Monday, September 14, 2009

वीर सिंह


वीर सिंह जी

दिलफेंक पडोसन, भाग-51

सलीम की इस सच्ची मगर भोली बात ने सबा को खूब हंसाया ... वह खुश होकर सलीम से लिपटने की कोशिश करने लगी... उसके दिल में इस समय लड्डू फूट रहे थे, लेकिन फरहा ने उसको टोक दिया... वह कह रही थी-
- ये ठीक नहीं है... तुम दूर-दूर से ही अपने हुस्न के जलवे दिखा सकती हो... मैं लिपटने की इजाजत नहीं दूंगी...
सबा- अब यह जानने के बाद बी ही की ये मेरे होने वाले जीजू हैं, मुझसे तुम ऐसी उम्मीद कैसे रख सकती हो ?
फरहा- हाँ, हाँ, मैं भूल गयी थी... सलीम के मन में तो अब लड्डू फूटने लगे होंगे... देखो जीभ लार दाल रही है...
सलीम- वो तो स्वाभाविक ही है... मैं जवान हूँ... तुम दोनों खूबसूरत हो... तुम्हारे इतने करीब आने पर प्यार का महसूस होना बहुत जरूरी है... अगर ऐसा नहीं हुआ तो तुम्ही मेरी मर्दानगी पर शक करने लगोगी ...
फरहा ने उसके कंधे पर अपना सर रख दिया... सलीम उसके बालों में कंघी करने लगा ... सबा पैग तैयार कर रही थी... वे तीनों इस वक्त पर पलंग पर बैठे हुए थे... सबा ने पैग देकर फ़िल्म देखने की इच्छा व्यक्त की... सलीम के होठों पर रहस्यमयी मुस्कान उभर आयी... उसने एक सीडी की तरफ़ इशारा कर दिया... जब सबा ने उस सीडी को चलाया तो गजब हो गया... उन तीनों के दिलो दिमाग में आग लगने लगी... बेहद भयंकर द्रश्य थे... एक हिन्दुस्तानी मर्द दो -दो विदेशी महिलाओं को संतुष्ट कर रहा था... यह फ़िल्म इतनी कामुक थी की सबा ने जोरदार आह भरनी शुरू करदी , वह अपने ही हाथों अपनी गोलाइयों को दबाने के लिए मजबूर हो गयी... वह बोली-
- आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले ... अब समझ में आया जीजू की जवानी और जिंदादिली का राज ...
फरहा- यह तो कुछ भी नहीं है मेरी जान ... अभी तो महज शुरुआत है, आगे -आगे देखती जाओ अपने जीजू को... इन्हें कम मत समझो ... ये माने हुए कामगुरु हैं... अगर इनके साथ कुछ दिनों तक रहोगी तो तुम्हारी समझ में बहुत कुछ आ जाएगा... रंगीले रतन हैं तेरे जीजू...
सबा- अच्छा जी... बहुत कुछ अनुभव हो गया है आपको.... बहुत याराना लगता है...
फरहा- तुमसे क्या छिपाना है , जब इनके साथ पूरा जीवन बिताना है... अगर मैं तुमसे कुछ छिपाउन्गी तो बुरा लगेगा तुमको... यह ठीक नहीं रहेगा... जाओ अब ... एक सिगरेट तो सुलगाओ... मूड चेंज करते हैं... अगर तुमको फ़िल्म पसंद नहीं है तो दूसरी सीडी चला देते हैं...मुझे लगता है की तुम्हें जोश नहीं आ रहा है ...
सलीम- तुम किस तरह की फ़िल्म पसंद करती हो ? मुझे लगता है इस तरह की फ़िल्म तुम्हारे लिए नई नहीं है ?
सबा- ठीक समझा आपने ... इंटरनेट पर मैं इससे भी अच्छी- अच्छी फ़िल्म देखती रहती हूँ... आजकल यूं ट्यूब पर सभी तरह की फिल्में मौजूद हैं... कहीं ढूँढने की जरूरत भी नहीं पड़ती ... मगर बीअर पीने के बाद मैंने कभी अश्लील फ़िल्म नहीं देखि... वो भी दो बीअर ख़त्म होने को हैं... मन बहक सा रहा है...
सलीम- मैं हूँ ना.... तुम्हें फ़िक्र करने की जरूरत नहीं है... फरहा भी हेल्प करेगी तुम्हें....
फरहा- हाँ, टेंशन क्यों लेती है... जी भरके मस्ते कर... ये जिन्दगी बार- बार नहीं आती... जिन्दगी अगर मिल भी गयी तो ये कमबख्त जवानी तो एक ही बार आती है ना...
सबा- मुझे डर इस बात का है की मैं बहक गयी तो क्या होगा ? मन में हलचल सी हो रही है...
फरहा- तो क्या हुआ ? तेरे जीजू हैं न... ये किस दिन काम आयेंगे... तुझे मजा चाहिए ना मिल जायेगा...
सलीम - ये क्या कह रही हो फरहा... ये तुम्हारी बहन है... अगर इसको कोई कष्ट आया तो मदद कौन करेगा ?
सलीम- लेकिन सबा सोचेगी की मैं अच्छा आदमी नहीं हूँ... मुझसे नाराज हो जायेगी...
फरहा- तो मना लेना... क्या फर्क पड़ता है... अगर यह नाराज होती है तो प्यार से इसे खुश नहीं कर सकते...
सलीम- मुझे इस उलझन में दाल रही हो... कहीं ऐसा तो नहीं मेरी परिक्षा लेने के लिए ये सब कहा जा रहा है ?
सबा- तुम भी ना जीजू , कभी-कभी बहुत बोर करते हो... चलो बहुत हो गया अब मैं तुम्हें पीने नहीं दूंगी... तुम्हारी जुबान भी लड़खडाने लगी है और दिमाग भी हिल गया है... मैं जानती हूँ सब... ताकत नहीं सहने की...
सलीम सिर्फ़ मुस्करा कर रह गया... उसे मालूम था की कुछ अनिष्ट होने वाला है... ठीक तभी फरहा वहाँ से बाथरूम में खिसक गयी... अब वहाँ पर सबा और सलीम ही रह गए थे... सबा उसकी तरफ़ ऐसे देख रही थी जैसे वह उसे खा जायेगी... सलीम ने बेझिझक सबा को अपनी बांहों में कैद कर लिया... अब वह प्यार के आगोश में खोने की तैयारी करने लगे...

Sunday, September 13, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-50

फ़िर मैं अपने जीजू को सस्ते में कैसे छोड़ सकती हूँ ? लाओ , अब मैं अपने हाथों से इनको मदिरापान कराउंगी, मुझे पहले से पता होता तो मैं अब तक खूब मजाक करती , साथ में मौज मस्ती भी...
फरहा- देर आए दुरुस्त आए, अब बता दिया है तो अब सही... मुझे लगता है तुम्हें और बीअर की जरूरत पड़ेगी...
सबा- हाँ, मगर जीजू तो कंजूसी दिखा रहे हैं, ऐसे ऑर्डर दे रहे है९न जैसे दवा का ऑर्डर दे रहे हों...
सलीम- मान गए साली जी, हाजिरजवाबी में आपका कोई जवाब नहीं है, मैं अभी मंगवा देता हूँ... फ़िर जितनी चाहे पीना... आज देखते हैं कौन कितना पीताहै... लेकिन कोई पीने के बाद नाटक नहीं करेगा... कहते हैं ना की बाद अच्छा बदनाम बुरा होता है... कहीं ऐसा ना हो की पीने के बाद तुम यहाँ पर हंगामा करो और बदनामी हो जाए...
फरहा- तुम दरो मत... ऐसा कुछ नहीं होगा, मेरी जिम्मेदारी है... कितना भी पीने के बाद होश में रहना भी एक कला है , जिसे हम भली भाँती जानते हैं... समझे........आज का समय पहले वाला नहीं है, आजकल हमको एलर्ट रहना पड़ता है, लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर काम करना पड़ता है...
सलीम- हाँ, जरूरी है... तरक्की के लिए बराबरी जरूरी है, यही है आधुनिकता ... अच्छा है...
सबा- क्यों क्या हुआ ... जोर का झटका लगा क्या ? लडकियां जब आप जैसे मर्दों की बराबरी करें तो ऐसा ही होता है... हम इक्कीसवी सदी की महिलायें हैं, मर्दों से हर मामले में आगे रहने की तमन्ना है, पढाई हो या खेल कूद, पीना हो या खाना , प्यार हो या डिस्कोथेक ... सबमे आगे रहेंगे तभी जिन्दगी में तरक्की कर पायेंगे ...
सलीम सोच में पड़ गया... सबा और उसकी उम्र में काफी फासला था , अब पहली बार उसकी समझ में जनरेशन गेप का अर्थ आया... उसने होटल में बीअर का ऑर्डर दिया और सोचने लगा की तरक्की की चाह में युवा पीढी के लोग किस तरह शोर्ट कट का इस्तेमाल कर रहे हैं... वह पीने के बावजूद सब कुछ समझ रहा था... सबा ही ज्यादा बोल रही थी मगर फरहा जितना भी बोलती , वह सभालकर बोला करती थी... वह जानती थी की अगर जुबान फिसल गयी तो सलीम उसके बारे में कुछ अलग ही अनुमान लगा सकता है... जब होटल से उनका मंगाया सामान आ गया तो सबा ने अपने लिए तो पैग तैयार किए ही साथ ही फरहा और सलीम के लिए भी पैग बनाए ... सलीम जब शराब पीता था तो उसको सिगरेट की तलब लगती थी ,जब उसने सिगरेट के धुंए उडाने शुरू किए तो फरहा और सबा भी कैसे पीछे रहतीं , उन्होंने भी सलीम का जमकर साथ दिया, अगला पैग पटियाला था उसे पीते ही सलीम झूमने लगा, उसको सुरूर होने लगा था... मन के अन्दर तरंगें सी उठने लगीं... जब वे दोनों शराब का स्वाद ले रहे थे ठीक तभी फरहा के मोबाइल की घंटी बजी... व्यस्त का बहाना बनाकर फरहा ने फोन डिस्कनेक्ट करा दिया, अब के मन में यह बात घूमने लगी की कहीं यह फोन किसी ग्राहक का तो नहीं था... उसका जी चाहा की इस बारे में वह फरहा से पूछताछ करे लेकिन हिम्मत नहीं हुई... इसके अलावा वह मदहोश भी होने लगा था... फरहा और सबा के कपड़े अस्त -व्यस्त हो रहे थे... वे तीनों पलंग पर बैठकर मदिरापान कर रहे थे, पैग में पानी डालने के लिए जब सबा नीचे झुकती थी तो उसकी दोनों गोलाइयां आजाद होकर अठखेलियाँ करने लगती थीं... सलीम की निगाह जैसे ही उन पर पड़ती , वह उन्हें छूने , चूमने और मसलने के लिए बेताब हो जाता था... दिल में धमाके से होने लगे, एक तो शराब का बढ़ता असर और ऊपर से दो-दो नवयौवनाओं का साथ, वह बेहद कामुक होता जा रहा था... कामोत्तेजना का ज्वर इतना तेज था की अब सलीम ने कहना शुरू किया-
- आज तो खुदा खैर करे, तुम दो और मैं अकेला हूँ... ना जाने कैसे जीतूंगा... देखा जायेगा, मगर तुम लोग भी देखना , ऐसे माहौल में अक्सर कोई गलती हो जाती है... अगर मुझसे भी ऐसा ही कुछ हो जाए तो बुरा मत मानना...
सबा- अभी से डरने लग गए... ठीक भी है, डरना जरूरी है... आज तक जीतते आए हो तो अब हार भी गए तो क्या होगा ? कभी- कभी हारने की आदत भी लगनी चाहिए... आज हम दोनों बहने आपको हराकर ही दम लेंगी, और मैं अपनी बहन को हरा दूंगी... मेरी बहन मुझे अनजान समझती है, मैं आज तुम्हें पटाने वाली हूँ... अपना दिल संभाल कर रखना , मुझ पर आरोप है की मैं लोगों को पागल बना डालती हूँ...
सलीम- आज हम भी देखेंगे की क्या होता है ? जीत किसकी होगी और हार किसकी ? वैसे इतना तो मैं भी जान ही गया हूँ की जीत भले ही किसीको हो लेकिन हार मेरी ही होगी... मैं सरेंडर कर चुका हूँ...

Saturday, September 12, 2009

दिलफेंक पडोसन , भाग-49

उसकी समझ में नहीं आ रहा था की अब वह क्या करे, क्या ना करे... कौन सी बात पर यकीं करे ? उसको अपनी आंखों के देखे पर विश्वाश नहीं हो रहा था, उसने किसी गैर मर्द के साथ फरहा का नग्न बदन देखा था, उसकी आवाज भी सुनी थी, और जो बातें सुनी थीं वे भी उसीसे मुताल्लिक हो रही थीं, इसके बावजूद वह कह रही रथी की उसकी सिस्टर आई हुई है और फ़िर कुछ देर के बाद उसकी सिस्टर भी सलीम के घर आ गयी, वह हूँ बहू फरहा जैसी ही थी... उसको देखकर सलीम भी धोखा खा फ्गया, अगर इस समय फरहा साथ नहीं होती तो वह धोखा खा जाता... और कुछ देर में ही वह सलीम से ऐसे घुल मिल गयी जैसे उसको बरसों से जानती हो... वह पढ़ रही थी... सलीम खुश हो गया, संदेह के बादल कुछ हद तक छांटने लगे थे... सलीम के मन में फी भी इस बात की कसक तो थी ही की फरहा की बहन किसी और मर्द के साथ सम्बन्ध बना रही थी... वह फरहा की बहन सबा से इस विषय में बात करना चाहता था मगर फ़िर यह सोचकर खामोश रह गया की वह इस सवाल से नाराज भी हो सकती है...वह भी गजब की सुंदर थी लेकिन फरहा से ज्यादा नहीं, फरहा तो अपने आप में बम का गोला थी... एक बहुत बड़ी टॉप थी, देखते ही उसको दीवाना हो गया था सलीम... सलीम ही क्यों उसको जो भी देखता उसका होकर रह जाता था... सलीम ने अपने दिल से पुरानी बीवी का नाम हटाकर फरहा का नाम इसीलिए तो लिख दिया था... सबा पूछने लगी-
- ऐसे क्या देख रहे हैं मास्टर साहब ... दीदी बुरा मान जायंगी...
फरहा - मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता सबा... सलीम पर मुझे पूरा भरोसा है, मेरे सिवाय ये किसीको ज्यादा तवज्जो नहीं दे सकते , और अगर देंगे भी तो कोई बात नहीं... क्योंकि अगर कोई मुझसे भी हसीं होगी उसी पर इनका दिल आ सकता है ? अगर ऐसा हुआ , उससे इन्हें खुशी हुई तो अच्छी बात है... ऐसा होना चाहिए... इनको भी हसीनों का साथ पाने का पूरा अधिकार है, आख़िर ये भी तो उतने ही सुंदर हैं...
सलीम- रहने भी दीजिये, मैं इस तारीफ के काबिल कहाँ ? फरहा को देखने से ही जी नहीं भरता है , फ़िर और किसीको कैसे देख पाउँगा... उसके लिए टाइम भी तो होना चाहिए...
सबा- आपसे तो क्या कहूं , दीदी से शर्त लगा सकती हूँ... अगर मास्टर जी को अपनी अदाओं का दीवाना ना बना दिया तो सबा नाम नहीं... बोलो लगी शर्त....
फरहा- ठीक है.... दस -दस हजार की ... एक हफ्ते का समय है... अगर तुम सलीम के दिल में अपने लिए जगह बना पायीं तो मैं तुमको अपनी उस्ताद मान लुंगी... नकद रुपये दूंगी... ठीक है ?
सबा- चलो, डन... मुझे मंजूर है... अब तुम जानो तुम्हारा काम जाने... ठीक है सलीम, यह खुला चेलेंज है... हमारे बीच क्या शर्त लगी है , यह सब जानते हैं... अब खेल शुरू होता है...
सलीम- मुझे इस चक्की के पाटों के बीच में क्यों पीसती हो , मैं चलता हूँ... तुम लोग बैठकर बातें करो...
फरहा- अब आप कहाँ चले जनाब,, आजकल घर पर रहते ही नहीं हैं.... जब देखो , तब गायब रहते हैं... मोबाइल बी एंड रहता है... दो-दो मोबाइल लेकर भी कोई फायदा नहीं है... एक ही मोबाइल में दो कार्ड डलवा रखे हैं हैं, अगर किसी कारण से पीस बंद हुआ तो दोनों सिम कार्ड काम करना बंद कर देते हैं...
सलीम- मुझे पीने की तलब लगी है, इसलिए मैं होटल जाने की तैयारी कर रहा हूँ... काफी थका हुआ हूँ...
सबा- तो हम भी चलें आपके साथ... हम भी बीअर पी सकते हैं... आपको साथ मिल जाएगा... क्यों फरहा दीदी ?
फरहा- हाँ ठीक रहेगा ... मागत फ़िर होटल जाने की क्या जरूरत है, यहीं पर मंगवा लीजिये...
सलीम- मैंने अपना सामान तो मंगवा लिया है... तुम लोगों के लिए ऑर्डर दे देता हूँ... ज्यादा समय नहीं लगेगा ...
१० मिनिट में लड़का आ जाएगा... अभी कहे देता हूँ... कौन सा ब्रांड चाहिए ?
फरहा- अपनी मनपसंद कोई भी बीअर बोल दीजिये ...
सलीम ने फ़ौरन ऑर्डर दे दिया, वह खुश भी था और थोड़ा सा नर्वस भी... सलीम यह सोच-सोचकर परेशान था की फरहा की छोटी बहन भी ड्रिंक करती है... इतनी एडवांस लड़की उसने पहले कभी नहीं देखी थी,,, सलीम ने फिश , चिकिन के अलावा काजू भी मांगा लिए थे...वेटर लेकर भी जल्दी आ गया, इसके बाद उनकी पार्टी शुरू हुई... दो पैग के बाद सलीम की जुबान bahakne लगी... वह फरहा के साथ-साथ
अब सबा का हुस्न की तारीफ़ भी कर रहा था, उसके यौवन के कसीदे गढ़ रहा था, दो -दो हसीनों के साथ शराब पीने का आनंद ही अलग होता है... शराब के साथ शबाब का मिलन बेहद रोमांचकारी होता है... फरहा कह रही थी-
- आपकी नीयत तो ठीक है ना मास्टर जी... ऐसा तो नहीं की मेरी चिकनी कमर देखकर निह्गाहें फिसल रही हों...
सलीम- माफ़ करना मगर इससे भी ज्यादा चिकनी कमर तो फरहा की ही है...
सबा- इसका मतलब, पहले ही सब कुछ देख =परख चुके हो...
फरहा- ये तुम्हारे होने वाले जीजू हैं सबा...
सबा- अच्छा, तबतो साली आधी घरवाली होती है...

Friday, September 11, 2009

रविंदर द्विवेदी

दिलफेंक पडोसन, भाग -48

तुम्हारे अलावा कोई भी मुझे असली मजा नहीं दे पाता... पता नहीं क्या जादू है तुम्हारे पास... एक टीचर से मेरी नई -नई दोस्ती हुई है, जब वह मेरे साथ सोता है तो ऐसा लगता है जैसे कोई बच्चा सो रहा हो... मन मारकर रहना पड़ता है... मुझे तुम जैसे फौलाद बदन का इंसान ही सुख संतुष्टि प्रदान कर सकता है...
और इससे आगे के शब्द सुनना और उन्हें सहन करना सलीम के वश की बात नहीं थी... वह गैर मर्द के पहलू में आकर उसकी मर्दानगी को चुनौती दे रही थी... वह उस आदमी के बारे में सोचने लगा जो उसके साथ रंगरेलियां मना रहा था, कौन हो सकता है वो ? क्या वह उसका दोस्त था या ग्राहक या फ़िर कोई दलाल ? फरहा ने देखा होगा की जब मैं रात भी घर नहीं आया तो अब शायद नहीं आऊंगा , इसी कारण वह अपने यार के साथ मौज मस्ती लूट रही है ... उसने क्या कुछ नहीं किया था फरहा के साथ, उसे दौलत दी, प्यार दिया... उसका जीवन एक ही झटके में संवार दिया और फ़िर उसी फरहा ने उसको प्यार का ऐसा बदला दिया... उसके पाँव से जमीन खिसकने लगी... ऐसा महसूस होने लगा जैसे उसे सरे बाजार नग्न कर दिया गया हो... अब वह और जयादा देर तक नहीं ठहर सकता था, वह धीरे से खिसकने लगा, दरवाजा खोला और पहले की तरह बाहर से कुंडी लगादी... इसके बाद वह चोर कदम चलता हुआ अपने फ्लेट में आ गया... अब वह फरहा के घर से आने वाले या जाने वालों को अच्छी तरह से देख सकता था... उसकी साँस फूली हुई थी, मन के अन्दर तूफ़ान उठा हुआ था, ना चाहकर भी वह फरहा के साथ बिठाये पलों को याद करने लगा... उसने वैसे तो अपना दरवाजा बंद कर रखा था मगर निगाह की होल पर थी, उस होल से फरहा के दरवाजे पर अच्छी तरह निगाह रखी जा सकती थी... वह जानना चाहता था की आख़िर फरहा के साथ कौन सहवासरत है ? फरहा आख़िर किसको फौलाद समझती है ? वह इन्हीं विचारों में मगन था की उसे सामने वाला दरवाजा खुलता हुआ दिखाई दिया, सलीम के दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं... जी चाहा की सामने वाले को गोली मारदे भले ही फ़िर फांसी क्यों ना हो जाए, मगर वह तो टीचर था कभी किसीसे झगडा भी नहीं किया , किसीसे दुश्मनी भी नहीं की... हथियार का तो सवाल ही नहं उठता था... अगर लाइसेंसी हथियार भी होता तो वह आज उसका इस्तेमाल कर लेता... वह निचली मंजिल पर रहने वाला एक पुलिसकर्मी था जो फरहा के साथ हमबिस्तर था और सलीम ने उसे अपनी आंखों से देख लिया था, वह फरहा को तो पहचान गया था मगर मर्द को नहीं ... अब देखा तो उसकी हैरत का ठिकाना नहीं रहा... फरहा तो आस्तीन का सांप निकली... वह प्यार उससे करती थी और सम्बन्ध किसी और से भी बनाती थी, वह जिस घनिष्ठता के साथ उससे बात कर रही थी उससे लगता था मानो वे दोनों एक दूसरे को पहले से ही जानते थे और पहले से ही सम्बन्ध बनाते रहे होंगे....उसके जाने के बाद धडाम से दरवाजा बंद हो गया... वह गुस्से में आग बबूला हो रहा था... उसने पास के होटल से शराब की बोतल और चखने का ऑर्डर दे दिया... जब तक उसका ऑर्डर आया तब तक वह ककडी और गाजर काटने लगा... वेटर ने बेल बजाई तो वह दरवाजा खोलने लपका , ठीक तभी उसे फरहा बाहर से आती दिखाई दी... उसके बेल बजाने पर उसकी बहन ने दरवाजा खोला था... उसकी बहन भी हूबहू उसके जैसी थी, वह घर के अन्दर से निकल रही थी, सलीम परेशान हो गया, यह नजारा उसकी समझ से परे था... उसको अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा था... सलीम को दरवाजे पर देखकर फरहा भी उसीके फ्लेट में आ गयी और उससे लिपटकर बोली-
- थेंक्स गोड.... सब कुछ ठीक है न ? मैं तो डर ही गयी थी... मैंने सोचा था की कहीं कुछ अनहोनी ना हो गयी हो... इसीलिए मैंने तुम्हें हर जगह पर ढूढा ... मैं अभी तक घर में भी नहीं घुसी , पुलिस स्टेशन से ही चली आ रही हूँ, कुछ लोगों ने सलाह दी की भले ही लिखित शिकायत मत करो मगर मौखिक रूप से पुलिस को बताना जरूरी है...
सलीम- और यह तुम्हारे घर में कौन है ?
फरहा- मेरी बहन है... बिल्कुल मेरे जैसी है ना ... सब लोग इसे देखकर यही कहते हैं...
सलीम- ओह... क्या करती है तुम्हारी बहन ? पढ़ती होगी ?
फरहा- वो सब बातें बाद में होंगी, पहले तुम अपनी सुनाओ , अआखिर्कार क्या हो गया है तुम्हें ? क्यों ऐसे अचानक गायब हो जाते हो ? फोन भी नहीं करते , अपना मोबाइल भी बंद करके रखते हो... आख़िर दिक्कत क्या है ? कर्ज उतारने की बात तो मैं पहले ही कर चुकी हूँ, मैंने पापा से इस बारे में बात भी की है, पैसों का इंतजाम हो जाएगा...
सलीम उसकी तरफ ऐसे निहार रहा था जैसे दिन में तारे देख रहा हो...

Wednesday, September 9, 2009

सलीम- स्वीटी .... वाह ... वाह.... कितना प्यारा नाम है... अच्छा ये बताओ , तुम सेक्स क्यों करती हो ?महिलायें पुरुषों के साथ सेक्स

सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उनकी शादीशुदा जिंदगी में शांति बनी रहे , मुझसे

एक महिला ने तो यहां तक स्वीकार किया कि वह सेक्स सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उसके पति अपने स्पर्म बाहर निकाल सके...तुम अपने बारे में कहो...

ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , , जिसमें महिलाओं ने पुरुषों के साथ सोने के सैकड़ों कारण बताये...










एक महिला ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि उसे आध्यात्मिक अहसास हो सके...उसने दावा किया कि यह ( सेक्स ) ईश्वर को करीब से महसूस करने का जरिया है... लेकिन ज्यादातर महिलाओं ने सेक्स का जो विवरण दिया वह इससे कहीं ज्यादा दुनियावी था... 84 फीसदी महिलाओं ने माना कि वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि उनकी जिंदगी में शांति बनी रहे या उनकी घर - संसार की जरूरतें पूरी होती हैं...

एक महिला ने बताया - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि बोरियत दूर कर सके क्योंकि सेक्स करना लड़ने से कहीं आसान है... जबकि कुछ दूसरी महिलाओं के लिए यह माइग्रेन और सिरदर्द दूर भगाने का उपचार है...

स्वीटी- मेरी बातें छोडिये कुछ महिलाओं ने मुझसे ऐसी बातें भी कहीं जिन्हें सुनकर अजीब लग सकता है... एक महिला ने कहा कि मैं कई पुरुषों के साथ सिर्फ इसलिए सोई क्योंकि मुझे उन पर दया रही थी। वहीं , कुछ महिलाएं अपने स्वार्थ के लिए सेक्स का इस्तेमाल करती हैं जैसे रुपये - पैसों के लिए , और दूसरी कीमतों चीजों को हासिल करने के लिए वगेरह ...
सलीम- औरों की छोडो अपनी सुनाओ ...
स्वीटी- मेरी सहेलियों में से

करीब 10 महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने गिफ्ट्स लेने के कारण सेक्स किया... कुछ ने कहा - मैंने किसी पुरुष के साथ इसलिए संबंध बनाए क्योंकि उसने मेरे लिए एक शानदार डिनर का आयोजन किया या उसने मुझ पर काफी रुपये खर्च किए ....

10 में से 6 ने माना कि वह आमतौर पर ऐसे पुरुष के साथ सो चुकी हैं जो उनका बॉयफ्रेंड नहीं हैं... कुछ ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि अपनी सेक्सुअल परफॉर्मंस को इंप्रूव कर सकें यही बताते हुए एक स्टूडंट ने कहा - मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ इसलिए सेक्स किया ताकि मैं अपने सेक्सुअल स्किल्स को और बेहतर बना सकूं...

सलीम- क्या महिलाएं ऐसे पुरुषों पर ज्यादा आकर्षित होती हैं जो लंबे हों , जिनकी आवाज़ रौबदार हो और जिनके शरीर से मदहोश कर देने वाली महक आती हो ...?
स्वीटी- अपनी -अपनी पसंद होती हैं, तुम तो ज्यादा लंबे नहीं हो , मुझे फ़िर भी पसंद हो,
सलीम- तुम्हें कैसे लोग पसंद हैं? तुम नहीं बता रही हो...अपनी सेक्स इच्छा के बारे में भी नहीं बता पा रही हो...
स्वीटी- आपने मुझे सेक्स के लिए पैसे दिए हैं, जानकारी के लिए नहीं ... अगर इंटर व्यू लेना है तो उसकी फीस अलग से अदा करनी होगी...
सलीम- समझ गया मेरी जान... बोलो अपनी फीस ? मुझे कितने देने होंगे ?
स्वीटी- खुशी-खुशी कितने दे सकते हो ? ... अब धीरे -धीरे मेरी पसंद को समझ रहे होंगे,,, मुझे दौलत पसंद है , जो मेरी इस ख्वाहिश को पूरा करेगा , उसको मैं उसको खुशी-खुशी अपना बदन सौप दूंगी...
सलीम- चाहे वह कोई भी हो ?
स्वीटी- बेशक, वह कोई भी हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता है... जिस्म की भूख मिटाने के लिए हमें दूसरों के जिस्म की प्यास बुझानी पड़ती है... पहले तो यह ऐसे ही हुआ मगर अब इसको प्रोफेसनल तरीके से किया जा रहा है...
सलीम और स्वीटी इतनी कामोत्तेजक बातें कर रहे थे की उन दोनों का ही बेकाबू होना स्वभाविक ही था... सलीम अपने मन की हर हसरत पूरी कर लेना चाहता था, ऐसा कोई भी क्षण वह छोड़ना नहीं चाहता था जिससे की उसको आनंद की प्राप्ति होती हो... वह बेहद शालीन व्यक्ति था मगर फरहा के संपर्क में आकर कामुक हो गया , तरह -तरह के व्यसन का आदी हो गया... स्वीटी मर्दों की अदा को अच्छी तरह से जानती थी, वह उन्हें लुभाने और पैसे एंठने की कला में माहिर थी, मुस्कराके गला काटने में उससे बड़ा उस्ताद कोई नहीं था, वह एक नंबर की मीठी छुरी थी... हर विषय पर वह लम्बी से लम्बी बात कर सकती थी...