क्या तुम इसे भी खुश फहमी का नाम दोगी ? डॉक्टर को तो हम गलत नहीं ठहरा सकते ?
छमिया- डॉक्टर सिर्फ डॉक्टर होता है, कोई खुदा नहीं कि उसकी हर बात सच निकले । फिर भी हमें कोई ऐतराज नहीं है, अगर ऐसा है तो आपके और हमारे अलावा उन लोगों के लिए भी ख़ुशी की बात है जो हम सबसे जुड़े हुए हैं, क्योंकि अगर किसीको एड्स होना है तो इसके लिए सिर्फ सेक्स ही जिम्मेदार नहीं , और भी कई रास्ती ऐसे हैं जिनके कारण यह जानलेवा बीमारी हो जाती है, वैसे सच बात तो ये भी है कि पहले मुझे इस बीमारी के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था , टीवी में जो विज्ञापन आते हैं उन्हिओं में कभी कभार देखा था तो सोचती थी कि होती होगी कोई बीमारी। लेकिन अब तुमने बताया तो पता चाला कि यह कितनी जानलेवा है। एड्स से अब मैं तो सदैव बचकर रहूंगी ही साथ ही हमेशा दूसरों को भी बचाने की कोशिश करूंगी। आज मैं ये प्रतिज्ञा लेती हूँ कि जीवन में सिर्फ एक मर्द के साथ ही शारीरिक सम्बन्ध बनाउंगी , चाहे जान ही क्यों ना चली जाए मगर किसी गैर मर्द को अपना यह त्यां नहीं सौपुन्गी, इसके अलावा डोकटर के पास जाने पर उसकी सुईं भी चेक करूंगी , कभी असुरक्षित इंजेक्शन नहीं लगवाउंगी, यह मेरा वादा है ।
मुंशीजी- तुम्हारी इस प्रतिज्ञा से मुझसे ज्यादा किसे ख़ुशी हो सकती है, मैं खुद भी चाहता हूँ कि मेरे जीवन में सिर्फ और सिर्फ तुम ही रहो, मैं तुम्हें रानी महारानी की तरह रखूंगा, तुम्हारा हरदम ख़याल रखूँगा, कभी कोई ऐसी बात नहीं कहूंगा जिससे कि तुम्हारे दिल को ठेस पहुचे , कभी तुम्हें कोई तकलीफ ना होने दूंगा और ना ही दूंगा। मैं तुम्हें अपनी जान की तरह हिफाजत से रखूंगा , बस मुझे तुम्हारी मोहब्बत चाहिए , मुझे तुम्हारे प्यार के अलावा और कुछ आरजू नहीं है। मुझे अगर यह दौलत मिल गयी तो मैं दुनिया का सबसे दौलत मंद हो जानुगा। मुझे अपने मालिक से और कुछ नहीं चाहिए , सिवाय तुम्हारे।
छमिया- ज्यादा भावुक मत होइए, कोई आने वाला होगा । समय देख रहे हो , कितना हो गया। अब मुझे जाने दो। कल फ्री आती हूँ, छोटा भाई घर पर रो रहा होगा,। जब सामान लेकर जाउंगी तब खाना बनाउंगी, दूध भी नहीं है। इसलिए आज मुझे जाने दो।
छमिया- सामान की चिंता मत करो। पूरा राशन अब हर महीने तुम्हारे घर पहुच जाया करेगा । अब तुम्हें राशन लेने दूकान पर आने की जरूरत नहीं है। शहर में तुम्हारे पिता की भी फल की ठेली लगवा दूंगा। वे हमसे दूर भी रहेंगे और स्वाभिमान से रहेंगे , तुम्हारा एहसान भी मानेंगे कि तुम्हारी वजह से उन्हें मजदूरी से निजात मिल गयी। तुम्हारे बहन -भाइयों का एडमिशन जल्दी ही किसी बोर्डिंग स्कूल में करवा दूंगा। अब तो खुश हो ।
छमिया- यह मेरे जीवन का कितना बड़ा सुख है, मैं ही जानती हूँ लेकिन....
मुंशीजी- लेकिन क्या छमिया, अब भी किन्तु- परन्तु में उलझी हूई हो ? बोलो न...
छमिया- खैर छोडिये, दुःख होगा तुम्हें । जाने दो । जिसकी किस्मत में जो होता है वही होता है।
मुंशीजी - दिल की बात दिल में मत रखो छमिया। जो कहना है कह डालो , वरना मुझे बुरा कगेगा। मैं नहीं चाहता कि मेरी होने वाली पत्नी को ज़रा भी ठेस पहुचे।
छमिया- ये तो बड़प्पन है आपका, मगर हमारी किस्मत का क्या करोगे , जिसमे दुःख ही दुःख लिखे हैं, अब कोई लिखे को तो नहीं मेंट सकता ना। भोगना ही पड़ेगा ।
मुंशीजी- तुम्हें मेरी कसम है छमिया कहो जो कहन आ chaahtee हो , मुझे अच्छा नहीं लगा रहा ।
छमिया- मैं सोच रही हूँ कि आप मेरे ऊपर जितना खर्च कर रहे हैं, उतना अगर अपने ही घर के लिए करते तो कितना अच्छा होता, जितना आप दे रहे हो, उतने के आधे के बारे में भी मैंने कभी सोचा नहीं था। अब , जब ये अच्चानाक मिल रहा है तो दिल में ख़याल आता है जैसे कि इस सबके बदले में मैं अपने जिस्म , अपनी आत्मा का सौदा कर रही हूँ। जैसे कि कोई अपने ही हाथों अपना क़त्ल कर डालता है, यह खुशी मुझे तब ज्यादा होती जब आप बिना किसी लालच के, मेरे प्यार में द्पूब्कर ऐसा निर्णय लेते । ये तो सौदेबाजी हो गयी।
मुंशीजी न छमिया को अपनी बांहों में कैद कर लिया और उसके यौवन उभारों को सहलाने लगा, उसकी जुल्फों की कंघी करने लगा, छमिया न अपनी आँखें बंद करली।
Tuesday, February 2, 2010
Sunday, January 31, 2010
भाग-19
छमिया-इतनी लम्बी चौड़ी महाभारत का मतलब मैं समझ नहीं पा रही हूँ।
मुंशीजी- कहने का मतलब है कि सेक्स और सेक्सी शब्द बिलकुल कोमन हो गए हैं, बड़े शहरों में तो खुद लड़कियां पहल करके लड़कों से इस तरह कि डिमांड करती हैं, वे सोचती हैं कि कहीं फिर वह किसी और के चक्कर में न पद जाए, इसलिए अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सेक्सी अदाओं का सहारा लेती हैं, सेक्सी बातों का सहारा लेती हैं, यहाँ तक कि उन्हें पटाकर ही दम लेती हैं, मैंने इस बात को बहुत अच्छी तरह से महसूस किया है, यहाँ तो भोगा भी है। एक दो तो रोजाना मेरी दूकान पर ऐसी आती हैं जो मुझे लुभाना चाहती हैं, सिर्फ उधार सामान लेने की खातिर वे कई तरह के ख़ास इशारे करती हैं, समर्पण का इशारा करती हैं, तो कुछ ऐसी हैं जो फ्री का माल लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, उनके लिए सेक्स कोई मायने नहीं रखता, जिस्मानी समर्पण को वे ठीक ऐसा ही समझती हैं जैसे कि समौसा खा लिया या पानी पकुदे खाकर हाथ साफ़ कर लिए । इससे ज्यादा कुछ नहीं। उनका काम महत्वपूर्ण है, उनके लिए बाकी चीजें गौण हैं। पहले सेक्स शब्द को बड़ा अटपटा समझा जाता था लेकिन आज यह हमारी बोलचाल में भी समा गया है , और व्यवहार में भी।
छमिया- तो क्या इससे तकलीफ नहीं होती ? सेक्स अगर इतना ही सही होता तो समाज इसे गलत क्यों मानता ?
मुंशीजी- यही तो समझने -समझने का फर्क है, समाज इसे बुरा कहाँ मानता है ? अगर मानता तो बाकायदा शादी क्यों कराई जातीं।
छमिया- वही कह रही हूँ, शादी के अलावा तो इसे मानी नहीं किया जता।
मुंशीजी- लोगों न हर बात कि परिभाषा अपने तरीके गढ़ ली है। व्याख्या भी अपने फायदे के लिए अपने तरीके से करते हैं। जैसे कि जबलोग खुद सेक्स करना चाहते हैं तो इसे अच्छा बताते हैं और कोई दूसरा करे तो गलत। मैं तो इसे अनिवार्य मानता हूँ। प्रकृति कि डिमांड है। अगर इंसान है तो उसके मन में इस तरह कि फीलिंग होंगी ही क्योंकि ऐसी फीलिंग्स तो जानवरों के मन में भी होती हैं , वे भी सेक्स करते ही हैं, तमाम बाधाओं को पार करते हुए वे ऐसा करने की कोशिश करते हैं और आखिर में वे इसमें सफल भी होते हैं।
छमिया- लेकिन जानवर और इंसान में फर्क होता है।
मुंशीजी- बेशक होता है, तभी तो जानवर उतना आनंद नहीं ले पाते जितना कि हम लोग । हम लोग मोहब्बत के कई तरीके जानते हैं, समागम कि ख़ास स्टायल है अपने पास । हम लोग प्रेम की इस क्रीडा में इतने मगन हो जाते हैं कि अपने सभी दुखों से निजात पा लेते हैं। यह काम जानवर नहीं कर सकते, इसलिए हम अलग हैं।
छमिया- संत मुनि कम सेक्स करने पर जोर क्यों देते हैं
मुंशीजी- अपनी जगह वे भी ठीक कहते हैं, इस बात को तुम ऐसे सम्खो कि कोई अगर बन्दूक की गोलियां बेच रहा है तो तुम उसे गलत नहीं ठहरा सकती। क्योंकि यह उसका व्यवसाय है, भले ही गोलियों से नुक्सान होता है , फूल तो बरसते नहीं न। फिर भी वह अपनी जगह सही है, ऐसे ही तुम जहर बेचने वालों को गलत नहीं कह सकतीं, वह भी चूहा मारने या किसी और काम आता है। इसी प्रकार संत महात्मा भी अपनी जगह ठीक हैं, वे अध्यात्म को बढ़ावा देते हैं और तुम्हारे -मेरे जैसे लोग इस जीवन को पूरी तरह इंजॉय करने पर जोर देते हैं।
मुंशीजी- कहने का मतलब है कि सेक्स और सेक्सी शब्द बिलकुल कोमन हो गए हैं, बड़े शहरों में तो खुद लड़कियां पहल करके लड़कों से इस तरह कि डिमांड करती हैं, वे सोचती हैं कि कहीं फिर वह किसी और के चक्कर में न पद जाए, इसलिए अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सेक्सी अदाओं का सहारा लेती हैं, सेक्सी बातों का सहारा लेती हैं, यहाँ तक कि उन्हें पटाकर ही दम लेती हैं, मैंने इस बात को बहुत अच्छी तरह से महसूस किया है, यहाँ तो भोगा भी है। एक दो तो रोजाना मेरी दूकान पर ऐसी आती हैं जो मुझे लुभाना चाहती हैं, सिर्फ उधार सामान लेने की खातिर वे कई तरह के ख़ास इशारे करती हैं, समर्पण का इशारा करती हैं, तो कुछ ऐसी हैं जो फ्री का माल लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, उनके लिए सेक्स कोई मायने नहीं रखता, जिस्मानी समर्पण को वे ठीक ऐसा ही समझती हैं जैसे कि समौसा खा लिया या पानी पकुदे खाकर हाथ साफ़ कर लिए । इससे ज्यादा कुछ नहीं। उनका काम महत्वपूर्ण है, उनके लिए बाकी चीजें गौण हैं। पहले सेक्स शब्द को बड़ा अटपटा समझा जाता था लेकिन आज यह हमारी बोलचाल में भी समा गया है , और व्यवहार में भी।
छमिया- तो क्या इससे तकलीफ नहीं होती ? सेक्स अगर इतना ही सही होता तो समाज इसे गलत क्यों मानता ?
मुंशीजी- यही तो समझने -समझने का फर्क है, समाज इसे बुरा कहाँ मानता है ? अगर मानता तो बाकायदा शादी क्यों कराई जातीं।
छमिया- वही कह रही हूँ, शादी के अलावा तो इसे मानी नहीं किया जता।
मुंशीजी- लोगों न हर बात कि परिभाषा अपने तरीके गढ़ ली है। व्याख्या भी अपने फायदे के लिए अपने तरीके से करते हैं। जैसे कि जबलोग खुद सेक्स करना चाहते हैं तो इसे अच्छा बताते हैं और कोई दूसरा करे तो गलत। मैं तो इसे अनिवार्य मानता हूँ। प्रकृति कि डिमांड है। अगर इंसान है तो उसके मन में इस तरह कि फीलिंग होंगी ही क्योंकि ऐसी फीलिंग्स तो जानवरों के मन में भी होती हैं , वे भी सेक्स करते ही हैं, तमाम बाधाओं को पार करते हुए वे ऐसा करने की कोशिश करते हैं और आखिर में वे इसमें सफल भी होते हैं।
छमिया- लेकिन जानवर और इंसान में फर्क होता है।
मुंशीजी- बेशक होता है, तभी तो जानवर उतना आनंद नहीं ले पाते जितना कि हम लोग । हम लोग मोहब्बत के कई तरीके जानते हैं, समागम कि ख़ास स्टायल है अपने पास । हम लोग प्रेम की इस क्रीडा में इतने मगन हो जाते हैं कि अपने सभी दुखों से निजात पा लेते हैं। यह काम जानवर नहीं कर सकते, इसलिए हम अलग हैं।
छमिया- संत मुनि कम सेक्स करने पर जोर क्यों देते हैं
मुंशीजी- अपनी जगह वे भी ठीक कहते हैं, इस बात को तुम ऐसे सम्खो कि कोई अगर बन्दूक की गोलियां बेच रहा है तो तुम उसे गलत नहीं ठहरा सकती। क्योंकि यह उसका व्यवसाय है, भले ही गोलियों से नुक्सान होता है , फूल तो बरसते नहीं न। फिर भी वह अपनी जगह सही है, ऐसे ही तुम जहर बेचने वालों को गलत नहीं कह सकतीं, वह भी चूहा मारने या किसी और काम आता है। इसी प्रकार संत महात्मा भी अपनी जगह ठीक हैं, वे अध्यात्म को बढ़ावा देते हैं और तुम्हारे -मेरे जैसे लोग इस जीवन को पूरी तरह इंजॉय करने पर जोर देते हैं।
फिर भी मैं सुरक्षित सेक्स पर जोर दूंगा , जैसे कि मैंने अब तक किया है।
छमिया- तुमने बहुत सी महिलाओं के साथ सम्बन्ध बनाए हैं , क्या सबूत है कि अब तक तुम निरोगी हो ? हो सकता है कि तुम्हें भी एड्स न अपनी चपेट में ले लिया हो और तुम भी अब खतरनाक बन चुके हो ?
मुंशीजी- इसकी फ़िक्र मत करो इसका सबूत है मेरे पास , आओ तो सही, मेरी बांहों में समाओ तो सही।
Saturday, January 30, 2010
भाग-18
क्या एड्स के अलावा और भी कुछ अन्या गंभीर बीमारियाँ हैं जो हमारे जीवन को नरक बना सकती हैं ? या फिर ये सिर्फ डराने के वजह से फैलाई गयीए बातें हैं ? क्या हम बिना सेक्स पूरा जीवन बिता सकते हैं ? ये कुछ ऐसे सवाल हैं मुझे जिनके जवाब चाहिए ।
मुंशीजी- सवाल एक साथ किये गए हैं मगर इनका जवाब एक साथ संभव नहीं है। देने को तो दे दूं मगर तुम उस्ससे संतुष्ट नहीं हो सकतीं, और अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर फायदा क्या ,जहां तक कंडोम कि बात है तो यह शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए बहुत ठीक उपाय है, इससे गर्भ ठहरे कि संभावना बहुत कम हो जाती है, अगर वह लगाते समय फट जाता है या हम उसको ठीक तरह से नहीं लगाते तो यह दूसरा मामला है। अब यह कहना कि यह शत प्रतिशत कारगर उपाय है, ठीक नहीं है। कई बार ऐसा देखा गया है कि कंडोम लगाने के बाद भी सामने वाले को बीमारियाँ हूई हैं या सम्बंधित महिला गर्भवती हूई है। मैं यह बात पूर्व में घटी घटनाओं और समाचारों अथवा जन सूत्रों पर अआधारित बता रहा हूँ।
छमिया- और वो सवाल कि एड्स का हौव्वा कहीं कंडोम कंपनियों का खडा किया हुआ तो नहीं ताकि उनके प्रोडक्ट्स ज्यादा बिक सकें ।
मुंशीजी- यह शंका सच भी हो सकती है और गलत भी क्योंकि आज तक सरकार न कंडोम के लिए परमिट प्रणाली तो शुरू नहीं की, यानी कि किसी एक कंपनी का तो इस पर एकाधिकार है नहीं। बहुत सारी कम्पनियां कंडोम बेच रही हैं। लोग अवही खरीदते हैं जो उनकी कसौटी पर खरा उतरता है। यहाँ तक कि सरकार की तरफ से तो ये मुफ्त में दिए जाते हैं, फिर भी लोग गुणवत्ता के आधार पर बाहर का माल खरीदते ही हैं। अब तुम खुद सोचो कि सच्चाई क्या हो सकती है ?
छमिया- तो इसका इस्तेमाल ज्यादा क्यों नहीं करते लोग ?
मुंशीजी- जहां तक मेरी बात है, मुझे मजा नहीं आता, मैं ऐसे ही प्यार करने में खुश होता हूँ , कुछ मुझे झंझट लगता है। हाँ, अगर मैं किसी बाहरी महिला के साथ सम्बन्ध बनाता हूँ तो सुरक्षा का इंतजाम जरूर करता हूँ।
छमिया- तुम्हारी अपनी तो कोई है ही नहीं .
मुंशीजी - नई सदी की शुरुआत में सब कुछ बदल गया है। प्रेम की भाषा और परिभाषाएँ भी बदल गई हैं। शब्दों के रूप बदल गए हैं। इस बदलाव में भाषा को बेलगाम जबान मिली है। भाषा और जबान पर आ टिका है कामुकता का भाव जिसे अभिव्यक्त करता है एकमात्र 'सेक्सी' शब्द।आधुनिक भाषा शास्त्र में सेक्सी शब्द ऐसा रूप ले चुका है, जो किसी की तारीफ में भी यह कहा जा सकता हैं कि ''आप कितनी सेक्सी लग रही हैं''। सेक्सी शब्द आज के दौर की युवा पीढ़ी की शब्दावली का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो उनकी मनोभावनाओं को बेहद आसानी से व्यक्त करने में सहायक होता है। सेक्सी शब्द 'ढाई अक्षर प्रेम के' का नए ढाई अक्षरीय रूप में पुनर्जन्म है, जो हमेशा कामुकता की ओर इशारा नहीं करता बल्कि माहौल व उस में समाई चीजों को एक खास रूप से पेश करता है।आज पूरा का पूरा माहौल सेक्सी सुविधाओं व कृतियों से भरा हुआ है। कंप्यूटर सेक्सी है, टीवी पर न्यूजरीडर सेक्सी है, म्यूजिक सिस्टम सेक्सी है, बाथरूम सेक्सी है तो फ्रिज का लुक सेक्सी है। पोशाकें तो सेक्सी हैं ही। अब तो जूते, चप्पलें तक भी सेक्सी हो चले हैं।मुद्दे की बात यह है कि सेक्सी शब्द ऐसा साफसुथरा किंतु शरारतपूर्ण शब्द बन चुका है, जो मन के किसी कोने में पैदा हुई यौन इच्छा से जुड़ी गुदगुदी को जगा देता है। देखने में सुंदर, साफसुथरे ऑफिस को 'सेक्सी ऑफिस' कह दिया जाता है। मेज के कोने पर रखा नए मॉडल का आकर्षक कंप्यूटर या लैपटॉप, कुर्सियों की नरम गुदगुदा देने वाली गद्दियाँ आदि सब कुछ सेक्सी होने में शुमार हो जाते हैं।सड़कों पर मचती धूमकरीब 10-12 साल पहले देश की सड़कें सूनी नजर आती थीं। उन पर फिएट और एंबेसडर कारें और बहुत हुआ तो मारुति कारें दिखती थीं पर अब सड़कों पर 'सेक्सी कारों' की भरमार है। किसी का अगला हिस्सा सेक्सी है तो किसी का पिछला हिस्सा सेक्सी है। कामुकता पैसे की बैसाखियों पर सवार होकर ज्यादा इठलाती है। रईसों के लिए सफलता भी सेक्सी है और पैसा भी सेक्सी है। आज के परिवेश में पैसा और सफलता भी कामुकता पैदा करती है।हाऊ सेक्सी'प्यार' बाजार में मिलने लगा डब्बों में पैक हो कर रेडीमेड। प्रेम की भावना खुलेआम देशीविदेशी कार्ड कंपनियों द्वारा कभी कार्ड की शक्ल में, कभी गुब्बारों की शक्ल में। कभी छोटेबड़े टैडिबीयरों की शक्ल में दुकानें पर बिकने के लिए रखी जाने लगी है। मुँह से बोलने के लिए जबान ने सिर्फ एक ही शब्द चुना 'हाऊ सेक्सी'।सौंदर्य अब फड़कता, दमकता रोकड़ा बन गया है जिसे कैश कार्ड की तरह भुनाया जा सकता है। सौंदर्य प्रतियोगिता में अब लोग अपनी बेटियों की नुमाइश शौक से करते हैं क्योंकि अगर इस से नोट कमाए जा सकते हैं तो क्या बुराई है। सौंदर्य को ताकत समझा जाने लगा है। हर छोटाबड़ा शहर अपनेअपने तंबू तान कर अपनी-अपनी नजरें सिंकाई का सामान इकट्ठा करता है और कहा जाता है 'काफी सेक्सी शो था।'जिम्मेदार कौनपरफ्यूम की खुशबू में डूबा, महकता शरीर सेक्सी लगता है। आफ्टर शेव लोशन की महक पुरुष को ज्यादा सेक्सी बना देती है। विज्ञापन कंपनियां आलू के चिप्स से ले कर कमर के दर्द के मलहम तक सेक्सी अंदाज में पेश करने में पीछे नहीं रहती। सब कुछ घूमफिर कर सेक्सी अंदाजों में डूब कर दर्शकों व ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है।माहौल पर हावीसेक्स माहौल पर इतना हावी कब और कैसे हो गया, पता ही नहीं चला।
मुंशीजी- सवाल एक साथ किये गए हैं मगर इनका जवाब एक साथ संभव नहीं है। देने को तो दे दूं मगर तुम उस्ससे संतुष्ट नहीं हो सकतीं, और अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर फायदा क्या ,जहां तक कंडोम कि बात है तो यह शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए बहुत ठीक उपाय है, इससे गर्भ ठहरे कि संभावना बहुत कम हो जाती है, अगर वह लगाते समय फट जाता है या हम उसको ठीक तरह से नहीं लगाते तो यह दूसरा मामला है। अब यह कहना कि यह शत प्रतिशत कारगर उपाय है, ठीक नहीं है। कई बार ऐसा देखा गया है कि कंडोम लगाने के बाद भी सामने वाले को बीमारियाँ हूई हैं या सम्बंधित महिला गर्भवती हूई है। मैं यह बात पूर्व में घटी घटनाओं और समाचारों अथवा जन सूत्रों पर अआधारित बता रहा हूँ।
छमिया- और वो सवाल कि एड्स का हौव्वा कहीं कंडोम कंपनियों का खडा किया हुआ तो नहीं ताकि उनके प्रोडक्ट्स ज्यादा बिक सकें ।
मुंशीजी- यह शंका सच भी हो सकती है और गलत भी क्योंकि आज तक सरकार न कंडोम के लिए परमिट प्रणाली तो शुरू नहीं की, यानी कि किसी एक कंपनी का तो इस पर एकाधिकार है नहीं। बहुत सारी कम्पनियां कंडोम बेच रही हैं। लोग अवही खरीदते हैं जो उनकी कसौटी पर खरा उतरता है। यहाँ तक कि सरकार की तरफ से तो ये मुफ्त में दिए जाते हैं, फिर भी लोग गुणवत्ता के आधार पर बाहर का माल खरीदते ही हैं। अब तुम खुद सोचो कि सच्चाई क्या हो सकती है ?
छमिया- तो इसका इस्तेमाल ज्यादा क्यों नहीं करते लोग ?
मुंशीजी- जहां तक मेरी बात है, मुझे मजा नहीं आता, मैं ऐसे ही प्यार करने में खुश होता हूँ , कुछ मुझे झंझट लगता है। हाँ, अगर मैं किसी बाहरी महिला के साथ सम्बन्ध बनाता हूँ तो सुरक्षा का इंतजाम जरूर करता हूँ।
छमिया- तुम्हारी अपनी तो कोई है ही नहीं .
मुंशीजी - नई सदी की शुरुआत में सब कुछ बदल गया है। प्रेम की भाषा और परिभाषाएँ भी बदल गई हैं। शब्दों के रूप बदल गए हैं। इस बदलाव में भाषा को बेलगाम जबान मिली है। भाषा और जबान पर आ टिका है कामुकता का भाव जिसे अभिव्यक्त करता है एकमात्र 'सेक्सी' शब्द।आधुनिक भाषा शास्त्र में सेक्सी शब्द ऐसा रूप ले चुका है, जो किसी की तारीफ में भी यह कहा जा सकता हैं कि ''आप कितनी सेक्सी लग रही हैं''। सेक्सी शब्द आज के दौर की युवा पीढ़ी की शब्दावली का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो उनकी मनोभावनाओं को बेहद आसानी से व्यक्त करने में सहायक होता है। सेक्सी शब्द 'ढाई अक्षर प्रेम के' का नए ढाई अक्षरीय रूप में पुनर्जन्म है, जो हमेशा कामुकता की ओर इशारा नहीं करता बल्कि माहौल व उस में समाई चीजों को एक खास रूप से पेश करता है।आज पूरा का पूरा माहौल सेक्सी सुविधाओं व कृतियों से भरा हुआ है। कंप्यूटर सेक्सी है, टीवी पर न्यूजरीडर सेक्सी है, म्यूजिक सिस्टम सेक्सी है, बाथरूम सेक्सी है तो फ्रिज का लुक सेक्सी है। पोशाकें तो सेक्सी हैं ही। अब तो जूते, चप्पलें तक भी सेक्सी हो चले हैं।मुद्दे की बात यह है कि सेक्सी शब्द ऐसा साफसुथरा किंतु शरारतपूर्ण शब्द बन चुका है, जो मन के किसी कोने में पैदा हुई यौन इच्छा से जुड़ी गुदगुदी को जगा देता है। देखने में सुंदर, साफसुथरे ऑफिस को 'सेक्सी ऑफिस' कह दिया जाता है। मेज के कोने पर रखा नए मॉडल का आकर्षक कंप्यूटर या लैपटॉप, कुर्सियों की नरम गुदगुदा देने वाली गद्दियाँ आदि सब कुछ सेक्सी होने में शुमार हो जाते हैं।सड़कों पर मचती धूमकरीब 10-12 साल पहले देश की सड़कें सूनी नजर आती थीं। उन पर फिएट और एंबेसडर कारें और बहुत हुआ तो मारुति कारें दिखती थीं पर अब सड़कों पर 'सेक्सी कारों' की भरमार है। किसी का अगला हिस्सा सेक्सी है तो किसी का पिछला हिस्सा सेक्सी है। कामुकता पैसे की बैसाखियों पर सवार होकर ज्यादा इठलाती है। रईसों के लिए सफलता भी सेक्सी है और पैसा भी सेक्सी है। आज के परिवेश में पैसा और सफलता भी कामुकता पैदा करती है।हाऊ सेक्सी'प्यार' बाजार में मिलने लगा डब्बों में पैक हो कर रेडीमेड। प्रेम की भावना खुलेआम देशीविदेशी कार्ड कंपनियों द्वारा कभी कार्ड की शक्ल में, कभी गुब्बारों की शक्ल में। कभी छोटेबड़े टैडिबीयरों की शक्ल में दुकानें पर बिकने के लिए रखी जाने लगी है। मुँह से बोलने के लिए जबान ने सिर्फ एक ही शब्द चुना 'हाऊ सेक्सी'।सौंदर्य अब फड़कता, दमकता रोकड़ा बन गया है जिसे कैश कार्ड की तरह भुनाया जा सकता है। सौंदर्य प्रतियोगिता में अब लोग अपनी बेटियों की नुमाइश शौक से करते हैं क्योंकि अगर इस से नोट कमाए जा सकते हैं तो क्या बुराई है। सौंदर्य को ताकत समझा जाने लगा है। हर छोटाबड़ा शहर अपनेअपने तंबू तान कर अपनी-अपनी नजरें सिंकाई का सामान इकट्ठा करता है और कहा जाता है 'काफी सेक्सी शो था।'जिम्मेदार कौनपरफ्यूम की खुशबू में डूबा, महकता शरीर सेक्सी लगता है। आफ्टर शेव लोशन की महक पुरुष को ज्यादा सेक्सी बना देती है। विज्ञापन कंपनियां आलू के चिप्स से ले कर कमर के दर्द के मलहम तक सेक्सी अंदाज में पेश करने में पीछे नहीं रहती। सब कुछ घूमफिर कर सेक्सी अंदाजों में डूब कर दर्शकों व ग्राहकों को अपनी ओर खींचता है।माहौल पर हावीसेक्स माहौल पर इतना हावी कब और कैसे हो गया, पता ही नहीं चला।
Friday, January 29, 2010
भाग -17
वो भी खुश और हम भी खुश, हम उनको उधार दे देते हैं, वक्त जरूरत उनको कुछ रुपये दे देते हैं और इसके बदले वे हमको अपना शरीर सौप देती हैं, यह सब गैर राजी नहीं होता, उनकी इच्छा से होता है, वे कहती हैं कि मेरे साथ उन्हें बहुत आनंद आता है, मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध रखने में कई महिलाओं को गर्व की अनुभूति होती है। ये मैं शेखी नहीं बघारता, चाहो तो किसी से भी पूछ सकती हो।
छमिया- आप क्यों झूठ बोलेंगे , मैं जानती हूँ, मुझे कुछ प्यार के टिप्स दो न ...
मुंशीजी- वैसे बात तो बिलकुल सही है कि प्यार का अफसाना निगाहें बयाँ करती हैं लेकिन यदि ये भाषा स्पष्ट न हो तो ....? अमूमन होता ये है कि कोई आपको बहुत-बहुत चाहता है और आप ही से इस बात को छुपाना भी चाहता है, फिर आप कैसे जानेंगे उसके मन की बात हम यहाँ आपके लिए कुछ टिप्स दे देते हैं, जो आपको ये जानने में मदद करेंगी कि आप जिन्हें चाहते हैं, वो आपके बारे में क्या सोचते हैं -हर व्यक्ति का अपना एक दायरा होता है, जिसमें वह किसी को आने नहीं देना चाहता लेकिन जब आप किसी की चाहत में डूबे हों तो इस तरह के दायरे अपने आप सिमटने लगते हैं। दिल चाहता है वो इस दायरे को तोड़कर आपके करीब, बिलकुल करीब आ जाएँ। और उनके मन की बात जानने के लिए आपको इसी दायरे का सहारा लेना है। उनके बिलकुल करीब जाकर उन्हें अनजाने में छूने की कोशिश कीजिए और उनकी प्रतिक्रिया पर गौर करें यदि वो आपको चाहते हैं तो उन्हें आपकी ये हरकत अच्छी लगेगी अन्यथा वे आपसे दूर होने की कोशिश करेंगे।उनके हावभाव, शारीरिक प्रतिक्रिया आदि पर ध्यान दें। यदि उनके मन में आपके लिए कुछ है तो वो आपको किसी न किसी बहाने छूने की कोशिश करेंगे, आपको देखते ही उनकी आँखों में चमक आ जाएगी, वो हमेशा आपका साथ पाने की कोशिश में लगे रहेंगे। ये ऐसी बातें हैं, जिन पर आप आसानी से उनके दिल की बात जान सकते हैं।उनकी चाहत के बारे में पता करने का एक और तरीका यह है कि आप किसी न किसी तरह से उनका हाथ अपने हाथों में लेने की कोशिश करें। जैसे यदि उन्हें आपसे कोई चीज चाहिए तो उसे इस तरह से पकड़ें कि वो आपका हाथ पकड़े बगैर उसे ले ही न पाएँ। उनकी प्रतिक्रिया पर गौर करें। यदि वो आपका हाथ पकड़ने से कतराते हैं तो फिर उन्हें पटाने की आपकी कोशिश बेकार है।किसी रैलिंग या टेबल या कहीं और अपना हाथ उनके हाथ के करीब रखें यदि वो आपको चाहते हैं तो जरूर आपका हाथ छूने की कोशिश करेंगे।उनके व्यवहार का अध्ययन करें। क्या आपके सामने आते ही उनके हाथ काँपने लगते हैं और उन्हें पसीना आने लगता है? क्या वो बात-बेबात आपकी तारीफों के पुल बाँधने लगते हैं? आपसे मिलने और बात करने के बहाने ढूँढते हैं? यदि हाँ तो ये बात सही है कि वो आपको चाहते हैं।ये कुछ ऐसी टिप्स हैं, जिनसे आप अंदाज लगा सकते हैं कि आपके दिल में जिसके प्रति प्यार उमड़ रहा है, वह आपको कितना चाहता है। अब देखो न मेरी आँखों में , कुछ तो अंदाजा लगेगा ही न।
छमिया- मुंशीजी , बड़े छलिया हो, रसिया के भी रसिया। हर बात को मोड़-तोड़कर यहीं पर ले आते हो। मैं सीखना चाहती हूँ, क्योंकि मेरे मन में बहुत से सवाल हैं।
मुंशीजी- कुछ ख़ास सवाल बताओ न।
छमिया- जैसे कि सेक्स करने से क्या नुक्सान और क्या फायदे हो सकते हैं ? सेक्स करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए , किस तरह के लोगों से सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखना चाहिए , कंडोम लगाना कितना जरूरी है और क्या यह सुरक्षा कवच साबित होता है या फिर कम्पनियां अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए बीमारियों का हौव्वा खडा करती हैं ? क्या दवा लेने से भी गर्भ से बचा जा सकता है या फिर बचाव और फिर गर्भपात ही इसका अंतिम उपाय है ?
छमिया- आप क्यों झूठ बोलेंगे , मैं जानती हूँ, मुझे कुछ प्यार के टिप्स दो न ...
मुंशीजी- वैसे बात तो बिलकुल सही है कि प्यार का अफसाना निगाहें बयाँ करती हैं लेकिन यदि ये भाषा स्पष्ट न हो तो ....? अमूमन होता ये है कि कोई आपको बहुत-बहुत चाहता है और आप ही से इस बात को छुपाना भी चाहता है, फिर आप कैसे जानेंगे उसके मन की बात हम यहाँ आपके लिए कुछ टिप्स दे देते हैं, जो आपको ये जानने में मदद करेंगी कि आप जिन्हें चाहते हैं, वो आपके बारे में क्या सोचते हैं -हर व्यक्ति का अपना एक दायरा होता है, जिसमें वह किसी को आने नहीं देना चाहता लेकिन जब आप किसी की चाहत में डूबे हों तो इस तरह के दायरे अपने आप सिमटने लगते हैं। दिल चाहता है वो इस दायरे को तोड़कर आपके करीब, बिलकुल करीब आ जाएँ। और उनके मन की बात जानने के लिए आपको इसी दायरे का सहारा लेना है। उनके बिलकुल करीब जाकर उन्हें अनजाने में छूने की कोशिश कीजिए और उनकी प्रतिक्रिया पर गौर करें यदि वो आपको चाहते हैं तो उन्हें आपकी ये हरकत अच्छी लगेगी अन्यथा वे आपसे दूर होने की कोशिश करेंगे।उनके हावभाव, शारीरिक प्रतिक्रिया आदि पर ध्यान दें। यदि उनके मन में आपके लिए कुछ है तो वो आपको किसी न किसी बहाने छूने की कोशिश करेंगे, आपको देखते ही उनकी आँखों में चमक आ जाएगी, वो हमेशा आपका साथ पाने की कोशिश में लगे रहेंगे। ये ऐसी बातें हैं, जिन पर आप आसानी से उनके दिल की बात जान सकते हैं।उनकी चाहत के बारे में पता करने का एक और तरीका यह है कि आप किसी न किसी तरह से उनका हाथ अपने हाथों में लेने की कोशिश करें। जैसे यदि उन्हें आपसे कोई चीज चाहिए तो उसे इस तरह से पकड़ें कि वो आपका हाथ पकड़े बगैर उसे ले ही न पाएँ। उनकी प्रतिक्रिया पर गौर करें। यदि वो आपका हाथ पकड़ने से कतराते हैं तो फिर उन्हें पटाने की आपकी कोशिश बेकार है।किसी रैलिंग या टेबल या कहीं और अपना हाथ उनके हाथ के करीब रखें यदि वो आपको चाहते हैं तो जरूर आपका हाथ छूने की कोशिश करेंगे।उनके व्यवहार का अध्ययन करें। क्या आपके सामने आते ही उनके हाथ काँपने लगते हैं और उन्हें पसीना आने लगता है? क्या वो बात-बेबात आपकी तारीफों के पुल बाँधने लगते हैं? आपसे मिलने और बात करने के बहाने ढूँढते हैं? यदि हाँ तो ये बात सही है कि वो आपको चाहते हैं।ये कुछ ऐसी टिप्स हैं, जिनसे आप अंदाज लगा सकते हैं कि आपके दिल में जिसके प्रति प्यार उमड़ रहा है, वह आपको कितना चाहता है। अब देखो न मेरी आँखों में , कुछ तो अंदाजा लगेगा ही न।
छमिया- मुंशीजी , बड़े छलिया हो, रसिया के भी रसिया। हर बात को मोड़-तोड़कर यहीं पर ले आते हो। मैं सीखना चाहती हूँ, क्योंकि मेरे मन में बहुत से सवाल हैं।
मुंशीजी- कुछ ख़ास सवाल बताओ न।
छमिया- जैसे कि सेक्स करने से क्या नुक्सान और क्या फायदे हो सकते हैं ? सेक्स करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए , किस तरह के लोगों से सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखना चाहिए , कंडोम लगाना कितना जरूरी है और क्या यह सुरक्षा कवच साबित होता है या फिर कम्पनियां अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए बीमारियों का हौव्वा खडा करती हैं ? क्या दवा लेने से भी गर्भ से बचा जा सकता है या फिर बचाव और फिर गर्भपात ही इसका अंतिम उपाय है ?
Thursday, January 28, 2010
भाग-16
छमिया - मैं भोजपुरी नहीं जानती, हिन्दी के शेर अच्छे लगते हैं।
मुंशीजी- यह हिन्दी ही तो थी, कुछ शब्द उर्दू , अरबी के थे। समझ में में तो आ गए न। जो बात हम आसानी से नहीं कह पाते , उनको शेर ओ शायरी के माध्यम से आसानी से कह जाते हैं।
छमिया- सच तो ये है की शेर मुझे बेहद पसंद हैं, समझो जान हैं मेरी। मैं हमेशा पढ़ती रहती हूँ। कुछ और कहो
मुंशीजी- वक़्त की मुठ्ठी मे कैद तकदीर ,देखकर हम तो हँस दिए हाथ की लकीर देखकर । वादा था कि बिछड़ के कभी भी ना रोयेंगे ,फिर क्यों रो दिया उसकी तस्वीर देखकर । वो ख्वाब जिनको कभी बचपने मे देखा , आँख भर आयी है उनकी ताबीर देखकर। मिलाया जिसने अक्सर दोस्ती का हाथ ,हैरान हूँ मै उन हाथो मे शमशीर देखकर । सफ़र जिन्दगी का क्या कभी रोक ,पावोगे ये सोचता रहा पांव मै पड़ी जंजीर देखकर ।
छमिया - वाह ... मजा आ गया, ऐसे शब्द दिल के अन्दर घर कर जाते हैं। लगता है जैसे लिखने वाले न मेरे ऊपर ही लिखा है। थोड़ा बहुत मैं भी लिखने की कोशिश करती हूँ, लेकिन जमता नहीं है। कैसे जमेगा ? मैं रदीफ़ काफिया , मक्ता थोड़े ही जानती हूँ।
मुंशीजी- ये सब चीज तो मैं भी नहीं जानता , अगर किसी शायर की कोई रचना अच्छी लगती है तो उसे लिख लेता हूँ, जिसे चिट्ठी वगैरहा में यूज कर लेता हूँ। आज तुम्हें सुना दिया। अब तो जान भी गया हूँ की तुम भी इसे पसंद करती हो।
छमिया -मैंने भी एक वेब साईट पर कुछ पंक्तियाँ पढी थीं, ध्यान दीजिये- सच्चे शब्दों में सच के अहसास लिखेंगे ..वक्त पढे जिसको कुछ इतना खास लिखेंगे ,गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले,हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे।
मुंशीजी - वाह , वाह । कमाल करते हैं लिखने वाले भी। क्या खूब लिखा है, मजा आ गया ।dimaag फ्रेश हो गया। अब तो ऐसा दिल कर रहा है की तुम्हारे सारे वस्त्र एक तरफ उतार फेंकूं और तुम्हारे अनमोल खजाने की पूजा कर लूं, प्यार कर लूं इन उभारों से, इन गोलाइयों को दबाने , तुम्हारे होठों का अमृत रस पीने का दिल कर रहा है। प्यार के इस बहाव में बह जाने दो मुझे । इस वक्त तुम्हारे सामने बहुत बड़ा चांस है, इसे कैश करो। ऐश करो मेरी जान ऐश करो। अरे ये क्या ये तो छोटा -मोटा शेर ही बन बैठा।
छमिया चुप थी, उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, खुद मुंशीजी भी सूखे पत्ते की तरह काँप रहे थे, यही फर्क होता है पत्नी और बाहरी लडकी के बीच। जब कोई अपनी पत्नी के साथ प्रेमालाप करता है तो उसे किसी तरह की चिंता नहीं होती, सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के घेरे में रहकर वे दोनों जब एकाकार होते हैं तो बहुत इंजॉय करते हैं। लेकिन चोरी- चोरी किया जाने वाला प्रेमालाप कभी-कभी तो अपने अंजाम पर भी नहीं पहुच pata है। मुंशीजी न कुछ लाइनें सुनाकर छमिया को आकर्षित करने की कोशिश की-
-हमको भी समझ फूल या पत्थर नहीं आते,दुश्मन की तरह दोस्त अगर घर नहीं आते,नज़दीक बहुत गर रहे, बन जाओगे आदत,ये सोच के, मिलने तुझे अक्सर नहीं आते , जेस दिन से मैं ले आई हूँ बाज़ार से पिंजरा ,उस रोज से, छज्जे पे कबूतर नहीं आते , मिल जाए नया ज़ख़्म तो फिर कोई ग़ज़ल हो,अब ज़हन में अल्फ़ाज़ के पैकर नहीं आते । सच कहूं तो तुम्हारे हुस्न को देखकर हर शायर भी भी दीवाना हुए बिना नहीं रह सकता, जो भी ठीक से देखेगा वह शायरी भूलकर तुम्हारी इन झील सी आँखों में डूबना चाहेगा।
छमिया- मैं नहीं जानती थी की तुम पूरे रसिया हो, दिखने में तो सीधी सादे लगते हो मगर हो बड़े उस्ताद । मुझे पटाने से पहले और भी सैकड़ों पर डोरे दाल चुके हो , अब समझ में आया की कैसे आ जाती होंगी तुम्हारी बातों में ,
मुंशीजी- तुम सबसे अलग हो, अब तक तुम्हारे मोहल्ले की कोई और लड़की होती तो काम फिट हो जाता, वह कबकी अपने घर चली गयीए होती, मुझे भी खुश करके और खुद भी खुश होकर। कितना समय लगता है, पांच मिनिट में काम निबट जाता है।
मुंशीजी- यह हिन्दी ही तो थी, कुछ शब्द उर्दू , अरबी के थे। समझ में में तो आ गए न। जो बात हम आसानी से नहीं कह पाते , उनको शेर ओ शायरी के माध्यम से आसानी से कह जाते हैं।
छमिया- सच तो ये है की शेर मुझे बेहद पसंद हैं, समझो जान हैं मेरी। मैं हमेशा पढ़ती रहती हूँ। कुछ और कहो
मुंशीजी- वक़्त की मुठ्ठी मे कैद तकदीर ,देखकर हम तो हँस दिए हाथ की लकीर देखकर । वादा था कि बिछड़ के कभी भी ना रोयेंगे ,फिर क्यों रो दिया उसकी तस्वीर देखकर । वो ख्वाब जिनको कभी बचपने मे देखा , आँख भर आयी है उनकी ताबीर देखकर। मिलाया जिसने अक्सर दोस्ती का हाथ ,हैरान हूँ मै उन हाथो मे शमशीर देखकर । सफ़र जिन्दगी का क्या कभी रोक ,पावोगे ये सोचता रहा पांव मै पड़ी जंजीर देखकर ।
छमिया - वाह ... मजा आ गया, ऐसे शब्द दिल के अन्दर घर कर जाते हैं। लगता है जैसे लिखने वाले न मेरे ऊपर ही लिखा है। थोड़ा बहुत मैं भी लिखने की कोशिश करती हूँ, लेकिन जमता नहीं है। कैसे जमेगा ? मैं रदीफ़ काफिया , मक्ता थोड़े ही जानती हूँ।
मुंशीजी- ये सब चीज तो मैं भी नहीं जानता , अगर किसी शायर की कोई रचना अच्छी लगती है तो उसे लिख लेता हूँ, जिसे चिट्ठी वगैरहा में यूज कर लेता हूँ। आज तुम्हें सुना दिया। अब तो जान भी गया हूँ की तुम भी इसे पसंद करती हो।
छमिया -मैंने भी एक वेब साईट पर कुछ पंक्तियाँ पढी थीं, ध्यान दीजिये- सच्चे शब्दों में सच के अहसास लिखेंगे ..वक्त पढे जिसको कुछ इतना खास लिखेंगे ,गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले,हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे।
मुंशीजी - वाह , वाह । कमाल करते हैं लिखने वाले भी। क्या खूब लिखा है, मजा आ गया ।dimaag फ्रेश हो गया। अब तो ऐसा दिल कर रहा है की तुम्हारे सारे वस्त्र एक तरफ उतार फेंकूं और तुम्हारे अनमोल खजाने की पूजा कर लूं, प्यार कर लूं इन उभारों से, इन गोलाइयों को दबाने , तुम्हारे होठों का अमृत रस पीने का दिल कर रहा है। प्यार के इस बहाव में बह जाने दो मुझे । इस वक्त तुम्हारे सामने बहुत बड़ा चांस है, इसे कैश करो। ऐश करो मेरी जान ऐश करो। अरे ये क्या ये तो छोटा -मोटा शेर ही बन बैठा।
छमिया चुप थी, उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, खुद मुंशीजी भी सूखे पत्ते की तरह काँप रहे थे, यही फर्क होता है पत्नी और बाहरी लडकी के बीच। जब कोई अपनी पत्नी के साथ प्रेमालाप करता है तो उसे किसी तरह की चिंता नहीं होती, सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के घेरे में रहकर वे दोनों जब एकाकार होते हैं तो बहुत इंजॉय करते हैं। लेकिन चोरी- चोरी किया जाने वाला प्रेमालाप कभी-कभी तो अपने अंजाम पर भी नहीं पहुच pata है। मुंशीजी न कुछ लाइनें सुनाकर छमिया को आकर्षित करने की कोशिश की-
-हमको भी समझ फूल या पत्थर नहीं आते,दुश्मन की तरह दोस्त अगर घर नहीं आते,नज़दीक बहुत गर रहे, बन जाओगे आदत,ये सोच के, मिलने तुझे अक्सर नहीं आते , जेस दिन से मैं ले आई हूँ बाज़ार से पिंजरा ,उस रोज से, छज्जे पे कबूतर नहीं आते , मिल जाए नया ज़ख़्म तो फिर कोई ग़ज़ल हो,अब ज़हन में अल्फ़ाज़ के पैकर नहीं आते । सच कहूं तो तुम्हारे हुस्न को देखकर हर शायर भी भी दीवाना हुए बिना नहीं रह सकता, जो भी ठीक से देखेगा वह शायरी भूलकर तुम्हारी इन झील सी आँखों में डूबना चाहेगा।
छमिया- मैं नहीं जानती थी की तुम पूरे रसिया हो, दिखने में तो सीधी सादे लगते हो मगर हो बड़े उस्ताद । मुझे पटाने से पहले और भी सैकड़ों पर डोरे दाल चुके हो , अब समझ में आया की कैसे आ जाती होंगी तुम्हारी बातों में ,
मुंशीजी- तुम सबसे अलग हो, अब तक तुम्हारे मोहल्ले की कोई और लड़की होती तो काम फिट हो जाता, वह कबकी अपने घर चली गयीए होती, मुझे भी खुश करके और खुद भी खुश होकर। कितना समय लगता है, पांच मिनिट में काम निबट जाता है।
Wednesday, January 27, 2010
भाग-15
छमिया- और अगर कल को तुम्हें मुझसे भी कोई सुन्दर मिल जाती है तो मेरी हसरत भी ख़त्म हो जायेगी ?
मुंशीजी- जी नहीं, दरअसल तुम मेरी पहली और आखिरी चाहत हो, मैं तुम जैसी पत्नी ही चाहता था लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं सका। मैं उस वक्त बहुत मायूस हुआ था , मेरे घरवाले गरीब थे इस कारन मुझे मन पसंद घरवाली नहीं मिल पायी, मेरी तो जैसे किस्मत ही फूट गयी थी, फूट-फूटकर बच्चों की तरह रोया था मैं। अपनी इच्छाओं का गला मैंने खुद ही घोंट डाला था। मैंने हमेशा तुम जैसी खूबसूरत लड़की को अपनी जीवन संगिनी बनाने के सपने देखे थे। मैंने पहले भी तुमको अपनी एक मित्र की बात बतायी थी, मगर उसके साथ सिर्फ मेरे शारीरिक सम्बन्ध थे, प्यार नहीं था। और लड़कों की तरह मैं भी सोचता था की कोई तुम्हारे जैसी हुस्न परी से मेरी भी दोस्ती हो जाए, मैं भी दिल खोलकर प्यार करुँ, मगर हाय री मजबूरी , यह किसीसे कुछ भी करा सकती है। आज मुझे कोई समस्या नहीं है, मैं अब अपने दिल की रानी को प्राप्त कर सकता हूँ। जो चाहूँ खरीद सकता हूँ। अब मैं मोहताज नहीं हूँ। और जिसे इतने सालों की तमन्ना के बाद पा रहा हूँ उसको भला कैसे भुला सकता हूँ, अब तो तुम मेरी मौत के बाद ही मुझसे जुदा हो पाओगी ।
छमिया- यही होता है मुंशीजी, जब हम पर कुछ पाने का जूनून होता है तो हम बिना कोई ध्यान दियी सारी ताकत लगा देते हैं, ऐसे में हमें यह ध्यान भी नहीं रहता की जिसे हम पाने जा रहे हैं , हो सकता है वह भी किसीको चाहता हो। हो सकता है उसकी अपनी भी कुछ हसरतें हों। जैसे की तुम जिसमें लड़की को पाना चाहते थे वो अभावों की वजह से नहीं नहीं पा सके और जिसे तुम पा रहे हो हो सकता है वह किसी और को पाने की चाहत रखती हो। यानी की हो सकता है मैंने भी किसी ख़ास राजकुमार के सपने देखे हों और आज मेरी गरीबी के चलते आप उन्हें कुचल रहे हों, हो सकता है न...
मुंशीजी- हाँ , संभव है। यहाँ कुछ भी हो सकता है लेकिन मैं इस त्याग के बदले तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का जीवन उज्जवल बना रहा हूँ। मेरे साथ ऐसे हालात नहीं थे। मुझे बदले में कुछ नहीं मिला था। मेरा दिल तोड़ना था, लोगों न तोड़ दिया। मेरे जज्बातों को कुचलते हुए सफलता की सीढिया तय करनी थीं , सो लोगों न ऐसा किया । मुझसे बदले में यह नहीं कहा गया की मुझे कोई आर्थिक सहायता देगा, या कोई मेरे अरमानों की ज़रा भी कद्र करेगा। इसलिए अपने हालात की बराबरी मेरे हालातों से न करो। तुम जानती हो की यहाँ पर ऐसे लोग मौजूद हैं जो तुम्हारी जवानी के रस को चूसना तो चाहते हैं लेकिन किसी भी हालत में तुम्हारे दशा सुधारना नहीं चाहते, वे तुम्हें प्यार का झूठा झांसा दे सकते हैं, तुम्हें बहका सकते हैं मगर सच्चा साथ नहीं दे सकते ।मैंने एक ग़ज़ल पढी थी , सुनाता हूँ, अर्थ अपने आप जान जाओगी -पूछ लो तुम भी इस ज़माने से,प्यार छुपता नहीं छुपाने से !पास आते हो छुते हो, बात करते हो,कभी मतलब से कभी बहाने से !!प्यार दिल में है तो लाओ ज़ुबाँ पे,आग भड़कती है इस कदर बुझाने से !तुम्हें न पाना शायद बेहतर है,पा के फिर से तुम्हें गंवाने से !!क्या सुनायें किसी को राज़-ए-दिल,दर्द सिर्फ़ बढ़ता ही है सुनाने से !
छमिया- मैं दर्द बढाने नहीं प्यार के पींग बढाने आयी हूँ, चाहती हूँ की आप कोई प्यार का टिप्स सुनाएँ , आपबीती कहानी भी चलेगी और जगबीती भी। मैं जब तक अपने दिल को सेक्स के लिए तैयार नहीं कर लेती तब तक तुम्हारी हसरतों को लगाम लगानी ही होगी।
मुंशीजी- मैं तो हर तरह से हर वक्त तैयार हूँ, तुमने इस दहकती हूई जवानी पर मेरा नाम लिखकर इसे मेरे लिए आरक्षित कर दिया है इससे बढ़कर खुशी मेरे लिए भला क्या हो सकती है ? मेरा नसीब अच्छा है।
छमिया- इसमें कोई दो राय नहीं, वरना हर किसी को मन माफिक चीज नहीं मिल पाती ।
अपने दिल का हाल पंक्तियों में व्यक्त करता हूँ- तुझे ख़बर है तुझे सोचने की खातिर,बहुत से काम मुक़दर पे टाळ रखते हें !कोई भी फ़ैसला हम सोच कर नहीं करते,तुम्हारे नाम का सिक्का उछाल रखते हैं !!तुम्हारे बाद ये आदत सी हो गई अपनी,बिखरते सूखते पत्ता संभाल रखते हैं !खुशी सी मिलती है ख़ुद को अजायते देकर,सो जनबुझ कर ख़ुद को निढाल रखते हैं !!तुम्हारे हिज्र में ये हाल हो गया अपना,किसी का ख़त हो, उससे भी संभल रखते हैं !खुशी मिले तो तेरे बाद खुश नही होते,हम अपनी आँख में हर दम मलाळ रखते हैं !!कुछ इसलिए भी तो बे-हाल हो गए हम,तुम्हारी याद का बेहद ख्याल रखते हैं।
मुंशीजी- जी नहीं, दरअसल तुम मेरी पहली और आखिरी चाहत हो, मैं तुम जैसी पत्नी ही चाहता था लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं सका। मैं उस वक्त बहुत मायूस हुआ था , मेरे घरवाले गरीब थे इस कारन मुझे मन पसंद घरवाली नहीं मिल पायी, मेरी तो जैसे किस्मत ही फूट गयी थी, फूट-फूटकर बच्चों की तरह रोया था मैं। अपनी इच्छाओं का गला मैंने खुद ही घोंट डाला था। मैंने हमेशा तुम जैसी खूबसूरत लड़की को अपनी जीवन संगिनी बनाने के सपने देखे थे। मैंने पहले भी तुमको अपनी एक मित्र की बात बतायी थी, मगर उसके साथ सिर्फ मेरे शारीरिक सम्बन्ध थे, प्यार नहीं था। और लड़कों की तरह मैं भी सोचता था की कोई तुम्हारे जैसी हुस्न परी से मेरी भी दोस्ती हो जाए, मैं भी दिल खोलकर प्यार करुँ, मगर हाय री मजबूरी , यह किसीसे कुछ भी करा सकती है। आज मुझे कोई समस्या नहीं है, मैं अब अपने दिल की रानी को प्राप्त कर सकता हूँ। जो चाहूँ खरीद सकता हूँ। अब मैं मोहताज नहीं हूँ। और जिसे इतने सालों की तमन्ना के बाद पा रहा हूँ उसको भला कैसे भुला सकता हूँ, अब तो तुम मेरी मौत के बाद ही मुझसे जुदा हो पाओगी ।
छमिया- यही होता है मुंशीजी, जब हम पर कुछ पाने का जूनून होता है तो हम बिना कोई ध्यान दियी सारी ताकत लगा देते हैं, ऐसे में हमें यह ध्यान भी नहीं रहता की जिसे हम पाने जा रहे हैं , हो सकता है वह भी किसीको चाहता हो। हो सकता है उसकी अपनी भी कुछ हसरतें हों। जैसे की तुम जिसमें लड़की को पाना चाहते थे वो अभावों की वजह से नहीं नहीं पा सके और जिसे तुम पा रहे हो हो सकता है वह किसी और को पाने की चाहत रखती हो। यानी की हो सकता है मैंने भी किसी ख़ास राजकुमार के सपने देखे हों और आज मेरी गरीबी के चलते आप उन्हें कुचल रहे हों, हो सकता है न...
मुंशीजी- हाँ , संभव है। यहाँ कुछ भी हो सकता है लेकिन मैं इस त्याग के बदले तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का जीवन उज्जवल बना रहा हूँ। मेरे साथ ऐसे हालात नहीं थे। मुझे बदले में कुछ नहीं मिला था। मेरा दिल तोड़ना था, लोगों न तोड़ दिया। मेरे जज्बातों को कुचलते हुए सफलता की सीढिया तय करनी थीं , सो लोगों न ऐसा किया । मुझसे बदले में यह नहीं कहा गया की मुझे कोई आर्थिक सहायता देगा, या कोई मेरे अरमानों की ज़रा भी कद्र करेगा। इसलिए अपने हालात की बराबरी मेरे हालातों से न करो। तुम जानती हो की यहाँ पर ऐसे लोग मौजूद हैं जो तुम्हारी जवानी के रस को चूसना तो चाहते हैं लेकिन किसी भी हालत में तुम्हारे दशा सुधारना नहीं चाहते, वे तुम्हें प्यार का झूठा झांसा दे सकते हैं, तुम्हें बहका सकते हैं मगर सच्चा साथ नहीं दे सकते ।मैंने एक ग़ज़ल पढी थी , सुनाता हूँ, अर्थ अपने आप जान जाओगी -पूछ लो तुम भी इस ज़माने से,प्यार छुपता नहीं छुपाने से !पास आते हो छुते हो, बात करते हो,कभी मतलब से कभी बहाने से !!प्यार दिल में है तो लाओ ज़ुबाँ पे,आग भड़कती है इस कदर बुझाने से !तुम्हें न पाना शायद बेहतर है,पा के फिर से तुम्हें गंवाने से !!क्या सुनायें किसी को राज़-ए-दिल,दर्द सिर्फ़ बढ़ता ही है सुनाने से !
छमिया- मैं दर्द बढाने नहीं प्यार के पींग बढाने आयी हूँ, चाहती हूँ की आप कोई प्यार का टिप्स सुनाएँ , आपबीती कहानी भी चलेगी और जगबीती भी। मैं जब तक अपने दिल को सेक्स के लिए तैयार नहीं कर लेती तब तक तुम्हारी हसरतों को लगाम लगानी ही होगी।
मुंशीजी- मैं तो हर तरह से हर वक्त तैयार हूँ, तुमने इस दहकती हूई जवानी पर मेरा नाम लिखकर इसे मेरे लिए आरक्षित कर दिया है इससे बढ़कर खुशी मेरे लिए भला क्या हो सकती है ? मेरा नसीब अच्छा है।
छमिया- इसमें कोई दो राय नहीं, वरना हर किसी को मन माफिक चीज नहीं मिल पाती ।
अपने दिल का हाल पंक्तियों में व्यक्त करता हूँ- तुझे ख़बर है तुझे सोचने की खातिर,बहुत से काम मुक़दर पे टाळ रखते हें !कोई भी फ़ैसला हम सोच कर नहीं करते,तुम्हारे नाम का सिक्का उछाल रखते हैं !!तुम्हारे बाद ये आदत सी हो गई अपनी,बिखरते सूखते पत्ता संभाल रखते हैं !खुशी सी मिलती है ख़ुद को अजायते देकर,सो जनबुझ कर ख़ुद को निढाल रखते हैं !!तुम्हारे हिज्र में ये हाल हो गया अपना,किसी का ख़त हो, उससे भी संभल रखते हैं !खुशी मिले तो तेरे बाद खुश नही होते,हम अपनी आँख में हर दम मलाळ रखते हैं !!कुछ इसलिए भी तो बे-हाल हो गए हम,तुम्हारी याद का बेहद ख्याल रखते हैं।
Monday, January 25, 2010
भाग-१४
जब हमारे होठों से होठ मिलेंगे , सीना से सीना मिलेगा और हम दोनों एक दुसरे में समा जायेंगे तब पता चलेगा कि असली सुख क्या होता है, तब जानोगी कि स्वर्ग किसको कहते हैं ?तुम्हारे मन के तार झन्ना जायेंगे , दिल बाग-बाग हो जाएगा . जिस तरह वीणा के तार झंकृत होने से मन प्रफुल्लित हो जाता है, उसी तरह की अनुभूति होगी .
छमिया- वाह, जब पहले ही इतना सुखद अनुभव हो रहा है तो आगे क्या होगा , मैं कल्पना कर सकती हूँ लेकिन अपने आपको समर्पित कब करूंगी मैं तुम्हें बता ही चुकी हूँ.
मुंशीजी- मुझे भी कहाँ इनकार है ? मैं तैयार हूँ और उसी दिशा में काम कर रहा हूँ. मगर तुम तो जैसे पत्थर की बनी हुई हो, टस से मस होने का नाम ही नहीं ले रही हो. फिर भी मेरी कोशिशे जारी हैं, और कोशिश हमेशा कामयाब होती है, बस मलाल इस बात का है कि मैं जो मेहनत कर रहा हूँ इससे आनंद तो हम दोनों उठाएंगे मगर परेशान मैं अकेला हो रहा हूँ.
छमिया- अकेले कैसे कह सकते हो, मैं भी यहाँ पर तुम्हारे साथ हूँ, और अब तो तुमने मुझे अपनी बांहों में भी कैद कर लिया है. पहले कहते थे कि दूर से ही बात करेंगे .
मुंशीजी ने छमिया के गदराए हुए बदन को आहिस्ता-आहिस्ता दबाना शुरू कर दिया, उनका हाथ छमिया की उन्नत गोलाइयों तक पहुच गया था, कई बार छमिया ने उनका हाथ वहाँ से हटाने की कोशिश भी की मगर सफलता नहीं मिल पायी. मुंशीजी खेले खाए फ़कीर थे , ना जाने कितनी लड़कियों के साथ गुलछर्रे उड़ा चुके थे , इसलिए ऐसी तरकीब भिडाई कि वह नाराज भी नहीं हुई और वे अपने काम में लगे रहे . छमिया का बदन थर –थर कांपने लगा, जिस्म के रौंगटे खड़े हो गए, वह अपने आपको आसमान में उड़ता महसूस कर रही थी, उसका विरोध काफी कमजोर पड़ चूका था. सारा जोश ना जाने क्यों नशे में बदलता जा रहा था. उसको मुंशीजी कि आवाज सुनाई दी-
-जी करता है कि तुम इसी तरह हमेशा मेरे साथ रहो और मैं तुम्हें अपनी आगोश में भींच लूं, मेरा दिल इस वक्त मेरे कब्जे में नहीं है, मगर तुम फ़िक्र मत करना, मैं अपना वादा नहीं तोडूंगा. वही करूँगा जो तुमसे कह चुका हूँ, वचन की मर्यादा समझता हूँ, हांलाकि यह मेरा प्यार है , इसमें कहीं कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन फिर भी अब मैं यहाँ से आगे बढ़ने से डरता हूँ.
छमिया- झूठे कहीं के , सब कुछ करते हो और मुकर भी जाते हो, वो भी तुरंत. पहले कहा था कि हाथ नहीं लगाएंगे , और अब छोड़ने का नाम भी नहीं ले रहे हैं.
मुंशीजी- क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा, सच –सच बताओ क्या तुम्हारी इच्छा नहीं हो रही ?
छमिया- कैसी इच्छा ?साफ़-साग कहो मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँ.
मुंशीजी- अच्छा जी... मुझे नहीं लगता तुम इतनी नादाँ हो, अपने दिल में झांककर देखो. जवाब मिल जाएगा, तुम्हारी आँखों से भी प्यास साफ़-साफ़ झलकने लगी है.
छमिया- बिलकुल नहीं, यह डर और घबराहट कि वजह से ऐसा हो रहा है।
मुंशीजी ने मौका देखकर चौका मारना उचित समझा , जब जान लिया कि छमिया बातों में उलझ गयी है तो अपना हाथ उसके यौवन द्वार कि तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया.
मुंशीजी- झूठ, सफ़ेद झूठ. मैं नहीं मानता. डर नाम की अगर कोई चीज होती तो तुम अब तक कई बार टोक चुकी होती, तुम जानती हो कि यहाँ पर कोई नहीं आएगा. यह भी सच है कि जब तुम्हारी और मेरी मर्जी है तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.अगर तुमने मेरा साथ देने का वादा किया तो मैं सबसे लड़ सकता हूँ, तोड़े में ही इतना जानलो कि तूम्हें पाने के लिए मैं कुछ भी खो सकता हूँ.
छमिया- झूठ, फिर झूठ. जब सबको पता चलेगा कि मुंशीजी ने छमिया को अपनी रखैल बना लिया है तो तुम्हारे भाई की पत्नी ही तुमको बराबर कर देगी, फिर उसके साथ मौज कर पाओगे ?
मुंशीजी- जब तुम मिल गयीं तो सारी दुनिया मिल गयी मुझे फिर कोई हसरत नहीं रह जायेगी
जब हमारे होठों से होठ मिलेंगे , सीना से सीना मिलेगा और हम दोनों एक दुसरे में समा जायेंगे तब पता चलेगा कि असली सुख क्या होता है, तब जानोगी कि स्वर्ग किसको कहते हैं ?तुम्हारे मन के तार झन्ना जायेंगे , दिल बाग-बाग हो जाएगा . जिस तरह वीणा के तार झंकृत होने से मन प्रफुल्लित हो जाता है, उसी तरह की अनुभूति होगी .
छमिया- वाह, जब पहले ही इतना सुखद अनुभव हो रहा है तो आगे क्या होगा , मैं कल्पना कर सकती हूँ लेकिन अपने आपको समर्पित कब करूंगी मैं तुम्हें बता ही चुकी हूँ.
मुंशीजी- मुझे भी कहाँ इनकार है ? मैं तैयार हूँ और उसी दिशा में काम कर रहा हूँ. मगर तुम तो जैसे पत्थर की बनी हुई हो, टस से मस होने का नाम ही नहीं ले रही हो. फिर भी मेरी कोशिशे जारी हैं, और कोशिश हमेशा कामयाब होती है, बस मलाल इस बात का है कि मैं जो मेहनत कर रहा हूँ इससे आनंद तो हम दोनों उठाएंगे मगर परेशान मैं अकेला हो रहा हूँ.
छमिया- अकेले कैसे कह सकते हो, मैं भी यहाँ पर तुम्हारे साथ हूँ, और अब तो तुमने मुझे अपनी बांहों में भी कैद कर लिया है. पहले कहते थे कि दूर से ही बात करेंगे .
मुंशीजी ने छमिया के गदराए हुए बदन को आहिस्ता-आहिस्ता दबाना शुरू कर दिया, उनका हाथ छमिया की उन्नत गोलाइयों तक पहुच गया था, कई बार छमिया ने उनका हाथ वहाँ से हटाने की कोशिश भी की मगर सफलता नहीं मिल पायी. मुंशीजी खेले खाए फ़कीर थे , ना जाने कितनी लड़कियों के साथ गुलछर्रे उड़ा चुके थे , इसलिए ऐसी तरकीब भिडाई कि वह नाराज भी नहीं हुई और वे अपने काम में लगे रहे . छमिया का बदन थर –थर कांपने लगा, जिस्म के रौंगटे खड़े हो गए, वह अपने आपको आसमान में उड़ता महसूस कर रही थी, उसका विरोध काफी कमजोर पड़ चूका था. सारा जोश ना जाने क्यों नशे में बदलता जा रहा था. उसको मुंशीजी कि आवाज सुनाई दी-
-जी करता है कि तुम इसी तरह हमेशा मेरे साथ रहो और मैं तुम्हें अपनी आगोश में भींच लूं, मेरा दिल इस वक्त मेरे कब्जे में नहीं है, मगर तुम फ़िक्र मत करना, मैं अपना वादा नहीं तोडूंगा. वही करूँगा जो तुमसे कह चुका हूँ, वचन की मर्यादा समझता हूँ, हांलाकि यह मेरा प्यार है , इसमें कहीं कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन फिर भी अब मैं यहाँ से आगे बढ़ने से डरता हूँ.
छमिया- झूठे कहीं के , सब कुछ करते हो और मुकर भी जाते हो, वो भी तुरंत. पहले कहा था कि हाथ नहीं लगाएंगे , और अब छोड़ने का नाम भी नहीं ले रहे हैं.
मुंशीजी- क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा, सच –सच बताओ क्या तुम्हारी इच्छा नहीं हो रही ?
छमिया- कैसी इच्छा ?साफ़-साग कहो मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँ.
मुंशीजी- अच्छा जी... मुझे नहीं लगता तुम इतनी नादाँ हो, अपने दिल में झांककर देखो. जवाब मिल जाएगा, तुम्हारी आँखों से भी प्यास साफ़-साफ़ झलकने लगी है.
छमिया- बिलकुल नहीं, यह डर और घबराहट कि वजह से ऐसा हो रहा है।
मुंशीजी ने मौका देखकर चौका मारना उचित समझा , जब जान लिया कि छमिया बातों में उलझ गयी है तो अपना हाथ उसके यौवन द्वार कि तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया.
मुंशीजी- झूठ, सफ़ेद झूठ. मैं नहीं मानता. डर नाम की अगर कोई चीज होती तो तुम अब तक कई बार टोक चुकी होती, तुम जानती हो कि यहाँ पर कोई नहीं आएगा. यह भी सच है कि जब तुम्हारी और मेरी मर्जी है तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.अगर तुमने मेरा साथ देने का वादा किया तो मैं सबसे लड़ सकता हूँ, तोड़े में ही इतना जानलो कि तूम्हें पाने के लिए मैं कुछ भी खो सकता हूँ.
छमिया- झूठ, फिर झूठ. जब सबको पता चलेगा कि मुंशीजी ने छमिया को अपनी रखैल बना लिया है तो तुम्हारे भाई की पत्नी ही तुमको बराबर कर देगी, फिर उसके साथ मौज कर पाओगे ?
मुंशीजी- जब तुम मिल गयीं तो सारी दुनिया मिल गयी मुझे फिर कोई हसरत नहीं रह जायेगी
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