Tuesday, September 8, 2009

लेनोवो वारंतीं

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Monday, September 7, 2009

दिलफेंक , भाग-45

उस शाम सलीम और राजू ने खूब प्लान बनाया , मगर उनके किसी काम नहीं आया... उस दिन भी उन्हें जवाब मिला की 'आपकी पसंद किसी और ने पहले ही पसंद कर ली है...' यह वाक्य सुनकर उसके तन बदन में आग लग गयी ... उसने बार गर्ल को बहुत सा लालच दिया मगर उसने यह नहीं बताया की वह किसके साथ गयी थी और इस वक्त कहाँ होगी ? वह कुशल पेशेवर महिला थी... उसने फोन पर बात भी नहीं कराई और फोन नंबर भी नहीं दिया... आखिरकार उन दोनों की वह शाम भी बेमकसद हो गयी , पीने के बाद राजू चला गया और सलीम वहीं पर बैठा रहा ... उसने फ़िर से एक कली की डिमांड रखी ... बार गर्ल ने उसे कुछ फोटो दिखाए और अपने बार के ही लोज में मामला फिट कर दिया... वह लड़की भी क़यामत थी, उसके सामने माधुरी दीक्षित भी फेल नजर आ रही थी... सलीम ने उसके साथ भी जमकर शराब पी... वह भी पी रही थी, आनंद ले रही थी...सलीम उसे अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहा था...वह मस्ती में कह रही थी-
- क्या मार डालने का इरादा है ? बहुत चिपक रहे हो ...

सलीम -ये भी मजाक का ही हिस्सा है... भला मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ... अगर कर भी दिया तो कह नहीं सकता... बुरा मान जायेंगे न... लोगों ने बीमारी पाल रखी है बुरा मानने की... तुम भी इससे दूर नहीं...
अब तक उस के जिस्म में वासना का तूफ़ान उठ खडा हुआ था... वह बेहद बेचैनी महसूस करने लगी... जिसने उसे कभी देखा ही नहीं, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाया ही नहीं , वही उसीकी आंखों के सामने उस के साथ रोमांस कर रहा था... उसको लगा की सलीम को चिढाना चाहिए... यह सही अवसर था... उसने सलीम से कहा-
- अगर एक बार मेरे साथ रात बिता लोगे , तो जीवन भर के लिए बीवी को भूल जाओगे... आपके दोस्त तो होशो हवास भी खो चुके हैं...
सलीम - जब तुम्हें देखने भर से ही मेरा यह हाल है तो आगे क्या होगा, मैं इसकी कल्पना कर सकता हूँ... मुझे यह जानकर भी खुशी हुयी की तुम मेरे साथ हंसी-खुशी सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार हो...तुम्हें क्या पता दोस्त के बारे में ? ज्योतिषी हो क्या ?
लड़की - तुम हो ही इतने प्यारे इन्सान... तुम्हें पहली बार देखने पर ही प्यार का एहसास होने लगता है... तुम्हारी पर्सनैलिटी का जवाब नहीं है... अगर कहो तो जीवन भर इसी तरह तुम्हारा पहलू गर्म करती रहूँ... तुम्हारी सेवा करके मुझे खुशी होगी... सचमुच मज़ा आएगा... आः... देखो न , मेरा बदन टूटने लगा है... बेताबियाँ बढती जा रहीं हैं... मन में आग लगी है... होठ प्यास से तड़प रहे हैं... काश, तुम मेरी कुछ मदद कर पाते...
उस ने ये शब्द जिस अंदाज में कहे थे, वे सलीम के सीने में तीर की तरह चुभ गए... उसने आमंत्रण को चुनौती के रूप में लिया... वह चंदा की आकर्षक गोलाइयों को दबाने लगा... वह आः भरने लगी... उसकी आहों में विशेष कसक थी...दो चाहने वाले अपनी मस्ती में मस्त थे... वह अपना हर अरमान पूरा करना चाहता था... तभी तो वह दिलो-दिमाग से उस की जवानी का रस लूटने की कोशिश कर रहा था... वह भी उसको खुश करने के लिए कोई कसार नहीं छोड़ना चाहती थी... वह उस को प्रभावित करने के बाद वहाँ से पैसे का पत्ता कटवाना चाहती थी... एक बार फ़िर से शराब का दौर शुरू हो गया... अश्लील फ़िल्म चलाकर उसकी आवाज़ तेज कर दी गयी ... फ़िल्म के स्टार जिस तरह से एक्टिंग कर रहे थे , जिस अंदाज से सुख भोग रहे थे, वे भी उनका अनुसरण करने लगे... सलीम और हसीना ने भी मौका देखकर चौका लगा दिया... काम सुख लुटे हुए वे बेहद अश्लील चर्चा भी करते जा रहे थे... नैतिक पतन की साड़ी हदें पार हो चुकी थीं...वह सब कुछ भूलकर अपनी मस्ती में ही मगन थी... वह सलेम को हर तरह से सहयोग कर रही थी, उसने जैसी भी डिमांड की, हसीना ने उसको तुंरत पूरा किया... उसके सहयोग से खुश होकर सलीम कह रहा था-
- तुम्हारा स्वभाव देखकर शुरुआत में ऐसा लगता नहीं था की तुम इस तरह सहयोग कर पाओगी, जबकि बार वाले तुम्हारी इतनी तारीफ़ कर चुके थे की मुझे किसी भी हालत में तुम्हारे साथ यह आनंद लूटना था...
बार गर्ल - तो क्या तुम लोग आपस में इस तरह की चर्चा कर लेते हो ?
सलीम - क्यों , इसमे बुराई भी क्या है ? हम लोग आपस में दोस्त हैं... दोस्ती में ये सब चलता है... तुम्हारा नाम क्या है, ऐसा लगता है जैसे हम कभी पहले भी मिल चुके हैं...
बार गर्ल- बहुत देर के बाद नाम पूछने की सुध आयी है, मतलब निकल गया है तब...
सलीम- पूछने या ना पूछने का ज्यादा मतलब तो होता नहीं है, तुम लोग कौन सा अपना असली नाम बताते हो...
बार गर्ल- तुम मुझे स्वीटी कह सकते हो...

दिलफेंक पडोसन, भाग-44

इसीलिए वह swasth रहने और खासकर मर्दानगी के मामले में फिट रहने के लिए वह सतर्क रहता था, जडी बूटियों का भी सेवन करता था... इसी कारण वह कमसिन फरहा को भी बिस्तर की जंग में हरा देता था... वैसे फरहा भी khoob ताकत लगाया करती थी, उसे भरपूर jhelti थी... मगर फ़िर ऐसा समय भी aataa जब वह

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Sunday, September 6, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-42

उन दोनों का वार्तालाप काफी लंबा हो रहा था , साथ ही उनके विचारों में भी ज्यादा कामुकता आती जा रही थी... फरहा बेचैन थी, फ़िर भी सलीम की बातों को वह बहुत गौर से सुन रही थी... उसे खूब सुख भी मिल रहा था, दिल में तरह-तरह के भाव उमड़ रहे थे... जो व्यक्ति शादी से पहले ही उसको इतना सारा प्यार दे सकता है, इतनी सुख सुविधाएं दे सकता है... शादी के बाद वह क्या नहीं कर सकता... फरहा अब सलीम के बारे में इस तरह की बातें सोच रही थी... सलीम ने उसको जितना आर्थिक फायदा पहुचाया था, उस बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था... इस वक्त सलीम भी उत्तेजना के आगोश में पूरी तरह से जकडा हुआ था... वह किसी भी हालत में फरहा पर हावी होना चाहता था, उसके दिल में तमाम तरह की उमंगें उमड़ रही थीं... वह कहने लगा-
- जबसे तुम मेरी जिन्दगी में आई हो तभी से कुछ अजीब सी हलचल हो रही हैं... सचमुच क्रान्ति आगई है... जीवन एक नया आकार लेता जा रहा है, एक नई सुबह सी हो रही है...
फरहा- ये सब जो भी हो रहा है, वह पोजिटिव है या नेगेटिव?
सलीम- पोजिटिव ही ज्यादा है यार... क्यों ऐसी हारी थकी बात कर रही हो ? एक नई दुनिया दिखादी है इस मोहब्बत ने, इससे पहले हमको क्या मालूम था, प्यार करने के बाद ही जान पाया हूँ...
फरहा- मैंने भी तुम्हें पाकर जाना की प्यार क्या होता है, दीवानगी क्या होती है ? इससे पहले मैंने भी चंचल तितली की तरह उडती हुई मदमस्त जिन्दगी देखी है...उस वक्त दूर-दूर तक कहीं भी गम का कोई नामोनिशान नहीं था...अब तो हर घड़ी , हर पल बस तुम्हारी ही याद है, तुम्हारा ही ख्याल है....
सलीम- तुम्हारा नाम तो मेरे जिस्म के हर हिस्से में लिख चुका है... एक पल भी नहीं दिखाई दीं तो जीना हराम हो जाता है... ऐसा लगता है जैसे सारी दुनिया से मेरे सम्बन्ध टूट चुका है...
फरहा- मेरे साथ भी कुछ दिनों से यही हो रहा है... डर जैसा लगता है कहीं हम दूर ना हो जाएँ... किसीकी बुरी नजर हमारी मोहब्बत को न लग जाए,
सलीम- ऐसी अशुभ बातें मत कहो फरहा ... किसी बुरी चीज में इतनी शक्ति नहीं जो वह हमारी पवित्र मोहब्बत पर भारी पड़ जाए... मैंने सुना है की अगर प्यार सच्चा हो तो सबको झुकना पड़ता है...
फरहा- चाहे कोई झुके या ना झुके बस हमारा प्यार नहीं झुकना चाहिए... सब लोग खुश रहें दुखी हम भी न रहें...
सलीम- ये बात हुई ना... ऐसे विचार पसंद हैं मुझे... इनको क्रांतिकारी मगर समर्पित होने वाले विचार का नाम दिया जा सकता है... मुझे ये प्रिय हैं...
फरहा अब मंजिल पर जाने के लिए बेताब हो चुकी थी... उसे सलीम की बातें तो अच्छी लग रही थीं मगर चाह रही थी की वह बात भी करता रहे और असली काम भी... वह काम जिससे उसे स्वर्गिक सुख मिलता है... जिससे वह अपने आपको दुनिया की सबसे सुखी लड़की महसूस करती है... सलीम भी होशियार था, फ़ौरन उसकी भावनाओं को जान गया और उसके हसीं जिस्म को चूमने लगा, मन में एक बार फ़िर उत्तेजना की आंधी चलने लगी... वह सलीम के ख़ास अंग को जोर -जोर से सहलाने लगी... उसके तन और मन सुलगने लगे थे... सलीम कह रहा था-
- क्या बात है मेरी जान, अब मेरी बातों में मजा नहीं आ रहा है क्या ?
फरहा- सिर्फ़ भाषण से काम नहीं चलता, राशन की भी जरूरत पड़ती है... भूखे भजन न होय गोपाला , यह लो अपनी कंठी माला ... यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी...
सलीम- फ़िक्र मत कर मेरी जान... तुझे सुख तो दूंगा मगर लंबे समय तक उसका एहसास होना चाहिए, इस समय तुम्हारी उत्तेजना जितनी बढेगी , बाद में सुख भी उतना ही बढेगा... खूब आनंद मिलेगा...
फरहा- अगर ऐसी बात है तो मैं खामोश हो जाती हूँ... अब तुम्हारी इच्छा है... जब चाहो , जो चाहो वैसा करना...
सलीम ने फरहा की पहाडियों को दबाना शुरू कर दिया... उसके जिस्म से चट्टान सी खिसकनी शुरू हो गयी, जी में आया की वह उसे दवा की तरह पानी में घोलकर पी जाए... कुछ ही क्षणों बाद दो जिस्म एक हो गए... काम ज्वाला धधकने लगी... इसको बुझाने का उपाय सलीम अच्छी तरह जानता था, और जब उसने उपाय किया तो फरहा सचमुच मान गयी ... वह खुश थी, उसने सलीम को अपनी बांहों में इस तरह से कैद कर लिया मानो कहीं निकल ना जाए... सलीम भी खूब जोर -जोर से प्रहार कर रहा था... वह चाहता था की फरहा को उसकी शक्ति का हमेशा एह्ज्सास रहना चाहिए , वह अगर उसकी मर्दानगी से खुश रही तो उसे छोड़कर नहीं जा सकती... उसको यह फोर्मूला एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बतलाया था...

Wednesday, September 2, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-40

इसका पश्चाताप करने के लिए उसने फरहा को माथेरान टूर पर ले जाने का फैसला किया, यह एक खर्चीला निर्णय था मगर उसने फरहा को और ज्यादा खुश करने और यह जाताने के लिए की वह उससे खूब मोहब्बत करता है, यह रिस्क लिया... फरहा ने जब यह बात सुनी तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा ... वह सलीम से लिपट गयी... उसके हाथ भी हरकत करने लग गए, वह सलीम के गुप्त अंग से छेड़छाड़ कर रही थी... सलीम के बदन में आग लगने लगी... कामोत्तेजना का तूफ़ान उसको बेचैन करने लगा ... वह फरहा की गोलाइयों को दबाने लगा... जैसे -जैसे दवाब बढ़ता जा रहा था, वैसे वैसे वह गर्म आहें भरने लगती थी... उसके यौवन का जोश पूरे उफान पर था, सलीम के मुकाबले वह प्रणय क्रीडा के मामले में फरहा
से उस्ताद था... उसने फरहा से ज्यादा सावन देखे थे, कई महिलाओं के साथ अलग -अलग तरह से सम्बन्ध भी बनाये थे... उसको कई आसन की जानकारी थी... फरहा भी बिल्कुल नई तो नहीं थी...मगर सलीम के मुकाबले कम खिलाडी थी ... सलीम को एकांत के दौरान उत्तेजक बातें करने का शौक था, वह खूब अश्लील बातें करने लगता तो फरहा भी उसका साथ देने लगती थी... इस समय भी सलीम ने कहा-
- आजकल लोग इतने मशीनी हो गए हैं की अपनी पत्नी को बिस्तर पर संतुष्ट ही नहीं कर पाते ... बहुत से लोगों की जिन्दगी में सिर्फ़ पैसे को ही अहमियत मिलती है, उनके लिए खुशियों का पैमाना ही बदल गया है... अभी -अभी मैंने किसी लड़की की व्यथा देखि थी, एक टीवी चैनल पर वह कह रही थी की शादी से पहले मैं किसी और लड़के से प्यार करती थी... उससे मेरी शादी नहीं हो पाई... मैंने शादी के बाद अपने पति को बहुत प्यार दिया है... वह भी मुझे बहुत प्यार करते हैं... लेकिन कुछ टेंशन के चलते वह मुझे शादीशुदा जिंदगी का सुख नहीं दे पा रहे हैं ...

मैं उनको भरपूर प्यार देती हूं... वह मुझसे संतुष्ट भी हैं... मैंने उनको कभी भी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं उनसे संतुष्ट नहीं हूं... शायद इसी कारण हमारा बच्चा भी नहीं ठहर रहा है... मैं एक वर्किन्ग लेडी हूं... अपने इस आंतरिक तनाव के कारण मैं अपने पुराने बॉयफ्रेंड के बारे में सोचने लग जाती हूं... मेरे कई और पुरुष मित्र भी हैं ...मैं अपने को उनकी और आकर्षित होता महसूस कर रही हूं... अब मैं करुँ ?
फरहा- जो लड़की टीवी अखबार में इस तरह की बात पूछेगी, ज़रा सोचिये वह किस तरह की होगी, वह स्वीकार भी करती है की उसके और भी बॉय फ्रेंड हैं... मुझे लगता है वह सिर्फ़ सेक्स की भूखी होगी... साफ नहीं कह पा रही होगी की अकेले पति से उसका पेट नहीं भरता... इसी बहाने कोई तलाश रही होगी...
सलीम- हाँ, शायद यही कारण होगा...
फरहा- मैं चाहती हूँ की वह tumhaare पास आ जाए तो उसको sampoorn सुख संतुष्टि मिल जायेगी... क्योंकि मुझे तो तुम्हारे बारे में कोई शिकायत नहीं है... एक बार भी सम्बन्ध बनते हो तो उसकी मिठास कई दिनों तक रहती है... उस बेचारी लड़की का नंबर मुझे देदो... मैं उससे बात करके तुमसे मिलवाती हूँ...
सलीम- मेरे लिए तू ही काफी हो फरहा ... सिर्फ़ कह रही हो, कहना आसान है मगर जब मैं किसी से सचमुच सम्बन्ध बना लूंगा तो ज़रा भी सहन नहीं कर पाओगी... आसमान सर पर उठा लोगी...
फरहा - गलतफहमी है तुम्हारी , मैं तुम्हारे सुख के रास्ते में कभी नहीं आउंगी... मैं तो खुश हो जाउंगी... अपने हाथों से उसको तैयार करुँगी ताकि वह भी ठीक तरह से असली सुख को भोग सके...वह बेचारी परेशान है, इस वक्त उसको तुम्हारी जरूरत है... अगर उसकी थिओदी सी मदद कर दोगे तो तुम्हारा क्या घिस जाएगा ?उसको औलाद भी नहीं है... खुश हो जायेगी बेचारी ...
सलीम -अच्छा... आज सुबह से लेकर अब तक तुम्हें कोई मिला नहीं जो मेरा मजाक उड़ा रही हो...इस दुनिया में अकेला कामदेव मैं ही हूँ क्या ? और कोई नहीं है.... गली -गली परेशान पड़े है , वह जाकर उनसे मिल सकती है...
फरहा - मेरे लिए तो कामदेव तुम ही हो... मुझे बाकी सब तुमसे कमतर नजर ही नजर आते हैं...
सलीम- मेरे लिए भी हुस्न की मैलका तुम ही हो...तुम्हारे जैसा यौवन हर किसीको नसीब नहीं होता... तुम सबसे सुंदर हो... सबसे ज्यादा सुख देने वाली हो... सम्पूर्ण संतुष्टि मुझे तुमसे ही मिल पाती है... अपनी पत्नी से नहीं...
फरहा- मैं भी तो अब तुम्हारी पत्नी ही हूँ... इसे कहने की आदत डालिए...












Monday, August 31, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-38

मगर अब क्या हो सकता था जब चिडिया चुग गयी खेत ? वह फरहा के ऊपर बहुत दौलत खर्च कर चुका था... हांलाकि तनख्वाह के अलावा भी वह अच्छा खासा कमा लेता था मगर फरहा पर वह बहुत पैसे खर्च कर चुका था... सलीम अब राजू को लेकर उसी बार में पहुच गया था , उसने उस लड़की की बुकिंग भी करवा दी... इसके लिए स्पेशल लोग भी बुक कर दिया गया... सलीम ने एक बात अपने डॉट राजू से भी छिपाई , उसने बुक किए कमरे में एक ऑटोमैटिक और छिपा हुआ कैमरा लगा दिया था, ताकि वह अन्दर की गतिविधियों को हूबहू देख सके, उस कैमरे को उसने अपने बाजू वाले कमरे में , लैपटॉप से जोड़ दिया... मगर अफ़सोस , उनकी सारी मेहनत पर पानी फ़िर गया, जब लड़की को साथ ले जाने का वक्त आया तो उसे बताया गया की उस मोडल की तबियत ख़राब है... राजू को अपने तर्क पर भरोसा हुआ ...उसने कहा भी-
- कहो सलीम... मैंने कहा था ना , ये लोग उल्लू बना रहे हैं... नामचीन लोगों या खूबसूरत लोगों के फोटो दिखाकर ये पैसे पागल लोग दो प्यार करने वालों के दिलों में नफरत घोल देते हैं....
सलीम- हाँ यार... अब तो कहते हैं की दूसरी लड़की पसंद कर लो... एक से बढ़कर एक लड़की है... काहलो छोडो अब घर चलते हैं... आज पीने का मूड भी नहीं हो रहा... ऐसी टेंशन में कैसे कुछ अच्छा लगेगा ?
राजू- ठीक है, मेरी मानो तो घर जाओ और फरहा के साथ खूब जी भरके मस्ती करो... वरना शक के चक्कर में आनंद से भी हाथ धू बैठोगे... समझ रहे हो....
सलीम- तेरी बात सही है... कल देखते हैं, क्या करना है ? फिलहाल यहांसे चलना ही ठीक है...
राजू अपने घर चला गया और थके हारे क़दमों से सलीम भी घर आ गया... उसे फरहा फ्लेट के सामने ही मिली... उन दोनों की निगाहें मिलीं तो फरहा शरारत से मुस्क्रादी , मन में अनेकों अभिलाषाएं थीं, जो उसके चेहरे से पढ़ी जा सकतीं , गिले शिकवे थे जिन्हें आंखों से देखा जा सकता था... वह आराम से घर के अन्दर घुस गया... फरहा उसके पीछे -पीछे थी... वह पानी लेकर आयी, सलीम ने पानी पिया तो वह उसके जूते के फीते खोलने लगी, फरहा के इस अपनत्व भरे व्यवहार से सलीम के मन से सारी कड़वाहट घुल गयी, उसने उसे गले से लगा लिया... फरहा ने दरवाजा बंद कर दिया , पूछने लगी-
- आजकल खोये -खोये से लगते हो, क्या बात है ... कोई परेशानी हो तो बताओ हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं... सूना है की अपनों से अपना गम कह देने से वह हल्का हो जाता है...
सलीम- कुछ ख़ास नहीं यार, बात इतनी सी है की कुछ लोगों पर मेरे पैसे बकाया थे अब मुझे जरूरत पडी है तो कोई भी देने को तैयार नहीं है, बहुत परेशानी हो रही है... सामने वाले को पेमेंट देनी है...
फरहा- तो इसमें कौनसी बड़ी बात है... उन लोगों से प्यार से बात करो , अगर नहीं मानते हैं तो कानूनी नोटिस दिलवाओ... फ़िर देखो वे कैसे आगे -आगे पैसे देते हैं...
सलीम- लेकिन कानूनी नोटिस सम्भव नहीं है, अपने को पैसे भी निकालने हैं और उनसे आगे के लिए काम भी लेना है , वे लोग बे ईमान नहीं हैं.... बस टाइम पर अपना पैसा नहीं मिल पा रहा है...
फरहा- तो थोडा सा सब्र करो , सब्र का फल हमेशा मीठा होता है... जिनका पेमेंट करना है कर दीजिये मैं किसी से उधार मांगकर दे देती हूँ... अपने पापा से मांग लुंगी... टेंशन की कोई बात नहीं है...
सलीम - नहीं यार , मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं देना चाहता... इसीलिए तो तुम्हें बता नहीं रहा था...
फरहा- मुझे क्या इतना गैर समझते हो, मुसीबत के समय अपने ही तो काम आते हैं... बल्कि अपने और पराये की पहचान मुसीबत के दौरान ही होती है...
सलीम ने फरहा को अपनी बांहों में भर लिया और उसके रसीले होठों को चूमने लगा... फरहा के जिस्म में सनसनी सी दौड़ने लगी... वह गर्म आह भरने लगी ... सलीम कह रहा था-
- जब मैं तुम्हारे साथ होता हूँ तो कोई गम नहीं होता, कोई फ़िक्र नहीं होती, कोई थकान नहीं होती... तुम्हारे प्यार में सब कुछ भूल जाता हूँ...
फरहा- तब भी मुझे छोड़कर न जाने कहाँ -कहाँ भटकते रहते हो,
सलीम- जाना कौन कमबख्त चाहता है मगर क्या करें उलझनें ही इतनी हैं की निकलना ही पड़ता है...