Thursday, January 7, 2010

मोहब्बत , भाग-७१

जो मर्द होते हैं वे तो कभी भी ऐसी घटिया बात नहीं सोचते . और जो कायर होते हैं उसकी विचारधारा ही नेगेटिव होती है.

राज-समझ गया जैसे की आपकी होती है. जैसे आप बोल रही हैं. पहले कहती थीं की सेक्स का मतलब प्यार होता है और अब यह सिद्ध करने पर तुली हुई हो की सेक्स का अर्थ बलात्कार होता है . मैं भी कितना नादाँ हूँ, जो अगली ही मुलाक़ात में तुम पर अपनी जान छिडकने लगा, तुम्हें अपना सब कुछ समझ बैठा. और तुम भी तो कहती थीं की मेरे बिना जी नहीं पाओगी, तुम्हारा तो बयान था की मुझे पूजने की हद तक चाहती हो, अगर इसमें ज़रा भी सच्चाई है तो फिर अब तुम्हारे बयान इतनी तेजी से कैसे बदल रहे हैं, क्या कारण है की मेरी किसी भी बात पर तुमको यकीन नहीं हो रहा, तुम्हारा तो दावा था की दुनिया जितनी मोहब्बत तुम मुझसे करती हो उतनी किसी से भी नहीं करतीं यहाँ तक की किसी देवता से भी नहीं.

स्वीटी- जी हाँ, ये सच था, मगर तुमने क्या किया ? क्या मेरे उस भरोसे की ज़रा भी इज्ज्जत की ? क्या मुझे इस काबिल समझा की मैं हमेशा उस प्यार और आदर को बरकरार रख सकूं. ?

राज- ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा ? ऐसा क्या हो गया की जो व्यक्ति कुछ क्षण पहले देवता था वह अगले ही क्षणों में शैतान बन गया. ऐसा कर दिया ?

स्वीटी- यही तो दुःख की बात है की इतनी बड़ी बात तुम्हें कुछ नहीं लग रही है.

राज- जब मैं इसकी गंभीरता तुम्हें बता रहा था तब मानी थी तुमने मेरी बात ?तब तो परिहाषा ही बदल डाली थी और अब कहती हो की आसमान टूट गया है, की जमीन फट गयी है, जाओ , मुझे फांसी पर चढ वादों . करादो मेरी एफ आई आर , वरना मैं खुद पुलिस स्टेशन चला जाऊँगा. करदो अपने आपको पुलिस के हवाले. चिंता मत करो , मैं तुम्हारा नाम नहीं बताऊंगा. तुम्हें बदनाम करने का मुझे कोई शौक नहीं है. मैं खुद इस गुनाह की सजा भुगातुन्गा .

स्वीटी- मैं कुछ नहीं जानती, सिवाय इसके की तब मैं नादाँ थी और ...

राज- और अब पी एच डी करली है तुमने ? यही न ? अब तुम शेक्सपियर की भी उस्ताद हो गयी हो. मुझे दोबारा तलब हो गयी है, प्यार करना है तो बोलो या फिर घर चलते हैं. तुमने मेरे मुंह को खून लगा दिया है, मुझे जन्नत का दरवाजा दिखाकर हमेशा के लिए दरवाजे बंद कर रही हो, मेरे मासूम दिल को ऐसे ना तोडो प्लीज. मुझे अपनी बांहों की कैद में रखलो, मुझे अपनी स्याह जुल्फों की छाँव में बुलालो . सजा ही देना चाहती हो तो कुछ इस तरह की दो, जिससे लगे की मैंने प्यार की खातिर ही कुछ खोया , मगर यह क्या तुम तो जा रही हो....

स्वीटी- जी हाँ, मैं जा रही हूँ, तुम यहाँ बैठकर भजन कीर्तन करो. बाजार से चाहो तो किसी पेशेवर लड़की को बुला सकते हो, उसके साथ बैठकर इस तरह का प्यार कर सकते हो, किसीको कोई ऐतराज नहीं होगा , ना ही मुझे और ना ही उस बाजारू लड़की को. अगर कोई खानदानी लड़की होगी तो वह तो अपने मान , सम्मान , स्वाभिमान और इज्जत के लिए लड़ेगी ही.

अगर तुम्हारी इज्जत पर कोई तकलीफ आती है तो तुमसे पहले मैं खुद अपनी जान पर खेल जाऊँगा, मैंने तुम्हारा कहना मानकर ही तुम्हारे साथ प्रणय क्रेडा आनंद उठाया है औअर अगर तुम कहो की मैं आग के दरिया में कूद जाऊं तो वो भी करुंगे. मेरी तरफ से हर ओप्शन खुला है, इक बस तुम्हारे आदेश का इन्तजार है

Wednesday, January 6, 2010

मोहब्बत , भाग-७०

राज- और मैंने यही तो किया, फिर जो कुछ हुआ सो हुआ , मैं क्या कर सकता हूँ, मजा तुमने भी तो लिया.सच कहूँ तो तुमने मुझसे भी ज्यादा आनंद लिया है, भूल गयी उन क्षणों को जब तुमने मुझे कसकर पकड़ लिया था और मेरे इस संवेदनशील अंग पर तुमने मालकिन की तरह कब्जा जमा लिया था.

स्वीटी- नहीं, यह झूठ है, मैं इसे देखते ही डर गयी थी, पसीने- पसीने हो गयी थी. मैंने साफ़ इनकार भी क्र दिया था लेकिन तुम नहीं माने , तुम जोर जबरदस्ती करने लगे थे. अगर मैं कोई सख्त कदम उठाती तो भी तुम मानने वाले नहीं थे. मैंने महसूस किया की तुम्हारी आँखों में खून उतर आया था. मैं अगर ज्यादा इनकार करती तो संभव है तुम मेरी जान ही ले लेते .

राज- तुम्हारी तबियत तो ठीक है, मैं अपनी जान की जान लूँगा. अरे अगर राह में कोई चींटी भी घायल हो जाए तो मैं अपने सीने में दर्द महसूस करता हूँ.अगर रास्ते में कोई पक्षी भी परेशान दिखा तो मैं उसको अस्पताल तक पहुचाता हूँ, इसके बावजूद तुम कहती हो की मैं तुम्हारी जान ले लेता. यह हास्यास्पद मगर मुझे तकलीफ पहुचाने की बात है .

राज अपने दिल को मसल रहा था और स्वीटी मन ही मन खुश हो रही थी. राज की तकलीफ उसको खुशी प्रदान कर रही थी. किसी अजीब दुनिया है ये, यहाँ पर लोग अपनी खुशी से कम खुश होते हैं और दूसरों के दुःख से ज्यादा खुश होते हैं. यह आम बातें हैं जो संभवतह हर जगह, हर शहर और हर देश में मिल जायेंगी. राज अपने आपको ही कोस रहा था, काश, वह सपना के साथ ही नहीं आता तो पार्टी में उसकी मुलाक़ात स्वीटी से भी नहीं होती और स्वीटी के साथ उसकी इतनी नजदीकियां भी नहीं बढ़तीं, ना ही अब उसे इस स्थिति का सामना करना पड़ता. वह उस मन्हूश घड़ी को कोसने लगा जब उसने शराब को हाथ लगाया और फिर उसीके चक्कर में वह स्वीटी के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध बना बैठा, अब उसे समझ आया की वह जो भी अपने बुजुर्गों से सुना करता था वे सब बातें ठीक थीं. वह स्वीटी के असली रंग को पहचान ही नहीं पाया था. और अब जाना भी तो बहुत देर हो चुकी है. राज ने कुछ सोच समझकर कहा-

-अब जो हुआ सो हुआ उसे तो वापस लाया नहीं जा सकता मगर तुम जो भी बोलो मैं करने के लिए तैयार हूँ. तुम कहो तो पैर पकड़ कर माफी मांग लूं. तुम कहो तो मैं शादी करने के लिए तैयार हूँ, इसके लिए मुझे कोई जल्दबाजी भी नहीं है, जब चाहोगी हम कर लेंगे. कोई और विकल्प हो तो वो भी कहो .

स्वीटी- एक बार क़त्ल करके सोरी बोलने से कुछ नहीं होता. जो इज्जत एक बार चली गयी वह तो वापस नहीं आती.

राज- इज्जत की बात तब आती है जब कोई जबरदस्ती करता है, धोखे से करता है, या बहला फुसलाकर करता हिया. तुम्हारे और हमारा मामला अलग है. यहाँ जो कुछ भी हुआ वह आपसी सहमति के बाद हुआ , तो इसको प्यार कहते हैं, इश्क कहते हैं. मैं पहले भी तुम्हारे बेहद इज्जत करता था और अब भी बहुत इज्जत करता हूँ, तुमसे प्यार करता हूँ मैं.

स्वीटी - कहना आसान और करना बहुत नुश्किल होता है, अब मैं अपने घर किस मुंह से जाऊं , कैसे नजर मिलाऊँ लोगों से, औरत के पास और होता है क्या है, मैंने इस उम्र तक इस कुमारी को बचाकर रखा था और तुमने सब तहस-नहस कर दिया. बर्बाद कर डाला मुझे . लूट ली मेरी इज्जत.

राज- तो फिर एक ही रास्ता बचता है , मेरा गला दबा दो , उतार दो मौत के घात. मैं कुछ नहीं कहूँगा. तुम्हारी खातिर मैं ऐसा करने के लिए भी तैयार हूँ. कहो तो मैं खुद ही जहर खाकर जान दे दूं, मगर तुम खुश रहो.

स्वीटी- जान देने की बात तो कायर करते हैं. मर्द नहीं.






Tuesday, January 5, 2010

मोहब्बत , भाग-६९
जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल आप कर रही थीं , उससे तो ऐसा लगता था जैसे की तुम खुद मुझसे बलात्कार करने वाली हो. तुम मुझे आमंत्रित कर रही थीं, प्यार और सेक्स के गुण सिखा रही थीं, अगर मेरी जगह पर कोई और होता तो जो काम अब हुआ है, वह तो बहुत पहले ही हो चुका होता. तुम्हें ध्यान है तुम मुझसे कह रही थीं-
प्यार का इजहार-ओ-इकरार और फिर रोजाना की मुलाकातें, एक-दूसरे को जानने-समझने की कोशिश, कभी रूठना, कभी मनाना और भी न जाने क्या-क्या...! लेकिन इसी राह में कुछ अनकही बातें ऐसी भी होती हैं, जो बार-बार दिल में कसक पैदा करती हैं। दिल कहता है बस उनके साथ, उनके हाथों में हाथ लेकर, उनकी आँखों में आँखें डालकर देखते रहें और समझते रहें अनकहे शब्दों की जबाँ।
राज- याद आये न , यही शब्द थे न ?
स्वीटी- तुम बोलते रहो , मैं याद करने की कोशिश करती हूँ.
राज- ठीक है . तुमने आगे कहा था-

सिर्फ उनके पास बैठने और निगाहों की जबाँ समझने तक ही आपका दिल नहीं रुकता। जैसे-जैसे प्यार परवान चढ़ने लगता है आपकी अभिलाषाएँ प्रबल होने लगती हैं। अब आप सिर्फ निगाहों में ही बातें नहीं करते आपके दिल में उठ रही लहर आपको इससे आगे बढ़ने के लिए उत्तेजित करती है। अब आप उन्हें अपनी बाँहों में भर लेना चाहते हैं, उन्हें चूमना चाहते हैं। लक्या आप ठीक से चुंबन लेना जानते हैं?
चुंबन लेना भी एक कला है और यदि आप इस कला में माहिर हैं तो इससे न सिर्फ आप संतुष्ट होंगे बल्कि आपके पार्टनर को भी अच्छा लगेगा।

अच्छा तो अब जरा आपको बता दें कि ये कला कैसे सीखी जाए लेकिन इसे सीखने के पहले एक बात का जरूर ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार की जबर्दस्ती आपके प्यार में दरार डाल सकती है। अपनी उत्तेजना को काबू में रखें और प्रेम की मर्यादा बनाए रखें अन्यथा बाद में पछताने के सिवा कुछ नहीं रह जाएगा..
जब आप उनके साथ किसी रोमांटिक सी जगह पर बैठे हैं और आपका दिल बार-बार उन्हें चूमने के लिए कह रहा है लेकिन आप शायद इसलिए हिचक महसूस कर रहे हैं कि कहीं वो आपको गलत न समझ लें।

ना-ना इसमें इतना हिचकने वाली बात नहीं है। हो सकता है शायद उनके मन में भी यही हो बस इसे मुकम्मल स्वरूप देने की जरूरत है। क्या करें इसके लिए? उन्हें अपने करीब लाएँ और उनके कंधे या कमर में हाथ डालकर बैठे रहें। कुछ देर इस स्थिति में बैठे रहने के बाद उनका चेहरा अपने हाथों में लेकर उन्हें लगातार देखते रहें। आपकी ये क्रिया निश्चित ही प्रतिक्रिया के रूप में सामने आएगी। यानी कि उनकी भावनाएँ भी उभरकर सामने आने लगेंगी। अब फिर होना क्या है? वैसे भी जब आप इतने रोमांटिक तरीके से बैठे हैं तो चुंबन तो स्वाभाविक है।

जब आप उन्हें चूम रहे हैं तो आपके होंठों की क्या स्थिति हो, अब जरा इस पर बात कर ली जाए। उनके होंठों पर चुंबन लेते समय आप दोनों के होंठ कुछ इस तरह से हों जैसे कि चित्र में बताए गए हैं तो आप इसे अच्छे से अंजाम दे पाएँगे। यानी आपका ऊपरी होंठ उनके ऊपरी होंठ के ऊपर हो और निचला उनके निचले होंठ के अंदर। हाँ थोड़ा इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके सिर विपरीत दिशाओं में थोड़े झुके हों और आपकी नाक एक-दूसरे से नहीं टकराए।

अपने होंठों को बिलकुल वैसी ही गति दें जैसे आप किसी च्यूइंगम को चबा रहे हों या फिर किसी गोली को चूस रहे हों। अं.... वैसे ये कोई बताने वाली बात नहीं है क्योंकि ये अपने आप ही हो जाएगा।

कुछ और रोमांटिक बनाने के लिए उन्हें अपने से थोड़ा दूर करें और फिर करीब खींचकर चूमें। अपनी जीभ उनके होंठों पर फिराएँ। उनके गालों पर, ठोढ़ी पर और गर्दन पर चुंबन लें। ये कुछ ऐसे करें कि आपकी भावनाएँ स्पष्टतः परिलक्षित हों। और हाँ इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आपकी भावनाएँ पवित्र हों, किसी प्रकार का गलत विचार आपके मन में न हो। यदि ऐसा हुआ तो यह आपके चेहरे पर साफ तौर से झलकेगा और ये बात आपका साथी जरूर समझ जाएगा

Sunday, January 3, 2010

मोहब्बत , भाग-६७
ताकि फिर कोई इच्छा , फिर कोई आरजू, फिर कोई उमंग बाकी न रहे, आ जाओ इन बांहों में, समा जाओ इन बांहों में , चखलो जवानी का असली आनंद , अगर एक बार रस को लूट लोगी तो फिर कोई तकलीफ नहीं हो पाएगी. मैं अपनी हसरत पूरी कर लेना चाहता हूँ, और तुमसे भी कहता हूँ की डर के आगे जीत है, इस डर को अपने दिलो दिमाग से निकाल फेंको , फिर देखो कहीं कोई मुश्किल नहीं होगी, कहीं कोई रुकावट नहीं होगी, अच्छा या बुरा सब कुछ हमारी फीलिंग्स के ऊपर निर्भर करता है. अगर हम खुले आसमान के नीचे भी संतुष्ट हैं तो वे सुकून भरी नींद सो सकते हैं. मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है लोगों को जमीन पर सोते हुए, उन्हें कोई तकलीफ नहीं होती, उन्हें कोई गम नहीं होता, वे आराम से खाते हैं, खुश होते हैं और किसीसे कोई शिकवा नहीं करते, वे संतुष्ट हैं तो इसीलिए सुखी भी हैं. इसके अलावा वे लोग भी हैं जो बहुत कुछ मिल जाने पर भी सब कुछ पाने की लालसा करते हैं और हमेशा दुखी रहते हैं,
स्वीटी- प्लीज, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो.
राज- इस जवानी का अचार डालोगी क्या ? जब तक है , तब तक इसका इस्तेमाल करो वरना ढल जाने पर कोई नहीं पूछेगा , यह मेरा डायलोग नहीं है बल्कि मैंने इसको एक फिल्म से याद किया है, मगर सटीक है , सही सिच्युएशन पर मारा है .
स्वीटी खामोश हो गयी, राज का हौसला हर पल बढ़ता ही जा रहा था, वह चाहकर भी असली मंजिल तक नहीं पहुच पा रहा था, वह चाहता था की पहले की तरह स्वीटी ही पहल करे और स्वीटी चाहती थी की यहाँ तक पहुचने में उसने बहुत पहल करली यहाँ से आगे अब राज ही पहल करे. आखिरकार राज को अपनी मर्दानगी का लाभ उठाना पड़ा , उसने नग्न स्वीटी के घुटनों को एक तरफ मोड दिया और उस पर हावो होना शुरू कर दिया, यह बहुत सुनहरे पल थे. दोनों के जिस्म काम्ज्वाला की आग में झुलस रहे थे. दोनों के होठ भी एक दुसरे के होठों से सटे हुए थे और फिर स्वीटी और राज उस हसीं गुनाह की तरफ बढ़ने लगे जिसके लिए वे लोग बहुत देर से तरस रहे थे. उन दोनों की साँसें फूल रही थीं. काम्ज्वाला ने उनको अपने आगोश में ले लिया. कुछ देर के बाद ही उनकी कामाग्नि शांत हो गयी. स्वीटी खूब चीखी चिल्लाई मगर थोड़ी देर के बाद उसे सब कुछ अच्छा लगने लगा था, वह राज का खुलकर साथ देने लगी थी. जब गर्मी पिघल गयी तो दोनों शांत हो गयीं, तो बदन ढीले होने लगे. सारी नैतिकता , सारी सज्जनता धरी की धरी रह गयी. राज कितना समझदार बनता था, होशियार बनता था. वह संस्कृति और सभ्यता का प्रहरी बनता था मगर जवानी के जोश के आगे वह भी नतमस्तक हो गया. झुक गया और काम वासना का गुलाम होकर वही भूल कर बैठा, जिसे अक्सर लोग जवानी में कर बैठते हैं. स्वीटी भी योग्य थी, विद्वान थी, बुद्धिमान थी मगर राज को बर्बाद करने के चक्कर में वह खुद ही बर्बाद हो गयी. यही होता है , जब हम किसी दूसरे को गिराना चाहते हैं तो उस चक्कर में पहले हम खुद ही गिर जाते हैं. यह जवानी की कहानी होती ही दीवानी है, यहाँ पर कदम बहुत संभाल-संभालकर रखने पड़ते हैं. और जब हम मुड़कर देखते हैं तो पता चलता है की कहीं न कहीं फिसल ही जाते हैं, ये है इस जवानी की रवानी का दस्तूर. जब जोश होता है तो कोई होश नहीं रहता और जैसे ही जोश ठंडा होता है तो सब हिसाब-किताब लगने शुरू हो जाते हैं. अच्छे –बुरे का ध्यान आने लगता है .
स्वीटी और राज के साथ भी तो यही हुआ, जब तक जवानी का खुमार था वे कामरथ पर सवार होकर आगे बढते गए , और जब बिलकुल करीब आकर एक दूसरे में समा गए, दो जिस्म एक जान बन गए तो ध्यान आया की उन्होंने कितनी बड़ी हद पार करदी है. जब तूफ़ान आकार गुजर गया तो स्वीटी बोली-
-यह क्या हो गया , हम लोग ये क्या कर बैठे ? आह. अब क्या होगा राज ?
राज- कुछ नहीं होगा, जो होना था सो हो गया... कोई चोरी तो नहीं की, किसीका डाका तो नहीं डाला. यह प्यार है , हम लोगों ने प्यार किया है, तुम्हीं ने तो कहा था की हम लोग बालिग़ हैं , और अगर अपनी इच्छा से एक दूसरे के जिस्म से कुछ सुख लेते हैं तो इसमें बुरा भी क्या है ?हम लोगों ने पूरे होशो हवास में ये क्षण शेयर किये हैं.
स्वीटी – लेकिन समाज तो इसे गलत मानता है न. शायद इसीलिए दिल में कुछ गलत हो रहा है. लगता है जैसे कुछ ठीक नहीं किया .

Saturday, January 2, 2010

मोहब्बत , भाग-६६
स्वीटी- मैं तो अब भी हंसकर ही तुम्हारे पास आयी थी लेकिन इस काले नाग को देखकर डर गयी हूँ, जान है तो जहां है वरना कुछ नहीं है. मुझे तो जान की पडी है.
राज- थोड़ी देर पहले तो बहुत बहादुर बनी फिरती थीं, कहती थीं की सारी दुनिया से टकरा जाओगी और अब देखते ही तुम्हारे पसीने छूट रहे हैं. मरने का डर दिखाने लगी हो. इसीके दम पर दुनिया से टकराने और उसे जीतने निकली थीं.
राज- तुम मुझे बहका रहे हो , मारना चाहते हो मुझे . मैं तुम्हारी बातों आने वाली नहीं हूँ, अगर जान बचेगी तो इश्क मोहब्बत की बातें होंगी , मुझे कायर कहलवाना पसंद है लेकिन मृत कहलवाना पसंद नहीं है. मुझे तो अब जाना है अपने घर . चलो हम लोग मूव करते हैं, प्लीज ... चलो ना ऐसे क्यों देखते हो मुझे ? मैं कह रही हूँ. चलो.,.
राज की आँखों में लाल डोरे तैर रहे थे, वासना की तेज आंधी ने उसको अपने आगओश में ले रखा था, वह इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था, स्वीटी की बातें उस पर ज़रा भी प्रभाव नहीं दाल पाईं, उसने स्वीटी को कसकर पकड़ लिया और उस पर हावी होने की कोशिश करने लगा, वह स्वीटी के यौवन उभारों को आहिस्ता-आहिस्ता दबा रहा था, साथ ही एक हाथ से उसके यौवन द्वार पर भी दस्तक दे रहा था, उसे मालूम था की आज नहीं तो कभी नहीं,. कुछ दिन पहले भी उसके साथ यही तो हुआ था. पहले तो स्वीटी ने कामुक बातों से उसको कामोत्तेजित कर दिया, जब वह पूरी तरह गर्म हो गया तो उसे ध्जक्का दे दिया, राज आज बेवकूफ बन्ना नहीं चाहता था. आज उसने पक्का निर्णय कर लिया की चाहे जो हो जाए आज वह अपनी और स्वीटी की प्यास बुक्झाकर ही रहेगा, इसीलिए उसने स्वीटी पर चौतरफा हमले करने शुरू दियी, ताकि वार खाली न चला जाए. स्वीटी के होठों से होठ सताकत वह उसकी जीभ का रसपान करने लगा. उसका सख्त अंग स्वीटी के बदन से स्पर्श कर हंगामा मचा रहा था.स्वीटी अंदर से टूटने लगी, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की आखिर क्या करे, एक तरफ तो राज का सानिध्य पाने की बेचैनी थी और दूसरी तरफ एक अनजानी दहशत , की कहीं कुछ हो गया तो क्या होगा,. स्वीटी कोरी , करारी और कुंवारी लड़की थी, भले ही वह विचारों से मॉडर्न थी, उसके कई दोस्त भी थे मगर वह चरित्रहीन नहीं थी, उसने पहले कभी किसी लड़के के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाए थे. वह बिलकुल अनछुई थी. उसने अपने आपको अभी तक ज़माने की रफ़्तार से सुरक्षित रखा था. राज ने जबसे उसके नग्न बदन को देखा तपो पगला गया था, वह स्वीटी के प्रत्येक अंग को चूम रहा था, स्वीटी की साँसें जोर –जोर से चल रही थीं, उनके बीच एक अजीब सी खामोशी चाई थी, बहुत देर के बाद राज ने खामोशी तोड़ते हुए कहा-
- वाह , मजा आ गया, तुम देखना तुम्हें ज़रा भी दुःख नहीं होगा, ज़रा भी तकलीफ नहीं होगी, सब कुछ ठीक हो जाएगा. तुम्हारी हर समस्या का समाधान हो जाएगा. बेवजह डरने से क्या फायदा है, आखिरकार एक न एक दिन तो ये सब करना ही होगा, अभी से सीख लोगी तो आगे के लिए अच्छा रहेगा वरना सुहागरात के दिन बहुत पछताओगी .
स्वीटी- तुम मेरी मजबूरी नहीं समझ रहे हो. मैं तुम्हारा यह हथियार देखकर बहुत दहशत में हूँ. वरना तो मैं खुद तुम्हारा साथ पाने के लिए तरस रही थी.
राज- इससे क्या डरना पगली , यह तो सिर्फ दिखावा है,जब सही वक्त आएगा तो इसका आकार अपने आप कम हो जाएगा. तुम्हें नहीं मालूम ?
स्वीटी- नहीं, मैंने पहले कभी नहीं सुना, ना कभी देखा . तुम वो पहले मर्द हो जिसके साथ मैं नग्न होकर प्रेमालाप कर रही हूँ.
राज- और मैं ? मैं क्या कृष्ण कन्हिया लगता हूँ, तुम वो पहली लड़की हो जो मेरियो जिंदगी में आई हो वरना तो मैं कभी क्सिसी लड़की के साथ दोस्ती करने से भी कतराता था, लेकिन तुम मेरी जिंदगी में आयीं तो ऐसी आयीं की मेरे विचार ही बदल गए, मेरा नजरिया ही बदल गया. सब कुछ नया –नया हो रहा है मेरी लाइफ में , तो फिर क्यों न एक यह काम भी नया हो जाए.
स्वीटी- मुझे कुछ अनजानी सी दहशत हो रही है,
राज – यह दहशत नहीं वहां है तुम्हारा. आ जाओ मेरी बांहों में, दूर क्यों हटाती हो, आ जाओ और मुझे अपने दिल के अरमान पूरे कर लेने दो, डूब जाने दो मुझे इस इश्क की गहराई में. डूब जाओ इस मस्ती के समुन्दर में.

Friday, January 1, 2010

मोहब्बत , भाग-६५
स्वीटी- हाँ मेरे राज, मैं खुद भी तो चाहती हूँ, मेरे तन –मन में जो आग लगी है, वह कम नहीं है. उसको बुझाना मैं भी चाहती हूँ.
राज- जब हम दोनों के तपते हुए जिस्म एक दुसरे से मिलेंगे तभी यह आग कम हो सकती है, लेकिन बुझ तो कभी नहीं पाएगी क्योंकि
यह ऐसी आग होती है, जिसे जितना बुझाओ उतनी ही भडकती है.
स्वीटी- बाद में भले ही भडकती रहे ,फिलवक्त तो तसल्ली हो जानी चाहिए, यहाँ तो एक पल के लिए भी चैन नहीं है.
राज- एक पैग मार लो कलेजे पर थोड़ी सी ठंडक पड़ जायेगी, भले ही ज्यादा नहीं पियेंगे मगर थोड़ी बहुत से तो कोई फर्क नहीं पड़ता. चलो चीयर्स करते हैं.
स्वीटी मुस्कराने लगी, शुरू हो गया पीने का दौर. पैग तैयार किये थे स्वीटी ने,राज खुश था. पहला जाम खत्म होते ही उन दोनों पर सुरूर छाने लगा. स्वीटी के बदन में जो आग लगी थी , वह जोरों से भडकने लगी. स्वीटी ने कातिल अंगड़ाई लेते हुए कहा-
-आह ... खूब आनंद आ रहा है, साथ ही बेचनी सी बढती जा रही है .
राज- मेरा तो इससे भी बुरा हाल है, अब हम दोनों ही इस रोग के शिकार हो चुके हैं.
स्वीटी ने राज का जवाब देने के बजाय अपनी बाँहें फैलादी, राज ने उसको अपनी तरफ खींच लिया, अब राज की आखों में लाल-लाल डोरे तैरने लगे. स्वीटी की मादक जवानी के सिवाय उसे कुछ नहीं सूझ रहा था, उसने स्वीटी को अपनी मजबूत बाहों के घेरे में कैद कर लिया और उसके होठों पर अपने होठ रख दिए, होठों की गर्मी से उन दोनों के अंदर ज्वालामुखी सा भडकने लगा. यह बहुत अलग अनुभव था. राज तो अपनी सुध बुध खो बैठा, उसके होठ काँप रहे थे, समूचा बदन भी थरथरा रहा था.
उसने स्वीटी के कपडे उतारने शुरू कर दिए. थोड़ी देर में स्वीटी बिलकुल निर्वस्त्र हो चुकी थी, राज ने जब उसके अंतिम वस्त्र को उतारना चाहा तो वह श्रम के मारे लाल हो गयी, मदर राज कहाँ मानने वाला था, वह तो काम वासना की भट्टी में पूरी तरह से खुल रहा था, अब राज कोई भी मौक़ा गंवाना नहीं चाहता था तभी तो उसने स्वीटी का वह आख़िरी कपड़ा भी उतार दिया था, अब वह एक हाथ सीने से लगाकर और दुसरे हाथ से अपने यौवन को छिपाकर खड़ी थी, मन में उमंग और तरंग के साथ एक अनजाना भय भी सता रहा था, मजाक- मजाक में ही वह इस हद तक जा पहुची थी. उसे परेशानी होने लगी , राज ने उस पर बाज की तरह झपटा मारा और उसे दबोच लिया, अब स्वीटी भी खुलने लगी, वह जान गयी की इस तरह छुई-मुई बन्ने से काम नहीं चलने वाला. राज खूब आक्रामक हो रहा था.स्वीटी ने भी उसका अनुसरण करना चाहा, उसने राज के बदन से कपडा हटाने शुरू कर दिए , थोड़ी देर के बाद वे दोनों एक जैसे हो चुके था. राज उसकी गोलाइयों को सहला रहा था, कभी- कभी उन्हें चूम लिया करता था, राज का स्पर्श पाकर स्वीटी सिहर उठाती थी, उस पर मदहोशी छाने लगती थी. राज का एक हाथ स्वीटी के यौवन की तरफ बढ़ रहा था, और जब उसने अपनी उंगली की कलाकारी दिखाई तो स्वीटी की चीख ही निकल गयी, राज ने उसके होठों से अपने होठ सटाकर कहा-
-ये क्या कर रही हो, इतने जोर से चीखोगी तो यहाँ पर तामाश्बीनों का मेला लग जाएगा, ये तो कुछ भी नहीं है, जब पूरा सुख लोगी तब क्या करोगी ?
स्वीटी- प्लीज राज, मुझे दर लगता है, मैं इससे आगे कुछ नहीं करुँगी. मुझे जाने दीजिए राज- उस दिन भी तुमने ऐसे समय पआर ही इनकार किया था , आज फिर कर रही हो, यह अच्छी बात नहीं है. भूखे आदमी के सामने पहले खाने की थाली रखो और फिर जब वह खाने के लिए तैयार हो और पहला टुकड़ा ही तोड़े और तुम उसके सामने से भोजन की थाली हटालो तो कैसा लगेगा ? बहुत बुरा न, मुझे भी इतना ही बुरा लग रहा है.मैं खुद भी तुम्हारा साथ देना चाहती हूँ मगर मेरे हालात को समझो , मैं परेशान हूँ, मेरी मजबूर भी तो जानलो. मुझे लगता है जैसे मेरा दम निकल जाएगा, मैंने कभी ऐसा किया नहीं न.
राज- और मैं कौन सा रोज-रोज करता हूँ , मुझे खुद भी तो पूर्व अनुभव नहीं है. मगर इतना जानता हूँ की तुम्हें तभी तक दर लग रहा है जब तक की हम एक नहीं हो जाते , एकाकार होते ही सब ठीक हो जाएगा. फिर तो खुद हंसकर आया करोगी मेरी पास.

Thursday, December 31, 2009

मोहब्बत , भाग-६४
राज- मैं सबकी बात नहीं कर रहा हूँ मेरी जान, मैं सिर्फ एक बहुप्रचलित बात कह रहा हूँ. उदाहरण में वही बातें दोहराई जाती हैं जो की ज्यादातर लोग कहते हैं, उनमे से बहुत कुछ गलत भी हो सकती है, बिलकुल संभव है. एक ही तरह के लोग हर जगह पर नहीं रहते. सबमे भिन्नता रहती है.
स्वीटी- हाँ , छोडिये न दुनिया और दुनिआदारी को, हमने क्या करना है, हमें तो बस अपने मोहब्बत से मतलब है, खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों.
राज- तुम बहुत अच्छी हो , और दूसरी तमाम लड़कियों जैसी नहीं , जो इतनी सी बात का ही बतंगड बना डालते हैं, हम दोनों की जोड़ी खूब जमेगी.
स्वीटी- तुम खुद एक अच्छे इंसान हो . तुमने मुझे प्यार का जो अनमोल तौहफा दिया है मैं इसको सदैव अपने दिल और आत्मा में बसाकर रखूंगी, मुझे तुमसे मोहब्बत है और तुम भी मुझे उतनी ही गंभीरता से चाहते हो, इससे बढ़कर मेरी लाइफ में और कोई अच्छी बात हो ही नहीं सकती.
राज- मैं किन शब्दों से तुम्हारा शुक्रिया अदा करून, तुमने जिस तरह से मुझे मोहब्बत के बदले मोहब्बत दी है , मैं उससे अभिभूत हूँ.
स्वीटी- राज, बहुत कम लोग होते हैं जिनको अपना प्यार मिल पाता है वरना तो आजकल वफ़ा के बदले बेवफाई मिलने का चलन ज्यादा
हो गया है. मैं खुशनसीब हूँ की मुझे इश्क के बदले इश्क और वफ़ा के बदले वफ़ा मिली है. तुम्हारे इस प्यार को ना जाने मैं कैसे संभाल पाउंगी ? डरती हूँ की कहीं मेरी वजह से तुम्हें कभी कोई तकलीफ ना हो.
राज- ये ऐसी शंका या आशंकाओं का वक्त नहीं है, यह समय है मोहब्बत का, इस अकेलेपन का फायदा उठाना चाहिए, फिर ना जाने तुम्हें कभी इतना समय मिल पायेगा की नहीं? और अगर मिला भी तो इतने अच्छे हालत रहेंगे भी की नहीं ? और अगर सब कुछ ठीक भी रहा तो ये जवानी भी उस वक्त रहेगी की नहीं ?
स्वीटी- अब तुम भी अशुभ-अशुभ बातें मत करो. मुझे अच्छा नहीं लगता , मेरा कलेजा बैठने लगता है.
राज- मेरे रहते हुए भी डरती हो, क्या कमाल करती हो मेरी जान. ऐसे कमाल काटती रहोगी तो फिर क्या दिक्कत रह पाएगी
स्वीट समझ गयी की राज रोमांटिक हो रहा है, तो उसने गर्म लोहे पर हथौड़ा मारना शुरू कर दिया. उसने राज के होठों पर एक चुम्बन क्या लिया , राज के जिस्म में आग भडकने लगी, वह बेबस नजर आने लगा था मगर जब स्वीटी ने उसको सिग्नल दिया तो राज का दिल खुल गया, उसने स्वीटी के सीने के उभारों को सहलाना शुरू कर दिया. स्वीटी ने तडपते हुए कहा-
-आह... क्या इरादा है, क्या जान लेना चाहते हो . इतने जोर से दवाब डालोगे तो घर जाने के बजाय अस्पताल जाना पड़ सकता है.
राज- चिंता ना करो मेरी जान. ऐसा कुछ नहीं होगा. तुम्हें इतना सुख दूँगा की जीवन के सभी दुःख भूल जाओगी, इतना आनंद दूँगा की जिंदगी के सभी अवसाद भूल जाओगी.
स्वीटी- तुम्हारा स्पर्श पाकर ही मैं दुनिया की सभी सुख सुविधाएँ पा चुकी हूँ.
राज- सच... कितनी अच्छी हो तुम. कितनी सुन्दर और कितनी समझदार ...
स्वीटी ने महसूस किया की जैसे राज उस के मादक यौवन का दीवाना बन चुका था, वह उसकी मद मस्त जवानी का रस चखने के लिए बेताब था, कामवासना के कारण उसका बदन तप रहा था.उसका अनुमान सच भी था, राज का संवेदनशील अंग अब काले नाग की तरह दहाड़ मारने के लिए तैयार था. उस पर हाथ फिराते ही स्वीटी के मन में लड्डू फूटने लगे, यह मानव मन का स्वभाव होता है की जो चीज उसने नहीं देखी उसे देखने के लिए वह बहुत बेचैन रहता है, स्वीटी और राज का भी यही हाल था. वे दोनों एक दूओसरे के बदन से खेलने के लिए बेचैन हो रहे थे. राज ने आहिस्ता से खा-
- मन इस समय मजबूर हूँ, मुझे किसी तरह समझाइये या फिर इस बेचैनी को रोकने में मेरी मदद कीजिये , या फिर ...
स्वीटी –तो फिर क्या ?
राज- मेरी प्यास बुझा दीजिए.