मोहब्बत , भाग-७१
जो मर्द होते हैं वे तो कभी भी ऐसी घटिया बात नहीं सोचते . और जो कायर होते हैं उसकी विचारधारा ही नेगेटिव होती है.
राज-समझ गया जैसे की आपकी होती है. जैसे आप बोल रही हैं. पहले कहती थीं की सेक्स का मतलब प्यार होता है और अब यह सिद्ध करने पर तुली हुई हो की सेक्स का अर्थ बलात्कार होता है . मैं भी कितना नादाँ हूँ, जो अगली ही मुलाक़ात में तुम पर अपनी जान छिडकने लगा, तुम्हें अपना सब कुछ समझ बैठा. और तुम भी तो कहती थीं की मेरे बिना जी नहीं पाओगी, तुम्हारा तो बयान था की मुझे पूजने की हद तक चाहती हो, अगर इसमें ज़रा भी सच्चाई है तो फिर अब तुम्हारे बयान इतनी तेजी से कैसे बदल रहे हैं, क्या कारण है की मेरी किसी भी बात पर तुमको यकीन नहीं हो रहा, तुम्हारा तो दावा था की दुनिया जितनी मोहब्बत तुम मुझसे करती हो उतनी किसी से भी नहीं करतीं यहाँ तक की किसी देवता से भी नहीं.
स्वीटी- जी हाँ, ये सच था, मगर तुमने क्या किया ? क्या मेरे उस भरोसे की ज़रा भी इज्ज्जत की ? क्या मुझे इस काबिल समझा की मैं हमेशा उस प्यार और आदर को बरकरार रख सकूं. ?
राज- ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा ? ऐसा क्या हो गया की जो व्यक्ति कुछ क्षण पहले देवता था वह अगले ही क्षणों में शैतान बन गया. ऐसा कर दिया ?
स्वीटी- यही तो दुःख की बात है की इतनी बड़ी बात तुम्हें कुछ नहीं लग रही है.
राज- जब मैं इसकी गंभीरता तुम्हें बता रहा था तब मानी थी तुमने मेरी बात ?तब तो परिहाषा ही बदल डाली थी और अब कहती हो की आसमान टूट गया है, की जमीन फट गयी है, जाओ , मुझे फांसी पर चढ वादों . करादो मेरी एफ आई आर , वरना मैं खुद पुलिस स्टेशन चला जाऊँगा. करदो अपने आपको पुलिस के हवाले. चिंता मत करो , मैं तुम्हारा नाम नहीं बताऊंगा. तुम्हें बदनाम करने का मुझे कोई शौक नहीं है. मैं खुद इस गुनाह की सजा भुगातुन्गा .
स्वीटी- मैं कुछ नहीं जानती, सिवाय इसके की तब मैं नादाँ थी और ...
राज- और अब पी एच डी करली है तुमने ? यही न ? अब तुम शेक्सपियर की भी उस्ताद हो गयी हो. मुझे दोबारा तलब हो गयी है, प्यार करना है तो बोलो या फिर घर चलते हैं. तुमने मेरे मुंह को खून लगा दिया है, मुझे जन्नत का दरवाजा दिखाकर हमेशा के लिए दरवाजे बंद कर रही हो, मेरे मासूम दिल को ऐसे ना तोडो प्लीज. मुझे अपनी बांहों की कैद में रखलो, मुझे अपनी स्याह जुल्फों की छाँव में बुलालो . सजा ही देना चाहती हो तो कुछ इस तरह की दो, जिससे लगे की मैंने प्यार की खातिर ही कुछ खोया , मगर यह क्या तुम तो जा रही हो....
स्वीटी- जी हाँ, मैं जा रही हूँ, तुम यहाँ बैठकर भजन कीर्तन करो. बाजार से चाहो तो किसी पेशेवर लड़की को बुला सकते हो, उसके साथ बैठकर इस तरह का प्यार कर सकते हो, किसीको कोई ऐतराज नहीं होगा , ना ही मुझे और ना ही उस बाजारू लड़की को. अगर कोई खानदानी लड़की होगी तो वह तो अपने मान , सम्मान , स्वाभिमान और इज्जत के लिए लड़ेगी ही.
अगर तुम्हारी इज्जत पर कोई तकलीफ आती है तो तुमसे पहले मैं खुद अपनी जान पर खेल जाऊँगा, मैंने तुम्हारा कहना मानकर ही तुम्हारे साथ प्रणय क्रेडा आनंद उठाया है औअर अगर तुम कहो की मैं आग के दरिया में कूद जाऊं तो वो भी करुंगे. मेरी तरफ से हर ओप्शन खुला है, इक बस तुम्हारे आदेश का इन्तजार है