Wednesday, May 12, 2010

प्यार से प्यारा यार , भाग-४

कम्मो को शिल्पा की बातें बहित अच्छी लगने लगीं. वह बोली-
- तुम मेरी पक्की सहेली बन चुकी हो, क्यों न हम दोनों इसी कमरे में सो जाया करें, इससे हम खूब सारी बातें भी कर सकेंगे और एक साथ सो भी सकते हैं. इससे होटल के इस कमरे का किराया भी कम हो जाएगा. हम दोनों बाँट लेंगे आपस में , बोलो क्या बोलती हो ? यहाँ पर हम दोनों साथ रहेंगे तो कहीं ठीक सी जॉब भी ढूंढ सकते हैं.
शिल्पा - सच कम्मो, तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली यार . मुझे तुम बहुत पसंद हो, मैन भी मुंबई में अकेली ही रहती हूँ, यहाँ जिस रिश्तेदार के पास रहती हूँ उसकी पत्नी रोजाना टांय-टांय करती रहती है . इससे अच्छा तो यही होगा कि हम दोनों यहीं पर रहने लगें. काम की चिंता तुम बिलकुल न करो. तुम इतनी सुन्दर हो कि तुम्हें काम मिलने में समय नहीं लगेगा. बस बचना पड़ेगा यहाँ के दिलफेंक लड़कों से...
कम्मो-लड़कों से तो मुझे सख्त नफरत है, मै किसी लड़के का स्पर्श भी पसंद नहीं करती , अगर लड़कों से मजबूरी में हाथ भी मिलाना पड़े तो दिल में टूट -फूट सी होने लगती है. पता नहीं क्यों लड़के लोग से मेरा मन घ्रणा से भर उठता है . मेरा बस चले तो इन लड़कों से जिंदगी भर कोई रिश्ता नहीं रखूँ.
शिल्पा - सच कह रही हो तुम ? और मेरा स्पर्श कैसा लगता है ? आज रात जब मैंने तुम्हारी सीने की पहाडियों को टच किया तो कैसा लगा ?
कम्मो- आह, बहुत अच्छा , ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे मुंह माँगी मुराद दे दी हो. बड़ा आनंद आ रहा था.
शिल्पा- सच , मैन क्या जानती थी, वरना तुम्हें सम्पूर्ण सुख संतुष्टि देने का इंतजाम करती . मैन हर कला जानती हूँ , बिस्तर पर ऐसा सुख दूंगी कि सारी दुनिया को भूल जायोगी और जीवन कभी शादी करने का ख़याल भी मन में नहीं लाओगी . मुझे भी इन मर्दों से सख्त नफरत है . समाज के हर तबके के लोग महिलाओं की कोख से जन्म लेते हैं और महिलाओं का ही हर जगह शोषण करते हैं. मेरी एक सहेली थी , वह एक लड़के के प्यार के चक्कर में फंस गयी. लड़के ने भोला बनकर पहले उसका विश्वाश लूटा और फिर सब कुछ लूट लिया , जब इससे भी मन नहीं भरा तो उसने मेरी सहेली को ब्लेकमेल करना शुरू कर दिया . उसका एम् एम् एस बनाकर लोगों में बाँट दिया . जानती हो आखिर क्या हुआ ? मेरी सहेली को आत्महत्या करनी पडी. तबसे मुझे इन मर्दों से और भी ज्यादा नफरत हो गयी . सच कहूँ तो मैन इनकी छाया भी बर्दाश्त नहीं करती. ये प्यार और शादी के नाम पर हम लड़कियों को अपना गुलाम बना डालते हैं. ये एक सुख के सिवाय हमें और क्या देते हैं? इनके पास कुदरत ने एक चीज ही तो खास दी है , तो हम भी तो ऐसे हे नहीं हमें भी तो कुदरत ने कुछ दिया ही है . हम भी इन्हें अपने इशारों पर नाचा सकती हैं. ये लोग समझते हैं कि हम इनके बिना प्यार का सुख नहीं ले सकतीं, कबकी इनकी यह भूल है. हम अगर चाहें तो मनचाहा आनंद उठा सकती हैं. आज रात मैन तुम्हें इसका फल भी चखा दूंगी . मेरी गारंटी है कम्मो. मजा आया जाएगा , मैन तो आज रात डर रही थी, कुछ नींद भी आ रही थी वरना ... खैर, कोई बात नहीं पूरी जिंदगी पडी है , हम लोग सारे जीवन भर इस सुख को लूट सकते हैं. इस आनंद के सागर में गोते लगा सकते हैं.
कम्मो-तुमने तो रात के सुख का वर्णन ऐसे किया है कि मेरी इच्छाएं काबू में नहीं आ रही , सोचती हूँ कि जल्दी से रात हो जाए और जसा तुमने बताया है , उस आनंद को भोगा जाए, क्या इस सुख को मैन अकेली भोगुन्गी या तुम भी इसमें शामिल हो सकती हो ?
शिल्पा - अरे पगली मैन कहाँ चली जाउंगी , मैन खुद भी मजा लूंगी , युम फ़िक्र मत कर . और इतनी उतावली भी मत हो , अब तो मैन रोजाना तुम्हारे साथ रहूंगी. आज तुम चाहो तो मेरे ऑफिस चल सकती हो , मैन तुम्हारे लोइए काम की शिफारिश करती हूँ, अगर वाहन काम लग गया तो हम दोनों को वाहन भी साथ रहने का मौक़ा मिल जाएगा. मेरी आँखों के सहारे ही रहोगी . सच कहूँ तो तुम्हें देखते ही मुझे कुछ-कुछ हो गया था , मेरा दिल कहता है कि तुम किसी पूर्व जन्म की बिछड़ी हुई साथी हो . शायद तुम पिछले जन्म में मेरी प्रेयसी रही होंगी , हम दोनों मिल नहीं पाए होंगे , और इस जन्म में मुलाक़ात हो गयी.











Tuesday, May 11, 2010

pyaar se pyara ... bhag-3

, भाग-३

हर लड़का समय-समय पर इस बात के संकेत अवश्य देता है कि वह अपने स्वतंत्र जीवन को छोड़ने के लिए तैयार है या नहीं? मसलन, आप उसे अपनी सहेली की शादी में शिरकत करने के लिए आमंत्रित करती हैं, लेकिन वह कोई न कोई बहाना बनाकर उस शादी में शामिल नहीं होता। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि अभी वह स्वयं शादी के लिए तैयार नहीं है। उसकी इच्छा को जानने के और भी तरीके हैं।
जब वह शुरू-शुरू में डेटिंग कर रहा था तो आपकी आदतों से उसे कोई समस्या नहीं थी। लेकिन जब से आपने शादी का संकेत दिया है तब से वह आप में खामियाँ निकालने लगा है। इसका भी सीधा अर्थ यह है कि वह अभी शादी करने के मूड में नहीं है। डेटिंग के दौरान वह अपना अधिकतर खाली समय आपके साथ गुजारना पसंद करता था लेकिन जब से आपने शादी का जिक्र छेड़ा है तब से वह अपने दोस्तों के साथ अधिक समय गुजारना पसंद करता है।
डेट की रातों को दोस्तों की महफिलों में तब्दील करने का मतलब यह है कि वह आपको बतलाना चाह रहा है कि अब आप उसकी वरीयता सूची पर नहीं हैं और वह आपसे शादी नहीं करना चाहता।
इन सुझावों से आपको अंदाजा हो गया होगा कि आपका ब्वॉयफ्रेंड शादी करने के लिए तैयार है या नहीं? अगर वह शादीशुदा जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो उसके डर को किस तरह से निकाला जाए और आप उसे किस तरह से सहयोग करें कि आपका जीवन खुशहाल हो सके।
कम्मो -जानती हो लड़के क्या सोचते हैं ? रमेश नाम का एक लड़का अपने साथियों को टिप्स देते हुए कह रहा था -
-अगर आप भी अपनी गर्लफ्रेंड के होंठों पर मुस्कान देखना चाहते हैं तो हम बताते हैं उसके लिए कुछ टिप्स, जिससे आपकी वो खुश हो जाएँगी और उनकी खुशी से बढ़कर आपको और क्या चाहिए? तो लीजिए- उनसे कहें कि वह खूबसूरत है कभी भी उन्हें हॉट या सेक्सी न कहें। उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें। प्यार से उनके सिर को चूमें नींद से जगाने के लिए उनकी ही रिकॉर्ड आवाज को उन्हें सुनाएँ। उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं।
अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएँ कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है। उनकी छोटी-छोटी बातों का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।
कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएँ, चाहे आपकी आवाज कितनी भी खराब क्यों न हो। उनके दोस्तों के सभी कुछ समय बिताएँ।उनके नोट्स आप तैयार कर दें। अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से भी उन्हें मिलाएँ, इससे आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।
उनके बालों को प्यार से सहलाएँ, इससे उन्हें सुकून मिलेगा। कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भरा खेल भी खेलें, जैसे गुदगुदाना, गोद में उठाना, कुश्ती करना।पार्क लेकर घूमने जाएँ और अपने दिल की बातें कहें। हँसाने के लिए जोक्स सुनाएँ।
आधी रात को उनकी खिड़की के नीचे छोटे से पत्थर का टुकड़ा फेंकें और उन्हें बताएँ कि आप उन्हें कितना 'मिस' कर रहे हैं। सोते वक्त उनके नीचे गिरते हाथों को अपने हाथों में ले लें।
अपने नामों को पेड़ पर लिखकर घेरें। जब वह आप में पूरी तरह खो जाए तो उसे प्यार से चूमें। उन्हें कभी-कभी अपने कंधों पर उठाएँ। उनके लिए फूलों का तोहफा ले जाएँ।
अपने दोस्तों के बीच भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप अकेले में करते हैं।उनकी आँखों में देखकर मुस्कराएँ।
आपकी जो तस्वीर उन्हें पसंद हो उन्हें जरूर दें।उनके साथ डांस करें, अगर म्यूजिक न हो तो भी।बारिश में उन्हें चूमें। हमेशा अपने प्यार का इजहार करते रहें।और हाँ , कभी- कभी जीवन का असली आनंद उठाने से भी नहीं चूकें. लेकिन हिफाजत के साथ. मेरी तो यही राय है, जीवन अनमोल है , एक बार ही मानव देह मिलती है , इसका जमकर फायदा उठाना चाहिए. अगर साथी बिस्तर पर कमजोर हो तो उसे परफेक्स कैप्सूल खिलाने चाहिए . प्रणय क्रिया से पहले ही परफेक्स तेल की शीशी ले लेनी चाहिए . तब देखना किसी यादगार रात गुजरती है. मजा आ जाएगा . सामने वाला भी खुश और अपन भी. धायं यही रहे कि मांस खाओ मगर हड्डियां कभी भी गले से मत लटकाओ .
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Monday, May 10, 2010

भाग-२

कम्मो ने शिल्पा को अपने होटल के कमरे में खाने पर आमंत्रित किया , दोनों समय पास करने के लिए कहानियाँ सुनाने लगीं , कम्मो ने उसे अपने कमरे पर ही रोक लिया , तब अनुभव सुनाये हुए शिल्प बोली-
-ठीक है सुनो, राहुल और संगीता के बीच पिछले तीन बरस से डेटिंग का सिलसिला ठीक-ठाक बल्कि यूँ कहिए बहुत अच्छा चल रहा था। अचानक राहुल कुछ फासला रखने लगा। संगीता को उसकी यह हरकत समझ में नहीं आई। वह सोचने लगी कि आखिर उससे क्या गलती हो गई?
दरअसल, अन्य लड़कियों की तरह संगीता को भी नहीं मालूम था कि वाई-क्रोमोसोम प्राणी बहुत अजीब होते हैं। वे सिंगल स्टेटस को खोने से बहुत डरते हैं। संगीता ने शादी का जिक्र किया था और तभी से राहुल में बदलाव आने लगा था।
शादी लड़कियों के लिए तो एक मील का पत्थर होता है जबकि लड़कों के लिए यह स्वतंत्र जीवन को खोना होता है और इसलिए यह तालमेल बिठाना उनके लिए कठिन होता है। बहरहाल, अगर संगीता इस बात को समझ जाए कि पुरुषों का दिमाग किस तरह से कार्य करता है, तो वह इस कठिन राह से आसानी से गुजर जाएगी औरराहुल हमेशा के लिए उसका हो जाएगा।
कम्मो- वाव , तब क्या हुआ ?
शिल्पा- डेट की रातों को दोस्तों की महफिलों में तब्दील करने का मतलब यह है कि वह आपको बतलाना चाह रहा है कि अब आप उसकी वरीयता सूची पर नहीं हैं और वह आपसे शादी नहीं करना चाहता।
बातचीत के दौरान सर्वनाम का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब मुद्दा संबंध का हो। लड़कियाँ जब 'मैं' की जगह 'हम' का प्रयोग करने लगती हैं तो लड़कों को लगने लगता है कि उनकी आजादी और कुँवारेपन के दिन खत्म होने जा रहे हैं। इस 'हम' से लड़के इस वजह से भी डरते हैं कि उन्हें लगता है कि लड़कियाँ अब उनके जीवन को नियंत्रित करने जा रही हैं।
इस समस्या से बचने का बेहतर तरीका यह है कि अपनी गुफ्तगू में आप 'हम' का इस्तेमाल बहुत सावधानीपूर्वक करें। मसलन, यह कहने की जगह 'इस संडे हम क्या कर रहे हैं?' यह कहें 'मैं सोच रही थी इस संडे अगर हम फिल्म देखने चले जाएँ, तो अच्छा रहेगा, तुम्हारा क्या ख्याल है?' इस तरह सर्वनाम का प्रयोग करने से आप यह नहीं दर्शातीं कि आप उसके जीवन को नियंत्रण में करना चाह रही हैं।
विश्वास दिलाएँ कि आप दो नहीं एक कैम्प पर यकीन करती हैं
शादीशुदा जीवन में प्रवेश करने से लड़के इसलिए भी डरते हैं कि उनके परिवार के सदस्यों से आने वाली बहू का रवैया न जाने किस किस्म का हो? इसलिए इस संदर्भ में भी लड़के को विश्वास दिलाना आवश्यक होता है। खासकर इसलिए भी क्योंकि लड़का ऐसी स्थिति में नहीं होना चाहता जहाँ उसे परिवार या आप में से किसी एक की तरफदारी करनी पड़े।
यही बात उसके दोस्तों के संदर्भ में भी लागू होती है। यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि एक लड़के के जीवन में उसके दोस्त और उसकी गर्लफ्रेंड दो महत्वपूर्ण कैम्प होते हैं। उसे ऐसा मजबूर न किया जाए कि वह एक कैम्प का होकर रह जाए। कहने का अर्थ यह है कि दोनों कैम्पों में तालमेल बिठाने की आवश्यकता है।
आजकल यह फैशन नहीं रहा है कि प्रपोज सिर्फ लड़का ही करे। लड़की भी प्रपोज कर सकती है। लेकिन प्रपोज जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। अचानक या बिना सोचे-समझे या हालात को साजगार बनाए प्रपोज करने से लड़का असमंजस में पड़ सकता है। इसलिए प्रपोज करने से पहले स्थिति को टटोलकर देख लेना चाहिए।
मसलन, बातों-बातों में आप उससे यह जिक्र करें कि किस तरह आपकी सहेली और उसके ब्वॉयफ्रेंड ने जीवनभर साथ रहना तय किया है। इस पर उसकी प्रतिक्रिया को गौर से देखें। उसकी प्रतिक्रिया से आपको यह अंदाजा हो जाएगा कि वह स्वयं शादी के लिए तैयार है या नहीं।

Sunday, May 9, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा

कम्मो अकेली ही मुंबई आ गयी . दिखने में वह बेहद सुन्दर थी लेकिन उसने जान बूझकर अपना हुलिया कुछ ऐसा बिगाड़ लिया जिससे की किसी को वह ज्यादा खूबसूरत न लगे , मगर जवानी की निश्जानियों का क्या करती , उनको छिपाना तो मुश्किल था, कैसे छिपाती अपने यौवन की गोलाइयों को. जितना छिपाने की कोशिश करती वह उतनी ही ज्यादा दिखाई देती थीं, उसने किसीको बाते नहीं की वह मुंबई में अकेली है . उसे एक और लड़की मिल गयी . उसका नाम था शिल्पा . कुछ देर में ही वे दोनों अच्छी तारा से घुल मिल गयी . आखिर कम्मो ने बता ही दिया की वह सिंगल है . तपाक से शिल्पा बोली-
-क्या हुआ, जो आप सिंगल हैं और जल्दी किसी के साथ जुड़ने के लिए तैयार भी नहीं। ऎसे में कभी-कभी कुछ परेशानियां पेश आती हैं। फैसला लेना मुश्किल लगता है।अगर
आप अकेली हैं और खाने के लिए बाहर जाने का मन है, लेकिन साथ जाने के लिए कोई भी नहीं है। ऎसे में अधिकांश लोग बाहर जाने का इरादा ही त्याग देते हैं। आप ऎसा न करें। कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप अकेले ही "डाइनिंग आउट" का लुत्फ उठा सकती हैं और अकेले होने का एहसास भी नहीं सताएगा।
अपने साथ कोई अच्छी मैगजीन, बुक या न्यूज पेपर रखें। यह आपको किसी दूसरे के फोकस के एहसास से बचाएंगे और आप असहज महसूस नहीं करेंगी।
खाना ऑर्डर करने के बाद उसके आने तक का समय अच्छा संगीत सुनकर पास कर सकती हैं। अपने साथ आईपॉड रखें।
रेस्त्रां में दूसरों को खुद को घूरने से रोका नहीं जा सकता, इसलिए अपना ध्यान अपने खाने पर ही रखें और हर निवाले का आनंद लें। दूसरों की वजह से जल्दबाजी में खाना खत्म कर भागने की कोई जरूरत नहीं है। आत्मविश्वास बनाए रखें।
किसी खुशदिल और हंसोड़ दोस्त के साथ बाहर जाने से अच्छा विकल्प और क्या होगा। उसके साथ रेस्त्रां जाएं या फिर दोनों की रूचि जिसमें हो वहां यानी-शॉपिंग! एक दूसरे के मेकओवर के लिए एक दूसरे को अच्छे आईडिया दें और एक दूसरे की कमियां और अच्छाइयां बताएं।
जब तक सिंगल हैं अपनी हॉबीज को पूरा करें। जो भी चाहती हैं कर लें, योग करना है या फिर अपनी पसंद के नॉवल पढ़ने हैं। ऎसे कामों की लिस्ट बना लें और समय तय करें।
यही समय है जब आप अपने करिअर पर ध्यान दे सकते हैं। अपने सारे प्रयास इस ओर लगा दें। करिअर अचीवमेंट्स आपके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होंगे। इसके बाद जब भी आप डेटिंग शुरू करेंगे तो यही कॉन्फिडेंस आपकी रिलेशनशिप में भी मददगार साबित होगा।
कम्मो-इतना बड़ा भाषण ? थकती नहीं हो तुम ?
शिल्पा- हा हा हा . पहले ये बताओ की कम्प्यूटर जानती हो ? अगर हाँ तो ब्लॉग्स आपको दूसरों से संपर्क को मजबूत बनाते हैं। अपना ब्लॉग बनाएं और खुद से जुड़ी हर चीज का अनुभव दूसरों से शेयर करें चाहे वह टे्रवल, ब्यूटी, सेलिब्रिटी या केवल गॉसिप ही क्यों न हो। आपके जैसे लोग आपसे जुड़ते जाएंगे। दोस्तों का ग्रुप बनाएं और हर तरह के मुद्दों पर बातचीत करें। दूसरों के सतत संपर्क में बने रहने का यही बेहतर तरीका है।
खुद को जानने का सबसे अच्छा तरीका है ट्रेवलिंग। अपनी आजादी को अच्छे से एंजॉय करें। ट्रिप का इंतजाम करने से लेकर हर चीज खुद मैनेज करें। ऎसी जगह जाएं, जहां आपकी जाने की तमन्ना रही हो। इसके अलावा वीकेंड पर भी बाहर जाने के बारे में सोचा जा सकता है।और फिर मैं यानी तुम्हारे दोस्त शिल्पा तो तुम्हारे साथ मौजूद है ही .

Friday, May 7, 2010

pyar ka prinda bhaag-86

माफी चाहता हूँ माँ, आप जानती हैं मेरा मकसद क्या है ? और हाँ, मियो आपको बताना ही भूल गयी . यह चंदाबाई है आपकी बहू. इसे आशीर्वाद दो माँ. हम दोनों ने शादी करली है. कानूनी तौर पर नहीं बल्कि दिली तौर पर . हमने अपने दिल में तय कर लिया है की हम दोनों पति, पत्नी की तरह रहेंगे . जब मैं कानूनी रूप से बालिग़ हो जाउंगा तो इससे बाकायदा कानूनी और सामाजिक तरीके से इसे अपना लूंगा. अआप सबकी उपस्थिति में . यह सब जो कुछ हुआ , इसके लिए मैं माफी चाहता हूँ. मुझे माफ कर दीजिए ...
कमरे में गज़ब का सन्नाटा छा गया . अजय की माँ का कलेजा तो उछलकर बाहर निकलने के लिए तैयार हो गया. आँखों के सामने अन्धेरा छ गया. उनका लाल , उनका अपना इकलौता बेटा इतनी बड़ी बात को कितनी आसानी से कह गया था . विजय प्रताप सिंह को तो अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था. जैसा फिल्मों में हो जाता है, ठीक उसीतरह का सीन था और उसी खामोशी का फायदा उठाकर चन्दा आशीर्वाद लेने के लिए झुकी, ना तो किसी ने इनकार किया और ना आशीर्वाद ही दिया. अब स्वीटी के पिता के बारी थी . उबोले-
- बेटा , शादी , ब्याह गुड्डा -गुड़ियों का खेल नहीं होता, अभी तुम्हारी उम्र ऐसी नहीं है की सही और गलत का फैसला किया जा सके . माँ- बाप सदा अपनी औलाद की खुशी के लिए काम करते हैं. वे क्यों चाहेंगे की उनका पुत्र परेशान रहे, तुम्हारी और चन्दा की दोस्ती है , ठीक है . आप लोग दोस्त बने रह सकते हैं. इन्हें अपने काम [पर ध्यान देना है और आपको अपनी पढाई पर. कैरियर बनाने के बाद ही आप लोग अगर शादी की बात करें तो बेहतर होगा , इससे होगा ये की तब तक तुम्हारे सोचने समझनी की क्षमता भी परिपक्व हो जायेगी.
विजय प्रताप सिंह- हाँ , बेटे ये सही कह रहे हैं. हम तुम्हारी भलाई चाहते हैं, तुम्हें दुःख पहचाना हमारा भी उद्देश्य नहीं, हमने तुम्हें बड़ी मुश्किल से देखा है बेटा, ऐसे दिल ना तोडो.
अजय- माफ क्लीजिये बाबूजी, मैं वचन दे चुका हूँ, और आपसे ही ये सीखा है की क्षत्रिय को वचन की मर्यादा करनी चाहियी. विष दो मगर किसीको विश्वाश मत दो. मैं बड़े धर्मसंकट में हूँ,समझ में नहीं आता की क्या निर्णय लूं. एक तरफ मेरे जन्मदाता हैं, जिन्होंने मुझे जन्म दिया , मेरा सही पालन पोषण किया और दूसरी तरफ मेरी जीने का मकसद. चन्दा के बिना मैं एक पल भी जीने की कल्पना नहीं कर सकता . इससे अच्छा है की आप सब लोग मुझे आदेश दे , मैं मौत के आगोश में समा जाना चाहता हूँ. सारी दुनिया बस मेरे ही पीछे पडी है. सब लोग बस मुझे ही समझाने में लगे है , ऐसा लगता है जैसे की दुनिया का सबसे नादाँ मैं ही हूँ. अगर मेरे जाने से ही सबको खुशी होती है तो ठीक है , मैं चला जाता हूँ.
तड़प उठी अजय की माँ. उसका बेटा मरने की बात कर रहा था . स्वीटी को भी जोर का झटका लगा , बोली-
-अगर अजय चाहते हैं तो हम लोग इनकी चाहत का सम्मान क्यों नहीं कर सकते ? हमें भी इनकी भवनाओं का ख़याल रखना चाहिए. चंदाबाई में क्या कमी है , उम्र तो लगी रहती है, आज नहीं तो कल सबको इस उम्र तक पहुचना है . मेरी आप लोगों से प्रार्थना है की इनको चन्दा से मिला देना चाहिए ...
माँ- ये तुम कह रही हो बेटी ?मुझे आश्चर्य हो रहा है.
स्वीटी- हाँ, क्या अपनी बेटी की इतनी सी बात नहीं मानोगी ? आप तो मुझे अपनी बेटी से भी ज्यादा मानती हैं, माँ से बढ़कर लाड -प्यार दिया है आपने . बचपन से लेकर आज तक मैंने जो भी माँगा , जिद की , सब आपने पूरी की. शायद माँ -बाप का जन्म ही औलाद को जीवन भर देने के लिए ही होता है माँ.
माँ- ठीक कहती हो मेरी बेटी ... इसीलिए होता है. तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है बेटी . तुम त्याग की जीती जागती मूर्ती हो. त्याग की देवी हो . मेरी क्षमता इतनी नहीं है बेटी. मेरा दिल इतना बड़ा दिल नहीं है.