Wednesday, July 21, 2010

शर्मशार होता लोकतंत्र का मंदिर ,
उद्दंड होते जन प्रतिनिधि
बिहार की विधान सभा में जों कुछ हुआ उसे हिन्दुस्तान सहित सारे संसार ने देखा. आज का युग सूचना क्रान्ति का युग है. पलक झपकते ही कोई भी समाचार समस्त विश्व की वेबसाईट पर दिखने लगता है. टी.वी . चैनल द्वारा सब कुछ बहुत जल्द ही दिखा दिया आजाता है . बिहार विधान सभा में जनता के चुने हुए विधायकों को जिस तरह मारपीट करते, गाली -गलौच करते,विधान सभा अध्यक्ष की तरफ चप्पल फेंकते , महिला विधायकों द्वारा मार्शलों पर गमलों से प्रहार करते हुए देखा, उससे लोकतंत्र का मंदिर शर्मशार हो गया. हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दो दिन के लिए स्थगित कर दी गई है। विधायनसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने विपक्ष के 67 विधायकों को कार्यवाही बाधित किए जाने और गलत व्यवहार के चलते पूरे मॉनसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया।अध्‍यक्ष ने विपक्ष के 67 विधायकों को इस सत्र के लिए निलंबित कर दिया है। इनमें राजद के 42, एलजेपी के 11, कांग्रेस के 02, सीपीआई (एमएल) के 04, बीएसपी के 02, सीपीएम के 02, सीपीआई के ०४ निर्दलीय 02 हैंराजद अध्यक्ष अब्दुल बार सिद्दीकी और सदन में राजद के उप नेता शकील अहमद निलंबितों में शामिल हैं। बिहार हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री समेत 11 लोगों के खिलाफ 11 हजार ४ सौ १२ करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी मामले की जांच सीबीआई को सौपी है। इसके बाद से विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। हालत ये है कि धरने पर बैठे विधायकों को बाहर निकालने के लिए मार्शलों का सहारा लेना पड़ा। कांग्रेस की विधायक कुमारी ज्योति ने सदन के बाहर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया। उन्होंने भाजपा नेताओं पर गुस्साते हुए मार्शलों पर गमले उठाकर फेंके और वहीं जमीन पर लेट गई।विधायक कोई आम आदमी नहीं होता, उसे लाखों मतदाता चुनते हैं और उससे उच्च आदर्शों, उचित व्यवहार और सज्जनता की अपेक्षा रखते हैं.और जब वही विधायक सदन में जाकर गलत हरकत करते हैं तो आम इंसान अपने आपको ठगा सा महसूस करता है. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अच्छी बात है. अपने किसी और अधिकार को पाने के लिए कोई भी आन्दोलन करना चाहिए , अगर नीतिश कुमार ने या उनके साथियों ने कोई गलत काम किया है . पैसों का गबन किया है तो अवश्य ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और अगर नहीं होती तो हर किसको को शांतिपूर्वक आंदोलन करने का अधिकार है , मगर क़ानून हाथ में लेकर सदन का अपमान करना, उद्दंड होकर विधान सभा की छवि धूमल करना किसी भी हालत में उचित नहीं है.विधायकों को यह अधिकार बिलकुल नहीं है कि वे लोकतंत्र की मर्यादा को ही नष्ट करदें. यह पहली बार नहीं हुआ है . इससे पहले विभिन्न प्रदेशों के विधान भवन में माननीयों द्वारा मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं. खूब जूता चप्पल चले हैं, लेकिन यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए . सिर्फ कुछ दिनॉ के लिए निलंबन की सजा से कुछ होने वाला नहीं है. आजकल लोग कहते फिरते हैं कि अब पहले जैसे नेता नहीं रहे , जयप्रकाश नारायण जैसे, सरदार पटेल जैसे, महात्मा गांधी जैसे . अब
वे नेता देश के लिए ककुछ भी करने को तैयार रहते थे, वे हमेशा जन हित की बात करते थे. उनका आचरण भी सादगी भरा और निस्वार्थ
होता था . इसलिए लोग उन्हें अपना आदर्श मानते थे. आज की तारीख में ऐसा कौन सा नेता है जिसे लोग अपना आदर्श अमानते हों. इसलिए
किसी एक की बात हो तो अलग है यहाँ तो सभी राजनीतिक पार्टियां और ज्यादातर नेता ही ऐसे हो गए हैं. याबी कि इलाज की नहीं , आपरेशन
की जरूरत है. इसके लिए सख्त क़ानून की व्यवस्था की जरूरत है ,जों कभी पूरी नहीं होने वाली. क्योंकि वही छिनरा , वही डोली के संग वाली बात आड़े आ जाती है. यानि कि क़ानून बनाने वाले भी तो नेता ही हैं . और वे ऐसा कोई क़ानून क्यों बनाएंगे जिसे आगे चलकर वही तोड़ने वाले हों .इस मुश्किल का कोई हल है क्या ?








Tuesday, July 20, 2010

भाग-७१

शुजात - हाँ , बात सही है . आजकल लड़कियां भी आपस में ही सुख तलाशने लगी हैं और लड़के भी एक दूसरे से सुख की आस रखने लगे हैं. खैर , चाहे जों हो मगर काम क्रीडा से मानसिक शान्ति तो मिलती है. यह न केवल प्रेम का एक भाग है, बल्कि स्‍वस्‍थ्‍य रहने का माध्‍यम भी है। यह न केवल आपको मानसिक व शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ्‍य रखता है, बल्कि आपकी पर्सनालिटी डेवलपमेंट यानी व्‍यक्तित्‍व विकास भी करता है। नियममित रूप से काम क्रीडा करने वाले व्‍यक्ति तन और मन दोनों से स्‍वस्‍थ्‍य रहते हैं। जिसका सकारात्‍मक प्रभाव आपके जीवन के अलावा सामाजिक और व्‍यवसायिक जीवन पर भी पड़ता है।
जानती हो सेक्‍स करने से आपकी पर्सनालिटी किस तरह से निखरती है। यह क्रिया एक प्रकार का व्‍यायाम है। जिसे हम एरोबिक्‍स भी कह सकते हैं और यह शरीर व मस्तिष्‍क दोनों के लिए अच्‍छा होता है। काम क्रीडा के दौरान खास-तौर से पेट, पैर और कमर की एक्‍सरसाइज होती है। इससे महिलाओं के शरीर का नीचला भाग सुडौल बनता है, जबकि पुरुषों को फुर्ती मिलती है।
तनाव को खत्‍म करने की सबसे बेहतरीन दवा काम क्रीडा है। उस के बाद आप न केवल आपका तनाव कम होता है, बल्कि आपके अंदर सकारात्‍मक सोच भी विकसित होती है। स्‍वस्‍थ्‍य यौन जीवन व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाता है। अध्‍ययन के मुताबिक जो लोग नियमित रूप से काम क्रीडा करते हैं, वे व्‍यवसायिक क्षेत्र में आने वाली कठिनाइयों का सामना आसानी से कर लेते हैं। हर का में मनोबल ऊंचा रहता है।
स्‍वस्‍थ्‍य यौन जीवन से आपके परिवार में खुशियां आती हैं। जीवन साथी से मधुर संबंध बने रहते हैं, जिसका सकारात्‍मक प्रभाव आपके परिवार पर पड़ता है। खुश रहने की वजह से आपका चेहरा भी खिला-खिला रहता है। त्‍वचा में अलग सा निखार दिखाई देता है। खास-तौर से महिलाओं पर यह लागू होता है, क्‍योंकि जब महिलाएं किसी तनाव में नहीं रहती हैं, तो उनकी त्‍वचा ज्‍यादा खिली-खिली दिखती है।कल सुबह अपना चेहरा देखना , फिर तुम देखोगी कि कितना फर्क है . और अगर लगातार महीने भर तक तुम इसी तरह आनंद लेती-देती रहीं तो हुस्न की परी दिखने लगोगी. वैसे तो आज भी तुम बेंतिहाँ खूबसूरत हो लेकिन इस सुख को भोगने के बाद और भी मदमस्त हो जाओगी . सच कहता हूँ. अच्छा , ये बताओ तुम्हें एडल्ट फिल्म देखने में कोई ऐतराज तो नहीं है ?
झंकार- बिलकुल नहीं, मुझे हर वो काम पसंद आयेगा जिसे आप इज्वाय करते हों.
शुजात - थेंक यू यार वरना कई युगल ऐसे होते हैं, जो एक साथ बैठकर एडल्‍ट फिल्‍में या पोर्न तस्‍वीरें देखने में झिझकते हैं। चाहे भले ही उनकी शादी को कई साल क्‍यों न हो गए हों। आम तौर पर महिलाएं ऐसे वीडियो या तस्‍वीरें देखने से झिझकती हैं। लेकिन सही मायने में ऐसा करने से काम क्रीडा के प्रति भूख बढ़ती है और स्‍वस्‍थ्‍य कामक्रीड़ा की प्रबलता ज्‍यादा रहती है। लोग तो ये पूछते है कि क्‍या आपकी पार्टनर एडल्ट वीडियो या फोटो देखने में शर्म या झिझक महसूस करती है? यदि हां तो उसे ऐसी फिल्‍में व तस्‍वीरें देखने के लिए प्रेरित जरूर करें। अच्‍छा होगा अगर आप उससे यह कहें कि पोर्न तस्‍वीरें या फिल्‍में दिखाने का मतलब यह नहीं है कि वो भी बेडरूम में ऐसा ही करे। सिर्फ साथ बैठकर वीडियो देखना चाहते हैं, सिर्फ मनोरंजन के लिए। अपनी पार्टनर को यह अहसास जरूर दिलाएं कि सेक्‍स के मामले में आप उससे पूरी तरह संतुष्‍ट हैं। मेरा पना अनुभव है
एडल्‍ट फिल्‍में साथ देखने से आप अपने पार्टनर के साथ ज्‍यादा खुल सकेंगे। वीडियो देखने के बाद आप संभोग के नए तरीके इस्‍तेमाल कर सकते हैं। जाहिर है नए तरीके इस्‍तेमाल करने से आप दोनों के बीच प्रेम की गहराई और बढ़ेगी। यही नहीं यदि पार्टनर को चरम सीमा तक पहुंचने में देर लगती है, तो पोर्न वीडियो कारगर साबित हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि अति ही कर डालो. यह साल भर में दो चार बार से ज्यादा ठीक नहीं है . वरना इसकी आदत से कई नुक्सान भी हो सकते हैं.
झंकार- ओके , अब इसी बात पर कोई फडकता हुआ आइटम दिखा ही दीजिए .












Monday, July 19, 2010

भाग-७०

झंकार - वो ऐसी होंगी , मैं ऐसी नहीं हूँ . मैं तो प्रकृति की में भरोसा रखती हूँ. भगवान में मेरा यकीं है . और आप ? क्या आपको किसी में भरोसा नहीं , प्रेम में दोस्ती में ? आपकी जिंदगी में दोस्ती का क्या महत्व है ?शुजात- इससे हमारा सफर सहज हो जाता है। एक सही और अच्छा दोस्त हमारी जिंदगी बदलने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाता है। जरूरी नहीं कि आपके दोस्त अपने सामाजिक दायरे से ही हों। कई बार भगवान उन्हें अलग-अलग रूपों में भेजता है। पशु-पक्षी भी आपके दोस्त हो सकते हैं या कई बार अचानक ऎसे व्यक्ति मिल जाते हैं जो खुद भी एक ईमानदार दोस्त की तलाश में होते हैं।
झंकार - सुना और पढ़ा तो यहाँ तक जाता है कि वे लोग ज्यादा खुश रहते हैं, जिनके पास पुराने दोस्तों की संख्या ज्यादा होती है। यह भी पाया गया कि जिन लोगों के दस या ज्यादा दोस्त हैं, वे पांच या कम दोस्त वाले लोगों की तुलना में ज्यादाखुश होते हैं। पुराने ओर करीबी दोस्तों का होना व्यक्तिगत खुशी से जुडा होता है। जिंदगी में खुश रहने के लिए सिर्फ रूपयों का ढेर, बडे महल, महंगी गाडियां, ऊंचा पद ही खुश रहने के लिए काफी नहीं है। ये सब चिजें कुछ पल का सुख देती हैं। लेकिन दोस्त हमेशा हमारी खुशी को बनाए रखने का काम करता है। दोस्त हमें जीवन में कुछ अच्छा देते हैं। जीवन की बैटरी को चार्ज करने के लिए दोस्ती की जरूरत होती है।
शुजात - हां, मैं सोचता हूँ कि एक अच्छा और सच्चा दोस्त वह होता हे जो आपकी राहों में आई मुश्किलों का हल निकालते हैं। एक सच्चा दोस्त वह है जो आपके दिल की बात को समझ पाए ओर आपका संबल बढाकर आपको सही रास्ता दिखाए। अच्छे दोस्त को कैसे ढूंढा जाए या कैसे पहचाना जाए। दोस्ती की कोई सीमा या मापदंड नहीं होता। अच्छा दोस्त पाने के लिए आप अपने मिलने-जुलने वालों में से उन पर गौर करें, जिनसे आप सहज रूप से बात कर पाते हों। जिनकी बातों पर आपको हंसी आती हो या आपके परेशान होने पर उनका भी मन उदास हो जाता हो। जरूरी नहीं कि आपका दोस्त आपका हमउम्र हो या आपके स्टेटस का हो या आप दोनों का धर्म या भाषा एक हो। दोस्ती कभी भी किसी से भी हो सकती है। ऑफिस में आपकी सीट के पास बैठने वाला सहकर्मी भी आपका दोस्त हो सकता है। वॉक पर रोजाना मिलने वाले दादाजी या कोई बुजुर्ग, नियमित रूप से आपका चैकअप करने वाला आपका डॉक्टर या पडौस में रहने वाली बुजुर्ग आंटी कोई भी आपका दोस्त हो सकता है। लेकिन इस दोस्ती को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आपसी प्रेम और विश्वास होना बहुत जरूरी है।
अच्छे दोस्त आपके जीवन को सार्थक बनाते हैं। सकारात्मक ऊर्जा के साथ वे आपको जीवन जीने का हौंसला देते हैं। जब जिंदगी के रास्ते बंद हो जाते हैं और कोई उम्मीद नहीं बचती तब अच्छे दोस्त ही जीने का सहारा बनते हैं। अच्छे दोस्त हमें बुरे पलों से उबारते हैं। दोस्ती खुशी को दोगुना करके, दुख को बांटकर उल्लास बढाती है और मुसीबत कम करती है। एक सच्चा दोस्त हर परिस्थिति में आपका साथ देता है। वह मुश्किल पलों से आपको निकालने में मदद करता है। बिना दोस्तों के जिंदगी मुश्किल होती है। हमें चाहे रोना हो या हंसना, दोनों ही परिस्थिति में दोस्त जरूरी है। मैं ऐसे बहुत से दोस्त रखता हूँ . तुम्हारा नाम भी अब मेरे पक्के दोस्तों की लिस्ट में जुड गया है .शायद अब मैं भी पहले से ज्यादा खुश रहने लगूंगा . आज कि खुशी तो तुम मेरे चेहरे से देख ही रही हो ? तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है ?

झंकार - अगर ये कहूँ तो मानोगे कि जीवन में कभी इतना खुश नहीं हुआ जितना कि आज हूँ .

शुजात - तुम्हारी कुछ महिला दोस्त ऐसी भी हैं जों लेस्बियन हैं ? थोड़ी देर पहले तुमने उनका जिक्र किया था .

शुजात- हाँ, मैं हैरत में हूँ . आज मेरा तभी तो इतना मूड खराब था . इसी कारण मैं शराब पीने आ गया और फिर वहाँ तुम मिल गईं, एक है कम्मो और एक उसकी सहेली. दोनों को लड़का नहीं , लड़कियन पसंद हैं. वे एक साथ रहती हैं.इसलिए वे मर्दों के साथ सहज नहीं रह पातीं. ऐसे कैसे होता है , पता नहीं.

झंकार- लड़कियां ही नैन, कुछ लड़के भी तो ऐसे होते हैं जिनको लड़कों में ही दिलचस्पी होती हैं, लड़कियां उन्हें पसन्द ही नहीं आतीं. ये अजीब लोग होते हैं. अब तक मुझे ऐसी किसी लड़के से मिलने का मौका नहीं मिला जों इस तरह का कम करती हो .


Sunday, July 18, 2010

प्यार , भाग६९

शुजात - अच्छा ये छोडिये , चैटिंग तो अपने हाथ की बात है, क्या सच है कि
अधिकांश महिलाएं सेक्‍स के बारे में सोचती हैं। सोचते-सोचते वो ऐसी दुनिया में खो जाती हैं, जहां उनका पार्टनर उन्‍हें अपनी बाहों में भरे हुए होता है। सेक्‍स को लेकर उनकी उम्‍मीदें कहीं हटकर होती हैं। यही कारण है कि पुरुषों के लिए यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि उनकी पार्टनर किस तरह का प्रेम चाहती है। कुछ ऐसी बाते बताएंगी , जो ज्‍यादातर महिलाएं अपने बिस्‍तर पर चाहती हैं ?

झंकार -हर महिला अपने जीवन में हमेशा कुछ नया पन ढूंढ़ती है। यदि आप अपनी पार्टनर को नए-नए तरीके से खुश करने की कोशिश करेंगे तो वो आपके ज्‍यादा करीब आएगी। तरह-तरह के तोहफे देने, अलग-अलग तरह से प्रेम की इच्‍छा को जताने से आपकी पार्टनर हर बार आपके ज्‍यादा करीब आएगी।
ज्‍यादातर महिलाओं को सेक्‍स के दौरान अपने पार्टनर पर हावी होना अच्‍छा लगता है। जैसे वो काम क्रीडा के दौरान पुरुष के ऊपर आ जाती हैं और कई बार हिंसक प्रवृत्तियां भी दर्शाती हैं, जैसे- पुरुष को कस कर जकड़ लेना, पार्टनर के सीने, गर्दन, गाल, हाथ, आदि पर काटना, अपने पार्टनर के उसको को कस कर पकड़ना, या उस पर मसाज करना, आदि। अगर आपकी पार्टनर ऐसा करती है, तो उन्‍हें रोकें मत, क्‍योंकि वो उनके प्रेम का एक हिस्‍सा है। बस ध्‍यान रहे आपके शरीर को कोई चोट न पहुंचे।
सेक्‍स के दौरान कई महिलाओं में चाहत होती है कि उनके पार्टनर वैसा ही करें, जैसा वो चाहती हैं। अपने पैरों तक ले जाने में भी उन्‍हें अच्‍छा लगता है। महिलाएं खुद भी पोजीशन बदल-बदल कर क्रीडा करना पसंद करती हैं। इससे चरम सीमा तक पहुंचने में आसानी होती है, लिहाजा पोजीशन बदल-बदल कर यानी विभिन्‍न क्रियाओं का इस्‍तेमाल कर प्रेम करें।
पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं को फोर प्ले पसंद होता है। इसलिए प्ले सेक्‍स करते वक्‍त ये मत सोचें कि आप अपनी पार्टनर को महज उत्‍तेजित करने के लिए यह कर रहे हैं, बल्कि वो उसे भी अच्‍छा लगता है, लिहाजा जितनी देर तक हो सके यह करें। हो सके ता संभोग तब तक मत करें, जब तक आपकी पार्टनर खुद न कहे।
महिलाओं को जबर्दस्‍ती बिलकुल पसंद नहीं होती, खास-तौर से इस मामले में। इसके पीछे सबसे बड़ा मनो तथ्‍य यह है- उन्‍हें लगता है कि पुरुष अपनी लालसा पूरी करने के लिए उनका इस्‍तेमाल कर रहे हैं। कई बार वो सोचती हैं, कि उनका पार्टनर तभी करीब आता है, जब उसे प्रेम करना होता है
शुजात - वाह , झंकार कमाल कर दिया. तुम तो बहुत अच्छा भाषण देती हो . अरे यार तुमने आज उस कहावत को चरितार्थ कर दिया कि भले ही शादी नहीं की पर बरात तो बहुत की हैं . यानि कि भले ही तुमने पहले किसी गैर मर्द से प्रेम नहीं किया हो , लेकिन उसके बारे में जानती सब कुछ हो .
झंकार- बहुत जरूरी होता है यह सब जानना भी , वरना पार्टनर अनाडी समझ सकता है .
शुजात - तुम भी नारीवादी लगती हो , क्या किसी सामाजिक संगठन से भी जुडी हो या ऐसी ही ?
झंकार- अब तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो क्या ?
शुजात - कसम से , बिलकुल नहीं . मैं हकीकत कह रहा हूँ, मुझे कुछ ऐसी लड़कियां मिलीं जों कि पुरुषों से सख्त नफरत करती हैं और ऐसी नफरत करने वालियों का उन्होंने बाकायदा एक संगठन भी बना रखा है . वे लोग मर्दों के साथ काम क्रीडा करना उचित नहीं मानती , बल्कि वे लोग आपस में ही सम्प्पोर्ण सुख लूटती हैं.

parsuram yadav

Friday, July 16, 2010

प्यार , भाग-६७

झंकार - प्यार शायद दुनिया के सभी प्राणियों को कुदरत की तरफ से दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है। यही जीवन में रंग भरता है और जीवन तथा इस सृष्टि की निरंतरता को बनाए रखता है। शायद इसी वजह से प्राचीन हिन्दू परंपराओं में इसे जीवन के चार अहम उद्देश्य धर्म, अर्थ और मोक्ष के साथ काम के रूप में अहमियत दी गई है। प्राचीन हिन्दू धर्म जीवन में आने वाले इस आनंद की अनुभूति को उतना ही अहम मानता है, जितना कि ज्ञान की तलाश को।
शुजात - मेरी जान , सेक्स को हम महज यौन क्रिया से नहीं जोड़ सके। यह दोनों लोगों के बीच गहरी आत्मीयता से पैदा होता है। जब दो लोग एक-दूसरे की परवाह करते हैं। जब हमारा शरीर, मन और आत्मा एक हो जाते हैं। यह तभी संभव होता है जब हम सामने वाले की भावनाओं की कद्र करना सीखते हैं।

सेक्स में प्यार की अहम भूमिका है। सबसे पहले एक शारीरिक क्रिया होने के नाते इसका हमारे शरीर से गहरा नाता है।इतना ही नहीं यौन क्रिया हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
सिर्फ शरीर नहीं मन से भी सेक्स का गहरा रिश्ता है। एक स्वस्थ सेक्स जीवन किसी भी स्त्री अथवा पुरुष के भीतर शांति और प्रसन्नता की भावना पैदा करता है। यह उनके आपसी रिश्तों को मजबूत करता है। यह प्रसन्नता की भावना उनके लिए लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का सबब भी बनती है।
प्यार किसी भी दंपति के लिए आनंद का सबब बनते हैं। मगर दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं जोड़ना चाहिए। कई बार विभिन्न वजहों से आपके साथी में सेक्स के प्रति अनिच्छा भी पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में हमें उसकी वजह को जानने और उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यदि पार्टनर की इच्छा न हो तो सेक्स को कभी उस पर थोपने की कोशिश नहीं करनी चाहिए बल्कि उसकी दिक्कतों को शेयर करते हुए उससे सहानुभूति का बर्ताव करना चाहिए।
सेक्स आपके जीवन का एक अहम हिस्सा तभी बनेगा जब आप उसे प्यार की ऊर्जा से सराबोर रखेंगे। तभी आप एक स्वस्थ सेक्स जीवन, बेहतर संबंधों और मजबूत होते रिश्तों की तरफ बढ़ सकेंगे।हाँ , ये बात मैं भी मानता हूँ कि सेक्स सम्बन्ध सिर्फ पति-पत्नी के बीच ही बनें तो बेहतर है.

झंकार -मैंने सूना है कि लड़के बहुत सेक्सी होते हैं , क्या सच है क्या ?
शुजात-हमेशा से कहा जाता रहा है कि पुरुषों के अंदर सेक्‍स की भूख अधिक होती है, लेकिन यह सत्‍य नहीं है। कई बार ऐसा भी होता है जब पुरुष सेक्‍स से इंकार कर देते हैं।
सेक्‍स से सीधा इंकार करने के पीछे सबसे बड़ा कारण मानसिक तनाव होता है। डिप्रेशन में व्‍यक्ति को कुछ भी अच्‍छा नहीं लगता ऐसे में सेक्‍स से इंकार करना आम बात होती है।
लोग सोचते हैं कि १८ से २५ वर्ष की आयु के बीच पुरुषों में सेक्‍स की ललक काफी होती है, लेकिन अध्‍ययन से पता चला है कि ऐसा नहीं है। रिसर्च के मुताबिक इस उम्र में व्‍यक्ति अच्‍छी नींद की ओर ज्‍यादा आकर्षित होता है।
हर पुरुष चाहता है कि उसकी पार्टनर उससे सेक्‍स के बारे में खुलकर बात करे। जब भी वो करीब आए तो उसे पूरा सहयोग करे, लेकिन जब उसकी पार्टनर से रूखा व्‍यवहार मिलता है, तो उसके अंदर सेक्‍स के प्रति इंटरेस्‍ट खत्‍म होने लगता है।
कई बार पुरुष अपनी पार्टनर से झगड़ा होने पर भी सेक्‍स से इंकार कर देते हैं। वो सोचते हैं कि पार्टनर के लिए इससे अच्‍छी सजा कोई नहीं हो सकती। लेकिन ऐसा करना गलत है। इससे रिश्‍ते और ज्‍यादा बिगड़ते हैं।
काम का बोझ, आर्थिक तंगी, घर में आए दिन झगड़े व घर में आए दिन कुछ न कुछ समस्‍याएं खड़ी होने की वजह से भी पुरुष सेक्‍स के प्रति रुचि खो देते हैं। ऐसे में उनकी पार्टनर की यह जिम्‍मेदारी बनती है कि वो उसे अपनी ओर आकर्षित करे।
अधिक काम क्रीडा करने वाले पुरुष भी अपनी पार्टनर के साथ सेक्‍स करने में रुचि खो देते हैं। असल में उन्‍हें यह लगने लगता है कि वो अकेले ही ज्‍यादा खुश हैं।

Thursday, July 15, 2010

भाग-६६
शुजात - मेरे दिल में झांककर देक्खो , हर जगह एक ही नाम दिखाई देगा, सिर्फ झंकार का नाम झंकार , झंकार , और झंकार तुम सिर्फ मेरी बेद पार्टनर तक सीमित रहने वाली नहीं हो , बहुत जल्दी मैं तुम्हारा इतिहास , भूगोलसब बदल दूंगा, तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है अगर तुम अपनी जिन्दगी को बड़ा;लने कि सोच रखती हो तोनिश्चित तौर पर मैं तुम्हारी मदद करूंगा , हाँ अगर तुम सिर्फ अपने मतलब को हासिल करने के लिए इस तरह काइशारा करती हो तब बात अलग है वैसे ये सब तुम्हारी इच्छा पर निर्भर है। कितनी ही ऐसी लडकिय हैं, जो बार मेंकाम करती हैं, कोई नाचती है, कोई शराब परोसती है और कोई कुछ और भी करती है अगर यह काम बहुतज्यादा बुरा होता तो लाखों लड़कियां इस व्यवसाय में नहीं आती, लेकिन इससे भी बेहतर बहुत से काम हैं, अगरचाहो तो तुम उनका चयन कर सकती हो। यहाँ मुंबई में भले ही फ़िल्में बंटी हैं मगर फिल्मों की तरह ऐसा कुछ नहींहोता है जुबैद मेरा जिगरी दोस्त है, अगर मैं उससे कहूं कि कल से झंकार तुम्हारे बार में काम करने नहीं आयेगी, मतलब नहीं आयेगी। उसका पार्टनर भी कुछ बोलने वाला नहीं है सोच लो रात भर का समय है कल चाहो तोशाम को मेत्रे ऑफिस आना, मैं देखूंगा कि बेहतर से बेहतर क्या किया जा सकता है मुझे अब तुमसे इतना प्यारहोने लगा है कि तुमसे दूर रहने के नाम से ही डरने लगता हूं। और क्या होता है प्रेम ? इसीको तो मोहब्बत कह्ते हैं।यूँ तो दुनिया में करोड़ों लोग होते हैं, लेकिन उनमे से किसी एक के लिए दिल धड़कता है कोई एक उनमे से ऐसाहोता है, जिससे मिलने, बात करने, प्यार करने का दिल करता है
झंकार -मैंने तो सूना है
उम्र जैसे ही बचपन का चोला छोड़कर जवानी की दहलीज पर कदम रखती है, दुनिया की हर चीज खूबसूरत नजर आने लगती है। जवानी में दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है। इस उम्र में वैसे भी बड़ी से बड़ी सच्चाइयाँ नजर नहीं आती हैं और रही-सही कसर यह मोहब्बत शब्द पूरी कर देता है।

शुजात -आखिर यह मोहब्बत है क्या चीज? जिसे करना तो सभी चाहते हैं, लेकिन जानता कोई भी नहीं है। यदि मोहब्बत इतनी रहस्यमय न होती तो क्या मिर्जा गालिब 'इस इश्क के कायदे भी अजब हैं गालिब, करो तो बेहाल हैं, न करो तो बेहाल' जैसा शेर लिखते? आपने कभी गौर किया है कि इस प्रेम, प्यार जैसे शब्दों को लेकर कितने विवाद रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह तो एक भावना है, जिसका एहसास धीरे-धीरे ही होता है, लेकिन कुछ तो बिलकुल के साथ कहते हैं, यह तो पहली नजर का प्यार है जो बस एक बार देखते ही हो जाता है। यह एक तीर है जो दिल के पार हो जाता है।
यह मोहब्बत का तीर है, जिगर के पार हो जाता है पता भी नहीं चलता, न जाने कब प्यार हो जाता है इस बारे में एक बात तो तय है कि दुनिया चाहे कुछ भी बोलती रहे, प्यार करने वाले इस बेकार के विवाद में नहीं फँसते कि प्यार और पहली नजर में कोई रिश्ता होता है या नहीं? प्रेमी युगल तो प्यार में डूबते हैं और उन अनमोल क्षणों को बाँधकर, सहेजकर रखने के लिए पूरा जोर लगा देते हैं। और फिर बताइए इसमें गलत भी क्या है? प्यार तो ईश्वर का प्रसाद ही है, बशर्ते आप उसे गलत जगह, गलत तरीके से इस्तेमाल न करें।प्यार में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चीज क्या है? नहीं न। प्यार में सबसे महत्वपूर्ण है टाइमिंग्स। यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यही सच है। सोचिए यदि आपको किसी से प्यार हो जाए और आप वक्त पर इसका इजहार ही न कर पाएँ तो इसका फायदा ही क्या, इसलिए जैसे ही आपके दिल में कुछ-कुछ होने लगे, कोई आँखों के रास्ते दिल में उतरने लगे, तब सही मौका देखकर उसे बता ही दीजिए मुझे मोहब्बत सी हो गई है।