शारिक- तुम शायद अनुमान भी नहीं लगा पाओगी... मैं बता भी नहीं पाऊंगा, लेकिन ये तय है की कुछ कर गुजरुंगा , फ़िर जो कुछ भी होगा , उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं ... समझ रही हो न तुम ? अगर मैं ये जानता की अंजाम इतना बुरा होगा तो यहाँ कभी नहीं आता... यहाँ तो जान पर बन आयी है...
रंजना- मुझसे कहो न , आख़िर दिक्कत क्या है ? क्यों अपने आपको कोसने में लगे हुए हो ?
शारिक- कुछ कहूं तो आफत , न कहूं तो मुसीबत ... समझो न फंस गया हूँ... मेरा मन अब मेरे काबू में नहीं है ... ऐसा लगता है जैसे मेरे दिल में शैतान बैठ गया है... कोई मुझे अन्दर से उकसा रहा है... अगर कोई गुनाह हो गया तो क्या होगा ? मैं तो कहीं का नहीं रहूँगा... पुलिस स्टेशन, कोर्ट कचहरी और फ़िर अखबार टी.वी का लफडा... आजकल ऐसे मामलों में मीडिया कुछ ज्यादा ही सतर्क हो गया है ...
रंजना- जो तुम्हारे मन में चल रहा है , उसे पूरा करके देखो... यकीन मानो, कुछ नहीं होगा... प्रयोग तो करके देखो, एक बार मेरी बात मानकर तो देखो ...
शारिक -कभी किसी ने मरकर यह जानने का प्रयास किया है की मरने के बाद कैसा अनुभव होता है ? अगर किया भी होगा तो क्या वह अनुभव उसके किसी काम आया ? बेचारा चला गया ...
रंजना- तुम बेवजह डर रहे हो... चलो , मालिश करो... अच्छा थोडी देर तक करो, फ़िर यदि जाने की इच्छा हो तो तुम्हें रोकूंगी नहीं, सिर्फ़ थोडी सी देर...
शारिक का गुप अंग दहाडें मार रहा था... एक हाथ से वह कभी -कभी उस अंग को दबाने का प्रयास कर लेता था, इस प्रयास का असर उल्टा ही होने लगा ... वह उसको दबाने की जितनी कोशिशें करता, वह उतना ही दहाड़ मारने लगता... वासना के गर्मी में वह अपने वजूद को पिघलता हुआ महसूस कर रहा था...एक पल वह भी आया जब उसका विशेष अंग रंजना की कमर से जा टकराया ... स्पर्श होते ही रंजना के बदन में बिकली सी कौंध गयी... काम भावनाएं जाग्रत हो उठीं ... अब वह हाथ घुमाकर उसे अपने हाथों से स्पर्श कर आनंद की अद्भुत अनुभूति करना छाती थी, तब ही शारिक पीछे हट गया ... रंजना ने उसको अपनेकरीब बुलाया , इतना करीब की आसानी से वह अपने मन की इच्छा पूरी कर सके ... आखिरकार उसकी हार्दिक इच्छा पूरी हो गयी... शारिक भी बदहवास हो गया और रंजना भी... वह कहने लगी-
- शारिक, क्या तुम मुझसे प्यार करने की इच्छा रखते हो, मगर कहने में झिझक रहे हो ?
शारिक- ये सब तुम कैसे जानती हो ... तुम्हारी कांपती हुई आवाज यह बताने के लिए काफ़ी है... मैं ग़लत तो नही कह रही हूँ...
शारिक -असली नब्ज़ पकड़ ली तुमने... मैं इसी बात को बताने से डर रहा था... तुमने पहले हियो इतना दारा दिया था की कुछ भी कहने या करने सेपहले ही डर लग रहा था... जुबान काँप रही थी...
रंजना- तुम्हारा हाल देख कर मैंने निर्णय किया है की आज तुम्हें रोकूंगी नहीं, तोकुंगी नहीं... तुम जो चाहो,जैसे चाहो कर सकते हो... इस जवानी का जी भरके आनंद उठा सकते हो... हाँ , मैं कुछ नहीं कहूँगा...
शारिक - बाद में ऐसा तो नहीं होगा जैसे यहाँ मुंबई में एक बार एक विदेशी महिला ने किया था...
रंजना- क्या किया था उस विदेशी महिला ने ?
शारिक- पहले तो उसने अपने साथी के साथ सम्भोग किया और बाद में कंडोम लेकर पुलिस स्टेशन चली गयी ... उसके साथी को बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था...
Friday, December 26, 2008
Wednesday, December 24, 2008
रंगीला रतन , भाग-57
ये सब बातें रंजना ने बहुत पहले ही सुन राखी थीं... उसने होटल में जो कमरा बुक कराया था उसमे मालिश सम्बन्धी सभी सुविधाएं मौजूद थीं...रंजना के इशारा करने पर शारिक मालिश करने के लिए तैयार हो गया... वहाँ पर एक दो जोड़ी कपड़े मौजूद थे... एकदम धीमी रोशनी में रंजना ने कपड़े बदल लिए... शारिक भी कपड़े बदलने लगा... उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था... जब रंजना ने महसूस किया की शारिक झिझक रहा है तो उसने शारिक के लिए अपने हाथ से पैग तैयार किया , जब वह पीने में आनाकानी करने लगा तो रंजना बोली-
- अरे यह तो सोमरस है, इसे पी लो, खूब आनंद आएगा... सारी झिझक दूर हो जायेगी... अब तक जिस लुत्फ़ से वंचित थे जब वह मिलेगा तो रूखी जिन्दगी में बहार आया जायेगी... पहले किसी गर्ल फ्रेंड के साथ मौज मस्ती की हैं या नहीं? चेहरे से तो शातिर लगते हो ... शरीफ नहीं... सच -सच बताओ...
शारिक- कभी नहीं, लडकियां इतनी आसानी से मिलती हैं क्या ? तुम्हारी बात अलग है, यूँ समझो की अंधे के हाथ में बटेर लग गयी है , वरना मुझे कौन घास डालती है... जो लड़के बनावटी बातें करते हैं... बे सर पैर का काम करते हैं, लडकियां भी उन्हीं के साथ घूमती हैं... मैं न तो ग़लत बात बर्दाश्त कर सकता हूँ और न ही किसी से बोल सकता हूँ...इसी कारण मेरी हर किसी से पटती नहीं है.... यही एक वजह है की मेरी गर्ल फ्रें बहुत कम हैं जितनी हैं ,उनसे एक सीमित रिश्ता ही बना हुया है... कभी सेक्स या मौज मस्ती के बारे में मैंने किसी से चर्चा नहीं की... अगर किसी ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और यह बात सार्वजनिक करदी तो बड़ी बदनामी होगी... मैं उस तरह का लड़का हूँ की कम खाना पसंद है मगर कम कायदा बिल्कुल पसंद नहीं है...
रंजना- बातें तो अच्छी करते हो... लगता तुमसे पाकी दोस्ती करनी ही पड़ेगी... अच्छा... किसी गर्ल फ्रेंड के बारे में बताओ... किसी को देखकर तो लगता होगा की वह कम सेक्सी है, तो कोई बहुत ज्यादा या बिल्कुल नहीं...अकेले में तो सोचते हिंगे यार... अच्छा चलो, पहले एक पैग मारो ... इसके बाद मालिश भी करते रहना और बात भी करते रहना....
शारिक - मगर पियूं कैसे ? कभी पी नहीं है ... एक काम करो , मेरे हिस्से की तुम्ही चढ़ा जाओ , मैं समझूंगा मैंने ही पी ली है... जब दोस्त मान ही लिया है तो दोस्त के लिए इतना भी ने अहं कर सकती ?
शारिक - क्यों नहीं यार, सब कुछ किया जायेगा... फिलहाल भाषण छोड़कर चीअर्स बोलो...
शारिक ने जाम थाम लिया... जाम से जाम टकराने लगे... शराब का नशा उसके सर चढ़कर बोलने लगा... रंजना को उसकी किसी बात का कोई एतराज नहीं था... वह तो उसकी हर बात का आनंद उठा रही थी... शारिक कह रहा था-
आज तो खुदा ही खैर कर सकता है... घर जाने पर अम्मी को तुंरत पता चल जायेगा... अब्बू की तो कोई टेंशन नहीं है, वे तो पी खाकर रात को देर से आते हैं....
रंजना- उसका इलाज है न मेरे पास ... अभी फोन करके कोई अच्छा सा बहाना बनादो, कहदो की आज रात घर नहीं आ सकते... फ़िर आज की रात मेरे साथ गुजारना...
शारिक- तो क्या मुझे रात भर मालिश करनी पड़ेगी ? मैओं थाकुंगा नही ? कैसे कर पाऊंगा इतनी मेहनत ?
रंजना- मैं क्या जानूं ? तुमने ही तो कहा है की तुम मालिश कर सकते हो ? अरे बुद्धू ... मालिश बस आधा घंटा ही करनी है... उसके बाद तुम्हें जवानी के जलवों से वाकिफ करा उंगी ... कभी सुहागरात का नाम सूना है ?
शारिक - हाँ , बहुत बार ...
रंजना- आनंद उठाया है ?
शारिक - नहीं, मगर उठाना चाहता हूँ ...
- अरे यह तो सोमरस है, इसे पी लो, खूब आनंद आएगा... सारी झिझक दूर हो जायेगी... अब तक जिस लुत्फ़ से वंचित थे जब वह मिलेगा तो रूखी जिन्दगी में बहार आया जायेगी... पहले किसी गर्ल फ्रेंड के साथ मौज मस्ती की हैं या नहीं? चेहरे से तो शातिर लगते हो ... शरीफ नहीं... सच -सच बताओ...
शारिक- कभी नहीं, लडकियां इतनी आसानी से मिलती हैं क्या ? तुम्हारी बात अलग है, यूँ समझो की अंधे के हाथ में बटेर लग गयी है , वरना मुझे कौन घास डालती है... जो लड़के बनावटी बातें करते हैं... बे सर पैर का काम करते हैं, लडकियां भी उन्हीं के साथ घूमती हैं... मैं न तो ग़लत बात बर्दाश्त कर सकता हूँ और न ही किसी से बोल सकता हूँ...इसी कारण मेरी हर किसी से पटती नहीं है.... यही एक वजह है की मेरी गर्ल फ्रें बहुत कम हैं जितनी हैं ,उनसे एक सीमित रिश्ता ही बना हुया है... कभी सेक्स या मौज मस्ती के बारे में मैंने किसी से चर्चा नहीं की... अगर किसी ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और यह बात सार्वजनिक करदी तो बड़ी बदनामी होगी... मैं उस तरह का लड़का हूँ की कम खाना पसंद है मगर कम कायदा बिल्कुल पसंद नहीं है...
रंजना- बातें तो अच्छी करते हो... लगता तुमसे पाकी दोस्ती करनी ही पड़ेगी... अच्छा... किसी गर्ल फ्रेंड के बारे में बताओ... किसी को देखकर तो लगता होगा की वह कम सेक्सी है, तो कोई बहुत ज्यादा या बिल्कुल नहीं...अकेले में तो सोचते हिंगे यार... अच्छा चलो, पहले एक पैग मारो ... इसके बाद मालिश भी करते रहना और बात भी करते रहना....
शारिक - मगर पियूं कैसे ? कभी पी नहीं है ... एक काम करो , मेरे हिस्से की तुम्ही चढ़ा जाओ , मैं समझूंगा मैंने ही पी ली है... जब दोस्त मान ही लिया है तो दोस्त के लिए इतना भी ने अहं कर सकती ?
शारिक - क्यों नहीं यार, सब कुछ किया जायेगा... फिलहाल भाषण छोड़कर चीअर्स बोलो...
शारिक ने जाम थाम लिया... जाम से जाम टकराने लगे... शराब का नशा उसके सर चढ़कर बोलने लगा... रंजना को उसकी किसी बात का कोई एतराज नहीं था... वह तो उसकी हर बात का आनंद उठा रही थी... शारिक कह रहा था-
आज तो खुदा ही खैर कर सकता है... घर जाने पर अम्मी को तुंरत पता चल जायेगा... अब्बू की तो कोई टेंशन नहीं है, वे तो पी खाकर रात को देर से आते हैं....
रंजना- उसका इलाज है न मेरे पास ... अभी फोन करके कोई अच्छा सा बहाना बनादो, कहदो की आज रात घर नहीं आ सकते... फ़िर आज की रात मेरे साथ गुजारना...
शारिक- तो क्या मुझे रात भर मालिश करनी पड़ेगी ? मैओं थाकुंगा नही ? कैसे कर पाऊंगा इतनी मेहनत ?
रंजना- मैं क्या जानूं ? तुमने ही तो कहा है की तुम मालिश कर सकते हो ? अरे बुद्धू ... मालिश बस आधा घंटा ही करनी है... उसके बाद तुम्हें जवानी के जलवों से वाकिफ करा उंगी ... कभी सुहागरात का नाम सूना है ?
शारिक - हाँ , बहुत बार ...
रंजना- आनंद उठाया है ?
शारिक - नहीं, मगर उठाना चाहता हूँ ...
Monday, December 22, 2008
रंगीला रतन , भाग -56
क्या गरीबों को खुशहाल रहने का हक़ नहीं है ?
शारिक- आप तो मेरा ही डायलोग मेरे ही ऊपर मार रही हैं... मैं तो पहले से ही गरीबों के अधिकारों की बात करता हूँ... क्या गरीबों के पास लेपटोप होता है , इंटर नेट का कनेक्शन भी होता है , और इसके बावजूद भी बह गरीब ही रह जाता है क्या ? फ़िर तो गरीबी की परिभाषा ही बदलनी पड़ेगी ....
रंजना- हो सकता है जिस लेपटोप पर मैं काम कर रही हूँ, वह तुम जैसे अमीर का हो.... ये भी हो सकता है की ....?
शारिक - की तुम झूठ बोल राजी हों, हैं न ? हांलाकि मुझे भरोसा हो गया तुम पर...झूठ नहीं बोल पाओगी तुम ...
रंजना- मस्का लगा रहे हो ? पटाने का यह तरीका अच्छा है...
शारिक- अब नहीं , मस्का तो पहले लगा रहा था... जब बिना देखे ही तुम्हारे हुस्न की तारीफ़ कर था ... अब जो कह रहा हूँ वह तो मेरे दिल की आवाज है... और इस बारे में फ़िर कभी कुछ नहीं कहूँगा...
रंजना- जानती हूँ... तुम सब लड़के लोग ऐसे ही होते हैं... नई-नई बातें तो ऐसे ईज़ाद कर लेते हैं की हम सोच भी नहीं सकते... चलो , ठीक है ... और कुछ कहो.... अपनी पसंद या नापसंद के विषय में बताओ...
शारिक-इस वक्त तो पहली पसंद तुम ही तुम हो... भले ही तुम्हें देख नहीं पाया मगर तुम्हारी सूरत मैं अपने दिल में बसा चुका हूँ... तुम्हारा जिस्म भी मालिका शेरावत की तरह ही होगा... ये मेरा दावा है... फर्क ये है की चेहरा गोल होगा... मेरे अनुमान के मुताबिक तुम बेहद सेक्सी हो...
रंजना- अंधेरे में तीर मारकर अपने आपको तीसमारखां समझ रहे हो ?
शारिक - चाहे जो हो , मगर बात सच है... इनकार करके देखो... कर ही नही पाओगी, मेरा दावा है... तुम्हें रोजाना एक नए मर्द की जरूरत पड़ती होगी... भले ही वह उपलब्ध न हो, या तुम उसे न बुलाओ मगर जरूरत जरूर पड़ती होगी... मेरा चैलेन्ज है , जो मेरी बात को झूठा साबित करेगा ,उसको ५० रुपये का नकद इनाम दूंगा...
रंजना- तो मैं कहूँगी की तुम शर्त हार गए... निकालो ५० रुपये...
शारिक- मैं आज तक कभी किसी से नहीं हारा...तुम अपने आपको इस तरह धोखा नहीं दे सकतीं....
रंजना- आज दोपहर तीन बजे हम होटल ग्रेट में मुलाक़ात करेंगे... अब खुश हो?
शारिक- इस खुशी को मैं कैसे सहन कर पाऊंगा... जी तो चाहता है की तुमसे बात करता रहूँ । मगर अब तैयार हो जाता हूँ... ओके बाय ....
फोन डिस्कनेक्ट हो गया... रब्न्जना उस लड़के के बारे में सोचती रह गयी... वह उससे आधी उम्र का लड़का था... जनरेशन गेप का मतलब वह अच्छी तरह से समझती थी... नहा धोकर उसने खाना खाया और हल्का मेकप करने के बाद बताये गए होटल की तरफ़ रवाना हो गयी ... उसने रास्ते में शारिक को बताया की योजना बदल चुकी है... ग्रेट की की बजाय उसने शारिक को दूसरे होटल में बुलाया... यह कदम उसने सुरक्षा की द्रष्टि से उठाया था...
शारिक- आप तो मेरा ही डायलोग मेरे ही ऊपर मार रही हैं... मैं तो पहले से ही गरीबों के अधिकारों की बात करता हूँ... क्या गरीबों के पास लेपटोप होता है , इंटर नेट का कनेक्शन भी होता है , और इसके बावजूद भी बह गरीब ही रह जाता है क्या ? फ़िर तो गरीबी की परिभाषा ही बदलनी पड़ेगी ....
रंजना- हो सकता है जिस लेपटोप पर मैं काम कर रही हूँ, वह तुम जैसे अमीर का हो.... ये भी हो सकता है की ....?
शारिक - की तुम झूठ बोल राजी हों, हैं न ? हांलाकि मुझे भरोसा हो गया तुम पर...झूठ नहीं बोल पाओगी तुम ...
रंजना- मस्का लगा रहे हो ? पटाने का यह तरीका अच्छा है...
शारिक- अब नहीं , मस्का तो पहले लगा रहा था... जब बिना देखे ही तुम्हारे हुस्न की तारीफ़ कर था ... अब जो कह रहा हूँ वह तो मेरे दिल की आवाज है... और इस बारे में फ़िर कभी कुछ नहीं कहूँगा...
रंजना- जानती हूँ... तुम सब लड़के लोग ऐसे ही होते हैं... नई-नई बातें तो ऐसे ईज़ाद कर लेते हैं की हम सोच भी नहीं सकते... चलो , ठीक है ... और कुछ कहो.... अपनी पसंद या नापसंद के विषय में बताओ...
शारिक-इस वक्त तो पहली पसंद तुम ही तुम हो... भले ही तुम्हें देख नहीं पाया मगर तुम्हारी सूरत मैं अपने दिल में बसा चुका हूँ... तुम्हारा जिस्म भी मालिका शेरावत की तरह ही होगा... ये मेरा दावा है... फर्क ये है की चेहरा गोल होगा... मेरे अनुमान के मुताबिक तुम बेहद सेक्सी हो...
रंजना- अंधेरे में तीर मारकर अपने आपको तीसमारखां समझ रहे हो ?
शारिक - चाहे जो हो , मगर बात सच है... इनकार करके देखो... कर ही नही पाओगी, मेरा दावा है... तुम्हें रोजाना एक नए मर्द की जरूरत पड़ती होगी... भले ही वह उपलब्ध न हो, या तुम उसे न बुलाओ मगर जरूरत जरूर पड़ती होगी... मेरा चैलेन्ज है , जो मेरी बात को झूठा साबित करेगा ,उसको ५० रुपये का नकद इनाम दूंगा...
रंजना- तो मैं कहूँगी की तुम शर्त हार गए... निकालो ५० रुपये...
शारिक- मैं आज तक कभी किसी से नहीं हारा...तुम अपने आपको इस तरह धोखा नहीं दे सकतीं....
रंजना- आज दोपहर तीन बजे हम होटल ग्रेट में मुलाक़ात करेंगे... अब खुश हो?
शारिक- इस खुशी को मैं कैसे सहन कर पाऊंगा... जी तो चाहता है की तुमसे बात करता रहूँ । मगर अब तैयार हो जाता हूँ... ओके बाय ....
फोन डिस्कनेक्ट हो गया... रब्न्जना उस लड़के के बारे में सोचती रह गयी... वह उससे आधी उम्र का लड़का था... जनरेशन गेप का मतलब वह अच्छी तरह से समझती थी... नहा धोकर उसने खाना खाया और हल्का मेकप करने के बाद बताये गए होटल की तरफ़ रवाना हो गयी ... उसने रास्ते में शारिक को बताया की योजना बदल चुकी है... ग्रेट की की बजाय उसने शारिक को दूसरे होटल में बुलाया... यह कदम उसने सुरक्षा की द्रष्टि से उठाया था...
Sunday, December 21, 2008
रंगीला रतन, भाग-55
और कहो, फांसी से बढ़कर तो कुछ नहीं होता... मैं तैयार हूँ ...
रंजना- अभी तो प्यार का खेल चल रहा है... शुरुआत ही हो रही है और इतने में ही तुम बुरी -बुरी बातें करने लगे... ऐसा कैसे चलेगा... कुछ अच्छी बात करो ... ऐसे मौसम में निराश भरी बातें नहीं की जातीं...
शारिक- फ़िर ये तो कहो की मैं क्या कहूं ? कैसे कहूं ? जब कुछ कहने जाता हूँ तो तुंरत डांटदेती हो... तुम टीचर हो क्या ? टीचर लोग ही ऐसी डांट पिलाती हैं... सुन रही हो न , मैं क्या कह रहा हूँ ?
रंजना- हाँ -हाँ सुन रही हूँ, ज़रा नाश्ता करने लगी थी... तुमने किया क्या ?
शारिक- हाँ , सुबह आठ बजे ही कर लिया...
रंजन- वैरी गुड ... क्या लेते हो नाश्ते में?
शारिक- वक्त पर डिपेंड करता है... आज तो आमलेट के साथ चपाती खाई है... ये मेरा फेवरेट है...
रंजना- अच्छा है, मगर मैं मोर्निंग में नोंवेज नहीं खाती हूँ... अच्छा ये बताओ तुम्हें एक्ट्रेस कौन सी अच्छी लगती है ? नए दौर की या पुराने दौर की ?
शारिक- पुराने दौर की कोई चीज मुझे नहीं भाति ... मेरी पसंद मल्लिका शेरावत थी, मगर अब ख़ुद ही मेरी पसंद बदल गयी है... अब मुझे कोई और बहाने लगी है... सच कहूं तो वही दिन में भी ख्यालों में आने लगी है...
रंजना- कौन है वो खुशनसीब ? ज़रा हम भी तो जाने ? नाम बताकर देखो...
शारिक - नाम कैसे बतायूं ... उसने अभी तक नहीं बताया है.... जब वो बताएगी तो बता दूंगा... वैसे यह कम चांस नजर आता है... मुझे नहीं लगता की वह कभी अपना सही नाम बताएगी... वैसे भी नाम में क्या रखा है ? बस काम होना चाहिए ... मनोरंजन होना चाहिए ... जिनके पास दौलत होती है, वे लोग अपना दिल खुश करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं ... किसी भी हद तक जा सकते है, और जिनके पास सिर्फ़ दिल होता है, उनका धर्म-कर्म सब कुछ बड़े लोगों का दिल बहलाना ही होता है...
रंजना- अरे वाह, अच्छा डायलोग है, तुमने ख़ुद लिखा क्या ? आजकल भोजपुरी फिल्में खूब बन रही हैं... वहाँ भी अब अच्छे लेखकों का अभाव होने लगा है... मेरी मानो, कोशिश करो कहीं न कहीं काम जरूर मिल जायेगा... पार्ट टाइम में मालिश करने से बेहतर यही काम रहेगा...
शारिक- देखो, मैंने कहा था न ? दौलत का असर दिखने लगा न ? अब तुम मुझसे चिढ रही हो ... बातों ही बातों में आखिरकार तुमने बता ही दिया की मैं मालिश कतरने वाला एक मामूली सा इंसान हूँ और मुझे न कुछ कहने का हक़ है, न पूछने का... मैं मूकदर्शक बना तमाशा देखता रहूँ...अगर यह सच नहीं है तो अपने दिल पर हाथ रखकरकर इनकार कर दो... कहदो की मैं झूठ बोल रहा हूँ...
रंजना- मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा रही हूँ ... तुम्हें यह जानकर आश्चर्य होगा की मैं बेहद मामूली और गरीब घर से ताल्लुक रखने वाली हूँ... तुमने कैसे जान लिया की मेरे पास पैसा है... सिर्फ़ इसलिए अंदाजा लगा लिए की मैंने मालिश करवाने का विज्ञापन दिया है... तो क्या गरीब लोग जिन्दगी का लुत्फ़ नहीं उठा सकते ?
रंजना- अभी तो प्यार का खेल चल रहा है... शुरुआत ही हो रही है और इतने में ही तुम बुरी -बुरी बातें करने लगे... ऐसा कैसे चलेगा... कुछ अच्छी बात करो ... ऐसे मौसम में निराश भरी बातें नहीं की जातीं...
शारिक- फ़िर ये तो कहो की मैं क्या कहूं ? कैसे कहूं ? जब कुछ कहने जाता हूँ तो तुंरत डांटदेती हो... तुम टीचर हो क्या ? टीचर लोग ही ऐसी डांट पिलाती हैं... सुन रही हो न , मैं क्या कह रहा हूँ ?
रंजना- हाँ -हाँ सुन रही हूँ, ज़रा नाश्ता करने लगी थी... तुमने किया क्या ?
शारिक- हाँ , सुबह आठ बजे ही कर लिया...
रंजन- वैरी गुड ... क्या लेते हो नाश्ते में?
शारिक- वक्त पर डिपेंड करता है... आज तो आमलेट के साथ चपाती खाई है... ये मेरा फेवरेट है...
रंजना- अच्छा है, मगर मैं मोर्निंग में नोंवेज नहीं खाती हूँ... अच्छा ये बताओ तुम्हें एक्ट्रेस कौन सी अच्छी लगती है ? नए दौर की या पुराने दौर की ?
शारिक- पुराने दौर की कोई चीज मुझे नहीं भाति ... मेरी पसंद मल्लिका शेरावत थी, मगर अब ख़ुद ही मेरी पसंद बदल गयी है... अब मुझे कोई और बहाने लगी है... सच कहूं तो वही दिन में भी ख्यालों में आने लगी है...
रंजना- कौन है वो खुशनसीब ? ज़रा हम भी तो जाने ? नाम बताकर देखो...
शारिक - नाम कैसे बतायूं ... उसने अभी तक नहीं बताया है.... जब वो बताएगी तो बता दूंगा... वैसे यह कम चांस नजर आता है... मुझे नहीं लगता की वह कभी अपना सही नाम बताएगी... वैसे भी नाम में क्या रखा है ? बस काम होना चाहिए ... मनोरंजन होना चाहिए ... जिनके पास दौलत होती है, वे लोग अपना दिल खुश करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं ... किसी भी हद तक जा सकते है, और जिनके पास सिर्फ़ दिल होता है, उनका धर्म-कर्म सब कुछ बड़े लोगों का दिल बहलाना ही होता है...
रंजना- अरे वाह, अच्छा डायलोग है, तुमने ख़ुद लिखा क्या ? आजकल भोजपुरी फिल्में खूब बन रही हैं... वहाँ भी अब अच्छे लेखकों का अभाव होने लगा है... मेरी मानो, कोशिश करो कहीं न कहीं काम जरूर मिल जायेगा... पार्ट टाइम में मालिश करने से बेहतर यही काम रहेगा...
शारिक- देखो, मैंने कहा था न ? दौलत का असर दिखने लगा न ? अब तुम मुझसे चिढ रही हो ... बातों ही बातों में आखिरकार तुमने बता ही दिया की मैं मालिश कतरने वाला एक मामूली सा इंसान हूँ और मुझे न कुछ कहने का हक़ है, न पूछने का... मैं मूकदर्शक बना तमाशा देखता रहूँ...अगर यह सच नहीं है तो अपने दिल पर हाथ रखकरकर इनकार कर दो... कहदो की मैं झूठ बोल रहा हूँ...
रंजना- मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा रही हूँ ... तुम्हें यह जानकर आश्चर्य होगा की मैं बेहद मामूली और गरीब घर से ताल्लुक रखने वाली हूँ... तुमने कैसे जान लिया की मेरे पास पैसा है... सिर्फ़ इसलिए अंदाजा लगा लिए की मैंने मालिश करवाने का विज्ञापन दिया है... तो क्या गरीब लोग जिन्दगी का लुत्फ़ नहीं उठा सकते ?

रोडवेज में शामिल होंगी 11 हजार नई बसें: राजभर
Dec 21, 01:29 am
गाजियाबाद, जागरण संवाद केंद्र : प्रदेश के परिवहन मंत्री रामअचल राजभर ने कहा कि जल्द ही रोडवेज में 11 हजार नई बसें शामिल की जाएंगी, जिनमें 1725 वातानुकूलित होंगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की योजना ब्लाक व गांव को जिले से जोड़ने की है। उन्होंने लोड फैक्टर और आय के मामले में गाजियाबाद रीजन के रोडवेज अधिकारियों की पीठ भी थपथपाई।
परिवहन राज्य मंत्री शनिवार को रोडवेज बस अड्डे से सर्वजन हिताय बस सेवा के तहत 15 नई बसों को हरी झंडी दिखाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय सिद्धांत को साकार करने के लिए यह बस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि सर्वजन हिताय बस सेवा के पहले चरण में प्रदेश के सभी जिलों में 426 बसें दी जा चुकी हैं और दूसरे चरण में सभी मंडलों को 30-30 बसें दी जा रही हैं।
परिवहन मंत्री ने कहा कि गाजियाबाद रीजन में 141 मार्गो पर 495 बसें संचालित हो रही हैं तथा इस क्षेत्र की बसें प्रतिदिन 1.80 लाख किमी चल रही हैं। यह बसें प्रतिमाह 47 लाख रुपये कमा रही हैं, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद क्षेत्र ने एक वर्ष में 4.75 करोड़ रुपये का सर्वाधिक लाभ अर्जित करने का भी रिकार्ड बनाया है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
श्री राजभर ने बताया कि आगामी वर्षो में 7200 करोड़ रुपये खर्च करके पुरानी बसों के स्थान पर 18 हजार नई बसें संचालित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। भविष्य में इंटरनेट से टिकट बुकिंग व्यवस्था की जाएगी व बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं पर 280 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
श्री राजभर ने बताया कि मशीन से टिकट वितरण कुछ स्थानों पर लंबी दूरी की बसों में शुरू किया गया है, अब इसे प्रदेश भर में लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे पता चल सकेगा कि कौन सी बस कहां है। बसों की समय सारिणी के लिए साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है और एलसीडी स्क्रीन लगाकर यात्रियों को बसों के समय की जानकारी दी जाएगी।
इस मौके पर प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री राजपाल त्यागी ने कहा कि कोई भी घटना होने पर सरकारी बसों पर गुस्सा उतारा जाता है, यह बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी बसें जनता के धन से ही खरीदी जाती हैं, इसलिए वे स्वयं बसों का ध्यान रखें। कार्यक्रम में मोदीनगर विधायक मास्टर राजपाल सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
अतिथियों का स्वागत क्षेत्रीय प्रबंधक अशोक कुमार, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल जैन आदि ने किया।
जल्द दूर की जाएगी सीएनजी फिलिंग स्टेशन की समस्या
परिवहन राज्य मंत्री रामअचल राजभर ने जल्द ही जिले में सीएनजी फिलिंग स्टेशन लगवाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नगर बस सेवा रूट की बसों को हर हाल में चलवाया जाएगा।
Dec 21, 01:29 am
गाजियाबाद, जागरण संवाद केंद्र : प्रदेश के परिवहन मंत्री रामअचल राजभर ने कहा कि जल्द ही रोडवेज में 11 हजार नई बसें शामिल की जाएंगी, जिनमें 1725 वातानुकूलित होंगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की योजना ब्लाक व गांव को जिले से जोड़ने की है। उन्होंने लोड फैक्टर और आय के मामले में गाजियाबाद रीजन के रोडवेज अधिकारियों की पीठ भी थपथपाई।
परिवहन राज्य मंत्री शनिवार को रोडवेज बस अड्डे से सर्वजन हिताय बस सेवा के तहत 15 नई बसों को हरी झंडी दिखाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय सिद्धांत को साकार करने के लिए यह बस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि सर्वजन हिताय बस सेवा के पहले चरण में प्रदेश के सभी जिलों में 426 बसें दी जा चुकी हैं और दूसरे चरण में सभी मंडलों को 30-30 बसें दी जा रही हैं।
परिवहन मंत्री ने कहा कि गाजियाबाद रीजन में 141 मार्गो पर 495 बसें संचालित हो रही हैं तथा इस क्षेत्र की बसें प्रतिदिन 1.80 लाख किमी चल रही हैं। यह बसें प्रतिमाह 47 लाख रुपये कमा रही हैं, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद क्षेत्र ने एक वर्ष में 4.75 करोड़ रुपये का सर्वाधिक लाभ अर्जित करने का भी रिकार्ड बनाया है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
श्री राजभर ने बताया कि आगामी वर्षो में 7200 करोड़ रुपये खर्च करके पुरानी बसों के स्थान पर 18 हजार नई बसें संचालित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। भविष्य में इंटरनेट से टिकट बुकिंग व्यवस्था की जाएगी व बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं पर 280 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
श्री राजभर ने बताया कि मशीन से टिकट वितरण कुछ स्थानों पर लंबी दूरी की बसों में शुरू किया गया है, अब इसे प्रदेश भर में लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे पता चल सकेगा कि कौन सी बस कहां है। बसों की समय सारिणी के लिए साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है और एलसीडी स्क्रीन लगाकर यात्रियों को बसों के समय की जानकारी दी जाएगी।
इस मौके पर प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री राजपाल त्यागी ने कहा कि कोई भी घटना होने पर सरकारी बसों पर गुस्सा उतारा जाता है, यह बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी बसें जनता के धन से ही खरीदी जाती हैं, इसलिए वे स्वयं बसों का ध्यान रखें। कार्यक्रम में मोदीनगर विधायक मास्टर राजपाल सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
अतिथियों का स्वागत क्षेत्रीय प्रबंधक अशोक कुमार, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल जैन आदि ने किया।
जल्द दूर की जाएगी सीएनजी फिलिंग स्टेशन की समस्या
परिवहन राज्य मंत्री रामअचल राजभर ने जल्द ही जिले में सीएनजी फिलिंग स्टेशन लगवाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नगर बस सेवा रूट की बसों को हर हाल में चलवाया जाएगा।
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