जलेबी -९
राजेश- अभी इतनी जल्दी, अभी तो कुछ खाया-पिया भी नहीं है,कुछ जाना भी नहीं तुम्हारे बारे में .
नेहा- इससे ज्यादा क्या जानना चाहते हो कि मेरा नाम नेहा है और मुझे प्यार-मोहब्बत जैसी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है. ये तो तुम खुद भी समझ गए होंगे.
राजेश- हाँ, साथ में ये भी समझा हूँ कि अगर ज़रा भी दिलचस्पी नहीं होती तो तुम मेरी गाड़ी में भी नहीं बैठती ,यहाँ मेरे साथ ड्रिंक भी नहीं करती. ये माना कई मै तुम्हें हद से ज्यादा चाहता हूँ, लेकिन झूठ ये भी नहीं कि प्यार के बीज तुम्हारे मन में भी अंकुरित हो रहे हैं. ज्यादा नहीं तो कम, लेकिन चाहती तुम भी हो मुझे . तुम जितनी हसीन हो, उसकी जितनी तारीफ़ की जाए , कम है लेकिन मेरी मर्दानगी के सामने भी कोई टिक नहीं सकता. एक बार जिस महिला की नजर मेरे चेहरे से टिकाती है, फिर वह जैसे नजर हटाना ही भूल जाती है. ये है मेरे आकर्षण का जादू. मैंने महसूस किया है कि कई बार आपने भी मुझे कनखियों से खूब देखा है. अगर गलत बोलता हूँ तो बता सकती हो. मै जो गलत निकला तो चाहे जो सज़ा देना.
नेहा- अच्छा, तो अब त७उम अप नी तारीफ़ अपने मुंह से करवाना चाहते हो, वैसे सच तो है , तुम गज़ब के मर्द लगते हो. तुम्हारे साथ जो महिला सुहागरात मनायेगी , वह वाकई बड़ी नसीब वाली होगी. बिस्तर पर तुम उसे भरपूर सुख दे सकते हो, ऐसा मेरा सोचना है. तुम्हारी फडकती हुई भुजाएं कईयों के ईमान डिगा सकती हैं. और तुम्हारे पेंट को फाड़ने के लिए जो यह काला नाग बेताब हो रहा है, मै इसको भी अच्छी तरह से जां गयी हूँ, यह जो बार -बार खडा होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है, उससे लगता है कि जरूर इसमें वजन है. मगर इस सबसे प्रभावित होने का समय मेरा जा चुका हूँ, अब तो मै पत्थर बन चुकी हूँ. हिमालय जैसा पत्थर . जिस पर बारिस, तूफ़ान , गर्मी या सर्दी का कोई असर नहीं होता, हाँ, मै तुम्हें कनखियों से देखती थी, एक अबर नहीं बार-बार. तो इसके पीछे कारण ये था कि तुम मुझे भोले नजर आये, मुझे लगा कि बहुत सीधे इंसान हो. अगर चालू किस्म के होते , या मन में सिर्फ काम वासना ही रखते तो इतना समय मेरे लिए नहीं गंवाते . इसीलिए मैंने दया करके तुमसे मिलने का वक्त दिया है. अब तुम दया और प्यार में फर्क तो आसानी से समझ ही सकते हो. और कुछ क्ल्यारीफिकेशन चाहिए , या काम चल जाएगा ?
राजेश -ठीक है, मै समझ गया. आप कहना चाहती हैं कि अआप्को मुझसे सहानुभूति है, प्यार नहीं है. कोई बात नहीं , मुझे इससे भी कोई ऐतराज नहीं है. आज मै तुमने दया के लायक समझा हूँ, तो कल प्रेम के काबिल भी जरूर समझोगी .
नेहा- बहुत स्मार्ट बंदे हो, प्यार के चककर में पड़े हो. क्या करोगे प्यार करके, समय बर्बाद करने से तो बेहतर है कि तुम किसी अबर में जाओ, लड़की पसंद करो और मन चाहे गेस्ट हाउस में ले जाओ. रात भर वह तुमसे इतना प्यार करेगी , कि दिन भर नहीं भूल पाओगे. प्यार -व्यार के बहाने आदमी और किसलिए करता है ? यही आवरण तो होता है. जब बिस्तर पर ले गया , मन भर गया, गर्मी निकल गयी तो प्यार का भूत भी उतर जाता है. सारे वादे हवा हो जाते हैं, तब कुछ नही दिखता .
राजेश- लगता है तुमने मोहब्बत में कोई चोट खाई है, जिससे ऐसी नेगेटिव बातें करने लगी हो, प्यार के नाम से ही चिढने लगी हो. मै पूछता हूँ कि इसमें अआखिर बुराई भी क्या है. अब तुम जवान हो, खूबसूरत हो, क्या ये जवानी और सुंदरता हमेशा रहने वाली है ? तुमसे पहले और भी न जाने कितनी हूर की परियां थीं, और अब भी तुम्हारे बाद न अजने कितनी आएंगी . फर्क ये है कि आफले उनका वक्त था, आज तुम्हारा वक्त है और कल किसी और का वक्त होगा . जिसने वक्त की कद्र नहीं की , वक्त कभी उसकी कद्र नहीं करता. आज तुम्हें लाखों चाहने वाले मिल जायेगे , मगर जब तुम्हारा हुस्न ढल जाएगा तब कोई पूछने वाला नहीं होगा .
नेहा- अपने दिल की भड़ास निकाल रहे हो या फिर मुझे बददुआ दे रहे हो ?
राजेश- एक सच्चे दोस्त का सलाह है, जो लाखो लोग तुम्हें चाहते हैं, उनमे से कोई एक चुन लो और उसे हमेशा के लिए अपना बनालो . उसकी भी जिंदगी बन जायेगी और तुम्हारे हुस्न का भी सही चाहने वाला , अच्छा कद्रदान मिल जायेगा. जिस हुस्न के सच्चे चाहने वाले न हों, वह भी किसी अकाम का नहीं होता . यह भी याद रखना .
नेहा - मैन कैसे पहचानूंगी कि कौन सच्चा चाहने वाला है और कौन झूठा ? एक काम करो न , इस काम में तुम ही मेरी मदद करो. खुद को छोड़कर मेरे लिए कोई अच्काहा साथ चुनिए न . इनमे से . ये देखिये .
Monday, October 17, 2011
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