Saturday, May 23, 2009

तड़प, भाग-42

शैली- तो क्या तुम भी इसका स्वाद लेते रहे हो ?
दीपू- नहीं , बिल्कुल नहीं... अभी मुझे इसकी जरूरत नहीं ,,, वैसे मैं कई लोगों को इसकी सलाह दे चुका हूँ... जिसने सेवन किया वह सुखी हो गया... वे लोग अब अपने अनुभव मेरे साथ बाँटते हैं ,, अच्छा लगता है... इसी कारण तुम्हें बता दिया... मैं कोई हकीन वैध तो हूँ नहीं, जो करीबी लोगों से सुना है बता दिया...
शैली- मुझे तुम्हारी बात अच्छी लगी... अगर ऐसी बात है तो मैं अपने कुछ ग्राहकों को इसे खाने की सलाह दे सकती हूँ, अच्छा ही है अगर हमारी वजह से किसीका भला हो जाए तो... मैं ऐसा इसलिए भी कर रही हूँ क्योंकि इस तरह की दवाओं का कुप्रभाव सीधे किडनियों पर पड़ता है , इसी कारण सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाओं को चुनने में थोडी सावधानी बरतनी चाहिए...
दीपू - तुमने भी यह बताकर अच्छा किया वरना मैं बेवजह परेशान हो सकता था...खैर, तुम राजेश और रवि के बारे में बता रही थीं...मैं उसी कथा को सुनना चाहता हूँ...
शैली- उस रात मेरे दोस्त राजेश ने रवि की प्रेमिका रोजी के साथ सम्बन्ध बनाये, रवि मेरे बदन से खिलवाड़ करता रहा... रोजी खुश तो थी मगर संतुष्ट नहीं... एक बार सम्बन्ध बनाने के बाद वह सिगरेट पीने हमारे पास आयी थी, उसने मुझसे कहा था-
-तुम कैसे झेलती हो ये सब? पकाऊ आदमी है ... भले ही रवि का दोस्त है मगर वो मर्दानगी नहीं जो हम जैसों की उभरती जवावी को दबा सके... ऐसे लोगों को प्रणय क्रीडा का खेल खेलने का धिकार नहीं है... सचमुच अब तो रवि ही मेरी प्यास बुझा पायेगा...
रवि- लेकिन अभी तो मैं शैली को भी संतुष्ट नहीं कर पाया... इसके बाद ही तुम्हारा नंबर आएगा...
रोजी- इतनी देर से क्या कर रहे थे तुम लोग ? कमाल है अभी तक ऐसे के ऐसे ही हो.... मैं कुछ हेल्प करुँ ?
शैली-० नहीं, शुक्रिया... मुझे अच्छा नहीं लगता ...शर्म आती है, जब तक यहाँ पर तुम रहोगी हमें ऐसे ही झिझक रहेगी...
रवि- हां , हमको थोड़ा समय और दो... या फ़िर तुम्हारा कल का नंबर लगा देते हैं... आज का पूरा वक्त मैं अपनी इस नयी दोस्त के नाम करना चाहता हूँ.... तुम राजेश के पास जाओ... वह नर्वस हो गया होगा, सीधा है बेचारा... इसीलिए तुम्हें मन माफिक संतुष्ट नहीं कर पाया... हांलाकि वह भी अच्छा खासा तंदुरुस्त है... बिस्तर के इस खेल में अच्छे अच्छे फेल हो जाते हैं मेरी जान... उसने ज्यादा पी राखी है... सब्र से काम लो सब ठीक हो जाएगा...
रोजी- मुझे तुमने अपनी ऐसी आदत लगादी है कीकोई नजर में जमता ही नहीं है, सब छोटे ही लगते है...
रवि - ठीक है... मगर यह भी तो जानलो की राजेश मेरा दोस्त है... उसे संभालना तुम्हारा काम है.... भले ही वह तुम्हारे एक्जाम में फेल हो गया हो लेकिन वह भी मर्द है मेरी जान ... जब बिल्कुल निराश हो जाओ तो यहीं आ जाना मैं तुम दोनों को भरपूर सुख संतुष्टि देने की कोशिश करूँगा... ठीक है....




Friday, May 22, 2009

vetsa ayurvarta

तड़प , भाग-४१

दीपू- वाह, तब तो वह लड़कियों के बीच बहुत फैमस होगा... मरती होंगी उस पर ?
शैली- हाँ, इसमें कोई दो राय नहीं, वह गज़ब का खिलाड़ी था... तुम भी उससे किसी मामले में कम नहीं हो, उसका स्टेमिना कम था तुम्हारा बहुत ज्यादा है... वह इस खेल के मैदान में ज्यादा देर तक नहीं ठहर सकता था... थोडी सी देर में ही हांफने लगता था , तुम्हारी बात अलग है... तुम जब तक मैदान में डटे रहते हो तब तक की मैं ख़ुद भी संतुष्ट नहीं हो जाती... मेरी समझ में नहीं आता की तुम इतनी ताकत कहाँ से एकत्रित कर पाते हो...
दीपू- तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे की मैं इस दुनिया से कोई अलग काम कर रहा हूँ, ?
शैली- अलग तो है ही... तुम सच्चे मर्द हो ... मेरे पास जो ग्राहक आते हैं , उनमे ज्यादातर लोग आधे मर्द ही निकलते हैं... जब मैं गर्म होकर तैयार होती हूँ तो वे फेल हो जाते हैं, भले ही मैं काल गर्ल हूँ और उन्हें सुख देने की मुझे भरपूर कीमत भी मिलती है मगर इसका मतलब यह नहीं की हमारा जिस्म पत्थर का है, हमारी भ सम्वेद्नायीं होती हैं, कुछ इच्छाएं होती हैं... हमारे सीने में भी एक दिल धड़कता है... हमें भी ग्राहकों से कुछ अपेक्षाएं होती हैं.... हम उम्मीद करते हैं की हमको भी बीच मंझधार में तड़पता हुआ नहीं छोड़ा जाए, लेकिन जब उम्मीदें पूरी नहीं होती तो बहुत तकलीफ होती है...
दीपू- लेकिन तुम तो कहती हो की तुम्हें सिर्फ़ पैसे से मतलब होता है किसी और चीज से नहीं ?
शैली- इसके सिवाय और कह भी क्या सकते हैं.... ग्राहक से लड़ तो नहीं सकते... हमें सिर्फ़ उसको ही खुश करना होता है... ये तो मैं तुम्हें अपने दिल की आवाज सुना रही हूँ...
दीपू- अपने ग्राहकों को अगर ज्यादा संतुष्ट करना है तो तुम्हें मर्दानगी का एक राज बताता हूँ,
शैली- इसका भी कोई राज होता है, वाह ... फ़िर तो मैं जरूर जानना चाहूंगी....
दीपू- जो लोग तनाव में होते हैं, किसी कारणवश शराब या अन्य नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं उन लोगों की शारीरिक शक्ति कमजोर होने लगती है.... ऐसे लोग अपने बेद पार्टनर को सुख नहीं दे पाते, ख़ुद भी दुखी रहते हैं और अपने साथी की जिन्दगी में भी जहर घोल देते हैं....
शैली- अरे यार दीपू, होशियार हो तुम तो सब कुछ जानते हो मेरे यार... और बताओ तुम्हें इस बारे में क्या जानकारी है ? मैं सुनना चाहती हूँ...
दीपू- नहीं पहले तुम अपनी कहानी कहो, तुम कुछ कह रही थीं....
शैली- पहले तुम .... समझे....
दीपू- ठीक है... मैं हर उस आदमी को तंदरुस्त बनाने का राज जानता हूँ जो नामार्दांगी का जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं... अगर वे लोग विगोरा हाई पावर नामक दवा का एक कोर्स पूरा करें तो उनका जीवन खुश हाल बन सकता है... यह होम्योपैथिक भारतीय दवा है... जो लोग इसका सेवन करते हैं... वे कभी भी सर झुकाकर नहीं चल सकते... खुशियाँ उनके कदम चूमती हैं....

Wednesday, May 20, 2009

तड़प , भाग-39

शैली- मैं जानती हूँ , तुम मुझे बहका रहे हो... राजेश का इतना डेंजर नहीं है... उसका अंग बहुत अच्छा है... प्यार करने में खूब आनंद आता है, इसे तो देखते ही मेरी घिग्गी बाँध रही है ... आगे -आगे क्या होगा ...मैं तो यही सोचकर परेशान हूँ... कहीं कुछ हो गया तो लेने के देने पड़ जायेंगे...
रवि- नहीं यार...तुम तो बच्चों की तरह डर रही हो... एक बार मेरे साथ प्रणय क्रीडा के समुन्दर में गोते लगाकर तो देखो, मुझे भूल नहीं पाओगी, जब मैं शहर चाला जाऊँगा तब भी मुझे याद किया करोगी... राजेश से कहा करोगी की एक बार और मिल्वादों... ये मेरा दावा है....तुम प्रधान को जानती हो ?
शैली- हाँ , अच्छी तरह से... अपने गाँव के प्रधान को क्यों नहीं जाउंगी....
रवि- उसकी तीसरे नंबर की लड़की को देखा है ? वह गोरी , पतली -पतली...
शैली- हाँ, जानती हूँ ...
रवि- उसने दो महीने पहले मेरे साथ एक बार सुख उठाया था तब से लेकर अब तक मुझे सौ से ऊपर पत्र लिखकर बुला चुकी है... कहती है मुझे बस तुम चाहिए...
शैली- मैं नहीं मानती... वह तो अभी बहुत छोटी है... उसके तो सीने पर अभी ठीक से गेंद भी नहीं हैं... वह तुम्हें कैसे झेल सकती है ? मुझे यकीन नही आ रहा?
रवि- ठीक है, फ़िर कल आना , वह भी रात भर यहीं रहेगी,... पिछली बार वह रात भर मेरे बिस्तर पर ही थी... एक बार तो खूब घबराई थी, उसको कली से मैंने ही फूल बनाया था... उसका पहला-पहला अवसर था इसलिए घबरा रही थी... डर रही थी... जब उसने शराब के दो पैग पिए तब जाकर उसने अपने जिस्म को स्पर्श करने दिया... तुमने सही कहा, उसकी गोलाइयां बिल्कुल छोटी -छोटी थीं... मैंने धीरे -धीरी उसे सुख देना शुरू किया... अगली बार क्या हुआ जानती हो ?
शैली- भाग गयी होगी बेचारी ? और क्या ?
रवि - नहीं यार... अगली बार तो वह ख़ुद से हर वो काम करने लगी जो मुझे करना चाहिए था...
शैली- तुम इस गाँव में जब भी आते हो तो मौज मस्ती अकरने ही आते हो क्या ?
रवि- जी नहीं, मैं अकेला मौज मस्ती नही करता, तुम्हारे गाँव की लड़कियों को भी सुख देता हूँ... जो मेरी उम्र की है और सुंदर है , उसमें से बहुत कम लड़कियां ही बची हैं वरना सब यहाँ एक रात की दुल्हन बन चुकी हैं... एक बस तुम बची थीं , आज की रात तुम्हें भी दुल्हन बना दिया जाएगा...
शैली- क्या तुम एक बार के लिए ही सम्बन्ध रखते हो, उसके बाद भूल जाते हो ?
रवि - ऐसी बात नहीं है, दरअसल फुर्सत ही नहीं मिलती... किस किसको देखें हम पर तो हर लड़की मरती है... वैसे भी मैं किसीको घाटे में नहीं रहने देता , जिस के साथ भी रात बितात हूँ उसे दस हजार नकद देता हूँ ताकि उन पैसों से वह कोई काम कर सके... कितनी ही गरीब लड़कियों ने तो उन्हीं पैसों से अंपनी शादी कर ली हैं...
शैली- यह अच्छी बात है, मस्ती भी और पैसे भी ... मगर मैं सिर्फ़ दस हजार में मानने वाली नहीं हूँ...
रवि- मुझे खुश करदो... जो कहूं करो... मन मांगे दाम दूंगा...
शैली- जो कहोगे करुँगी... जो भी कहोगे...
रवि- मुझे जीभ का स्पर्श बहुत अच्छा लगता है...
शैली- मैं समझ गयी, कोई दिक्कत नहीं है, जानती हूँ तुम दोस्त किसके हो, शौक भी एक जैसे ही हैं...

Tuesday, May 19, 2009

तड़प, भाग-38

शैली की जवानी इस समय पूरे उफान पर थी... शराब के असर ने उसको और भी ज्यादा बेकरार कर दिया था... रोजी, रवि और राजेश मिलकर उसको और भी ज्यादा बेताब करने लगे... जब शैली ने देखा की रोजी और राजेश उसके सामने ही नग्न होकर एक दूसरे से लिपट रहे हैं तो उत्तेजक होते हुए उसने कहा-
- ये तुम क्या कर रहे हो, मुझे भी बेशर्म बना डालोगे क्या ? तुम्हारे शहर में ये सब चलता होगा , यहाँ गाँव में नहीं॥
रोजी- क्यों यहाँ क्या परेशानी है... यहाँ के इंसान मौज मस्ती पसंद नहीं करते ? इनको जीवन का असली आनंद लेने का हक़ नहीं है क्या ?
शैली- हक़ तो है , मगर यहाँ चलन नहीं है... यहाँ पर ये सब परदे की चीजें हैं... खुलापन नहीं है...
रोजी- हर काम की शुरुआत करनी पड़ती है, जैसे अब हमने की है... अन्य लोग इसका अनुसरण करेंगे और आनंद लेंगे... कोई तकलीफ तो महसूस नहीं हो रही ?
शैली- तुम्हारे रहते कोई तकलीफ नहीं हो सकती, लेकिन राजेश को तुम्हारी बांहों में देखकर अजीब सी फीलिंग हो रही है... जो अब तक सिर्फ़ मेरा बेड पार्टनर रहा हो उसे तुम्हारे साथ नग्न अवस्था में देखकर कुछ तो हो रहा है...
राजेश- तुम इन बातों को छोड़ दो और जवानी का आनंद उठाओ... जब तक जवानी है तभी तक दुनिया पूछती है उसके बाद कोई किसी को घास तक नहीं डालता... तुमने सुना ही होगा- चढ़ते सूरज को लोग जल देंगे, और जब ढल जाएगा तो चल देंगे... यही हाल जवानी का है... जवानी का सूरज ढलते ही एक एक करके सब साथ छोड़ना शुरू कर देते है, अपना साया भी साथ नहीं देते...
शैली- इस तरह आनंद लेने के बाद जवानी का सूरज नहीं ढलेगा क्या ? हमेशा सलामत रहेगा ?
रोजी- सही समय पर तुमने चौका मारा है, सूरज को तो dhalnaa ही है , ढलेगा ही लेकिन तुम्हें इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की जिन्दगी में कुछ नहीं कर पाई, जो मजा बाद में लेना था वह पहले ही ले लिया... इसमे किसी की ना भी नहीं है, सभी लोग हंसी खुशी आनंद ले रहे हैं...
इस तरह की और भी कई बातें हुईं और आखिरकार शैली दिल से हर वो काम करने लगी जो की रोजी, रवि और राजेश चाहते थे... जब उसने रवि के कपडे हटाये तो उसका ख़ास अंग देखकर चकित रह गयी... यह बेहद खतरनाक था... इतना ज्यादा खतरनाक की शैली का बदन काँपने लगा... रवि ने चुप रहने का कारण पुछा तो वह बोली-
-आः, इतना डेंजर मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती... मर जाउंगी मैं तो...
रवि- तुम क्यों परेशान होती हो मेरी जान ... ऐसा कुछ नहीं होगा... अब आराम से यहाँ पर लेट जाओ प्यार करो और प्यार लो, मैं तुम्हारे एडजस्ट कर लूँगा... पहले सब लड़कियां ऐसे ही डरती हैं मगर जब आनंद आता है तो यह भी उनके लिए छोटा पड़ने लगता है, हम जानते हैं....

Monday, May 18, 2009

राजेश - ये क्या कहते हो ? ऐसा नहीं है शैली... मैं जीवन में कभी तुमसे इस बात का नेगेटिव जिक्र नहीं karunga...मैं जिस काम के लिए ख़ुद तुमको प्रोत्साहित कर रहा हूँ, उसके लिए कभी ताना क्यों दूंगा...
शैली- मन तो मेरा भी मचल रहा है, लेकिन मैं कुछ संकोच कर रही हूँ...
राजेश- गोली मारो इस संकोच को... आ जाओ इस रवि की बांहों में , इसकी तमन्ना भी पूरी करदो और अपने मन की कशिश भी पूरी करदो... ऐश लो , ऐश दो...
रवि ने देर करना उचित नहीं समझा... दौड़कर शैली के पास आया और उसको अपनी बांहों में भर लिया, शैली शराब के नशे में चूर थी... उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उसके साथ ऐसा इत्तेफाक भी हो सकता है... नशे की तुनक में वह इतनी ज्यादा आगे बढ़ गयी की उसे नीति -आनीति का कोई ज्ञान नहीं रहा...रोजी को भी जबरदस्त अवसर मिल गया... वह राजेश जैसे मर्द के साथ प्यार का सुख उठाना चाहती थी... राजेश ने उसको चूमना शुरू कर दिया.... वह उसके होठों का चुम्बन ऐसे ले रहा था जैसे कोई भंवरा किसी कली को चूस रहा हो... उस कमरे में वासना का तूफ़ान उठने लगा था, रवि, शैली, राजेश और रोजी की भावनाएं भड़की हुई थीं... सब जोश उफान पर था... चारों जवान थे, चारों के मन में शारीरिक संबंधों को लेकर उत्सुकता थी... वे अपने मन औए तन की प्यास को बुझाने का प्रयत्न करने लगे...राजेश और रोजी ने रवि की खूब तारीफ की थी, तभी तो वह अपने आपको शक्तिमान दिखाने की कोशिश करने लगा... जब उसने अपने वस्त्र उतारकर एक तरफ़ रखे तो शैली के जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ने लगी... रवि का ख़ास अंग वास्तव में बेहद खतरनाक था... शैली ने ललचाते हुए कहा-
-क्या मैं इसे पुचकार सकती हूँ, बहुत सुंदर है, मगर उतना ही खतरनाक भी , यह गाडी आहिस्ता-आहिस्ता चलानी होगी, वरना एक्सीडेंट हो जाएगा...
रवि - तुम्हें डराने के लिए नहीं बल्कि खुश करने के लिए ,संतुष्ट करने के लिए मैंने इस हथियार को सजाकर रखा है... इससे प्यार करो , डरने का सवाल ही नहीं है...
शैली- हाँ, ज़रा देखूं तो सही, चाहे जो हो आज मैं इस खूबसूरत खिलौने से खेलकर रहूंगी... मैं अपने राजेश पर बहुत भरोसा करती हूँ, अगर ये कहते हैं की तुम गज़ब के मर्द हो तो बिल्कुल हैं,, अब तो मैंने भी महसूस कर लिया है...
रवि- मैं भी रोजी से बहुत प्यार करता हूँ, वह चाहती थी की एक बार राजेश से सम्बन्ध बनाकर टेस्ट बदले , तो मने भी हाँ करदी... रोजाना एक ही सब्जी खा खाकर सचमुच स्वाद बिगाड़ने लगता है...
समझो इसी स्वाद को बदलने की जरूरत थी... अब वह पहला ज़माना तो नही रहा, जहाँ महिलायें जीवन भर एक ही मर्द की अर्धांगिनी बनाकर रह लिया करती थीं... जबकि मर्द एक साथ सैकडों और यहाँ तक की हजारों रानियाँ -पट रानियाँ  रखा करते थे....
शैली- सच कहते हो, उस समय बराबरी का ज़माना नहीं था, अब तो हर क्षेत्र में महिलायें बढ़ चढ़कर हिसा ले रही हैं... बिस्तर पर भी वह apnaa hak mang रही है...

Sunday, May 17, 2009

तड़प, भाग-36

राजेश- नहीं यार , तुम्हें कुछ भी नहीं हुआ ? जवानी का नशा सबसे बड़ा नशा होता है, इससे बढ़कर दुनिया में न तो कोई सुंदर है और न ही कोई अच्छा ... शराब तो बहाना मात्र है, जब तक जवानी होती है सब कुछ क़दमों में होता है... पद प्रतिष्ठा और सब कुछ... लेकिन जब ये जवानी ढल जाए तो कुछ हाथ नहीं रहता , कुछ साथ नहीं रहता...
शैली-- अच्छा , क्या ये जवानी का नशा है, मगर पहले कभी तो यह नहीं चढ़ा ? आज इसे क्या हो गया ?
राजेश- होगा क्या यार , आज पर निकल आए हैं, जब तक सोने को किसी पारखी के पास न ले जाया जाए , तब तक उसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता... पता ही नहीं चलता की वह सोना है या पीतल ... इसी तरह से अगर जवानी के सही कद्रदान ना हों तब तक भी यह ज्ञान नहीं होता की जवानी की कीमत क्या है ?
रवि- ये त्तुमने सही बात कहदी... बिल्कुल सत्य बात... अब देखो न , अगर हम लोग शैली को नहीं मिलते तो ये कैसे जानतीं की ये हैं क्या ?
शैली- मुझे मजाक का विषय तो नहीं बना रहे हो ? आः, मेरे सर में चक्कर आ रहे हैं...
राजेश- ये लो... पकडो जाम , टकराओ और उड़ा जाओ... अभी ठीक से तुम्हारा गला तर नहीं हुआ है इसी कारण ये तकलीफें पेश आ रही हैं, इसके साथ अगर सिगरेट का काश लगाओगी तो आनंद बढ़ जाएगा...
शैली- मुझे तो इसके धुँए से ही अजीब सी परेशानी महसूस होती है, इसे कैसे पी सकती हूँ...
रवि- दूर से चीजें दूसरी तरह की लगती हैं, जब नजदीक आते हैं तब पता चलता है की वास्तब में वह है क्या ?
राजेश- हाँ, जैसे मेरे इस दोस्त को ही देखलो , एक बार अगर बिस्तर पर इसके साथ मजा लिया तो सब कुछ भूल जाओगी, यहाँ तक की मुझे भी... यह बिस्तर का बहुत बड़ा खिलाड़ी है... मुझे तो रोजी ने ये सब बताया है...
रोजी- हाँ, ये सच कह रहे हैं...इनकी बात में कोई बनावट नहीं है... मैं तो हफ्ते में एक बार जरूर रवि के साथ मस्ती करती हूँ, मगर महीने भर का मजा यह एक रात में ही दे देता है... एकदम जादूगर है ये...
शैली- हफ्ते में मजा क्यों लेती हो फ़िर, रोजाना क्यों नहीं ?
रोजी- क्योंकि मैं पढ़ती हूँ, वह भी पूना में और रवि रहता है मुंबई में , तो फ़िर रोजाना तो आ नहीं सकती...मेरी राय है की आज की रात कुछ समय के लिए तुम भी रवि के साथ सुख भोगकर देखो, तबियत खुश हो जायेगी तुम्हारी...
राजेश- मुझे तो कोई आपत्ति नहीं , मैं तो इसको खुश देखकर ही खुश हो लेता हूँ...
रवि-तुम तो राजी हो मगर शैली भी तो खुश होनी चाहिए...
रोजी- यह तो शैली के लिए गौरव की बात है जो इसका प्रेमी ही इसका इतना ध्यान रख रहा है ...इस बहाने मुझे भी आज की रात राजेश से प्यार करने का मौका मिल जाएगा...
रवि- बड़े शौक से... मुझे खुशी होगी, बल्कि मैं तो कहता हूँ की यहीं पर हम चारों मस्ती के समुन्दर में गोते लगायेंगे... जी भरके मजे लेंगे और फ़िर खूब आनंद एक दूसरे को देंगे...
शैली- ओह, तुम लोग ऐसी बात कैसे सोच सकते हो ? आज ना सही जीवन में फ़िर कभी राजेश मुझे इस बात का ताना जरूर देंगे...