लवगुरु-५६
डोली- मैं आज तक भी इस बात को नहीं समझ पाई कि आप जैसे मर्दों को औरत के सीने को सहलाने से क्या मिल जाता है, अरे जों भी प्रतिक्रया होगी वह तो हमारी
तरफ से होगी न, आपको भले इससे क्या फर्क पड़ता है ? मेरे कहने का अर्थ है कि आप लोगों को क्या आनंद आ जाता है और कैसे आ जाता है , मैं नहीं जान पाई
इस बात को , अब मेरे सीने को देखकर आपको नशा कैसे चढता होगा यह मेरी कल्पना से बाहर की बात है . ये सभी तो मांस के लोथड़े हैं. इस जिस्म के अंदर हड्डियां
हैं, खून है , सब बेकार की चीजीं हैं. इनमे उलझकर मर्द सब कुछ क्यों भूल जाते हैं ? क्या है मेरे पास ? आप ही बताओ. अरे इंसान के लिए सबसे जारूरी चीज होती है
दौलत, वो तो आप जैसे धन्नासेठों की गुलाम है. हमेशा आपकी तिजोरियों में कैद रहती है . उससे जोक हाहो खरीद लों , सब कुछ बिकता है यहाँ.
मुंशीजी - मैं तुम्हारी बात को काटूंगा तो नहीं, लेकिन इतना दावे के साथ कहना कहाहुंगा कि हर चीज बिकती होगी बाजार में, मगर मोहब्बत खरीदने की चीज नहीं होती ,
बेचने की कहीज नहीं होती, जिस किसीके पास भी मोहब्बत की यह दौलत होती है, वह गरीब कहाँ होता है , सबसे अमीर तो वही होता है . क्योंकि सच्ची मोहब्बत किस्मतवालों
को मिलती है . और हां, अगर यह शरीर रक्त और हड्डियों का है तो फिर संसार में और भी ऐसा क्या है जों इनसे कुछ अलग हो, कुछ खास हो , मुझे नहीं लगता कि तुम कुछ
कह पाओगी, बता पाओगी . शायद ऐसा हो सकता है कि जिसके पास दौलत हो उसे दौलत महत्वपूर्ण नहीं लगती और जिसके पास हुस्न हो तो उसको यह खास नजर नहीं आता , इसी तरह जिसके
पास मोहब्बत का खजाना हो, उसे मोहब्बत की कद्र नहीं होती.
डोली- मुझे लगता है कि आज मेरी जुबान लडखडा रही है . अगर चलूंगी तो संभवतः कदम भी लडखडाने लगेंगे. मुझे बहुत चढ गयी है क्या ? अआप्को तो कुछ फर्क नहीं पड़ा. मर्द
हो न, आपको पहले से आदत होगी, अगर आदत नहीं हुई तब भी झेल जाओगे और मैं ठहरी कमजोर , मुझे अगर पहले से ही पीने की आदत होती तब भी नहीं बर्दाश्त कर पाती . मगर
आप चिंता मत करो, मैं पूरा मजा दूंगी , मजा किरकिरा नहीं हिने दूंगी , आखिरकार आपने मेरे ऊपर लंबी रकम खर्च की है , उसे यूं ही बेकार नहीं जाने दूंगी , मेरा यकीन मानो , मैं किसी को भी निराश नहीं करती, सबका ध्यान रखती
हूँ, सबको सामान मजा देती हूँ, आपकी रात बेकार नहीं जाने दूंगी, लोग बड़ी हसरत से इस रात क०ओ खरीदते होंगे .
मुंशीजी- क्या ? ये क्या कह रही हो डोली, लगता है सचमुच तुम्हें चढ गयी है , ये क्या कह रही हो कि किसीकी रात खराब नहीं करती.
डोली- मैं तो मिसाल दे रही हूँ, मेरा मतलब ... मतलब ... मतलब ये था कि मेरी जगह पर अगर कोई और भी होती तो आपको आपकी रकम के बदले पूरा इंजॉय कराती , आज मैं
समझती हूँ कि मेरी भी वही जिम्मेदारी है. तो मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए , मैं कामचोर नहीं हूँ. आज मेरा दूसरा ही दिन है , मैं अपने काम को ठीक तरह से अंजाम देना
चाहती हूँ, मेरे कहने का गलत अर्थ मत लगाना , ठीक है न .
मुंशीजी- ठीक है, चलो एक -अक पैग और बनाओ , मैं भी अब बहकना चाहता हूँ, जब तक मास्टी नहीं आयेगी तब तक हम दोनों एक जैसे नहीं हो जाते , मैं देखना चाहता हूँ, यह
महसूस करना चाहता हूँ कि उस लेबल पर जाकर आदमी को क्या महसूस होता है , वह किस तरह की बात करता है .?
डोली बार-बार अपनी पलकें मूँद और खोल रही थी, पता नहीं उसे सचमुच चढ गयी थी या फिर वह किसी खास मकसद के लिए मुंशीजी के सामने इस तरह का प्रदर्शन कर
रही थी, मुंशीजी कि समाजः में सिर्फ यही आया कि उन्होंने दो लार्ज पैग तैयार किये, एक डोली के हाथ में थमा दिया और दुसरे को खुद गटक गए. अब तक वे चार -चार पैग
हलक से नीचे उतार चुके थे. डोली की आँखों में लाल -लाल डोरे तैर रहे थे, प्राथमिक द्रष्टिकोण से ऐसा लगता था जैसे वह पीकर टुल्ल हो गयी हो . वह खुमारी में बोल रही थी-
- आज रात हम लोग सुहागरात मनाने वाले नहीं हैं क्या ? कल तो खूब मजा आया था ? क्या मैं सो जाऊं ?
मुंशीजी- हाँ, कल तो खूब मस्ती काटी थी मगर आज लगता है तुम बोर हो रही हो, मेरा साथ अच्छा नहीं लग रहा ?
डोली- कौन बोला ? ऐसा कौन बोला ? मैंने कहा क्या कि मजा नहीं आ रहा ?
मुन्शीजी - न अहिं कहा तो नहीं है मगर तुम्हारा व्यवहार कुछ ऐसा ही लग रहा है , शायद आज हम सुहागरात नहीं मना पायें .
डोली- लेकिन क्यों ? आपने तो कल वादा किया था कि अब हमारी हर रात सुहागरात होगी .
मुंशीजी- इस सबके लिए मोहब्बत चाहिए डोली, बिना मोहब्बत के सुहागरात नहीं मनाई जा सकती , और बिना होश के मोहब्बत नहीं की जा सकती .
Sunday, October 3, 2010
Saturday, October 2, 2010
लवगुरु -५५
मुंशीजी उसी टॉप नंबर की वैश्या को अपनी हमदम, अपनी हमराज , अपनी जिंदगी समझ बैठे थे. वे चाहते थे कि डोली जीवन भर के लिए सिर्फ और सिर्फ उनकी हो जाए. लवगुरु ने तो बस यही कहा था कि आज की रात वे जी भरके सपने देखें और फिर बताएं कि उन्होंने किस तरह के सपने देखे, उनके ख़्वाब में किसी लड़की आयी , उसके साथ उन्होंने क्या किया ? मगर इस बीच होटल के वेटर ने उनको बहका लिया और फ़िल्मी स्टायल में डोली को उनके हवाले कर दिया . डोली तो वैसे भी बेहद सुन्दर थी, उसकी अदाओं का कोई जवाब नहीं था, वह जब मुस्कराती तो फूल झड़ने लगते थे. जब उसे पहली बार मुंशीजी ने देखा तो दीवाने हो गए थे , पगला गए थे . उनकी समाजः में ही नहीं आया था कि वेटर से कैसे इनकार करें जबकि वे तो छबीली के आशिक थे और शिव पांडे उर्फ लवगुरु से मिलने के लिए इसीलिए आये थे ताकि वे उनकी प्रेम कहाँ को सक्सेस कर सकें, उन्हें प्रेम करने के गुण बतला सकें मगर यहाँ तो मामला बिलकुल उलटा पद चुका था , ऐसा नहीं है कि मुंशीजी ने लवगुरु से लव टिप्स नहीं सीखे, सीखे थे मगर वे सभी टिप्स को छबीली के बजाय डोली पर ही अआज्माने लगे और बेचारी डोली क्या करती ? वह ठहरी बाजार की प्रशिक्षित गर्ल. उसने फ़ौरन ताड़ लिया कि बकरा हजम करने लायक है सो फ़ौरन हलाल कर दिया. प्यार का ऐसा जाल फेंका कि सब कुछ उलटा-पुल्टा हो गया. छबीली को चाहने वाला , उस पर मर मिटने वाला आशिक अब डोली की जुल्फों में कैद होकर रह गया था . उसने लवगुरु से बिस्तर पर पार्टनर को संतुष्ट करने के जों भी तरीके सीखे थे वह उन तरीकों को चाबीली के बजाय डोली पर आजमा रहा था . डोली को उसके ग्राहक ग्रेट ब्यूटी के नाम से भी जानते थे, वह सिर्फ तन की ही नहीं , बल्कि बुद्धि की भी चालाक थी. उसको खूब सुन्दर होने के साथ-साथ बुद्धिमान होने का भी गौरव प्राप्त थी. उसकी वाकपटुता गज़ब की थी.जों कोई भी डोली से बात करता था, उसके शब्दों की मिठास का दीवाना हो जाता था. छबीली कसबेनुमा शहर की कोरी करारी और कुंवारी लड़की थी. जब वह कुछ मेहनत का काम करती और उसके माथे से पसीना टपकता तो उसकी सुंदरता और बी ही बढ़ जाया करती थी. उसका चेहरा सुर्ख लाल था. आँखें कारी, कजरारी , झील जैसी गहरी. कमर इतनी पतली और फिगर इतना आकर्षक कि करीना कपूर भी फेल हो जाए. वैसे तो वह आसपास के सभी लड़कों की आँख की किरकिरी थी, सभी उसकी कमसिन जवानी का रस चूसने को बेताब थे मगर वह बची हुई थी. अभी तक किसीके कब्जे में नहीं आयी थी. वह अपने काम से काम रखती थी. उस कसबे में भी मुंशीजी की कई बड़ी-बड़ी दुकाने थीं, जिन दुकानों पर रोजाना हजारों लाखों की आमदनी हुआ करती थी. छबीली भी उनकी दूकान पर आया करती थी और उसे देखने भर के लिए मुंशीजी अपना लंबा -चुअदा कारोबार छोड़कर यहाँ की उस दूकान पर आया करते थे , जिस पर सामान लेने के लिए छबीली आया करती थी. लोक लाज से बचने के लिए वे छबीली से न तो प्रेम का प्रस्ताव ही रख पाए थे और न ही कभी उन्होंने उसके घरवालों के सामने प्रस्ताव रखा था . उन्होंने सुन रखा था कि गरीब लोग बहुत स्वाभिमानी होते हैं, वे भले ही कम खा सकते हैं मगर कम सामान बर्दाश्त नहीं पाते, चाहे वे अपनी बेटी की शादी किसी रिक्शा चलाने वाले के साथ कर सकते हैं मगर ज्यादा उम्र के रईस के साथ नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें इस बात का डर रहता है कि उनके लोग उन पर अपनी बेटी बेचने का आरोप लगा सकते हैं, मुंशीजी को डर था कि कहींउनकी बात का गलत अर्हत निकालकर ,मामले को तूल न डे दिया जाए , और इस कारण हो सकता है कि छबीली उनकी दूकान पर आना -जाना भी छोड़ दे .
अभी तक मुंशीजी छबीली के बारे में ही सोच रहे थे कि डोली ने टोक दिया -
-किन ख्यालों में डूबे हो ? क्या अपनी चाहने वाली के बारे सोच रहे हो ?जरूर कोई न कोई है. मैं नहीं मान सकती.मर्द बड़े छलिया होते हैं. दस से इश्क फरमाते हैं. चार-छः को शादी का प्रस्ताव देते हैं और दो से तीन शादियाँभी करते हैं. दिखाने को एक बीवी रखती हैं मगर फिर भी दूसरी-तीसरी के साथ सेक्स करते ही हैं. अंदरूनीसम्बन्ध के बारे में मैंने सूना है कि मर्दों को एक औरत में मजा नहीं आता, इसलिए वे अन्य महिलाओं केसाथ में सम्बन्ध बनाते हैं.
मुंशीजी- यकीन मानो , मैंने सिर्फ तुम्हारे साथ सुहागरात मनाई है , किसी गैर स्त्री के साथ कभी शारीरिक सम्बन्धनहीं बनाए, हाँ, किस की बात अलग है . या फिर थोड़ा बहुत सीने को सहला लिया. मुझे भारी सीने बहुतउत्तेजित करता है. जैसा कि तुम्हारा है, इसे देखते ही मुझे नशा सा चढ जाता है. मन में आग लगने लगती है.जिस्म गर्म हो जाता है. ``
Thursday, September 30, 2010
lavguru-54
जब भी मुंशीजी किसी उलझन में होते होते थे तभी उनको लवगुरु की बातें याद आने लगती थीं, उन्होंने ही तो कहा था कि सेक्स जीवन तभी आनंदमय बन सकता है जब आप या आपका साथी अधिक विचार ना करे. जब आप एक दूसरे के करीब हों तो विचार को त्याग कर एक दूसरे में खो जाएँ. यह ना सोचें कि यदि आपने ऐसा किया तो उन्हें कैसालगेगा. अपने आपको वैसा ही रखें जैसा कि आप खुद को महसूस करते हैं. ना तो बदलने की कोशिश करें ना ही कुछ ऐसा करने की जो आपको कृत्रिमता का अहसास दिलाए और आपके साथी को भी. महिलाएँ विशेष रूप से अपनी छवि को लेकर काफी आशंकित रहती हैं. सेक्स के दौरान यह सोचना कि क्या मैं ऐसा करते समय ठीक लगुंगा, उन खास पलों को बदरंग बना सकता ह
पोर्न फिल्मों और साहित्यों पर ना जाएँ. अच्छे सेक्स के लिए यह आवश्यक नहीं कि आप क�
��स मुद्रा का प्रयोग करते हैं और क्या नया आविष्कार करते हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आप और आपकी साथी कितनी संतुष्टि प्राप्त कर रही है. अच्छा सेक्स प्राकृतिक और नैसर्गिक होता है, उसमें नयापन डालने का अत्यधिक प्रयास ना करें. बेहतर है सबकुछ समय पर छोड़ दें और एक दूसरे में खो जाएँ. यह बात पुरूषों पर अधिक लागू होती है. अधिकतर पुरूष सोचते हैं कि यदि उन्होनें सेक्स के दौरान कुछ नया नहीं किया तो यह उनकी साथी को पसंद नहीं आएगा, जो कि सच नहीं है.
पुरूष और महिला में उत्तेजना का स्तर और उत्तेजित होने में लगने वाले समय में अंतर पाया जाता है. सेक्स के दौरान अपने साथी की ईच्छा और उनकी मर्यादा का ध्यान रखें. अत्यधिक उत्तेजित होने से बचें और सयंम से काम लें. सेक्स के दौरान फोरप्ले का अधिक से अधिक आनंद लें. मात्र फोरप्ले से भी आनंद प्राप्त किया जा सकता है. अपने साथी से सीखें. अच्छा सेक्स तब और विकसित होता है जब दोनों व्यक्ति एकदूसरे की पसंद नापसंद को समझने लगते हैं और हर बार कुछ नया सीखते हैं.
मुंशीजी ठीक इसके विपरीत कर रहे थे, जहां उन्हें प्रेम की क्रीडा में मस्त हो जाना चाहिए और रासलीला मनानी चाहिए वहाँ पर वे सोच विचार में डूबे हुए थे. वे उस अनाड़ी
बच्चे की तरह थे , जिसको किसी खेल के बारे में कुछ नहीं आता ओ और उसने जों किताब से सीखा हो, उसे वह याद-याद कर-करके अंजाम डे रहा हो . मुंशीजी का यौवन
बिना प्रेम किये ही गुजर गया, उनके आसपास कितने ही फूल खिले, कितनी ही कलियाँ चटकीं, मगर मुंशीजी के मन का भंवरा कभी उन कलियों या फूलों पर नहीं मंडराया ,
उन्हें तो बस बिजनेस से लगाव था, जल्दी से जल्दी करोड़ों रु०पये कमाना चाहते थे, बड़ी- बड़ी गाड़ियों में चलने और बड़ी से बड़ी कोठी में रहने का ख़्वाब था, जिसे अपने परिश्रम और
सूझ-बूझ के कारण उन्होंने जल्दी ही हासिल कर लिया, दौलत तो उन्होंने अपनी उम्मीद से ज्यादा कमाली मगर किसी हसीन का दिल नहीं जीत पाए . बिजनेस के मामले में वे
होशियार थे मगर उतनी ही नीतिपरक भी थे, यह उनको मंजूर नहीं कि उनका कोई स्टाफ , चाहे वह सेक्रेटरी ही क्यों नहो वह उनकी तरफ हसरत भरी निगाह से देख भी पाए,
मजाल है कि कोई लड़की उनकी तरफ देखने का दुस्साहस भी कर सके. वे बस काम से काम रखते थे और लोगों से मतलब की बात करते थे. उनके पास जितना भी समय था ,
सबकी रूपरेखा बनी हुयी थी. हर समय फिक्स था. जैसे कि कितने बजे सोकर जागना है, कितने बजे नाश्ता करना है और फिर कितने बजे खाने के बाद पांच मिनिट के लिए
पुराने गीत सुनने हैं. उन्हें किशोर कुमार टाइप छेडछाड भरे गाने खूब पसंद थे. बाथरूम सिंब्गर भी कमाल के थे. किसी ने सलाह दी कि वे अपनी एक फिल्म प्रोड्यूस करें जिसमें
वे खुद गीत गायें तो यह सलाह उन्हें इतनी नागवार गुजरी कि उस स्टाफ को नौकरी से ही निकाल दिया. अब आगर वे कहीं फंसे तो जवानी के गुजर जाने के बाद फंसे, वो भि९ डोली के
चक्कर में , उस डोली के चक्कर में , जिसके चक्कर में हजारों लोग फंसे हुए थे. जिसकी अदाओं के दीवाने हर शहर में मौजूद थे और जों देश की नंबर वन मंहगी वैश्या थी.
Tuesday, September 28, 2010
लवगुरु-५३
मुंशीजी- लेकिन, मेरी तुम्हारी यह जोड़ी क्या बेमेल नहीं है ?
डोली- अक्सर ऐसी जोड़ियों को देखकर आपको आश्चर्य हो सकता है कि आखिर एक अच्छी-भली लड़की को शादीशुदा मर्द में क्या दिखाई दिया? लेकिन इसमें नया कुछ नहीं है। इसके पीछे दो कारण प्रमुख हैं। एक तो फिल्मों की अभिनेत्रियाँ जो शादीशुदा मर्द का, जबकि आप तो अभी तह शादीशुदा भी नहीं है , हाथ थाम रही है और दूसरा मानव मनोविज्ञान।
अभिनेत्रियों का इस तरह के मर्दों को अपनाना जायज नहीं तो स्वीकार्य इसलिए हो जाता है कि फिल्मों में काम करने वाली लड़कियों को अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता फलस्वरूप अच्छे घरों के लड़के उन्हें पत्नी नहीं बना सकते। फिल्म अभिनेत्रियाँ मनोरंजन के लिए उन्हें मंजूर है लेकिन जीवनसाथी के रूप में नहीं। ऐसे में किसी विवाहित मर्द को चुनना ही उनकी मजबूरी है। उस मजबूरी को नहीं देख पाती है और नकल के फेर में शादीशुदा मर्द से संबंध स्थापित कर यह दर्शाने की कोशिश करती है कि वह समय के साथ चल रही है। अपनी जिंदगी खुद दाँव पर लगाती है। जहाँ तक मनोविज्ञान का सवाल है, यह सर्वमान्य सत्य है कि एक ही व्यक्ति आपको हमेशा ही अच्छा नहीं लग सकता। यह बेहद स्वाभाविक है कि थोड़े समय में आपको कोई और बेहतर लगने लगे लेकिन भारतीय संस्कार जब आड़े आते हैं, जब एक पति-एक पत्नी व्रत जैसी धारणाएँ याद आती है तब चोरी-छुपे ऐसे रिश्ते पनपते हैं।
इसके पीछे छुपे कारणों पर नजर डाली जाए तो हमारे यहाँ शादियाँ पारंपरिक ढंग से होती है। इस तरह की शादियों में पति-पत्नी एक-दूसरे से जो पाते हैं, उसमें पाने का सुख तो होता है लेकिन विजय की अनुभूति नहीं। दोनों जानते हैं कि उनके बीच रिश्ते का जो बंधन है, वह जाति, खानदान, रीति रिवाज, हैसियत, कुंडली, खूबसूरती आदि कितने ही आधार पर खड़ा है। यानी पारंपरिक शादी में अक्सर रोमांच का अभाव रहता है। मियाँ-बीवी दोनों जानते हैं कि उन्हें एक-दूसरे से क्या, कितना और क्यों पाना है। उनके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं रहता कि उन्हें एक-दूसरे से जो मिल रहा है, उसी में संतुष्ट रहें। अधिकांश लोग ऐसी ही बेरंग जिंदगी जी रहे हैं।
ऐसे में अगर कोई तीसरा जिंदगी में आ जाए तो यह तीसरा वह सबकुछ देता है जो पति को अपनी पत्नी से या पत्नी को अपने पति से नहीं मिल रहा है। ऐसी ही स्थिति में बीज पड़ता है उस अवैध प्रेम का - प्रेम जो समाज की निगाह में गुनाह है। लेकिन इस प्रेम का नशा ही कुछ और है क्योंकि इसमें जीत का एहसास है।
इस प्रेम संबंध में हमें तीसरे से जो ���िलता है, वह सात फेरे के रिश्ते की वजह से नहीं, किसी समझौते के कारण नहीं,किसी शारीरिक जरूरत के चलते नहीं, वह मिलता है क्योंकि उस तीसरे ने हममें कुछ खास पाया। इस प्रेम में एक उपलब्धि है क्योंकि उस तीसरे ने लाखों लोगों में हमें चुना है। हालाँकि अब जो रिश्ते सामने आ रहे हैं उनमें शारीरिक आकर्षण अधिक और प्यार जैसा मामला कम होता है शायद ऐसा वहीं होता है जहाँ पति-पत्नी में प्यार न हो। लेकिन ऐसा नहीं है, ऐसे कपल्स की ज़िंदगी में भी कोई आ सकता है जहाँ दोनों में पूरा प्यार और विश्वास हो। शायद आपको भरोसा न हो लेकिन ऐसा भी हो रहा है।
क्यों होता है ऐसा? क्योंकि संसार में कोई भी परफेक्ट नहीं होता। लव मैरिज में भी दो व्यक्ति एक-दूसरे को इसलिए नहीं अपनाते कि दोनों दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्त्री-पुरुष हैं। दोनों एक-दूसरे को इसलिए चुनते हैं क्योंकि जीवन के किसी मोड़ पर दोनों ने एक-दूसरे को अपने अनुकूल पाया। ऐसा बिल्कुल मुमकिन है कि आज कोई लड़की आपको बहुत अच्छी लगी और आपने उससे शादी कर ली लेकिन साल, दो साल बाद कोई और लड़की मिली जिसमें कुछ और खासियतें हैं जो आपकी खुद की चुनी पत्नी में नहीं, और आपको वह भी अच्छी लगने लगे। यही हाल किसी लड़की का भी हो सकता है जिसने किसी लड़के को खुद चुना हो, कुछ सालों बाद कोई और लड़का उसे अच्छा लगने लगे क्योंकि उसमें कुछ और खूबियाँ हैं।
कहने का मतलब यह कि पारंपरिक शादी हो या लव मैरिज, ज़िंदगी में किसी तीसरे के आने के चाँसेस हर जगह हैं। कहीं बात बढ़ती है, कहीं दबकर रह जाती है। क्योंकि प्रेमी या प्रेमिका के लिए परिवार तोड़ना बहुत कम लोग चाहेंगे। ऐसे में अधिकतर रिश्ते गुपचुप ही चलते हैं। कुछ हिम्मतवाले समाज की परवाह किए बिना आगे भी बढ़ जाते हैं।
समाज में ऐसे रिश्ते तेजी से फैल रहे हैं जो इन्हें नहीं मानता वह पिछड़ा हुआ है और जो जमाने की परवाह किए बगैर बेखटके रिश्तों में रोमांस की पींगें बढ़ा रहा है वह लाइफ के भी मजे लूट रहा है। दबे-छुपे उनकी चर्चा सब करते हैं लेकिन सामने आकर कुछ कहने का साहस किसी में नहीं क्योंकि आखिरकार वह उन दोनों या कहें तीनों का पर्सनल मामला है।
इन रिश्तों में शादीशुदा मर्द नुकसान में नहीं है लेकिन कुँवारी लड़की की नैया डुबना तय है। उधर अगर शादीशुदा महिला है तो उसकी बदनामी निश्चित है और यहाँ कुँवारा कोरा बच जाएगा।
लवगुरु -५२
फिल्म के संवाद आनंद प्रदान कर रहे थे , तभी डोली ने मुंशीजी को टोक दिया , बोली-
-इस फिल्म में सिर्फ मर्दों के बारे में ही ज्यादा जानकारियाँ दी जा रही हैं, क्या कोई ऐसी फिल्म नहीं है जों हमारे बारे में भी जानकारी देती हो , जैसे की महिलायें सेक्स क्यों करती हैं ? उन्हें किस तरह से ज्यादा सुख मिलता है वगैरह .वगैरह . ज़रा बात करके देखो न.
मुंशीजी- हाँ क्यों नहीं ? अभी नबात करता हूँ. होंगी तो जरूर .
मुंशीजी ने काउंटर पर फोन घुमाया और अपनी इच्छा जाहिर करदी , कुछ देर बाद ही एक वेटर सेवा में हाजिर हो गया, उसके पास बहुत सारी फ़िल्में थी. डोली के होठों पर मुस्कान उभर आई, बक्शीश लेकर वेटर चलता बना , मुंशीजी ने सेक्स शिक्षा पर आधारित एक फिल्म स्टार्ट करदी. यह हिन्दी फिल्म थी. नायिकाएं उतनी खूबसूरत नहीं थी, मगर उनकी डायलोग डिलीवरी गज़ब की थी.
-जानते हो ज्यादातर महिलाएं पुरुषों के साथ सेक्स सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उनकी शादीशुदा जिंदगी में शांति बनी रहे , या वह बिना वजह के सिरदर्द से बचना चाहती हैं। महिलाओं की लिस्ट में रोमैंस और पेशन की जगह काफी पीछे है।
रिसर्च के दौरान देखा गया कि ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , जबिक महिलाओं को पुरुषों में ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती।
एक महिला ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि उसे आध्यात्मिक अहसास हो सके। उसने दावा किया कि यह ईश्वर को करीब से महसूस करने का जरिया है। लेकिन ज्यादातर महिलाओं ने सेक्स का जो विवरण दिया वह इससे कहीं ज्यादा दुनियावी था।
कुछ महिलाओं ने माना कि वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि उनकी जिंदगी में शांति बनी रहे या उनकी घर - संसार की जरूरतें पूरी होती रहें।एक महिला ने बताया - वह सेक्स इसलिए करती है ताकि बोरियत दूर कर सके क्योंकि सेक्स करना लड़ने से कहीं आसान है। जबकि कुछ दूसरी महिलाओं के लिए यह माइग्रेन और सिरदर्द दूर भगाने का उपचार है। एक महिला ने कहा कि मैं कई पुरुषों के साथ सिर्फ इसलिए सोई क्योंकि मुझे उन पर दया आ रही थी। वहीं , कुछ महिलाएं अपने स्वार्थ के लिए सेक्स का इस्तेमाल करती हैं जैसे रुपये - पैसों के लिए , और
ज्यादातर महिलायों ने माना कि वह आमतौर पर ऐसे पुरुष के साथ सो चुकी हैं जो उनका बॉयफ्रेंड नहीं हैं। कुछ ने कहा - वह सेक्स इसलिए करती हैं ताकि अपनी सेक्सुअल परफॉर्मंस को इंप्रूव कर सकें। यही बताते हुए एक स्टूडंट ने कहा - मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ इसलिए सेक्स किया ताकि मैं अपने सेक्सुअल स्किल्स को और बेहतर बना सकूं।
इस रिसर्च में यह भी पता चला कि महिलाएं ऐसे पुरुषों पर ज्यादा आकर्षित होती हैं जो लंबे हों , जिनकी आवाज़ रौबदार हो और जिनके शरीर से मदहोश कर देने वाली महक आती हो।हांलाकि ऐसी महिलायें भी कम नहीं हैं जों कहती हैं कि परम सुख पाने के लिए वे कामक्रीड़ा करती हैं.
डोली- आपको क्या लगता है, क्या सेक्स के बिना नींद नहीं आने का भी कोई कारण हो सकता है ?
मुंशीजी- किसी और का तो पता नहीं , मगर यह तय है कि अब भविष्य में कभी भी मैं तुम्हारे बिना, तुमेहन देखे बिना, तुमसे प्यार किये बिना सो नहीं पाउँगा. यह बात सत्य है.
डोली- ओहोहो ... एक बात कहें मुंशीजी ? आप हैं न दीवाने हो गए हैं. सच बात तो ये है.
मुंशीजी- दीवाने नहीं पागल, तुम्हारे प्यार ने सचमुच पागल बाना दिया है, ये है सच्चाई . मैं कहाँ इससे इनकार करता हूँ, एक तरह से देखा जाए तो यह ठीक ही हुआ कि मेरे बिना बताए ही तुम जान गयी, अपनी जुबान से कुछ कहना ज़रा अच्छा नहीं लगता . जों सचमुच प्रेम करने वाले हैं, वे ऐसे ही होते हैं. दिल से आवाज निकलती है और पहचान ली जाती है.
डोली- दिल की कुछ मत कहो, इस दिल में जहां कर देखो , इसमें आपकी तस्बीर छाप गेई है हमेशा के लिए . जैसे हाथ पर टैटू गुदवाए जाते हैं और फिर कभी उनको मिटाया नहीं जा सकता , उसी तरह की ये तस्बीरें हैं, कितने भी मौसम आयें, कितने भी बरस हो जाएँ, भले ही यह जिस्म फना हो जाए मगर आपकी तस्बीर ज्यों की त्यों रहेगी.
Monday, September 27, 2010
लवगुरु-५१
अब डोली से रहा नहीं गया, फ़ौरन टोकते हुए बोली-
-रह-रहकर कहाँ गुम हो जाते हो सरकार ? क्या सोचने लगते हो ?
मुंशीजी- लवगुरु की सलाह रह-रहकर याद आती है, और तुम भी तो कुछ कम नहीं हो . बहुत उम्दा ख़याल रखती हो . थोड़ी देर पहले जों सेक्स पावर बढाने वाली दवा के बारे में कहा , वह सटीक है . अच्छी खान-पान से भी सेहत बनाई जा सकती है, कामशक्ति बढाई जा सकती है. बचपन से एक कहावत तो सुनी ही होगी, ‘जैसा खाए अन्न वैसा हो मन’. इसी का वास्ता देकर जाने कितनी ही बार मां ने सादा खाना खाने पर मजबूर किया होगा और आपने चुपचाप अच्छी सेहत के लिए खाया भी होगा. अब अगर कोई ये कहें कि यह कहवात महज सेहत और मानसिक शांति के लिए ही नहीं, बल्कि बिस्तर पर गुजारने वाले समय के लिए भी है, तो यकीनन तुम हैरान रह जाओगी .
डोली- ऐसी क्या खास थ्योरी है, ? सुनूं तो सही .
मुंशीजी-लवगुरु कहते हैं कि बिस्तर पर प्यार और साथी के साथ का जायका बढ़ाने में आपका मेन्यू काफी अरसदार होता है. बिस्तर पर आपके साथी के साथ आपके संबंधों पर इस बात का भी पूरा असर पड़ता है कि आपके मेन्यू में क्या-क्या शामिल है.
जान लीजिए कि ऐसे कौन से फल या सब्जियां हैं, जिन्हें अपनी लिस्ट में शामिल करने से बिस्तर पर आपका साथी आपका कायल हो जाएगा. खाने में इन चीजों का तड़का आपके मन में बिस्तर पर ज्यादा समय बिताने की इच्छा और क्षमता बढ़ाती है. �
केला, अंजीर, रुचिरा को अपने खाने में शामिल करें. क्योंकि यह आपके मन में प्यार करने की इच्छा पैदा कर आपके कामोत्तेजना को बढ़ाने में सबसे ज्यादा सहायक फल होते हैं.
इनके साथ ही अपने खाने में मीठी तुलसी, मिर्च और शहद भी शामिल करें. इन आहारों में ‘लव कैमिलक’ होता है. इनके अलावा स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी तो बेहद रोमांस पैदा करने वाली होती है.
महिलाएं ज्यादातर अच्छा और स्वादिष्ट भोजन लेना पसंद करती हैं. जबकि पुरुष अपने व्यवहार की ही तरह नई-नई चीजों को आजमाने के लिए तैयार रहते हैं. खानपान के शौकीन पुरुषों प्यार का जायका बढ़ाने के लिए चावल और हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ ही साथ फल भी खाएं. तो आज से ही अपने मेन्यू में शामिल करें कुछ नई चीजें. और बिस्तर पर अपने साथी को कर दें हैरान.मैं भले ही उम्र में तुमसे बड़ा हूँ लेकिन फिर भी बिस्तर पर तुम्हें पूरी खुशियाँ डे रहा हूँ, इसका कारण यह डाईट ही है.
डोली- किसने सिखाया ये सब ?
मुंशीजी- ये सब पुराने टोटके हैं और यकीन मानिए कि एकदम सटीक हैं , कोई फेल नहीं होता. आज की काम क्रीडा के दौरान यह सिद्ध भी हो जाएगा.
डोली- ज्यादा कुछ मत कीजिये , मैं तो पहले से ही परेशान हूँ, आपकी ताकत संभालना मेरे वश में नहीं है.
मुंशीजी ने डोली के यौवन का रस चूसने के प्रयास शुरू कर दिए , जब खामोशी आई तो फिल्म की याद भी आई जों काफी देर से चल रही थी. फिल्म का हीरो कह रहा था -
-आप चाहें तो अपने पार्टनर को इतनी खुशी दे सकती हैं कि वह आपके सिवाय कहीं और जाने की सोच ही न पाए. इसके लिए आपको जरूरत है बस उनकी तारीफ करने की. पर हां, तारीफ बेसिर पैर की नहीं ऐसी बातों की जो वह सुनना चाहते हैं.
जब कभी उनके काम को सराहना मिले और वह इस बात को आपसे शेयर करें, तो अपनी खुश�
को दबाएं मत. झूम कर उन्हें इस बात का अहसास कराएं कि आपको पहले से ही इस बात की आशंका थी. उन्हें बताएं कि यह तो एक छोटी सी कामयाबी है वह इससे कहीं ज्यादा के लायक हैं.
ओह! मजेदार , जब कभी बिस्तर पर आप दोनों को प्यार के मीठे पल बिताने का अवसर मिले और वह आपको संतुष्ट कर दें, तो उन्हें इसके लिए शुक्रिया कहें. हां आप चाहें तो संबंधों दौराना भी उन्हें यह बात कह सकती हैं कि उनके साथ इस पल को आप खूब इंज्वाय कर रही हैं और बार बार आनंद की इस सीमा को पाना चाहती है.
लवगुरु -५०
समझ गयीं न , मेरे कहने का क्या मतलब है . और ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि हमारे इस शरीर में अगर कोई तकलीफ होती है, कोई खास हिस्सा काम करना बंद या कम कर देता है तो हमें साफ़ समझ लेना चाहिए कि जरूर इसके पीछे कोई खास कारण है. जब तक हम उस कारण को ढूंढकर उसका पुख्ता इंतजाम नहीं करेंगे तब तक कुछ हासिल होने वाला नहीं है. मेरा दिल तो यही कहता है कि दवा से बेहतर है कि काम शक्त बढाने के लिए कुछ घरेलू और प्राक्रतिक , मगर ठोस उपाय किये जाएँ.
डोली- मेरा भी यहीमानना है. अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है, ठीक तरह से काम क्रीडा नहीं कर पा रहा है तो डॉक्टर से उसकी जांच करवाई जानी चाहिए, बिना जांच के दवा खाना मतलब अपनी किडनियों को गंवाना भी हो सकता है .
मुंशीजी- वाह डोली , तुम तो यार डॉक्टर की भाषा में ही बात कर रही हो , लगता है तुम्हें अच्छा खासा ज्ञान है .
डोली- सिर्फ जनरल नोलेज है सरकार . बाकी कुछ खास नहीं . जैसा आम बोलचाल, अखबार , मैग्जीन या किसी टीवी पर देख सुन लेती हूँ उसी आधार पर अपनी एक सोच गढ़ लेती हूँ, जों कि गलत भी हो सकती है.
मु न्शीजी - बिलकुल नहीं और कभी नहीं. जब हम अपने दिल और दिमाग से पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ निष्पक्ष भाव से कुछ सोचते हैं तो वह ज्यादातर सही ही होते है. गलत की गुंजाइश बहुत कम होती है.
डोली- लोग ऐसी फिल्मों को ब्लू फिल्म क्यों कहते हैं , समझ से बाहर है. अरे इसमें तो पूरा ज्ञान भरा पड़ा है. यह फिल्म हमें सिखाती है कि किस तरह से अपने पार्टनर के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाएँ , कैसे उसे ज्यादा संतुष्ट रख सकते हैं, कैसे उसका दिल जीत सकते हैं और कैसे अपनी जीवन सुखी बना सकते हैं.
मुंशीजी- हाँ, मैं तुमसे सहमत हूँ, इसमें भले ही नग्न द्रश्य दिखाई डे रहे हैं मगर उसके बिना तो बतया नहीं जा सकता . यह फिल्म बहुत उपयोगी है और मेरे ख्याल से हर शादीशुदा जोड़े को इसे देखना चाहिए .
डोली उसका जबरदस्त समर्थन कर रही थी, मुंशीजी अपने मकसद में कामयाब होते दिख रहे थे. लवगुरु ने ही तो उन्हें सिखाया था कि अगर आपकी प्रेमिका सुंदर, प्यारी, हॉट होने के साथ ही बिस्तर के पलों के लिए उत्साह तो बहुत रखती हैं, लेकिन उनके भीतर की झिझक हमेशा आपके अरमानों पर पानी फेर देती है. इसी बात से आप परेशान हैं. आपको अपने साथी की बातें और सादगी बहुत भाती है, लेकिन वही सादगी उस समय बहुत खलती है, जब आप संबंधों के बारे में बातें शुरू करते हैं. उनकी झिझक आपके भीतर के उफान को बुरे तरीके से झकझोर देती है और आप रह जाते हैं मन मसोस कर.
तो उदास न हों. आप चाहें तो अपनी शालीन सी साथी को बदल सकते हैं एक बेहद शरारती लड़की में, जो अपनी हरकतों से रह रह कर आपको उत्साहित कर सके और आप दोनों के रिश्ते की गरमाहट को बढा सके. अपनी महिला साथी को उनकी सादगी के लिए कोसें नहीं, बल्कि उन्हें कहें कि उनकी सादगी पर ही आप फिदा हैं, लेकिन उनकी सादगी से परे वह एक हॉट लडकी हैं. फिर देखिए किस तरह अपने माता पिता की प्यारी सी बच्ची आपकी हॉट गर्लफ्रेंड में तबदील हो जाती है.
अपनी साथी को मनमुताबिक बनाने के लिए पहले आपको उनके मन को परखना होगा. जब कभी वह अपने मोटे होने के भय की बात करें, तो आप �
��तुरंत किसी जिम का पता लगा कर उनकी मदद करें. या गर वह बंजी जंपिंग की बात करती हैं, तो उनकी खुशी को ध्यान में रखते हुए उनके लिए इसका इंतजाम करें या उन्हें एकदो दिन के भीतर ही बंजी जंपिंग के लिए ले जाएं. उनके डर से लड़ने में आप जितनी उनकी मदद करेंगे वह उतनी ही खुल कर आपसे बातें करेंगी. हां, इससे उनकी हिम्मत में इजाफा होगा और वह कोई भी ऐसा काम करने का साहज जुटा पांएगी, जो पहले करने से कतराती हों. बस फिर क्या है आप धीरे-धीरे अपनी राह पकडें और उन्हें एक दिन मौका देख कर मन की बात कह दें. शर्माते हुए ही सही वह आपकी बाहों में समा जाएंगी.
जब कभी आप अपने प्यार के साथ पब्लिक प्लेस में हों, तो उनके कान में धीरे से कहें कि उनकी खूबसूरती आपको उत्तेजित कर रही है. साथ ही छोटी सी किस भी दे दें. इस तरह से भीड़ में आपकी यह बातें उनके भीतर उत्साह भर देंगी और इसका सारा फायदा आपको मिलेगा उस समय जब आप दोनों अकेले होंगे.
अपने खयालों में उनके बारे में कुछ गरमागरम सोचिए, कुछ ऐसा जो आप उन्हें करते हुए देखना चाहते हैं. यह ख्वाब उन्हें भी बताएं. ऐसा करने से उन्हें साहस मिलेगा. और यह विश्वास कि आपको उन पर विश्वास है
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