Friday, July 22, 2011


तेलंगाना संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) द्वारा दिनभर के बंद से हैदराबाद सहित राज्य के अन्य नौ जिलों में जन-जीवन प्रभावित रहा। आंध्र प्रदेश सड़क परिवहन निगम की बसें नहीं चलीं। दुकानें व शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। जेएसी ने बंद का आयोजन सरकार के उस निर्णय के विरोध में किया है, जिसके तहत उसने तेलंगाना नेताओं को एम. यदी रेड्डी को श्रद्धांजलि देने की अनुमति नही दी। रेड्डी ने बुधवार को नई दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी।

रेड्डी का शव गुरुवार रात दिल्ली से यहां लाया गया था। शव को एम्बुलेंस से उनके पैतृक गांव पेडामंगलम ले जाया गया। पुलिस ने रेड्डी के शव की अगवानी करने हवाईअड्डे जा रहे तमाम तेलंगाना समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया था। जेएसी, राज्य कर्मचारियों के हड़ताल करने के अधिकार का हनन करने की सरकार की कोशिशों का भी विरोध कर रही है।

शैक्षणिक संस्थान, दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान शुक्रवार को बंद हैं। राजधानी में बंद की हिंसक शुरुआत हुई, और प्रदर्शनकारियों ने तड़के शहर के बाहरी हिस्सों में लगभग 20 बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप निगम ने अपनी सभी सेवाएं स्थगित कर दी।

पुलिस ने कहा कि गुंटूर से यहां आ रही बसों के चालकों व परिचालकों को प्रदर्शनकारियों द्वारा एल.बी. नगर में किए गए पथराव से चोटें आई हैं। सिकंदराबाद के बावनपल्ली में आठ बसें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि जीदिमेटला में प्रदर्शनकारियों ने एक निजी वाहन को निशाना बनाया। बंद के कारण बसों की शहरी सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं, जिसके कारण नागरिकों को भारी असुविधा हो रही है।

बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं, क्योंकि परिवहन निगम के कर्मचारी भी बंद में शामिल हो गए हैं। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व विद्यार्थियों के साथ डिपो के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

एहतियात के तौर पर शुक्रवार को सभी स्कूलों व कॉलेजों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है। पेट्रोल पंप और दुकानें भी बंद हैं। तेलंगाना में इस महीने यह दूसरा बंद है। इसके पहले पांच-छह जुलाई को दो दिनों का बंद आयोजित किया गया था।
भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब डेढ़ करोड मतदाताओं के नाम सूची से गायब है. मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने राज्य में आगामी विधान सभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा, ‘‘इन डेढ़ करोड़ मतदाताओं को खोज कर उनके नाम मतदाता सूची में डालना आयोग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. भारत में औसतन 61 फ़ीसदी आबादी 18 वर्ष की उम्र से ऊपर है. उत्तर प्रदेश में यह औसत केवल 54 फ़ीसदी पाया गया है. ’’

अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया है कि अधिकारियों के राजनीतिकरण की शिकायत खत्म हो जानी चाहिए और निष्पक्षता के साथ समझौता नहीं हो सकता.
एसवाई क़ुरैशी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि मतदाताओं को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. इसके अंतर्गत मोबाइल गाडियां चलाई जाएँगी जिनमें वोटर बनने के फ़ॉर्म भी होंगे.

इसी तरह लोगों को अधिक से अधिक संख्या में वोट डालने के लिए प्रेरित करने वाले अभियान टीवी चैनलों के माध्यम से चलाए जाएँगे.

इस तरह का पहला टीवी प्रचार अभियान क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी से शुरू कराया गया है. आयोग धोनी के अलावा स्थानीय लोकप्रिय कलाकारों को भी चुनाव आयोग का ब्रांड अम्बेसडर बनाएगा.

कब होंगे चुनाव

एसवाई कुरैशी और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारी विधान सभा चुनाव की तैयारियों के लिए दो दिन के लिए लखनऊ के दौरे पर आए थे.

इस दरम्यान आयोग ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश के सभी आठ प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की. इसके बाद आयोग ने ज़िला मजिस्ट्रेटों और मंडलायुक्तों के साथ बैठक की.


विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि राज्य में नौकरशाही का राजनीतिकरण हो गया है. कुरैशी के अनुसार आयोग ने राजनीतिक दलों की इस चिंता को नोट किया है.

उन्होंने बताया कि अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया है कि अधिकारियों के राजनीतिकरण की शिकायत खत्म हो जानी चाहिए और निष्पक्षता के साथ समझौता नहीं हो सकता.

लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके कि राज्य में चुनाव होंगे कब.

विधान सभा का कार्यकाल मई 2012 में खत्म हो रहा है. एसवाई कुरैशी ने बताया कि दो राजनीतिक दलों ने जनवरी - फ़रवरी में चुनाव कराने का सुझाव दिया है. इन दलों का कहना है कि अप्रैल मई में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है और कई तरह की परीक्षाएं होती हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि चुनाव का समय तय करने से पहले आयोग उन सभी पांच राज्यों का दौरा करेगा जहाँ अगले साल चुनाव होने हैं. उसके बाद ही तारीखें तय होंगी
मुंबई. बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम और बिपाशा बसु के बीच १० साल पुराने संबंध टूटने का अहम कारण अब सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार बिपाशा ने इस बार जॉन को शादी करने का अल्टिमेटम दिया था और उनके नकारने पर बिपाशा ने संबंध तोड़ लिए। हालांकि जॉन को अभी भी बिपाशा के लौटने का इंतजार है। जॉन अपनी तरफ से सुलह सफाई की पूरी कोशिश कर रहे हैं और हाल ही में सिमी ग्रेवाल के एक टीवी शो में उन्होंने विस्तार से बताया था कि बिपाशा का उनके जीवन में कितना महत्व है। जॉन मान रहे थे कि इससे बिपाशा प्रभावित होंगीं, लेकिन शो की एडिटिंग में पूरा विवरण कट गया। इससे वे काफी दुखी हैं।

जॉन को उम्मीद नहीं थी कि शादी का इंकार इस बार उनको इतना भारी पड़ने वाला है। वे पहले भी बिपाशा की शादी करने की मांग को ठुकरा चुके थे और इस बार भी उन्होंने इससे इंकार किया। लेकिन इस बार बिपाशा काफी गंभीर थीं और इंकार के बाद उन्होंने जॉन का घर छोड़ना उचित समझा। जॉन ने सिमी ग्रेवाल शो को शूट होने के बाद कहा कि वे बिपाशा के बारे में कहे गए एपिसोड को फिर से शूट करवाना चाहते हैं।

जॉन के करीबी लोगों ने कहा कि पहले जान ने दोनों के बीच में संबंध टूटने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने फिर किए गए शूट में बताया कि कैसे बिपाशा उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। कैसे, जब वे कुछ नहीं थे, बिपाशा ने उनका साथ दिया था। जॉन मान रहे थे कि इससे बिपाशा का मन बदलेगा और वे वापस लौटने के बारे में सोचेंगीं, लेकिन शो में इस पर बुरी तरह से कैंची चलाई गई।

सिमी ग्रेवाल ने कहा कि तकनीकी रूप से यह काफी मुश्किल है कि एक हिस्से को फिर शूट कर उसे मूल शूट में जोड़ा जाए। लेकिन जॉन उनके अच्छे दोस्त हैं और इसीलिए उन्होंने ऐसा करना स्वीकार कर लिया। लेकिन समय की कमी के कारण जॉन ने जो भी कहा था, उसे एडिट करना पड़ा।

नई दिल्ली. नोट के बदले वोट कांड में आज दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूर्व सपा नेता अमर सिंह से पूछताछ की। पूछताछ करीब सवा तीन घंटे तक चली जिसमें अमर सिंह से पुलिस ने करीब 12 सवालों के जवाब मांगे। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक पूछताछ के दौरान अमर सिंह ने संजीव सक्सेना और सुहेल हिंदुस्तानी द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी इस पूरे मामले में कोई भूमिका नहीं है।

क्राइम ब्रांच के अफसरों ने पूछा कि 'संजीव सक्सेना के साथ आपके क्या संबंध हैं? क्या सक्सेना को सांसदों के यहां आपका ड्राइवर लेकर गया था। पुलिस ने यह भी जानना चाहा कि क्या संजीव सक्सेना को आपने ही सांसदों से मिलवाया था? अमर सिंह ने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से कहा कि वह संजीव को जानते हैं। वह उनकी किसी एक कंपनी में शायद काम करता है। लेकिन अमर सिंह ने कहा कि वह कभी भी मेरे खास लोगों में शामिल नहीं रहा है और न ही वह संजीव से कभी मिले हैं।

अमर सिंह से एक फोन नंबर को लेकर सवाल पूछा गया। इस नंबर से 22 जुलाई, 2008 को पैसे के लेन-देन को लेकर बात हुई थी। पुलिस यह जानना चाहती थी कि यह फोन नंबर किसका है और किसने इस नंबर से बात की थी। पुलिस ने अमर सिंह से यह भी जानना चाहा है कि क्या पैसों को लेनदेन में इस नंबर का प्रयोग हुआ या इस नंबर का पैसों के लेनदेन में क्या संबंध है?

इसके अलावा अमर सिंह से 10 बैंक खातों के नंबर के बारे में सवाल पूछे गए, जिनसे पैसे निकाले गए थे। अमर सिंह से संसद में लहराए गए नोटों के बारे में पूछा गया कि उनके अकाउंट नंबर क्या थे और वे किस बैंक से निकाले गए थे? इसके जवाब में अमर सिंह ने यही कहा कि उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं मालूम है। अमर सिंह ने यह भी कहा कि यह मामला तीन साल पुराना है, ऐसे में उन्हें बहुत सारी चीजें याद भी नहीं हैं।

सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह से एक प्रश्न सांसदों के संबंधों को लेकर था। उनसे पूछा गया कि नोट कांड से सांसदों के क्या संबंध थे? अमर सिंह से उनके ड्राइवर संजय के बारे में भी पूछताछ की गई। सूत्रों के मुताबिक अमर सिंह ने इस पूरे मामले में अपने को पाक साफ बताया है। अमर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 2008 में विश्वासमत के दौरान बीजेपी के तीन सांसदों का वोट पाने के लिए उन्हें रिश्वत की राशि भेजी थी। सुहेल हिंदुस्तानी ने इससे पहले कहा था कि इस पूरे मामले में अमर सिंह मास्टर माइंड हैं।

सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच के अफसरों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अमर सिंह को पूछताछ के लिए दोबारा बुलाएंगे। तय कार्यक्रम के मुताबिक अमर सिं‍ह करीब 11 बजे चाणक्‍यपुरी स्थित क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे। इस दौरान उन्‍होंने मीडियाकर्मियों ने कोई बात नहीं की।

इस बीच, इसी मामले में गिरफ्तार हो चुके सुहेल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना को पांच अगस्‍त तक न्‍‍यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इससे पहले पुलिस ने इन दोनों को अदालत में पेश किया। अदालत जाते समय सुहेल ने मीडिया से बात करते हुए 'सत्य मेव जयते' के नारे लगाए और कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा है।

अमर सिंह के खिलाफ सबूत!
उधर, एक टीवी चैनल की खबर के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने संजीव सक्सेना से अमर सिंह के रिश्ते साबित करने के लिए पुख्ता सुबूत जुटा लिए हैं। अमर सिंह यह कहते रहे हैं कि वह संजीव सक्सेना को नहीं जानते हैं। दिल्ली पुलिस ने विश्वास मत के दिन 22 जुलाई, 2008 को संजीव सक्सेना की तरफ से अमर सिंह के घर पर की गई छह टेलीफोन कॉल का ब्योरा निकलवाया है। गौर करने वाली बात है कि 22 जुलाई 2008 को यूपीए 1 की सरकार को संसद में विश्वास मत का सामना करना था।

इसके अलावा पुलिस के हाथ एक चिट्ठी भी लगी है जो अमर सिंह ने अपने आधिकारिक लेटर हेड पर दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े एक कॉलेज के प्रिंसिपल को लिखी थी। इस चिट्ठी में अमर सिंह ने साफ-साफ लिखा है कि संजीव सक्सेना उनके सचिव हैं। पुलिस कॉलेज में पढ़ने वाले संजीव सक्सेना के बेटे से जुड़े अन्य दस्तावेज भी खंगाल रही है ताकि अमर सिंह और संजीव सक्सेना के संबंधों पर और सुबूत इकट्ठा किए जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट की सख्‍ती के बाद नोट के बदले वोट मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने सुहैल हिंदुस्तानी और संजीव सक्‍सेना को गिरफ्तार कर उन्‍हें रिमांड पर लिया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रह चुके सुहैल हिंदुस्तानी की इस डील में भूमिका बताई जा रही है। संजीव सक्सेना के पूर्व में अमर सिंह से रिश्ते रहे हैं और उसने ही एक करोड़ की रकम बीजेपी सांसद अशोक अर्गल के आवास 4 फिरोजशाह रोड पर पहुंचाई थी। सक्सेना जिस सफेद जिप्‍सी से बीजेपी सांसद अशोक अर्गल के घर पहुंचा था, वो कार मेसर्स पंकजा आर्ट एंड क्रेडिट के नाम रजिस्टर्ड है जो अमर सिंह की पारिवारिक कंपनी है। इस कंपनी का पता ग्रेटर कैलाश-2, ई-593 है जो अमर सिंह के निजी आवास का पता है। ये वे सारे सबूत हैं जो इस डील में अमर सिंह के रोल को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
गाजियाबाद।। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में एक नगर निगम पार्षद व बीएसपी नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनका शव यहां एक कार में मिला।

एसपी ( सिटी ) जे.के. शाही ने बताया कि सचिन चौधरी (35) का शव गुरुवार रात एक कार में मिला। शव पर पर गोलियों के निशान थे। गाड़ियों से इस्तेमाल की गईं दो गोलि यांबरामद हुईं।

मृतक के परिजनों ने कहा कि चौधरी को गुरुवार शाम करीब सात बजे किसी का फोन आया था। इसके बाद वह किसी से मिलने के लिए घर से निकल गए। एसपी सिटी ने बताया कि रात करीब नौ बजे पुलिस को एक कार में शव पड़े होने की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि चौधरी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। यह मामला रंजिश का लगता है लेकिन विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही मिल पाएगी।

इस बीच, एक अन्य घटना में कल मुरादनगर क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में भूपेंद्र कुमार नाम के एक विकलांग व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि उसका शव जंगल क्षेत्र से मिला। हत्या का मामला दर्ज कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।


आगरा, जागरण संवाददाता: अपने अजब फैसलों के लिए कुख्यात पंचायतों की फेहरिस्त में एक और मामला जुड़ गया। पंचायत में शादीशुदा एक बच्चे के पिता का हाथ पंचों ने उसकी प्रेमिका को थमा दिया। दोनों से बस्ती से बाहर जाकर अपना घर बसाने को कह दिया। पंचों के फैसले के खिलाफ पत्नी ने सवा माह की अबोध बच्ची के साथ पुलिस की शरण ली, तब कहीं जाकर प्रेमिका के परिजन उसे साथ ले गए।
नगला महादेव फ्रीगंज निवासी राशि पत्नी धनंजय (बदला नाम) गुरुवार सुबह थाने पहुंची। उसने बताया उसकी शादी दो साल पूर्व हुई। अब सवा माह की बेटी है। पति के बस्ती की अनीता (बदला नाम) से प्रेम संबंध हैं। प्रेमिका के दबाव बनाने पर बस्ती के कुछ लोगों ने मंगलवार सुबह पंचायत बैठाई और पति को बुलाया। वहां अनीता ने धनंजय से प्यार का इकरार किया। इसके बाद उनका हाथ एक दूसरे को देकर बस्ती से बाहर जाकर नई जिंदगी जीने का फरमान सुना दिया। वहां मौजूद ससुराल वालों ने निर्णय का विरोध किया, लेकिन पंचों ने उनकी एक न सुनी।
बीवी के परिजनों ने पकड़ा पति
प्रेमिका को लेकर गायब पति को गुरुवार तड़के पत्नी के परिजन पालीवाल पार्क से पकड़ने के बाद थाने ले आए। पुलिस ने मामला सुलझाने को प्रेमिका के परिजनों को बुलाया, लेकिन उन्होंने उससे किसी भी तरह का संबंध रखने से मना कर दिया। काफी समझाने पर उसे माफ करने को राजी हुए। इंस्पेक्टर हरीपर्वत अवधेश मिश्रा का कहना है दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद युवती को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
इनका कहना है
पति: प्रेमिका पिंड नहीं छोड़ रही। उसे कई बार समझाया। प्रेमिका ने पंचायत बुलाकर जबरन अपने पक्ष में फैसला करा लिया।
प्रेमिका: प्रेमी का हाथ पंचों ने थमाया है। फैसला करने से पहले उनको सोचना चाहिए था। उसकी जिंदगी बर्बाद होती है तो इसके जिम्मेदार पंच होंगे।
पत्नी: पत्नी और बच्चे के होने के बावजूद इस तरह का तुगलकी फैसला देने वाले पंच कौन होते हैं?

Thursday, July 21, 2011

26/11 के शहीद के साथ सरकार ने किया इंसाफ, बेटी को बनाया असिस्टेंट कमिश्नर


मुंबई. मुंबई पर हुए 26/11 के हमले में शहीद पुलिस अफसर विजय सलास्कार की बेटी दिव्या सलास्कार को सरकार ने आखिरकार नौकरी दे दी है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम के दखल देने के बाद सरकार ने दिव्या को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ सेल्स टैक्स का पद दिया है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि उन्होंने दिव्या से वादा किया था कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को मुंबई पब्लिक सर्विस कमिशन से बात करने को कहेंगे ताकि दिव्या को जल्द से जल्द नौकरी दी जा सके।

चिदंबरम ने इस मामले में तब दखल दी जब उन्हें पता चला कि मुंबई हमले में शहीद हुए विजय सलास्कार की बेटी को नौकरी देने का मामला दो सालों से लटका पड़ा है। चिदंबरम ने बताया कि आज सुबह ही उनके पास महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चव्हाण का फोन आया कि दिव्या को नौकरी दे दी गई है। गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर विजय सलास्कार के अलावा आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे और अशोक कामटे भी इस हमले में शहीद हुए थे।