Monday, January 5, 2009

प्रिया 1


प्रिया


Sunday, January 4, 2009

रंगीला रतन, भाग-६७

जीशान की बातों में बड़ा रस था , एकाध बार तो रंजना का मन भी हुआ की उसको तोकडे मगर ऐसा करने के बदले वह उसकी बातों में मजा लेने लगी थी... तारीफ करने में उसका कोई सानी नही था... वह रंजना के सीने , होठों की , उसकी झील सी गहरी आंखों की और गालों की तारीफ में कह रहा था-
- तुम्हारा भी कोई जवाब नहीं है... जैसी ये गोलाइयां हैं, ऐसी मैंने आज तक किसी लड़की की नहीं देखीं... बोलीवुड की बात तो छोडिये, होलीवुड में भी ऐसा ने अजारा देखने को नहीं मिलता है... मैं इंग्लिश फिल्म देखना ज्यादा पसंद करता हूँ, रोजाना पार्टी करना और तुम जैसी अच्छी दोस्तों के साथ रात बिताना मुझे अच्छा लगता है... देख रही हो, शहर में कितने अपराध हो रहे हैं, अन्दार्वार्ड के लोग जब चाहें और जिसे चाहें, गोली मार देते हैं... ऐसे यह भी पता नहीं चल पाटा की हमारी साँसें कब तक चल रही हैं...सिर्फ़ अपराध ही नहीं अतिश्योक्त्याँ भी बढ़ रही हैं... कभी बी ही कुछ भी हादसा हो सकता है...सोचता हूँ की जितना भी वक्त है, उसको प्यार मोहब्बत में ही गुजारा जाए... मरने के बाद क्या होगा , कौन जानता है... इन नर्म, रसीले होठों ने मुझे इतना बेचैन कर दिया है की रह रह कर इन्हें चूमने की इच्छा जाग्रत हो रही है... क्या मैं अपनी हसरत पूरी कर सकता हूँ ? मुझे तुम्हारे परमीशन का इंतजार है...
रंजना- अच्छा, शैतान कहीं के, अब तक तुम जो हरकत कर रहे हो, कए वे भी मुझे पूछ कर ही कर रहे हो ?
जीशान- ये घटाओं जैसी जुल्फें किसी को भी दीवाना कर सकती हैं, किसी का भी चैन लूट सकती हैं... तुम्हारे यौवन के दरिया के दरिया में कोई भी अपना चैन करार खो सकता है....
रंजना- तुम भी कम नहीं हो जीशान, मुझे तुम्हारे हर शब्द से जिंदा दिली नजर आती है... मैं असमंजस में इसलिए हूँ की रमेश को ही अपना सब कुछ मान चुकी हूँ,... मैंने इसके साथ पूरा जीवन गुजारने का फैसला कर लिया है... अब इस मोड़ पर मैं कैसे तुम्हारे साथ काम क्रीडा का सुख भोगू ? उस स्थिति में,जबकि वह ख़ुद भी यही है...
जीशान- इसमे प्रोब्लम क्या है ? आखिरकार रमेश भी तो दूसरी किसी लड़की यानी की मेरी दोस्त के साथ आनंद भोग रहा है... क्या सुख पर उसी का अधिकार है ? क्या वही तुमसे अलग सुख भोग सकता है.... वह तो पहले ही इजाजत दे चुका है... तुम बहुत भोली हो... अब जमाना इतना आगे बढ़ चुका है की कुछ पूछो मत... जमाने के हिसाब से अभी तुम बहुत पीछे हो... अब जिन्दगी जीने का तरीका बदल चुका है... सभ्यता और संस्कृति का पैमाना बदल चुका है... हमको दुनिया की कसौटी पर भी तो खरा उतरना है... वरना हम यहीं का यहीं रह जायेंगे और दुनिया न जाने कहाँ पहुच जायेगी...
रंजना- लेकिन पार्टनर बदलकर जिस्मानी सुख भोगने भर से ही क्या यह दुनिया आगे पहुचेगी ?
जीशान- मैंने ऐसा कहाँ कहा ? सिर्फ़ इस्सी से नहीं, मगर यह भी तो उसीसे ज्वाइंट मामला है...
जब रंजना ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया और दिया भी तो एकदम तथ्हीं ... इसी से जीशान के हौंसले बुलंद हो गए... रमेश और जीशान की फ्रेंड पहले से ही सेक्स का सुख लूट रहे थे... जीशान की दोस्त अजीब सी आवाजें निकाल रही थी... उसके शब्दों में दर्द था, ऐसा लगता था जैसे वह जीवन में पहली बार काम क्रीडा कर रही हो... उसके शब्दों से रंजना और भी कामोत्तेजित हो गयी ... उसने जब जोरदार अंगडाई ली तो जीशान ने मौके का फायदा उठाने में ज़रा भी चूक नहीं की... उसकी दोनों गोलाइयों को अपने हाथों में दबा लिया... इस बार रंजना भी खामोश रही... जीशान खुल गया ... उसने फ़िर तारीफ की-
-वाह, दिल खुश हो गया ... मेरी यह दोस्त ,जो रमेश के साथ एश कर रही है, वह तुम्हारे जितनी मस्त नहीं है... इसका फिगर भी तुम्हारे सामने कहीं नहीं टिकता... बड़ा नसीब वाला है रमेश,जिसे तुम जैसी हसीना से प्यार करने का मौका मिला... मैं ख़ुद को भी कम खुशकिस्मत नहीं मानता ...



Saturday, January 3, 2009

रंगीला रतन, भाग-66

उसका स्टाइल ऐसा था जैसे वह अनजान बन रहा हो... दिखने में वह खूबसूरत लग रहा था... रंजना ने रमेश की तरफ़ देखा, वह जीशान की गर्ल फ्रेंड को एक अश्लील के बारे में समझा रहा था... वह लड़की भी रमेश से सटतीजा रही थी... वह अपनी जांघ को पीछे जताने लगी, जीशान उसके और भी करीब आ गया... अब वह पीछे हटने वाली नहीं थी... जीशान ने टी शर्त पहन राखी थी... पेंट के स्थान पर बड़ा नेकर था, जबकि रंजना के जिस्म पर सिर्फ़ एक चादार थी... चादर के नीचे वह नग्न अवस्था में थी... आहिस्ता-आहिस्ता जीशान ने उसकी चादर में हाथ दाल दिया... रंजना को न जाने क्या हुआ की वह इनकार नहीं कर पाई... जीशान ने उंगलियाँ अब रंजना के यौवन द्वार पर दस्तक देने लगीं... उजाला बहुत कम था... अश्लील फ़िल्म ने पहले ही तन मन में आग लगा राखी थी... जीशान की उँगलियों ने रही सही कसार पूरी कर दी थी... उसके मन में विस्फोट हो रहे थे... तन में ज्वालामुखी फ़ुट रहा था... उसने महसूस किया की जो लड़की जीशान के साथ आयी थी, वह जोर-जोर से आहें भर रही थी... रमेश की आवाजें भी आ रही थीं... अब टीवी पर जो द्रश्य था वह बेहद प्रलयकारी था... फ़िल्म में दिखाया जा रहा था की आजकल लोग कैसे अपने पार्टनर बदलकर सेक्स का आनंद उठाते हैं, उसीके विस्तृत द्रश्य थे... रंजना को अब समझते देर नहीं लगी की उसका पार्टनर रमेश भी इसी खेल में मशगूल हो गया है... अब मैदान साफ़ था... जीशान ने उसको आमंत्रण देने के इरादे से अपना हाथ उसकी तरफ़ बाधा दिया, जब रंजना ने रमेश की तरफ़ निगाह दौडाई तो जीशान के होठों पर मुस्काने दौड़ गयी... वह धीरे से बोला-
-इसे कोई आपत्ति नहीं होगी... मुझे भी नहीं है... देखो मेरी प्रेमिका उसके साथ कितना इंजॉय कर रही है... रोजाना एक के साथ ही व्यवहार बनाने से जिन्दगी में मजा नहीं आता, एक समान आनंद से तुम दुखी नहीं हो , मैं तो ऐसा ज्यादा दिनों तक नहीं कर सकता... उसका कारण ये है की मुझे अपना जीवन नर्क ने अहं बनाना है ... मैं जिन्दगी को खुलकर जीना चाहता हूँ... अगर तुम मेरे विचारों से ज़रा भी सहमत हो तो मैं तुम्हारा साथ दे सकता हूँ... इतनी उत्तेजक फिल , शराब ,ड्रग्स और अपने सामने अपने दोस्त का यह मंजर देख कर तुम्हारे दिल में भी लड्डू फ़ुट रहे होंगे, हो सकता है की तुम भी मेरी तरह अब अपने आपको तैयार कर चुकी होंगी... मानसिक रूप से तैयार होने पर फ़िर ज्यादा समय नहीं लगता है... शारीरिक रूप से फ़िर बहुत जल्दी ही फिट हो सकते हैं....
रंजना सोच में पड़ गयी... जीशान बिल्कुल सच कह रहा था... रमेश ने उसको बेहद उत्तेजित कर दिया था... उसके तन में आग लग चुकी थी... उसने एक बार रमेशको पुकारा भी, मगर उसको वहाँ से जवाब नहीं मिला... जीशान की दोस्त और वह खिलखिला कर हंस रहे थे... टीवी की आवाज भी तेज थी... उसने अपने आपको असहाय महसूस किया ,, अभी वह कुछ कहना ही चाहती थी की जीशान ने उसके सुर्ख होठों पर अपने तपते हुए होठ रख दिए... ज़रा भी विरोध नहीं कर पाई रंजना... चुपचाप जीशान का साथ देने लगी... जब जीशान ने उसके जिस्म से चादर एक तरफ़ हटाकर फेंकी तो रंजना विरोध करने लगी... ठीक उसी समय रमेश ने उससे जीशान के साथ आनंद लेने की अपील की... रमेश अब जीशान की तारीफों के पुल बाँध रहा था और उसे ख़ुद से भी ज्यादा मजा देने की गारंटी दे रहा था...

Friday, January 2, 2009

रंगीला रतन, भाग-भाग-65

की तुम बाबा आदम के जमाने में नहीं बल्कि आधुनिक युग में रह रही हो

सेक्स सी दी और सियासत

अलीगढ , उत्तर प्रदेश में सेक्स सी डी और सियासत का खेल बहुत पुराना है। सिर्फ़ किरदार बदल जाते हैं। इस बार सियासी पार्टी है बहुजन समाज पार्टी और आरोपी है पूर्व राज्य मंत्री राम मोहन गर्ग । गर्ग पर आरोप है की सीमा चौधरी नामक युवती के साथ पहले उसने कई सालों तक बलात्कार किया और फ़िर उसकी अश्लील सी डी भी तैयार करली। फिल्मों की तरह वह इस सी डी का डर दिखाकर बार-बार और लगातार समा के जिस्म को भोगता रहा। सीमा की सहन शीलता उस समय जवाब दे गयी , जब गर्ग के गुर्गों ने उसकी पिटाए करदी , उसने पुलिस स्टेशन में शिकायात दर्ज करदी । पुलिस ने गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है । अदालत ने उसको ट्रांजिट रिमांड पर भेजा है। फिलहाल बहुजन समाज पार्टी गर्ग से अपना पल्ला झाड़ने में जुटी है। गर्ग का मंत्री पद भी भेंट चढ़ चुका है। हांलाकि बताया जाता है की पीड़ित महिला का चरित्र ठीक नहीं है, पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी है।

इंजीनियर की हत्या के मामले में अपने विधायक के फंसने से परेशान बीएसपी के लिए नए साल का पहला दिन ए
क और मुश्किल लेकर आयाथा। सीमा चौधरी की शिकायत पर पार्टी के पूर्व नेता और उत्तर प्रदेश मछली पालन विकास निगम के पूर्व चेयरमैन राम मोहन गर्ग के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। पार्टी ने मामले से पल्ला झाड़ लिया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) बृजलाल ने पत्रकारों को बताया कि गर्ग के खिलाफ केस अलीगढ़ के खैर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला ने शिकायत के साथ ही पुलिस को सबूत के तौर पर एक सीडी और फोन कॉल्स के रेकॉर्ड सौंपे हैं। महिला ने शिकायत में कहा है कि मैंने 2003 में डिप्टी सुपरिंटेंडंट ऑफ पुलिस वीर सिंह और सब डिविजनल मैजिस्ट्रेट ओ. पी. वर्मा के खिलाफ बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में गर्ग ने मेरी मदद की थी, लेकिन उसके बाद से वह भी मेरा शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करते रहे हैं। बृजलाल ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। गर्ग ने एक साल पहले बीएसपी से इस्तीफा दे दिया था। ताजा घटनाक्रम से पल्ला झाड़ते हुए पार्टी ने कहा कि फिलहाल गर्ग पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं है। ऐसे में आरोपों के साथ पार्टी का नाम घसीटना ठीक नहीं है। दूसरी ओर, गर्ग ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक साजिश के तहत मुझे फंसाया गया है।

Thursday, January 1, 2009

रंगीला रतन , भाग-64

अब क्या किया जाए, जो हो गया सो गया , जीवन में इंसान से कुछ भूल ऐसी हो जाती हैं, फ़िर उनका प्रायश्चित करना भी मुश्किल हो जाता है... सचमुच गद्दार रमेश ने मेरे दिलो दिमाग को बहुत चोट पंहुचाई है... तुम्हें भी यह जानने की उत्सुकता होगी की मुझे पीने की आदत कब लगी, कैसे लगी ? यह भी की इस तरह मालिश कराने का शौक मुझे कैसे लगा ? तुम अब मेरे दोस्त बन चुके हो,
जाहिर सी बात है की इस बारे में जरूर दिलचस्पी रखते होंगे ?
शारीक- हाँ, दिलचस्पी तो बहुत है मगर डर के मारे कह नहीं रहा था... बताइये न ?
रंजना -मैं रमेश की किसी बात का इनकार नहीं कर सकती थी... वह मेरे जिस्म को चखना चाहता था, मैंने हाँ करदी... इसके बाद मेरी भी आदत बिगड़ गयी... सेक्स मेरी रोजाना की जरूरत बन गयी... बिना रमेश से मिले मुझे आनंद ही नहीं आता था, मैं हर समय रमेश के ख्यालों में ही खोई रहती थी...
इस बात का उसने जमकर फायदा उठाया ... एक दिन मैंने महसूस किया की वह अपने दोस्तों के सामने मुझे परोसना चाहता है... तब जाकर मेरी आँखें खुलीं...
शारिक- तुमने कैसे महसूस किया की रमेश तुम्हें अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर बनाना चाहता है...
रंजना- एक दिन हम दोनों इसी तरह आनंद उठा रहे थे जैसे अब तुम और हम उठा रहे हैं... हम दोनों ही शराब पिए हुए थे... ज्यादा तो नहीं लेकिन मैं नशे की शिकार थी... मेरे होठों में सिगरेट फंसी हुयी थी... रमेश और मैं दोनों ही नग्न थे , वह मेरे संवेदन शील अंग के साथ खिलवाड़ कर रहा था... वासना की आग मेरे बदन को बुरी तरह झुलसा रही थी... मैं बेचें थी... तभी रमेश का मोबाइल बज उठा... फोन रिसीव करने के बाद वह बोला-
- मेरे दोस्त जीशान का फोन है , उसकी गर्ल फ्रेंड भी उसके साथ है... काफी कोशिश कर रहा है , मगर इस वक्त जगह का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है... वह इन्ज्योय करने के मूड में है...
मैंने उसको कुछ बोलने के बजाय घूरकर देखा , उसके चेहरे पर गौर से देखकर पूछा -
-तो ? परेशानी क्या है ? अगर वे लोग मस्ती करना चाहते हैं तो ज्कारें, हमको इससे क्या लेना देना है...
रमेश- अगर परेशानी नहीं होती तो अब फोन क्योंकरता? vअह चाहता है की ?
रंजना- क्या चाहता है वह ? चुप क्यों हो गए , बोलो न ... क्या बात है आख़िर ?
रमेश - जीशान चाहता है की वह भी इसी कमरे में अपनी गर्ल फ्रेंड को संतुष्ट करना चाहता है... तो , मैं... ,,,,
रंजना - ये क्या तो- तो मैं-मैं लगा राखी है ?साफ़ -साफ़ क्यों नहीं कहते की आख़िर क्या बात है ?
शारीक- मैं पूछता हूँ की दिक्कत भी क्या है ? आजकल ये सब फैशन हो गया है... अब देखो न अश्लील फ़िल्म में भी तो यही सब दिखाया जा रहा है... जब आनंद ही लेना है तो जमकर लिया जाए...
रंजना- तुम्हें या तो शराब चढ़ गयी है या फ़िर बहक गए हो, अगर आज मूड नहीं है तो मैं जाऊं क्या ? कल मिल लेंगे ... अजीब सी म्बह्की-बहकी बातें करने लगे हो , साफ़ कुछ नहीं कहते ...
रमेश - मैं कह रहा हूँ की जीशान को यहीं पर बुला लेते हैं , वह अपनी फ्रेंड के साथ एक तरफ़ सुख भोग लेगा और हम लोग यहाँ पर मौज मस्ती कर ही रहे हैं...
रंजना- यह कैसे हो सकता है ? हम एक ही कमरे में दो लोग कैसे मस्ती लूटेंगे ? क्या तुम्हें शर्म नहीं आएगी... यहाँ पर कोई परदा भी नहीं है... वह मुझे नग्न अवस्था में देखकर न जाने क्या सोचेगा
रमेश- आख़िर वह क्या सोचेगा , उसकी प्रेमिका भी तो आ रही है...
रंजना- मैं एक इज्जतदार परिवार से ताल्लुक रखती हूँ रमेश ... तुमको यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए