Wednesday, September 17, 2008
भाग-108
अरबी- और ,तुम्हें क्या लगता है ?क्या ऐसा हो सकता है ? क्या मैं तुम्हें धोखा दे सकता हूँ ...?
चंदा -होने को तो कुछ भी हो सकता है, लेकिन मैं आप पर अंधा विश्वाश करती हूँ... आप जो चाहें करें...
अन्दर तक दहल गया शेख ... चंदा ने सच्ची बात कहदी थी... कुछ पलों तक तो वह अवाक रह गया... सच्चाई सामने आने पर वह बुरी तरह घबरा गया... साथ ही चंदा के विश्वाश से उसको सहारा भी मिला था... यह ऐसा समय था जहाँ बोलने की गुंजाइश बहुत कम थी...वैसे अरबी शेख बहूत घाघ था... ऐसे अवसरों पर बात को संभालना वह बखूबी जानता था... उसने चंदा की आंखों में आँखें डालकर देखा, अपनी बांहों में कैद करके वह उसके गालों को चूमने लगा ... उसकी आत्मीयता देखकर चंदा भी भावनाओं में बहने लगी... अरबी शेख उसके सभी नाज़ुक अंगों को छेड़ रहा था... जब उसको लगा की चंदा उससे प्रभावित हो गई है तो उसने कहा-
- प्यार कोई करने की चीज नहीं है ... यह दिल के अन्दर का एहसास होता है... जिससे हो गया, समझो हो गया... यह बेचने या खरीदने की चीज भी नहीं होती... जो लोग ऐसा करते हैं , या प्यार की आड़ में d
Tuesday, September 16, 2008
भाग-107
-इतने सुख भरे पल आपकी वजह से ही मिल पाए है... जागती आंखों का सपना जैसा लग रहा है... कैसे उतारूंगी यह उपकार... आपको मेरी जिन्दगी में बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था...
अरबी- जो होना होता है, वही होता है... मालिक की मर्ज़ी के बोना कभी कुछ नहीं होता... यह मेरा निजी अनुभव है... न जाने कितने सालों से मैं तुम जैसी खूबसूरत लड़की को तलाश कर रहा था... कितने साल बीत गए और अब जाकर मेरी तलाश पूरी हो पाई है...
- आप इस दिल की हर धड़कन में बस गए हैं... अगर मेरा सीना चीरकर देखोगे तो इसमें आप ही आप नज़र आएँगी... पहले कभी भी मुझे इस तरह का एहसास नहीं हुआ ... मैंने अपने दिल में कभी इस तरह की हलचल महसूस नहीं की... यह एकदम अलग सा है...
-मोहब्बत का संगीत सबसे सुरीला होता है... इतना की वह जिस्म की रग-रग से सुनाई देता है...
चंदा-मुझे अपने नसीब पर ज़रा भी भरोसा नहीं है... डरती हूँ की कहीं किसी की बुरी नज़र हमारे प्यार पर न लग जाए... कभी-कभी दिल में यह शंका पैदा होती है की कोठे की मालकिन ने मुझे इतनी जल्दी आजाद कर दिया है, तो जरूर इसके पीछे कोई राज होगा ... ऐसा भी हो सकता है की अपने गुंडे भेजकर वे हमें फ़िर उठ्वालें ...
अरबी- ऐसा क्यों सोच रही हो तुम ?
चंदा- वहाँ की लडकियां की बता रही थीं...
अरबी- और क्या कह रही थीं वे?
Saturday, September 13, 2008
भाग-104
अरबी- ऐसा क्यों कहती हो, मैंने तो अभी कुछ भी नहीं कहा ... एक बार स्पर्श ही तो किया है... अगर तुम इजाज़त दो तो तुम्हारे मन के तारों को वीणा की मधुर वाणी की तरअह झंकृत कर दूंगा...तुम्हारी यह सुंदर काया हर किसी को नसीब नहीं होती... जब मालिक ने तुम्हें इतना सुंदर हुस्न बख्शा है तो इसका सदुपयोग करो....
चंदा- तुम जादूगर तो नहीं हो? मीठी-मीठी बातें करके तुमने मेरा तन -मन मोह लिया है... अब मैं तुम्हारे सिवाय और किसीके बारे में नहीं सोच सकती... यहाँ जो भी आया वह मेरे जिस्म का सौदा करने ही आया ... तुम ऐसे अकेले हो जिसने आकर मेरी भावनाओं को समझने की कोशिश की...
अरबी- ये तो कुछ भी नही, मैं तुम पर अपनी सारी दौलत .सारा प्यार लुटाना चाहता हूँ...इस कोठे की मालकिन मेरी बहुत इज्ज़त करती है... उससे पूछकर मैं तुमको अपने साथ ले जा सकता हूँ... हम लोग कोई अच्छा सा होटल देखकर एक कमरा बुक करा लेंगे, उसमें खूब आनंद उठाएंगे... जब तक हम एक दूसरे को अच्छी तरह से पहचान भी लेंगे... उस वक़्त यदि तुम्हारी इच्छा हुई तो मैं तुम्हें अपने साथ वतन ले चलूँगा... हमारे पास वहां इतनी संपत्ति है की सात जन्मों तक भी हम बैठकर शहन्शाहाओं की तरह खा सकते हैं... मेरे जीवन तुम जैसी एक हसीना की ही कमी थी, वह तुम्हारे आने से पूरी हो जायेगी... फ़िर मुझे कुछ नहीं चाहिए... मेरा जीवन सफल हो जायेगा, धन्य हो जायेगा... मैं तुम्हें इतना प्यार दूंगा की ज़माना हमारी वफाओं की क़समें खाया करेगा...
चंदा- मैं भी अपनी जान लुटा दूंगी, जहाँ तुम्हारा पसीना गिरेगा , वहां मैं खुश होकर अपना लहू बहा दूंगी...
चंदा पर इश्क का भूत सवार होता जा रहा था... वह अरबी शेख की बातों में आकर पिघलती जा रही थी... अरबी ने चंदा के यौवन की गोलाइयों तक अपनी पहुच बना ली थी... वह चंदा के होठों का रस तो पहले ही चख चुका था... अब वह उसकी क्वारी और मदमस्त ज़वानी का आनंद लूटने को बेताब था... चन्दा की तबियत भी मचलने लगी थी... अरबी ने उसके अंग-अंग में कामोत्तेजना का तूफ़ान भर दिया था...अरबी शब्दों का खिलाड़ी था... वह पूछ रहा था-
-तुम्हारे चेहरे पर खुशियों की जगह पर ये दर्द की लकीरें क्यों दिख रही हैं?
चंदा-क्योंकि मुझे अपना मुकद्दर पर भरोसा नहीं है... मेरे दामन में आने से पहले की सुख रूठ जाता है... डरती हूँ की फ़िर कोई ऐसा ही हादसा हमारे साथ न हो जाए...तुम क्या जानो, बड़ी बदनसीब हूँ मैं...
अरबी- जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ, तब तक तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है... मैं हर आंधी-तूफ़ान का रुख मोड़ सकता हूँ... तुम्हारे तरफ़ आने वाली हर बला को मैं अपने ऊपर ले लूँगा...
चंदा- ज्यादा वाडे न करो, सुना है की वायदे अक्सर टूट जाते हैं...
अरबी- तुम शंका मत करो... नेगेटिव विचारों से इंसान की शक्ति कमजोर हो जाती है...
चंदा- तुम शायद ठीक कहते हो ... मैंने भी ऐसे ही महसूस किया है... अब मैं वही करुँगी, जो तुम कहोगे...
चंदा ने जब अपने हाथों को ऊपर उठाकर अंगडाई ली तो अरबी शेख का मन विचलित हो गया... वह
Friday, September 12, 2008
भाग-103
चंदा-सब झगडा तो इसी शरीर का है... सभी इसको पाने के लिए बेचैन हैं... तुम ही मेरी मदद कर सकते हो... मैंने अभी तक किसी को यह जिस्म नहीं सौपा है... मैं समझ नहीं पा रही हूँ की इस जाल से कैसे निकला जाए... तुम्हारे शब्दों से मेरा हौसला बढ़ा है... पता नहीं यह खुशी कितनी देर तक टिक पाती है?
अरबी- यह क्या कह दिया चंदा , तुम अगर कहो तो तमाम उम्र तुम्हें इसी तरह की खुशियाँ मिल सकती हैं... मैं तो पहली नज़र में तुम्हारा दीवाना हो गया था... तुम मेरे साथ मेरे वतन चलो, तुम्हें अपनी रानी बनाकर रखूँगा... वहां पर हमारा बहुत बड़ा कारोबार है... वैसे तो कोई कमी नहीं है, लेकिन खूबसूरत औरतें मेरी सबसे बड़ी मजबूरी हैं ... मैं बहुत कामुक हूँ ... मुझे प्रणय क्रीडा करने में बहुत आनंद मिलता है... मेरा निकाह हो चुका है लेकिन मेरी बीबी मुझे वो सुख नहीं दे पाती, जिसकी मुझे जरूरत है...तुम्हें देखा तो ऐसा लगा जैसे की मेरी तलाश पूरी हो चुकी है... अब मैं बड़े आराम से जिन्दगी गुजार सकता हूँ... मैं तुम्हें अपनी बनाने को तैयार हूँ... यहाँ पर रोजाना तरह-तरह के लोग तुम्हारे जिस्म से खिलवाड़ करने के लिए आयेंगे... अगर तुम राजी से नहीं मानी तो ये लोग जबरन तुम्हारी आबरू लूट लेंगे... अगर तुम सोचती हो की पुलिस तुम्हारी मदद करेगी, तो यह तुम्हारी बहुत बड़ी भूल है... ऐसा हो ही नहीं सकता... पुलिस के भष्ट अफसर इन कोठे वालों से मिले हुए होते हैं, वे हमेशा उनकी ही तरफदारी करते हैं... इसलिए यह उम्मीद करता हूँ की आपको वहां से कोई मदद नहीं मिलेगी ... मेरी बात अलग है... मैं तो प्रेमी हूँ आपका ... मैं जो भी करूँगा, आपके हित में करूँगा... कहोगी तो रानी बनाकर रखूँगा...
चंदा-ये क्या कह रहे हैं आप ?मैं कहाँ ,मुसीबत की मारी हुई एक बदनसीब लड़की ... और आप कहाँ , आप ठहरे करोडो पति ... बस आप मुझे यहाँ से निकलवा दीजिये...
अरबी - तुम डरना मत... डरने से किसी को कुछ नहीं मिलता... आओ, मेरी बांहों में आकर समा जाओ... मुझे तुम्हारी चिंता हो रही है... इस वक़्त तुम ठीक तरह से अच्छी बातें सोचने की स्थिति में नहीं हो...
चंदा चुप हो गयी... उसने महसूस किया की अरबी की बात में वाकई ताकत है... अरबी शेख उसके और भी करीब आकर बैठ गया ... अब वह उसके गोरे-गोरे गालों पर हाथ फिराने लगा... चंदा खामोश रही ... उसको अरबी की उपस्थिति बहुत अच्छी लग रही थी... उसका मन खुश था... अरबी ने उसके गाल का चुम्बन लेते हुए कहा-
- दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो तुम... आह, अगर मैं इस बार भारत नहीं आता तो बहुत बड़े सुख से हाथ धो बैठता ... मैं तुमको हमेशा खुश रखूँगा...
Thursday, September 11, 2008
भाग-१०२ अ
उस अरबी शेख ने इतनी मीठी जुबां में बातें कीं की चंदा का दिल पिघल गया... उसने बड़े अदब से उसको अपना नाम बताया और यहाँ तक की अपनी सब परेशानियां भी गिनाईं...वह बोली-
- यहाँ के लोग हमारे साथ में जानवरों जैसा व्यवहार करते हैं ... बीमार हो जाए तो दवा का नाम तो लेते नहीं उल्टे काम करने को कहते हैं... मेरी तो हालत ख़राब हो हो गयी है... आप देखिये मुझे बुखार है की नहीं ?
अरबी- तुम फ़िक्र मत करो, दो मिनिट में ये बुखार रफूचक्कर हो जायेगा, मैं यह दवा देता हूँ, लो इसको खालो, अब अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो मैं तुम्हारे पास बैठकर थोडी देर तक दुःख -सुख की बात करूँ, हम लोग अपना वतन छोड़कर यहाँ इसलिए आते हैं ताकि थोड़ा सा सुकून हासिल कर सकें... रोजाना की भाग दौड़ और आपा धापी की जिन्दगी से ऊब हो चुकी है... धन-दौलत या शौरत ही सब कुछ नहीं होते... मुझे देखो, मेरे पास सब कुछ है लेकिन मानसिक शान्ति नहीं है... यहाँ पर तुम्हें देखा तो न जाने क्यों ऐसा लगा की तुम्हारी आंखों मेंजो चमक है,उससे मेरी बीमारी का इलाज़ हो सकता है... मेरे दिल की इस बीमारी को अब तुम ही ठीक कर सकती हो... क्या तुम ऐसा करोगी ? देखो, इंकार न करना ... मैं जीवन में इतना प्रभावित पहले कभी किसी से नहीं हुआ ....
चंदा- मैं भला इसमें क्या कर सकती हूँ ?डॉक्टर तो ख़ुद आप हैं...आपकी एक गोली से ही मैं बिल्कुल ठीक हो गयी...
अरबी- क्यों नहीं कर सकती? तुम बहुत कुछ कर सकती हो... जैसे की थोडासा मुस्करा सकती हो... इससे मेरे दिल को बड़ा अच्छा लगेगा...करो न ऐसे...
चंदा सचमुच मुस्कराने लगी थी ... अरबी खुश हो गया... वह चंदा को अपनी बातों में उलझाने में कामयाब हो गया था... चंदा को उसकी बातों में मज़ा आने लगा था... वह पलंग पर उसके करीब आकर बैठ गया... चंदा के बालों में अपनी उँगलियों से कंघी करते हुए वह पूछने लगा-
- इससे पहले कहाँ थी आप? इस कोठे पर तो पहली बार ही देख रहा हूँ ...
चंदा- हाँ, अब तक मुझे कई जगहों पर बेचा जा चुका है... हर जगह मुझे मारा-पीटा जाता है, यातनाएं दी जाती हैं,धमकियाँ दी जाती है, तब भी मैं उनकी बात नहीं मानती तो ऊंचे दाम लेकर वे लोग मुझे दूसरी जगह पर बेच देते हैं... दो दिन से यहाँ पर भी मुझे इसी तरह की तकलीफें दी जा रहीं हैं... मेरी सुनने वाला कोई नहीं है... क्या आप मुझे यहाँ से निकाल सकते हैं ? मैं जीवन भर आपकी गुलामी करने को तैयार हूँ...
अरबी- अरे ये क्या कहती हो? दोस्ती में ये सब बातें नहीं कही जातीं... मैं तुमकोअपने दिल के करीब पाटा हूँ... तुम्हें दोस्त मान चुका हूँ... तुम अगर मेरी बात मानोगी तो मैं भी तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ... लो ,फिलहाल ये सोने की चैन अपने गले में दाल लो, तुम्हारे गोरे बदन को खूब अच्छी लगेगी...
चंदा- इस वक़्त मुझे सोने चांदी की नहीं बल्कि एक सच्चे साथी और सहयोगी की जरूरत है, जो मुझे इस नर्क से निकाल सके ... क्या तुम सचमुच मेरी मदद करने के बारे में सोच रहे हो ?
अरबी- तुम्हारे लिए तो जितना किया जाए कम है... ये बताओ, इससे पहले कितने मर्द तुम्हारे जिस्म को स्पर्श कर यौवन का आनंद लूट चुके हैं ?
Wednesday, September 10, 2008
भाग-102
- एक बहुत अच्छा ग्राहक आया है... सबसे ज्यादा टिप देता है... इस बार वह तुम्हें पसंद कर चुका है... अगर तुमने उसको खुश कर दिया तो मज़ा आ जायेगा... वह अरब का शेख है, जिस पर उसका दिल आ गया समझो उसका बडा पारहो गया... बड़ा रंगीला इंसान है, वह ख़ुद भी जमकर आनंद लेता है और तुमको भी देगा...
चंदा- देखते नहीं हो, मैं बुखार में कितनी जल रही हूँ...
दलाल- उससे क्या फर्क पड़ता है ? वह डबल इंजेक्शन लगाता है... मस्त कर डालेगा...
चंदा- मुझे दवा की जरूरत है...
दलाल- अगर यूँ ही नफरत करती रही तो जैसे दवा के लिए तरस रही है, एक दिन जिन्दगी के लिए तद्पेगी...
चंदा- ऐसे जीवन से तो अगर मर ही जाऊं, तो ही बेहतर है... मुझे जहर ही लाकर दे दो , तुम सबको तब तो तसल्ली मिल जायेगी... ये लो मैं तुम्हें इतनी तकलीफ भी नहीं दूंगी... लो, मर जाती हूँ ...
चंदा ने अपना सर दीवार में दे मारा... ठीक तभी उस कमरे में एक अधेड़ व्यक्ति ने प्रवेश किया... वह अमीर अरब शेख था... उसने चंदा को संभाल लिया... मीठी भाषा में वह बोला-
-ये क्या गज़ब कर रही हैं आप ? इतनी खूबसूरत होकर भी ऐसी कायराना हरकत कर रही है?
-चंदा- कौन हो तुम ? ये सब कहने के लिए तुम्हें यहाँ भेजा किसने है?
दलाल- यही तो है तुम्हारा आज रात का साजन ... इसीने तुम्हें आज पसंद किया है...
-तो इनको कहीं और लेकर जाओ न, मैं अकेली ही इस कोठे पर रहती हूँ क्या ?भाग जाओ वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ... तुम सब के सब जल्लाद हो...मेरी बात कोई नहीं सुन रहा है ,सब अपनी-अपनी मस्ती में हैं ...
अरबी - अरे, भाई इनको परेशानी क्या है ? पहले इनकी तकलीफ दूर करो , उसके बाद में हम इनसे बात करेंगे... मुझे लगता है आप लोग इतनी हसीं लड़की का सम्मान करना भी नहीं जानते... अरे भाई, लड़की बड़ी खूबसूरत होती हैं...
Tuesday, September 9, 2008
भाग-101
मालती ने कहा भी-
-आज कितना पवित्र दिन है... हर तरफ़ रौनक ही रौनक है... काश, इतना मुबारक दिन पहले ही आ गया होता... मगर कहते हैं न की जब कुदरत का इशारा होता होता है , तभी सब कुछ होता है... वैसे भी समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता...
आशा- जब जागो तभी सवेरा होता है... आज से तुम बागडोर संभाल लो...
मालती- मैं भी आप सब लोगो के सामने यह घोषणा करती हूँ की अब कभी भी किसी लड़की से वैश्यावृत्ति नहीं कराऊंगी ... मैं आज और अभी से सबको मुक्त करती हूँ...जोलड़कियां मेहनत करके कमाना चाहती हैं उन सबका स्वागत है... मैं ऐसी लड़कियों को पूरी सुख सुविधाएं दूंगी... तुम सबके आश्रितों को रहने की सुविधा दी जायेंगी... तुम्हारे बच्चों को पढने की सहूलियत दी जायेंगी... बोलो मंज़ूर है ?
सब लड़कियों ने एक स्वर में सहमती जताई... एक ने पूछा-
- वो सब तो ठीक है लेकिन हमको काम क्या करना पड़ेगा ?
मालती- फिलहाल इस बारे में कुछ सोचा नहीं गया है... मगर इतना याद रखो, जो कुछ भी काम हम सब करेंगे वह ईमानदारी वाला होगा और अच्छा ही होगा ... हम ख़ास लोगों से पूछताछ करके कोई व्यवसाय शुरू करेंगे... इतना यकीन करें की हम हर हालत में कामयाब होंगे... अगर तुम लोगों ने दिल से साथ दिया तो हम सारी दुनियाको यह दिखा देंगे की वैश्याये भी मुख्य धारा में शामिल हो सकती हैं...
लगभग ९० वेश्याओं और स्टाफ के ३५ लोगों ने मालती की बात का तालियों की गडगडाहट के साथ स्वागत किया... आशा का उत्साह और भी ज्यादा बढ़ गया... वह फूली नहीं समा रही थी... उसने जोश में कहा-
- आज तक लोग हमारा शोषण करते रहे, हमारे जिस्म की बदौलत अपना व्यवसाय चमकाते रहे, अब हमारी है... अब हम व्यवसाय करेंगे और जहाँ-जहाँ लड़कियों को जबरन जिस्म फरोशी के धंधे में धकेला जायेगा , वहाँ -वहाँ हम विरोध करने पहुंचेंगे...कानूनी और सामाजिक दवाब डालकर हम उस अबला की मदद करेंगे... इसके लिए हम एक सामाजिक संगठन का गठन करेंगे...
मालती- हाँ और अगर जरूरत पडी तो हम आन्दोलन करेंगे... हम एक ऐसा आश्रम बनायेंगे जहाँ पर ऐसी मुसीबत की मारी हुई लड़कियां को शरण मिल सके ... हम वहाँ पर कई काम सिखाने की व्यवस्था करेंगे ताकि वह काम सीखकर हमारी कम्पनियों या फ़िर कहीं दूसरी जगह पर भी नौकरी कर सके...
आशा- मालती की बात स्वागत योग्य है... मेरे पास इतनी संपत्ति मौजूद है, जिससे आप लोगों का यह सपना पूरा हो सकता है... मैं आप सबको आत्मनिर्भर बनते हुए देखना चाहती हूँ...