राज की तड़प सुनकर स्वीटी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी, यही द्रश्य तो वह चाहती थी, उसका मकसद यही तो था. वह राज को खून के आनसो रोते देखना चाहती थी, अपने मकसद में वह काफे हद तक कामयाब भी हो रही थी, मानव स्वभाव ऐसा ही होता है, जब प्यार करते हैं तो बहुत प्यार करते हैं और नफरत की तो हद पार कर देते हैं, बेचारा राज तो ऐसे भंवर में उलझा था की उसे कुछ भी समझ में नहीं आता था, वह यही सोचता की आखिर उससे भूल कहाँ हुई, पहले तो स्वीटी इसलिए नाराज होती थी की वह सेक्स के प्रति उदासीनता बरतता था और वही स्वीटी अब इसलिए नाराज होने का दावा कर रही थी उसने जिस्मानी सम्बन्ध क्यों बनाए , मगर उसकी क्या गलती थी, उससे तो स्वीटी ने ही ऐसा करने के लिए कहा था, फिर के व्यवहार में अचानक बदलाव क्यों आ गया ? आखिर ऐसी क्या परेशानी थी जो बातचीत से हल नहीं हो सकती. क्या स्वीटी का स्वभाव ही ऐसा है , और अगर यही सच है तो क्या ऐसी लड़की के साथ सारा जीवन बिताया जा सकता है . क्या ऐसी लड़की को अपना जीवन साथी बनाया जा सकता है ? अब वह कुछ अलग अत्रीके से सोचने लगा और स्वीटी अपने चेहरे पर उदासी का नकाब ओढकर बैठी रही . राज ने उसे आख़िरी बार समझाने की कोशिश की, उसके करीब गया, और कंधी पर सर रखकर बोला-
- क्या तुम एक बार , सिर्फ एक बार मुझे माफ नहीं कर सकतीं ?
स्वीटी- तुम तो कहते हो की मैंने कोई गलती ही नहीं की है, तो फिर गलती किस बात की ? माफी तो मुझे मांगनी चाहिए.
राज- तुम माफी क्यों मांगोगी ? मैं हूँ ना ... मैं कर लूँगा ये सब. बस एक बार मुझे माफ करदो. सिर्फ एक बार , फिर मैं तुम्हें जीवन भर प्यार कर लूँगा, तुम्हारे क़दमों में हर खुशी डालूँगा , हर सुख दूँगा. कोई भी तकलीफ नहीं होने दूँगा. मेरा दावा है.
स्वीटी- मैं तुम्हारे व्यवहार से दुखी हूँ, मुझे एकांत चाहिए प्लीज.
राज की समझ में नहीं आरहा था की वह क्या करे , दिल जोर-जोर से धड़कने लगा ,. उसको अनहोनी की आशंका सताने लगी, सोचने लगा की अब वह ऐसा क्या करे की जिससे स्वीटी अपने पुराने रंग ढंग में लौट आये
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