाएँ . उसे बुड्ढे ग्राहकों में सिर्फ इतनी ही दिलचस्पी थी कि वे पैसे खर्च करें और चलते बनें. डोली ने उनकी भावनाओं को भड़काने के उद्देश्य से आखिरकार पूछ ही लिया-
-आपके गुरु ने किस के बारे में कुछ खास नहीं बताया , ऐसा लगता है ?
मुंशीजी -सेक्स के लिए जरूरी है कि पार्टनर को इसके लिये तैयार किया जाय. यह प्रक्रिया फोरप्ले कहलाती है. इसका सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है चुंबन. पूरे आवेग से लिया गया चुंबन एक खास किस्म के कांप्लेक्स केमिकल को दिमाग की तरफ भेजता है, जिससे व्यक्ति खुद को ज्यादा उत्तेजित, खुश अथवा आरामदायक स्थिति में महसूस करता है।
डोली- जानते हो, प्यार का इजहार करने के लिए चुंबन से बढ़कर शायद ही कोई दूसरा माध्यम हो। एक प्यार भरा चुंबन प्रेमी या प्रेमिका को दिन भर की तमाम उलझनों से मुक्त करके एक प्यार भरे संसार में ले जा सकता है।
मुंशीजी- लवगुरु ने कहा था , अपनी जीभ अपने चाहने वाली के मुख की कोमल त्वचा में डालकर उसे चारों ओर घुमाया जाता है। मुख से मुख मिलाकर फ्रेंच किस किया जाता है। जब चाहने वाली को कुछ उत्तेजना भरा संदेश देना चाहें तो यह किस अपनाया जाता है। इसमें चाकलेट, फल या बर्फ का टुकड़ा अपने होठों से दबाकर अपने प्रेमी के होठों का स्पर्श किया जाता है। स्पर्श के बाद अपनी जीभ के सहारे दबाया गया टुकड़ा अपने प्रेमी के मुख में डाल दिया जाता है।
यह किस पूरे नियंत्रण के साथ किया जाता है। इस किस में होठों से दबाकर चाटा जाता है। अ�
�ने होठों से अपने प्रेमी के होठों और त्वचा को सख्ती से दबाकर इसका आनंद लिया जाता है।
कहा जाता है कि इस प्रकार का किस मध्यकाल के नाइट्स अपनी प्रेमिका या पत्‍नी को करते थे, जब वह लो कट नेकलाइन्स पहनती थीं। इस किस में उनकी गर्दन को चारों तरफ से धीरे-धीरे चूमा जाता था। पुरूष और महिलाएं दोनों इस प्रकार के चुंबन का लुत्‍फ उठाते थे।
मैंने एक टीवी प्रोग्राम में सूना था कि इस चुंबन की उत्पत्ति लैटिन के प्रेमियों ने की थी। इस चुंबन का आनंद लेने के लिए लैटिन प्रेमी मिठाई के दानों को अपने प्रेमी के शरीर पर डालते थे। उसके बाद अपनी जीभ से उनके शरीर पर धीरे से हमला करते थे। अपने प्रेमी के शरीर की मनपसंद जगह में इन मिठाई के दानों को डाला जाता था। स्तन और पेट के आसपास के चुंबन से इसका विशेष रूप से आनंद लिया जाता है।
यह किस शरीर के सर्वाधिक संवेदनशील हिस्सों खासकर गर्दन, छाती, पेट और निचली जांघों में किया जाता है। अधखुला मुंह खोलकर इन हिस्सों का स्पर्श किया जाता है। छाती के निचले हिस्सों विशेषकर स्तन के निप्पलों को चूमने में विशेषरूप से आनंद आता है।
इस चुंबन में जीभ आगे पीछे गति करती है। जिस प्रकार क्रीम या सॉस को चाटा जाता है ठीक उसी प्रकार स्लाइडिंग किस किया जाता है। फोरप्ले में यह किस काफी उपयोगी होती है .
डोली- वाव. मगर आपने तो इस तरह का कोई खेल खेला ही नहीं , मैं नाराज हूँ आपसे .
मुंशीजी- ओहो. तुम भी कमाल करती हो जानेमन . अभी टाइम ही कहाँ मिला है जों इस तरह का किस किया जाए. और हाँ, पूरी बातें याद भी तो नहीं रहती हैं, अब आपने याद दिलाया तो याद आया.
डोली- अगर प्यार चाहते हो तो याददाश्त दुरुस्त करनी होगी ज़नाब. इसके बिना प्यार में उतना मजा नहीं आयेगा . जों कुछ भी अब तक आपके गुरु ने सिखाया है, वह सब इस्तेमाल कर डालिए. कुछ भी बचाकर मत रखिये.
मुंशीजी- तुम तो जान हो अपनी . एक दिन का प्यार नहीं है. हमारा यह मिलन अमर है . हम हमेशा के लिए मोहब्बत की डोर में बध चुके हैं. अब प्यार की इस दुनिया को और भी ज्यादा रंगीन बनना है. भले ही तुम्हारा सहयोग क्यों नालेना पड़े.
डोली- सेक्स ज्ञान के लिए यह जरूरी है कि हम इसी तरह की फिल्मे देखें. बहुत अच्छी है ये फिल्म.











Thursday, September 23, 2010

lavguru-46

मुंशीजी ने बात बदलने के लिए कहा -
-नई सदी की शुरुआत में सब कुछ बदल गया है। प्रेम की भाषा और परिभाषाएँ भी बदल गई हैं। शब्दों के रूप बदल गए हैं। इस बदलाव में भाषा को बेलगाम जबान मिली है। भाषा और जबान पर आ टिका है कामुकता का भाव जिसे अभिव्यक्त करता है एकमात्र 'सेक्सी' शब्द।
आधुनिक भाषा शास्त्र में सेक्सी शब्द ऐसा रूप ले चुका है, जो किसी की तारीफ में भी यह कहा जा सकता हैं कि ''आप कितनी सेक्सी लग रही हैं''। सेक्सी शब्द खास कर 'डाट कॉम' दौर की युवा पीढ़ी की शब्दावली का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो उनकी मनोभावनाओं को बेहद आसानी से व्यक्त करने में सहायक होता है। सेक्सी शब्द 'ढाई अक्षर प्रेम के' का नए ढाई अक्षरीय रूप में पुनर्जन्म है, जो हमेशा कामुकता की ओर इशारा नहीं करता बल्कि माहौल व उस में समाई चीजों को एक खास रूप से पेश करता है। आज पूरा का पूरा माहौल सेक्सी सुविधाओं व कृतियों से भरा हुआ है। कंप्यूटर सेक्सी है, टीवी पर न्यूजरीडर सेक्सी है, म्यूजिक सिस्टम सेक्सी है, बाथरूम सेक्सी है तो फ्रिज का लुक सेक्सी है। पोशाकें तो सेक्सी हैं ही। अब तो जूते, चप्पलें तक भी सेक्सी हो चले हैं।
मुद्दे की बात यह है कि सेक्सी शब्द ऐसा साफसुथरा किंतु शरारतपूर्ण शब्द बन चुका है, जो मन के किसी कोने में पैदा हुई यौन इच्छा से जुड़ी गुदगुदी को जगा देता है.

डोली- मैंने भी महसूस किया है कि देखने में सुंदर, साफसुथरे ऑफिस को 'सेक्सी ऑफिस' कह दिया जाता है। मेज के कोने पर रखा नए मॉडल का आकर्षक कंप्यूटर या लैपटॉप, कुर्सियों की नरम गुदगुदा देने वाली गद्दियाँ आदि सब कुछ सेक्सी होने में शुमार हो जाते हैं।
कामुकता पैसे की बैसाखियों पर सवार होकर ज्यादा इठलाती है। रईसों के लिए सफलता भी सेक्सी है और पैसा भी सेक्सी है। आज के परिवेश में पैसा और सफलता भी कामुकता पैदा करती है।हमारे पास पैसा नहीं है तो हम कुछ चोचला नहीं करते.
मुंशीजी -सच कहती हो . अब प्यार बाजार में मिलने लगा डब्बों में पैक हो कर रेडीमेड। प्रेम की भावना खुलेआम देशीविदेशी कार्ड कंपनियों द्वारा कभी कार्ड की शक्ल में, कभी गुब्बारों की शक्ल में। कभी छोटेबड़े टैडिबीयरों की शक्ल में दुकानें पर बिकने के लिए रखी जाने लगी है। मुँह से बोलने के लिए जबान ने सिर्फ एक ही शब्द चुना 'हाऊ सेक्सी'।
सौंदर्य अब फड़कता, दमकता रोकड़ा बन गया है जिसे कैश कार्ड की तरह भुनाया जा सकता है। सौंदर्य प्रतियोगिता में अब लोग अपनी बेटियों की नुमाइश शौक से करते हैं क्योंकि अगर इस से नोट कमाए जा सकते हैं तो क्या बुराई है। सौंदर्य को ताकत समझा जाने लगा है। हर छोटाबड़ा शहर अपनेअपने तंबू तान कर अपनी-अपनी नजरें सिंकाई का सामान इकट्ठा करता है और कहा जाता है 'काफी सेक्सी शो था।'
परफ्यूम की खुशबू में डूबा, महकता शरीर सेक्सी लगता है। आफ्टर शेव लोशन की महक पुरुष को ज्यादा सेक्सी बना देती है। विज्ञापन कंपनियां आलू के चिप्स से ले कर कमर के दर्द के मलहम तक सेक्सी अंदाज में पेश करने में पीछे नहीं रहती। ट्यूबलाइट हो या काफी का मग, चॉकलेट का डब्बा हो या पिज्जा का डब्बा, सब कुछ घूमफिर कर सेक्सी अंदाजों में डूब कर दर्शकों व ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है।
सेक्स माहौल पर इतना हावी कब और कैसे हो गया, पता ही नहीं चला। ' हमारे रिक्शा, टेम्पो, ट्रक तक सेक्सी होने से अछूते नहीं रहते। इनका भी अपना एक अनोखा श्रृंगार रस है, जो हर राह चलते को उन्मादित कर ही देता है।
क्या सेक्सी शब्द को आकर्षण का पर्याय मानें? यह शब्द समाज के, व्यक्तित्व के खूबसूरत व शालीनरूप को प्रस्तुत करे तभी तक सुंदर लगता है अन्यथा जैसे ही वह अपना सम्मोहनकारी रूप त्याग कर उत्तेजकता व अश्लीलता के दायरे में कदम रखता है वैसे ही इसका गले से उतरना मुश्किल हो जाता है।
डोली - मेरे ख़याल से इस शब्द का इस्तेमाल सोच-समझकर करिये । वक्त का व आसपास इकट्ठे लोगों का विशेष तौर पर ध्यान रखें। हमउम्र लोगों के बीच इस शब्द का इस्तेमाल खप जाता है। ऐसा न हो कि कभी गलत समय पर इस शब्द का उपयोग आप का सेक्सी होने का खुमार एक ही झटके में उतार सकता है.
मुंशीजी को बताया गया था कि जब फोर प्ले का वक्त हो तो महिला साथी को बातों में लगाकर अपना ध्यान सेक्स से हटा लेना चाहिए , मगर कुछ देर के लिए ताकि महिला साथी अच्छी तरह से तैयार हो सके . मुंशीजी तो वैसे ही शारीरिक रूप से उतने ताकतवर नहीं थे, जितने कि आम तौर पर युवक होते हैं.

Tuesday, September 21, 2010

lav guru bhag-45

डोली ने फिल्म की आवाज पहले से तेज करदी . स्क्रीन पर सेक्सोलोजिस्ट कह रहा था -
-अगर आप दिल के रोगों से दूर रहना चाहते हैं तो सेक्स करें। नियमित रूप से सेक्स करने वालों को दिल के रोग होने की संभावना आधी होती है।

वैज्ञानिकों का भी मानना है कि सप्ताह में दो बार या इससे ज्यादा सेक्स करने वाले पुरुषों में दिल की बीमारी होने की संभावना 45 फीसदी तक कम होती है।

वहीं सप्ताह में एक बार या इससे कम सेक्स करने वाले लोगों को दिल का रोग होने की संभावना अधिक होती है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन पुरुषों की यौन जरूरतें समय से पूरी हो जाती हैं उनका स्वास्थ्य ऐसा न कर पाने वालों की तुलना में अच्छा होता है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने पाया कि अपने साथी के साथ बिताए गए प्यार भरे पल पुरुषों को भावनात्मक रूप से भी लाभ पहुँचाते हैं।
फिल्म के डायलोग इतने कामुक थे कि डोली के जिस्म में हलचल मचने लगी , मुंशीजी को भी खुजली हो रही थी. डोली कह रही थी-
-तब तो हम लोगों को कभी भी दिल से सम्बंधित बीमारी नहीं हो पायेगी , क्योंकि हम तो रोजाना आनंद उठाने वाले हैं, सप्ताह की बात छोडिये.
मुंशीजी- रोजाना को भी छोड़ दो जानेमन, हम लोग एक दिन में कई -कई बार मस्ती के प्याले छलकायेंगे .
डोली हँसने लगी. फिल्म का नायक बोल रहा था -
-सेक्स जीवन में आपसी समझ और प्रेम काफी महत्वपूर्ण होता है और उतनी ही महत्वपूर्ण होती है अंतरंग पलों की सही समझ. सेक्स जीवन आनंदमय बनाने के लिए किसी व्यापक किताबी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है. बस कुछ सामान्य सी लगती बातों पर ध्यान देने से भी बात बन सकती है.
सेक्स जीवन तभी आनंदमय बन सकता है जब आप या आपका साथी अधिक विचार ना करे. जब आप एक दूसरे के करीब हों तो विचार को त्याग कर एक दूसरे में खो जाएँ. यह ना सोचें कि यदि आपने "ऐसा" किया तो उन्हें "कैसा" लगेगा. अपने आपको वैसा ही रखें जैसा कि आप खुद को महसूस करते हैं. ना तो बदलने की कोशिश करें ना ही कुछ ऐसा करने की जो आपको कृत्रिमता का अहसास दिलाए और आपके साथी को भी. महिलाएँ विशेष रूप से अपनी छवि को लेकर काफी आशंकित रहती हैं. सेक्स के दौरान यह सोचना कि क्या मैं ऐसा करते समय ठीक लगुंगी, उन खास पलों को बदरंग बना सकता है.
अच्छे सेक्स के लिए यह आवश्यक नहीं कि आप किस मुद्रा का प्रयोग करते हैं और क्या नया आविष्कार करते हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आप और आपकी साथी कितनी संतुष्टि प्राप्त कर रही है. अच्छा सेक्स प्राकृतिक और नैसर्गिक होता है, उसमें नयापन डालने का अत्यधिक प्रयास ना करें. बेहतर है सबकुछ समय पर छोड़ दें और एक दूसरे में खो जाएँ. यह बात पुरूषों पर अधिक लागू होती है. अधिकतर पुरूष सोचते हैं कि यदि उन्होनें सेक्स के दौरान कुछ नया नहीं किया तो यह उनकी साथी को पसंद नहीं आएगा, जो कि सच नहीं है.
पुरूष और महिला में उत्तेजना का स्तर और उत्तेजित होने में लगने वाले समय में अंतर पाया जाता है. सेक्स के दौरान अपने साथी की ईच्छा और उनकी मर्यादा का ध्यान रखें. अत्यधिक उत्तेजित होने से बचें और सयंम से काम लें. सेक्स के दौरान फोरप्ले का अधिक से अधिक आनंद लें. मात्र फोरप्ले से भी आनंद प्राप्त किया जा सकता है. अपने साथी से सीखें. अच्छा सेक्स तब और विकसित होता है जब दोनों व्यक्ति एकदूसरे की पसंद नापसंद को समझने लगते हैं और हर बार कुछ नया सीखते हैं.
डोली- बहुत गजब की फिल्म है. मैंने तो सोचा था कि कुछ अश्लील द्रश्य ही होंगे .मगर यह तो बिलकुल अलग तरह की फिल्म है . इसमें एजुकेशन है. हर विवाहित जोड़े को या जिनकी शादी होने वाली है, या जों लोग शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले हैं उन लोगों के लिए यह फिल्म बहुत बेहतरीन है.
मुंशीजी- बेशक, यह तो लवगुरु की नक़ल जैसा ही है. जव्गुरु भी जब व्याख्यान देते हैं तो इसी तरह के होते हैं. अगर चाहो तो तुम भी कल चल सकती हो.
इसके बाद फिल्म की भाषा उतीजक होती चली गयी, ऐसे -असी शब्द कि डोली और मुंशीजी के जिस्म को चीरते हुए निकल जाते थे . कामवासना की चिंगारी जोरों से भड़क रही थी. उन दोनों के मन में भी नदी की उफान की तरह भाव बहक रहे थे. कामोत्तेजना की आंधी में सब कुछ उड़ने के लिए तियार थे. मुंशीजी ने लवगुरु के बताने के अनुसार डोली के शरीर को चूमना शुरू कर दिया. डोली आह, ऊह करने लगी. उनका विशेष अंग काले नाग की तरह फुँकारने लगा.






Monday, September 20, 2010

lavguru-44

मुंशीजी - अब यह बताने का नहीं बल्कि मौज लेने का वक्त है. देखो, ब्लू फिल्म आ चुकी है . अब हम यह फिल्म देखेंगे . इससे तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जायेगी और आनंद भी आ जाएगा . मैंने बहुत पहले ऐसे फ़िल्में देखी थी, साथ के लड़के बड़े बदमाश होते हैं, वे ही फिल्म चलाते रहते थे.
डोली- अब सब्र नहीं होता , इच्छाएं बढ़ती ही जा रही हैं.
मुंशीजी मुस्करा उठे, उन्होंने फ़ौरन फिल्म चालू करदी, शुरुआत में तो हॉट द्रश्य थे मगर फिर सेक्स शिक्षा की चर्चा होने लगी. चर्चा मजेदार थी. एक महिला सेक्सोलोजिस्ट अपनी पेशेंट से कह रही थी-
-सेक्स संबंधी किसी भी प्रकार की परेशानी, हताशा, निराशा या कुंठा इत्यादि अपने साथी से छिपाने से पूर्व महिलाओं को जान लेना चाहिए कि ऐसा करना न केवल उनके परस्पर संबंधों के लिए घातक है बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी इसका दुप्रभाव पड़ता है। सीधी-सी बात है, अगर यौन क्रिया में संतुष्टि नहीं होगी, या फिर जैसा महिला चाहती है वैसा नहीं होगा, तो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी महिला हताशा और कुंठा की शिकार होगी। अब अगर, इस परिस्थिति पर वह डर या शर्म, चाहे किसी भी कारण से, अपने साथी से खुलकर बात नहीं करती है और मौन साधे रहती है तो आगे चलकर स्थिति विस्फोटक हो सकती है, जिससे पारस्परिक संबंध बिगड़ेंगे और मानसिक दबाव के चलते स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ेगा। इसलिए बेहतर है कि समय रहते ही, अपने साथी से खुलकर सेक्स संबंधित बातचीत कर ली जाये, जिससे विवाद की नौबत हीं ना आये।
पेशेंट बड़ी तेजतर्रार थी, उसने फ़ौरन टोकते हुए कहा-
-क्या इससे ऐसा नहीं लगेगा कि मैं बदचलन हूँ. क्योंकि मर्द तो वैसे ही बड़े शंकालु प्रवृति के होते हैं .
- बिलकुल नहीं. यह भी एक सच है कि विवादों की जड़ में सबसे अधिक सेक्स की भूमिका ही रहती है, पैसे अथवा घर के कामकाज जैसे सामान्य कारणों की बनिस्पत। महिलाएँ अक्सर झगड़ा बढ़ जाने के डर से ऐसी स्थिति में चुप लगा जाती हैं। परिणामस्वरूप, शयनकक्ष में बोला गया झूठ या लगाई गई चुप्पी से शारीरिक रूप से एक साथ होते हुए भी महिला-पुरुष मानसिक तौर पर कोसों दूर होते हैं। बेहतर है कि ऐसे में महिलाएँ अपने साथी से समझदारी से काम लेते हुए खुलकर बात कर लें, अन्यथा सेक्स भावनाओं को दबाकर चुप्पी साध लेने पर तनाव और हताशा के साथ-साथ अनिष्ट की स्थिति भी हो सकती है। इसके विपरीत, अगर पलायनवाद के स्थान पर अपने पुरुष से खुलकर बात कर ली जाये तो स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ परस्पर रिश्तों में भी प्रगाढता आती है।
अब प्रश्न यह उठता है कि सेक्स इच्छाओं और संतुष्टि के बारे में महिला अपने साथी से किस वाक्-कौशल से बात करे कि पासा उल्टा ना पड़ जाये। क्यूंकि इस संबंध में बात करना इतना सहज नहीं है जितना नजर आता है। यौन संतुष्टि नहीं होती है या फिर आपके प्यार करने का तरीका ठीक नहीं है- तो पुरुष के अहम को निश्चय ही चोट लगेगी और विवाद ही उत्पन्न होगा। अपने साथी की प्रशंसा करते हुए किसी फिल्म के सीन या मैग्जीन में ऐसे विषय पर छपी कहानी या घटना का विस्तार से वर्णन करते हुए अपनी इच्छा ज़ाहिर की जा सकती है। ऐसे में आप उसे अपना हीरो होने का भी अहसास करवा सकती हैं। ऐसी बातें निश्चय ही उसे अच्छी लगेंगी और वह आपकी बातों में रस लेते हुए, जैसा आप चाहेंगी वैसा ही करेगा। परंतु अक्सर होता यह है कि ऐसे में आप कहना कुछ चाहती हैं और आपकी बातों का मतलब कुछ और ही निकलता है। आपको स्वयं ही लगता है कि जो बात आप कहना चाह रही हैं, वह कह नहीं पा रही हैं। नतीजतन- कहने के ढंग, शब्दों के गलत प्रयोग और निकाले गये मतलब के चलते, प्रेम-प्यार के विपरीत, विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अत इस बारे में अत्यंत सतर्कता से काम लेना चाहिए। बातचीत के वक्त अपना रुख सकारात्मक रखें, ना कि शिकायती लहजे में बात करें। उसे अपने सपनों का राजकुमार बताते हुए, किसी स्वप्निल घटना की तरह ही अपनी इच्छाओं को जाहिर करते हुए यौन-क्रिया का पूर्ण आनंद लें।
कहने का आशय है कि अपने स्वास्थ्य और रिश्ते में प्रगाढ़ता लाने के लिए सेक्स संबंधी अपनी इच्छाओं, कामनाओं तथा संतुष्टि के संबंध में चुप्पी ना साधें और ना ही अपनी सेक्स भावनाओं को दबाएँ, बल्कि अपने साथी से इस संबंध में खुलकर बातचीत करें, किंतु पूर्ण सावधानी के साथ। हाँ, पुरुषों की प्रवृत्ति को जानते हुए, मात्र बातचीत के स्तर पर ही इस प्रयास को समाप्त ना कर दें बल्कि इस इच्छापूर्ति के लिए उसे पूरा सहयोग और मार्गदर्शन दें, अन्यथा बात जस की तस रह जाएगी। अत इस संबंध में मन का गुबार मन में ही दबाकर अपने साथी के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने की अपेक्षा बेहतर होगा कि एक दोस्त और सहयोगी की तरह उसके सामने अपनी बात रखें और परस्पर विवादों को ताक पर रखते हुए, स्वस्थ जीवन जीयें।
गोल्डन नेस्ट सेवा समिति द्वारा क्वीन मैरी हाई स्कूल का छात्र संगीत पुरस्कृत


मुंबई, मीरा रोड स्थित गोल्डन नेस्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में क्वीन मैरी हाई स्कूल के छात्र संगीत मासूम को गोल्डन नेस्ट सेवा समिति द्वारा पुरस्कृत किया गया. गोल्दत नेस्ट समिति के चेयरमैन डॉक्टर मिश्रा और सेक्रेटरी करुणाकर कामत ने संगीत को प्रशस्ति पत्र और गिफ्ट देकर समानित किया. संगीत ने म्यूजिकल चेयर नामक प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था. संगीत मासूम क्वीन मैरी हाई स्कूल के सीनियर केजी का छात्र है. इस अवसर पर गोल्डन नेस्ट सेवा समिति के चेयरमैन डॉक्टर मिश्रा और सेक्रेटरी करुणाकर ने लगभग ४० प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित किया. संगीत मासूम को पुरस्कृत करने पर साहित्यकार शिवपूजन पाण्डेय, समाजसेवी परुस्राम यादव, राष्ट्रीय पत्रकार संघ -मुंबई के संस्थापक अध्यक्ष दीनानाथ तिवारी , पत्रकार शिवशंकर तिवारी , जटाशंकर सिंह आदि ने शुभकामनाएं दी हैं.