उसकी समझ में नहीं आ रहा था की अब वह क्या करे, क्या ना करे... कौन सी बात पर यकीं करे ? उसको अपनी आंखों के देखे पर विश्वाश नहीं हो रहा था, उसने किसी गैर मर्द के साथ फरहा का नग्न बदन देखा था, उसकी आवाज भी सुनी थी, और जो बातें सुनी थीं वे भी उसीसे मुताल्लिक हो रही थीं, इसके बावजूद वह कह रही रथी की उसकी सिस्टर आई हुई है और फ़िर कुछ देर के बाद उसकी सिस्टर भी सलीम के घर आ गयी, वह हूँ बहू फरहा जैसी ही थी... उसको देखकर सलीम भी धोखा खा फ्गया, अगर इस समय फरहा साथ नहीं होती तो वह धोखा खा जाता... और कुछ देर में ही वह सलीम से ऐसे घुल मिल गयी जैसे उसको बरसों से जानती हो... वह पढ़ रही थी... सलीम खुश हो गया, संदेह के बादल कुछ हद तक छांटने लगे थे... सलीम के मन में फी भी इस बात की कसक तो थी ही की फरहा की बहन किसी और मर्द के साथ सम्बन्ध बना रही थी... वह फरहा की बहन सबा से इस विषय में बात करना चाहता था मगर फ़िर यह सोचकर खामोश रह गया की वह इस सवाल से नाराज भी हो सकती है...वह भी गजब की सुंदर थी लेकिन फरहा से ज्यादा नहीं, फरहा तो अपने आप में बम का गोला थी... एक बहुत बड़ी टॉप थी, देखते ही उसको दीवाना हो गया था सलीम... सलीम ही क्यों उसको जो भी देखता उसका होकर रह जाता था... सलीम ने अपने दिल से पुरानी बीवी का नाम हटाकर फरहा का नाम इसीलिए तो लिख दिया था... सबा पूछने लगी-
- ऐसे क्या देख रहे हैं मास्टर साहब ... दीदी बुरा मान जायंगी...
फरहा - मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता सबा... सलीम पर मुझे पूरा भरोसा है, मेरे सिवाय ये किसीको ज्यादा तवज्जो नहीं दे सकते , और अगर देंगे भी तो कोई बात नहीं... क्योंकि अगर कोई मुझसे भी हसीं होगी उसी पर इनका दिल आ सकता है ? अगर ऐसा हुआ , उससे इन्हें खुशी हुई तो अच्छी बात है... ऐसा होना चाहिए... इनको भी हसीनों का साथ पाने का पूरा अधिकार है, आख़िर ये भी तो उतने ही सुंदर हैं...
सलीम- रहने भी दीजिये, मैं इस तारीफ के काबिल कहाँ ? फरहा को देखने से ही जी नहीं भरता है , फ़िर और किसीको कैसे देख पाउँगा... उसके लिए टाइम भी तो होना चाहिए...
सबा- आपसे तो क्या कहूं , दीदी से शर्त लगा सकती हूँ... अगर मास्टर जी को अपनी अदाओं का दीवाना ना बना दिया तो सबा नाम नहीं... बोलो लगी शर्त....
फरहा- ठीक है.... दस -दस हजार की ... एक हफ्ते का समय है... अगर तुम सलीम के दिल में अपने लिए जगह बना पायीं तो मैं तुमको अपनी उस्ताद मान लुंगी... नकद रुपये दूंगी... ठीक है ?
सबा- चलो, डन... मुझे मंजूर है... अब तुम जानो तुम्हारा काम जाने... ठीक है सलीम, यह खुला चेलेंज है... हमारे बीच क्या शर्त लगी है , यह सब जानते हैं... अब खेल शुरू होता है...
सलीम- मुझे इस चक्की के पाटों के बीच में क्यों पीसती हो , मैं चलता हूँ... तुम लोग बैठकर बातें करो...
फरहा- अब आप कहाँ चले जनाब,, आजकल घर पर रहते ही नहीं हैं.... जब देखो , तब गायब रहते हैं... मोबाइल बी एंड रहता है... दो-दो मोबाइल लेकर भी कोई फायदा नहीं है... एक ही मोबाइल में दो कार्ड डलवा रखे हैं हैं, अगर किसी कारण से पीस बंद हुआ तो दोनों सिम कार्ड काम करना बंद कर देते हैं...
सलीम- मुझे पीने की तलब लगी है, इसलिए मैं होटल जाने की तैयारी कर रहा हूँ... काफी थका हुआ हूँ...
सबा- तो हम भी चलें आपके साथ... हम भी बीअर पी सकते हैं... आपको साथ मिल जाएगा... क्यों फरहा दीदी ?
फरहा- हाँ ठीक रहेगा ... मागत फ़िर होटल जाने की क्या जरूरत है, यहीं पर मंगवा लीजिये...
सलीम- मैंने अपना सामान तो मंगवा लिया है... तुम लोगों के लिए ऑर्डर दे देता हूँ... ज्यादा समय नहीं लगेगा ...
१० मिनिट में लड़का आ जाएगा... अभी कहे देता हूँ... कौन सा ब्रांड चाहिए ?
फरहा- अपनी मनपसंद कोई भी बीअर बोल दीजिये ...
सलीम ने फ़ौरन ऑर्डर दे दिया, वह खुश भी था और थोड़ा सा नर्वस भी... सलीम यह सोच-सोचकर परेशान था की फरहा की छोटी बहन भी ड्रिंक करती है... इतनी एडवांस लड़की उसने पहले कभी नहीं देखी थी,,, सलीम ने फिश , चिकिन के अलावा काजू भी मांगा लिए थे...वेटर लेकर भी जल्दी आ गया, इसके बाद उनकी पार्टी शुरू हुई... दो पैग के बाद सलीम की जुबान bahakne लगी... वह फरहा के साथ-
साथ
अब सबा का हुस्न की तारीफ़ भी कर रहा था, उसके यौवन के कसीदे गढ़ रहा था, दो -दो हसीनों के साथ शराब पीने का आनंद ही अलग होता है... शराब के साथ शबाब का मिलन बेहद रोमांचकारी होता है... फरहा कह रही थी-
- आपकी नीयत तो ठीक है ना मास्टर जी... ऐसा तो नहीं की मेरी चिकनी कमर देखकर निह्गाहें फिसल रही हों...
सलीम- माफ़ करना मगर इससे भी ज्यादा चिकनी कमर तो फरहा की ही है...
सबा- इसका मतलब, पहले ही सब कुछ देख =परख चुके हो...
फरहा- ये तुम्हारे होने वाले जीजू हैं सबा...
सबा- अच्छा, तबतो साली आधी घरवाली होती है...