लवगुरु, भाग-३७ , इसलिए यौन रोगों के मामले में तो यही कहा जा सकता है कि बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है. वरना जीवन भर पछताने के अलावा कोई चारा
नहीं रह जाता. मैंने अखबारों में कई पढ़ा है कि एड्स पीड़ित व्यक्ति को किस तरह समाज में भी अपमान सहना पड़ता है . एक तरह से उनको बहिष्कृत कर दिया जाता है.
मुंशीजी- बिलकुल सही बात है , मगर भरोसा भी कोई चीज है, मुझे भरोसा है तुम पर. मेरा दिल कहता है कि किसी तरह की कोई यौन बीमारी न तो तुम्हें होगी और न ही मुझे .
डोली- भरोसा करना एक बात है और होना एक दूसरे बात. जरूरी नहीं कि हम जों सोचती हैं हमेशा वही सच हो.
मुंशीजी- हाँ , बात में दम तो है, इस बात को हम तुम समझ सकते हैं, बचाव भी कर सकते हैं मगर उन लोगों का क्या जिन बेकसूरों से जबरन बलात्कार किया जाता है. अगर
जबरदस्ती करने वाला किसी बीमारी का शिकार है, खासकर एड्स जैसी भयानक बीमारी का , तब क्या होगा ? बेचारी पीड़ित भी इसका शिकार हो जायेगी और उसका जीवन हमेशा के लिए
अंधकारमय हो जाएगा.
डोली- हाँ, औरत का गहना होती है इज्जत. इज्जत महिला के अस्तित्व से भी ज्यादा मायने रखती है. इसकी कीमत सिर्फ एक महिला को ही पता होती है. इज्जत एक शब्द जिस पर महिलाओं का संसार टिका है. अब जरा सोचिए, आपके पुरुखों की सम्पति
या आपका सबसे कीमती सामान कोई चुरा कर ले जाए जिसकी वजह से आप समाज में तुच्छ निगाहों से देखे जाएं तो आप क्या करेंगे. इस पीड़ा का अनुभव तो मात्र एक प्रतिशत भी नहीं उस पीड़ा की जो उस लड़की को होती है जिसके साथ बलात्कार हुआ
हो. बलात्कार किसी भी लड़की के लिए मौत से पहले मौत होती है.हमारे गाँव में रहने वाली एक लड़की के साथ जो हुआ वह मौत से कम नहीं था. पहले तो रानी के साथ उसके शरीर का कुछ वासना के भोगियों ने बलात्कार किया, उसके बाद उस असहाय को
उसके खुद के माता-पिता ने कलंकिनी, कलमुंही जैसे अलंकारिक नाम दिए. कानून के रक्षकों ने उसे इंसाफ दिलाने की बजाय उसे ही दोषी माना और अंत में समाज की चुभती आखों से बचने के लिए उसने आत्महत्या को बेहतर माना.
मुंशीजी -ओह , बेहद दुखद है. बलात्कार जैसे शब्द से ही अनुमान लगता है बलपूर्वक किया गया काम. अक्सर बलात्कार का प्रयोग उस जगह किया जाता है जहां 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ जबरदस्ती उसकी इज्जत लूटी जाती है. हालांकि यही
शब्द 18 वर्ष से ऊपर की लडकियों के लिए भी लागू होता है. रेप या बलात्कार एक ऐसा अपराध है जो एक स्त्री के साथ जबरदस्ती या उसकी इजाजत के बिना या कभी इजाजत के बाद भी किया जाए.
भारत की आईपीसी की धारा 375 के अनुसार जब कोई पुरुष किसी स्त्री के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करता है तो उसे बलात्कार कहते हैं. साथ ही अगर किसी भी कारण से सम्भोग क्रिया पूरी हुई हो या नहीं वह बलात्कार ही कहलायेगा. 15 वर्ष से
कम उम्र की पत्नी के साथ पति द्वारा किया गया सम्भोग भी बलात्कार है.
इस संदर्भ में भारतीय सापेक्ष में एक बात सबसे गौर करने की है शादी के बाद जबरदस्ती शारीरिक संबंध, प्रेमिका के साथ डेट के बहाने शारीरिक संबंध बनाने को भी बलात्कार की श्रेणी में रखा जाता है.
हालांकि यह विषय कोई खास महत्व नहीं रखता लेकिन सामाजिक बीमारी की किसी भी श्रेणी को छोड़ना हमें गवारा नहीं.
बलात्कारी एक ऐसा वहशी बीमार होता है जिसे हर नारी में फिर चाहे वह उसकी मां हो या उसकी बहन, वह 6 माह की बच्ची हो या 60 वर्ष की वृद्धा उसे मात्र अपनी हवश पूरी करने का सामान लगती है. और इस जघन्य कुकर्म को करने के लिए कभी-कभी
तो वह समूह में स्त्री को अपने हवश का शिकार बनाते हैं जिसे कानून सामूहिक बलात्कार कहता है. अब आप ही सोचिए जब किसी को अपनी बहन, मां, बच्चे और वृद्धा में सिर्फ वासना नजर आए तो उसे क्या कहेंगे.
बाजारवाद और पश्चिमी सभ्यता के फैलाव के कारण आए बदलाव ने पुरुष की भोग और वासना को चरम पर पहुंचा दिया है. खुलेपन के इस दौर में जहां हर चीज बिकने के लिए तैयार है, पुरुष को इज्जत भी बिकाऊ चाहिए.
हालांकि ऐसा नहीं है कि बलात्कार आज ही हो रहे हैं, बल्कि हमारे समाज में यह बहुत पहले से विद्यमान थे. जिसकी सबसे बड़ी वजह है पुरुष का अपने पौरुष को दर्शाने के लिए वासना को दर्शाना कि वह कितना उत्तेजक है. अब पुरुष के दिमाग में यह बात
कहां से आई कहा नहीं जा सकता.लेकिन हैरत तो तब होती है जब मुंबई जैसे शहर में भी इस तरह की घटनाएं घटती हैं.