Monday, February 8, 2010

bhaag-27

इससे होता ये है की जिसको ब्लू फिल्म देखने की आदत लग जाती है, वह पढाई -लिखाई भूलकर उसीके पीछे पड़ जाता है, फिर वह हमेशा प्यार और सेक्स के दृश्यों में खोया रहता है, इसी कारण उसे गलत आदतें भी घेर लेती हैं, होता ये है की वह ब्लू फिल्म के नायक की तरह सम्बन्ध बनाना चाहता है , इस कारण वह बुराइयों के दल-दल में घुसता चला जाता है, वह बाजार में लड़कियां तलाशता है, या फिर किसी बेवफा के प्यार में पड़ जाता है, इस तरह वह अपने समय की बर्बादी के साथ-साथ जवानी और धन की भी बर्बादीकर लेता है। उसका कैरियर खराब होता है वह अलग। इसी तरह की हालत जब पैदा होती हैं जब कोई लड़का किसी की मुस्कान भर को ही सामने वाली का प्यार समझ लेता है। फिर जब वह कहीं दुसरे स्थान पर शादी कर लेती हैउस बेवफा जानकार दिल का रोगी बन जाता है, अब मैं तुम्हें ये सब बता रहा हूँ तो इससे फायदा ये होगा की अगर तुम ज़रा भी समझदार हुईं तो इन उलझनों में नहीं फंस सकती। अगर आपको इंजॉय करना है तो करो मगर उसकी लत क्यों लगाते हो, उसका गुलाम क्यों बनते हो ? ब्लू फिल्म देखन इ है एक दिन देख लो, मजा लो फिर हमेशा के लिए भूल जाओ , ऐसे ही अगर शराब पीना ही चाहते हो तो एक पैग लगाकर मजे लूट लो और फिर हमेशा के लिए इससे तौबा कर लो । कुछ लोग शकी किस्म के होते हैं, यह शक की आदत भी बहुत गंदी है, यह भी परिवारों को उजाड़ने में देर नहीं लगाती। इसलिए हमेशा दिल और दिमाग साफ़ रखना चाहिए, बेवजह अपनी प्रेमिका , प्रेमी , दोस्त , पत्नी या पति पर शक नहीं करना चाहिए । एक दिन मैं दिल्ली के एक होटल में बैठकर शराब पी रहा था, तभी एक परेशान युवक मेरी टेबल के सामने बैठ गया। वह बहुत परेशान दिख रहा था, पैग पर पैग पिए जा रहा था, किसीको गालियाँ भी बक रहा था। मैंने उससे हमदर्दी जताकर कारण पूछा तो बताने लगा-
मेरी शादी पिछले
साल हुई । मुझे अपनी पत्नी पर शक था की उसका शादी के पहले कोई शारीरिक संबंध था। इसलिए मै हमेशा उससे उसके शादी के पहले के संबंध के बारे में पूछा करता था और वो हमेश कहती थी कि वो कुंवारी है। शादी के एक साल बाद फिर से मैंने उससे पूछा तो इस शर्त पर अपना अतीत खोलने को राज़ी हुई कि मैं भी अपना पिछले राज बताऊंगा और उसे दिल से माफ़ कर दूंगा। तब उसने बताया की वो कई बार अपने जीजा के छोटे भाई से ग़लत संबंध बना चुकी है। अब समस्या ये है कि मुझे उससे नफ़रत हो गई है। मेरा मन करता है कि उसे ही छोड़ दूं। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं क्या ना करूं। उसके जीजा के भाई का घर हमारे घर के पास ही है और हमेश मुलाकात होती है। मैं उस लड़के से नज़र नहीं मिला पा रहा हूं। मैं क्या करूं कृपया मदद करें। वरना मैं ज्यादा शराब पीपीकर ही मर जाऊँगा।
छमिया- ओह। कितने दुःख हैं सच बोलने के । शायद इसीलिए लोग थोड़े से झूठ का सहारा लेते हैं।
मुंशीजी- हाँ , शायद। मगर फिर भी सच्चाई यही है की जीत सच की होती है। मैंने उसे समझाया की अपनी सच्ची बीवी को माफ कर दो। उसका दिल साफ है, वह तुमसे प्यार करती है, तुम पर भरोसा करती है तभी तो उसने इतना बड़ा राज खोल दिया है वरना बिना भरोसे वह ऐसा नहीं करती। इसलिए अपनी ही पत्नी के भरोसे को तोड़ने का अर्थ ये होगा की फिर कोई कभी अपने पति की बात पर भरोसा नहीं करेगा। फिर जब भी कहीं तुम्हारा उदाहरण दिया जाएगा तो लोग इससे गलत सबक लेंगे । मेरा कहना मानो उसे अपनालो। हाँ, अगर वह शादी के बाद भी अपने जीजा से मिलती है, मिलकर गलत बात या गलत हरकत करती है तो उसके चरित्र पर उंगली उठाई जा सकती है।

छमिया- आपके कहने का कोई असर भी हुआ या सुनकर चला गया वो शराबी ?

मुंशीजी- नहीं यार , रोने लगा बेचारा। और जब उसका दिल हल्का हो गया तो यह वादा करके गया की अब वह अपनी पत्नी को भरपूर प्यार देगा ।

Sunday, February 7, 2010

भाग-२६

जो काम कुदरत के दायरे में रहकर किया जाए वही उचित और सच्ची खुशी देने वाला होता है।
और जब इंसान प्रकृति को चुनौती देकर कोई काम करता है तो उसे दुःख और असफलता ही मिलती है, मेरी यह सोच कितनी सही है , कितनी गलत , मैं नहीं जानती ।
मुंशीजी- अपनी जगह तुम भी ठीक हो छमिया। हर इंसान अपने तरीके से सोचता है। एक बार एक पहचान के लड़के ने मुझसे पूछा -
- मुंशीजी ,मैं बहुत बड़े धर्मसंकट में फंस गया हूं। मेरे साथ ऑफिस में एक लड़की काम करती है और करीब दो साल से उसके
साथ मेरा अफेयर चल रहा था। पिछले महीने उससे मेरा ब्रेकअप हो गया और मैं उसे भुलाकर अपने में मस्त रहने की कोशिश करने लगा। इस बीच उस लड़की की भाभी से मेरी बातचीत लगातार होती रही है। हम दोनों के बीच उस समय से बातचीत हो रही है, जबसे उनकी ननद के साथ मेरा अफेयर शुरू हुआ। उसी दौरान मुझे पता चला कि पति के साथ उनकी नहीं बनती है और वह सिर्फ चार साल के अपने बेटे को पालने के लिए इस रिश्ते को निभा रही हैं। मैं उनकी ओर शुरू से ही आकर्षित था लेकिन कभी इस तरह से सोचा नहीं था। लेकिन ब्रेकअप होने के बाद मैं उनके बारे में दूसरी तरह से सोचने लगा। फिर हम दोनों के बीच काफी बातें होने लगीं। मैंने एक सप्ताह पहले उन्हें डिनर पर बुलाआ और सबकुछ बता दिया। उन्होंने बताया कि वह भी मुझे पसंद करती हैं लेकिन उनकी चिंता अपने बेटे को लेकर है। मैंने उन्हें बताया कि अगर वह अपने पति से तलाक ले लेती हैं तो मैं उनके बेटे के साथ स्वीकार करने को तैयार हूं। मैं इस रास्ते पर आगे तो बढ़ चुका हूं लेकिन कभी-कभी यह भी लगता है कि कुछ गलत तो नहीं कर रहा हूं। धर्मसंकट में फंसा हुआ हूं और आपसे सलाह चाहता हूं।

छमिया- ओह , फिर क्या काहा आपने ?
मुंशीजी- मैंने उससे कहा की सामाजिकता और नैतिकता का ध्यान रखते हुए अपने दिल की बात सुनो। अगर दिल चाहता है तो उससे शादीकर लो , मगर सिर्फ शारीरिक जरूरत को ध्यान में रखकर उसका इस्तेमाल मत करना।
छमिया- बहुत सही कहा। क्या किया उसने ? फिर कभी मिला की नहीं ?
मुंशीजी- नहीं कभी नहीं। हो सकता है वह शहर छोड़कर किसी दुसरे शहर में चला गया हो। ऐसे ही एक बार हमने अपनी कोठी किराए पर जिस व्यक्ति को दी वह बहुत बड़ा अफसर था। उसका अकेला बेटा था, वह अक्सर उदास रहता था, जब मैंने कारण पूछा तो टाल गया , मैंने कुरेदा तो उसने बताया -मुझे एक बुरी लत
लग गई है , जिसके कारण मेरा स्टडी में मन नहीं लगता है। पिछले कुछ दिनों से मुझे ब्लू फिल्म देखने की आदत सी लग गई है। जब तक दिन में एक या दो ब्लू फिल्म मैं देख न लूं , तब तक मुझे चैन नहीं आता है। मैं रोज़ एक या दो ब्लू फिल्म देखता हूं। जब मैं स्टडी करने बैठता हूं , तो इस कारण मेरा मन उसमें बिल्कुल नहीं लगता है और मुझे नींद आने लगती है। मन आलस से भर जाता है और ब्लू फिल्म के दृश्य जहन में दौड़ने लगते हैं। इसके चलते मैं आजकल बहुत परेशान रहने लगा हूं। इस बुरी लत के कारण मेरा जीवन बर्बाद हो रहा है। मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। इस बुरी लत से कैसे पीछा छुटेगा और फिर मेरा मन पढ़ाई में लगने लगेगा ? मैं इस पर सुझाव चाहता

छमिया- ओह मैंने कभी ब्लू फिल्म नहीं देखी , क्या इससे जीवन बर्बाद हो जाता है ? पढाई में दिल नहीं लगता ? क्या यह इतनी बुरी चीज है ?
मुंशीजी- हाँ, यह बुरी आदत है, जिसे एक बार लग गयी , वह हमेशा बुरे ख्यालों में खोया रहता है, वह चाहता है की उसे भी फिल्म के नायक की तरह शारीरिक सम्बन्ध बनाने की लालसा बनी रहती है

Saturday, February 6, 2010

भाग-25

बेहतर होगा कि अब तुम आदत ही डाल लो, अपने मन को समझा डालो , इसीमे बेहतरी है। तुम कोई डकैती तो मनहिं डाल रही , चोरी तो नहीं कर रही हो, भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा नहीं दे रही हो। किसी का हक नहीं माँ रही हो , फिर दहशत किस बात की। तुम्हारे और हमारे बीच में प्यार ही तो है। और प्यार करने वाले हम दुनिया में अकेले नहीं हैं, करोड़ों -अरबों हैं जो ऐसा करते हैं। अगर देखा जाए तो शादी भी क्या है ? जब लड़की वाले लड़का ढूढने जाते हैं तो यही सब देखते हैं की उनकी लड़की को कभी किसी चीज की कमी ना होने पाए, तभी तो वे लड़के का घर आर्थिक रूप से मजबूत ही ढूंढते हैं। और इससे होता ये है की फिर वही सवाल सामने आ जाते हैं जो मैंने उठाये हैं। कभी -कभी तो यह भी होता है की लड़की शादी करना ही नहीं चाहती , वह मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार ही नहीं होती और उसे ब्याह दिया जाता है, लड़का उसे साथ सुहागरात मनाता है। जबकि लड़की को बेहद शारीरिक और मान्सिक पीड़ा होती है इसके बावजूद वह इनकार नहीं कर सकती, पति के सामने बार-बार रोने , गिडगिडाने या इनकार करने का कोई मतलब ही नहीं निकलता । इस तरह उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ जिसमानी रिश्ते बनाये जाते हैं , तो यह क्या है ? क्या यह बलात्कार की परिभाषा नहीं है। और बलात्कार किसे कहते हैं ? यही तो है। फिर भी इसे जायज कहा जाता है । अगर कोई दुल्हन इसके खिलाफ बोलना भी चाहे तो कुलटा और चरित्रहीन कही, समझी जाती है । शिकायत करने वह थाणे चली भी गयी तो उसीको अपराधी माना जाता है। बहुत से लोग इसको नैतिक बलात्कार कहते हैं, भले वे कहते रहें, वे अपना काम कर रहे हैं और ज़माना अपना काम कर रहा है। जबकि तुम्हारे मेरे बीच ऐसा कुछ नहं है। जो भी हम करने जा रहे हैं यह पूरी सहमति से कर रहे हैं।
छमिया- क्या सेक्स को लेकर मेरी सोच ही इतनी पिच्च्दी हुयी है या और भी लोग मेरे ढंग से सोचते हैं। मेरी जिज्ञासा की तृप्ति के लिए जानना चाहती हूँ।
मुंशीजी- देखिए, भारतीय समाज में सेक्स पर लिखने-पढ़ने का क्रम बहुत पुराना है। वात्स्यायन और वराहमिहिर की रचनाओं में सीधे-सीधे सेक्स को विषय बनाया गया है और बहुत विस्तार से चर्चा की गई है। यह तो हमारा तथाकथित आधुनिक समाज और उसकी हिपोक्रेसी है जो सेक्स का आनंद तो छक कर लेना चाहता है, पर बिना किसी कुंठा के उसे यह स्वीकार करने में उसे हिचक होती है। फिर भी एक तबके की सोच बदल रही है। , उससे यही नतीजा मिलता है कि सेक्स से संबंधित समस्याओं और बीमारियों में बढ़ोतरी से भी लोगों की झिझक टूटी है। वे अब इसके बारे में बिना किसी गिल्ट-कांशस के बात कर रहे हैं। दुनिया की जहां तक बात है तो सभी तरह के लोग हैं, सबका अपना नजरिया है। तुम्हारी तरह सोचने वाले है हैं, लेकिन अब बहुत लोग हैं जो आधुनिक तरीके से सोचना चाहते हैं।
छमिया- मैंने सूना है की आजकल होमोसेक्सुअल का प्रचलन भी तेजी से बढ़ रहा है ?
मुंशीजी- नहीं , यह प्रचलन बढ़ने का नहीं बल्कि अभिव्यक्ति का मामला है, आधुनिकता का मामला है, पहले से ये सम्बन्ध रहे हैं, ,अगर अब इसकी लोग खुलकर वकालत करने लगे हैं, इतनी सी बात है । अगर एक व्यक्ति अपना सेक्सुअल डिजायर किसी समलिंगी के साथ तृप्त कर लेता है तो इसमें न सिर्फ मेडिकली कोई दिक्कत की बात है, बल्कि इससे सामाजिक ताने-बाने पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता। किसी हेट्रोसेक्सुअल से संबंध बनाकर उसका जीवन तबाह करने से तो अच्छा है कि ऐसे लोग होमोसेक्सुअल ही रहें। फिर कोई आजीवन होमोसेक्सुअल बना रहे, जरूरी नहीं। लोगों का टेस्ट बदलता है। दोनों ही अवस्थाएं सहज हैं। समाज को स्त्री-पुरुष के संबंधों की तरह ही स्त्रियों के या पुरुषों के बीच के शारीरिक संबंध को भी स्वीकार करना चाहिए। लेकिन मेरी यह राय सही हो यह भी जरूरी नहीं है।
छमिया - मैं कुदरत को बहुत महत्त्व देती हूँ.

Friday, February 5, 2010

जेवर एयर पोर्ट

जेवर एयरपोर्ट को केंद्र की मंजूरी का इंतजार7 Jan 2010, 2215 hrs IST,नवभारत टाइम्स

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लखनऊ।। ताज इंटरनैशनल सिविल एविएशन हब को 2003 में इंटरनैशनल सिविल एविएशन हब के रूप में मान्यता मिल चुकी
थी मगर मायावती सरकार इस प्रोजेक्ट को केंद्र की खामोशी के कारण शुरू नहीं करवा सकी। अब एमओयू हो जाने के बाद बुलंदशहर, सिकंदरा, खुर्जा, जेवर, अलीगढ़, हाथरस, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, दादरी, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत और सहारनपुर जिले के कुछ हिस्सों में जमीनों की कीमत तेजी से बढ़ेगी। केंद्र की हरी झंडी मिलते ही जेवर में इंटरनैशनल एयरपोर्ट का निर्माण शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 5 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। वहीं ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को फाइव स्टार होटेल और आवासीय-औद्योगिक परिसर बनने से रेवेन्यू में अरबों रुपये मिलेंगे। जेवर में एयरपोर्ट करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर में बनेगा यानी पूरे देश में यह पहले नंबर पर होगा। ताज एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे के बन जाने पर जेवर वाकई देश का जेवर बन जाएगा।

Tuesday, February 2, 2010

भाग-23

छमिया न तीर मारते हुए कहा-
- अब कुछ अन्दर की बात भी तो बताओ, तुमने तो कामशास्त्र पढ़ा हुआ है, कुछ बताओ सफल सेक्स के बारे में , इस दौरान होने वाली तकलीफों के बारे में , ज़रा समझूं तो सही ।
मुंशीजी- लोगों को यह समझाया जाता है कि सेक्सुअल डिजायर रखना शेमफुल, वल्गर या कोई अपराध है। जो अपनी सेक्सुअल डिजायर को जान-बूझकर दबाते और छुपाते हैं, वे आदर के पात्र होते हैं। ऐसे में अगर कोई जवान लड़का किसी खूबसूरत लड़की को देखकर फैंटेसी में खो जाए, तो उसे अपराधबोध होता है। खुद महिला सेक्स की इच्छा जाहिर करने में अपने आप को अपराधी मान लेती है। कुछ केसेस में अगर कोई महिला सेक्स की इच्छा जाहिर करे, तो उसका पति उसे गलत समझता है। यही नहीं, वह उसकी वफादारी पर भी शक करने लगता है। ऐसे एटिट्यूड से कोई थेरपिस्ट ही आपको मुक्ति दिला सकता है।
दिक्कत यह है कि हमारे यहां ऐसे पाखंडी लोगों की भरमार है, जो एडवर्टाइजमेंट के जरिए अपने आपको सेक्स स्पेशलिस्ट बताते हैं। ज्यादातर ऐसे लोग अनक्वॉलिफाइड होते हैं। किसी भी प्रॉपर मेडिकल डिग्री के बिना वे मिथ्स फैलाते रहते हैं। मस्टरबेशन हानिकारक है और नाइटफॉल बीमारी है जैसी बातें उन्हीं लोगों ने फैलाई है। सबसे बड़ी प्रॉब्लम तो यह है कि क्वॉलिफाइड मेडिकल प्रैक्टिसनर को कानून अपना विज्ञापन करने की अनुमति ही नहीं देता। इस बात से साबित होता है कि अपने सेक्स क्लिनिक के एड करने वाले लोग धोखेबाज होते हैं। फिर क्वॉलिफाइड सेक्स थेरेपिस्ट की कमी समस्या को और गंभीर बना रही है। नहीं जानते कि कब कंसल्ट करना है कई बार लोगों को यह क्लीयर ही नहीं होता कि कंसल्ट कब किया जाए। जब भी महिलाओं को जनन अंगों से संबंधी कोई समस्या होती है, तो वे किसी गायनी के पास जाना बेहतर समझती हैं। हालांकि कई बार सेक्सुअल प्रॉब्लम्स इमोशनल, साइकॉलजिकल और रिलेशनल होती हैं, जो किसी गायनी की एक्सपर्टीज के तहत नहीं आतीं। क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट या कंसलटेंट का साइकॉलजी बैकग्राउंड होता है, जिनमें मेडिकल नॉलेज की कमी होती है। कई बार महिलाओं और पुरुषों में सेक्स में अपने या अपने पार्टनर के रोल को लेकर एटिट्यूड समस्या रहती है। जैसे कि पहल किसे करनी चाहिए, सही तरीका क्या है, फोरप्ले के लिए उचित समय कितना होना चाहिए, इंटरकोर्स की सही फ्रीक्वेंसी क्या होनी चाहिए, कहां परफॉर्म करना चाहिए या एक्टिव पार्टनर किसे होना चाहिए वगैरह। अगर यह सही प्रॉस्पेक्टिव में नहीं किया जाए, तो बहुत हानिकारक हो सकता है। परफॉर्म न कर पाना अगर कोई पुरुष सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के साथ परफॉर्म नहीं कर पाए, तो इस समस्या की डीटेल में जांच करवानी चाहिए। महिला को ऑर्गेज्म बहुत संतुष्टि देता है। सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के साथ एक्टिव पार्टिसिपेशन के बावजूद अगर महिला ऑर्गेज्म तक न पहुंचे, तो सेक्स थेरेपिस्ट की सलाह लेनी चाहिए , शादी से पहले भी बहुत से लोग सेक्स रिलेशन रखते हैं। उनके संबंध अलग-अलग लेवल पर होते हैं, मगर वे थेरेपिस्ट से मिलने में झिझक महसूस करते हैं। लेकिन अनियंत्रित मन आपके काम को प्रभावित कर सकता है। अगर बार बार सेक्स का खयाल काम से आपका ध्यान हटा दे, तो सेक्स थेरेपिस्ट की मदद की जरूरत समझिए ,अगर तुम बिना झिझक , बिना संकोच और बिना दहशत के मेरे साथ सम्बन्ध बनाती हो तो हम दोनों सफल काम क्रीडा को अंजाम दे सकते हैं।
छमिया- तो क्या सारे डॉक्टर फर्जी होते हैं ?
मुंशीजी- ये मैंने कब कहा ? ऐसा नहीं है। अच्छे और काबिल भी मौजूद हैं, उन्हीके पास जाना चाहिए।
छमिया- तुम्हें इतना ज्ञान कैसे हो गया ? क्या दिन भर इसीकी स्टडी करते रहते हो ?
मुंशीजी- अच्छा जी, कुछ कहो तो मुसीबत और ना कहो तो मुसीबत ?

भाग-22

छमिया की उम्र ही बेशक कम थी लेकिन वह परिवक्व लडकी थी, सुन्दर तो इतनी कि मुंशीजी
का दिल बाग-बाग हो जाया करता उसे देखते ही उनका खून तेजी से दौड़ने लगता था, उन पर वासना का ज्वर चढ़ने लगता था, वह अकेली में सोचते की काश, छमिया उनकी प्रेमिका बनकर उनके जीवन में आ जाए तो उनके उजड़े गुलशन में फिर से बहार आ जाए, उनकी पत्नी तो बहुत साल पहले ही स्वर्ग सिधार गयी थी, बच्चे भी नहीं थे, अपने छोटे भाई की पत्नी के साथ ही मौज मस्ती कर क्लीय करते थे, लेकिन समय के साथ जब गोरी की जवानी भी ढल गयी तो मुंशीजी को कड़क हसीना की तलाश होने लगी, उनके पास अथाह दौलत थी इसलिए उनकी इच्छा जल्द ही पूरी कर दी गयी, किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आई, उनके पास एक से बढ़कर एक हूर परी लाई जाने लगी, लेकिन फिर उन्हें यह नशा ऐसा चढ़ा की कामशक्ति बढाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल करने लगे , और जब नजर पडी छमिया पर तो दीवाने हो गए उसके , आज वही हसीना उनके पहलू में थी। मुंशीजी उसे चूम रहे थे , फिर किसी फेमस कवी की एक कविता याद आ गयी , बोले- बहुत प्यार करना चाहता हूँ तुम्हें जैसे बादल बरसते हैं धरती परमैं क्यों नहीं कर पाता तुम्हें इतना प्यार।हवा, जैसे भर देती हैं हँसी पेड़ की नस-नस मेंक्यों नहीं दे पाता स्पर्श तुम्हें उस प्रकार।फूल चटख जाते हैंअपनी खुशबू के साथ मैं क्यों व्यक्त नहीं कर पाताऐसा प्यार।दरअसल, हमने प्यार करने कीदो जगह चुनी है।बादल, हवा, फूल, स्पर्श-गंध अलग से नहीं पहचाने जा सकतेये सब घुल-मिल गए हैं हमारे घर में इसलिए दिखाई नहीं देताअलग से हमारा प्यार।
छमिया-क्या दूकान छोड़कर अब कवी बन्ने का ख़याल तो नहीं है ?
मुंशीजी- लगता तो यही है, मैं कहीं कवी न बन जाऊं , तेरे प्यार में ऐ कविता।
छमिया- सुनाना ही है तो कुछ खास सुनाओ, कविता मैं ज्यादा पसंद नहीं करती, गीत -गज़ल की बात और है, उसके लिए तो मैं देवानी हूँ।कुछ भी करने को तैयार हो जाती हूँ।
मुंशीजी- तुम्हारे पास तुम्हारा लिखा कुछ कलेक्शन मौजूद है ? सुरक्षित रखा है कुछ ?
छमिया- जी नहीं , कुछ भी नहीं, अभी तक तो लिख-लिख फाड़ने की ही आदत रही है, वैसे जितना मुझे याद है, वे भी काफी कुछ है । क्यों पूछ रहे हो ?
मुंशीजी - अगर तुम्हारे पास ५० से ज्यादा गज़ल हैं तो उनको किताब की शक्ल दी जा सकती है।
छमिया- मैं और किताब ? क्या मजाक कर रहे हो सेठजी, ऐसा नहीं है। मैं इतनी बड़ी शायर नहीं की किताब प्रकाशित की जाएँ, मैं एक साधारण तुक्केबाजहूँ, ऐसे ही तुक्के मार लेती हूँ।
मुंशीजी- ऐसे ही तुक्के कभी -कभी इतिहास बन जाते हैं छमिया, तुम कोशिश तो करो एक दिन तुम्हारा नाम आकाश पर चमकेगा ।स्टार बन जाओगी तुम, अगर कहो तो किसी उस्ताद से तुम्हें इसके बारे में शिक्षा भी दिलवा सकते हैं , बोलो मंजूर है . देखो न , किसीको कुछ चाहिए और किसीको कुछ. तुमने ठीक कहा था की हर आदमी गरीब है, किसीके पास कुछ नहीं है और किसी के पास कुछ.
छमिया- क्या हो गया है तुम्हें ? बार-बार कुछ-कुछ के रट लगाए हुए हो.
मुंशीजी- पागल हो गया हूँ. समझ नहीं पा रहा की मुझे क्या हो गया है ? मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है, अगर तुम किसी और की हो गयीं तो जी नहीं पाउँगा मैं.
छमिया- ऐसा क्या है मुझमें ? आपके पास तो सब कुछ है , मेरे पास सिर्फ ये शरीर ही तो है, इससे क्या होता है , कहते हैं की आत्मा ठीक हो , विचार हो , जिस्म से कुछ नहीं होता.
मुंशीजी- जब किसीका जिस्म होता है, तभी उसके दिमाग , दिल या विचार की अहमियत जानी जा सकती है. वरना दिल दिमाग, आत्मा या विचार का क्या अस्तित्व है, जिस्म ही जड़ है।
छमिया उसकी आँखों में झाँकने लगी, मुंशीजी की ऑंखें सुर्ख लाल हो चुकी थीं, उनमे वासना के डोरे साफ़-साफ़ दिखाई दे रहे थे।

भाग-21

क्या तुम इसे भी खुश फहमी का नाम दोगी ? डॉक्टर को तो हम गलत नहीं ठहरा सकते ?
छमिया- डॉक्टर सिर्फ डॉक्टर होता है, कोई खुदा नहीं कि उसकी हर बात सच निकले । फिर भी हमें कोई ऐतराज नहीं है, अगर ऐसा है तो आपके और हमारे अलावा उन लोगों के लिए भी ख़ुशी की बात है जो हम सबसे जुड़े हुए हैं, क्योंकि अगर किसीको एड्स होना है तो इसके लिए सिर्फ सेक्स ही जिम्मेदार नहीं , और भी कई रास्ती ऐसे हैं जिनके कारण यह जानलेवा बीमारी हो जाती है, वैसे सच बात तो ये भी है कि पहले मुझे इस बीमारी के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था , टीवी में जो विज्ञापन आते हैं उन्हिओं में कभी कभार देखा था तो सोचती थी कि होती होगी कोई बीमारी। लेकिन अब तुमने बताया तो पता चाला कि यह कितनी जानलेवा है। एड्स से अब मैं तो सदैव बचकर रहूंगी ही साथ ही हमेशा दूसरों को भी बचाने की कोशिश करूंगी। आज मैं ये प्रतिज्ञा लेती हूँ कि जीवन में सिर्फ एक मर्द के साथ ही शारीरिक सम्बन्ध बनाउंगी , चाहे जान ही क्यों ना चली जाए मगर किसी गैर मर्द को अपना यह त्यां नहीं सौपुन्गी, इसके अलावा डोकटर के पास जाने पर उसकी सुईं भी चेक करूंगी , कभी असुरक्षित इंजेक्शन नहीं लगवाउंगी, यह मेरा वादा है ।
मुंशीजी- तुम्हारी इस प्रतिज्ञा से मुझसे ज्यादा किसे ख़ुशी हो सकती है, मैं खुद भी चाहता हूँ कि मेरे जीवन में सिर्फ और सिर्फ तुम ही रहो, मैं तुम्हें रानी महारानी की तरह रखूंगा, तुम्हारा हरदम ख़याल रखूँगा, कभी कोई ऐसी बात नहीं कहूंगा जिससे कि तुम्हारे दिल को ठेस पहुचे , कभी तुम्हें कोई तकलीफ ना होने दूंगा और ना ही दूंगा। मैं तुम्हें अपनी जान की तरह हिफाजत से रखूंगा , बस मुझे तुम्हारी मोहब्बत चाहिए , मुझे तुम्हारे प्यार के अलावा और कुछ आरजू नहीं है। मुझे अगर यह दौलत मिल गयी तो मैं दुनिया का सबसे दौलत मंद हो जानुगा। मुझे अपने मालिक से और कुछ नहीं चाहिए , सिवाय तुम्हारे।
छमिया- ज्यादा भावुक मत होइए, कोई आने वाला होगा । समय देख रहे हो , कितना हो गया। अब मुझे जाने दो। कल फ्री आती हूँ, छोटा भाई घर पर रो रहा होगा,। जब सामान लेकर जाउंगी तब खाना बनाउंगी, दूध भी नहीं है। इसलिए आज मुझे जाने दो।
छमिया- सामान की चिंता मत करो। पूरा राशन अब हर महीने तुम्हारे घर पहुच जाया करेगा । अब तुम्हें राशन लेने दूकान पर आने की जरूरत नहीं है। शहर में तुम्हारे पिता की भी फल की ठेली लगवा दूंगा। वे हमसे दूर भी रहेंगे और स्वाभिमान से रहेंगे , तुम्हारा एहसान भी मानेंगे कि तुम्हारी वजह से उन्हें मजदूरी से निजात मिल गयी। तुम्हारे बहन -भाइयों का एडमिशन जल्दी ही किसी बोर्डिंग स्कूल में करवा दूंगा। अब तो खुश हो ।
छमिया- यह मेरे जीवन का कितना बड़ा सुख है, मैं ही जानती हूँ लेकिन....
मुंशीजी- लेकिन क्या छमिया, अब भी किन्तु- परन्तु में उलझी हूई हो ? बोलो न...
छमिया- खैर छोडिये, दुःख होगा तुम्हें । जाने दो । जिसकी किस्मत में जो होता है वही होता है।
मुंशीजी - दिल की बात दिल में मत रखो छमिया। जो कहना है कह डालो , वरना मुझे बुरा कगेगा। मैं नहीं चाहता कि मेरी होने वाली पत्नी को ज़रा भी ठेस पहुचे।
छमिया- ये तो बड़प्पन है आपका, मगर हमारी किस्मत का क्या करोगे , जिसमे दुःख ही दुःख लिखे हैं, अब कोई लिखे को तो नहीं मेंट सकता ना। भोगना ही पड़ेगा ।
मुंशीजी- तुम्हें मेरी कसम है छमिया कहो जो कहन आ chaahtee हो , मुझे अच्छा नहीं लगा रहा ।
छमिया- मैं सोच रही हूँ कि आप मेरे ऊपर जितना खर्च कर रहे हैं, उतना अगर अपने ही घर के लिए करते तो कितना अच्छा होता, जितना आप दे रहे हो, उतने के आधे के बारे में भी मैंने कभी सोचा नहीं था। अब , जब ये अच्चानाक मिल रहा है तो दिल में ख़याल आता है जैसे कि इस सबके बदले में मैं अपने जिस्म , अपनी आत्मा का सौदा कर रही हूँ। जैसे कि कोई अपने ही हाथों अपना क़त्ल कर डालता है, यह खुशी मुझे तब ज्यादा होती जब आप बिना किसी लालच के, मेरे प्यार में द्पूब्कर ऐसा निर्णय लेते । ये तो सौदेबाजी हो गयी।
मुंशीजी न छमिया को अपनी बांहों में कैद कर लिया और उसके यौवन उभारों को सहलाने लगा, उसकी जुल्फों की कंघी करने लगा, छमिया न अपनी आँखें बंद करली।