Thursday, December 31, 2009

मोहब्बत , भाग-६४
राज- मैं सबकी बात नहीं कर रहा हूँ मेरी जान, मैं सिर्फ एक बहुप्रचलित बात कह रहा हूँ. उदाहरण में वही बातें दोहराई जाती हैं जो की ज्यादातर लोग कहते हैं, उनमे से बहुत कुछ गलत भी हो सकती है, बिलकुल संभव है. एक ही तरह के लोग हर जगह पर नहीं रहते. सबमे भिन्नता रहती है.
स्वीटी- हाँ , छोडिये न दुनिया और दुनिआदारी को, हमने क्या करना है, हमें तो बस अपने मोहब्बत से मतलब है, खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों.
राज- तुम बहुत अच्छी हो , और दूसरी तमाम लड़कियों जैसी नहीं , जो इतनी सी बात का ही बतंगड बना डालते हैं, हम दोनों की जोड़ी खूब जमेगी.
स्वीटी- तुम खुद एक अच्छे इंसान हो . तुमने मुझे प्यार का जो अनमोल तौहफा दिया है मैं इसको सदैव अपने दिल और आत्मा में बसाकर रखूंगी, मुझे तुमसे मोहब्बत है और तुम भी मुझे उतनी ही गंभीरता से चाहते हो, इससे बढ़कर मेरी लाइफ में और कोई अच्छी बात हो ही नहीं सकती.
राज- मैं किन शब्दों से तुम्हारा शुक्रिया अदा करून, तुमने जिस तरह से मुझे मोहब्बत के बदले मोहब्बत दी है , मैं उससे अभिभूत हूँ.
स्वीटी- राज, बहुत कम लोग होते हैं जिनको अपना प्यार मिल पाता है वरना तो आजकल वफ़ा के बदले बेवफाई मिलने का चलन ज्यादा
हो गया है. मैं खुशनसीब हूँ की मुझे इश्क के बदले इश्क और वफ़ा के बदले वफ़ा मिली है. तुम्हारे इस प्यार को ना जाने मैं कैसे संभाल पाउंगी ? डरती हूँ की कहीं मेरी वजह से तुम्हें कभी कोई तकलीफ ना हो.
राज- ये ऐसी शंका या आशंकाओं का वक्त नहीं है, यह समय है मोहब्बत का, इस अकेलेपन का फायदा उठाना चाहिए, फिर ना जाने तुम्हें कभी इतना समय मिल पायेगा की नहीं? और अगर मिला भी तो इतने अच्छे हालत रहेंगे भी की नहीं ? और अगर सब कुछ ठीक भी रहा तो ये जवानी भी उस वक्त रहेगी की नहीं ?
स्वीटी- अब तुम भी अशुभ-अशुभ बातें मत करो. मुझे अच्छा नहीं लगता , मेरा कलेजा बैठने लगता है.
राज- मेरे रहते हुए भी डरती हो, क्या कमाल करती हो मेरी जान. ऐसे कमाल काटती रहोगी तो फिर क्या दिक्कत रह पाएगी
स्वीट समझ गयी की राज रोमांटिक हो रहा है, तो उसने गर्म लोहे पर हथौड़ा मारना शुरू कर दिया. उसने राज के होठों पर एक चुम्बन क्या लिया , राज के जिस्म में आग भडकने लगी, वह बेबस नजर आने लगा था मगर जब स्वीटी ने उसको सिग्नल दिया तो राज का दिल खुल गया, उसने स्वीटी के सीने के उभारों को सहलाना शुरू कर दिया. स्वीटी ने तडपते हुए कहा-
-आह... क्या इरादा है, क्या जान लेना चाहते हो . इतने जोर से दवाब डालोगे तो घर जाने के बजाय अस्पताल जाना पड़ सकता है.
राज- चिंता ना करो मेरी जान. ऐसा कुछ नहीं होगा. तुम्हें इतना सुख दूँगा की जीवन के सभी दुःख भूल जाओगी, इतना आनंद दूँगा की जिंदगी के सभी अवसाद भूल जाओगी.
स्वीटी- तुम्हारा स्पर्श पाकर ही मैं दुनिया की सभी सुख सुविधाएँ पा चुकी हूँ.
राज- सच... कितनी अच्छी हो तुम. कितनी सुन्दर और कितनी समझदार ...
स्वीटी ने महसूस किया की जैसे राज उस के मादक यौवन का दीवाना बन चुका था, वह उसकी मद मस्त जवानी का रस चखने के लिए बेताब था, कामवासना के कारण उसका बदन तप रहा था.उसका अनुमान सच भी था, राज का संवेदनशील अंग अब काले नाग की तरह दहाड़ मारने के लिए तैयार था. उस पर हाथ फिराते ही स्वीटी के मन में लड्डू फूटने लगे, यह मानव मन का स्वभाव होता है की जो चीज उसने नहीं देखी उसे देखने के लिए वह बहुत बेचैन रहता है, स्वीटी और राज का भी यही हाल था. वे दोनों एक दूओसरे के बदन से खेलने के लिए बेचैन हो रहे थे. राज ने आहिस्ता से खा-
- मन इस समय मजबूर हूँ, मुझे किसी तरह समझाइये या फिर इस बेचैनी को रोकने में मेरी मदद कीजिये , या फिर ...
स्वीटी –तो फिर क्या ?
राज- मेरी प्यास बुझा दीजिए.

Wednesday, December 30, 2009

mohabbat , bhag-63

राज- अब इतनी तारीफ़ भी ना करो की मैं हवा में उड़ने लागूं , या फिर घमंडी हो जाऊं.
स्वीटी- जो है वो है, मैं क्यों गलत बात करुँगी, मैंने जो महसूस किया , वही कह रही हूँ. मैं सोचती हूँ की
प्रेम से जो खुशी मिलती है वह और किसी चीज से नहीं मिल सकती। प्रेम से जो प्रेरणा मिलती है वह हर हौसले को इतना बुलंद कर देती है कि सागर, पर्वत सब तुच्छ जान पड़ते हैं पर प्रेम के सही मायने तभी तक सार्थक लगते हैं जब तक इसकी ताकत से जीवन को सकारात्मकता के साथ रचा जाए।
राज- हाँ, इसकी ताकत का सही उपयोग तभी होता है जब प्रेम की भावना में मिट जाने के बजाए निर्माण की सोचें। प्यार के रिश्ते में भावनाओं का नियंत्रण बेहद जरूरी है। जिस प्रकार संभलकर बिजली का उपयोग करने पर हमारा घर रोशन हो उठता है पर जरा सी लापरवाही से सब कुछ खाक हो जाता है। उसी प्रकार प्रेम से भी जीवन में तभी तक प्रकाश मिलता है जब तक हम होश में रहें। आवेश में किए गए वायदे, बड़े-बड़े दावे पूरे नहीं होने पर वे साथी को बहुत आहत करते हैं। इस रिश्ते में यदि लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो कछुए की चाल चलना ही ठीक है। धीमी गति ही सही पर आप मंजिल तक सोच-समझकर पहुँच तो पाएँगे। यदि प्रेम में कोई भी साथी दूसरे को गंभीरता से नहीं लेता है, केवल अपनी सुविधा, अपनी मर्जी से रिश्ते को चलाना चाहता है तो सामने वाला अपना धैर्य खो देता है। कोई पूरी निष्ठा, ईमानदारी से कितना भी समर्पित भाव क्यों न रखता हो उसके बलिदान की भी सीमा होती है। एक वक्त आता है जब ऐसे रिश्ते बेजान होकर टूट जाते हैं। प्रेम के रिश्ते में दोस्ती की भावना को सबसे ज्यादा अहमियत देनी चाहिए ताकि दोनों को समान रूप से उसकी शक्ति मिलती रहे। हमें आने वाले वर्ष में इस बात का बेहद सतर्कता से ध्यान रखना चाहिए कि हम खुद को न भूलें। समय का सही उपयोग तभी होता है जब हम स्वयं को खुश रखने के बारे में गंभीरता से सोचें। प्रेम करने वाले एक-दूजे के साथ चाहे जैसा भी व्यवहार करें, जितना भी समय बिताएँ पर नेकनीयती का दामन न छोड़ें। यदि एक दूसरे के बारे में नीयत साफ न हो तो वह प्यार अपनी गरिमा खो देता है। कई बार अच्छा समय बिताने को भी प्यार का नाम दे देते हैं। पर समय के बीतने के साथ ही उसकी गहराई समझ में आ जाती है। दोनों की भावना, नीयत एक समान है या नहीं इसे जानने का एक ही तरीका है, समय। जिस रिश्ते को दूर तक ले जाना है, उसे धीमी गति से परखने का मौका देना चाहिए। प्रेम कुछ देखा, कुछ अनदेखा, कुछ व्यक्त, कुछ अव्यक्त और कुछ दृश्य, कुछ अदृश्य-सा होता है। उसे किसी एक परिभाषा में बाँधना, उसे छोटा करके देखना है। प्यार का इज़हार आँखों से होता है, जबान से नहीं। प्रदर्शनकारी होने पर प्रेम की महत्ता घटती है। 'आई लव यू' और 'आई लव यू टू' शब्द बहुत औपचारिक हो गए हैं। टीवी और सिनेमा के पर्दे पर ही अच्छे लगते हैं। पति का झूठा खाने से प्रेम प्रमाणित नहीं होता। दरअसल, शोर प्रेम के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। प्रेम तो अनंत है, असीम। वह बाँटने से बढ़ता है। प्यार का इजहार भले ही आँखों से होता हो, होता वह हृदय से है। कहने को दिल माँस का लोथड़ा भर है, पर कितना परेशान करता है। चैन नहीं लेने देता। तनिक-सी उथल-पुथल से धड़कन बढ़ जाती है। हेंपशायर (ब्रिटेन) की जेनिफर सटन का दिल शल्य चिकित्सा द्वारा बदला गया था। जब जेनिफर को निकाला गया उसका दिल दिखाया गया तो उसके मुँह से सहसा निकला, 'तो माँस का यही लोथड़ा था जिसने मुझे तरह-तरह से परेशान किया।' प्रेम हृदय से होता है, पर हृदय पर किसी का वश नहीं। वह कब किस पर आ जाएगा, कहना कठिन है। स्त्री इस मामले में ‍अधिक भावुक और संवेदनशील है। वह कब किसको माथे का सिंदूर बना लेगी, कब प्रेमी की खातिर पति की हत्या करवा देगी और कब पति की चिता पर बैठकर सती हो जाएगी, कहना मुश्किल है।
स्वीटी- अरे रहने भी दो यार. ऐसी भी लड़कियां नहीं होतीं, वरना ये दुनिया इतनी खूबसूरत नहीं होती. और रही बात एकतरफा प्रेम की , तो वह तो हम दोनों के बीच नहीं है. हम तो आपसी सहमति से इस प्यार को अंजाम दे रहे हैं. ऐसे में अगर कुछ होता है तो किसीको दोष नहीं दिया जाता .

Tuesday, December 29, 2009

मोहब्बत , भाग-62

वह अपना असली रंग दिखायेगी. उस वक्त वह राज से उस अपमान का बदला लेगी, जिसका की उसे एहसास ही नहीं था, बेचारा राज, उसे क्या मालूम था की कोई उसके बारे में इस तरह का षड्यंत्र रच रही है. जिस स्वीटी को वह प्रेम और आदर्श की जीती जागती मूर्ती समझ रहा था , वही स्वीटी उसको बर्बाद करने की प्लानिंग कर चुकी थी. ये दुनिया भी बड़ी सयानी है, यहाँ जब आपको कोई नफरत करता है तो आप उसे दिल की गहराइयों से प्यार करने लगते हैं और जब आप किसीसे नफरत करते हैं तो पता चलता है की वह आपसे टूट-टूटकर प्यार करने लगता है. राज की हालत भी ऐसी ही तो थी, जब वह स्वीटी से मोहब्बत नहीं करता था तब वह उस पर जान लुटाती थी और अब , जबकि वह स्वीटी को चाहने लगा था तो स्वीटी सिर्फ उसका इस्तेमाल करने पर तुली हुई थी. राज इस सबसे दूर अपनी धुन में मस्त था, वह स्वीटी के उन्नत उभारों को दबा रहा था, जिससे स्वीटी के तन और मन में कामवासना की चिंगारियां उठ रही थीं. फिर वह स्थान भी आ ही गया जहां पर राज ने स्वीटी के साथ सुनहरे पल गुजारने की योजना बनाई थी, कुछ देर के बाद ही वे दोनों एक शानदार होटल के आलिशान कमरे में मौजूद थे. पूरा कमरा खुशबू से महक रहा था. सामने बड़ी सी स्क्रीन थी, उस पर अग्रेजी गाने चल रहे थे. स्वीटी खुश हो गयी, बेड भी मन मोहने वाला था. राज ने पूछा-
-कैसा लगा अपना कमरा ? हम लोग यहीं पर आराम से बात करेंगे, इस होटल में डिस्को भी मौजूद है. अगर चाहो तो हम लोग वहाँ पर भी इंजॉय कर सकते हैं और बात अगर सुकून से पीने और डांस करने की है तो वह सब यहाँ पर भी उपलब्ध हो सकता है.
स्वीटी- अगर सब कुछ यहीं पर उपलब्ध हो सकता है तो फिर कहीं दूर जाने की क्या जरूरत है. यह बहुत अच्छी जगह है, मुझे लगता है हम दोनों को खूब सुख मिलेगा.
राज- अपनी मनपसंद ड्रिंक और चखना लिखदो, मैं ऑर्डर कर देता हूँ,
स्वीटी- मैं पहले फ्रेश होना चाहूंगी, तुम्हें जो भी अच्छा लगे , बोल्दो. तब तक मैं तैयार हो जाती हूँ.
थोड़ी देर में ही सब कुछ ठीक ठाक हो गया था, स्वीटी फ्रेश होकर आ गाई और वेटर उनकी मनपसंद ड्रिंक और खाना लेकर आ गया. राज ने स्वीटी के हाथ में बोतल थमादी और एक अच्छे साकी का फर्ज निभाते हुए स्वीटी मुस्कराकर पैग बनाने लगी. उन दोनों के मन में गज़ब की उथल-पुथल मची थी. राज ने इस बार एक सेक्स विशेषज्ञ की राय ली थी उसनी ने राज से कहा था की
डेली वर्क आउट से सेक्सी बॉडी बनती है. इससे ज्यादा देर सेक्स करने की शक्ति मिलती है. इससे शरीर लचीला हो जाता है और आप ऐसे आसनों का भी आनंद उठा सकते हैं जिनके बारे में सिर्फ ख्वाब देखते हैं.हर प्रकार का म्यूजिक सेक्स ‍की क्रिया में आनंददायक साबित होता है. सेक्स क्रिया के दौरान म्यूजिक की रिदिम हेल्प करती है उसे इंजॉय करने में. म्यूजिक से सेक्स के लिए मूड क्रिएट होता है. गानों के बोल भावनाओं में तूफान ला सकते हैं. एक दूसरे को कम से कम अपनी एक फैंटेसी जरूर बताएँ. यदि शेयर करने के बाद उसे एक्सपेरीमेंट कर सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं. अपने पार्टनर को समझाएँ कि आपको हर संभव सैक्सुअल प्लेजर दें. संवाद स्थापित कर निर्देश दें, बिना दिखाए या टच किए हुए. ये एक बेहतरीन एक्सरसाइज है ये जानने के लिए कि आपके कहने का क्या प्रभाव पड़ता है?
माहौल को हल्का बनाने के लिए सेक्स गेम्स खेलें.
अब राज के दिल में फिर से तूफ़ान जोर मारने लगा था, वह उसी तरह से प्रेम करने के बारे में विचार करने लगा. एक –एक पैग अंदर जाते ही उन दोनों के जिस्म गर्मी से दहक रहे थे. स्वीटी ने मादक अंगड़ाई लेते हुए कहा-
- तुम्हें देखते ही जादू सा छा जाता है.

Monday, December 28, 2009

mohabbat , bhag-61

राज को असुविधा न हो इसके लिए स्वीटी पूरी तरह उसकी तरफ झुक गयी थी, कार के शीशे चढ़े हुए थे, ताकि कोई देख ना ले. और राज बड़े इत्मीनान से स्वीटी की गोलैओं पर लकद बना रहा था, स्वीटी ने एक सेक्सी गीत चला दिया, इससे राज का मूड और भी ज्यादा बन गया , अब वह अपने हाथों का दवाब बढाने लगा था. स्वीटी ने कहा-

तुम्हारे हाथों में भी जादू है, स्पर्श मात्र से ही मेरा पूरा बदन हिलने लगा है. मेरे रोंये खड़े हो गए हैं, देखो ना.

स्वीटी ने उसकी तरफ झुककर ऐसा कमाल दिखाया की राज की आँखों में वासना के डोरे तैरने लगे, वैसे उसने झुक कर थोड़ा सा ही कमाल दिखाया था, दरअसल उसने राज की तरफ झुक कर अपने उभारों के दर्शन करा दिए थे, इस द्रश्य को देखते ही राज अपने आप पर काबू नहीं रख सका, उसके अरमान मचलने लगे, उसकी इच्छाएं भडकने लगीं. वह सोचने लगा की काश वह उन उभारों को अच्छी तरह से देख पाता... फिर उसने सोचा की वह देख क्यों नहीं सकता. मंजिल उसके बिलकुल करीब थी, स्वीटी खुश थी और हर हाल में उसका साथ देने का मन बना चुकी थी, उसने सोचा की क्यों न इस सुनहरे च्चांस का फायदा उठा लिया जाये , आखिरकार किसीको कोई आपत्ति भी तो नहीं थी. सब लोग राजी थे , और जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी. उसने स्वीटी को उत्साहित करने के लिहाज से कहा-

-वाव ... बहुत सुन्दर . तुम इस तरह मेरी तरफ झुक क्या गयीं , देखो ना मेरा तो हाल ही बुरा हो गया है. आँखें में खून उतर आया है. ऐसा लगता है जैसे की मैंने पूरी एक बोतल का नशा कर लिया है. सचमुच , तुम सबसे अलग हो यार. मन करता है की अब डिस्को में जाने से बढ़िया कहीं एकांत में चलते हैं, वहीँ पर इश्क मोहब्बत की बातें करते हैं आर दिल में जो भी सवाल तैर रहे हैं , उनका एक दुसरे से जवाब तलाशते हैं.

स्वीटी- सच,,, मेरी भी तो कुछ ऐसी ही इच्छा है, मैं खुद भी कई सवालों से घिरी हुई हूँ. मुझे भी चान करार नहीं है, ज़रा भी तसल्ली नहीं है, बदन में आग सी लगी हुई है, ऐसा मंजर तो मैंने पहले कभी नहीं देखा था , ऐसा हाल पहले कभी नहीं था. यह तो दीवानों से भी बुरा हाल हो गया है, मुझे तो लगता है की यह आग दोनों तरफ लगी हुई है और यह तब तक बुझने वाली नहीं है जब तक की हम दोनों के विचारों की तरह जिस्म भी एक नहीं हो जाते हैं. तुम्हारा क्या ख़याल है ?

राज- हाँ, यार बिलकुल ठीक कहती हो . तुमने तो पहले भी कहा था मगर मैंने ही नहीं मानी तुम्हारी बात , और अब देखो पछता रहा हूँ ...

स्वीटी- सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए तो उसको भूला नहीं कहते .

राज- हाँ , ये तो है. अच्छा हुआ वक्त रहते हमने सही रास्ता निकाल लिया . अच्छा ये तो कहो की अब क्या करें ? क्या डिस्को चलना है या फिर किसी एकांत कमरे में ? वैसे भी मुझ पर तुम्हारी एक पार्टी बाकी है क्योंकि उस रात तो मैं पी के टट्टू ही हो गया था, कुछ होश ही नहीं रहा . अच्छा हुआ जो तुम मुझे घर तक ले गयीं वरना सब मामला गडबड हो जाता.

सस्वीटी आज ध्यान रखना है, ज्यादा नहीं पीनी, ये पीना पीला तभी तक बेहतर है जब तक की हम होश में रहें, गैर होश रहने का तो कोई फायदा है नहीं. मदहोशी में तो सब मजा हाथ से निकल जाता है, शौक शौक में उस रात पी गए और बाद में हम दोनों को ही तकलीफ हुयी .

राज- तो क्या फैउसला किया ?

स्वीटी- किस बारे में ?

राज- किधर चलें ?

स्वीटी- मैं तुम्हारे साथ हूँ, जो चाहो करो, मुझे कोई ऐतराज नहीं, जिसमे मेरे राज को खुशी मिलेगी, उसीमे मैं खुश रहूंगी. इससे ज्यादा और क्या कहूँ, कोर्ट पेपर पर एफीडेविट करने के लिए भी तैयार हूँ. अब तो ठीक है. ?

राज हँसने लगा , जिस्म में एक बार फिर गर्मी का संचार होने लगा. अब वह गाड़ी की रफ़्तार बढ़ा रहा था. वह स्वीटी का मादक यौवन का रस जल्दी से जल्दी चूमना चाहता था. स्वीटी भी समझ रही थी की उसका तीर सही निशाने पर लग रहा है, वह सोच रही थी की अगर एक बार राज को उसकी आदत लग गयी तो फिर वह दिन रात उसीकी बात करेगा .

uday narayan

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Sunday, December 27, 2009

मोहब्बत , भाग-६०

स्वीटी- वाव... कितनी प्यारी बात करते हो, कहाँ से सीखीं ये सब बातें ? मुझे लगता है की हर रोज तुम्हारे पास बैठना चाहिए, सुनना चाहिए और समझकर अमल करना चाहिए, तुम हर मामले में गज़ब की क्षमता रखते हो. तुमसे बहुत प्यार हो गया है.

राज- खुद मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है, रात को नींद हराम और दिन का सुकून गायब. मैंने सोच कर देखा की तुम्हारे बिना लाइफ जीकर देखता हूँ, मगर शायद अब ये सम्भव नहीं रहा. मोहब्बत का जो वायरस मेरे दिलो दिमाग में घुस गया है वह मेरी आत्मा में भी प्रवेश घुस गया है. दीवानगी से छाई है.

स्वीटी- सच ? आह , ये तो मेरे अपने शब्द हैं. मेरी अपनी भावनाएं हैं. मैं खुद ऐसे ही हालातों से दो चार हो रही हूँ, कल हम दोनों शराब के चक्कर में रह गए, पार्टी में ऐसा खुमार चढ़ा की फिर होटल में आँख ही मुंदने लगीं. तब यदि हम इतनी शराब नहीं पीते तो शायद ज्यादा इंजॉय कर पाते.

राज- मैं समझता हूँ की शराब पीना बुरी बात है लेकिन इसे कभी कभी पीना भी बुरा नहीं है , बशर्ते की वह लिमिट मात्रा में हो. सेक्स के बारे में भी अब मैं बहुत कुछ खुल गया हूँ और काफी कुछ नजरिया


भी बदल गया है. तुमसे मिलकर मैंने सोचा की इस छोटी सी जिंदगी में एक ही विचार को लेकर बैठना ठीक नहीं होगा, तभी मैंने अपने विचारों को नए सिरे से एडजस्ट करना शुरू कर दिया, यह एक नया अनुभव है, तुमसे मिलकर बहुत कुछ सीखने को मिला है.

स्वीटी जान गयी की अब राज मौज मस्ती के मूड में है, लोहा गर्म है, हथोड़ा मारने का समय है, उसने रोमांटिक होने के मूड में आने का भीने किया. राज की तरफ निगाहें तिरछी करके अदा से मुस्काते हुए बोली-

-आज बहुत हेंडसम लग रहे हो. मैंने तो अब तक देखा ही नहीं था, चेहरे की तरफ अब ध्यान दिया है. इरादा तो नेक है न ?

राज- ये तो तभी पता चलेगा जब अकेले में कहीं बैठकर बातें करेंगे. तुम बैठो गाड़ी में, एक जगह पर लेकर चलता हूँ, यहाँ मजा नहीं आएगा , यहाँ पर कुछ लोग जान पहचान वाले भी हैं. मैं चाहता हूँ की हम तुम साथ रहें तो कोई और पुछल्ला नहीं हो.

स्वीटी जान गयी की अब राज मौज मस्ती के मूड में है, लोहा गर्म है, हथोड़ा मारने का समय है, उसने रोमांटिक होने के मूड में आने का भीने किया. राज की तरफ निगाहें तिरछी करके अदा से मुस्काते हुए बोली-

.

स्वीटी- काश...... ऐसा हो पाटा . मगर इस शहर में ऐसी सुरक्षित जगह मिलेगी ?

राज- हाँ , क्यों नहीं. पहले डिस्को चलेंगे , थोड़ी सी पियेंगे . डांस करेंगे और फिर आराम से बैठकर प्यार मोहब्बत की बातें करेंगे.

स्वीटी- ठीक है . आज गाड़ी खुद ड्राइव करने का ख़याल है क्या ?

राज- जो भी बातें लीक होती हैं उनको ड्राइवर ही करते हैं. दूसरी बात ये है की आजकल ट्रेफिक पुलिस बहुत कड़ी चेकिंग करती है अगर पीकर पकडे गए तो जेल जाना भी पद सकता हैं , इस मजबूरी में ड्राइवर भी रखना पड़ता है. ये सबसे बड़ी उलझन है.

स्वीट-तो क्या आज पीनी की इच्छा को दबाना पड़ेगा ?

राज- नहीं यार , मैंने उसका भी रास्ता निकाल लिया है, थोड़ी सी पियूँगा जिससे की कोई तकलीफ ना हो, भले ही पुलिस ना पकडे मगर अपने हित के लिए भी ज्यादा पीकर गाड़ी चलाना ठीक नहीं है.

स्वीटी खामोश हो गयी , वह उसके बगल वाली सीट पर बिट गयी, राज ने अपना करतब दिखाना शुरू कर दिया , स्वीटी की गोलाइयों पर हाथ फिराते हुए वह उसे गर्म करने प्रयास करने लगा. स्वीटी के दिल में चिंगारियां भडकने लगीं. राज भी उत्तेजित हो रहा था, उसके मन में कामवासना के भाव उमड़ रहे थे, जब तक कोई युवा लड़का किसी लड़की के संपर्क में नहीं आता तभी तक वह अपने आपको रोक पाटा है. वरना एक बार जब वह संपर्क में आया तो सब कुछ फिनिश हो जाता है, इंसान का खुद पर काबू नहीं रह पाटा. वह दीवाना होकर रह जाता है.

Saturday, December 26, 2009

मोहब्बत के मसीहा , भाग-59

और इतनी बात होने के बाद राज की आँखें बंद होने लगीं। उसको या तो आ रही थी, या फ़िर वह जान बूझकर ये सब कर रहा था । स्वीटी समझ गयी की जबरदस्ती
करने से कोई लाभ होने वाला नहीं है। उसके लिए यह बात भी कम संतोष जनक नही था, हांलाकि रत काफी हो चुकी थी और उसने काफी पी भी राखी थी, मगर आखिरकार उसने जाने का फैसला किया. वेटर से बिल मंगवाया , गाड़ी बुलवाई , खुद बिल पैड किया और किसी तरह राज को बिठाकर रवाना हो गयी. पहले वह अपने घर गयी , टैक्सी का बिल अदा किया और इसके बाद उसने राज को छोड़ने की बात कहकर विदा हो गयी. उसके लिए इतना ही काफी था की अब राज उसके करीब आ चूका था और वह भविष्य में उसके साथ आराम से रात गुजार सकती थी. अगले दिन वह दोपहर बाद तक सोयी. जब नींद खुली तो घर में कोई मौजूद नहीं था, उसके सर दुःख रहा था, उसने तुरंत जिम का रुख किया. मोबाइल बंद ही था. अगले दिन जब उसने मोबाइल ओं किया तो उसे राज की आवाज सुनाई दी. एक क्लब में मिलने का मामला तय हुआ. मिलते ही वह राज से ऐसे लिपट गयी मानो बरसों पुराने बिछड़े हुए प्रेमी मिल गए हों. स्वीटी बोली-
-माफ करना , उस दिन मैं कुछ ज्यादा ही बहक गयी थी, शर्म की वजह से मैंने कल अपना मोबाइल भी बंद करके रखा था. सपना को फोन किया था मैंने ... बता रही थी की तुमने कई मेरे बारे में पुछा, शुक्रिया.
राज- इसमें शुक्रिया की क्या बात है, हम दोस्त हैं. एक दुसरे का ख़याल तो रखना ही होगा. नहीं तो और कौन रखेगा ?
स्वीटी- और कुछ सुनाओ , उस रात तुमने मुझे बहुत उपयोगी बातें सुनाई थीं, विचारों और सूचनाओं का आदान प्रदान करना जरूरी होता है, और उपयोगी भी। raaj -
-जब स्कूल की दहलीज पार कर कॉलेज पहुँचते हैं तो उन्हें वहाँ खुला माहौल मिलता है। जीवन के इस मोड़ पर अधिक खुला, खुशनुमा और कुछ-कुछ रोमांचक माहौल भी मिलता है। इस खुले माहौल के साथ कॉलेज कैम्पस में हर स्टूडेंट्‍स किसी दूसरे को अट्रेक्ट और इम्प्रेस करना चाहता है।यह बहुत स्वाभाविक भी है क्योंकि यही वह जगह है जहाँ नए-नए दोस्त मिलते हैं और नए संबंध बनते हैं। कई बार कुछ अलग अंदाज में, कुछ-कुछ रूमानियत में शुरू हुई यह दोस्ती जिंदगी भर के हमसफर से भी मिला देती है और कभी-कभी किसी ऐसे प्यारे दोस्त से भी जिसे जिंदगीभर याद रखा जा सके।इसलिए इन दिनों कॉलेज स्टूडेंट्‍स में डेटिंग का जबर्दस्त क्रेज है। हर कोई किसी को डेट पर ले जाना चाहता है लेकिन जो इतना क्रिएटिव होता है वह आसानी से किसी को डेट पर ले जा सकता है। कैंपस लाइफ स्टाइल का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है डेटिंग। फर्स्ट डेट के लिए प्रपोज करने हेतु आपका कुछ क्रिएटिव होना जरूरी है वरना बोरिंग और आजमाए हुए तरीके आपको हताश-निराश कर सकते हैं।इसलिए स्टूडेंट विनीत वाही कहते हैं कि फर्स्ट डेट के बारे में युवाओं में उत्सुकता होती है, लेकिन यह उत्सुकता ही कई बार इस फर्स्ट डेट को लास्ट डेट में बदल देती है। कई बार युवा फर्स्ट डेट पर सामने वाले शख्स से उसकी जिंदगी के बारे में कुछ ऐसे अनचाहे सवाल पूछ डालते हैं जो उनके दिल को ठेस पहुँचा देते हैं। इसलिए दूसरे के बीते जीवन में दखलंदाजी न कर हलकी-फुलकी बातें करना चाहिए। इसमें आप अपने सेंस ऑफ ह्यूमर का इस्तेमाल कर इम्प्रेस कर सकते हैं और डेट को बोरिंग होने से बचा सकते हैं। बेहतर होगा डेटिंग पर बातचीत की शुरुआत सामने वाले की हॉबीज और अन्य पसंदीदा चीजों पर की जाए। लेकिन डेट पर झूठ बोलने और बढ़ा-चढ़ाकर कुछ बात करने से बचना चाहिए। क्षितिज भूटानी कहते हैं कि आप किसी भी तरह के बनावटीपन से बचें। सबसे अच्छा यह है कि सरल व्यवहार करें और स्वाभाविक ढंग से मिलें।कई बार डेटिंग पर स्टूडेंट किसी की स्टाइल मारने के चक्कर में मामला बिगाड़ देते हैं। प्रतीक व्यास मानते हैं कि डेटिंग पर जाना बुरी बात नहीं है लेकिन अपनी किसी हरकत या बात से साथी को असुविधा में न डालें। तभी आपकी डेट कामयाब हो सकती है।आमतौर पर युवा खूबसूरत शख्स के साथ डेट पर जाना पसंद करते हैं लेकिन डेट पर जा रहे हैं तो उस शख्स के बारे में अच्छी तरह से जान-समझ लें। प्रपोज करने के पहले नर्वस न हों। खूबसूरती और कल्पनाशील तरीके से काम लें। शुरुआत प्यारी सी फ्‍लर्टिंग से करें। इजहार का कोई नया और अनूठा तरीका ईजाद करें। लुक पर ध्यान दें, कॉन्फिडेंट रहें। यदि कोई मना कर दे तो कूल रहें। बिना डिप्रेस हुए विदा लें।