Wednesday, July 14, 2010

प्यार , भाग-६५

अब वह सरपट दौडना चाहता था , वह झंकार को यह दिखाने के लिए बेताब हो रहा था कि अगर वह चाहे तो उसको रात भर इसी तरह से संतुष्ट कर सकता है. शुजात जान चुका था कि झंकार उसके लिए आरीपीएल का हाई पावर मुसली आयल लेकर आई है , ताकि उसे खास अंग पर लगाकर उसकी मालिस की जा सके , और इससे वह फिट होकर झंकार को सम्पूर्ण संतुष्टि प्रदान कर सके. उसने झंकार से पूछा-
-क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है ? क्या तुम्हें नहीं लगता कि मैं तुमको बिस्तर पर असली सुख दे सकता हूँ ?अगर हाँ तो फिर यह दवा लेकर क्यों आयी हो ? इसलिए तो नहीं कि तुम्हारे दिमाग में यह बात हो कि शराब पीने के आबाद मैं तुम्हे सम्पूर्ण सुख संतुष्टि नहीं दे सकता . क्या यह सच है झंकार ? देखो झूठ मत बोलना . सही बताना
झंकार- मुझे तुम पर यकीन है मेरीजान . मुसली पावर आयल का मतलब ये नहीं है कि इसे तभी इस्तेमाल किया जाए जब आदमी बीमार हो, कुछ ज्यादा मजा लूटने के लिए भी तो इसको प्रयोग में लाया जा सकता है . आजकल बहुत से लोग इसका उपयोग कर रहे हैं. मैं भी इसी उद्देश्य से इसलो लेकर आयी थी. इसके फायदे एहे फायदे हैं तकलीफ कुछ नहीं है . समझे. अब बोलो , काम करून या इसे हटाऊँ .
शुजात क्या कहता , सिर्फ मुस्कराके रह गया. झंकार उसकी मालिस करने लगी, बेहद उत्तेजक द्रश्य था. बेंतिहान कामुक. दोनों प्यासे प्रेमी एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे. शुजात अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहा था . वह जानता था कि फर्स्ट इम्प्रेशन ही लास्ट इम्प्रेशन होता है. इसलिए वह पहली बार में ही उस पर हावी होना चाहता था.उसको अपने इस कार्य में सहयोग भी मिल रहा था, उसको सहयोग करने वाला कोई और नहीं बल्कि उसकी बेड पार्टनर झंकार ही थी, वह चाहती थी कि शुजात उसे प्रेम क्रीडा की जंग में बुरी तरह से हरा डाले, क्योंकि उसकी हार ही उसकी जीत थी , इसीलिए वह शुजात का उत्साह बढाने के लिए कहने लगी-
- तुम बहुत पावरफुल हो , तुम्हारे ज़रा से स्पर्श से ही तन-मन में आग लग जाती है. बड़ा दुःख होता है, लेकिन तुमाहरे मजे के लिए मैं अपना दर्द जब्त कर लेती हूँ. करना ही पडेगा, तुम्हीने तो सिखाया है कि जितना दुःख लगेगा , आगे चलकर वह उतने ही बड़े सुख में तब्दील हो जाएगा. मुझे भरोसा और नाज है तुम्हारी मर्दानगी पर .
शुजात- मुझे गर्व है तुम्हारे सहयोग पर , तुम जैसा बेड पार्टनर मिलना शायद इस दुनिया में भी मुश्किल है क्योंकि तुम अपना दर्द भूलकर दूसरों के सुख की परवाह करती हो . मैं आज जितना खुश हूँ , उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता , अगर जिंदगी रही और सब कुछ ठीक रहा तो हम लोग इसी तरह मुलाक़ात करते रहेंगे.
झंकार- तुमसे जुडकर, तुम्हारा स्पर्श पाकर मैं धन्य हो गयी हूँ, आप जैसे विद्वान, बड़े अधिकारी और मिलनसार साथी भी ढूँढने से नहीं मिलते. आजकल तो बस नत्लाबी लोग होते हैं. जब आप मेरा इतना ख्याल रख सकते हैं तो मेरा भी कुछ फर्ज बंटा है , मेरे पास है ही क्या , सिवाय इस जिस्म के , और इसे भी मैं अब आपके नाम कर चुकी हूँ. दिल पर भी आपका नाम लिख चुकी हूँ मेरे पास अब मेरा कुछ नहीं है .
शुजात -तुम मेरे बारे में ऐसा सोचती हो, इसके लिए मैं आभारी हूँ और इस भार को कुछ कम करने के लिए मैं सोचता हूँ कि अपनी कंपनी में तुम्हारी नौकरी लगवा दी जाए, मैं तुम्हारे लिए एक नए पद का सर्जन करवा सकता हूँ, यह मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसका मैं इंडिया हैड हूँ, कंपनी का मालिक मुझ पर भरोसाकरता है. इस तरह से तुम्हें हमेशा के लिए एक परमानेंट नौकरी मिल सकती है. तुम कम से कम समय दोगी , तो भी चलेगा . इस तरह तुम्हें कंपनी की तरफ से एक घर भी मिल जाएगा और हम दोनों भी मिलते रहेंगे , नियमित रूप से मिलकर तुम्हें भी अच्छा लगेगा .
झंकार- यह मेरी खुशनसीबी है . मैं चाहूंगी कि हर क्षण आपके करीब बनी रहूँ .

Tuesday, July 13, 2010

प्यार , भाग-६४

उसको सोच के समुन्दर में हिचकोले खाते देखकर झंकार पूछ बैठी-

-किन ख्यालों में गुम हो, मैं तुम्हारे साथ हूँ , मगर तुम न जाने कहाँ हो ? क्या मुझसे खुश नहीं हो ?

शुजात- नहीं यार , ये बात नहीं है , दरअसल , मैं इस कामक्रीड़ा के बारे में अनजान हूँ , मुझे कुछ करना नहीं आता . कभी-कभी लगता है कि मै दुनिया से बहुत पीछे हूँ. ज़रा- जरा से लड़के सब कुछ जानते हैं , एक बार मैंने कहीं पढ़ा था कि बहुत बार मजाक में महिला मित्र एक दूसरे को तंग करने लगते हैं। ऐसा करने पर पुरुष अक्‍सर सेक्‍स के लिए उतेजित हो जाता है। अगर महिला ऐसा करके भी पुरूष को खुश न कर पाई तो संभव है कि वह सेक्स में रूचि न ले। सेक्स से कभी आशाएं नहीं पालनी चाहिए। यदि उम्मीदें एक बार जाग गईं तो बिना गंभीर प्रयत्‍न के उन्हें दूर करना बहुत कठिन होता है। कुछ पुरूष आलसी स्वभाव के कारण निश्‍िचत चीजों से प्रेम करते हैं। ऐसे में यदि महिलाएं सोचें कि सेक्स के लिए उनकी अनुमति की जरूरत नहीं है तो पुरूषों को लगेगा कि उन्हें पाना कोई चुनौती भरा काम नहीं है। जबकि ज्यादातर पुरूष चुनौती पसंद करते हैं। यदि महिला हमेशा पुरूष को संतुष्‍ट करने के लिए तैयार रहती है तो पुरुष उसे घर की खेती मानेगा। इसलिए महिला जब सेक्स के लिए तैयार न हो तो मना कर देना चाहिए ताकि पुरूष को ज्यादा कोशिश करनी पड़े। पुरूषों को अपने पुरूषत्व पर गर्व होता है। वे सोचतें हैं कि वह हमेशा ठीक काम करतें हैं। इसलिए महिलाओं को सदा यह बताने की कोशिश करनी चाहिए कि वह सही कर कर रहे हैं या गलत। उनकी सेक्स पॉवर, लिंग साइज, योग्यता आदि से संबंधित कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। संतुष्‍ट न होने पर भी ऐसी कोई बात न कहें जो उनको चोट करे या उन्हें बुरी लगे। जब पुरूष लगातार यह सोचता है कि वह महिला को संतुष्‍ट कर पाएगा या नहीं तब उसमें असुरक्षा की भावना आ जाती है। ऐसी स्थिति में वह सेक्स से परहेज करने लगता है। ऐसी स्थिति में महि‍लाएं उनकी प्रशंसा करके उसे बेहतर सेक्स के लिए प्रेरित कर सकती है। बिस्तर पर पुरूष से ऐसे वादे किसी कीमत पर नहीं करने चाहिए जो कि पूरे न हों। यदि आप उसकी रात को यादगार बना देने का वादा करके असफल रहती हैं तो संभव है कि वह सेक्स में रूचि न ले। उससे कम वादे करके उसे अधिक आनंद देकर आप उसे आश्‍चर्यचकित कर सकती हैं। ऐसा करके पुरूष की जिज्ञासा को बनाए रखा जा सकता है। वह अगली बार भी आपसे नए आश्‍चर्य की उम्मीद करेगा।अधिकतर महिलाएं सेक्स की सम्पूर्ण विधियों के बारे में सोचती हैं। यदि आप सेक्स की किसी एक विधि में निपुण हैं तो उसे हर तरह से करने का प्रयास करें। वह विधि साथी को बताकर उसे सेक्स के लिए उत्‍तेजित किया जा सकता है। अपने साथी से बात करके उसकी इच्छा जानकर महिलाएं इसे खबसूरती के साथ कर सकती हैं।

झंकार - तुम बहुत विद्वान हो जों अपनी महिला साथियों के बारे में इतना सोचते हैं , वरना आज का जमाना खाओ ,खुजाओ , बत्ती बुझाओ वाला है . जों तुम्हारी जीवन साथी बनेगी वह बहुत किस्मत वाली होगी .

शुजात- शुक्रिया यार , इतना अच्छा भी नहीं हूँ . जितनी कि तुम . तुम्हारी सुंदरता को देखकर तन -मन प्रसन्न हो जाता है , आँखों को शीतलता का अनुभव होता है . हमेशा देखते रहने को दिल करता है .

झंकार- थेक्स डीयर . तुमने जों पढ़ा वो बताया मगर मैं कोई दिक्कत करने वाली नहीं हूँ, कोई सवाल उठाने वाली नहीं हूँ. जैसे जी चाहो इस्तेमाल करो, यह तुम्हारा अपना जिस्म है . आज से मैंने अपने आपको तुम्हारे हवाले कर दिया है . मेरा दुनिया में सबसे अहम दोस्त अगर कोई है तो वो तुम हो .

शुजात- जितना प्यार तुमने इतने कम समय में दे दिया , इतना किसी महिला दोस्त ने आज तक नहीं दिया. मैं एहसानमंद हूँ अपने दोस्त जुबैद का, जिन्होंने तुमसे मिलवा दिया .

झंकार -आह, अब बातों से काम नहीं चलाया जाता. प्यासा बदन तरस रहा है , जैसे पानी की बूंदों के लिए जलता हुआ रेगिस्तान तरसता है .

शुजात इस आमंत्रण को सहन नहीं कर पाया, उसने झंकार को ठीक तरह से बिठाकर उसमे सामना शुरू कर दिया. झंकार पूरा साथ दे रही थी . उसकी कामोत्तेजक आवाजें शुजात को और भी ज्यादा उत्तेजक कर रही थीं.






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Monday, July 12, 2010

प्यार , भाग-६३
झंकार खुश हो गयी , बेताब तो थी ही. मगर खास बात ये थी कि वह शुजात को रोकने के बजाय उसका हौसला बढ़ा रही थी. उसको उत्साहित कर रही थी. शुजात
जुनूनी होकर अपने काम में लगा था , वह झंकार के नाजुक अंग को चूम रहा था , उसका संवेदनशील अंग भी अब तक हरकत में आ चूका था , झंकार कह रही थी-
- आह, ऐसा लगता है जैसे मैं किसी अनजाने नगर में आ गयी हूँ और वहां आकाश में उड़ने लगी हूँ . बिना पंखों के उड़ना बड़ा सुखद लग रहा है , मगर तुम्हारा स्पर्श मुझे
बेहद उत्तेजित कर रहा है . ऐसा लगता है जैसे मेरा अपने ऊपर से नियंत्रण खत्म हो चूका है. ऐसी बेताबी मत दो प्लीज . ऐसे मत करो . मुझे जमीन पर उतार लों .
शुजात- मैं खुद भी आज बेबस और बेताब सा हो गया हूँ , समजह में नहीं आता कि क्या किया जाए ? सचमुच मन में बड़ी आग सी लगी है , क्या तुम जानती हो , यह
कैसे बुझ पाएगी ? इसको बुझाना बहुत जरूरी हो गया है . वरना मेरी जान चली जायेगी, दुनिया समझेगी कि तुम मुझे यहां लेकर आयीं और फिर क़त्ल कर डाला .
झंकार- ऐसा नहीं होने दूंगी , कभी नहीं होने दूंगी. तुम क्या जानो तुम मेरे कौन हो ? मैं तो तुमको अपनी तकदीर मानती हूँ. मैं अपनी जान दे सकती हूँ लेकिन तुम पर कभी
आंच भी नहीं आने दूंगी . मैं ऐसी लड़की हूँ कि वफ़ा करती हूँ कभी दागा नहीं देती. दागा देना मेरी फितरत में नहीं है . आज तक कभी किसी मर्द के साथ प्रेम नहीं किया
, सच तो ये है कि प्रेम करने की फुर्सत ही नहीं मिली. जब खेलने -कूदने की उम्र थी तो यह जिम्मेदारी आ गयी कि कहीं से लाओ लेकिन घर के सभी सदस्यों के पेट में रोटी जानी चाहिए
, लोगों के घरों में काम करके या फिर मेहनत -मजदूरी करके किसी तरह जीवन को धकेला है. पढ़ने -लिखे , खेलने -कूदने का असली स्वाद तो चख ही नहीं पाईं.
शुजात -कोई बात नहीं डीयर ,सुख के इन मीठे पलों को खट्टी -मीठी यादों में मत खोइए . ये प्यार का सागर तुम्हारा इन्तजार कर रहा है , इसमें डूबकर सारे दर्द भुलादों . सब तकलीफें दूर कर डालो
, आओ , इन बांहों में समाकर दुनिया के सारे सुख भोग लों मेरी जान . आइन्दा मेरे सामने कभी कोई रोना मत रोना.
झंकार ने एक पल भी नहीं गंवाया , वह मदमस्त होकर उसकी बांहों में समा आगी, कुछ देर बाद ही उन दोनों के होठ एक दूसरे से सटकर प्रेम रस का स्वाद चख रहे थे. यह एक
दीर्घ चुम्बन था. इससे उन दोनों के शरीर सुलगने लगे . वे दोनों जल्दी से जल्दी अपने बदन की इस आग को शांत करना चाहते थे . झंकार अब शुजात की मजबूरी को समझ चुकी थी .
उसने तुरंत शुजात के नाजुक अंग पर एक तेल की मालिश कर दी, यह अंग विशेष को कड़क करने वाला तेल था. वह आहिस्ता- आहिस्ता मालिश करती जा रही थी और अंग अपने आप सख्त होता जा
रहा था. सिर्फ पांच मिनिट के प्रयास में ही वह उसका आकार मन माफिक करने मी कामयाब हो गयी . वह जानती थी कि जब मर्द ज्यादा शराब पी लेते हैं ति काम क्रिया के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं
रह जाते , इसी कारण वह पहले से ही अपने साथ उस तेल को लेकर आई थी . शुजात खुश हो गया. जैसे उसकी मन माँगी मुराद पूरी हो गयी हो. झंकार की समझदारी पर वह फ़िदा हो गया था.
वह उसके अंग- अंग को चूम रहा था , झंकार भी अब तक सक्रीय हो चुकी थी . लाज शर्म को खूंटी पर टांगकर उसने शुजात की प्रेम क्रीडा का जवाब उसीके अंदाज में देना शुरू कर दिया . शुजात खुश हो गया. उसने सुन रखा था
कि बिस्तर पर महिला पार्टनर को ज्यादा शर्म का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए वरना वह सुख नहीं मिलेगा जिसकी पुरुष चाहत रखते हैं . झंकार इन सब बातों पर खरी उतर रही थी , जब उसने ध्यान से झंकार के नग्न बदन को
देखा तो इस नतीजे पर पहुंचा कि उसकी २० हजार की फीस ज्यादा नहीं थी .उसका जिस्म इतना ज्यादा खूबसूरत था कि वह खुशी -खुशी ४० हजार भी चुका सकता था .

Sunday, July 11, 2010

प्यार , भाग-६३

प्यार , भाग-६२
झंकार भी मद मस्त होकर शुजात की बांहों में झूम गयी , उसे अब अपनी कोई सुध -बुध नहीं थी, उसने पूरी तरह से अपने आपको शुजात के हवाले कर दिया
था. शुजात रसिक तो था ही, उसको सौंदर्य का भी अच्छा ज्ञान था. झंकार की खूबसूरत देह उसके दिलो दिमाग में समा गयी . उसकी तारीफ़ करते हुए वह बोला-
-सुंदरता क्या होती है, यह आज मुझे पता चला है. ऐसा लगता है जैसे बनाने वाली शक्ति ने तुम्हें बहुत प्यार और ध्यान से बनाया है . एक -एक अंग इतना ज्यादा
आकर्षक है कि हमेशा -हमेशा के लिए इसी से लिपटने को जी चाहता है . दिल करता है कि तुम्हें अपनी आँखों में बसा लूं ताकि इच्छा होने पर एट ऐ टाइम तुम्हें देख सकूं
झंकार- यह मिट्टी की देह तुम्हारी है . यह मन भी तुम्हारा है शुजात बाबू, अगर कभी भी आवाज दोगे तो यह नाचीज दौडी-दौडी तुम्हारी खिदमत में चली आएगी , जिस
वक्त तुम बार के काउंटर पर फीस के २० हजार रुपये चूका रहे थे, उस समय तुम्हारे दिमाग में यह बात जरूर होगी कि आखिर मैं तुमसे प्यार करती हूँ तो तुमसे ये फीस
क्यों भरवा रही हूँ ? तुम सोचते होंगे कि ऐसा करने के बाद एक आम बारबाला और मुझमे क्या फर्क है ? सच बोलो, यही था न तुम्हारे मन में ? मैं भी मन की बातों
को पढ़ना जान गयी हूँ, इसलिए बोलती हूँ. ये सब हमारी मजबूरी है . यहाँ पर हम अपने दिल से कुछ भी नहीं कर सकते. हम बार मालिकों के दिए घर में रहते हैं. उनकी
दी हुई गाड़ी में घुमते हैं. उनके बार में रोजगार मिला हुआ है. सब कुछ उन्हीं पर तो टिका है . वे हमसे पहले ही एग्रीमेंट करवाके रखते हैं. अगर हमने उनकी शर्त नहीं मानी
तो समझिए कि हम गए काम से . तुम तो जानते ही हो ,इन लोगों की पहचान किस्से नहीं है ? क्या पुलिस , क्या गुंडे , क्या नेता , सब इनकी मेहमान नवाजी का लुत्फ़
उठाते हैं और वक्त पड़ने पर इनका साथ देते हैं. इनके साथ चालाकी नहीं कर सकते . अगर हमने बीमारी का बहाना किया तो इनके लोग हमारे पीछे पद जाते हैं. अगर कुछ
और बहाना बनाओ तो भी कुछ नहीं होता. कार का ड्राइवर भी इनका होता है . सब खबर देता रहता है . इसलिए सीधा रास्ता यही है कि अगर मैं तुम्हें पसंद हूँ और तुम मेरे
साथ रात गुजारना चाहते हो तो उनकी फीस उनके मुंह पर मार् दो और दिन भर , रात भर काम रस का लुत्फ़ उठाओ .
शुजात- ओह , आई सी, ऐसा होता है क्या ? ये तो एक तरह बंधक बनाना जैसा हो गया . तुहें तो पता ही होगा जुबैद मेरा दोस्त है जों इस बार का मालिक है . अगर मैं
उससे कहूँ तो सब प्रोब्लम सोल्व हो जायेगी. मैं आजाद करा दूंगा तुम्हें. तुम्हारा एग्रीमेंट फद्वाक्लर फेंक दूंगा.
झंकार- आप ऐसा कहते हो, मेरे प्रति इतनी अच्छी भावना रखते हो , इसके लिए शुक्रिया. मगर यह सब इतना आसान नहीं है . जुबैद अकेला मालिक नहीं है . एक नेता भी
तो इसमें पार्टनर है . वे दोनों मिलकर ही फैसला लेते हैं और धंधे को छोड़करऔर और किसी में रियायत कर सकते हैं. धंधे में तो वही करेंगे जों एक दसूरे के साथ पहले ही
अनुबंध कर चुके हैं. हमने यहाँ कई बार ऐसे लफड़े देखे हैं, इसलिए बता दिया है . पार्टनर बोलता है धंधे में अगर नरम दिल रखेंगे तो सड़क पर आना पड़ेगा .
शुजात- लेकिन मेरे बहुत एहसान हैं उस पर . इतना समझो कि शुरुआत में आधे से ज्यादा रकम मैंने उपलब्ध कराई थी जुबैद को, यह उस वक्त की बात है जब वह इसको
स्टार्ट कर रहा था . मैंने इससे पहले तो कभी उसे आजमाया नहीं मगर भरोसा है उस पर . बहुत मानता है मुझे. तुम फ़िक्र मत करो . अगर तुम चाहोगी तो मैं तुम्हें हर
संभव मदद करूँगा. अगर तुम्हारा दिल चाहता है कि तुम अपने घर जाओ, तो मैं ऐसा इंतजाम करा सकता हूँ. एग्रीमेंट गया तेल लेने.
झंकार खुश होकर उछल पडी और उसके गले से लिपट गयी . इस वक्त वह पूरी तरह से नग्न अवस्था में थी. उसकी पर्वत चोटियाँ शुजात के सीने में चुभकर
आग लगा रहा थीं, उसकी लपटें शुजात के समूचे बदन को झुलसा रही थीं. शुजात ने उसको सीधा लिटा दिया और उसे सिर से लेकर पाँव तक चूमने लगा .
झंकार बेकरार होने लगी . वह कभियो-कभी उछल जाया करती . अचानक बीच में आकार शुजात रुक गया और एक खास हिस्से को चूमने लगा

tiwari lallan

इंदौर/पीथमपुर. यूनियन कार्बाइड का 40 टन कचरा जिस तरह चोरी-छिपे पीथमपुर लाया गया वह गलत है। मैं इस गलती को स्वीकारता हूं। यह मेरे मंत्रालय की गलती है, मैं उस समय मंत्री नहीं था मगर मेरे मंत्रालय को इसका ध्यान रखना था।

जिस तरह पहले कचरा लाया गया था अब इस तरह दोबारा नहीं होगा। जो हुआ उसके लिए मैं कान पकड़कर क्षमा चाहता हूं।यह कहना है केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जयराम रमेश का।

दो दिनी प्रवास पर आए श्री रमेश शनिवार को पीथमपुर में रामकी के प्लांट पर दौरा करने पहुंचे थे। रमेश ने एयरपोर्ट पर भास्कर से हुई विशेष चर्चा में माना कि यहां प्लांट लगाने के पहले जो माहौल तैयार करना था वह राज्य सरकार ने नहीं किया। पहले जनता को विश्वास में लेना था, यहां पर कुछ भी करने से पहले अब जनता को जोड़ना होगा।

जब कंपनी का झूठ खुला- रामकी प्लांट में सांसद गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी, नपा अध्यक्ष देवेंद्र पाटीदार ने रमेश को चर्चा में बताया कि प्लांट से लगे तारपुरा गांव और आसपास का पूरा पानी प्रदूषित हो गया है। इस पर कंपनी ने विरोध किया कि हम पानी की मॉनीटरिंग करते रहते हैं, इससे जनप्रतिनिधि भड़क गए।

राजूखेड़ी ने राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की उस रिपोर्ट को मंत्री के सामने रख दिया जिसमें 2007 और 2009 के बीच हुई पानी की जांच के नमूनों की जानकारी थी।

कमेटी करेगी चार महीने में कंपनी का फैसला

यहां मौजूद कुछ ग्रामीणों ने भी श्री रमेश को बताया कि कई लोगों को चर्मरोग हो गया है। जमीन खराब हो गई है, जानवरों की मौत हो रही है। श्री रमेश ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक कमेटी बनाकर कंपनी के कारण पर्यावरण को हुए नुकसान की जांच करने के आदेश जारी कर दिए।

इस कमेटी के लिए उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग आलोक श्रीवास्तव को कहा कि इसमें ग्रामीणों को भी शामिल किया जाए। कमेटी चार महीने में रिपोर्ट देगी, उसके बाद ही इस प्लांट के बारे में फैसला किया जाएगा।

मजदूरों के घायल होने को भी छुपाती रही कंपनी

श्री रमेश को रामकी के अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्लांट में सुरक्षा संबंधी सभी उपाय किए गए हैं, यहां कर्मचारियों को पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। इस पर जनप्रतिनिधि और रहवासी भड़क गए, उन्होंने केंद्रीय मंत्री के सामने ही कंपनी के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। आठ दिन पहले कंपनी में हुए एक्सीडेंट में घायल सात कर्मचारियों के बारे में उन्होंने रमेश को पूरी बात बताई।

रात के अंधेरे में 27 जून 08 को आया था कचरा

पीथमपुर के रामकी संयंत्र में भोपाल से यूनियन कार्बाइड का कचरा 27 जून 2008 को आया था। रात में दो बजे 40 टन कचरा कंटेनरों में भरकर भोपाल से पीथमपुर के लिए रवाना किया गया था। इसका खुलासा सात महीने बाद उस समय हुआ था जब पार्लियामेंट्री कमेटी यहां दौरा करने आई थ

Saturday, July 10, 2010

प्यार , भाग-६१

अब तुम भी तो मेरी खासमखास दोस्त बन चुकी हो. तुमने तो ऐसा कमाल कर दिया है. थोड़ी देर में ही मेरे दिल को मुझसे छीन लिया है. अब मैं बार-बार यहाँ तक कि हर बार तुमसे मिलना चाहूँगा .
झंकार- ये रोमांस क्या होता है ? मुझे बताओ न . आपको बता ही चुकी हूँ, बंगाल के एक गाँव की रहने वाली हूँ, अग्रेजी ज्यादा समझ में नहीं आती. डिटेल में बताओ तो जानूं.
शुजात- रोमांस शब्द के मायने पुराने समय से आज तक काफी बदले हैं मगर सच है कि आज भी यह शब्द एक खूबसूरत एहसास से भर देता है। रूह में एक खुशबू सी उतरती चली जाती है और सहेजकर रखे पुराने खतों को फिर से पढ़ने को जी करने लगता है। एक बहुअर्थी शब्द है रोमांस, जिसका शाब्दिक अर्थ हो सकता है कल्पना। एक प्यारी सी कोई बात, मीठी छेड़छाड़ जो तन-मन में स्पंदन जगाकर रोम-रोम पुलकित कर दे, मन में जोश और उत्साह भरकर जीने की इच्छा बढ़ा दे। यह सिर्फ एक अहसास है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। इसे सिर्फ दिल की गहराइयों से ही महसूस किया जा सकता है।
रोमांस की उत्पत्ति कब और कहाँ हुई, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। पहले-पहल इसका आम जीवन से कोई ताल्लुक नहीं था, राजा-रानियों की प्रेम कथाओं में इसका हल्का-फुल्का जिक्र होता था। फिर लिखित साहित्य आया। उसके बाद फिल्मों में रोमांस के हर पहलू का खूब खुलकर फिल्मांकन किया गया।
पहले रोमांचक कहानियाँ या उपन्यास पढ़ना, फिल्में देखना अच्छा नहीं समझा जाता था, रोमांस की तो बात ही दूर थी। यह सचमुच कल्पना ही था। इसलिए आम आदमी हमेशा हिचक के घेरे में रहा। वह रोमांस के रोमांच से अभिभूत तो रहा, मगर न तो उसे खुलकर स्वीकार सका और न महसूस कर सका।
रोमांस एक चुंबकीय आकर्षण है, इसलिए इसने इतनी जल्दी सबको अपने सम्मोहन में जकड़ लिया है। अकेलेपन की उदासियों में रोमांस ही है, जो जीवन में रंग भरने लगा है।
रोमांस एक अहसास है जिसकी गहराई को सिर्फ महसूस किया जा सकता है। किसी प्रिय से निगाहे मिलने पर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और तन-मन में स्पंदन सा महसूस होता है, इसे ही तो रोमांस कहते हैं। रोमांस शब्दों का मोहताज नहीं है, यह आँखों और इशारों की भाषा खूब समझता है। रोमांस के बिना प्रेम का अस्तित्व नहीं होता। जैसे मुझे देखते ही तुम अपना दिल हार बैठीं और मुझे अपना तन समर्पित करने को तैयार हो गयी, तो यह प्यार का पहला पड़ाव भी कहलाता है.
प्रेम की डगरिया का नाम है रोमांस। प्रेम अगर मंजिल है तो रोमांस पगडंडी, जो प्रेम की परिपक्वता प्रदान करती है। यह कोई जरूरी नहीं कि जिससे आप प्रेम करते हों वह भी आपसे उतनी शिद्दत से प्रेम करता हो। रोमांस प्रेम में तभी परिवर्तित होता है जब एक-दूसरे के प्रति रोमांस के भाव दोनों के मन में जागे वर्ना कामनाएँ सिर्फ रोमांस बनकर रह जाती हैं। रोमांस दो चाहने वालों को एक-दूसरे के करीब लाने, उनमें प्रेम जगाने का एक माध्यम है।
रोमांस का अर्थ केवल प्यार-मोहब्बत और दैहिक संसर्ग नहीं, बल्कि रोमांस का अर्थ है अपने लक्ष्य को पाने के लिए निष्ठा व प्रेम। कोई भी व्यक्ति अपने मकसद को तब तक नहीं पा सकता जब तक उसके अंतर्मन में उस काम से प्यार और उसे कर पाने की इच्छा और लगन नही होगी। रोमांस एक तड़ित तरंगित गतिमयता है, दीवानगी है, एक पागलपन, एक सिरफिरापन है। इसके बाद ही कलाकार व दीवानों को अपने उद्देश्य की प्राप्ति होती है।
पुराने समय का रोमांस शायद कही अधिक रोमांटिक था, लुक-छिपकर एक-दूसरे को निहारना, लंबी सैर पर निकल जाना, कॉफी की चुस्कियाँ लेना और एक-दूसरे का हाथ पकड़ना आदि। स्पर्श के इस रोमांच को प्रेमी युगल कई दिनों तक नहीं, महीनों-सालों तक महसूस करते थे।
। प्रेम और रोमांस दोनों एक-दूसरे के पूरक है। इनके बिना जीवन ऐसे रेगिस्तान के समान है, जहाँ कभी कुछ नही खिल सकता .
कहते- कहते शुजात हांफने लगा. उसके जिस्म कामवासना से भर गया था. दिल में जबरदस्त हिलोरें उठ रही थीं. उसने एक ही झटके में झंकार को अपने ऊपर गिरा लिया, उसके कपडे उतार कर एक तरफ उछाल दिए और उसके पहाड़ी क्षेत्र को सहलाने लगा, उसके होठों को चूमने लगा. उसका बदन पत्ते की तरह काँप रहा था, झंकार का सुडौल बदन उसको बहुत ज्यादा गर्मी प्रदान करने लगा. यहाँ तक कि उसकी साँसें फूलने लगीं. झंकार आह-ऊह करके अपने उत्तेजना का प्रदर्शन कर आरही थी. इससे शुजात और ज्यादा कामोत्तेजित हो रहा था.