Wednesday, March 31, 2010

भाग-४९

अजय बुरी तरह से उलझ चूका था. उसको याद आती थीं वे बातें जो कभी अहमद ने उससे कही थीं, भले ही वह छोटा था मगर था गज़ब का जानकार. मानव स्वभाव के विषय में उसको सम्पूर्ण जानकारी थी. उसी ने कहा था की रिश्तों को बनाने में सालों लगते है और टूटने में एक पल भी नहीं लगता। कई बार हम अपनी दिनचर्या में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने आस-पास हो रहे परिवर्तनों पर ध्यान नहीं दे पाते। रिश्ते कटु हों और समाप्ति की ओर बढें इसके पहले ही हमें कुछ संकेत मिलने लगते हैं। यह अलग बात है कि हम लापरवाही के चलते इन पर ध्यान नहीं दे पाते। यदि आप अपने रिश्तों को टूटने से बचाना चाहते हैं तो उन संकेतों को समझने की कोशिश करें, जिनसे दूरियां बढ़ने का पता चलता है।
अचानक कुछ नहीं होता, चीजें धीरे-धीरे बदलती हैं। अपने साथी के शारिरिक संकेतों को समझने की कोशिश करिए। क्या आपका साथी पहले की तरह आप पर ध्यान नहीं दे रहा और आपकी बातों में रूचि नहीं ले रहे हैं? आपके करीब आने पर आपका साथी असहज महसूस करती है। अतिनिकटता के क्षणों को अनदेखा कर रही। बच्चों के मसले के अलावा और कोई विषय बातचीत का नहीं रह गया है। आप व्यक्त करना चाहें या नहीं लेकिन आपके शारिरिक संकेत बहुत कुछ कह देतें हैं।
लगाव की कमी भी रिश्तों में दूरियों के बढ़ने के संकेत है। अगर पहले जैसे प्यार की गरमाहट अब कहीं ढूंढने से भी नजर नहीं आ रही तो समझिए कि यह खतरे का संकेत है। यह ठीक है विवाह के शुरूआती दिनों के बाद रोमांस का खुमार धीरे-धीरे कम होता चला जाता है। लेकिन ऎसा भी नहीं होता कि प्रेम बिलकुल नजर ही न आएं।
व्यवहार में बदलाव आपके बीच दूरियां बढ़ने का तीसरा संकेत है। क्या आपके साथी का अब आपकी बातों पर ध्यान नहीं जाता। गंभीर बातों को सुनकर भी अनसुना कर देते हैं। आपकी बातों का जवाब झुंझुलाकर देतें हैं। बेवजह गुस्सा करना इत्यादि। यदि ये सारे लक्षण उनके व्यवहार में नजर आ रहे हैं तो आप समझ लें कि ये खतरे की घंटी है।
यदि आपका साथी आपके साथ अंतरंग पल नहीं बिताना चाहती तो समझे कि दूरियां बढ़ रही हैं। बेहद कठिनाई से बाहर जाने के बने कार्यक्रम में देखते हैं कि वहां केवल आप दोनों ही नहीं, कुछ और भी परिचित हैं जिनके बारे में आपको पता भी नहीं था। आपके साथी का उपेक्षापूर्ण व्यवहार दूसरों को यह जता रहा है कि आपके संबंधो में क़डवाहट आ रही है। यह स्थिति कष्टपूर्ण है। ऎसी स्थिति आपके रिश्ते के लिए खतरे की घंटी है।
यदि आपको ऎसा महसूस हो रहा है कि आपका साथी दिन-प्रतिदिन कुछ बदल रहा है। यदि आपका साथी अपने व्यक्तित्व को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो रही है। यदि नित नए और फैशनेबल परिधानों की ओर उनका ध्यान जा रहा है। अचानक आए इन बदलावों से जान ले कि आपके साथी के जीवन में कुछ नया और रोमांचक चल रहा है। हो सकता है कि आपकी जगह कोई और लेने की कोशिश कर रहा।
उन्होनें कितने अवसर टाले यह कहकर कि उनके पास समय नहीं हैं।यदि ये लक्षण आपको नजर आ रहे हैं तो सचेत हो जाइए। कभी भी स्थितियों को अनदेखा करने से स्थितियां सुधरती नहीं हैं और बिगड जाती है. मगर यह क्या ? यहाँ तो गाँव बसा ही नहीं और डकैत चले आये वाली कहावत हो रही है . अभी तह अजय और चन्दा के बीच ठीक तरह से सम्बन्ध बन भी नहीं पाए थे की बिगड़ने की नौबत आ गयी. अगर वह अपने माँ -बाप से बगावत कर भी लेता है तो क्या चन्दा उसके प्यार को स्वीकार कर लेगी ? कहीं ऐसा नहीं की वह न तो घर का रहे और न घाट का.उसको वैसे तो चन्दा की आँखों में मोहब्बत के भाव नजर आते थे, मगर उसकी कम उम्र ही उसकी मोहब्बत में सबसे बड़ी बाधक बनी हुई थी. चन्दा उसको छोटी उम्र का तो नहीं समझती.

Tuesday, March 30, 2010

bhag-48

अजय को लगा जैसे उसके पांवों के नीचे से जमीन खिसक रही है. उसे अपनी माँ पर बहुत भरोसा था , वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता था, उसका बहुत आदर करता था. क्योंकि भले ही उसके पिता उसे कभी कभार दांत दिया करते थे लेकिन उसकी माँ ने तो उसको कभी दांता भी नहीं. उसकी हर जायज -नाजायज मांग को पूरी कर दिया करती थी. आज वही उसकी शादी का विरोध कर रही है. उसके मन में विद्रोह की चिंगारियां उठने लगीं. जब कुछ नहीं सूझा तो भागकर अपने कमरे में घुस गया और अंदर से दरवाजा बंद करके अपने पलंग पर जा गिरा, उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. उसे चन्दा की भी चिंता सताने लगी. अपने दोस्त अहमद की भी चिंता थी, अगर उसके माता -पिता को यह पता चला की अहमद भी अजय का साथ दे रहा था , तो उसे भी तकलीफ हो सकती थी. बेचारा अहमद... जब वह अपने प्यार का प्रस्ताव रखने में हिचकिचा रहा था तो अहमद ने ही उसका हौंसला बढ़ाते हुए कहा था-
-आपसे कुछ कदमों की दूरी पर वह लड़की खड़ी है, जिसे आप प्यार करते हैं, लेकिन परेशानी यह है कि आप अब तक उसे अपने दिल की बात नहीं बता सकते। वह दूर खड़ी अपने सर्कल में बातें कर रही है, लेकिन वह जानती नहीं कि आप उसे देख रहे हैं और आपकी दिल की धड़कन तेज हो रही है।

यह समस्या लगभग हर दूसरे प्रेमी की है, कि वह किसी लड़की से मन ही मन प्यार तो कर लेता है, लेकिन इजहार-ए-मुहब्बत की हिम्मत नहीं जुटा पाता। आइए हम आपको बता रहे हैं कि किसी लड़की के दिल में जगह किस तरह बनाई जाए, उसे अपनी मुहब्बत में कैसे गिरफ्तार किया जाए।

सबसे पहले आप अपने मन में सोच लीजिए कि आप दस लड़कियों को प्रेम प्रस्ताव देने जा रहे हैं और उन दस लड़कियों मे से केवल दो ही आप के प्रस्ताव को स्वीकार करेंगी, शेष आठ लड़कियाँ प्रस्ताव ठुकरा देंगी। इस तरह सोचने से आप मानसिक रूप से खुद को तैयार कर पाएँगे और हौसला भी बढ़ेगा।

खुद में इतना विश्वास पैदा कीजिए कि आपको किसी और सहारे कि जरूरत न पड़े। याद रखिए अगर आप अपनी मदद नहीं कर सकते तो दुनिया में कौन है जो आप कि मदद कर सकता है। अधिक से अधिक यही होगा कि वह मना कर देगी, लेकिन आपको इस बात का संतोष तो रहेगा कि कम से कम आपने कोशिश तो की।

जाइए और लड़की से स्वयं बात कीजिए, अगर आप पहल नहीं करेंगे तो कोई और बाजी मार ले जाएगा, वक्त किसी के लिए नहीं रुकता। आप के बात करने के दो परिणाम होंगे पहला यह कि वह लड़की आपका प्रस्ताव ठुकरा दे, लेकिन इससे कम से कम ये तो पता चल जाएगा कि वह चाहती क्या है? और आप उस लड़की के दिल में हलचल भी मचा देंगे।

दूसरा परिणाम यह कि वह कोई जवाब ही न दे, इसका मतलब यह है कि वह सोचने के लिए वक्त चाहती है और ये आपकी जीत की निशानी है। तो देर किस बात की, जाइए और कह दीजिए दिल की बात और डूब जाइए रोमांस में।
और अजय ने यही नुस्खा आजमाया , फिर तो विजय उसे ही मिली, चन्दा को उसने लगभग राजी कर लिया था. और इस तरह अजय पहली ही बार में सफल भी हो गया. उसको दस लड़कियों तक प्रस्ताव नहीं पहुचाने पड़े थे. अहमद के मौसेरे भाई का भी उसको खूब सहयोग मिला था , अगर वह अच्छे पत्र नहीं लिखता तो शायद वह यहाँ तक नहीं पहुँच पाटा और प्यार से पहले ही तकरार हो जाती . उसकी प्रेम कहानी का दुखांत हो जाता. वह चाँद सी प्यारी चन्दा के बिना ज़िंदा नहीं रह सकता था. उसे यह भांपते देर नहीं लगी की अब उसकी प्रेम कहानी में अत्यंत गंभीर मोड आने वाला है , और ऐसे वक्त में उसको अहमद की बहुत याद सता रहिउ थी. वह बुद्धिमान था और बुरे वक्त में भी अच्छा काम करने की क्षमता रखता था.
अजय रोता जाता था और चन्दा की याद करता जाता था. चन्दा का खूबसूरत चेहरा उसकी नजर से ओझल होने का नाम ही नहीं लेता था . उसकी मुस्कान अजय के दिल में गहराइयों तक बस चुकी थी. उसके बिना वह जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता था.











Monday, March 29, 2010

bhaag-47

जब घर आया तो हवेली के दरवाजे पर अजय को अपनी माँ दिखाई दी, आमतौर पर हमेशा उसकी माँ के होठों पर एक सौम्य मुस्कान नृत्य करती रहती थी , लेकिन आज हाल कुछ अलग था. आँखों की पुतलियों में लाल-लाल डोरे तैर रहे थे. अजय को अनुमान लगातार देर नहीं लगी की दाल में कुछ काला जरूर है , साहस से काम लेना था इसलिए एक गाना गुनगुनाता हुआ आगे बढ़ने लगा, वह अपनी माँ को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाना चाहता था . लेकिन माँ ने थोड़ा सा कडककर पूछा -
- कहाँ से आ रहे हो ?
अजय- चन्दाबाई के कमरे से . मिलना गया था उनसे.
माँ- कारण जान सकती हूँ ? क्यों गये थे वहाँ? जानते हो न , वहाँ जाना वर्जित है.
अजय- एक कलाकार से मिलने में क्या तकलीफ है ? दुनिया आती है उनका खेल देखने , आपने तो इनको जगह भी मुहैया करा रखी है, फिर क्या परेशानी है ? मुझे पहले कभी नहीं पता चला की चंदाबाई से हम नहीं मिल सकते .
माँ- ठीक है, तब मालूम नहीं था , मगर अब तो जान गए, सारी दुनिया को आने दो, तुम नहीं जाओगे , जैसा हम कहते हैं वैसा करो. हमें सूचना मिलती है की तुम अपनी राह से कुछ भटकते जा रहे हो, चंदाबाई से मिलने गयी तो अंदर से दरवाजा बंद क्यों किया ? तुम नहीं जानते इन नाचने गाने वालियों को ? जादूगर होती हैं, जादू सा चला देती हैं. आदमी को वश में कर लेती हैं, ना बच्चा देखती हजें, और ना बूढा. बूढा हो या जवान , मोए ह्त्या से काम . ये हाल होता है इनका. बड़ी बेरहम होती हैं, दौलत पाने के लिए कुछ भी कर सकती हैं. इन्होने कितने ही धनासेठो को कंगाल बना दिया है. कितने ही राजाओं को भिखारी बना चुकी हैं, तुम मेरे इकलौते बेटे हो और काफी समझदार भी. इसलिए
साफ़-साफ़ बात करना जरूरी हो गया है . वरना सर से पानी उतर जाएगा.अभी तुम्हारी उम्र ही कितनी है , मेरे ख़याल से अभी दूध के दांत भी नहीं उखड़े होंगे. और अभी से अकेले में मुलाक़ात करनी शुरू करदी. जानते हो न हमारी समाज में कितनी इज्जत है ? आज यह बात सिर्फ मुझ तक्ल आई है. कल ना जाने कितने लोगों तक सुनाई देगी. हम तो जी ते जी मर ही जायेंगे. किसको क्या जवाब देंगे ? शुक्र मानो अभी तक तुम्हारी बाबूजी कुछ नहीं जानते वरना प्रलय आ जाती अजय- मैंने कोई गुनाह नहीं किया, मैंने किसीके घर चोरी नहीं की. किसीका गला नहीं काटा , तो आपकी बेइज्जती कैसे हो जायेगी ? मैं भी आपसे सब कुछ साफ़-साफ़ बात कर लेना चाहता हूँ. ताकि आप किसी भ्रम में न रह पायें.
माँ- अच्छा . तो अब माँ से जुबान लड़ाई जा रही है. ये होता है बेटे का दायित्व ? इसलिए तुम्हें इतने नाजो अंदाज से पाला , ताकि बड़े होकर हमारे मुंह लग सको ?
अजय- ये बात नहीं है माँ. मैं माफी चाहता हूँ. आपका दिल नहीं दुखाना चाहता , लेकिन जो इस वक्त मेरे दिल में हो रहा है, वह आपको बताना चाहता हूँ. मैं नहीं चाहता की आप मुझे गलत समझें. इसलिए यह कहना चाहता हूँ की चंदाबाई बहुत अच्छी महिला है, मैं उससे प्रेम करने लगा हूँ और इसीका इजहार करने उनके पास गया था, मगर उन्होंने अस्वीकार कर दिया, मैं उनको मनाने की कोशिश कर रहा हूँ. चंदाबाई के साथ यह जीवन जीना चाहता हूँ .
माँ- ये क्या कह रहे होम बेटे , तुम्हारी माँ का कलेजा फट जायगा .ऐसा जुल्म न करो बेटे . ये तुम किस जुर्म की सजा दे रहे हो ? मुझसे कोई भूल तो नहीं हुई , जिसकी वजह से नाराज हो ? अरे वह बूढ़ी है . मुझसे भी भी बड़ी है उम्र में ? तुम्हारी दादी की उम्र की है, उससे शादी करने के बारे में तुम सोच भी कैसे सकते हो ?
अजय- मुझे माफ करदो माँ. मैं यह निश्चय कर चुका हूँ की शादी करूँगा तो सिर्फ चंदाबाई से , वरना किसीसे नहीं करूँगा.
माँ- अगर तुम कहोगे तो एक से बढ़कर एक लड़कियों की लाइन लग जायेगी. तुम्हारी बाबू जी ने बस ये जिक्र भर भी कर दिया ना की हम अपने बेटे का रिश्ते लेने की तैयारी कर रहे हैं तो सकड़ों ऑफर आने लगेंगे . यकीं नहीं आता तो कल ही देखलो. मैं कल ही तुम्हें दिखा देती हूँ, कई लड़कियां तो मेरी नजर में भी हैं. तुम्हारे चचेरे भाई के ससुर कितनेपैसे वाले हैं, अब तो विधायक भी बन गए हैं. उनकी पोती माला को देखा है तुमने , कितनी सुन्दर है, जब हँसती है तो गालों में गड्ढे पड़ते हैं. वे कबसे तैयार हैं. खूब दान दहेज भी देने को तैयार हैं. कल उन लोगों को बुलाऊँ क्या ?

Sunday, March 28, 2010

भाग-४६

वह जो भी है , बड़ा भद्र पुरुष है. उसने मुझसे यह वादा लिया है की मैं किसीको उसके बारे में न बताऊँ. तुम उसकी इस इच्छा का सम्मान करोगे न अजय ? तो फिर उसका नाम, पता कभी न पूछना . वह अपने इस त्याग का ढोल नहीं पीटना चाहता , वह मौन रहकर अपने काम को अंजाम देने में विशवास रखता है. आज तक का रिकार्ड है उसने फिर कभी मुझसे प्यार -मोहब्बत या शादी का जिक्र नहीं किया.जबसे मैंने उसे इनकार किया, तभी से वह इस मामले में उदासीन हो गए उसने अजीब सी औपचारिकता की चादर ओढ़ ली है और अब वह कभी पुरानी बातों का स्मरण नहीं करते .
अजय- क्या प्यार के परिंदे ऐसे ही होते हैं ? यह मैंने आज जाना की मोहब्बत शब्द ही अपने आप में कितना गूढ़ अर्थ छिपाए हुए है ? यह कल्पना की या कथा किस्सों की ही बात है की कोई व्यक्ति इतना त्याग भी कर सकता है. प्यार की नदी में इस हद तक डूब सकता है, कैसे होता है ये सब ? कहाँ से आता है इतना जूनून ? मैं सोचता हूँ की शायद ऐसे प्यार के परिंदों की वजह से ही संसार में प्यार और त्याग की भावना जीवित है. मैं ऐसे महान व्यक्तित्व को प्रणाम करना चाहूँगा.तुम्हारा कहना मानते हुए फिलहाल नाम , पता नहीं पूछुंगा लेकिन जब कभी तुम खुद अपने विचार बदलो और उनकी पहचान बताना चाहो तो मुझे जरूर मिलवाना . मैं दर्शन करना चाहूँगा. उनसे मिलना चाहूँगा .
चन्दा -अगर ऐसा है तो मैं भविष्य में तुम्हें जरूर मिलवाउंगी .
जब वे दोनों बात कर रहे थे , ठीक तभी दरवाजे पर आहट हुयी, चन्दा को लगा की जैसे कोई चोरी-छिपके उन्हें देख रहा था, वह अजय की बांहों में कैद थी. दोनों की आँखें भी एक दुसरे से मिली थीं, इसके बावजूद चन्दा का थोड़ा सा ध्यान दरवाजे की तरफ भी था. उसे लगा की खिडकी के रास्ते कोई उनकी जासूसी कर रहा था , जब चन्दा ने यह बात अजय को बतायी तो पहले तो वह बेफ़िक्र दिखा मगर चन्दा के समझाने पर उसकी समझ में बात आ गयी, उसने चन्दा के गाल पर एक गहरा चुम्बन लिया और अलग हो गया. चन्दा ने लपकते पांवों से दरवाजे का रुख किया , दरवाजा खोलकर चंदा बाहर निकली तो उसे एहसास हुआ जैसे की कुछ देर पहले वहाँ पर कोई मौजूद था, उसने आसपास निगाह दौडाई , खोजबीन भी की लेकिन कोई नजर नहीं आया. हैरत से वह इधर उधर देखने मिली,मगर कोई होता तब न मिलता. वह तो कभी का आँखों से ओझल हो चूका था. चन्दा ने घबराई हुयी आवाज में कहा-
-अब क्या होगा , कहीं किसीने देख तो नहीं लिया ? अब क्या करेंगे हम लोग ?
-अजय क्या करेंगे , रोजाना ऐसे ही प्यार करेंगे , और क्या ? अगर किसीने देख भी लिया तो हमारा कोई क्या कर लेगा ? आखिर हम चोर तो नहीं हैं, किसीके घर में डकैती तो नहीं डाली ?
चंदा- मेरा दिल बहुत जोर-जोर से धड़क रहा है , डर सा लगता है , अगर कहीं कुछ हो गया तो बेवजह बदनाम हो जायेंगे.
अजय- मेरे रहते तुम्हें कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, तुम अपनी रिहर्सल में जाओ . कुछ हुआ तो मैं हेंडल कर लूंगा .
चन्दा को दिलासा देने के बाद अजय भी अपने घर चला गए. भले ही उसने चन्दा का हौसला बढ़ाया था लेकिन अंदर से कोई दहशत उसे भी खाए जा रही थी, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की दो प्यार करने वालों के पीछे ये दुनिया क्यों पड़ जाती है ? वे दोनों किसीका बुरा तो नहीं कर रहे , इसके बावजूद उनके मन में दहशत का माहौल क्यों है ?लोग प्यार पर ही पहरा क्यों बिठा देते हैं ? नफरत को तो कोई नहीं रोकता , फिर मोहब्बत के ही सब दुश्मन क्यों हैं ? ये सब बातें उसकी समझ से परे थीं, ये सवाल उसके दिलो दिमाग में गूँज रहे थे , और उसके पास इनका कोई भी जवाब नहीं था.

Saturday, March 27, 2010

भाग-45

क्या सच बोलना गुनाह है ? गुनाह तो तब होता जब मैं हाँ कहके मुकर जाती , या फिर उसे झूठे ही यह एहसास कराती कि मैं भी उसको चाहती हूँ, उससे प्यार करती हूँ। और सच इसके विपरीत होता। मैंने तो बस सच कहा।
अजय- कभी -कभी एक झूठ से भी किसी कि जन्दगी बच सकती है। कह्ते हैं न कि अगर एक झूठ से किसी का भला होता हो तो वह झूठ भी सच से बेहतर होता है । क्या बिगड़ जाता एक बार झूठ बोलने से , ऐसे में जबकि उसकी दिल टूटने से बच जाता। बेचारा , न जाने किस हाल में होगा ? क्या सोचता होगा ?
चन्दा- और यह भी तो कहा गया है कि चाहे जो हो, कितना भी नुक्सान क्यों न हो जाए मगर इंसान को कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए । अगर मैं उसे ऐसे ही उलझाकर रखती , और आखिर में सच्चाई जब उजागर होती तब क्या हाल होता उसका , क्या तब उसका दिल नहीं टूटता । तब तो वह टूट ही जाता।उसका सबके ऊपर से भरोसा उठ जाता । इसलिए मैंने सोचा कि जो सच है उसे बता दिया जाए, हांलाकि वह बहुत समझदार था, इतना अच्छा व्यक्ति बहुत कम मिला करता है। उसने मुझसे कभी शिकायत नहीं कि। उलटा जब मैंने उसे बताया कि अपनी माँ कि खातिर मैं शादी नैन करना चाहती तो वह मेरे त्याग का कायल हो गया। मेरी बहुत इज्जत करने लगा। उस वक्त उसने मुझसे कहा था-
- अब तक तो मैं तुमसे सिर्फ मोहब्बत करता था लेकिन अब तुम्हें पूजने को जी चाहता है, तुम महान हो चन्दा। तुमने मेरी आँखें खोल दीहें। मैं तो सिर्फ तुम्हें पाने के लिए ही बेताब था , लेकिन तुम्हारे विचार जानकार लगा कि सच्चा प्यार तो ये है। यानी कि त्याग ही सच्चे प्यार का दूसरा नाम है। अब मैं कभी भी तुम,से कोई मांग नहीं करूँगा। अपनी माँ की ख़ुशी के लिए जेसे तुमने आजीवन कुंवारी रहने कि प्रतिज्ञा की है उसी तरह अब मैं भी आजीवन कुंवारा रहने का व्रत लेता हूँ। तुम अपनी मा के लिए इतना कुच्छ इसीलिए कर सकती हो ना क्योंकि तुम उन्हें प्रेम करती हो, आदर करती हो। यही हाल मेरा भी ओ है। भले ही उम मुझे चाहो ना चाहो , तुम मुझसे प्रेम करो न करो लेकिन मैं तो जान छिड़कता हूँ तं पर। तो फिर मैं भी क्यों ना त्याग करके अपने प्रेम को जीतने की कोशिश करुँ।
अजय- ओह॥ ग्रेट यार। कितना तपस्वी होगा वो इंसान। कितना महान , कितना मनीषी ...तुमने उनसे कुछ नहीं कहा ? क्या तुमने आसानी से उन्हें यह प्रतिज्ञा लेने दी ? रोका नहीं उनको ?
चन्दा- जैसे तुम तड़प रहे हो , ठीक इसी तरह से मैं भी तड़प उठी थी, हाथ जोड़कर खादी हो गयी , उसके सामने । ऐसा नहीं करने का आग्रह किया , मगर वह कहाँ मानने वाला था , नहीं माना। बोला-
- जैसे तुम मजबूर हो वैसे मैं भी मजबूर हूँ। तुम अपनी प्रतिज्ञा का पालन करो , मैं अपनी प्रतिज्ञा का पालन करता हूँ। अपनी माँ की सेवा के लिए अगर तुम इतना बड़ा त्याग कर सकती हो तो मैं यह छोटा सा कार्य क्यों नहीं कर सकता।
अजय- ओह। फिर ? फिर क्या कहा तुमने ? उसे समझाया नहीं कि तुम अपनी माँ की खातिरकर रही हो जब कि वह तुम्हारा कुछ नहीं लगता , भले ही वह तुम्हें चाहता है , तुम तो उसे नहीं चाहती।
चन्दा- कहा था , बहुत कुछ कहा । तुम्हें नहीं लगता कि मैंने सब कुछ कहा होगा। मगर दीवानगी का जूनून उसके सर चढ़कर बोल रहा था, और वे सव बातें उसने सिर्फ भावुकता में बहकर नहीं कही थीं बल्कि उनको सच भी कर दिखाया था। वह व्यक्ति आज भी कुंवारा है अजय। आज तक उसने शादी नहीं की। पूरी जिन्दगी मेरे हाँ के इन्तजार में गुजार दी। अब ये न पूछना कि वह कौन है, क्या करता है ?









Friday, March 26, 2010

bhaag-44

क्या कोई चाहेगा की ऐसा हो,कोई नहीं. इसलिए कोई तकलीफ ही नहीं है.आखिरकार सब लोगों का हमारी बात माननी ही होगी. मैंने सुना है प्यार सबसे ऊपर होता है, देखना एक दिन हमारे प्यार के आगे भी सारी दुनिया झुक ही जायेगी. और हो भी क्यों नहीं. हमारा प्यार जो सच्चा है. सबसे अच्छा है.
चन्दा- बहुत जिद्दी हो अजय , पहले से ही जानती हूँ तुम्हें, गोद में जो खिलाया है.
अजय- तो अब बांहों में भी झुलाओ ना. आ जाओ मेरे करीब. इतने करीब की फिर ज़रा भी दूरी न रहने पाए.
चन्दा क्या कहती, चुप हो गयी. अजय उसके होठों को चूमने लगा, चन्दा का बदन में आग लगने लगी . वह बेचैन होने लगी. उसके छिपे हुए अरमान बाहर आने लगे. अजय भी बेकरार था , उसकी समझ में नहीं आ रहा था की अपने जज्बातों को काबू में कैसे करे, उसने चन्दा की गोलाइयों को सहलाना शुरू कर दिया. अभी तक भी उन पर्वत चोटियों में सख्ती मौजूद थी. अभी तक उनमे जबरदस्त कशिश थी. अजय को आनंद आया टॉम वह और भी आगे बढ़ा. चन्दा कराहने लगी . अजय उसकी गोलाइयों पर दवाब बढाने लगा था. आखिरकार उसने पुछा -
-कब तक हम दोनों ऐसे तडपते रहेंगे, मैं जानता हूँ की इश्क की यह आग सिर्फ मेरे बदन में ही नहीं, बल्कि हम दोनों के बदन में लगी है. मेरे प्यासे होठ तरस रहे हैं. तुम्हारे पास तो समुन्दर भरा पड़ा , इस अमृत रस से मेरी प्यास भी क्यों नहीं बुझा देती हो ?
चन्दा- नहीं अजय ऐसा गज़ब न ढाना, मैं तो दीवानी हो चुकी , और दीवानी ना बनाना. इससे आगे अगर एक कदम भी बढे तो समझना की हम अपनी प्यास नहीं बुझा रहे हैं बल्कि एक और ज्वालामुखी हमेशा के लिए सुलागने के लिए छोड़ रहे हैं.फि का मजा लेना सीखो. कभी नहीं बुझ पाएगी यह आग.क्योंकि यह मामूली नहीं बल्कि इश्क की आग है.
अजय- अपने सीने में इन लपटों को लेकर तुम चैन से जी सकती हो. नींद आएगी तुम्हें ? मुझे तो बिलकुल नहीं आएगी. मैं तो नहीं जी पाउँगा. मुझे किसी तरह जीने की दवा दे दो. अपनी मोहब्बत का आसरा दे दो.
चंदा- अच्छा जी... तुम नहीं जान पाओगे औरतों के दर्द को. यह बड़ा खतरनाक मगर हसीं होता है, अगर हसीं नहीं हो तो इसे लेकर जियें कैसे ? तुम भी अगर चाहो तो इस दर्द को लेकर जी सकते हो. इसके लिए तुम्हें मुझसे सच्ची मोहब्बत करनी होगी, तुम्हें अपनी भावनाओं के बहाव को रोकना होगा. इसके बाद ही तुम्हें वह अनोखा सुख मिल पायेगा, तब तुम रात को मेरा नाम लेकर सोओगे और मेरा ही नाम लेकर जागोगे . तब तुम सपनों में भी मुझे ही पाओगे और हकीकत में भी मुझे ही पाओगे, नींद नहीं आएगी तो उठकर बैठ जाओगे . गलियों को निहारने लगोगे . मेरी तस्बीर को अपनी आँखों के सामने ही महसूस करोगे, वह इश्क का असली मंजर होगा, सोचो कितना आनंद आएगा, कितना दुःख होगा मगर सुख देना वाला. दुखी करने वाला दुःख नहीं. और जब यह दरद हद से गुजरने लगेगा तो तुम को गीत अच्छे लगने लगेंगे, शायरे अच्छी लगने लगेगी . तब तुम मेरी याद में गीत लिखने लगोगे
अजय- वाह ... सचमुच ऐसा होगा ? क्या तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा हुआ था ? क्या तुमने भी कभी किसी से प्यार किया था ?
चन्दा- नहीं, तुम्हारे अलावा मैंने कभी किसी से प्यार नहीं किया. हाँ, एक लड़का मुझसे जरूर प्यार का दावा करता था, उसीने मुझसे कहा था की उसके साथ ऐसा -ऐसा होता है. तब मैंने यह सब जाना.
अजय- ओह. फिर क्या हुआ उस लड़के का, क्या तुमने उसकी मोहब्बत को ठुकरा दिया ?
चन्दा- नहीं, मैंने बिलकुल नहीं ठुकराया . मैंने सिर्फ उसे अपनी मजबूरी दिखा दी थी. उसे बता दिया था की मैं अपनी माँ की सेवा के लिए शादी नहीं कर सकती, और अब माँ गुजर चुकी है.
अजय- बहुत बुरा हुआ , क्या गुजरी होगी उस बेचारे के दिल पर ?
चन्दा- इसमें मेरा तो कोई कसूर नहीं, मैंने तो उससे नहीं कहा की मुझे चाहने लगो, मैंने उसको बहकाया भी नहीं. जो सच बात थी, उसे बत्लादी. .











Thursday, March 25, 2010

भाग -४३

मुझे तुमने ही तो सिखाया है की मानव समाज के लिए प्रेम एक सर्वोत्तम सौगात है। प्रेम प्रकृति का वह अनमोल उपहार है जो मानव जाति के अस्तित्व हेतु अति आवश्यक है। यदि मनुष्य के हृदय से प्रेम समाप्त हो जाए तो मानव जाति के विनाश को शायद कोई न रोक सके।प्रेम वह मधुर अहसास है जो जीवन में मिठास घोल देता है। कटुता दूर करने व वात्सल्य तथा भाईचारे के संचार में प्रेम की महती भूमिका है।
चंदा - मगर अफसोस! आज प्रेम का वह शाश्वत रूप नहीं रहा। प्रेम की नैसर्गिक अनुभूति आज आधुनिकता की चकाचौंध में कहीं खो गई है। वर्तमान में प्यार जैसे शब्द से सभी परिचित होंगे मगर सच्चे प्यार की परिभाषा क्या है, यह बहुत कम लोग जानते हैं।नाटकीय प्रभाव के चलते नायक-नायिका के क्षणिक प्यार को ही प्रेम का विस्तृत रूप समझ लिया गया है और वैसा ही प्रदर्शन युवा पीढ़ी भी करने लगी है। वह क्षणिक आकर्षण व उसकी आड़ में भावनाओं के शोषण को ही प्यार मानकर स्वयं तो गुमराह हो ही रही है, साथ में प्यार को भी बदनाम कर रही है।
अजय- हाँ , सच कहती हो , यदि यह सवाल उठे कि आखिर सच्चा प्यार क्या है? तो जवाब में हजारों तर्क दिए जा सकते हैं, जो सभी अपनी जगह सही भी होंगे, मगर यदि इन तर्कों का सार निकाला जाए तो वह है -प्रेम यानी संपूर्ण समर्पण भाव।
वास्तव में तो प्यार अभी तक प्यार है जब तक उसमें विशालता व शुद्धता कायम है। अशुद्ध व सतही प्यार न केवल दो हृदयों के लिए नुकसानदायक है बल्कि भविष्य में जीवन के स्याह होने की वजह भी बन जाता है।
चन्दा- बिलकुल ,विशुद्धतम वही है जो प्रतिदान में कुछ पाने की लालसा नहीं रखता। आत्मा की गहराई तक विद्यमान आसक्ति ही सच्चे प्यार का प्रमाण है। सच्चा प्यार न तो शारीरिक सुंदरता देखता है और न ही आर्थिक या शैक्षणिक पृष्ठभूमि। सच्चा प्यार बस, प्रिय के सामिप्य का आकांक्षी होता है। निर्निमेष दृष्टि से देखने की भोली चाह के अतिरिक्त प्यार शायद ही कुछ और सोचता हो। वास्तव में तो प्यार अभी तक प्यार है जब तक उसमें विशालता व शुद्धता कायम है। अशुद्ध व सतही प्यार न केवल दो हृदयों के लिए नुकसानदायक है बल्कि भविष्य में जीवन के स्याह होने की वजह भी बन जाता है।सच्चे प्यार का अहसास किया जा सकता। इसे शब्दों में अभिव्यक्त करना न केवल मुश्किल है बल्कि असंभव भी है।
अजय- सच्चे प्यार में गहराई इतनी होती है कि चोट लगे एक को, तो दर्द दूसरे को होता है, एक के चेहरे की उदासी से दूसरे की आँखें छलछला आती हैं। सच्चे प्रेम का 'पुष्प' कोमल भावनाओं की भूमि पर आपसी विश्वास और मन की पवित्रता के संरक्षण में ही खिलता और महकता है।
चन्दा- हाँ , अजय , और अब यह हम पर निर्भर करता है कि इसकी कोमल पंखुड़ियों पर सामाजिक बदनामी की अम्ल वर्षा करें या इसकी जड़ों को विश्वास एवं समर्पण के अमृत से सींचें।
अजय- मैं कभी कोई ऐसा क्रत्य नहीं करूँगा जिससे तुम पर किसी सामाजिक बदनामी की आंच आये, यकीं मानो , मैं अपने और तुम्हारे प्रेम का सम्पूर्ण आदर करूँगा।तुम्हें सदा खुश रखूंगा , कभी तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं आने दूँगा। तुम समझ रही हो न।
चंदा- हाँ, लेकिन मुझे इतना भी प्यार मत दो की मैं रो पडूं, मैंने जीवन में बहुत गम उठाये हैं। अकेली थी, और हजारों की भीड़ में भी खुद को अकेली खड़ी पाती थी, तुम मिले तो तुमने यह एहसास कराया है की मेरा अपना भी कोई है । लेकिन ... लेकिन मैं अपनी खातिर तुम्हारा नुक्सान नहीं करना चाहती, तुम्हारा भविष्य , तुम्हारा जीवन भी तो मुझे देखना है।
अजय- तुम समझने की कोशिश करो, पहले यह जान लो , की वह कौन सी बात है, कौन सा काम है जिससे मेरा कैरियर तबाह होगा ? अगर मेरी जिंदगी में तुम नहीं आयीं तब यह क़यामत आएगी, फिर तुम हो या मेरा परिवार , कोई सुखी नहीं रहा पायेगा। क्योंकि जब मैं ही सुखी नहीं , तो कौन सुखी रहेगा ?