कम्मो- हाँ , और बहुत अच्छी तरह से समझ गयी हूँ, मुझे भरोसा है तुम पर . पूरा भरोसा. फिर भी कहे देती हूँ कि अगर कोई मुझसे भी सुन्दर लड़की मिल जाए तो उसे मत दिल दे देना. उसे मत अपनी बना लेना .
शिल्पा - ओह नो यार , कितनी आयी हैं, कितनी जायंगी . सब दुनिया चलती रहेगी मगर मै तुम्हें छोड़ने वाली नहीं हूँ. बल्कि तुम्हारा कैरियर बनाने और घर बनाने की दिशा में सोच रही हूँ. सब कुछ ठीक ठाक रहा तो तुम ६ से ७ माह में अपने खुद के फ्लेट की मालकिन बन जाओगी . किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी . जितना खर्चा होटल में रहने खाने पर आता है , उतने में तो ई एम् आई भर जाया करेगी . प्यार का मतलब यह कटाई नहीं है कि प्यार के चक्कर में हम सब कुछ भूल जाएँ, बल्कि प्यार का अर्थ मेरी नजर में यह होता है कि रात को तो हम सुकून से प्रणय क्रीडा कर सकें और फिर दिन में हम अपनी तरक्की की बात कर सकें. चौबीसों घंटे इश्क का भूत सवार रहेगा तो जीवन की गाड़ी आगे कैसे बढ़ेगी ?
कम्मो- बहुत सही नजरिया है तुम्हारा. मैंने तुम्हें दोस्त चुनकर जीवन में बहुत बुद्धिमानी का काम किया है. निश्चित रूप से हमारा यह प्यार एक दिन जरूर गुल खिलायेगा , हम लोग जरूर प्यार के रिश्ते से कुछ सार्थक तत्व निकालेंगे .
शिल्पा- हां , बिलकुल सही बात है . मेरी कोशिश यही रहती है कि प्यार में कुछ ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे मनोरोग की झलक मितली हो, यानि अप्राकृतिक होते हुए भी अपने दिल को गलत नहीं लगना चाहिए , यह सब तन औत मन की शुद्धि के लिए होना चाहिए. जैसा प्यार हम दोनों करते हैं , इतना तक तो ठीक है मगर इससे आगे बढ़ना, इससे आगे गिर जाना ठीक नहीं . तुम्हारा क्या मानना है ?
कम्मो- हाँ , इतना तक कोई दिक्कत नहीं है. हम दोनों के शरीर धुले हुए हिते हैं, अहम लोग अपने प्रत्येक अंग को सही तरीके से धुलते हैं. तब जाकर प्रेम करते हैं. तो इस तरह बींमार नहीं होते , हाँ जब महीने के कुछ खास दिन आते हैं, उस समय पर हमको यह खेल नहीं खेलना चाहिए. तब के लिए यह निषेध है .
शिल्पा- तब तो हमें वैसे भी अच्छा नहीं लगेगा. मन भी कहाँ करता है .
कम्मो- कल का क्या प्रोग्राम है ? कुछ खास करने वाली हो ?
शिल्पा- हाँ, कल कुछ ऐसी लड़कियों से मिलाने वाली हूँ जो हमारे इस संगठन की सदस्य हैं और आराम से आपस में ही प्यार करके सुख -संतुष्टि लूट रही हैं.
कम्मो - तो उनके साथ ग्रुप सेक्स की चर्चा कर रही थी न ?
शिल्पा- अरे हाँ बाबा, टेंशन क्यों लेती हो . सब हो जाएगा , मगर उससे पहले तुम्हें मेरे ऑफिस चलना होगा , वहां पर हम दोनों मिलकर अपने बोस से तुम्हारी जॉब की बात करेंगे , मगर बोस से ज़रा बचकर रहना है . दिलफेंक टाइप का इंसान है, फंसाने की बात करेगा . सिर्फ फायदा उठाना , बाकी भाव मत देना . मर्दों के बारे यह भी एक सीक्रेट है कि उन्हें जितना लिफ्ट दोगी , ये तुम पर उतना ही कम ध्यान देंगे , और इनको जितना भी नजरअंदाज करोगी ये उतना ही तुम्हारे पीछे -पीछे भागेंगे . उस स्थिति में ये लोग अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लेते हैं. सोचते हैं कि अब तो इसे खाकर ही दम लूंगा . इनको अगर मूर्ख बनाना है , इनसे अपना काम निकलवाना है तो बस इन्हें इग्नोर करो. बाद में धमाका कर दो कि तुम किसी दूसरे को चाहती हो . यह तो बिउल्कुल लास्ट की बात है . उस स्टेज पर जब कोई चारा ही न रहे , जब कोई रास्ता ही न बचे.
कम्मो- अच्छा , जी . सब कुछ जानकारी है . समझ गयी . तो तुम्हारा बोस रसिया टाइप का है ?
शिल्पा- हाँ , चाहो तो मंहगे -मंहगे होटलों में खाना खिलवा सकता है. डिस्को में लेकर जा सकता है, प्रमोशन भो कर सकता, सब कुछ कर सकता है बशर्ते कि तुम उसको खुश कर सको.
कम्मो- तो क्या तुम्हारे सामने उसने डिमांड नहीं राखी थी ?
शिल्पा- क्यों नहीं रखता ,और क्या बता रही हूँ तुम्हें , वही सब तो कह रही हूँ और यह भी बता रही हूँ कि मैंने उससे छुटकारा पाने के लिए क्या रास्ता अपनाया था.
कम्मो- ठीक है , अब मै सब कुछ जान गयी हूँ, कल सब कुछ संभाल लूंगी मेरी जान.
Thursday, June 3, 2010
Wednesday, June 2, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२६
शिल्पा- हाँ कम्मो , मै तुमसे बहुत प्रेम करने लगी हूँ मेरी जान. प्रेम के सम्बन्ध में मैंने सुना है कि प्रेम किसी एक व्यक्ति से हमारे संबंधों का नाम नहीं है, यह एक दृष्टिकोण है, एक चारित्रिक रुझान है जो किसी व्यक्ति के साथ-साथ पूरी दुनिया से हमारे संबंधों को अभिव्यक्त करता है। वह केवल एक लक्ष्य और उसके साथ के संबंधों का नाम नहीं है। यदि एक व्यक्ति केवल दूसरे एक व्यक्ति से प्रेम करता है और अन्य सभी व्यक्तियों में उसकी रुचि नहीं है, तो उसका प्रेम, प्रेम न होकर उसके अहं का विस्तार मात्र है। फिर भी ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि प्रेम एक 'लक्ष्य' है न कि एक 'क्षमता'।
वे समझते हैं कि भूल भी करते हैं कि यदि वे केवल अपने 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' से ही प्रेम करते हैं, तो यह उनके प्रेम की गहराई का प्रतीक है। इसका मतलब है कि वे प्रेम को एक गतिविधि के रूप में, 'आत्मा की एक शक्ति' के रूप में नहीं देखते।
उन्हें लगता है कि एक 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' होने का अर्थ है 'प्रेम' को पा लेना। यह बिलकुल वैसी ही बात है, जैसे कोई व्यक्ति चित्रकारी करना चाहता है और समझे कि उसे केवल एक प्रेरक विषय की जरूरत है, जिसके मिल जाने पर वह स्वत: ही बढ़िया चित्रकारी कर लेगा। अगर मैं किसी एक व्यक्ति से सचमुच प्रेम करता हूँ तो मैं सभी व्यक्तियों से प्रेम करता हूँ। किसी से 'मैं तुम्हें प्यार करने का सच्चा अर्थ' यह है कि 'मैं उसके माध्यम से पूरी दुनिया और पूरी जिंदगी से प्यार करता हूँ।
कम्मो- वाह , कहने वाले ने बहुत बढ़िया बात कहदी है , मजा आ गया. यह तो एकदम अलग सी परिभाषा है .
यह धारणा भी कितनी गलत है कि जोड़े स्वर्ग में तय होते हैं। 'रहस्य' और 'मनोविज्ञान' को जो जानते हैं वे तो शायद ऐसा नहीं कहेंगे। शादी के बारे में आमतौर पर कहा जाता हो कि यह एक ऐसा लड्डू है जिसे खाने वाला भी पछताता है और न खाने वाला भी। समझदार व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी कहावत पर शायद ही विश्वास करें।
किसी भी व्यक्ति में किसी भी व्यक्ति के प्रति छह माह में प्यार जगाया जा सकता है। इसका यह मतलब हुआ कि प्यार होता नहीं किया जाता है।
कुछ डॉ. अपने शोध के आधार पर कहते हैं कि प्यार एक बीमारी है और इस बीमारी का इलाज है सिर्फ सेक्स। यदि प्रेम के इजहार का मौका नहीं मिलता तो बीमारी और बढ़ जाती है, हो सकता है कि वे गुस्सा, अवसाद या किसी अन्य मानसिक रोग से ग्रस्त हो जाएँ। इसे 'लव सिकनेस' कहते हैं।
मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता।
खैर यह तो बात प्यार के इजहार से जुड़ी है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इजहार कर ही दिया तो फिर नया खेल शुरू होता है जो कुछ दिन तक तो अच्छे अहसास के साथ चलता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसमें टेंशन पैदा होने लगता है।
बेवफाई का डर भीतर ही भीतर सालता रहता है। यदि प्यार में बेवफाई का सामना करना पड़े तो फिर दिल के दौरे की संभावना बढ़ सकती है बशर्ते कि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से कितने जुड़े हैं यह इस पर तय होता है।
तमाम शोध और तमाम बेवकूफी भरे वाक्य प्यार की ताकत को झुठला नहीं सकते और ना ही उसे सेक्स से जोड़ सकते हैं। सेक्स आपके जीवन का अहम हिस्सा हो सकता है, लेकिन प्यार का स्थान उससे कहीं ऊँचा है। मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता. और इससे यह सिद्ध होता है कि हमारा प्यार कभी कम नहीं होगा क्योंकि हमने सच्चा प्यार किया है .
शिल्पा- हाँ, इसमें कोई दो राय नहीं है . बिलकुल सत्य बात है . अब तुम भी मेरे इस गणित को समझ गयी हो . पहले शायद तुम्हें कुछ हिचक होगी मगर अब जान गयी ना कि हमारी दोस्ती की नीव कितनी मजबूत है .
वे समझते हैं कि भूल भी करते हैं कि यदि वे केवल अपने 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' से ही प्रेम करते हैं, तो यह उनके प्रेम की गहराई का प्रतीक है। इसका मतलब है कि वे प्रेम को एक गतिविधि के रूप में, 'आत्मा की एक शक्ति' के रूप में नहीं देखते।
उन्हें लगता है कि एक 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' होने का अर्थ है 'प्रेम' को पा लेना। यह बिलकुल वैसी ही बात है, जैसे कोई व्यक्ति चित्रकारी करना चाहता है और समझे कि उसे केवल एक प्रेरक विषय की जरूरत है, जिसके मिल जाने पर वह स्वत: ही बढ़िया चित्रकारी कर लेगा। अगर मैं किसी एक व्यक्ति से सचमुच प्रेम करता हूँ तो मैं सभी व्यक्तियों से प्रेम करता हूँ। किसी से 'मैं तुम्हें प्यार करने का सच्चा अर्थ' यह है कि 'मैं उसके माध्यम से पूरी दुनिया और पूरी जिंदगी से प्यार करता हूँ।
कम्मो- वाह , कहने वाले ने बहुत बढ़िया बात कहदी है , मजा आ गया. यह तो एकदम अलग सी परिभाषा है .
यह धारणा भी कितनी गलत है कि जोड़े स्वर्ग में तय होते हैं। 'रहस्य' और 'मनोविज्ञान' को जो जानते हैं वे तो शायद ऐसा नहीं कहेंगे। शादी के बारे में आमतौर पर कहा जाता हो कि यह एक ऐसा लड्डू है जिसे खाने वाला भी पछताता है और न खाने वाला भी। समझदार व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी कहावत पर शायद ही विश्वास करें।
किसी भी व्यक्ति में किसी भी व्यक्ति के प्रति छह माह में प्यार जगाया जा सकता है। इसका यह मतलब हुआ कि प्यार होता नहीं किया जाता है।
कुछ डॉ. अपने शोध के आधार पर कहते हैं कि प्यार एक बीमारी है और इस बीमारी का इलाज है सिर्फ सेक्स। यदि प्रेम के इजहार का मौका नहीं मिलता तो बीमारी और बढ़ जाती है, हो सकता है कि वे गुस्सा, अवसाद या किसी अन्य मानसिक रोग से ग्रस्त हो जाएँ। इसे 'लव सिकनेस' कहते हैं।
मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता।
खैर यह तो बात प्यार के इजहार से जुड़ी है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इजहार कर ही दिया तो फिर नया खेल शुरू होता है जो कुछ दिन तक तो अच्छे अहसास के साथ चलता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसमें टेंशन पैदा होने लगता है।
बेवफाई का डर भीतर ही भीतर सालता रहता है। यदि प्यार में बेवफाई का सामना करना पड़े तो फिर दिल के दौरे की संभावना बढ़ सकती है बशर्ते कि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से कितने जुड़े हैं यह इस पर तय होता है।
तमाम शोध और तमाम बेवकूफी भरे वाक्य प्यार की ताकत को झुठला नहीं सकते और ना ही उसे सेक्स से जोड़ सकते हैं। सेक्स आपके जीवन का अहम हिस्सा हो सकता है, लेकिन प्यार का स्थान उससे कहीं ऊँचा है। मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता. और इससे यह सिद्ध होता है कि हमारा प्यार कभी कम नहीं होगा क्योंकि हमने सच्चा प्यार किया है .
शिल्पा- हाँ, इसमें कोई दो राय नहीं है . बिलकुल सत्य बात है . अब तुम भी मेरे इस गणित को समझ गयी हो . पहले शायद तुम्हें कुछ हिचक होगी मगर अब जान गयी ना कि हमारी दोस्ती की नीव कितनी मजबूत है .
Tuesday, June 1, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२५
शिल्पा- तुम्हारा साथ , ये प्यार पाकर मै बहुत खुश हूँ. लगता है जैसे आसमान में उडती चली जा रही हूँ.
कम्मो - और मै भी तो बेहद खुश हूँ, तुमसे और तुम्हारे इस खास प्यार से, तुमने तो मेरा नजरिया ही बदल दिया है , जीने का रंग -ढंग भी बदल दिया है . अब मेरी सोच भी बदल चुकी है .
शिल्पा- क्या अब भी कुछ सुनना चाहोगी ? या फ्री कहीं चलें , वैसे अभी काफी समय बाकी है .
कम्मो- तो फिर गुप्त रोगों के डॉक्टर सुरेश की कोई नसीहत सुनाइये .
कम्मो- उसने पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में कहा था कि पत्नी के दर्द को महसूस करना, उसके दर्द से रिश्ता बनाना और दूर जाने का कारण जानना सुखद सेक्स के लिए बहुत ही जरूरी है। ज्यादातर पुरूष सिर्फ पत्नी के शरीर से ही मतलब रखते हैं। पत्नी को क्या तकलीफ है और वह क्यों सेक्स लाइफ में रूची नहीं ले पा रही है अगर पति यह जानने की कोशिश करता है तो पत्नी मूड होने या न होने बारे में नहीं सोचती। अपने साथी के दर्द को जानने की कोशिश करें, उसके दर्द से रिश्ता जोडने की कोशिश करें।
जब तक दर्द से रिश्ता नहीं होगा, आपस का प्यार भी गहरा नहीं होगा। जब आप पत्नी के दर्द को उसकी तकलीफ को नजरअंदाज करेंगे तो उसके मन में आपके प्रति विद्रोह की भावना प्रबल होगी। पत्नी की नजरों में आप निर्दयी और स्वार्थी बन जाएंगे। अपने साथी के दर्द और तकलीफ के प्रति संवेदना व्यक्त करें। इससे दर्द तो कम नहीं होगा लेकिन संवेदना व्यक्त करने वाले के प्रति मन में प्यार उमडता है। तब वह दर्द को भूलकर आपके प्यार को महत्तव देंगी। इसलिए अपनी पत्नी के हमदर्द बनें।
जीवन साथी को हमराही, हमदर्द, हमसफर न जाने कितने ही ऎसे नामों से पुकारा जाता है। इन नामों का अपना अर्थ और महत्तव है। लेकिन अधिकाशं पुरूष सिर्फ पति ही बनकर रह जाते हैं। हमदर्द या हमराही नहीं बन पाते। जब आप एक दूसरे के दर्द को समझेंगे तो आपका प्यार जवां होगा और आप अपने जीवन साथी के और भी करीब आ जाएंगे। दांपत्य जीवन में प्यार का होना उतना ही जरूरी है जितना वैचारिक तालमेल का होना। वैचारिक तालमेल होने पर पति-पत्नी एक दूसरे के दर्द को तुरंत समझ लेते हैं और एक दूसरे के दर्द को दूर करने कीकोशिश करते हैं। यदि आप अपने साथी के दर्द को नहीं समझते और उसे नजरअंदाज करते हैं तो वह भी आपका सगा नहीं हो पाएगा और एक दिन आपका साथी आपको छोडकर उस व्यक्ति से नाता जोड लेगा जो उसका हमदर्द साबित होगा। दर्द जीवन का एक अह्म हिस्सा है और सबके जीवन में आता है। यदि आप अपने साथी के दर्द को नहीं समझेंगे तो आपके साथी का आप पर से विश्वास उठ जाएगा। सुखों के साथी तो सभी होते हैं लेकिन आप अपने जीवन साथी के दर्द के साथी बनें। मुश्किल घडियों में अपने साथी का साथ कभी न छोडें। एक दूसरे के दर्द को गहराई से समझे उसे जानें।
कम्मो- वाह . बहुत बढ़िया , एक बार मैंने कही सुना था कि दोस्ती जैसे पावन रिश्ते में भी ईष्र्या घर करने लगी है। दूसरों से आगे निकलने की ललक और सनक इंसानी रिश्तों में कटुता का सृजन करने लगी है। ऎसी प्रवृति एक सुंदर समाज के निमार्ण में घातक सिद्ध होती हैं। शैलेश और राजेश बचपन के दोस्त थे। बडे होने पर दोनों ने एक ही कैरियर चुना और जुट गए, मेडिकल प्रवेश-परिक्षा की तैयारी में। शैलेश का तो चयन हो गया लेकिन राजेश के हाथ सफलता नहीं लग पाई। इसके बाद राजेश ने शैलेश से दूरी बढ़ा ली और शैलेश ने भी इस दूरी को पाटने का कोई प्रयास नहीं किया। फलत: दोस्ती का खुबसूरत रिश्ता इस मोड पर दम तोड गया।
पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का माना जाता है। इस रिश्ते में परस्पर विश्वास और आदर की भावना ही एक दूसरे के स्नेह व समर्पण का बीज बनती है। कई जोडे़ आपसी सामंजस्य के अभाव में रिश्तों में पड रही दरारों से दुखी हैं। ऎसे रिश्तो की नींव में कई अपेक्षाएं, अनादर, क्रोध और हताशा की भावनाएं पनपती हैं और रिश्ता बोझ प्रतीत होने लगता है। लेकिन रिश्तों में आदर हो तो, यह एक दूसरे के गुण-दोषों को आत्मसात् कर लेता है। ननद-भाभी का मोहक रिश्ता हो या देवर-भाभी का सौहाद्रपूर्ण रिश्ता, हर रिश्ते की नींव आदर के जल से सिक्त होने पर ही सुदृढ परिवार का बल बनती है। विचारों के आदान-प्रदान से मतभेद संभव है। यदि सम्मान की भावना हो तो रिश्तों में दरार नहीं पडती।
कम्मो - और मै भी तो बेहद खुश हूँ, तुमसे और तुम्हारे इस खास प्यार से, तुमने तो मेरा नजरिया ही बदल दिया है , जीने का रंग -ढंग भी बदल दिया है . अब मेरी सोच भी बदल चुकी है .
शिल्पा- क्या अब भी कुछ सुनना चाहोगी ? या फ्री कहीं चलें , वैसे अभी काफी समय बाकी है .
कम्मो- तो फिर गुप्त रोगों के डॉक्टर सुरेश की कोई नसीहत सुनाइये .
कम्मो- उसने पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में कहा था कि पत्नी के दर्द को महसूस करना, उसके दर्द से रिश्ता बनाना और दूर जाने का कारण जानना सुखद सेक्स के लिए बहुत ही जरूरी है। ज्यादातर पुरूष सिर्फ पत्नी के शरीर से ही मतलब रखते हैं। पत्नी को क्या तकलीफ है और वह क्यों सेक्स लाइफ में रूची नहीं ले पा रही है अगर पति यह जानने की कोशिश करता है तो पत्नी मूड होने या न होने बारे में नहीं सोचती। अपने साथी के दर्द को जानने की कोशिश करें, उसके दर्द से रिश्ता जोडने की कोशिश करें।
जब तक दर्द से रिश्ता नहीं होगा, आपस का प्यार भी गहरा नहीं होगा। जब आप पत्नी के दर्द को उसकी तकलीफ को नजरअंदाज करेंगे तो उसके मन में आपके प्रति विद्रोह की भावना प्रबल होगी। पत्नी की नजरों में आप निर्दयी और स्वार्थी बन जाएंगे। अपने साथी के दर्द और तकलीफ के प्रति संवेदना व्यक्त करें। इससे दर्द तो कम नहीं होगा लेकिन संवेदना व्यक्त करने वाले के प्रति मन में प्यार उमडता है। तब वह दर्द को भूलकर आपके प्यार को महत्तव देंगी। इसलिए अपनी पत्नी के हमदर्द बनें।
जीवन साथी को हमराही, हमदर्द, हमसफर न जाने कितने ही ऎसे नामों से पुकारा जाता है। इन नामों का अपना अर्थ और महत्तव है। लेकिन अधिकाशं पुरूष सिर्फ पति ही बनकर रह जाते हैं। हमदर्द या हमराही नहीं बन पाते। जब आप एक दूसरे के दर्द को समझेंगे तो आपका प्यार जवां होगा और आप अपने जीवन साथी के और भी करीब आ जाएंगे। दांपत्य जीवन में प्यार का होना उतना ही जरूरी है जितना वैचारिक तालमेल का होना। वैचारिक तालमेल होने पर पति-पत्नी एक दूसरे के दर्द को तुरंत समझ लेते हैं और एक दूसरे के दर्द को दूर करने कीकोशिश करते हैं। यदि आप अपने साथी के दर्द को नहीं समझते और उसे नजरअंदाज करते हैं तो वह भी आपका सगा नहीं हो पाएगा और एक दिन आपका साथी आपको छोडकर उस व्यक्ति से नाता जोड लेगा जो उसका हमदर्द साबित होगा। दर्द जीवन का एक अह्म हिस्सा है और सबके जीवन में आता है। यदि आप अपने साथी के दर्द को नहीं समझेंगे तो आपके साथी का आप पर से विश्वास उठ जाएगा। सुखों के साथी तो सभी होते हैं लेकिन आप अपने जीवन साथी के दर्द के साथी बनें। मुश्किल घडियों में अपने साथी का साथ कभी न छोडें। एक दूसरे के दर्द को गहराई से समझे उसे जानें।
कम्मो- वाह . बहुत बढ़िया , एक बार मैंने कही सुना था कि दोस्ती जैसे पावन रिश्ते में भी ईष्र्या घर करने लगी है। दूसरों से आगे निकलने की ललक और सनक इंसानी रिश्तों में कटुता का सृजन करने लगी है। ऎसी प्रवृति एक सुंदर समाज के निमार्ण में घातक सिद्ध होती हैं। शैलेश और राजेश बचपन के दोस्त थे। बडे होने पर दोनों ने एक ही कैरियर चुना और जुट गए, मेडिकल प्रवेश-परिक्षा की तैयारी में। शैलेश का तो चयन हो गया लेकिन राजेश के हाथ सफलता नहीं लग पाई। इसके बाद राजेश ने शैलेश से दूरी बढ़ा ली और शैलेश ने भी इस दूरी को पाटने का कोई प्रयास नहीं किया। फलत: दोस्ती का खुबसूरत रिश्ता इस मोड पर दम तोड गया।
पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का माना जाता है। इस रिश्ते में परस्पर विश्वास और आदर की भावना ही एक दूसरे के स्नेह व समर्पण का बीज बनती है। कई जोडे़ आपसी सामंजस्य के अभाव में रिश्तों में पड रही दरारों से दुखी हैं। ऎसे रिश्तो की नींव में कई अपेक्षाएं, अनादर, क्रोध और हताशा की भावनाएं पनपती हैं और रिश्ता बोझ प्रतीत होने लगता है। लेकिन रिश्तों में आदर हो तो, यह एक दूसरे के गुण-दोषों को आत्मसात् कर लेता है। ननद-भाभी का मोहक रिश्ता हो या देवर-भाभी का सौहाद्रपूर्ण रिश्ता, हर रिश्ते की नींव आदर के जल से सिक्त होने पर ही सुदृढ परिवार का बल बनती है। विचारों के आदान-प्रदान से मतभेद संभव है। यदि सम्मान की भावना हो तो रिश्तों में दरार नहीं पडती।
Monday, May 31, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२४
कम्मो- जी , कहीं ऐसा न हो कि हम जिस बच्चे को गोद लेंगे उसका ठीक से पालन पोषण न कर पायें और बेवजह वह परेशान हो, ईश्वर भी हमें नहीं बख्शेगा . लेकिन ?
शिल्पा- अब क्या लेकिन ? फिर से कोई सवाल मन में उमड़ने लगा है क्या ? तुम कम्मो कम और सवालों की मशीन ज्यादा लग रही हो . क्या बा है बोलो न , मै बताने की कोशिश करूंगी .
कम्मो- सोचती हूँ कि चलो लड़की तो गोद ले लेंगे मगर उसके भविष्य का क्या होगा , मेरा अर्थ ये है कि जब वो लड़की बड़ी हुई तो उसका क्या होगा ? क्या हम लोग उसकी शादी करेंगे या ?
शिल्पा- अच्छा , मै जानती थी कि तुम्हारे दिमाग में ऐसा ही कोई सवाल पनप रहा होगा इसीलिए मैंने हल भी पहले सोच लिया था , मेरा मानना है कि यह इच्छा पर आधारित होना चाहिए , जैसे कि अगर मै किसी लड़के से शादी करना चाहूँ तो निश्चित रूप से मुझे उसी से करनी चाहिए और अगर मै तुम्हारे साथ रहने में खुश हूँ तो किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह मुझसे इस अधिकार को छीने , क्या कहती हो ...
कम्मो- समझ गयी. अगर वह चाहेगी कि किसी अपने साथी लड़के से शादी करे तो स्वागत है , लेकिन उस लड़के के परिजन जानना चाहेंगे कि हमारा रिश्ता क्या है ? तब क्या कहेंगे ?
शिल्पा- मुझे माफ कर मेरी नानी, मत छेड़ इतनी लंबी कहानी. बर्दाश्त नहीं कर पाउंगी , अब कुछ भविष्य पर भी छोड़ दे , या फिर मरने तक के सारे प्लान आज ही कर डालेगी .
कम्मो- ठीक है, अगर ऐसी कोई बात है तो कोई प्रोब्लम नहीं है .
शिल्पा- अब क्या करोगी ? तुम मौज ले चुकी हो, मै भी खुश हूँ. अब नहाने के बाद सोना है याफिर किसी क्लब में चलोगी ?
कम्मो- क्लब में जाती हैं ? चलो , चलकर देखती हूँ वहाँ पर कितना सुख मिलता है . वहां का टेस्ट चख लेती हूँ.
शिल्पा- दरसल हमको नयी -नयी सहेलियां वहीँ पर मिलती हैं. बातचीत , हाव भाव से पता चल जाता है . वहीँ दोस्ती होती है और फिर यह सिलसिला आगे बढ़ता रहता है. क्या तुम्हें पीने -पिलाने का शौक है ?
कम्मो- कभी नहीं, शराब नहीं पीती. हाँ कभी कभार जब बहुत टेंशन होती है तो सिगरेट में सुट्टा मार लेती हूँ.
शिल्पा- क्या गज़ब ढाती हो मेरी जान . ऐसा क्यों करती हो . अरे सिगरेट तो शराब से ज्यादा खतरनाक होती है . इससे मुंह का कैंसर हो जाता है और फिर जिंदगी एक तरह से नर्क बन जाती है. भले ही आज हमारे पास कैंसर का इलाज मौजूद है , मगरमरीज को ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है कि उसे जीवन भी मौत लगने लगती है, इसे छोड़ दो यार , आज तुम कभी-कभी सुट्टा लगाने की बात कहती हो . कल को इसकी पूरी तरह से आदत लग जायेगी , तब क्या होगा ? कैंसर जैसा भयानक रोग हुआ तो क्या करोगी ? अल्कोहल लेना भी कोई अच्छी बात नहीं है मगर उसकी तुलना में सिगरेट को मै ज्यादा खतरनाक मानती हूँ.
कम्मो-ओफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ , क्या करूँ फिर ? अब क्या हो सकता है ?
शिल्पा- अभी क्या नहीं हो सकता ? सब कुछ अपने हाथ में हैं. आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. आज से ही प्रतिज्ञा करो कि कभी बीडी , सिगरेट , गुटका से हाथ नहीं लगाओगी .
कम्मो- चलो वादा किया , आज से सब भूल जाउंगी , तुम कहो तो जीना भी छोड़ दूं मेरी जान.
शिल्पा- शुक्रिया. मुझे नाज है तुम्हारी दोस्ती पर . तुम बहुत अच्छी हो कम्मो. मेरी हर बात मान जाती हो .
कम्मो- जब जीवन साथ-साथ बिताना ही है तो हमें एक दूसरे की बात भी माननी पड़ेगी और फिर तुम मेरे हित की बात ही कहोगी , तुम क्यों मुझे दुखी देखना चाहोगी ?
शिल्पा- हाँ, सच कहती हो , मै हर समय तुम्हारे उज्जवल भविष्य की कामना करती रहती हूँ. मै चाहती हूँ कि तुम्हें कभी कोई दुःख न हो, तकलीफ न हो . तुम सदा इसी तरह चिडिया की तरह चहकती रहो, फूलों की तरह अपनी खुशबु बिखेरती रहो .
कम्मो- मै भी तुम्हारी भलाई के लिए कामना करती रहती हूँ. आई लव यु शिल्पा. लव यु सो मच.
.
शिल्पा- अब क्या लेकिन ? फिर से कोई सवाल मन में उमड़ने लगा है क्या ? तुम कम्मो कम और सवालों की मशीन ज्यादा लग रही हो . क्या बा है बोलो न , मै बताने की कोशिश करूंगी .
कम्मो- सोचती हूँ कि चलो लड़की तो गोद ले लेंगे मगर उसके भविष्य का क्या होगा , मेरा अर्थ ये है कि जब वो लड़की बड़ी हुई तो उसका क्या होगा ? क्या हम लोग उसकी शादी करेंगे या ?
शिल्पा- अच्छा , मै जानती थी कि तुम्हारे दिमाग में ऐसा ही कोई सवाल पनप रहा होगा इसीलिए मैंने हल भी पहले सोच लिया था , मेरा मानना है कि यह इच्छा पर आधारित होना चाहिए , जैसे कि अगर मै किसी लड़के से शादी करना चाहूँ तो निश्चित रूप से मुझे उसी से करनी चाहिए और अगर मै तुम्हारे साथ रहने में खुश हूँ तो किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह मुझसे इस अधिकार को छीने , क्या कहती हो ...
कम्मो- समझ गयी. अगर वह चाहेगी कि किसी अपने साथी लड़के से शादी करे तो स्वागत है , लेकिन उस लड़के के परिजन जानना चाहेंगे कि हमारा रिश्ता क्या है ? तब क्या कहेंगे ?
शिल्पा- मुझे माफ कर मेरी नानी, मत छेड़ इतनी लंबी कहानी. बर्दाश्त नहीं कर पाउंगी , अब कुछ भविष्य पर भी छोड़ दे , या फिर मरने तक के सारे प्लान आज ही कर डालेगी .
कम्मो- ठीक है, अगर ऐसी कोई बात है तो कोई प्रोब्लम नहीं है .
शिल्पा- अब क्या करोगी ? तुम मौज ले चुकी हो, मै भी खुश हूँ. अब नहाने के बाद सोना है याफिर किसी क्लब में चलोगी ?
कम्मो- क्लब में जाती हैं ? चलो , चलकर देखती हूँ वहाँ पर कितना सुख मिलता है . वहां का टेस्ट चख लेती हूँ.
शिल्पा- दरसल हमको नयी -नयी सहेलियां वहीँ पर मिलती हैं. बातचीत , हाव भाव से पता चल जाता है . वहीँ दोस्ती होती है और फिर यह सिलसिला आगे बढ़ता रहता है. क्या तुम्हें पीने -पिलाने का शौक है ?
कम्मो- कभी नहीं, शराब नहीं पीती. हाँ कभी कभार जब बहुत टेंशन होती है तो सिगरेट में सुट्टा मार लेती हूँ.
शिल्पा- क्या गज़ब ढाती हो मेरी जान . ऐसा क्यों करती हो . अरे सिगरेट तो शराब से ज्यादा खतरनाक होती है . इससे मुंह का कैंसर हो जाता है और फिर जिंदगी एक तरह से नर्क बन जाती है. भले ही आज हमारे पास कैंसर का इलाज मौजूद है , मगरमरीज को ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है कि उसे जीवन भी मौत लगने लगती है, इसे छोड़ दो यार , आज तुम कभी-कभी सुट्टा लगाने की बात कहती हो . कल को इसकी पूरी तरह से आदत लग जायेगी , तब क्या होगा ? कैंसर जैसा भयानक रोग हुआ तो क्या करोगी ? अल्कोहल लेना भी कोई अच्छी बात नहीं है मगर उसकी तुलना में सिगरेट को मै ज्यादा खतरनाक मानती हूँ.
कम्मो-ओफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ , क्या करूँ फिर ? अब क्या हो सकता है ?
शिल्पा- अभी क्या नहीं हो सकता ? सब कुछ अपने हाथ में हैं. आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. आज से ही प्रतिज्ञा करो कि कभी बीडी , सिगरेट , गुटका से हाथ नहीं लगाओगी .
कम्मो- चलो वादा किया , आज से सब भूल जाउंगी , तुम कहो तो जीना भी छोड़ दूं मेरी जान.
शिल्पा- शुक्रिया. मुझे नाज है तुम्हारी दोस्ती पर . तुम बहुत अच्छी हो कम्मो. मेरी हर बात मान जाती हो .
कम्मो- जब जीवन साथ-साथ बिताना ही है तो हमें एक दूसरे की बात भी माननी पड़ेगी और फिर तुम मेरे हित की बात ही कहोगी , तुम क्यों मुझे दुखी देखना चाहोगी ?
शिल्पा- हाँ, सच कहती हो , मै हर समय तुम्हारे उज्जवल भविष्य की कामना करती रहती हूँ. मै चाहती हूँ कि तुम्हें कभी कोई दुःख न हो, तकलीफ न हो . तुम सदा इसी तरह चिडिया की तरह चहकती रहो, फूलों की तरह अपनी खुशबु बिखेरती रहो .
कम्मो- मै भी तुम्हारी भलाई के लिए कामना करती रहती हूँ. आई लव यु शिल्पा. लव यु सो मच.
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Sunday, May 30, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२३
शिल्पा - नहीं , कभी नहीं. पता नहीं , शायद मर गिर गया होगा . भले ही उसने भी मेरा अपहरण किया, मेरे साथ बलात्कार किया , मगर वह मेरा मददगार था . उसीकी वजह से मै उन दुष्टों के चंगुल से बाहर निकल पाई , मै सोचती हूँ कि भले ही वह मेरा अपहरण नहीं करता तो बाकी के लोग करते . मगर बचाने वाला तो वह डॉक्टर था , अगर वह नहीं बचाता तो शायद मै किसी कोठे पर पडी सड़ रही होती और ग्राहक मेरा मांस नोच-नोचकर गिद्धों की तरह खा रहे होते .
कम्मो- ऐसी क्यों कहते हो , ऐसी कोई बात नहीं होती , आपने किसका बुरा किया है यार ? एक सवाल मन में घूमने लगा है, यह अभी-अभी उभरा है और परेशान करने लगा है . सोच रही हूँ कि तुम क्या इसीलिए मर्दों से नफरत करने लगी हो ?
शिल्पा- हाँ भी कह सकती हूँ और ना भी , क्योंकि मै ठीक अतारः से नहीं कह सकती. हो सकता है कि भूमिका वहीं से बननी शुरू हो गयी हो . या शायद किसी और वजह से भी यह सब हुआ हो .
कम्मो- और वो दिल्ली वाला गुप्त रोगों वाला डॉक्टर ? सुरेश ? उसका क्या हाल है ? मुलाक़ात होती है ?
शिल्पा- हाँ, होती रहती है , उससे मुझे सीखने को बहुत कुछ मिला है. वह होशियार डॉक्टर है. अपने काम की सम्पूर्ण जानकारी रखने वाला . उससे गुप्त रोगों और इंसानी स्वभाव के बारे में जानने की सीख ली है मैंने .
कम्मो- क्युआ उसने कभी शादी करने का प्रस्ताव नहीं रखा ?
शिल्पा- वो क्या प्रस्ताव रखेगा ? पहले से ही उसकी दो-दो बीवियां मौजूद हैं. वह अपनी ऑपरेटर को भी नहीं छोड़ता , हर महीने में लड़की बदल देता है. बहुत आशिक मिजाज है .
कम्मो- तुम भी तो कम सेक्सी नहीं हो. तुम्हें भी तो ऐसा ही मर्द चाहिए , जो तुम्हें दिन में कई बार संतुष्ट कर सके.
शिल्पा- सच बात तो यही है , कि मै मर्द से अब शादी ही नहीं कर सकती . मुझे तो तुम जैसी कली से ही प्यार है, लगाव है . अगर तुम साथ हो तो लड़के की जरूरत क्या है ?
कम्मो- और औलाद ? मेरा मतलब है संतान ? चलो ठीक है जिस्मानी सुख तो हम दोनों भोग लेंगी मगर संतान सुख कैसे भोगने को मिलेगा ? क्या तुम ऐसा कोई तरीका जानती हो , जिसमे मर्दों के सहयोग के बिना ही बच्चा पैदा किया जा सके ? मेरे ख़याल से अभी तक ऐसी कोई तकनीक ईजाद नहीं हुई है. उसके लिए तो कुदरत ने हमें उसीका मोहताज बनाकर छोड़ा है .
शिल्पा- हाँ , वो तो है लेकिन हम लोग क्या करेंगे संतान का ? हम एक दूसरे का जीवन भर सहारा बनेंगे .
कम्मो- लेकिन ये जरूरी तो नहीं कि हम साथ-साथ जियेंगे तो मरेंगे भी साथ-साथ . कोई आगे अम्रेगी तो कोई पीछे , उस स्थिति में अकेली क्या करेगी ?
शिल्पा- जिनके बच्चे हैं, वे लोग भी कौन से खुशहाल हैं, मैंने तो उनको भी बदहाल देखा है. जिन लोगों ने अपने कई -कई बेटा -बेटियों को पाल पोसकर बड़ा कर दिया , अब वही बच्चे अकेले माता -पिता को नहीं संभाल सकते .
कम्मो- बात संभालने की नहीं होती, और भी कई बातें होती हैं. जब कोई अपना है तो अपनत्व से कुछ कह भी सकता है , उसका क्या बुरा मानना ?
शिल्पा- मैंने देखा है कि बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के लेकर विदेश में सैटल हो जाते हैं और बूढ़ी माँ या पिता को किसी वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं, बस उनके खर्चे भेजकर अपने फर्ज को निभा देते हैं.
कम्मो- हम किसी -किसी की बात कर रहे हैं. सब लोग ऐसे नहीं होते . यहाँ पर श्रवण कुमार जैसे लोगों की भी कमी नहीं, जिसने माता-पिता को कन्धों पर बिठाकर भ्रमण कराया था .
शिल्पा- अरे यार एक तो देश में वैसे ही जनसंख्या बढ़ रही है , तुम और उसे बढाने की बात कर रही हो , हम जैसी लड़कियां कम से कम इस मामले में तो देश की सेवा कर ही रही हैं. और फिर भी अगर तुम बुढापे की लाठी में भरोसा कर ही रही हो और इतना कर रही हो तो एक बात मेरे दिमाग में आयी है . हम लोग चाहें तो किसी बच्चे को गोद भी ले सकती हैं, उसमे क्या बुराई है . किसी अनाथ को सहारा मिल जाएगा . और हम लोगों को बुढापे का आसरा . हम उसके सहारे समय भी व्यतीत कर सकते हैं.
कम्मो- हाँ , ये आइडिया भी बुरा नहीं है . कोई सुंदर सी लड़की गोद भी ले सकते हैं, मगर सेटल होने के बाद . जब हम इस शहर में अपना घर कर लें, अपनी गाड़ी और इतने पैसे कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा सकें .
शिल्पा- बात में दम है मेरी जान.
कम्मो- ऐसी क्यों कहते हो , ऐसी कोई बात नहीं होती , आपने किसका बुरा किया है यार ? एक सवाल मन में घूमने लगा है, यह अभी-अभी उभरा है और परेशान करने लगा है . सोच रही हूँ कि तुम क्या इसीलिए मर्दों से नफरत करने लगी हो ?
शिल्पा- हाँ भी कह सकती हूँ और ना भी , क्योंकि मै ठीक अतारः से नहीं कह सकती. हो सकता है कि भूमिका वहीं से बननी शुरू हो गयी हो . या शायद किसी और वजह से भी यह सब हुआ हो .
कम्मो- और वो दिल्ली वाला गुप्त रोगों वाला डॉक्टर ? सुरेश ? उसका क्या हाल है ? मुलाक़ात होती है ?
शिल्पा- हाँ, होती रहती है , उससे मुझे सीखने को बहुत कुछ मिला है. वह होशियार डॉक्टर है. अपने काम की सम्पूर्ण जानकारी रखने वाला . उससे गुप्त रोगों और इंसानी स्वभाव के बारे में जानने की सीख ली है मैंने .
कम्मो- क्युआ उसने कभी शादी करने का प्रस्ताव नहीं रखा ?
शिल्पा- वो क्या प्रस्ताव रखेगा ? पहले से ही उसकी दो-दो बीवियां मौजूद हैं. वह अपनी ऑपरेटर को भी नहीं छोड़ता , हर महीने में लड़की बदल देता है. बहुत आशिक मिजाज है .
कम्मो- तुम भी तो कम सेक्सी नहीं हो. तुम्हें भी तो ऐसा ही मर्द चाहिए , जो तुम्हें दिन में कई बार संतुष्ट कर सके.
शिल्पा- सच बात तो यही है , कि मै मर्द से अब शादी ही नहीं कर सकती . मुझे तो तुम जैसी कली से ही प्यार है, लगाव है . अगर तुम साथ हो तो लड़के की जरूरत क्या है ?
कम्मो- और औलाद ? मेरा मतलब है संतान ? चलो ठीक है जिस्मानी सुख तो हम दोनों भोग लेंगी मगर संतान सुख कैसे भोगने को मिलेगा ? क्या तुम ऐसा कोई तरीका जानती हो , जिसमे मर्दों के सहयोग के बिना ही बच्चा पैदा किया जा सके ? मेरे ख़याल से अभी तक ऐसी कोई तकनीक ईजाद नहीं हुई है. उसके लिए तो कुदरत ने हमें उसीका मोहताज बनाकर छोड़ा है .
शिल्पा- हाँ , वो तो है लेकिन हम लोग क्या करेंगे संतान का ? हम एक दूसरे का जीवन भर सहारा बनेंगे .
कम्मो- लेकिन ये जरूरी तो नहीं कि हम साथ-साथ जियेंगे तो मरेंगे भी साथ-साथ . कोई आगे अम्रेगी तो कोई पीछे , उस स्थिति में अकेली क्या करेगी ?
शिल्पा- जिनके बच्चे हैं, वे लोग भी कौन से खुशहाल हैं, मैंने तो उनको भी बदहाल देखा है. जिन लोगों ने अपने कई -कई बेटा -बेटियों को पाल पोसकर बड़ा कर दिया , अब वही बच्चे अकेले माता -पिता को नहीं संभाल सकते .
कम्मो- बात संभालने की नहीं होती, और भी कई बातें होती हैं. जब कोई अपना है तो अपनत्व से कुछ कह भी सकता है , उसका क्या बुरा मानना ?
शिल्पा- मैंने देखा है कि बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के लेकर विदेश में सैटल हो जाते हैं और बूढ़ी माँ या पिता को किसी वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं, बस उनके खर्चे भेजकर अपने फर्ज को निभा देते हैं.
कम्मो- हम किसी -किसी की बात कर रहे हैं. सब लोग ऐसे नहीं होते . यहाँ पर श्रवण कुमार जैसे लोगों की भी कमी नहीं, जिसने माता-पिता को कन्धों पर बिठाकर भ्रमण कराया था .
शिल्पा- अरे यार एक तो देश में वैसे ही जनसंख्या बढ़ रही है , तुम और उसे बढाने की बात कर रही हो , हम जैसी लड़कियां कम से कम इस मामले में तो देश की सेवा कर ही रही हैं. और फिर भी अगर तुम बुढापे की लाठी में भरोसा कर ही रही हो और इतना कर रही हो तो एक बात मेरे दिमाग में आयी है . हम लोग चाहें तो किसी बच्चे को गोद भी ले सकती हैं, उसमे क्या बुराई है . किसी अनाथ को सहारा मिल जाएगा . और हम लोगों को बुढापे का आसरा . हम उसके सहारे समय भी व्यतीत कर सकते हैं.
कम्मो- हाँ , ये आइडिया भी बुरा नहीं है . कोई सुंदर सी लड़की गोद भी ले सकते हैं, मगर सेटल होने के बाद . जब हम इस शहर में अपना घर कर लें, अपनी गाड़ी और इतने पैसे कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा सकें .
शिल्पा- बात में दम है मेरी जान.
Saturday, May 29, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२२
प्रफेसर- हे ... क्या हुआ ? आपका आन्स्वर नहीं आ रहा है ... हेय ....
कम्मो- वावव... बहुत मजा आ रहा होगा और इंटरनेट की कम रफ़्तार ने सब गुड गोबर कर दिया . तब क्या हुआ ? क्या इंटरनेट का नेटवर्क ठीक हुआ या वार्ता अधूरी ही छूट गयी ? क्या हुआ ?
शिल्प- ओह, कनेक्शन कट चूका था . फिर आगे बात नहीं हो पाईं, मगर जितनी भी बातें हुई , वो हमेशा याद रखने लायक थीं, तभी तो मै उन बातों का ऐसे वर्णन कर रही हूँ, जैसे कि सब कुछ अभी- अभी ही घटा हो. सब कुछ दिल के कमरे में कैद हो गया है . अच्छा ही तो है . मै किसीको भी बता सकती हूँ और बताते वक्त भी उसे इंजॉय दे सकती हूँ. न जाने क्यों कम्मो, मगर अब मेरी कुछ ऐसी आदत हो गयी है कि छोटे से छोटा पल भी बेकार नहीं जाने देती. उसमे भी कोई न कोई आनंद का बहाना खोज ही लेती हूँ.
कम्मो- एक बात कहूँ शिल्पा, बहुत सेक्सी हो तुम ? क्यों ऐसा मेरी जान ? मैंने सुना है कि बचपन में जब कोई बलात्कार की शिकार हो जाती है या फिर जिसको बचपन में सेक्स का मजा लूटने की लत लग जाती है वह आगे चलकर खूब सेक्सी हो जाती है . अगर तुमने शादी की होती तो एक मर्द के बस में नहीं था तुम्हें संतुष्ट करना ... सच कघ्ती हूँ.
शिल्पा- मुझे सेक्सी कहलाना पसंद है मेरी जान. मै चाहती हूँ कि लोग मुझे इस नाम से पुकारें, मै चाहती हूँ कि तुम भी मेरी तरह सेक्सी बनो. और हाँ, तुम्हारा कहना सहीए है या नहीं ये तो पता नहीं मगर मेरे साथ जरूर ऐसा हुआ था. जब मै छोटी सी उम्र की थी तभी मुझे कुछ लोगों ने उठा लिया था और सात दिनों तक चार लोगों ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया था.
कम्मो- चार लोगों ने और सात दिनों तक ? कुछ हुआ तो नहीं ?
शिल्पा- हुआ था, तकलीफ बहुत हुई थी मगर वे लोग बहुत संभाल-संभालकर करते थे . मेरे अंग पर कुछ खास करें भी लगाते थे और कुछ भी करने से पहले वे मुझे एक पैग शराब पिलाते थे . तीन लोग मुझे अच्छी तरह से पकड़कर रखते थे और एक मेरे पूरे जिस्म को चाटता था.इसके बाद जब वह पूरी तरह तैयार हो जाता तब बहुत सावधानी बरतते हुए वह सम्बन्ध बनाता था . इसके बाद वे मुझे आराम करने देते और फिर इसके एक घंटे के बाद दुसरा व्यक्ति इसी तरह सम्बन्ध बनाता था . एक दिन -रात में वे एक -एक बार ही सम्बन्ध बनाते थे . उनमे से एक डॉक्टर भी था . जब वे मेरे जिस्म से अच्छी तरह खेल चुके होते तब वे उनमे से एक डॉक्टर मेरा चेक अप करता था और दर्द न हो इसके लिए कुछ दवाएं भी देता था.
कम्मो- कमाल है , ऐसे-ऐसे लोग भी होते हैं . कौन थे वे लोग ?
शिल्पा- पता नहीं, मगर दिखने में वे ठीक-ठाक लगते थे , हाँ शराब बहुत पीते थे. मैन उनसे कोई फरमाइश करती तो तुरंत पूरी कर दिया करते थे, उन्हें मेरे जिस्म से खेलने में बहुत मजा आता था. उनमे कई बार आपस में भी झगडा हुआ, मेरे ऊपर. वह डॉक्टर चाहता था कि मै सिर्फ उसकी अकेले की संपत्ति बनकर रहूँ, जब अन्य लोग चाहते थे कि जिस तरह वे चाह्रों मुझे अप्रहत करके लाये थे, उसी तरह वे चारों ही मेरे साथ मौज मस्ती करें.
कम्मो- तो क्या वे कोई अपराधी थे ? और उन्होंने तुम्हें रखा कहाँ था ?
शिल्पा- उन्होंने मुझे एक विशाल बंगले में कैद करके रखा था, हांलाकि वहां सभी सुख सुविधाएँ थीं मगर वहां से भागने का कोई रास्ता नहीं था .
कम्मो- तो तुम कैसे कामयाब हुई आने में ? और कुछ अनुमान लगाया वो लोग के बारे में ?
शिल्पा- शायद वे लोग कोई बिजनेस करते थे साथ में उनका वैश्या व्यवसाय का भी काम रहा होगा . ऐसा लग रहा था , वे मुझे भी शायद जिस्म की मंदी में उतारने के लिए ही लाये थे और शायद इसी कारण मुझे उसी काम की ट्रेनिंग दे रहे थे ताकि मै कोई आनाकानी न करू और आराम से ग्राहक के साथ सो सकूँ , मगर ...
कम्मो- मगर क्या मेरी जान ?
कम्मो मगर मैन वहां से भाग आयी, तुम यह जानने के लिए उत्सुक हो कि मैंने उन्हें चकमा कैसे दिया ? बताती हूँ, वो जो डॉक्टर था, वह मुझे चाहने लगा था उसीने अपने सथोयों से गद्दारी की और मुझे वहां से भगा दिया.
कम्मो- तो क्या फिर कभी मुलाक़ात हुई उस डॉक्टर से ?
कम्मो- वावव... बहुत मजा आ रहा होगा और इंटरनेट की कम रफ़्तार ने सब गुड गोबर कर दिया . तब क्या हुआ ? क्या इंटरनेट का नेटवर्क ठीक हुआ या वार्ता अधूरी ही छूट गयी ? क्या हुआ ?
शिल्प- ओह, कनेक्शन कट चूका था . फिर आगे बात नहीं हो पाईं, मगर जितनी भी बातें हुई , वो हमेशा याद रखने लायक थीं, तभी तो मै उन बातों का ऐसे वर्णन कर रही हूँ, जैसे कि सब कुछ अभी- अभी ही घटा हो. सब कुछ दिल के कमरे में कैद हो गया है . अच्छा ही तो है . मै किसीको भी बता सकती हूँ और बताते वक्त भी उसे इंजॉय दे सकती हूँ. न जाने क्यों कम्मो, मगर अब मेरी कुछ ऐसी आदत हो गयी है कि छोटे से छोटा पल भी बेकार नहीं जाने देती. उसमे भी कोई न कोई आनंद का बहाना खोज ही लेती हूँ.
कम्मो- एक बात कहूँ शिल्पा, बहुत सेक्सी हो तुम ? क्यों ऐसा मेरी जान ? मैंने सुना है कि बचपन में जब कोई बलात्कार की शिकार हो जाती है या फिर जिसको बचपन में सेक्स का मजा लूटने की लत लग जाती है वह आगे चलकर खूब सेक्सी हो जाती है . अगर तुमने शादी की होती तो एक मर्द के बस में नहीं था तुम्हें संतुष्ट करना ... सच कघ्ती हूँ.
शिल्पा- मुझे सेक्सी कहलाना पसंद है मेरी जान. मै चाहती हूँ कि लोग मुझे इस नाम से पुकारें, मै चाहती हूँ कि तुम भी मेरी तरह सेक्सी बनो. और हाँ, तुम्हारा कहना सहीए है या नहीं ये तो पता नहीं मगर मेरे साथ जरूर ऐसा हुआ था. जब मै छोटी सी उम्र की थी तभी मुझे कुछ लोगों ने उठा लिया था और सात दिनों तक चार लोगों ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया था.
कम्मो- चार लोगों ने और सात दिनों तक ? कुछ हुआ तो नहीं ?
शिल्पा- हुआ था, तकलीफ बहुत हुई थी मगर वे लोग बहुत संभाल-संभालकर करते थे . मेरे अंग पर कुछ खास करें भी लगाते थे और कुछ भी करने से पहले वे मुझे एक पैग शराब पिलाते थे . तीन लोग मुझे अच्छी तरह से पकड़कर रखते थे और एक मेरे पूरे जिस्म को चाटता था.इसके बाद जब वह पूरी तरह तैयार हो जाता तब बहुत सावधानी बरतते हुए वह सम्बन्ध बनाता था . इसके बाद वे मुझे आराम करने देते और फिर इसके एक घंटे के बाद दुसरा व्यक्ति इसी तरह सम्बन्ध बनाता था . एक दिन -रात में वे एक -एक बार ही सम्बन्ध बनाते थे . उनमे से एक डॉक्टर भी था . जब वे मेरे जिस्म से अच्छी तरह खेल चुके होते तब वे उनमे से एक डॉक्टर मेरा चेक अप करता था और दर्द न हो इसके लिए कुछ दवाएं भी देता था.
कम्मो- कमाल है , ऐसे-ऐसे लोग भी होते हैं . कौन थे वे लोग ?
शिल्पा- पता नहीं, मगर दिखने में वे ठीक-ठाक लगते थे , हाँ शराब बहुत पीते थे. मैन उनसे कोई फरमाइश करती तो तुरंत पूरी कर दिया करते थे, उन्हें मेरे जिस्म से खेलने में बहुत मजा आता था. उनमे कई बार आपस में भी झगडा हुआ, मेरे ऊपर. वह डॉक्टर चाहता था कि मै सिर्फ उसकी अकेले की संपत्ति बनकर रहूँ, जब अन्य लोग चाहते थे कि जिस तरह वे चाह्रों मुझे अप्रहत करके लाये थे, उसी तरह वे चारों ही मेरे साथ मौज मस्ती करें.
कम्मो- तो क्या वे कोई अपराधी थे ? और उन्होंने तुम्हें रखा कहाँ था ?
शिल्पा- उन्होंने मुझे एक विशाल बंगले में कैद करके रखा था, हांलाकि वहां सभी सुख सुविधाएँ थीं मगर वहां से भागने का कोई रास्ता नहीं था .
कम्मो- तो तुम कैसे कामयाब हुई आने में ? और कुछ अनुमान लगाया वो लोग के बारे में ?
शिल्पा- शायद वे लोग कोई बिजनेस करते थे साथ में उनका वैश्या व्यवसाय का भी काम रहा होगा . ऐसा लग रहा था , वे मुझे भी शायद जिस्म की मंदी में उतारने के लिए ही लाये थे और शायद इसी कारण मुझे उसी काम की ट्रेनिंग दे रहे थे ताकि मै कोई आनाकानी न करू और आराम से ग्राहक के साथ सो सकूँ , मगर ...
कम्मो- मगर क्या मेरी जान ?
कम्मो मगर मैन वहां से भाग आयी, तुम यह जानने के लिए उत्सुक हो कि मैंने उन्हें चकमा कैसे दिया ? बताती हूँ, वो जो डॉक्टर था, वह मुझे चाहने लगा था उसीने अपने सथोयों से गद्दारी की और मुझे वहां से भगा दिया.
कम्मो- तो क्या फिर कभी मुलाक़ात हुई उस डॉक्टर से ?
Friday, May 28, 2010
प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-२१
प्रोफ़ेसर -सच ? अरे वाह अब तुम्हारे साथ-साथ मै भी गर्म हो रहा हूँ. हम दोनों के होठ आपस में मिले हुए है. तुम फील कर रही हो न. फील करो कि मै अपने एक हाथ से तुम्हारी गोरी चिकनी जाँघों को सहला रहा हूँ और तुम इस काले नाग को स्पर्श कर रही हो. फील करो कि तुम काम वासना के जाल में आहिस्ता-आहिस्ता पूरी तरह उलझने के लिए तैयार हो .अब हम लोग आपस में प्यार करने की तैयारी कर रहे हैं.
शिल्पा- वाह प्रोफ़ेसर , कमाल कर दिया आपने तो . ऐसा आनंद दिया है कि जैसे हम दोनों एक बिस्तर पर ले रहे हों.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम यकीन करोगी अगर मै ये कहूँ कि मै सम्पूर्ण सुख भोग चूका हूँ . मै संतुष्ट हो चूका हूँ.
शिल्पा- क्या बात है प्रफेसर , मै भी बस यही कहने वाली थी . हम लोग दोनों ही संतुष्ट हो चुके हैं लगता है दोनों की संतुष्टि का समय भी वही है . यानि एक ही टाइम पर दोनों ने चरम सुख प्राप्त किया है.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम्हारा ऑनलाइन होने का यही समय होता है ? या किसी और टाइम भी आती हो ?
शिल्पा- बस यही . रात को ही मुझे समय मिल पाता है, ऑफिस में तो इस तरह की पर्सनल बातें कर नहीं सकते इसलिए अपने कमरे में ही करती हूँ. अब मै आराम से सो सकती हूँ .
प्रोफ़ेसर- ओह, यहाँ पर सुबह का समय है , आज का दिन शायद मेरे लिए अच्छा रहेगा क्योंकि शुरुआत अच्छी हुई है और एक इन्डियन कहावत ही है कि 'अंत भला तो सब भला ' . आज मै बहुत खुश हूँ. और हाँ, क्या तुम अन्य दोस्तों से भी इस तरह की सेक्स चैत्निग करती हो ?
शिल्पा- हां, मुझे मजा आता है, और ज्यादातर ऑरकुट फ्रेंड भी मुझसे यही उम्मीद करते हैं. वे मुझसे सेक्स चैटिंग ही करना चाहते हैं, जब शुरुआत में बात करते हैं तो बहुत धर्मात्मा बनते हैं लेकिन जब फिसलते हैं तो थमने का नाम भी नहीं लेते . गिरते चले जाते हैं.
प्रोफ़ेसर- हाँ, बहुत लोग होते हैं ऐसे .क्या तुम मेरे सामने मर्दों को दुत्कारना चाहती हो ? करो करो , जो करना है वो करो , बस इतना जानलो कि लड़कियां भी कुछ कम नहीं होतीं, मै ऐसी कई लड़कियों को जानता हूँ जो रोज मुझसे सेक्स चैटिंग करने का आग्रह करती हैं और मै बहुतों का आग्रह ठुकराता भी हूँ. क्योंकि अपने लेबल के पार्टनर के साथ ही आप १५ से २० मिनट गुजार सकते हैं. वैसे इस तरीके के बारे में तुम्हारी क्या राय है ? जहां तक मेरी अपनी बात है , मुझे खूब आनंद आता है . इसमें बुराई क्या है ? न तो किसी बीमारी का डर और ना ही कोई दूसरा खर्चा. जिस खर्च से इंटरनेट चल रहा है , वही तो है .
शिल्पा- मुझे भी यह आधुनिक तरीका पसंद आ रहा है . हम लोग वीडियो की मदद से एक दूसरे को आसानी से देख पा रहे हैं. बात कर रहे हैं, और क्या चाहिए . मुझे आप बहुत पसंद हैं प्रोफ़ेसर . अगर आप इंडिया आते हैं, तो मुझसे मिलिए , तुम्हें अपने पास पाकर मुझे खुशी होगी.
प्रोफ़ेसर- जी, शुक्रिया. तो क्या वहाँ आने पर भी हम लोग इस खेल को खेल पायेंगे , करीब से ?
शिल्पा- शायद, क्योंकि पास आने पर विचार बदल भी सकते हैं, बिस्तर पर सुख भले ही नहीं दे सकूँ मगर वैसे आपके साथ ही रहूंगी, हम लोग खूब बातें करेंगे , घूमेंगे , फिरेंगे , मौज मस्ती करेंगे . मेरी रिलेटिव कला बड़ा घर है , रहने -सहने , खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होगी . सब मेरी तरफ से रहेगा , यहाँ तक कि घूमना -फिरना भी.
प्रोफ़ेसर- इसके लिए शुक्रिया. मै भी इंडिया आना चाहता हूँ, मेरी भी बहुत हसरत है कि एक बार वहाँ जरूर आऊ.
शिल्पा- आपका स्वागत है प्रफेसर . मेरे घर में आपका स्वागत है .
प्रोफ़ेसर- अच्छा होता तुम मुझे बिस्तर के प्यार के लिए भी आश्वश्त करती , शायद तब मै और ज्यादा उत्साहित होता. वैसे आपका भी यहाँ स्वागत है. आप आ सकती हैं मेरे अपने घर में रह सकती हैं मेरी गाड़ी में सिर कर सकती हो , किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी .
शिल्पा- थेंक यूं . क्या कर सकती हूँ आपकी गाड़ी में , सिर ?
प्रफेसर- ओह सोरी , मै सफर लिखने वाला था और सिर लिख गया.
शिल्पा- अब क्या करेंगे आप ? पेट के नीचे की भूख तो शांत हो गयी , अब ?
प्रोफ़ेसर- अब जाऊंगा कोलेज . वहीं पर दोपहर का भोजन करता हूँ. मै इस घर में अकेला रहता हूँ. अभी शादी भी नहीं की. मेरी खाना बनाने वाली सिर्फ शाम के समय आती है. दोपहर का खाना हमेशा कैंटीन में ही खाता हूँ.
शिल्प- सोरी प्रोफ़ेसर , मेरा नेटवर्क बहुत कमजोर हो रहा है. कुछ प्रोब्लम है .
शिल्पा- वाह प्रोफ़ेसर , कमाल कर दिया आपने तो . ऐसा आनंद दिया है कि जैसे हम दोनों एक बिस्तर पर ले रहे हों.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम यकीन करोगी अगर मै ये कहूँ कि मै सम्पूर्ण सुख भोग चूका हूँ . मै संतुष्ट हो चूका हूँ.
शिल्पा- क्या बात है प्रफेसर , मै भी बस यही कहने वाली थी . हम लोग दोनों ही संतुष्ट हो चुके हैं लगता है दोनों की संतुष्टि का समय भी वही है . यानि एक ही टाइम पर दोनों ने चरम सुख प्राप्त किया है.
प्रोफ़ेसर - क्या तुम्हारा ऑनलाइन होने का यही समय होता है ? या किसी और टाइम भी आती हो ?
शिल्पा- बस यही . रात को ही मुझे समय मिल पाता है, ऑफिस में तो इस तरह की पर्सनल बातें कर नहीं सकते इसलिए अपने कमरे में ही करती हूँ. अब मै आराम से सो सकती हूँ .
प्रोफ़ेसर- ओह, यहाँ पर सुबह का समय है , आज का दिन शायद मेरे लिए अच्छा रहेगा क्योंकि शुरुआत अच्छी हुई है और एक इन्डियन कहावत ही है कि 'अंत भला तो सब भला ' . आज मै बहुत खुश हूँ. और हाँ, क्या तुम अन्य दोस्तों से भी इस तरह की सेक्स चैत्निग करती हो ?
शिल्पा- हां, मुझे मजा आता है, और ज्यादातर ऑरकुट फ्रेंड भी मुझसे यही उम्मीद करते हैं. वे मुझसे सेक्स चैटिंग ही करना चाहते हैं, जब शुरुआत में बात करते हैं तो बहुत धर्मात्मा बनते हैं लेकिन जब फिसलते हैं तो थमने का नाम भी नहीं लेते . गिरते चले जाते हैं.
प्रोफ़ेसर- हाँ, बहुत लोग होते हैं ऐसे .क्या तुम मेरे सामने मर्दों को दुत्कारना चाहती हो ? करो करो , जो करना है वो करो , बस इतना जानलो कि लड़कियां भी कुछ कम नहीं होतीं, मै ऐसी कई लड़कियों को जानता हूँ जो रोज मुझसे सेक्स चैटिंग करने का आग्रह करती हैं और मै बहुतों का आग्रह ठुकराता भी हूँ. क्योंकि अपने लेबल के पार्टनर के साथ ही आप १५ से २० मिनट गुजार सकते हैं. वैसे इस तरीके के बारे में तुम्हारी क्या राय है ? जहां तक मेरी अपनी बात है , मुझे खूब आनंद आता है . इसमें बुराई क्या है ? न तो किसी बीमारी का डर और ना ही कोई दूसरा खर्चा. जिस खर्च से इंटरनेट चल रहा है , वही तो है .
शिल्पा- मुझे भी यह आधुनिक तरीका पसंद आ रहा है . हम लोग वीडियो की मदद से एक दूसरे को आसानी से देख पा रहे हैं. बात कर रहे हैं, और क्या चाहिए . मुझे आप बहुत पसंद हैं प्रोफ़ेसर . अगर आप इंडिया आते हैं, तो मुझसे मिलिए , तुम्हें अपने पास पाकर मुझे खुशी होगी.
प्रोफ़ेसर- जी, शुक्रिया. तो क्या वहाँ आने पर भी हम लोग इस खेल को खेल पायेंगे , करीब से ?
शिल्पा- शायद, क्योंकि पास आने पर विचार बदल भी सकते हैं, बिस्तर पर सुख भले ही नहीं दे सकूँ मगर वैसे आपके साथ ही रहूंगी, हम लोग खूब बातें करेंगे , घूमेंगे , फिरेंगे , मौज मस्ती करेंगे . मेरी रिलेटिव कला बड़ा घर है , रहने -सहने , खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होगी . सब मेरी तरफ से रहेगा , यहाँ तक कि घूमना -फिरना भी.
प्रोफ़ेसर- इसके लिए शुक्रिया. मै भी इंडिया आना चाहता हूँ, मेरी भी बहुत हसरत है कि एक बार वहाँ जरूर आऊ.
शिल्पा- आपका स्वागत है प्रफेसर . मेरे घर में आपका स्वागत है .
प्रोफ़ेसर- अच्छा होता तुम मुझे बिस्तर के प्यार के लिए भी आश्वश्त करती , शायद तब मै और ज्यादा उत्साहित होता. वैसे आपका भी यहाँ स्वागत है. आप आ सकती हैं मेरे अपने घर में रह सकती हैं मेरी गाड़ी में सिर कर सकती हो , किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी .
शिल्पा- थेंक यूं . क्या कर सकती हूँ आपकी गाड़ी में , सिर ?
प्रफेसर- ओह सोरी , मै सफर लिखने वाला था और सिर लिख गया.
शिल्पा- अब क्या करेंगे आप ? पेट के नीचे की भूख तो शांत हो गयी , अब ?
प्रोफ़ेसर- अब जाऊंगा कोलेज . वहीं पर दोपहर का भोजन करता हूँ. मै इस घर में अकेला रहता हूँ. अभी शादी भी नहीं की. मेरी खाना बनाने वाली सिर्फ शाम के समय आती है. दोपहर का खाना हमेशा कैंटीन में ही खाता हूँ.
शिल्प- सोरी प्रोफ़ेसर , मेरा नेटवर्क बहुत कमजोर हो रहा है. कुछ प्रोब्लम है .
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